قَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم: ((إِذَا كَانَ أَحَدُكُم مَادِحاً صَاحِبَهُ لاَ مَحَالَةَ فَلْيَقُلْ: أَحْسِبُ فُلاَناً وَاللَّهُ حَسِيبُهُ، وَلاَ أُزَكِّي عَلَى اللَّهِ أَحَداً، أَحْسِبُهُ – إِنْ كَانَ يَعْلَمُ ذَاكَ – كَذَا وَكَذَا)).
उच्चारण:
अह्सिबु फ़ुलानव् वल्लाहु हसीबुहू, वला उज़क्की अ़लल्लाहि अहदा, अह्सिबुहू कज़ा व कज़ा।
हिंदी अर्थ:
नबी ﷺ ने फ़रमाया: अगर तुम में से किसी को अपने भाई की तारीफ़ करनी ही पड़े, तो कहे: मेरे ख्याल में फलां शख्स ऐसा है, और अल्लाह ही उसका हिसाब लेने वाला है, मैं अल्लाह के मुक़ाबले में किसी की पाकीज़गी का दावा नहीं करता, मेरे ख्याल में वह ऐसा-ऐसा है — अगर वाकई उसे उसके बारे में पता हो।
किसी मुस्लिम की तारीफ़ करने का सही तरीका