((اللَّهُمَّ أَسْلَمْتُ نَفْسِي إِلَيْكَ، وَفَوَّضْتُ أَمْرِي إِلَيْكَ، وَوَجَّهْتُ وَجْهِي إِلَيْكَ، وَأَلْجَأْتُ ظَهْرِي إِلَيْكَ، رَغْبَةً وَرَهْبَةً إِلَيْكَ، لاَ مَلْجَأَ وَلاَ مَنْجَا مِنْكَ إِلاَّ إِلَيْكَ، آمَنْتُ بِكِتَابِكَ الَّذِي أَنْزَلْتَ، وَبِنَبِيِّكَ الَّذِي أَرْسَلْتَ)).
उच्चारण:
अल्लाहुम्मा अस्लम्तु नफ़्सी इलैक, व फ़व्वज़्तु अम्री इलैक, व वज्जह्तु वज्ही इलैक, व अल्जअ्तु ज़ह्री इलैक, रग़्बतव् व रह्बतन इलैक, ला मल्जअ व ला मन्जा मिन्क इल्ला इलैक, आमन्तु बिकिताबिकल्लज़ी अन्ज़ल्त, व बिनबिय्यिकल्लज़ी अर्सल्त।
हिंदी अर्थ:
ऐ अल्लाह! मैंने अपनी जान तेरे सुपुर्द कर दी, अपना मामला तेरे हवाले कर दिया, अपना चेहरा तेरी तरफ मोड़ लिया, और अपनी पीठ तेरे ही सहारे लगा दी — तेरी उम्मीद में भी और तेरे डर में भी। तुझसे बचने की कोई जगह नहीं, तेरे सिवा कोई पनाह नहीं, सिवाय तेरी ही तरफ। मैं तेरी उस किताब पर ईमान लाया जो तूने उतारी, और तेरे उस नबी पर जिसे तूने भेजा। (अगर इसी रात मौत आ जाए तो इंसान फितरत यानी इस्लाम पर मरता है)
जान अल्लाह के सुपुर्द करने की मुकम्मल दुआ