सूरह अत-तकासुर سورة التكاثر
मक्की 8 आयतें
नाम का मतलब
ज़्यादा माल-औलाद जमा करने की होड़ (दुनियावी चीज़ों में एक-दूसरे से आगे निकलने की कोशिश)
पृष्ठभूमि
सूरह अत-तकासुर में दुनियावी माल-औलाद की होड़ में इतना डूब जाने की मज़म्मत है कि इंसान कब्र तक पहुंच जाता है और उसे होश नहीं आता।
फ़ज़ीलत / सार
यह सूरह हमें दुनियावी होड़-दौड़ से हटकर नेमतों के हिसाब पर गौर करने की ताकीद करती है, जो आज के दिखावे के दौर में बहुत ज़रूरी सबक है।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
आयत 1
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ أَلْهَىٰكُمُ ٱلتَّكَاثُرُ
أَلْهَىٰكُمُ
गाफ़िल कर दिया तुम्हें
ٱلتَّكَاثُرُ
कसरत की तलब ने
तुम्हें एक-दूसरे के मुक़ाबले में बहुतायत के प्रदर्शन और घमंड ने ग़फ़़लत में डाल रखा है,
तफ़्सीर:
(ऐ लोगो) तुम्हें धन और संतान पर आपस में गर्व ने अल्लाह की आज्ञाकारिता से असावधान कर दिया।
आयत 2
حَتَّىٰ زُرْتُمُ ٱلْمَقَابِرَ
حَتَّىٰ
यहाँ तक कि
زُرْتُمُ
जा पहुँचे तुम
ٱلْمَقَابِرَ
क़ब्रों मे
यहाँ तक कि तुम क़ब्रिस्तानों में पहुँच गए
तफ़्सीर:
यहाँ तक कि तुम मर एग और अपनी कब्रों में जा पहुँचे।
आयत 3
كَلَّا سَوْفَ تَعْلَمُونَ
كَلَّا
हरगिज़ नहीं
سَوْفَ
अनक़रीब
تَعْلَمُونَ
तुम जान लोगे
कुछ नहीं, तुम शीघ्र ही जान लोगे
तफ़्सीर:
तुम्हें धन और संतान पर में गर्व में पड़कर अल्लाह की आज्ञाकारिता से ग़ाफ़िल नहीं होना चाहिए था। तुम्हें शीघ्र ही उस ग़फ़लत का परिणाम पता चल जाएगा।
आयत 4
ثُمَّ كَلَّا سَوْفَ تَعْلَمُونَ
ثُمَّ
फिर
كَلَّا
हरगिज़ नहीं
سَوْفَ
अनक़रीब
تَعْلَمُونَ
तुम जान लोगे
फिर, कुछ नहीं, तुम्हें शीघ्र ही मालूम हो जाएगा -
तफ़्सीर:
फिर तुम जल्द ही उसके परिणाम से अवगत हो जाओगे।
आयत 5
كَلَّا لَوْ تَعْلَمُونَ عِلْمَ ٱلْيَقِينِ
كَلَّا
हरगिज़ नहीं
لَوْ
काश
تَعْلَمُونَ
तुम जान लेते
عِلْمَ
जानना
ٱلْيَقِينِ
यक़ीन का
कुछ नहीं, अगर तुम विश्वसनीय ज्ञान के रूप में जान लो! (तो तुम धन-दौलत के पुजारी न बनो) -
तफ़्सीर:
वास्तव में, यदि तुम निश्चितता के साथ जानते लेते कि तुम अल्लाह के पास उठाए जाने वाले हो और यह है कि वह तुम्हें तुम्हारे कर्मों का बदला देगा; तो तुम धन और संतान पर आपस में गर्व करने में व्यस्त न होते।
आयत 6
لَتَرَوُنَّ ٱلْجَحِيمَ
لَتَرَوُنَّ
अलबत्ता तुम ज़रूर देखोगे
ٱلْجَحِيمَ
जहन्नम को
अवश्य ही तुम भड़कती आग से दो-चार होगे
तफ़्सीर:
अल्लाह की क़सम, तुम क़ियामत के दिन अवश्य जहन्नम को देखोगे।
आयत 7
ثُمَّ لَتَرَوُنَّهَا عَيْنَ ٱلْيَقِينِ
ثُمَّ
फिर
لَتَرَوُنَّهَا
अलबत्ता तुम ज़रूर देखोगे उसे
عَيْنَ
आँख से
ٱلْيَقِينِ
यक़ीन की
फिर सुनो, उसे अवश्य देखोगे इस दशा में कि वह यथावत विश्वास होगा
तफ़्सीर:
फिर तुम अवश्य उसे निश्चित रूप से देखोगे, जिसमें कोई संदेह नहीं है।
आयत 8
ثُمَّ لَتُسْـَٔلُنَّ يَوْمَئِذٍ عَنِ ٱلنَّعِيمِ
ثُمَّ
फिर
لَتُسْـَٔلُنَّ
अलबत्ता तुम ज़रूर पूछे जाओगे
يَوْمَئِذٍ
उस दिन
عَنِ
about
ٱلنَّعِيمِ
नेअमतों के बारे में
फिर निश्चय ही उस दिन तुमसे नेमतों के बारे में पूछा जाएगा
तफ़्सीर:
फिर उस दिन अल्लाह तुमसे उन नेमतों के बारे में अवश्य पूछेगा, जो उसने तुम्हें स्वास्थ्य और धन आदि के रूप में प्रदान की हैं।
आज की ज़िंदगी में सबक़
दुनियावी होड़ की मज़म्मत और नेमतों के हिसाब के ज़िक्र के साथ सूरह मुकम्मल होती है। यह हमें सिखाता है कि दुनियावी माल-औलाद की होड़ में डूबने की बजाय हमें अपनी नेमतों के हिसाब पर गौर करना चाहिए, क्योंकि हर नेमत के बारे में सवाल होगा।
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