((الْأَذْكَارُ وَقِرَاءَةُ الْقُرْآنِ)).
उच्चारण:
(कुरान की तिलावत और अज़कार — कोई एक तय दुआ नहीं)
हिंदी अर्थ:
शैतान से बचने का तीसरा तरीका: कुरान की तिलावत और सही अज़कार-दुआएं पढ़ना — नबी ﷺ ने फ़रमाया: "अपने घरों को कब्रिस्तान मत बनाओ, बेशक जिस घर में सूरह बकराह पढ़ी जाती है उससे शैतान भाग जाता है।" इसमें सुबह-शाम, सोने से पहले, जागने पर, बाथरूम व मस्जिद में आने-जाने, आयतुल कुर्सी और सूरह बकराह की आखिरी आयतें, अज़ान वगैरह के अज़कार शामिल हैं।
कुरान-ज़िक्र से शैतान से बचाव