वज्जहतु वजही की दुआ
नमाज़ की दुआएं
((وَجَّهْتُ وَجْهِيَ لِلَّذِي فَطَرَ السَّمَوَاتِ وَالأَرْضَ حَنِيفَاً وَمَا أَنَا مِنَ الْمُشْرِكِينَ، إِنَّ صَلاَتِي، وَنُسُكِي، وَمَحْيَايَ، وَمَمَاتِي لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ، لاَ شَرِيكَ لَهُ وَبِذَلِكَ أُمِرْتُ وَأَنَا مِنَ الْمُسْلِمِينَ. اللَّهُمَّ أَنْتَ المَلِكُ لاَ إِلَهَ إِلاَّ أَنْتَ، أَنْتَ رَبِّي وَأَنَا عَبْدُكَ، ظَلَمْتُ نَفْسِي وَاعْتَرَفْتُ بِذَنْبِي فَاغْفِرْ لِي ذُنُوبي جَمِيعَاً إِنَّهُ لاَ يَغْفِرُ الذُّنوبَ إِلاَّ أَنْتَ. وَاهْدِنِي لِأَحْسَنِ الأَخْلاقِ لاَ يَهْدِي لِأَحْسَنِها إِلاَّ أَنْتَ، وَاصْرِفْ عَنِّي سَيِّئَهَا، لاَ يَصْرِفُ عَنِّي سَيِّئَهَا إِلاَّ أَنْتَ، لَبَّيْكَ وَسَعْدَيْكَ، وَالخَيْرُ كُلُّهُ بِيَـــــــدَيْكَ، وَالشَّـــــرُّ لَيْسَ إِلَيْــــــكَ، أَنَا بِكَ وَإِلَيْكَ، تَبارَكْتَ وَتَعَالَيْتَ، أَسْتَغْفِرُكَ وَأَتوبُ إِلَيْكَ)).
उच्चारण:
वज्जह्तु वज्हिय लिल्लज़ी फ़तरस्समावाति वल अर्ज़ हनीफ़व् व मा अना मिनल मुश्रिकीन, इन्न सलाती व नुसुकी व मह्याय व ममाती लिल्लाहि रब्बिल आलमीन, ला शरीक लहू व बिज़ालिक उमिर्तु व अना मिनल मुस्लिमीन। अल्लाहुम्मा अंतल मलिकु ला इलाहा इल्ला अंत, अंत रब्बी व अना अब्दुक, ज़लम्तु नफ़्सी वअ्तरफ़्तु बिज़म्बी फ़ग़्फ़िर ली ज़ुनूबी जमीअ़न इन्नहू ला यग़्फ़िरुज़्ज़ुनूबा इल्ला अंत। वह्दिनी लिअह्सनिल अख़्लाक़ि ला यह्दी लिअह्सनिहा इल्ला अंत, वस्रिफ़ अन्नी सय्यिअहा ला यस्रिफ़ु अन्नी सय्यिअहा इल्ला अंत, लब्बैक व सअ्दैक, वल ख़ैरु कुल्लुहू बियदैक, वश्शर्रु लैस इलैक, अना बिक व इलैक, तबारक्त व तआलैत, अस्तग़्फ़िरुक व अतूबु इलैक।
हिंदी अर्थ:
मैंने अपना चेहरा उस ज़ात की तरफ मोड़ लिया जिसने आसमानों और ज़मीन को पैदा किया, एक तरफा उसी की तरफ झुका हुआ, और मैं मुशरिकों में से नहीं। बेशक मेरी नमाज़, मेरी क़ुर्बानी, मेरा जीना और मेरा मरना सब अल्लाह रब्बुल आलमीन के लिए है, उसका कोई शरीक नहीं, और मुझे इसी का हुक्म दिया गया है, और मैं मुसलमानों में से हूं। ऐ अल्लाह! तू ही बादशाह है, तेरे सिवा कोई माबूद नहीं, तू मेरा रब है और मैं तेरा बंदा हूं, मैंने अपनी जान पर ज़ुल्म किया और अपने गुनाह का इकरार करता हूं, तो तू मेरे सारे गुनाह बख्श दे, क्योंकि गुनाहों को तेरे सिवा कोई नहीं बख्शता। और मुझे बेहतरीन अख़लाक़ की हिदायत दे, क्योंकि उसकी तरफ तेरे सिवा कोई हिदायत नहीं देता, और मुझसे बुरे अख़लाक़ को दूर कर, क्योंकि उसे तेरे सिवा कोई दूर नहीं कर सकता। मैं हाज़िर हूं, तेरी खिदमत में खुश हूं, सारी भलाई तेरे ही हाथ में है, और बुराई तेरी तरफ मंसूब नहीं। मैं तेरे ही सहारे हूं और तेरी ही तरफ लौटूंगा। तू बाबरकत और बुलंद है, मैं तुझसे माफी मांगता हूं और तेरी तरफ तौबा करता हूं।
वज्जहतु वजही की दुआ (नमाज़ शुरू में)

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