नाम का मतलब
मदद (अल्लाह की मदद और फतह-ए-मक्का के ज़िक्र से)
पृष्ठभूमि
सूरह अन-नस्र फतह-ए-मक्का के बाद नाज़िल हुई, जब लोग झुंड के झुंड इस्लाम में दाखिल होने लगे। इसमें नबी ﷺ को तस्बीह और इस्तिग़फार की ताकीद की गई।
फ़ज़ीलत / सार
कहा जाता है कि यह सूरह नबी ﷺ की वफात के करीब आने की एक इशारी खबर थी, इसलिए इसे सुनकर सहाबा में से कई रो पड़े थे।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
आयत 1
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ إِذَا جَآءَ نَصْرُ ٱللَّهِ وَٱلْفَتْحُ
إِذَا
जब
جَآءَ
आ जाए
نَصْرُ
मदद
ٱللَّهِ
अल्लाह की
وَٱلْفَتْحُ
और फ़तह
जब अल्लाह की सहायता आ जाए और विजय प्राप्त हो,
तफ़्सीर:
(ऐ रसूल) जब आपके दीन के लिए अल्लाह की मदद आ जाए, और मक्का विजय हो जाए।
आयत 2
وَرَأَيْتَ ٱلنَّاسَ يَدْخُلُونَ فِى دِينِ ٱللَّهِ أَفْوَاجًۭا
وَرَأَيْتَ
और आप देखें
ٱلنَّاسَ
लोगों को
يَدْخُلُونَ
वो दाख़िल हो रहे हैं
فِى
into
دِينِ
दीन में
ٱللَّهِ
अल्लाह के
أَفْوَاجًۭا
फ़ौज दर फ़ौज
और तुम लोगों को देखो कि वे अल्लाह के दीन (धर्म) में गिरोह के गिरोह प्रवेश कर रहे है,
तफ़्सीर:
और आप देखें कि लोग इस्लाम में समूह दर समूह प्रवेश कर रहे हैं।
आयत 3
فَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ وَٱسْتَغْفِرْهُ ۚ إِنَّهُۥ كَانَ تَوَّابًۢا
فَسَبِّحْ
तो तस्बीह कीजिए
بِحَمْدِ
साथ हम्द के
رَبِّكَ
अपने रब की
وَٱسْتَغْفِرْهُ ۚ
और बख़्शिश माँगिए उससे
إِنَّهُۥ
बेशक वो
كَانَ
है वो
تَوَّابًۢا
बहुत तौबा क़ुबूल करने वाला
तो अपने रब की प्रशंसा करो और उससे क्षमा चाहो। निस्संदेह वह बड़ा तौबा क़बूल करनेवाला है
तफ़्सीर:
तो जान लें कि यह उस मिशन की समाप्ति के क़रीब होने का संकेत है, जिसके साथ आप भेजे गए थे। अतः आप मदद और विजय की नेमत पर आभार प्रकट करते हुए, अपने पालनहार की पवित्रता और महिमा का गुणगान करें, और उससे क्षमा याचना करें। निश्चय वह बहुत तौबा क़बूल करने वाला है, अपने बंदों की तौबा क़बूल करता और उन्हें क्षमा कर देता है।
आज की ज़िंदगी में सबक़
अल्लाह की मदद और फतह के बाद तस्बीह-इस्तिग़फार की ताकीद के साथ सूरह मुकम्मल होती है। यह हमें सिखाता है कि कामयाबी मिलने पर घमंड की बजाय अल्लाह का शुक्र और इस्तिग़फार करना चाहिए।
मेरा एक्शन प्लान
अपना एक्शन प्लान लिखने और सेव करने के लिए लॉगिन करें।