सूरह अल-कौसर سورة الكوثر
मक्की 3 आयतें
नाम का मतलब
कौसर (जन्नत की एक नहर, या बेशुमार भलाई)
पृष्ठभूमि
सूरह अल-कौसर नबी ﷺ को उस वक्त तसल्ली देने के लिए नाज़िल हुई जब मुशरिकों ने आपके बेटे की वफात पर ताना दिया था। इसमें अल्लाह ने नबी ﷺ को बेशुमार भलाई (कौसर) का वादा दिया।
फ़ज़ीलत / सार
यह कुरआन की सबसे छोटी सूरह है, फिर भी इसमें नबी ﷺ को इतनी बड़ी खुशखबरी दी गई कि ताना मारने वाले खुद बेनाम-ओ-निशान हो जाएंगे।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
आयत 1
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ إِنَّآ أَعْطَيْنَـٰكَ ٱلْكَوْثَرَ
إِنَّآ
बेशक हमने
أَعْطَيْنَـٰكَ
अता किया हमने आपको
ٱلْكَوْثَرَ
कौसर
निश्चय ही हमने तुम्हें कौसर प्रदान किया,
तफ़्सीर:
(ऐ रसूल) हमने आपको ढेर सारी भलाई प्रदान की है, और उसी में से एक जन्नत में कौसर नहर भी है।
आयत 2
فَصَلِّ لِرَبِّكَ وَٱنْحَرْ
فَصَلِّ
पस नमाज़ पढ़िए
لِرَبِّكَ
अपने रब के लिए
وَٱنْحَرْ
और क़ुर्बानी कीजिए
अतः तुम अपने रब ही के लिए नमाज़ पढ़ो और (उसी के दिन) क़़ुरबानी करो
तफ़्सीर:
अतः आप इस नेमत पर अल्लाह का शुक्रिया अदा करते हुए केवल उसी के लिए नमाज़ पढ़ें और क़ुर्बानी करें; मुश्रिकों के प्रचलन के विपरीत जो अपनी मूर्तियों की निकटता प्राप्त करने के लिए बलि देते हैं।
आयत 3
إِنَّ شَانِئَكَ هُوَ ٱلْأَبْتَرُ
إِنَّ
बेशक
شَانِئَكَ
दुश्मन आपका
هُوَ
वो ही
ٱلْأَبْتَرُ
जड़ कटा है
निस्संदेह तुम्हारा जो वैरी है वही जड़कटा है
तफ़्सीर:
निःसंदेह आपसे द्वेष रखने वाला ही हर भलाई से वंचित और भुलाया हुआ है, जिसे यदि याद किया जाता है, तो बुराई के साथ याद किया जाता है।
आज की ज़िंदगी में सबक़
नबी ﷺ को बेशुमार भलाई (कौसर) के वादे और नमाज़-कुर्बानी की ताकीद के साथ सूरह मुकम्मल होती है। यह हमें सिखाता है कि जो लोग हमें ताना मारते या नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं, अल्लाह पर भरोसा रखने वाले आखिरकार सुर्खरू होते हैं।
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