नाम का मतलब
सुबह की रोशनी (अंधेरे को चीरकर निकलने वाली सुबह)
पृष्ठभूमि
सूरह अल-फलक़ में हर किस्म की बुराई (अंधेरा, जादू, हसद) से अल्लाह की पनाह मांगने की तालीम है।
फ़ज़ीलत / सार
यह मुअव्विज़तैन (पनाह मांगने वाली दो सूरतों) में से एक है, जिसे नबी ﷺ रोज़ाना सुबह-शाम पढ़ते थे।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
आयत 1
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلْفَلَقِ
قُلْ
कह दीजिए
أَعُوذُ
मैं पनाह लेता हूँ
بِرَبِّ
रब की
ٱلْفَلَقِ
सुबह के
कहो, "मैं शरण लेता हूँ, प्रकट करनेवाले रब की,
तफ़्सीर:
(ऐ रसूल) आप कह दें : मैं सुबह के पालनहार की पनाह लेता हूँ और उसकी शरण में आता हूँ।
आयत 2
مِن شَرِّ مَا خَلَقَ
مِن
From
شَرِّ
हर उस चीज़ के शर से
مَا
जो
خَلَقَ
उसने पैदा की
जो कुछ भी उसने पैदा किया उसकी बुराई से,
तफ़्सीर:
उन प्राणियों की बुराई से जो नुक़सान पहुँचाती हैं।
आयत 3
وَمِن شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ
وَمِن
And from
شَرِّ
और शर से
غَاسِقٍ
अँधेरी रात के
إِذَا
जब
وَقَبَ
वो फैल जाए
और अँधेरे की बुराई से जबकि वह घुस आए,
तफ़्सीर:
और मैं उन बुराइयों से अल्लाह की शरण में आता हूँ, जो रात में प्रकट होती हैं, जैसे जानवर और चोर आदि।
आयत 4
وَمِن شَرِّ ٱلنَّفَّـٰثَـٰتِ فِى ٱلْعُقَدِ
وَمِن
And from
شَرِّ
और शर से
ٱلنَّفَّـٰثَـٰتِ
फूँकने वालियों के
فِى
in
ٱلْعُقَدِ
गिरहोंमें
और गाँठो में फूँक मारने-वालों की बुराई से,
तफ़्सीर:
तथा मैं उन जादूगरनियों की बुराई से अल्लाह की पनाह में आता हूँ, जो गाँठों में फूँक मारती हैं।
आयत 5
وَمِن شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ
وَمِن
And from
شَرِّ
और शर से
حَاسِدٍ
हासिद के
إِذَا
जब
حَسَدَ
वो हसद रे
और ईर्ष्यालु की बुराई से, जब वह ईर्ष्या करे।"
तफ़्सीर:
और मैं ईर्ष्या करने वाले की बुराई से अल्लाह की शरण लेता हूँ, जब वह ईर्ष्या की भावना से ग्रसित होकर कोई काम करे।
आज की ज़िंदगी में सबक़
अंधेरे, जादू और हसद जैसी बुराइयों से अल्लाह की पनाह मांगने के साथ सूरह मुकम्मल होती है। यह हमें सिखाता है कि नज़र-ए-बद, हसद और छुपी बुराइयों से बचने के लिए अल्लाह की पनाह मांगते रहना चाहिए।
मेरा एक्शन प्लान
अपना एक्शन प्लान लिखने और सेव करने के लिए लॉगिन करें।