नाम का मतलब
रोज़मर्रा की मामूली चीज़ें (छोटी ज़रूरत की चीज़ें उधार देने से इनकार करने वालों के ज़िक्र से)
पृष्ठभूमि
सूरह अल-माऊन में उन लोगों की मज़म्मत है जो यतीम को धक्के देते हैं, मिस्कीन को खाना खिलाने की तरगीब नहीं देते और नमाज़ में भी दिखावा करते हैं।
फ़ज़ीलत / सार
यह सूरह दीन को सिर्फ नमाज़-रोज़े तक महदूद न रखकर समाजी हमदर्दी से जोड़ती है, जो असली दीनदारी का जामे तसव्वुर पेश करती है।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
आयत 1
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ أَرَءَيْتَ ٱلَّذِى يُكَذِّبُ بِٱلدِّينِ
أَرَءَيْتَ
क्या देखा आपने
ٱلَّذِى
उस शख़्स को जो
يُكَذِّبُ
झुठलाता है
بِٱلدِّينِ
बदले (के दिन) को
क्या तुमने उसे देखा जो दीन को झुठलाता है?
तफ़्सीर:
क्या आपने उसे पहचाना, जो क़ियामत के दिन बदला दिए जाने को झुठलाता है?!
आयत 2
فَذَٰلِكَ ٱلَّذِى يَدُعُّ ٱلْيَتِيمَ
فَذَٰلِكَ
पस ये
ٱلَّذِى
वो है जो
يَدُعُّ
धक्के देता है
ٱلْيَتِيمَ
यतीम को
वही तो है जो अनाथ को धक्के देता है,
तफ़्सीर:
यही वह व्यक्ति है, जो अनाथ को उसकी जरूरतों से वंचित कर उसे सख़्ती के साथ भगा देता है।
आयत 3
وَلَا يَحُضُّ عَلَىٰ طَعَامِ ٱلْمِسْكِينِ
وَلَا
और नहीं
يَحُضُّ
वो रग़बत दिलाता
عَلَىٰ
to
طَعَامِ
खाना खिलाने पर
ٱلْمِسْكِينِ
मिसकीन के
और मुहताज के खिलाने पर नहीं उकसाता
तफ़्सीर:
वह ग़रीबों को खाना खिलाने के लिए न खुद से आग्रह करता है और न ही दूसरों से आग्रह करता है।
आयत 4
فَوَيْلٌۭ لِّلْمُصَلِّينَ
فَوَيْلٌۭ
पस हलाकत है
لِّلْمُصَلِّينَ
उन नमाज़ियों के लिए
अतः तबाही है उन नमाज़ियों के लिए,
तफ़्सीर:
तो उन नमाज़ियों के लिए विनाश और यातना है, जो अपनी नमाज़ से लापरवाह हैं, वे उसकी परवाह नहीं करते हैं यहाँ तक कि उसका समय समाप्त हो जाता है।
आयत 5
ٱلَّذِينَ هُمْ عَن صَلَاتِهِمْ سَاهُونَ
ٱلَّذِينَ
वो जो
هُمْ
वो
عَن
about
صَلَاتِهِمْ
अपनी नमाज़ों से
سَاهُونَ
गाफ़िल हैं
जो अपनी नमाज़ से ग़ाफिल (असावधान) हैं,
तफ़्सीर:
तो उन नमाज़ियों के लिए विनाश और यातना है, जो अपनी नमाज़ से लापरवाह हैं, वे उसकी परवाह नहीं करते हैं यहाँ तक कि उसका समय समाप्त हो जाता है।
आयत 6
ٱلَّذِينَ هُمْ يُرَآءُونَ
ٱلَّذِينَ
वो लोग जो
هُمْ
वो
يُرَآءُونَ
वो रियाकारी करते हैं
जो दिखावे के लिए कार्य करते हैं,
तफ़्सीर:
जो लोग दिखावे के लिए नमाज़ पढ़ते और कार्य करते हैं। वे विशुद्ध रूप से अल्लाह के लिए कार्य नहीं करते हैं।
आयत 7
وَيَمْنَعُونَ ٱلْمَاعُونَ
وَيَمْنَعُونَ
और वो रोकते हैं
ٱلْمَاعُونَ
इस्तेमाल की मामूली चीज़ें
और साधारण बरतने की चीज़ भी किसी को नहीं देते
तफ़्सीर:
और वे ऐसी चीज़ के द्वारा भी दूसरों की मदद करने से कतराते हैं, जिससे मदद करने में कोई नुक़सान नहीं है।
आज की ज़िंदगी में सबक़
यतीम को धक्के देने, मिस्कीन को न खिलाने और नमाज़ में दिखावा करने वालों की मज़म्मत के साथ सूरह मुकम्मल होती है। यह हमें सिखाता है कि सिर्फ नमाज़ पढ़ना काफी नहीं, अगर दिल में यतीम-मिस्कीन के लिए हमदर्दी न हो और नमाज़ में दिखावा हो, तो यह दीन की असली रूह नहीं।
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