सूरह अल-हुमज़ा سورة الهمزة
मक्की 9 आयतें
नाम का मतलब
ताना मारने वाला / चुगलखोर (पीठ पीछे बुराई करने वालों की मज़म्मत से)
पृष्ठभूमि
सूरह अल-हुमज़ा में ताना मारने वालों, चुगली करने वालों और माल जमा करके उस पर घमंड करने वालों की मज़म्मत है।
फ़ज़ीलत / सार
यह सूरह ज़बान की बुराइयों (ताना, चुगली) और माल के घमंड के खिलाफ एक सख्त तंबीह है, जो समाजी अखलाक के लिए बेहद अहम है।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
आयत 1
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ وَيْلٌۭ لِّكُلِّ هُمَزَةٍۢ لُّمَزَةٍ
وَيْلٌۭ
हलाकत है
لِّكُلِّ
वास्ते हर
هُمَزَةٍۢ
ऐब लगाने वाले
لُّمَزَةٍ
ग़ीबत करने वाले के
तबाही है हर कचो के लगानेवाले, ऐब निकालनेवाले के लिए,
तफ़्सीर:
उस व्यक्ति के लिए विनाश एवं कड़ी यातना है, जो लोगों की बहुत ग़ीबत करने वाला और उनपर बहुत दोष लगाने वाला एवं ताना मारने वाला है।
आयत 2
ٱلَّذِى جَمَعَ مَالًۭا وَعَدَّدَهُۥ
ٱلَّذِى
वो जिसने
جَمَعَ
जमा किया
مَالًۭا
माल
وَعَدَّدَهُۥ
और उसने गिन-गिन कर रखा उसे
जो माल इकट्ठा करता और उसे गिनता रहा
तफ़्सीर:
जिसकी चिंता केवल धन एकत्र करना और उसे गिन-गिनकर रखना है। इसके अलावा उसका किसी और चीज़ से कोई सरोकार नहीं है।
आयत 3
يَحْسَبُ أَنَّ مَالَهُۥٓ أَخْلَدَهُۥ
يَحْسَبُ
वो समझता है
أَنَّ
कि बेशक
مَالَهُۥٓ
माल उसका
أَخْلَدَهُۥ
हमेशगी बख़्शेगा उसे
समझता है कि उसके माल ने उसे अमर कर दिया
तफ़्सीर:
वह समझता है कि उसका माल जो उसने जमा किया है, उसे मौत से बचा लेगा और वह दुनिया में अमर रहेगा।
आयत 4
كَلَّا ۖ لَيُنۢبَذَنَّ فِى ٱلْحُطَمَةِ
كَلَّا ۖ
हरगिज़ नहीं
لَيُنۢبَذَنَّ
अलबत्ता वो ज़रूर डाला जाएगा
فِى
in
ٱلْحُطَمَةِ
हुतामा में
कदापि नहीं, वह चूर-चूर कर देनेवाली में फेंक दिया जाएगा,
तफ़्सीर:
मामला वैसा नहीं है, जैसा कि इस जाहिल ने कल्पना की है, निश्चय वह ज़रूर जहन्नम की आग में फेंका जाएगा, जो इतनी शक्तिशाली है कि उसमें डाली गई हर चीज़ को तोड़कर रख देगी।
आयत 5
وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا ٱلْحُطَمَةُ
وَمَآ
और क्या चीज़
أَدْرَىٰكَ
बताए आपको
مَا
क्या है
ٱلْحُطَمَةُ
हुतामा
और तुम्हें क्या मालूम कि वह चूर-चूर कर देनेवाली क्या है?
तफ़्सीर:
और (ऐ रसूल) आपको क्या पता कि यह कौन सी आग है, जो उसमें डाली गई हर चीज़ को चूरा करदेगी?!
आयत 6
نَارُ ٱللَّهِ ٱلْمُوقَدَةُ
نَارُ
आग है
ٱللَّهِ
अल्लाह की
ٱلْمُوقَدَةُ
भड़काई हुई
वह अल्लाह की दहकाई हुई आग है,
तफ़्सीर:
वह अल्लाह की भड़काई हुई आग है।
आयत 7
ٱلَّتِى تَطَّلِعُ عَلَى ٱلْأَفْـِٔدَةِ
ٱلَّتِى
वो जो
تَطَّلِعُ
चढ़ आती है
عَلَى
to
ٱلْأَفْـِٔدَةِ
दिलों पर
जो झाँक लेती है दिलों को
तफ़्सीर:
जो लोगों के शरीर से उनके दिलों में प्रवेश कर जाएगी।
आयत 8
إِنَّهَا عَلَيْهِم مُّؤْصَدَةٌۭ
إِنَّهَا
बेशक वो
عَلَيْهِم
उन पर
مُّؤْصَدَةٌۭ
बन्द की हुई है
वह उनपर ढाँककर बन्द कर दी गई होगी,
तफ़्सीर:
वह उसमें सज़ा दिए जाने वालों पर बंद कर दी जाएगी।
आयत 9
فِى عَمَدٍۢ مُّمَدَّدَةٍۭ
فِى
In
عَمَدٍۢ
सुतूनों में
مُّمَدَّدَةٍۭ
लम्बे-लम्बे
लम्बे-लम्बे स्तम्भों में
तफ़्सीर:
लंबे विस्तारित स्तंभों के साथ, ताकि उससे बाहर न निकल सकें।
आज की ज़िंदगी में सबक़
ताना मारने-चुगली करने वालों और माल के घमंड की मज़म्मत के ज़िक्र के साथ सूरह मुकम्मल होती है। यह हमें सिखाता है कि दूसरों की बुराई करना और माल पर घमंड करना दोनों संगीन गुनाह हैं, इनसे बचना चाहिए।
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