((لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ، وَحْدَهُ لاَ شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ)) (مائةَ مرَّةٍ إذا أصبحَ).
उच्चारण:
ला इलाहा इल्लल्लाहु वह्दहू ला शरीक लह, लहुल मुल्कु व लहुल हम्द, व हुवा अला कुल्लि शैइन क़दीर।
हिंदी अर्थ:
अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं, बादशाहत उसी की है और तारीफ़ भी उसी की है, और वह हर चीज़ पर कादिर है। (रोज़ाना सुबह 100 बार पढ़ें — यह पढ़ने वाले के लिए 10 गुलाम आज़ाद करने जितना सवाब मिलता है, 100 नेकियां लिखी जाती हैं और 100 गुनाह मिटा दिए जाते हैं)
तौहीद का कलिमा (100 बार)