सूरह अल-मसद سورة المسد
मक्की 5 आयतें
नाम का मतलब
खजूर की रस्सी (अबू लहब की बीवी के गले में डाली जाने वाली रस्सी के ज़िक्र से)
पृष्ठभूमि
सूरह अल-मसद नबी ﷺ के चचा अबू लहब और उसकी बीवी की मज़म्मत में नाज़िल हुई, जिन्होंने इस्लाम की मुखालिफत में बहुत सख्ती दिखाई।
फ़ज़ीलत / सार
यह सूरह इस बात का सुबूत है कि कुरआन की पेशिनगोई हमेशा सच साबित हुई, अबू लहब कभी ईमान नहीं लाया, जैसा इस सूरह में पहले ही बता दिया गया था।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
आयत 1
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ تَبَّتْ يَدَآ أَبِى لَهَبٍۢ وَتَبَّ
تَبَّتْ
टूट गए
يَدَآ
दोनों हाथ
أَبِى
(of) Abu
لَهَبٍۢ
अबू लहब के
وَتَبَّ
और वो हलाक हुआ
टूट गए अबू लहब के दोनों हाथ और वह स्वयं भी विनष्ट हो गया!
तफ़्सीर:
नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के चाचा अबू लहब बिन अब्दुल मुत्तलिब के सारे अमल बर्बाद होने के कारण, उसके दोनों हाथ क्षतिग्रस्त हो जाएँ; क्योंकि वह नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को कष्ट पहुँचाया करता था, तथा उसकी सारी कोशिश विफल हो गई।
आयत 2
مَآ أَغْنَىٰ عَنْهُ مَالُهُۥ وَمَا كَسَبَ
مَآ
ना
أَغْنَىٰ
काम आया
عَنْهُ
उसे
مَالُهُۥ
माल उसका
وَمَا
और जो
كَسَبَ
उसने कमाया
न उसका माल उसके काम आया और न वह कुछ जो उसने कमाया
तफ़्सीर:
उसका धन और उसके बेटे उसके किस काम आए? वे दोनों न उससे अज़ाब को दूर कर सके और न उसके लिए दया का कारण बन सके।
आयत 3
سَيَصْلَىٰ نَارًۭا ذَاتَ لَهَبٍۢ
سَيَصْلَىٰ
अनक़रीब वो जलेगा
نَارًۭا
आग में
ذَاتَ
of
لَهَبٍۢ
शोले वाली
वह शीघ्र ही प्रज्वलित भड़कती आग में पड़ेगा,
तफ़्सीर:
वह क़ियामत के दिन लपट वाली आग में दाखिल होगा और उसकी गर्मी को झेलेगा।
आयत 4
وَٱمْرَأَتُهُۥ حَمَّالَةَ ٱلْحَطَبِ
وَٱمْرَأَتُهُۥ
और उसकी बीवी
حَمَّالَةَ
उठाने वाली
ٱلْحَطَبِ
लकड़ी के गठ्ठे को
और उसकी स्त्री भी ईधन लादनेवाली,
तफ़्सीर:
तथा उसकी पत्नी उम्मे जमील भी जहन्नम में प्रवेश करेगी, जो नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के रास्ते में काँटे फेंककर आपको कष्ट पहुँचाया करती थी।
आयत 5
فِى جِيدِهَا حَبْلٌۭ مِّن مَّسَدٍۭ
فِى
In
جِيدِهَا
उसकी गर्दन में
حَبْلٌۭ
रस्सी होगी
مِّن
of
مَّسَدٍۭ
बटी हुई
उसकी गरदन में खजूर के रेसों की बटी हुई रस्सी पड़ी है
तफ़्सीर:
उसकी गर्दन में मज़बूत बटी हुई रस्सी होगी, जिसके साथ घसीटकर उसे जहन्नम में ले जाया जाएगा।
आज की ज़िंदगी में सबक़
अबू लहब और उसकी बीवी की मज़म्मत के साथ सूरह मुकम्मल होती है। यह हमें सिखाता है कि दुनियावी रिश्ता या खानदान चाहे कितना भी करीबी हो, अगर वह हक का मुखालिफ हो तो वह आखिरत में कोई फायदा नहीं देगा।
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