((مَا مِنْ عَبْدٍ يُذنِبُ ذَنْباً فَيُحْسِنُ الطُّهُورَ، ثُمَّ يَقُومُ فَيُصَلِّي رَكْعَتَيْنِ، ثُمَّ يَسْتَغْفِرُ اللَّهَ إِلاَّ غَفَرَ اللَّهُ لَهُ)).
उच्चारण:
(वुज़ू, 2 रकात नमाज़ और इस्तिग़फार — कोई तय अल्फ़ाज़ नहीं)
हिंदी अर्थ:
जो भी बंदा कोई गुनाह कर बैठे, फिर अच्छी तरह वुज़ू करे, फिर उठकर दो रकात नमाज़ पढ़े, और फिर अल्लाह से माफी मांगे, तो अल्लाह उसे ज़रूर बख्श देता है।
गुनाह के बाद वुज़ू और 2 रकात नमाज़ पढ़ना