व्यापार यात्राएं और परिश्रम की ज़िंदगी
निजी ज़िंदगी
किशोरावस्था में नबी सल्ल० का कोई निश्चित पेशा नहीं था, अलबत्ता आप बनू साद और मक्का दोनों जगह बकरियां चराया करते थे। जवान होने पर आप व्यापार की ओर मुड़े और साइब बिन यज़ीद मख़्ज़ूमी के साथ बेहतरीन साझेदारी में व्यापार किया, जिसकी याद ख़ुद साइब ने मक्का-विजय के दिन नबी सल्ल० से मुलाक़ात होने पर ताज़ा की।
पूरी कहानी:
अपनी किशोरावस्था में अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का कोई तयशुदा पेशा नहीं था, अलबत्ता यह बात प्रमाणित है कि आप बकरियां चराया करते थे, पहले बनू साद में और बाद में मक्का में भी, जहां मक्का वासियों की बकरियां कुछ मेहनताना (क़ीरात) लेकर चराते थे। जवान होने पर आप व्यापार की ओर मुड़ गए, क्योंकि रिवायत में आता है कि आप साइब बिन यज़ीद मख़्ज़ूमी के साथ साझेदारी में व्यापार किया करते थे और यह साझेदारी बड़ी साफ़-सुथरी थी, न कोई हेर-फेर होता था, न कोई झगड़ा। यही साइब मक्का-विजय के दिन जब आपके सामने आए, तो नबी सल्ल० ने उन्हें ख़ुशी से मरहबा कहा और फ़रमाया, मेरे भाई और मेरे व्यापारिक साझेदार को मरहबा। पच्चीस साल की उम्र में आपने हज़रत ख़दीजा रज़ियल्लाहु अन्हा का व्यापारिक माल लेकर शाम देश की यात्रा की। हज़रत ख़दीजा एक प्रतिष्ठित, धनी व व्यापारी महिला थीं, जो लोगों को मुनाफ़े में हिस्सेदारी की शर्त पर अपना माल व्यापार के लिए सौंपती थीं। जब उन्हें नबी सल्ल० की सच्चाई, अमानतदारी और उत्तम चरित्र की ख़बर मिली, तो उन्होंने संदेश भेजकर प्रस्ताव रखा कि वे अपना माल लेकर उनके दास मैसरा के साथ शाम देश जाएं, और उन्हें दूसरे व्यापारियों से बेहतर मेहनताना देने का वादा किया। नबी सल्ल० ने यह प्रस्ताव स्वीकार किया और सफलतापूर्वक व्यापार कर मक्का लौटे।

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