नाम का मतलब
कुरैश (मक्का के मशहूर कबीले का नाम)
पृष्ठभूमि
सूरह कुरैश में कुरैश कबीले को उनके सर्दी-गर्मी के तिजारती सफ़र (शाम-यमन) की सहूलत और काबा के तहफ्फुज़ की नेमत की याद दिलाई गई है, ताकि वह इस घर के रब की इबादत करें।
फ़ज़ीलत / सार
यह सूरह हमें सिखाती है कि जिस अल्लाह ने हमें अमन और रोज़ी की नेमतें दी हैं, उसी की इबादत करना हमारा फर्ज़ है।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
आयत 1
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ لِإِيلَـٰفِ قُرَيْشٍ
لِإِيلَـٰفِ
मानूस करने के लिए
قُرَيْشٍ
क़ुरैश को
कितना है क़ुरैश को लगाए और परचाए रखना,
तफ़्सीर:
क़ुरैश की आदत और उनके मानूस होने के कारण।
आयत 2
إِۦلَـٰفِهِمْ رِحْلَةَ ٱلشِّتَآءِ وَٱلصَّيْفِ
إِۦلَـٰفِهِمْ
मानूस करना उन्हें
رِحْلَةَ
सफ़र से
ٱلشِّتَآءِ
सर्दी के
وَٱلصَّيْفِ
और गर्मा के
लगाए और परचाए रखना उन्हें जाड़े और गर्मी की यात्रा से
तफ़्सीर:
सुरक्षित होकर यमन की ओर शीतकालीन यात्रा, और शाम (लेवंत) की ओर गर्मियों की यात्रा।
आयत 3
فَلْيَعْبُدُوا۟ رَبَّ هَـٰذَا ٱلْبَيْتِ
فَلْيَعْبُدُوا۟
पस चाहिए कि वो इबादत करें
رَبَّ
रब की
هَـٰذَا
उस
ٱلْبَيْتِ
घर के
अतः उन्हें चाहिए कि इस घर (काबा) के रब की बन्दगी करे,
तफ़्सीर:
अतः उन्हें चाहिए कि केवल इस सम्मानित घर के मालिक अल्लाह की इबादत करें, जिसने उनके लिए इस यात्रा की सुविधा प्रदान की, और उसके साथ किसी को साझी न बनाएँ।
आयत 4
ٱلَّذِىٓ أَطْعَمَهُم مِّن جُوعٍۢ وَءَامَنَهُم مِّنْ خَوْفٍۭ
ٱلَّذِىٓ
जिसने
أَطْعَمَهُم
खिलाया उन्हें
مِّن
[from]
جُوعٍۢ
भूख में
وَءَامَنَهُم
और उसने अमन दिया उन्हें
مِّنْ
from
خَوْفٍۭ
ख़ौफ़ से
जिसने उन्हें खिलाकर भूख से बचाया और निश्चिन्तता प्रदान करके भय से बचाया
तफ़्सीर:
जिसने उन्हें भूख में खिलाया और उन्हें भय से सुरक्षित किया; क्योंकि उसने अरबों के दिलों में हरम (काबा) और उसके निवासियों का सम्मान डाल दिया।
आज की ज़िंदगी में सबक़
कुरैश को अमन-रोज़ी की नेमतों की याद दहानी के साथ सूरह मुकम्मल होती है। यह हमें सिखाता है कि जिस अल्लाह ने हमें अमन, सफर की सहूलत और रोज़ी दी है, उसी की इबादत करनी चाहिए, नाशुक्री नहीं।
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