क़ुरैश के दिल में नबी सल्ल० को ख़त्म करने का ख़याल पकने लगा। एक बार उक़्बा बिन अबी मुऐत ने काबा के पास नमाज़ पढ़ते वक़्त आपका गला कपड़े से घोंट दिया, जिससे हज़रत अबूबक्र रज़ि० ने बीच में आकर बचाया। एक अन्य मौक़े पर पूरी भीड़ ने घेरकर हमला किया और चादर खींचकर गला दबाने की कोशिश की, तब भी अबूबक्र रज़ि० ने अपनी जान पर खेलकर नबी सल्ल० को बचाया।
पूरी कहानी:
क़ुरैश के ज़ुल्म व सितम बढ़ते-बढ़ते अब यहां तक पहुंच गए कि उनके दिलों में नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को हमेशा के लिए ख़त्म कर देने का ख़याल पकने लगा। हज़रत अब्दुल्लाह बिन अम्र बिन आस रज़ि० बयान करते हैं कि एक बार मुशरिक हतीम में जमा होकर कह रहे थे कि हमने इस आदमी के मामले में जितना सब्र किया है, उसकी मिसाल नहीं मिलती। इसी बीच नबी सल्ल० आ गए, हजरे अस्वद को चूमा और तवाफ़ करते हुए मुशरिकों के पास से गुज़रे। पहली और दूसरी बार गुज़रने पर उन्होंने लान-तान की, तीसरी बार आप ठहर गए और फ़रमाया, क़ुरैश के लोगो, सुन रहे हो? उस ज़ात की क़सम जिसके हाथ में मेरी जान है, मैं तुम्हारे पास ज़िब्ह (क़त्ल) लेकर आया हूं, यह सुनकर लोग इतने सहम गए कि जो सबसे सख़्त था, वह भी नरमी से बात करने लगा। लेकिन दूसरे दिन जब क़ुरैश दोबारा जमा हुए और नबी सल्ल० सामने आए, तो सब एक साथ आप पर टूट पड़े और घेर लिया, एक आदमी ने आपकी चादर गले के पास से पकड़कर बल देना शुरू कर दिया। इसी वक़्त हज़रत अबूबक्र सिद्दीक़ रज़ि० दौड़ते हुए आए, उस आदमी के कंधे पकड़कर धक्का दिया और रोते हुए कहा, क्या तुम लोग एक आदमी को सिर्फ़ इसलिए क़त्ल कर रहे हो कि वह कहता है मेरा रब अल्लाह है? इस पर भीड़ नबी सल्ल० को छोड़कर हज़रत अबूबक्र रज़ि० पर पिल पड़ी और उन्हें बुरी तरह पीटा, यहां तक कि उनके सिर के बाल तक नोच लिए गए। एक और घटना में उक़्बा बिन अबी मुऐत ने काबा के पास हतीम में नमाज़ पढ़ते वक़्त अचानक आकर अपना कपड़ा नबी सल्ल० की गर्दन में डालकर बड़ी सख़्ती से गला घोंटना शुरू कर दिया, इतने में हज़रत अबूबक्र रज़ि० दौड़कर पहुंचे, उक़्बा के दोनों कंधे पकड़कर धक्का देकर उसे नबी सल्ल० से दूर किया, और फिर वही जुमला दोहराया कि क्या तुम एक आदमी को सिर्फ़ इसलिए क़त्ल करोगे कि वह कहता है मेरा रब अल्लाह है। हज़रत अब्दुल्लाह बिन अम्र रज़ि० इसे मुशरिकों की सबसे बड़ी पीड़ादायक हरकत बताते हैं, जो उन्होंने कभी नबी सल्ल० के साथ की।