नाम का मतलब
गरज (बादल की गरज, जो अल्लाह की तस्बीह करती है)
पृष्ठभूमि
सूरह अर-रअद में अल्लाह की कुदरत की निशानियां, जैसे बारिश, बिजली और गरजते बादल, तौहीद के दलाइल के तौर पर पेश की गई हैं। इसका नाम उसी गरज (रअद) से लिया गया है जो अल्लाह की तस्बीह करती है। यह सूरह कयामत के इनकार करने वालों को कायनात की निशानियों से जवाब देती है।
फ़ज़ीलत / सार
यह सूरह कायनात की निशानियों के ज़रिए तौहीद और अल्लाह की कुदरत को समझने के लिए खास तौर पर जानी जाती है।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
आयत 1
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ الٓمٓر ۚ تِلْكَ ءَايَـٰتُ ٱلْكِتَـٰبِ ۗ وَٱلَّذِىٓ أُنزِلَ إِلَيْكَ مِن رَّبِّكَ ٱلْحَقُّ وَلَـٰكِنَّ أَكْثَرَ ٱلنَّاسِ لَا يُؤْمِنُونَ
الٓمٓر ۚ
अलिफ़ लाम मीम रा
تِلْكَ
ये
ءَايَـٰتُ
आयात हैं
ٱلْكِتَـٰبِ ۗ
किताब की
وَٱلَّذِىٓ
और जो कुछ
أُنزِلَ
नाज़िल किया गया
إِلَيْكَ
तरफ़ आपके
مِن
from
رَّبِّكَ
आपके रब की तरफ़ से
ٱلْحَقُّ
हक़ है
وَلَـٰكِنَّ
और लेकिन
أَكْثَرَ
अक्सर
ٱلنَّاسِ
लोग
لَا
(do) not
يُؤْمِنُونَ
नहीं वो ईमान लाते
अलिफ़॰ लाम॰ मीम॰ रा॰। ये किताब की आयतें है औऱ जो कुछ तुम्हारे रब की ओर से तुम्हारी ओर अवतरित हुआ है, वह सत्य है, किन्तु अधिकतर लोग मान नहीं रहे है
तफ़्सीर:
{अलिफ़॰ लाम॰ मीम॰ रा॰।} सूरतुल-बक़रा के आरंभ में इस प्रकार के अक्षरों के बारे में बात गुज़र चुकी है। इस सूरत की ये उच्च आयतें और क़ुरआन जिसे अल्लाह ने (ऐ रसूल!) आपपर उतारा है, वह सत्य हैं, जिसमें कोई संशय नहीं है, और इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह अल्लाह की ओर से है। किंतु अधिकांश लोग हठ और अहंकार के कारण इसपर ईमान नहीं लाते।
आयत 2
ٱللَّهُ ٱلَّذِى رَفَعَ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ بِغَيْرِ عَمَدٍۢ تَرَوْنَهَا ۖ ثُمَّ ٱسْتَوَىٰ عَلَى ٱلْعَرْشِ ۖ وَسَخَّرَ ٱلشَّمْسَ وَٱلْقَمَرَ ۖ كُلٌّۭ يَجْرِى لِأَجَلٍۢ مُّسَمًّۭى ۚ يُدَبِّرُ ٱلْأَمْرَ يُفَصِّلُ ٱلْـَٔايَـٰتِ لَعَلَّكُم بِلِقَآءِ رَبِّكُمْ تُوقِنُونَ
ٱللَّهُ
अल्लाह
ٱلَّذِى
वो ही है जिसने
رَفَعَ
बुलन्द किया
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों को
بِغَيْرِ
बग़ैर
عَمَدٍۢ
सुतूनों के
تَرَوْنَهَا ۖ
तुम देखते हो जिन्हें
ثُمَّ
फिर
ٱسْتَوَىٰ
वो बुलन्द हुआ
عَلَى
on
ٱلْعَرْشِ ۖ
अर्श पर
وَسَخَّرَ
और उसने मुसख़्ख़र किया
ٱلشَّمْسَ
सूरज
وَٱلْقَمَرَ ۖ
और चाँद को
كُلٌّۭ
सब
يَجْرِى
चल रहे हैं
لِأَجَلٍۢ
एक वक़्त तक
مُّسَمًّۭى ۚ
मुक़र्रर
يُدَبِّرُ
वो तदबीर करता है
ٱلْأَمْرَ
काम की
يُفَصِّلُ
वो खोल कर बयान करता है
ٱلْـَٔايَـٰتِ
आयात को
لَعَلَّكُم
ताकि तुम
بِلِقَآءِ
मुलाक़ात का
رَبِّكُمْ
अपने रब की
تُوقِنُونَ
तुम यक़ीन करो
अल्लाह वह है जिसने आकाशों को बिना सहारे के ऊँचा बनाया जैसा कि तुम उन्हें देखते हो। फिर वह सिंहासन पर आसीन हुआ। उसने सूर्य और चन्द्रमा को काम पर लगाया। हरेक एक नियत समय तक के लिए चला जा रहा है। वह सारे काम का विधान कर रहा है; वह निशानियाँ खोल-खोलकर बयान करता है, ताकि तुम्हें अपने रब से मिलने का विश्वास हो
तफ़्सीर:
अल्लाह वह है, जिसने खंभों के बिना आकाशों को ऊँचा बनाया, जिन्हें तुम देखते हो। फिर अर्श (सिंहासन) पर बुलंद हुआ, जैसा उसकी महिमा के योग्य है। हम उसके बुलंद होने की कोई दशा एवं स्थिति नहीं निर्धारित करते और न उसे किसी चीज़ के समान क़रार देते हैं। उसने सूर्य एवं चंद्रमा को अपनी सृष्टि के लाभों के लिए वशीभूत कर दिया। सूर्य और चंद्रमा में से प्रत्येक अल्लाह के ज्ञान में एक विशिष्ट अवधि के लिए चल रहा है। वह पाक अल्लाह आसमानों और धरती में पूर्ण मामले का जैसे चाहता है, संचालन करता है। वह अपनी शक्ति को दर्शाने वाली निशानियाँ खोल-खोलकर बयान करता है, ताकि तुम क़ियामत के दिन अपने रब से मिलने पर विश्वास कर लो, फिर उसके लिए अच्छे कार्यों के साथ तैयारी करने लगो।
आयत 3
وَهُوَ ٱلَّذِى مَدَّ ٱلْأَرْضَ وَجَعَلَ فِيهَا رَوَٰسِىَ وَأَنْهَـٰرًۭا ۖ وَمِن كُلِّ ٱلثَّمَرَٰتِ جَعَلَ فِيهَا زَوْجَيْنِ ٱثْنَيْنِ ۖ يُغْشِى ٱلَّيْلَ ٱلنَّهَارَ ۚ إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَـٰتٍۢ لِّقَوْمٍۢ يَتَفَكَّرُونَ
وَهُوَ
और वो ही है
ٱلَّذِى
जिसने
مَدَّ
फैला दिया
ٱلْأَرْضَ
ज़मीन को
وَجَعَلَ
और बनाए
فِيهَا
उसमें
رَوَٰسِىَ
पहाड़
وَأَنْهَـٰرًۭا ۖ
और नहरें
وَمِن
and from
كُلِّ
और हर क़िस्म से
ٱلثَّمَرَٰتِ
फलों की
جَعَلَ
उसने बनाए
فِيهَا
उसमें
زَوْجَيْنِ
जोड़े
ٱثْنَيْنِ ۖ
दो दो
يُغْشِى
वो ढाँपता है
ٱلَّيْلَ
रात को
ٱلنَّهَارَ ۚ
दिन पर
إِنَّ
बेशक
فِى
in
ذَٰلِكَ
उसमें
لَـَٔايَـٰتٍۢ
अलबत्ता निशानियाँ हैं
لِّقَوْمٍۢ
उन लोगों के लिए
يَتَفَكَّرُونَ
जो ग़ौरो फ़िक्र करते हैं
और वही है जिसने धरती को फैलाया और उसमें जमे हुए पर्वत और नदियाँ बनाई और हरेक पैदावार की दो-दो क़िस्में बनाई। वही रात से दिन को छिपा देता है। निश्चय ही इसमें उन लोगों के लिए निशानियाँ है जो सोच-विचार से काम लेते है
तफ़्सीर:
वही अल्लाह है, जिसने धरती को फैलाया और उसमें मज़बूत पर्वत बनाए, ताकि धरती लोगों को लेकर हिलने-डुलने न लगे, तथा लोगों, उनके पशुओं और उनकी फसलों को पानी की आपूर्ति करने के लिए उसमें जल की नदियाँ बनाईं। और सभी तरह के फलों के उसने दो-दो प्रकार बनाए, जैसे कि पशु में नर और मादा। वह रात को दिन पर उढ़ा देता है, तो वह प्रकाशमान होने के बाद अंधेरा हो जाता है। निःसंदेह इस पूर्वोक्त में उन लोगों के लिए निशानियाँ और प्रमाण हैं, जो अल्लाह की रचना में सोच-विचार और चिंतन करते हैं। क्योंकि वही उन प्रमाणों और दलीलों से लाभान्वित होते हैं।
आयत 4
وَفِى ٱلْأَرْضِ قِطَعٌۭ مُّتَجَـٰوِرَٰتٌۭ وَجَنَّـٰتٌۭ مِّنْ أَعْنَـٰبٍۢ وَزَرْعٌۭ وَنَخِيلٌۭ صِنْوَانٌۭ وَغَيْرُ صِنْوَانٍۢ يُسْقَىٰ بِمَآءٍۢ وَٰحِدٍۢ وَنُفَضِّلُ بَعْضَهَا عَلَىٰ بَعْضٍۢ فِى ٱلْأُكُلِ ۚ إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَـٰتٍۢ لِّقَوْمٍۢ يَعْقِلُونَ
وَفِى
And in
ٱلْأَرْضِ
और ज़मीन में
قِطَعٌۭ
टुकड़े हैं
مُّتَجَـٰوِرَٰتٌۭ
बाहम मिले हुए
وَجَنَّـٰتٌۭ
और बाग़ात हैं
مِّنْ
of
أَعْنَـٰبٍۢ
अंगूरों के
وَزَرْعٌۭ
और खेतियाँ
وَنَخِيلٌۭ
और खजूर के दरख़्त
صِنْوَانٌۭ
जड़ से मिले हुए
وَغَيْرُ
और बग़ैर
صِنْوَانٍۢ
जड़ से मिले हुए
يُسْقَىٰ
वो पिलाए जाते हैं
بِمَآءٍۢ
पानी
وَٰحِدٍۢ
एक ही
وَنُفَضِّلُ
और हम फ़ज़ीलत देते है
بَعْضَهَا
उनके बाज़ को
عَلَىٰ
over
بَعْضٍۢ
बाज़ पर
فِى
in
ٱلْأُكُلِ ۚ
फलों में
إِنَّ
यक़ीनन
فِى
in
ذَٰلِكَ
उसमें
لَـَٔايَـٰتٍۢ
अलबत्ता निशानियाँ हैं
لِّقَوْمٍۢ
उन लोगों के लिए
يَعْقِلُونَ
जो अक़्ल से काम लेते हैं
और धरती में पास-पास भूभाग पाए जाते है जो परस्पर मिले हुए है, और अंगूरों के बाग़ है और खेतियाँ है औऱ खजूर के पेड़ है, इकहरे भी और दोहरे भी। सबको एक ही पानी से सिंचित करता है, फिर भी हम पैदावार और स्वाद में किसी को किसी के मुक़ाबले में बढ़ा देते है। निश्चय ही इसमें उन लोगों के लिए निशानियाँ हैं, जो बुद्धि से काम लेते है
तफ़्सीर:
और धरती पर पास-पास विभिन्न भू-भाग हैं, और उसमें अंगूरों के बाग़ हैं, तथा उसमें खेती और खजूर के एक ही जड़ से कई तनों वाले पेड़ और एक जड़ से एकल तनों वाले खजूर के पेड़ भी हैं। इन बाग़ों और उन फ़सलों को एक ही पानी से सिंचित किया जाता है। और उनके परस्पर मिले हुए होने और एक ही पानी से सिंचित किए जाने के बावजूद, हम स्वाद और अन्य लाभों में उनमें से कुछ को कुछ पर श्रेष्ठता प्रदान करते हैं। निःसंदेह इस पूर्वोक्त में उन लोगों के लिए दलीलें और प्रमाण हैं, जो बुद्धि रखते हैं। क्योंकि वही उनसे सीख प्राप्त करते हैं।
आयत 5
۞ وَإِن تَعْجَبْ فَعَجَبٌۭ قَوْلُهُمْ أَءِذَا كُنَّا تُرَٰبًا أَءِنَّا لَفِى خَلْقٍۢ جَدِيدٍ ۗ أُو۟لَـٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ بِرَبِّهِمْ ۖ وَأُو۟لَـٰٓئِكَ ٱلْأَغْلَـٰلُ فِىٓ أَعْنَاقِهِمْ ۖ وَأُو۟لَـٰٓئِكَ أَصْحَـٰبُ ٱلنَّارِ ۖ هُمْ فِيهَا خَـٰلِدُونَ
۞ وَإِن
और अगर
تَعْجَبْ
तुम तआज्जुब करते हो
فَعَجَبٌۭ
तो क़ाबिले तआज्जुब है
قَوْلُهُمْ
बात उनकी
أَءِذَا
क्या जब
كُنَّا
हो जाऐंगे हम
تُرَٰبًا
मिट्टी
أَءِنَّا
क्या बेशक हम
لَفِى
(be) indeed, in
خَلْقٍۢ
अलबत्ता पैदाइश में होंगे
جَدِيدٍ ۗ
नई
أُو۟لَـٰٓئِكَ
यही वो लोग हैं
ٱلَّذِينَ
जिन्होंने
كَفَرُوا۟
कुफ़्र किया
بِرَبِّهِمْ ۖ
अपने रब के साथ
وَأُو۟لَـٰٓئِكَ
और यही लोग हैं
ٱلْأَغْلَـٰلُ
तौक़ होंगे
فِىٓ
(will be) in
أَعْنَاقِهِمْ ۖ
जिनकी गर्दनों में
وَأُو۟لَـٰٓئِكَ
और यही लोग हैं
أَصْحَـٰبُ
साथी
ٱلنَّارِ ۖ
आग के
هُمْ
वो
فِيهَا
उसमें
خَـٰلِدُونَ
हमेशा रहने वाले हैं
अब यदि तुम्हें आश्चर्य ही करना है तो आश्चर्य की बात तो उनका यह कहना है कि ,"क्या जब हम मिट्टी हो जाएँगे तो क्या हम नए सिरे से पैदा भी होंगे?" वही हैं जिन्होंने अपने रब के साथ इनकार की नीति अपनाई और वही है, जिनकी गर्दनों मे तौक़ पड़े हुए है और वही आग (में पड़ने) वाले है जिसमें उन्हें सदैव रहना है
तफ़्सीर:
(ऐ रसूल) यदि आप किसी चीज़ पर आश्चर्य करते हैं, तो आपके लिए सबसे अधिक आश्चर्य की बात उनका पुनर्जीवन का इनकार करना और इसके इनकार के तर्क के रूप में उनका यह कहना है : क्या जब हम मर जाएँगे और मिट्टी तथा सड़ी-गली हड्डियाँ हो जाएँगे, तो क्या हमें दोबारा जीवित किया जाएगा?! यही मृत्यु के बाद दोबारा जीवित किए जाने का इनकार करने वाले लोग हैं, जिन्होंने अपने पालनहार के साथ कुफ़्र किया, इसलिए मृतकों को पुनर्जीवित कर उठाने की उसकी शक्ति का इनकार कर दिया। और यही लोग हैं जिनके गले में क़ियामत के दिन आग की ज़ंजीरें डाली जाएँगी और यही दोज़ख़ वाले हैं, जो उसमें हमेशा के लिए रहने वाले हैं, न उनका विनाश होगा और न उनकी यातना ख़त्म होगी।
आयत 6
وَيَسْتَعْجِلُونَكَ بِٱلسَّيِّئَةِ قَبْلَ ٱلْحَسَنَةِ وَقَدْ خَلَتْ مِن قَبْلِهِمُ ٱلْمَثُلَـٰتُ ۗ وَإِنَّ رَبَّكَ لَذُو مَغْفِرَةٍۢ لِّلنَّاسِ عَلَىٰ ظُلْمِهِمْ ۖ وَإِنَّ رَبَّكَ لَشَدِيدُ ٱلْعِقَابِ
وَيَسْتَعْجِلُونَكَ
और वो जल्दी माँगते हैं आपसे
بِٱلسَّيِّئَةِ
बुराई (अज़ाब) को
قَبْلَ
पहले
ٱلْحَسَنَةِ
भलाई से
وَقَدْ
हालाँकि तहक़ीक़
خَلَتْ
गुज़र चुकीं
مِن
from
قَبْلِهِمُ
इनसे पहले
ٱلْمَثُلَـٰتُ ۗ
इबरतनाक मिसालें
وَإِنَّ
और बेशक
رَبَّكَ
रब आपका
لَذُو
(is) full
مَغْفِرَةٍۢ
अलबत्ता बख़्शिश वाला है
لِّلنَّاسِ
लोगों के लिए
عَلَىٰ
for
ظُلْمِهِمْ ۖ
बावजूद उनके ज़ुल्म के
وَإِنَّ
और बेशक
رَبَّكَ
रब आपका
لَشَدِيدُ
अलबत्ता सख़्त
ٱلْعِقَابِ
सज़ा वाला है
वे भलाई से पहले बुराई के लिए तुमसे जल्दी मचा रहे हैं, हालाँकि उनसे पहले कितनी ही शिक्षाप्रद मिसालें गुज़र चुकी है। किन्तु तुम्हारा रब लोगों को उनके अत्याचार के बावजूद क्षमा कर देता है और वास्तव में तुम्हारा रब दंड देने में भी बहुत कठोर है
तफ़्सीर:
(ऐ रसूल!) मुश्रिक लोग आपसे यातना जल्दी माँग रहे हैं और उसके आने में देरी की शिकायत कर रहे हैं, इससे पहले कि वे अल्लाह के द्वारा उनके लिए निर्धारित नेमतों को पूरा करें। जबकि उनसे पहले उन्हीं जैसे झुठलाने वाले समुदायों पर यातनाएँ गुज़र चुकी हैं। फिर वे उनसे सीख क्यों नहीं लेते? और (ऐ रसूल!) निःसंदेह आपका पालनहार लोगों को, उनके अत्याचार के बावजूद, नज़र अंदाज़ करने वाला है। चुनाँचे वह उन्हें अज़ाब देने में जल्दी नहीं करता, ताकि वे अल्लाह के समक्ष तौबा कर लें। और निःसंदेह वह अपने कुफ़्र पर अडिग रहने वालों को, यदि वे तौबा न करें, निश्चित रूप से सख़्त सज़ा देने वाला है।
आयत 7
وَيَقُولُ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ لَوْلَآ أُنزِلَ عَلَيْهِ ءَايَةٌۭ مِّن رَّبِّهِۦٓ ۗ إِنَّمَآ أَنتَ مُنذِرٌۭ ۖ وَلِكُلِّ قَوْمٍ هَادٍ
وَيَقُولُ
और कहते हैं
ٱلَّذِينَ
वो जिन्होंने
كَفَرُوا۟
कुफ़्र किया
لَوْلَآ
क्यों नहीं
أُنزِلَ
उतारी गई
عَلَيْهِ
उस पर
ءَايَةٌۭ
कोई निशानी
مِّن
from
رَّبِّهِۦٓ ۗ
उसके रब की तरफ़ से
إِنَّمَآ
बेशक
أَنتَ
आप तो
مُنذِرٌۭ ۖ
डराने वाले हैं
وَلِكُلِّ
और वास्ते हर
قَوْمٍ
क़ौम के
هَادٍ
एक हादी है
जिन्होंने इनकार किया, वे कहते हैं, "उसपर उसके रब की ओर से कोई निशानी क्यों नहीं अवतरित हुई?" तुम तो बस एक चेतावनी देनेवाले हो और हर क़ौम के लिए एक मार्गदर्शक हुआ है
तफ़्सीर:
तथा अल्लाह का इनकार करने वाले (अपने इनकार और शत्रुता में अति करते हुए) कहते हैं : मुहम्मद पर उनके पालनहार की ओर से उस प्रकार की कोई निशानी क्यों नहीं उतारी गई, जो मूसा और ईसा पर उतारा गई थी? आप तो (ऐ नबी!) केवल एक डराने वाले हैं। आप लोगों को अल्लाह की यातना से डराते हैं। और आपके लिए केवल वही निशानी है, जो अल्लाह ने आपको प्रदान की है। और हर समुदाय के लिए एक नबी होता है, जो उन्हें सत्य के मार्ग पर ले जाता है, और उन्हें उसका मार्गदर्शन करता है।
आयत 8
ٱللَّهُ يَعْلَمُ مَا تَحْمِلُ كُلُّ أُنثَىٰ وَمَا تَغِيضُ ٱلْأَرْحَامُ وَمَا تَزْدَادُ ۖ وَكُلُّ شَىْءٍ عِندَهُۥ بِمِقْدَارٍ
ٱللَّهُ
अल्लाह
يَعْلَمُ
जानता है
مَا
जो कुछ
تَحْمِلُ
उठाती है
كُلُّ
हर
أُنثَىٰ
मादा
وَمَا
और जो कुछ
تَغِيضُ
कमी करते हैं
ٱلْأَرْحَامُ
रहम
وَمَا
और जो कुछ
تَزْدَادُ ۖ
वो ज़्यादा करते हैं
وَكُلُّ
और हर
شَىْءٍ
चीज़
عِندَهُۥ
उसके पास
بِمِقْدَارٍ
साथ एक अन्दाज़े के है
किसी भी स्त्री-जाति को जो भी गर्भ रहता है अल्लाह उसे जान रहा होता है और उसे भी जो गर्भाशय में कमी-बेशी होती है। और उसके यहाँ हरेक चीज़ का एक निश्चित अन्दाज़ा है
तफ़्सीर:
अल्लाह जानता है जो कुछ हर मादा अपने पेट में उठाए होती है। वह उसके बारे में सब कुछ जानता है। तथा गर्भाशयों में जो कमी, वृद्धि, स्वास्थ्य और बीमारी होती है, उसे भी जानता है। और अल्लाह के निकट हर वस्तु की एक मात्रा निश्चित है, जिससे वह घट-बढ़ नहीं सकती।
आयत 9
عَـٰلِمُ ٱلْغَيْبِ وَٱلشَّهَـٰدَةِ ٱلْكَبِيرُ ٱلْمُتَعَالِ
عَـٰلِمُ
जानने वाला है
ٱلْغَيْبِ
ग़ैब
وَٱلشَّهَـٰدَةِ
और हाज़िर का
ٱلْكَبِيرُ
सबसे बड़ा है
ٱلْمُتَعَالِ
बहुत बुलन्द है
वह परोक्ष और प्रत्यक्ष का ज्ञाता है, महान है, अत्यन्त उच्च है
तफ़्सीर:
क्योंकि अल्लाह उन सभी चीज़ों को जानता है, जो उसकी सृष्टि की इंद्रियों से अनुपस्थित हैं, तथा उन सभी चीज़ों को भी जानता है जिनका उनकी इंद्रियाँ बोध रखती हैं। वह अपनी विशेषताओं, नामों और कार्यों में महान है। अपने अस्तित्व और विशेषताओं के साथ अपने प्रत्येक प्राणी से ऊँचा है।
आयत 10
سَوَآءٌۭ مِّنكُم مَّنْ أَسَرَّ ٱلْقَوْلَ وَمَن جَهَرَ بِهِۦ وَمَنْ هُوَ مُسْتَخْفٍۭ بِٱلَّيْلِ وَسَارِبٌۢ بِٱلنَّهَارِ
سَوَآءٌۭ
यक्साँ/बराबर है
مِّنكُم
तुम में से
مَّنْ
जो
أَسَرَّ
छुपा कर करे
ٱلْقَوْلَ
बात को
وَمَن
और जो कोई
جَهَرَ
ज़ाहिर करे
بِهِۦ
उसे
وَمَنْ
और जो कोई
هُوَ
वो
مُسْتَخْفٍۭ
छुपने वाला है
بِٱلَّيْلِ
रात को
وَسَارِبٌۢ
और चलने वाला है
بِٱلنَّهَارِ
दिन को
तुममें से कोई चुपके से बात करे और जो कोई ज़ोर से और जो कोई रात में छिपता हो और जो दिन में चलता-फिरता दीख पड़ता हो उसके लिए सब बराबर है
तफ़्सीर:
वह भेद और छिपे हुए को जानता है। (ऐ लोगो!) तुममें से जो व्यक्ति बात को छिपाता है और जो इसकी घोषणा करता है, दोनों उसके ज्ञान में बराबर हैं। इसी तरह जो रात के अंधेरे में लोगों की आँखों से छिपा हुआ है और जो दिन के उजाले में अपने कार्यों से स्पष्ट है, सब उसके ज्ञान में बराबर हैं।
आज की ज़िंदगी में सबक़
कायनात की तख्लीक और इंसान के आमाल की निगरानी का ज़िक्र है। यह हमें सिखाता है कि हर इंसान की हालत तब तक नहीं बदलती जब तक वह खुद अपने अंदर तब्दीली की कोशिश न करे।
आयत 11
لَهُۥ مُعَقِّبَـٰتٌۭ مِّنۢ بَيْنِ يَدَيْهِ وَمِنْ خَلْفِهِۦ يَحْفَظُونَهُۥ مِنْ أَمْرِ ٱللَّهِ ۗ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يُغَيِّرُ مَا بِقَوْمٍ حَتَّىٰ يُغَيِّرُوا۟ مَا بِأَنفُسِهِمْ ۗ وَإِذَآ أَرَادَ ٱللَّهُ بِقَوْمٍۢ سُوٓءًۭا فَلَا مَرَدَّ لَهُۥ ۚ وَمَا لَهُم مِّن دُونِهِۦ مِن وَالٍ
لَهُۥ
उसके लिए
مُعَقِّبَـٰتٌۭ
पहरेदार हैं
مِّنۢ
from
بَيْنِ
(before)
يَدَيْهِ
उसके सामने से
وَمِنْ
and from
خَلْفِهِۦ
और उसके पीछे से
يَحْفَظُونَهُۥ
जो हिफ़ाज़त करते हैं उसकी
مِنْ
by
أَمْرِ
हुक्म से
ٱللَّهِ ۗ
अल्लाह के
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
لَا
(does) not
يُغَيِّرُ
नहीं तबदील करता
مَا
जो
بِقَوْمٍ
किसी क़ौम में है
حَتَّىٰ
यहाँ तक कि
يُغَيِّرُوا۟
वो बदल दें
مَا
उसको जो
بِأَنفُسِهِمْ ۗ
उनके दिलों में है
وَإِذَآ
और जब
أَرَادَ
इरादा करता है
ٱللَّهُ
अल्लाह
بِقَوْمٍۢ
साथ किसी क़ौम के
سُوٓءًۭا
किसी बुराई का
فَلَا
तो नहीं
مَرَدَّ
कोई फेरने वाला
لَهُۥ ۚ
उसे
وَمَا
और नहीं
لَهُم
उनके लिए
مِّن
from
دُونِهِۦ
उसके सिवा
مِن
any
وَالٍ
कोई मददगार
उसके रक्षक (पहरेदार) उसके अपने आगे और पीछे लगे होते हैं जो अल्लाह के आदेश से उसकी रक्षा करते है। किसी क़ौम के लोगों को जो कुछ प्राप्त होता है अल्लाह उसे बदलता नहीं, जब तक कि वे स्वयं अपने आपको न बदल डालें। और जब अल्लाह किसी क़ौम का अनिष्ट चाहता है तो फिर वह उससे टल नहीं सकता, और उससे हटकर उनका कोई समर्थक और संरक्षक भी नहीं
तफ़्सीर:
सर्वशक्तिमान अल्लाह के कुछ फ़रिश्ते ऐसे हैं, जो इनसान के पास बारी-बारी आते हैं। उनमें से कुछ रात में आते हैं, और कुछ दिन के दौरान। वे अल्लाह के आदेश से इनसान की उन समस्त विपत्तियों से रक्षा करते हैं, जिनसे इनसान के बचाव का अल्लाह ने फ़ैसला कर रखा होता है। तथा वे इनसान की बातों और कार्यों को लिखते हैं। निःसंदेह अल्लाह किसी समुदाय की दशा को एक अच्छी स्थिति से उसके विपरीत एक अप्रिय स्थिति में नहीं बदलता, जब तक कि वे अपने स्वयं के धन्यवाद (शुक्र) की स्थिति को न बदल लें। और जब अल्लाह किसी क़ौम को विनष्ट करना चाहता है, तो उसके इरादे को कोई टाल नहीं सकता। और (ऐ लोगो!) तुम्हारा अल्लाह के सिवा कोई संरक्षक नहीं है, जो तुम्हारे मामलों का संरक्षण कर सके, कि तुम अपनी विपत्ति को दूर करने के लिए उसका सहारा ले सको।
आयत 12
هُوَ ٱلَّذِى يُرِيكُمُ ٱلْبَرْقَ خَوْفًۭا وَطَمَعًۭا وَيُنشِئُ ٱلسَّحَابَ ٱلثِّقَالَ
هُوَ
वो ही है
ٱلَّذِى
जो
يُرِيكُمُ
दिखाता है तुम्हें
ٱلْبَرْقَ
बिजली की चमक
خَوْفًۭا
ख़ौफ़
وَطَمَعًۭا
और उम्मीद से
وَيُنشِئُ
और वो उठाता है
ٱلسَّحَابَ
बादल
ٱلثِّقَالَ
बोझल
वही है जो भय और आशा के निमित्त तुम्हें बिजली की चमक दिखाता है और बोझिल बादलों को उठाता है
तफ़्सीर:
वही है जो तुम्हें (ऐ लोगो!) बिजली दिखाता है, और उसके द्वारा तुम्हारे लिए चिर्री का भय और वर्षा की आशा इकट्ठा कर देता है। तथा वही है जो तुम्हारे लिए भारी वर्षा के पानी से भरा हुआ बादल पैदा करता है।
आयत 13
وَيُسَبِّحُ ٱلرَّعْدُ بِحَمْدِهِۦ وَٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ مِنْ خِيفَتِهِۦ وَيُرْسِلُ ٱلصَّوَٰعِقَ فَيُصِيبُ بِهَا مَن يَشَآءُ وَهُمْ يُجَـٰدِلُونَ فِى ٱللَّهِ وَهُوَ شَدِيدُ ٱلْمِحَالِ
وَيُسَبِّحُ
और तस्बीह करती है
ٱلرَّعْدُ
कड़क
بِحَمْدِهِۦ
साथ उसकी तारीफ़ के
وَٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ
और फ़रिश्ते
مِنْ
for
خِيفَتِهِۦ
उसके ख़ौफ़ से
وَيُرْسِلُ
और वो भेजता है
ٱلصَّوَٰعِقَ
कड़कती बिजलियों को
فَيُصِيبُ
फिर वो पहुँचाता है
بِهَا
उन्हें
مَن
जिस पर
يَشَآءُ
वो चाहता है
وَهُمْ
हालाँकि वो
يُجَـٰدِلُونَ
वो झगड़ रहे होते हैं
فِى
about
ٱللَّهِ
अल्लाह के बारे में
وَهُوَ
और वो
شَدِيدُ
सख़्त
ٱلْمِحَالِ
क़ुव्वत वाला है
बादल की गरज उसका गुणगान करती है और उसके भय से काँपते हुए फ़रिश्ते भी। वही कड़कती बिजलियाँ भेजता है, फिर जिसपर चाहता है उन्हें गिरा देता है, जबकि वे अल्लाह के विषय में झगड़ रहे होते है। निश्चय ही उसकी चाल बड़ी सख़्त है
तफ़्सीर:
और बिजली की कड़क अपने पालनहार की प्रशंसा के साथ उसकी पवित्रता का गान करती है और फ़रिश्ते अपने पालनहार की पवित्रता का गुणगान उसके भय से तथा उसके प्रताप और सम्मान में करते हैं। और अल्लाह अपने प्राणियों में से जिसपर चाहता है, जलाने वाली बिजलियाँ भेजकर उसे विनष्ट कर देता है। जबकि काफ़िर लोग अल्लाह की एकता (एकेश्वरवाद) के विषय में झगड़ते हैं, और अल्लाह बहुत समर्थ और शक्तिशाली है। अतः वह जो चीज़ भी चाहता है, उसे कर गुज़रता है।
आयत 14
لَهُۥ دَعْوَةُ ٱلْحَقِّ ۖ وَٱلَّذِينَ يَدْعُونَ مِن دُونِهِۦ لَا يَسْتَجِيبُونَ لَهُم بِشَىْءٍ إِلَّا كَبَـٰسِطِ كَفَّيْهِ إِلَى ٱلْمَآءِ لِيَبْلُغَ فَاهُ وَمَا هُوَ بِبَـٰلِغِهِۦ ۚ وَمَا دُعَآءُ ٱلْكَـٰفِرِينَ إِلَّا فِى ضَلَـٰلٍۢ
لَهُۥ
उसी के लिए है
دَعْوَةُ
पुकारना
ٱلْحَقِّ ۖ
बरहक़
وَٱلَّذِينَ
और जिन्हें
يَدْعُونَ
वो पुकारते हैं
مِن
besides Him
دُونِهِۦ
उसके सिवा
لَا
not
يَسْتَجِيبُونَ
नहीं वो जवाब देते
لَهُم
उनको
بِشَىْءٍ
कुछ भी
إِلَّا
मगर
كَبَـٰسِطِ
मानिन्द फैलाने वाले के
كَفَّيْهِ
अपनी दोनों हथेलियाँ
إِلَى
towards
ٱلْمَآءِ
तरफ़ पानी के
لِيَبْلُغَ
ताकि वो पहुँचे
فَاهُ
उसके मुँह को
وَمَا
और नहीं
هُوَ
वो
بِبَـٰلِغِهِۦ ۚ
पहुँचने वाला उसे
وَمَا
और नहीं
دُعَآءُ
दुआ
ٱلْكَـٰفِرِينَ
काफ़िरों की
إِلَّا
मगर
فِى
in
ضَلَـٰلٍۢ
गुमराही में
उसी के लिए सच्ची पुकार है। उससे हटकर जिनको वे पुकारते है, वे उनकी पुकार का कुछ भी उत्तर नहीं देते। बस यह ऐसा ही होता है जैसे कोई अपने दोनों हाथ पानी की ओर इसलिए फैलाए कि वह उसके मुँह में पहुँच जाए, हालाँकि वह उसतक पहुँचनेवाला नहीं। कुफ़्र करनेवालों की पुकार तो बस भटकने ही के लिए होती है
तफ़्सीर:
केवल अल्लाह ही के लिए तौह़ीद (एकेश्वरवाद) की पुकार है, जिसमें उसका कोई साझी नहीं है। और जिन मूर्तियों को मुश्रिक लोग अल्लाह को छोड़कर पुकारते हैं, वे किसी भी मामले में उन्हें पुकारने वाले की पुकार का जवाब नहीं देतीं। उनका उन मूर्तियों को पुकारना एक प्यासे की तरह है, जो पानी की ओर अपना हाथ फैलाता है, ताकि वह उसके मुँह तक पहुँच जाए और वह उसे पी ले। हालाँकि पानी उसके मुँह तक कभी भी पहुँचने वाला नहीं। दरअसल काफ़िरों का अपनी मूर्तियों को पुकारना व्यर्थ है और सही से दूर है। क्योंकि वे उन्हें न कोई लाभ पहुँचा सकती हैं और न कोई हानि दूर कर सकती हैं।
आयत 15
وَلِلَّهِ يَسْجُدُ مَن فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ طَوْعًۭا وَكَرْهًۭا وَظِلَـٰلُهُم بِٱلْغُدُوِّ وَٱلْـَٔاصَالِ ۩
وَلِلَّهِ
और अल्लाह ही के लिए
يَسْجُدُ
सजदा करता है
مَن
जो कोई
فِى
(is) in
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों में
وَٱلْأَرْضِ
और ज़मीन में है
طَوْعًۭا
ख़ुशी से
وَكَرْهًۭا
और नाख़ुशी से
وَظِلَـٰلُهُم
और साये उनके
بِٱلْغُدُوِّ
सुबह
وَٱلْـَٔاصَالِ ۩
और शाम
आकाशों और धरती में जो भी है स्वेच्छापूर्वक या विवशतापूर्वक अल्लाह ही को सजदा कर रहे है और उनकी परछाइयाँ भी प्रातः और संध्या समय
तफ़्सीर:
आकाशों और धरती में जो भी हैं, सब अकेले अल्लाह ही को सजदा करते हैं। इसमें मोमिन और काफ़िर बराबर हैं। सिवाय इसके कि मोमिन उसके सामने स्वेच्छा से झुकता और सजदा करता है। जबकि काफ़िर न चाहते हुए भी उसके सामने झुकने पर मजबूर होता है। तथा उसकी प्रकृति उसे उसके सामने स्वेच्छा से झुकने के लिए निर्देश देती है। और प्राणियों में से जिसकी भी परछाई है, उसकी परछाई दिन की शुरुआत और उसके अंत में उसी के अधीन होती है।
आयत 16
قُلْ مَن رَّبُّ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ قُلِ ٱللَّهُ ۚ قُلْ أَفَٱتَّخَذْتُم مِّن دُونِهِۦٓ أَوْلِيَآءَ لَا يَمْلِكُونَ لِأَنفُسِهِمْ نَفْعًۭا وَلَا ضَرًّۭا ۚ قُلْ هَلْ يَسْتَوِى ٱلْأَعْمَىٰ وَٱلْبَصِيرُ أَمْ هَلْ تَسْتَوِى ٱلظُّلُمَـٰتُ وَٱلنُّورُ ۗ أَمْ جَعَلُوا۟ لِلَّهِ شُرَكَآءَ خَلَقُوا۟ كَخَلْقِهِۦ فَتَشَـٰبَهَ ٱلْخَلْقُ عَلَيْهِمْ ۚ قُلِ ٱللَّهُ خَـٰلِقُ كُلِّ شَىْءٍۢ وَهُوَ ٱلْوَٰحِدُ ٱلْقَهَّـٰرُ
قُلْ
कह दीजिए
مَن
कौन है
رَّبُّ
रब
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों
وَٱلْأَرْضِ
और ज़मीन का
قُلِ
कह दीजिए
ٱللَّهُ ۚ
अल्लाह
قُلْ
कह दीजिए
أَفَٱتَّخَذْتُم
क्या फिर (भी) बना लिए तुमने
مِّن
from
دُونِهِۦٓ
उसके सिवा
أَوْلِيَآءَ
हिमायती
لَا
not
يَمْلِكُونَ
नहीं वो मालिक हो सकते
لِأَنفُسِهِمْ
अपने नफ़्सों के लिए
نَفْعًۭا
किसी नफ़ा के
وَلَا
और ना
ضَرًّۭا ۚ
किसी नुक़सान के
قُلْ
कह दीजिए
هَلْ
क्या
يَسْتَوِى
बराबर हो सकता है
ٱلْأَعْمَىٰ
अँधा
وَٱلْبَصِيرُ
और देखने वाला
أَمْ
या
هَلْ
क्या
تَسْتَوِى
बराबर हो सकते हैं
ٱلظُّلُمَـٰتُ
अँधेरे
وَٱلنُّورُ ۗ
और रोशनी
أَمْ
या
جَعَلُوا۟
उन्होंने बना लिए
لِلَّهِ
अल्लाह के लिए
شُرَكَآءَ
कुछ शरीक
خَلَقُوا۟
उन्होंने पैदा किया क्या
كَخَلْقِهِۦ
मानिन्द उसकी तख़लीक़ के
فَتَشَـٰبَهَ
तो मुश्तबाह हो गई
ٱلْخَلْقُ
पैदाइश
عَلَيْهِمْ ۚ
उन पर
قُلِ
कह दीजिए
ٱللَّهُ
अल्लाह
خَـٰلِقُ
ख़ालिक़ है
كُلِّ
हर
شَىْءٍۢ
चीज़ का
وَهُوَ
और वो ही
ٱلْوَٰحِدُ
अकेला है
ٱلْقَهَّـٰرُ
बहुत ज़बरदस्त है
कहो, "आकाशों और धरती का रब कौन है?" कहो, "अल्लाह" कह दो, "फिर क्या तुमने उससे हटकर दूसरों को अपना संरक्षक बना रखा है, जिन्हें स्वयं अपने भी किसी लाभ का न अधिकार प्राप्त है और न किसी हानि का?" कहो, "क्या अंधा और आँखोंवाला दोनों बराबर होते है? या बराबर होते हो अँधरे और प्रकाश? या जिनको अल्लाह का सहभागी ठहराया है, उन्होंने भी कुछ पैदा किया है, जैसा कि उसने पैदा किया है, जिसके कारण सृष्टि का मामला इनके लिए गडुमडु हो गया है?" कहो, "हर चीज़ को पैदा करनेवाला अल्लाह है और वह अकेला है, सब पर प्रभावी!"
तफ़्सीर:
(ऐ रसूल!) अल्लाह के साथ दूसरों की पूजा करने वाले काफ़िरों से कह दें : आकाशों और धरती को पैदा करने वाला और उनके मामलों का व्यवस्थापक कौन है? (ऐ रसूल!) कह दें : अल्लाह ही उनका पैदा करने वाला और उनके मामले का प्रबंध करने वाला है और तुम इस बात को स्वीकार करते हो। (ऐ रसूल!) उनसे कह दें : क्या तुमने अल्लाह को छोड़कर अपने लिए ऐसे विवश सहायक बना रखे हैं, जो खुद अपने लिए न कोई लाभ ला सकते हैं और न कोई नुक़सान दूर सर सकते हैं, तो वे दूसरों के लिए ऐसा कहाँ से कर सकते हैं? (ऐ रसूल!) उनसे कह दीजिए : क्या काफ़िर जो दृष्टि से अंधा है और मोमिन जो द्रष्टा और मार्गदर्शित है, दोनों बराबर हो सकते हैं? या क्या कुफ़्र जो अंधकार है और ईमान जो रोशनी है, दोनों बराबर हो सकते हैं? क्या उन लोगों ने पैदा करने के मामले में कुछ ऐसे लोगों को अल्लाह का साझी बना रखा है, जिन्होंने अल्लाह के पैदा करने की तरह कुछ पैदा किया है, जिसके कारण उनके लिए अल्लाह की रचना उनके साझियों की रचना के साथ गडमड हो गई है? (ऐ रसूल!) उनसे कह दीजिए : केवल अल्लाह ही हर चीज़ का पैदा करने वाला है। पैदा करने में उसका कोई साझी नहीं है। और वही अकेला पूज्य है, जो एकमात्र इबादत किए जाने का हक़दार है, हर चीज़ पर प्रभुत्वशाली है।
आयत 17
أَنزَلَ مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءًۭ فَسَالَتْ أَوْدِيَةٌۢ بِقَدَرِهَا فَٱحْتَمَلَ ٱلسَّيْلُ زَبَدًۭا رَّابِيًۭا ۚ وَمِمَّا يُوقِدُونَ عَلَيْهِ فِى ٱلنَّارِ ٱبْتِغَآءَ حِلْيَةٍ أَوْ مَتَـٰعٍۢ زَبَدٌۭ مِّثْلُهُۥ ۚ كَذَٰلِكَ يَضْرِبُ ٱللَّهُ ٱلْحَقَّ وَٱلْبَـٰطِلَ ۚ فَأَمَّا ٱلزَّبَدُ فَيَذْهَبُ جُفَآءًۭ ۖ وَأَمَّا مَا يَنفَعُ ٱلنَّاسَ فَيَمْكُثُ فِى ٱلْأَرْضِ ۚ كَذَٰلِكَ يَضْرِبُ ٱللَّهُ ٱلْأَمْثَالَ
أَنزَلَ
उसने उतारा
مِنَ
from
ٱلسَّمَآءِ
आसमान से
مَآءًۭ
पानी
فَسَالَتْ
तो बह निकलीं
أَوْدِيَةٌۢ
वादियाँ
بِقَدَرِهَا
अपने-अपने अन्दाज़े से
فَٱحْتَمَلَ
तो उठा लिया
ٱلسَّيْلُ
सैलाब ने
زَبَدًۭا
झाग
رَّابِيًۭا ۚ
चढ़ा हुआ
وَمِمَّا
और उसमें से जो
يُوقِدُونَ
वो जलाते हैं
عَلَيْهِ
उस पर
فِى
in
ٱلنَّارِ
आग में
ٱبْتِغَآءَ
हासिल करने को
حِلْيَةٍ
ज़ेवर
أَوْ
या
مَتَـٰعٍۢ
बर्तन
زَبَدٌۭ
झाग है
مِّثْلُهُۥ ۚ
इस जैसा
كَذَٰلِكَ
इसी तरह
يَضْرِبُ
बयान करता है
ٱللَّهُ
अल्लाह
ٱلْحَقَّ
हक़
وَٱلْبَـٰطِلَ ۚ
और बातिल को
فَأَمَّا
तो रहा
ٱلزَّبَدُ
झाग
فَيَذْهَبُ
तो वो चला जाता है
جُفَآءًۭ ۖ
नाकारा होकर
وَأَمَّا
और लेकिन
مَا
जो
يَنفَعُ
नफ़ा देता है
ٱلنَّاسَ
लोगों को
فَيَمْكُثُ
तो वो ठहर जाता है
فِى
in
ٱلْأَرْضِ ۚ
ज़मीन में
كَذَٰلِكَ
इसी तरह
يَضْرِبُ
बयान करता है
ٱللَّهُ
अल्लाह
ٱلْأَمْثَالَ
मिसालें
उसने आकाश से पानी उतारा तो नदी-नाले अपनी-अपनी समाई के अनुसार बह निकले। फिर पानी के बहाव ने उभरे हुए झाग को उठा लिया और उसमें से भी, जिसे वे ज़ेवर या दूसरे सामान बनाने के लिए आग में तपाते हैं, ऐसा ही झाग उठता है। इस प्रकार अल्लाह सत्य और असत्य की मिसाल बयान करता है। फिर जो झाग है वह तो सूखकर नष्ट हो जाता है और जो कुछ लोगों को लाभ पहुँचानेवाला होता है, वह धरती में ठहर जाता है। इसी प्रकार अल्लाह दृष्टांत प्रस्तुत करता है
तफ़्सीर:
अल्लाह ने असत्य के मिटने और सत्य के बाक़ी रहने का एक उदाहरण आकाश से उतरने वाली बारिश के पानी के साथ दिया है, जिसके साथ घाटियाँ, अपने-अपने छोटे या बड़े आकार के अनुसार, बह निकलीं। फिर इस रेले ने झाग और कूड़ा पानी के ऊपर उठा लिया। अल्लाह ने सत्य और असत्य का एक दूसरा उदाहरण कुछ क़ीमती धातुओं के साथ दिया है, जिन्हें लोग पिघलाकर ज़ेवर बनाने के लिए तपाते हैं। तो इसका झाग इसके ऊपर आ जाता है, जिस तरह कि उसका झाग उसके ऊपर होता है। इन दो उदाहरणों के साथ, अल्लाह सत्य और असत्य के उदाहरण प्रस्तुत करता है। चुनाँचे असत्य जल पर तैरते हुए मैल और झाग की तरह तथा उस ज़ंग (मोरचे) के समान है, जो धातु को तपाने से अलग हो जाता है। जबकि सत्य शुद्ध जल के समान है जिसमें से पिया जाता है, और वह फल, चारा और घास उगाता है, तथा उस धातु के समान है जो पिघलाने के बाद बचता है, जिससे लोग लाभान्वित होते हैं। जिस तरह अल्लाह ने ये दो उदाहरण दिए हैं, वैसे ही अल्लाह लोगों के लिए उदाहरणों को प्रस्तुत करता रहता है, ताकि असत्य से सत्य स्पष्ट हो जाए।
आयत 18
لِلَّذِينَ ٱسْتَجَابُوا۟ لِرَبِّهِمُ ٱلْحُسْنَىٰ ۚ وَٱلَّذِينَ لَمْ يَسْتَجِيبُوا۟ لَهُۥ لَوْ أَنَّ لَهُم مَّا فِى ٱلْأَرْضِ جَمِيعًۭا وَمِثْلَهُۥ مَعَهُۥ لَٱفْتَدَوْا۟ بِهِۦٓ ۚ أُو۟لَـٰٓئِكَ لَهُمْ سُوٓءُ ٱلْحِسَابِ وَمَأْوَىٰهُمْ جَهَنَّمُ ۖ وَبِئْسَ ٱلْمِهَادُ
لِلَّذِينَ
उन लोगों के लिए जिन्होंने
ٱسْتَجَابُوا۟
क़ुबूल किया (हुक्म)
لِرَبِّهِمُ
अपने रब का
ٱلْحُسْنَىٰ ۚ
भलाई है
وَٱلَّذِينَ
और जिन लोगों ने
لَمْ
नहीं
يَسْتَجِيبُوا۟
कुबूल किया
لَهُۥ
उसे
لَوْ
काश
أَنَّ
कि (होता)
لَهُم
उनके लिए
مَّا
जो कुछ
فِى
(is) in
ٱلْأَرْضِ
ज़मीन में है
جَمِيعًۭا
सबका सब
وَمِثْلَهُۥ
और इसकी मानिन्द
مَعَهُۥ
साथ इसके
لَٱفْتَدَوْا۟
अलबत्ता वो फ़िदये में दे देते
بِهِۦٓ ۚ
उसको
أُو۟لَـٰٓئِكَ
यही लोग हैं
لَهُمْ
उनके लिए है
سُوٓءُ
बुरा
ٱلْحِسَابِ
हिसाब
وَمَأْوَىٰهُمْ
और ठिकाना उनका
جَهَنَّمُ ۖ
जहन्नम है
وَبِئْسَ
और वो बहुत ही बुरा
ٱلْمِهَادُ
ठिकाना है
जिन लोगों ने अपने रब का आमंत्रण स्वीकार कर लिया, उनके लिए अच्छा पुरस्कार है। रहे वे लोग जिन्होंने उसे स्वीकार नहीं किया यदि उनके पास वह सब कुछ हो जो धरती में हैं, बल्कि उसके साथ उतना और भी हो तो अपनी मुक्ति के लिए वे सब दे डालें। वही हैं, जिनका बुरा हिसाब होगा। उनका ठिकाना जहन्नम है और वह अत्यन्त बुरा विश्राम-स्थल है
तफ़्सीर:
जिन लोगों ने अपने पालनहार की बात मान ली, जो उसने उन्हें अपने एकत्व (एकेश्वरवाद) और आज्ञापालन के लिए आमंत्रित किया, उनके लिए सबसे अच्छा बदला है और वह जन्नत है। और काफ़िर लोग जिन्होंने अपने पालनहार की तौहीद तथा आज्ञापालन के आमंत्रण को स्वीकार नहीं किया, यदि ऐसा हो जाए कि दुनिया का सारा धन उनके पास आ जाए और इसके साथ उनके पास इसके बराबर और भी धन आ जाए, तो वे अपने आपको अज़ाब से छुड़ाने के लिए वह सारा धन अवश्य खर्च कर देंगे। अल्लाह के आमंत्रण को स्वीकार न करने वाले इन लोगों से उनके सभी पापों का हिसाब लिया जाएगा। और उनका निवास जिसमें वे रहेंगे, जहन्नम है। और उनका बिस्तर तथा ठिकाना जो कि आग है, बहुत बुरा है।
आयत 19
۞ أَفَمَن يَعْلَمُ أَنَّمَآ أُنزِلَ إِلَيْكَ مِن رَّبِّكَ ٱلْحَقُّ كَمَنْ هُوَ أَعْمَىٰٓ ۚ إِنَّمَا يَتَذَكَّرُ أُو۟لُوا۟ ٱلْأَلْبَـٰبِ
۞ أَفَمَن
क्या फिर जो
يَعْلَمُ
जानता है
أَنَّمَآ
कि बेशक जो
أُنزِلَ
उतारा गया
إِلَيْكَ
तरफ़ आपके
مِن
from
رَّبِّكَ
आपके रब की तरफ़ से
ٱلْحَقُّ
हक़ है
كَمَنْ
उसकी मानिन्द है जो
هُوَ
वो
أَعْمَىٰٓ ۚ
अँधा है
إِنَّمَا
बेशक
يَتَذَكَّرُ
नसीहत पकड़ते हैं
أُو۟لُوا۟
men
ٱلْأَلْبَـٰبِ
अक़्ल वाले
भला वह व्यक्ति जो जानता है कि जो कुछ तुम पर उतरा है तुम्हारे रब की ओर से सत्य है, कभी उस जैसा हो सकता है जो अंधा है? परन्तु समझते तो वही है जो बुद्धि और समझ रखते है,
तफ़्सीर:
वह आदमी जो जानता है कि अल्लाह ने जो कुछ (ऐ रसूल) आप पर अपनी ओर से उतारा है, वही सत्य है, जिसमें कोई संदेह नहीं है, और वह अल्लाह के आमंत्रण को स्वीकार करने वाला मोमिन व्यक्ति है, उस व्यक्ति के समान नहीं हो सकता, जो अंधा है और वह अल्लाह के आमंत्रण को स्वीकार ने करने वाला काफ़िर व्कायक्ति है। तथ्य यह है कि इससे सद्बुद्धि वाले लोग ही सीख लेते और उपदेश ग्रहण करते हैं।
आयत 20
ٱلَّذِينَ يُوفُونَ بِعَهْدِ ٱللَّهِ وَلَا يَنقُضُونَ ٱلْمِيثَـٰقَ
ٱلَّذِينَ
वो लोग जो
يُوفُونَ
पूरा करते हैं
بِعَهْدِ
the covenant
ٱللَّهِ
अल्लाह के अहद को
وَلَا
और नहीं
يَنقُضُونَ
वो तोड़ते
ٱلْمِيثَـٰقَ
पुख़्ता वादे को
जो अल्लाह के साथ की हुई प्रतिज्ञा को पूरा करते है औऱ अभिवचन को तोड़ते नहीं,
तफ़्सीर:
जिन लोगों ने अल्लाह का आमंत्रण स्वीकार किया, वे ऐसे लोग हैं जो अल्लाह के साथ की हुई प्रतिज्ञा या उसके बंदों के साथ की हुई प्रतिज्ञा को पूरा करते हैं। तथा अल्लाह के साथ या उसके अलावा के साथ की हुई दृढ़ प्रतिज्ञाओं को नहीं तोड़ते।
आज की ज़िंदगी में सबक़
बिजली-बादल की मिसाल और हक-बातिल के फर्क का ज़िक्र है। यह सबक हमें सिखाता है कि हक हमेशा बातिल पर ग़ालिब आता है, जैसे झाग पानी की सतह से उड़ जाता है।
आयत 21
وَٱلَّذِينَ يَصِلُونَ مَآ أَمَرَ ٱللَّهُ بِهِۦٓ أَن يُوصَلَ وَيَخْشَوْنَ رَبَّهُمْ وَيَخَافُونَ سُوٓءَ ٱلْحِسَابِ
وَٱلَّذِينَ
और वो जो
يَصِلُونَ
जोड़ते हैं
مَآ
उसको जो
أَمَرَ
हुक्म दिया
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
بِهِۦٓ
जिस का
أَن
कि
يُوصَلَ
वो जोड़ा जाए
وَيَخْشَوْنَ
और वो डरते हैं
رَبَّهُمْ
अपने रब से
وَيَخَافُونَ
और वो डरते हैं
سُوٓءَ
बुरे
ٱلْحِسَابِ
हिसाब से
और जो ऐसे हैं कि अल्लाह नॆ जिसे जोड़ने का आदेश दिया है उसे जोड़ते हैं और अपनॆ रब से डरते रहते हैं और बुरॆ हिसाब का उन्हॆं डर लगा रहता है
तफ़्सीर:
और वे ऐसे लोग हैं, जो उन सभी रिश्तों-नातों को जोड़ते हैं, जिन्हें जोड़ने का अल्लाह ने आदेश दिया है, और वे अल्लाह का ऐसा भय रखते हैं, जो उन्हें अल्लाह के आदेशों का पानल करने और उसके निषेधों से बचने के लिए प्रेरित करता है, तथा उन्हें डर है कि कहीं अल्लाह उनके किए हुए प्रत्येक पाप का हिसाब न ले। क्योंकि जिसके हिसाब में एक-एक चीज़ की पड़ताल की गई, उसका सर्वनाश हो जाएगा।
आयत 22
وَٱلَّذِينَ صَبَرُوا۟ ٱبْتِغَآءَ وَجْهِ رَبِّهِمْ وَأَقَامُوا۟ ٱلصَّلَوٰةَ وَأَنفَقُوا۟ مِمَّا رَزَقْنَـٰهُمْ سِرًّۭا وَعَلَانِيَةًۭ وَيَدْرَءُونَ بِٱلْحَسَنَةِ ٱلسَّيِّئَةَ أُو۟لَـٰٓئِكَ لَهُمْ عُقْبَى ٱلدَّارِ
وَٱلَّذِينَ
और वो जिन्होंने
صَبَرُوا۟
सब्र किया
ٱبْتِغَآءَ
चाहने के लिए
وَجْهِ
चेहरा
رَبِّهِمْ
अपने रब का
وَأَقَامُوا۟
और क़ायम की
ٱلصَّلَوٰةَ
नमाज़
وَأَنفَقُوا۟
और ख़र्च किया
مِمَّا
उसमें से जो
رَزَقْنَـٰهُمْ
रिज़्क़ दिया हमने उन्हें
سِرًّۭا
पोशीदा
وَعَلَانِيَةًۭ
और ज़ाहिर
وَيَدْرَءُونَ
और वो दूर करते हैं
بِٱلْحَسَنَةِ
साथ भलाई के
ٱلسَّيِّئَةَ
बुराई को
أُو۟لَـٰٓئِكَ
यही लोग हैं
لَهُمْ
उनके लिए है
عُقْبَى
अंजाम
ٱلدَّارِ
घर का (आख़िरत के)
और जिन लोगों ने अपने रब की प्रसन्नता की चाह में धैर्य से काम लिया और नमाज़ क़ायम की और जो कुछ हमने उन्हें दिया है, उसमें से खुले और छिपे ख़र्च किया, और भलाई के द्वारा बुराई को दूर करते है। वही लोग है जिनके लिए आख़िरत के घर का अच्छा परिणाम है,
तफ़्सीर:
और वे ऐसे लोग हैं, जिन्होंने अल्लाह की प्रसन्नता के लिए अल्लाह के आज्ञापालन पर तथा अल्लाह ने जो कुछ अच्छा या बुरा उनपर नियत किया है, उसपर सब्र किया और अल्लाह की अवज्ञा से रुक गए, और संपूर्ण रूप से नमाज़ अदा किया, तथा हमारे दिए हुए धन से अनिवार्य हुक़ूक़ (अधिकार) का भुगतान किया, और उसमें से कभी दिखावे से बचने के लिए चुपके से स्वेच्छिक दान दिया और कभी खुले तौर पर दान किया ताकि दूसरे लोग उनका अनुकरण करें, तथा उनके साथ जो दुर्व्यवहार करे उसकी बुराई को उसके साथ अच्छा व्यवहार करके दूर करते हैं। इन विशेषताओं से विशेषित लोगों के लिए क़ियामत के दिन अच्छा परिणाम है।
आयत 23
جَنَّـٰتُ عَدْنٍۢ يَدْخُلُونَهَا وَمَن صَلَحَ مِنْ ءَابَآئِهِمْ وَأَزْوَٰجِهِمْ وَذُرِّيَّـٰتِهِمْ ۖ وَٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ يَدْخُلُونَ عَلَيْهِم مِّن كُلِّ بَابٍۢ
جَنَّـٰتُ
बाग़ात हैं
عَدْنٍۢ
हमेशगी के
يَدْخُلُونَهَا
वो दाख़िल होंगे उनमें
وَمَن
और जो कोई
صَلَحَ
नेक हुआ
مِنْ
among
ءَابَآئِهِمْ
उनके आबा ओ अजदाद में से
وَأَزْوَٰجِهِمْ
और उनकी बीवियों में से
وَذُرِّيَّـٰتِهِمْ ۖ
और उनकी औलाद में से
وَٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ
और फ़रिश्ते
يَدْخُلُونَ
वो दाख़िल होंगे
عَلَيْهِم
उन पर
مِّن
from
كُلِّ
every
بَابٍۢ
हर दरवाज़े से
अर्थात सदैव रहने के बाग़ है जिनमें वे प्रवेश करेंगे और उनके बाप-दादा और उनकी पत्नियों और उनकी सन्तानों में से जो नेक होंगे वे भी और हर दरवाज़े से फ़रिश्ते उनके पास पहुँचेंगे
तफ़्सीर:
यह अच्छा परिणाम ऐसे बाग़ हैं, जिनमें वे स्थायी रूप से समृद्धिपूर्वक रहेंगे। उसमें उनकी नेमत की पूर्ति इससे होगी कि उसमें उनके साथ उनके बाप-दादाओं, माताओं, पत्नियों और संतानों में से नेक लोग भी प्रवेश करेंगे। ताकि उनसे मुलाक़ात के द्वारा उनके आनंद को पूरा कर दिया जाए। और जन्नत में फ़रिश्ते उनके घरों के सभी द्वारों से बधाई देते हुए उनके पास आएँगे।
आयत 24
سَلَـٰمٌ عَلَيْكُم بِمَا صَبَرْتُمْ ۚ فَنِعْمَ عُقْبَى ٱلدَّارِ
سَلَـٰمٌ
सलाम हो
عَلَيْكُم
तुम पर
بِمَا
बवजह उसके जो
صَبَرْتُمْ ۚ
सब्र किया तुमने
فَنِعْمَ
तो कितना अच्छा है
عُقْبَى
अंजाम
ٱلدَّارِ
घर का (आख़िरत के)
(वे कहेंगे) "तुमपर सलाम है उसके बदले में जो तुमने धैर्य से काम लिया।" अतः क्या ही अच्छा परिणाम है आख़िरत के घर का!
तफ़्सीर:
फ़रिश्ते जब भी उनके पास आएँगे, उनका यह कहते हुए अभिवादन करेंगे : तुमपर सलाम (शांति) हो! अर्थात् : तुम अल्लाह के आज्ञापालन और उसके कष्टदायक फैसलों पर धैर्य से काम लेने, और उसकी अवज्ञा से बचने के कारण विपत्तियों से सुरक्षित रहो। तो क्या ही अच्छा है इस घर का परिणाम, जो तुम्हें प्राप्त हुआ है।
आयत 25
وَٱلَّذِينَ يَنقُضُونَ عَهْدَ ٱللَّهِ مِنۢ بَعْدِ مِيثَـٰقِهِۦ وَيَقْطَعُونَ مَآ أَمَرَ ٱللَّهُ بِهِۦٓ أَن يُوصَلَ وَيُفْسِدُونَ فِى ٱلْأَرْضِ ۙ أُو۟لَـٰٓئِكَ لَهُمُ ٱللَّعْنَةُ وَلَهُمْ سُوٓءُ ٱلدَّارِ
وَٱلَّذِينَ
और वो लोग जो
يَنقُضُونَ
तोड़ते हैं
عَهْدَ
अहद को
ٱللَّهِ
अल्लाह के
مِنۢ
from
بَعْدِ
बाद
مِيثَـٰقِهِۦ
उसके पक्का करने के
وَيَقْطَعُونَ
और वो काटते हैं
مَآ
उसको जो
أَمَرَ
हुक्म दिया
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
بِهِۦٓ
जिसका
أَن
कि
يُوصَلَ
वो जोड़ा जाए
وَيُفْسِدُونَ
और वो फ़साद करते हैं
فِى
in
ٱلْأَرْضِ ۙ
ज़मीन में
أُو۟لَـٰٓئِكَ
यही लोग हैं
لَهُمُ
उनके लिए है
ٱللَّعْنَةُ
लानत
وَلَهُمْ
और उन्हीं के लिए है
سُوٓءُ
बुरा
ٱلدَّارِ
घर
रहे वे लोग जो अल्लाह की प्रतिज्ञा को उसे दृढ़ करने के पश्चात तोड़ डालते है और अल्लाह ने जिसे जोड़ने का आदेश दिया है, उसे काटते है और धरती में बिगाड़ पैदा करते है। वहीं है जिनके लिए फिटकार है और जिनके लिए आख़िरत का बुरा घर है
तफ़्सीर:
और जो लोग अल्लाह की प्रतिज्ञा को उसे दृढ़ करने के बाद तोड़ देते हैं, और उन रिश्तों-नातों को काटते हैं, जिन्हें अल्लाह ने जोड़ने का आदेश दिया है, तथा अल्लाह तआला की अवज्ञा करके धरती में उत्पात मचाते हैं। यही अभागे (दुर्भाग्यशाली) लोग हैं, जिनके लिए अल्लाह की दया से निष्कासन है और उनके लिए बुरा परिणाम है, जो कि नरक है।
आयत 26
ٱللَّهُ يَبْسُطُ ٱلرِّزْقَ لِمَن يَشَآءُ وَيَقْدِرُ ۚ وَفَرِحُوا۟ بِٱلْحَيَوٰةِ ٱلدُّنْيَا وَمَا ٱلْحَيَوٰةُ ٱلدُّنْيَا فِى ٱلْـَٔاخِرَةِ إِلَّا مَتَـٰعٌۭ
ٱللَّهُ
अल्लाह
يَبْسُطُ
फैलाता है
ٱلرِّزْقَ
रिज़्क़ को
لِمَن
जिसके लिए
يَشَآءُ
वो चाहता है
وَيَقْدِرُ ۚ
और वो तंग कर देता है
وَفَرِحُوا۟
और वो ख़ुश हो गए
بِٱلْحَيَوٰةِ
ज़िन्दगी पर
ٱلدُّنْيَا
दुनिया की
وَمَا
और नहीं
ٱلْحَيَوٰةُ
ज़िन्दगी
ٱلدُّنْيَا
दुनिया की
فِى
in (comparison to)
ٱلْـَٔاخِرَةِ
आख़िरत (के मुक़ाबले) में
إِلَّا
मगर
مَتَـٰعٌۭ
एक मताअ (हक़ीर)
अल्लाह जिसको चाहता है प्रचुर फैली हुई रोज़ी प्रदान करता है औऱ इसी प्रकार नपी-तुली भी। और वे सांसारिक जीवन में मग्न हैं, हालाँकि सांसारिक जीवन आख़िरत के मुक़ाबले में तो बस अल्प सुख-सामग्री है
तफ़्सीर:
अल्लाह अपने बंदों में से जिसके लिए चाहता है, उसकी रोज़ी में विस्तार कर देता है और जिस पर चाहता है, तंग कर देता है। रोज़ी का विस्तार सौभाग्य और अल्लाह के प्रेम की निशानी नहीं है, और न ही उसका तंग होना दुर्भाग्य की निशानी है। और काफ़िर लोग दुनिया ही के जीवन पर प्रसन्न हैं। इसलिए उसकी ओर झुक गए हैं और उसी पर संतुष्ट हो गए हैं। हालाँकि दुनिया क जीवन आख़िरत के मुक़ाबले में थोड़े-से सामान के सिवा कुछ नहीं है, जो समाप्त हो जाने वाला है।
आयत 27
وَيَقُولُ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ لَوْلَآ أُنزِلَ عَلَيْهِ ءَايَةٌۭ مِّن رَّبِّهِۦ ۗ قُلْ إِنَّ ٱللَّهَ يُضِلُّ مَن يَشَآءُ وَيَهْدِىٓ إِلَيْهِ مَنْ أَنَابَ
وَيَقُولُ
और कहते हैं
ٱلَّذِينَ
वो लोग जिन्होंने
كَفَرُوا۟
कुफ़्र किया
لَوْلَآ
क्यों नहीं
أُنزِلَ
उतारी गई
عَلَيْهِ
उस पर
ءَايَةٌۭ
कोई निशानी
مِّن
from
رَّبِّهِۦ ۗ
उसके रब की तरफ़ से
قُلْ
कह दीजिए
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
يُضِلُّ
भटकाता है
مَن
जिसे
يَشَآءُ
वो चाहता है
وَيَهْدِىٓ
और वो हिदायत देता है
إِلَيْهِ
अपनी तरफ़
مَنْ
उसे जो
أَنَابَ
रुजूअ करे
जिन लोगों ने इनकार किया वे कहते है, "उसपर उसके रब की ओर से कोई निशानी क्यों नहीं उतरी?" कहो, "अल्लाह जिसे चाहता है पथभ्रष्ट कर देता है। अपनी ओर से वह मार्गदर्शन उसी का करता है जो रुजू होता है।"
तफ़्सीर:
अल्लाह और उसकी निशानियों का इनकार करने वाले कहते हैं : मुह़म्मद पर उनके पालनहार की ओर से कोई साक्षात निशानी क्यों नहीं उतारी गई, जो उनकी सच्चाई को इंगित करती, फिर हम उनपर ईमान ले आते। (ऐ रसूल!) आप इन प्रस्ताव रखने वालों से कह दें : अल्लाह जिसे चाहता है, अपने न्याय के अनुसार गुमराह करता है। और अपनी कृपा से उसका अपनी ओर मार्गदर्शन करता है, जो उसकी ओर तौबा के साथ लौटता है। तथा मार्गदर्शन उनके हाथ में नहीं है कि वे उसे निशानियाँ उतारने के साथ जोड़ें।
आयत 28
ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَتَطْمَئِنُّ قُلُوبُهُم بِذِكْرِ ٱللَّهِ ۗ أَلَا بِذِكْرِ ٱللَّهِ تَطْمَئِنُّ ٱلْقُلُوبُ
ٱلَّذِينَ
वो लोग जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
وَتَطْمَئِنُّ
और मुत्मईन होते हैं
قُلُوبُهُم
दिल उनके
بِذِكْرِ
in the remembrance
ٱللَّهِ ۗ
अल्लाह के ज़िक्र से
أَلَا
ख़बरदार
بِذِكْرِ
in the remembrance
ٱللَّهِ
अल्लाह के ज़िक्र से
تَطْمَئِنُّ
मुत्मईन हो जाते हैं
ٱلْقُلُوبُ
दिल
ऐसे ही लोग है जो ईमान लाए और जिनके दिलों को अल्लाह के स्मरण से आराम और चैन मिलता है। सुन लो, अल्लाह के स्मरण से ही दिलों को संतोष प्राप्त हुआ करता है
तफ़्सीर:
ये लोग जिन्हें अल्लाह मार्गदर्शन प्रदान करता है, वे हैं जो ईमान लाए, और उनके दिलों को अल्लाह को याद करने; उसकी पवित्रता का गान करने और उसकी स्तुति व प्रशंसा करने, तथा उसकी किताब की तिलावत करने और उसे सुनने से और इसके अलावा अन्य प्रकार के स्मरण से चैन और आराम मिलता है। सुन लो! केवल अल्लाह को याद करने ही से दिलों को आराम मिलता है। यही दिलों के लायक़ है।
आयत 29
ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ طُوبَىٰ لَهُمْ وَحُسْنُ مَـَٔابٍۢ
ٱلَّذِينَ
वो लोग जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
وَعَمِلُوا۟
और उन्होंने अमल किए
ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ
नेक
طُوبَىٰ
ख़ुशहाली है
لَهُمْ
उनके लिए
وَحُسْنُ
और उम्दा
مَـَٔابٍۢ
ठिकाना
जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए उनके लिए सुख-सौभाग्य है और लौटने का अच्छा ठिकाना है
तफ़्सीर:
और ये लोग जो अल्लाह पर ईमान लाए और ऐसे अच्छे कार्य किए, जो उन्हें अल्लाह से क़रीब लाते हैं, उनके लिए आख़िरत में एक अच्छा जीवन है तथा उनके लिए अच्छा परिणाम है, जो कि जन्नत है।
आयत 30
كَذَٰلِكَ أَرْسَلْنَـٰكَ فِىٓ أُمَّةٍۢ قَدْ خَلَتْ مِن قَبْلِهَآ أُمَمٌۭ لِّتَتْلُوَا۟ عَلَيْهِمُ ٱلَّذِىٓ أَوْحَيْنَآ إِلَيْكَ وَهُمْ يَكْفُرُونَ بِٱلرَّحْمَـٰنِ ۚ قُلْ هُوَ رَبِّى لَآ إِلَـٰهَ إِلَّا هُوَ عَلَيْهِ تَوَكَّلْتُ وَإِلَيْهِ مَتَابِ
كَذَٰلِكَ
इसी तरह
أَرْسَلْنَـٰكَ
भेजा हमने आपको
فِىٓ
to
أُمَّةٍۢ
इस उम्मत में
قَدْ
तहक़ीक़
خَلَتْ
गुज़र चुकीं
مِن
from
قَبْلِهَآ
इससे पहले
أُمَمٌۭ
कई उम्मतें
لِّتَتْلُوَا۟
ताकि आप पढ़ें
عَلَيْهِمُ
उन पर
ٱلَّذِىٓ
वो जो
أَوْحَيْنَآ
वही की हमने
إِلَيْكَ
तरफ़ आपके
وَهُمْ
और वो
يَكْفُرُونَ
वो कुफ़्र करते हैं
بِٱلرَّحْمَـٰنِ ۚ
रहमान का
قُلْ
कह दीजिए
هُوَ
वो
رَبِّى
रब है मेरा
لَآ
नहीं
إِلَـٰهَ
कोई इलाह (बरहक़)
إِلَّا
मगर
هُوَ
वो ही
عَلَيْهِ
उसी पर
تَوَكَّلْتُ
तवक्कल किया मैंने
وَإِلَيْهِ
और तरफ़ उसी के
مَتَابِ
लौटना है मेरा
अतएव हमने तुम्हें एक ऐसे समुदाय में भेजा है जिससे पहले कितने ही समुदाय गुज़र चुके है, ताकि हमने तुम्हारी ओर जो प्रकाशना की है, उसे उनको सुना दो, यद्यपि वे रहमान के साथ इनकार की नीति अपनाए हुए है। कह दो, "वही मेरा रब है। उसके सिवा कोई पूज्य-प्रभु नहीं। उसी पर मेरा भरोसा है और उसी की ओर मुझे पलटकर जाना है।"
तफ़्सीर:
जिस तरह हमने पिछले नबियों को उनके समुदायों की ओर भेजा था, वैसे ही हमने आपको (ऐ रसूल!) आपके समुदाय की ओर भेजा है; ताकि आप उन्हें वह क़ुरआन पढ़कर सुनाएँ, जो हमने आपकी ओर वह़्य की है। क्योंकि वह आपकी सच्चाई को प्रमाणित करने के लिए काफ़ी है। लेकिन आपके समुदाय का हाल यह है कि वे इस निशानी का इनकार करते हैं। क्योंकि वे 'रहमान' (अत्यंत दयावान्) पर अविश्वास करते हैं, जब वे उसके साथ उसके अलावा को साझी बनाते हैं। (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दीजिए : वह 'रहमान' (अत्यंत दयावान् हस्ती) जिसके साथ तुम उसके अलावा को साझी बनाते हो, वही मेरा पालनहार है, जिसके अलावा कोई सत्य पूज्य नहीं। मैंने अपने सभी मामलों में उसी पर भरोसा किया है और उसी की ओर मेरा लौटना है।
आज की ज़िंदगी में सबक़
सिला-ए-रहमी (रिश्तेदारों से नाता) और सब्र की फ़ज़ीलत का ज़िक्र है। यह हमें सिखाता है कि रिश्तेदारों से नाता जोड़े रखना और मुश्किल में सब्र करना अल्लाह को पसंद अमल हैं।
आयत 31
وَلَوْ أَنَّ قُرْءَانًۭا سُيِّرَتْ بِهِ ٱلْجِبَالُ أَوْ قُطِّعَتْ بِهِ ٱلْأَرْضُ أَوْ كُلِّمَ بِهِ ٱلْمَوْتَىٰ ۗ بَل لِّلَّهِ ٱلْأَمْرُ جَمِيعًا ۗ أَفَلَمْ يَا۟يْـَٔسِ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ أَن لَّوْ يَشَآءُ ٱللَّهُ لَهَدَى ٱلنَّاسَ جَمِيعًۭا ۗ وَلَا يَزَالُ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ تُصِيبُهُم بِمَا صَنَعُوا۟ قَارِعَةٌ أَوْ تَحُلُّ قَرِيبًۭا مِّن دَارِهِمْ حَتَّىٰ يَأْتِىَ وَعْدُ ٱللَّهِ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يُخْلِفُ ٱلْمِيعَادَ
وَلَوْ
और अगर
أَنَّ
यक़ीनन
قُرْءَانًۭا
क़ुरआन (होता)
سُيِّرَتْ
(कि) चलाए जाते
بِهِ
उसके ज़रिए
ٱلْجِبَالُ
पहाड़
أَوْ
या
قُطِّعَتْ
फाड़ दी जाती
بِهِ
उसके ज़रिए
ٱلْأَرْضُ
ज़मीन
أَوْ
या
كُلِّمَ
कलाम किया जाता
بِهِ
उसके ज़रिए
ٱلْمَوْتَىٰ ۗ
मुर्दों से
بَل
बल्कि
لِّلَّهِ
अल्लाह ही के लिए है
ٱلْأَمْرُ
मामला
جَمِيعًا ۗ
सारा का सारा
أَفَلَمْ
क्या भला नहीं
يَا۟يْـَٔسِ
मायूस हो गए
ٱلَّذِينَ
वो लोग जो
ءَامَنُوٓا۟
ईमान लाए
أَن
कि
لَّوْ
अगर
يَشَآءُ
चाहता
ٱللَّهُ
अल्लाह
لَهَدَى
अलबत्ता वो हिदायत दे देता
ٱلنَّاسَ
लोगों को
جَمِيعًۭا ۗ
सबके सबको
وَلَا
And not
يَزَالُ
और हमेशा रहेंगे
ٱلَّذِينَ
वो लोग जिन्होंने
كَفَرُوا۟
कुफ़्र किया
تُصِيبُهُم
पहुँचती रहेगी उन्हें
بِمَا
बवजह उसके जो
صَنَعُوا۟
उन्होंने किया
قَارِعَةٌ
कोई आफ़त
أَوْ
या
تَحُلُّ
वो उतरती रहेगी
قَرِيبًۭا
क़रीब ही
مِّن
from
دَارِهِمْ
उनके घर के
حَتَّىٰ
यहाँ तक कि
يَأْتِىَ
आ जाए
وَعْدُ
वादा
ٱللَّهِ ۚ
अल्लाह का
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
لَا
(will) not
يُخْلِفُ
नहीं वो ख़िलाफ़ करता
ٱلْمِيعَادَ
वादे के
और यदि कोई ऐसा क़ुरआन होता जिसके द्वारा पहाड़ चलने लगते या उससे धरती खंड-खंड हो जाती या उसके द्वारा मुर्दे बोलने लगते (तब भी वे लोग ईमान न लाते) । नहीं, बल्कि बात यह है कि सारे काम अल्लाह ही के अधिकार में है। फिर क्या जो लोग ईमान लाए है वे यह जानकर निराश नहीं हुए कि यदि अल्लाह चाहता तो सारे ही मनुष्यों को सीधे मार्ग पर लगा देता? और इनकार करनेवालों पर तो उनकी करतूतों के बदले में कोई न कोई आपदा निरंतर आती ही रहेगी, या उनके घर के निकट ही कहीं उतरती रहेगी, यहाँ तक कि अल्लाह का वादा आ पूरा होगा। निस्संदेह अल्लाह अपने वादे के विरुद्ध नहीं जाता।"
तफ़्सीर:
यदि ईश्वरीय किताबों में से किसी किताब की यह विशेषता होती कि उसके द्वारा पहाड़ों को उनके स्थानों से हटा दिया जाता, या उसके द्वारा धरती को फाड़ दिया जाता और वह नदियों और जल-स्रोतों में बदल जाती, या उसे मुर्दों पर पढ़ा जाता और वे जीवित हो जाते - तो वह अवश्य (ऐ रसूल!) आप पर अवतरित किया गया यह क़ुरआन होता। क्योंकि यह किताब स्पष्ट प्रमाण वाली और महान प्रभाव वाली है, यदि वे साफ़-सुथरे हृदय के मालिक होते, लेकिन वे इनकार करने वाले हैं। बल्कि चमत्कारों आदि के उतारने का सारा काम अल्लाह के अधिकार में हैं। तो क्या अल्लाह पर ईमान रखने वालों ने नहीं जाना कि यदि अल्लाह चमत्कार उतारे बिना ही समस्त लोगों को हिदायत देना चाहता, तो अवश्य उन्हें उसके बिना ही हिदायत दे देता? लेकिन उसने ऐसा नहीं चाहा। तथा अल्लाह का इनकार करने वालों पर उनके कुफ़्र तथा पापों के कारण हमेशा कोई सख़्त आपदा आती रहेगी, जो उनकी शांति भंग कर देगी, या वह आपदा उनके घर के निकट उतरेगी, यहाँ तक कि निरंतर यातना उतरने का अल्लाह का वादा आ जाए। निश्चय अल्लाह अपने वादे को पूरा करना नहीं छोड़ता है, जब उसका नियत समय आ जाए।
आयत 32
وَلَقَدِ ٱسْتُهْزِئَ بِرُسُلٍۢ مِّن قَبْلِكَ فَأَمْلَيْتُ لِلَّذِينَ كَفَرُوا۟ ثُمَّ أَخَذْتُهُمْ ۖ فَكَيْفَ كَانَ عِقَابِ
وَلَقَدِ
और अलबत्ता तहक़ीक़
ٱسْتُهْزِئَ
मज़ाक़ उड़ाया गया
بِرُسُلٍۢ
कई रसूलों का
مِّن
from
قَبْلِكَ
आपसे क़ब्ल
فَأَمْلَيْتُ
तो ढील दी मैंने
لِلَّذِينَ
उनको जिन्होंने
كَفَرُوا۟
कुफ़्र किया
ثُمَّ
फिर
أَخَذْتُهُمْ ۖ
पकड़ लिया मैंने उन्हें
فَكَيْفَ
तो कैसी
كَانَ
थी
عِقَابِ
सज़ा मेरी
तुमसे पहले भी कितने ही रसूलों का उपहास किया जा चुका है, किन्तु मैंने इनकार करनेवालों को मुहलत दी। फिर अंततः मैंने उन्हें पकड़ लिया, फिर कैसी रही मेरी सज़ा?
तफ़्सीर:
आप पहले रसूल नहीं हैं, जिसे उसके समुदाय ने झुठलाया और उसका मज़ाक़ उड़ाया है। (ऐ रसूल) आपसे पहले भी कई समुदायों ने अपने रसूलों का मज़ाक़ उड़ाया और उन्हें झुठलाया है। तो मैंने उन लोगों को मोहलत दी जिन्होंने अपने रसूलों को झुठलाया था, यहाँ तक कि उन्हें विश्वास हो गया कि मैं उन्हें नष्ट करने वाला नहीं हूँ। फिर मैंने मोहलत के बाद उन्हें तरह-तरह की यातना से ग्रस्त कर दिया, तो आपने उनके लिए मेरी सज़ा को कैसा पाया? निश्चय वह एक कड़ी सज़ा थी।
आयत 33
أَفَمَنْ هُوَ قَآئِمٌ عَلَىٰ كُلِّ نَفْسٍۭ بِمَا كَسَبَتْ ۗ وَجَعَلُوا۟ لِلَّهِ شُرَكَآءَ قُلْ سَمُّوهُمْ ۚ أَمْ تُنَبِّـُٔونَهُۥ بِمَا لَا يَعْلَمُ فِى ٱلْأَرْضِ أَم بِظَـٰهِرٍۢ مِّنَ ٱلْقَوْلِ ۗ بَلْ زُيِّنَ لِلَّذِينَ كَفَرُوا۟ مَكْرُهُمْ وَصُدُّوا۟ عَنِ ٱلسَّبِيلِ ۗ وَمَن يُضْلِلِ ٱللَّهُ فَمَا لَهُۥ مِنْ هَادٍۢ
أَفَمَنْ
क्या भला जो
هُوَ
वो
قَآئِمٌ
क़ायम/निगरान है
عَلَىٰ
ऊपर
كُلِّ
हर
نَفْسٍۭ
नफ़्स के
بِمَا
साथ उसके जो
كَسَبَتْ ۗ
उसने कमाई की
وَجَعَلُوا۟
और उन्होंने बना रखे हैं
لِلَّهِ
अल्लाह के लिए
شُرَكَآءَ
कुछ शरीक
قُلْ
कह दीजिए
سَمُّوهُمْ ۚ
नाम लो उनके
أَمْ
क्या
تُنَبِّـُٔونَهُۥ
तुम ख़बर दे रहे हो उसे
بِمَا
उसकी जो
لَا
not
يَعْلَمُ
नहीं वो जानता
فِى
in
ٱلْأَرْضِ
ज़मीन में
أَم
या
بِظَـٰهِرٍۢ
बज़ाहिर
مِّنَ
of
ٱلْقَوْلِ ۗ
बात से
بَلْ
बल्कि
زُيِّنَ
मुज़य्यन कर दी गई
لِلَّذِينَ
उनके लिए जिन्होंने
كَفَرُوا۟
कुफ़्र किया
مَكْرُهُمْ
चाल उनकी
وَصُدُّوا۟
और वो रोक दिए गए
عَنِ
from
ٱلسَّبِيلِ ۗ
रास्ते से
وَمَن
और जिसे
يُضْلِلِ
गुमराह कर दे
ٱللَّهُ
अल्लाह
فَمَا
तो नहीं
لَهُۥ
उसके लिए
مِنْ
any
هَادٍۢ
कोई हिदायत देने वाला
भला वह (अल्लाह) जो प्रत्येक व्यक्ति के सिर पर, उसकी कमाई पर निगाह रखते हुए खड़ा है (उसके समान कोई दूसरा हो सकता है)? फिर भी लोगों ने अल्लाह के सहभागी-ठहरा रखे है। कहो, "तनिक उनके नाम तो लो! (क्या तुम्हारे पास उनके पक्ष में कोई प्रमाण है?) या ऐसा है कि तुम उसे ऐसी बात की ख़बर दे रहे हो, जिसके अस्तित्व की उसे धरती भर में ख़बर नहीं? या यूँ ही यह एक ऊपरी बात ही बात है?" नहीं, बल्कि इनकार करनेवालों को उनकी मक्कारी ही सुहावनी लगती है और वे मार्ग से रुक गए है। जिसे अल्लाह ही गुमराही में छोड़ दे, उसे कोई मार्ग पर लानेवाला नहीं
तफ़्सीर:
तो क्या जो सभी सृष्टि की जीविका के संरक्षण का ज़िम्मेदार, हर प्राणी के कार्यों की निगरानी करने वाला है, चुनाँचे वह उसे उसके कार्यों का बदला देगा, वह उपासना किए जाने के अधिक योग्य है, या ये मूर्तियाँ जिन्हें इस बात का कोई अधिकार नहीं कि उनकी पूजा की जाए? हालाँकि काफ़िरों ने उन्हें अन्यायपूर्वक और झूठमूठ अल्लाह का साझी बना लिया है। (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : तुम हमें उन साझियों के नाम बताओ, जिनकी तुमने अल्लाह के साथ पूजा की है, यदि तुम अपने दावे में सच्चे हो। या क्या तुम अल्लाह को ऐसे साझियों के बारे में बता रहे हो, जिन्हें वह धरती में नहीं जानता? या फिर तुम उसे एक ऊपरी बात बता रहे हो, जिसमें कोई सच्चाई नहीं है? बल्कि, शैतान ने इनकार करने वालों की नज़र में उनके छल को सुंदर बना दिया है, जिसके कारण वे अल्लाह का इनकार कर बैठे हैं और शैतान ने उन्हें हिदायत के रास्ते से हटा दिया है। और जिसे अल्लाह हिदायत के मार्ग से दूर कर दे, उसके लिए कोई मार्गदर्शक नहीं, जो उसका मार्गदर्शन कर सके।
आयत 34
لَّهُمْ عَذَابٌۭ فِى ٱلْحَيَوٰةِ ٱلدُّنْيَا ۖ وَلَعَذَابُ ٱلْـَٔاخِرَةِ أَشَقُّ ۖ وَمَا لَهُم مِّنَ ٱللَّهِ مِن وَاقٍۢ
لَّهُمْ
उनके लिए
عَذَابٌۭ
अज़ाब है
فِى
in
ٱلْحَيَوٰةِ
ज़िन्दगी में
ٱلدُّنْيَا ۖ
दुनिया की
وَلَعَذَابُ
और अलबत्ता अज़ाब
ٱلْـَٔاخِرَةِ
आख़िरत का
أَشَقُّ ۖ
ज़्यादा सख़्त है
وَمَا
और नहीं
لَهُم
उनके लिए
مِّنَ
against
ٱللَّهِ
अल्लाह से
مِن
any
وَاقٍۢ
कोई बचाने वाला
उनके लिए सांसारिक जीवन में भी यातना, तो वह अत्यन्त कठोर है। औऱ कोई भी तो नहीं जो उन्हें अल्लाह से बचानेवाला हो
तफ़्सीर:
इस सांसारिक जीवन ही में उनके लिए यातना है कि उन्हें मोमिनों के हाथों क़त्ल एवं क़ैद का सामना करना पड़ेगा। जबकि आख़िरत की यातना जो उनकी प्रतीक्षा कर रही है, उनके लिए दुनिया की यातना से अधिक कठोर और भारी है। क्योंकि उसमें तीव्रता और निर्बाध स्थायित्व होगा। और उन्हें क़ियामत के दिन अल्लाह की यातना से कोई बचाने वाला भी न होगा।
आयत 35
۞ مَّثَلُ ٱلْجَنَّةِ ٱلَّتِى وُعِدَ ٱلْمُتَّقُونَ ۖ تَجْرِى مِن تَحْتِهَا ٱلْأَنْهَـٰرُ ۖ أُكُلُهَا دَآئِمٌۭ وَظِلُّهَا ۚ تِلْكَ عُقْبَى ٱلَّذِينَ ٱتَّقَوا۟ ۖ وَّعُقْبَى ٱلْكَـٰفِرِينَ ٱلنَّارُ
۞ مَّثَلُ
मिसाल
ٱلْجَنَّةِ
उस जन्नत की
ٱلَّتِى
जिस का
وُعِدَ
वादा किए गए
ٱلْمُتَّقُونَ ۖ
मुत्तक़ी लोग
تَجْرِى
बहती हैं
مِن
from
تَحْتِهَا
उसके नीचे से
ٱلْأَنْهَـٰرُ ۖ
नहरें
أُكُلُهَا
फल उसके
دَآئِمٌۭ
दाइमी हैं
وَظِلُّهَا ۚ
और उसका साया (भी)
تِلْكَ
ये
عُقْبَى
अंजाम है
ٱلَّذِينَ
उन लोगों का जिन्होंने
ٱتَّقَوا۟ ۖ
तक़वा किया
وَّعُقْبَى
और अंजाम
ٱلْكَـٰفِرِينَ
काफ़िरों का
ٱلنَّارُ
आग है
डर रखनेवालों के लिए जिस जन्नत का वादा है उसकी शान यह है कि उसके नीचे नहरें बह रही है, उसके फल शाश्वत है और इसी प्रकार उसकी छाया भी। यह परिणाम है उनका जो डर रखते है, जबकि इनकार करनेवालों का परिणाम आग है
तफ़्सीर:
उस जन्नत की विशेषता जिसका अल्लाह ने उन लोगों से वादा किया है, जो उसके आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर उससे डरने वाले हैं, यह है कि उसके महलों और पेड़ों के नीचे से नहरें बहती हैं, उसके फल, दुनिया के फलों के विपरीत, स्थायी हैं, जो कभी खत्म नहीं होंगे और उसकी छाया भी स्थायी है, जो न कभी समाप्त होगी और न छोटी होगी। यही उन लोगों का परिणाम है, जो अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर उससे डरते रहे। और काफ़िरों का परिणाम आग है, जिसमें वे प्रवेश करेंगे और हमेशा के लिए उसी में रहेंगे।
आयत 36
وَٱلَّذِينَ ءَاتَيْنَـٰهُمُ ٱلْكِتَـٰبَ يَفْرَحُونَ بِمَآ أُنزِلَ إِلَيْكَ ۖ وَمِنَ ٱلْأَحْزَابِ مَن يُنكِرُ بَعْضَهُۥ ۚ قُلْ إِنَّمَآ أُمِرْتُ أَنْ أَعْبُدَ ٱللَّهَ وَلَآ أُشْرِكَ بِهِۦٓ ۚ إِلَيْهِ أَدْعُوا۟ وَإِلَيْهِ مَـَٔابِ
وَٱلَّذِينَ
और वो लोग जो
ءَاتَيْنَـٰهُمُ
दी हमने उन्हें
ٱلْكِتَـٰبَ
किताब
يَفْرَحُونَ
वो ख़ुश होते हैं
بِمَآ
उस पर जो
أُنزِلَ
नाज़िल किया गया
إِلَيْكَ ۖ
तरफ़ आपके
وَمِنَ
but among
ٱلْأَحْزَابِ
और कुछ गिरोह हैं
مَن
जो
يُنكِرُ
इन्कार करते हैं
بَعْضَهُۥ ۚ
उसके बाज़ का
قُلْ
कह दीजिए
إِنَّمَآ
बेशक
أُمِرْتُ
हुक्म दिया गया मुझे
أَنْ
कि
أَعْبُدَ
मैं इबादत करूँ
ٱللَّهَ
अल्लाह की
وَلَآ
और ना
أُشْرِكَ
मैं शरीक ठहराऊँ
بِهِۦٓ ۚ
साथ उसके
إِلَيْهِ
तरफ़ उसी के
أَدْعُوا۟
मैं बुलाता हूँ
وَإِلَيْهِ
और तरफ़ उसी के
مَـَٔابِ
लौटना है मेरा
जिन लोगों को हमने किताब प्रदान की है वे उससे, जो तुम्हारी ओर उतारा है, हर्षित होते है और विभिन्न गिरोहों के कुछ लोग ऐसे भी है जो उसकी कुछ बातों का इनकार करते है। कह दो, "मुझे पर बस यह आदेश हुआ है कि मैं अल्लाह की बन्दगी करूँ और उसका सहभागी न ठहराऊँ। मैं उसी की ओर बुलाता हूँ और उसी की ओर मुझे लौटकर जाना है।"
तफ़्सीर:
जिन यहूदियों को हमने तौरात दी और जिन ईसाइयों को हमने इंजील दी, वे उस (क़ुरआन) से प्रसन्न होते हैं, जो (ऐ रसूल!) आपपर उतारा गया है; क्योंकि वह उनकी पुस्तकों की कुछ बातों से सहमति रखता है। तथा यहूदियों और ईसाइयों के संप्रदायों में से कुछ लोग आपकी ओर अवतिरत पुस्तक के कुछ भाग का इनकार करते हैं, जो उनकी इच्छाओं से मेल नहीं खाता, या जो उनके परिवर्तन और विकृति को उजागर करता है। (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : अल्लाह ने मुझे आदेश दिया है कि मैं केवल उसी की इबादत करूँ और उसके साथ उसके अलावा को साझी न बनाऊँ। मैं केवल उसी की ओर बुलाता हूँ और उसके अलावा किसी और की ओर नहीं बुलाता। और केवल उसी की ओर मेरा लौटना है। तौरात और इंजील ने भी यही शिक्षा दी है।
आयत 37
وَكَذَٰلِكَ أَنزَلْنَـٰهُ حُكْمًا عَرَبِيًّۭا ۚ وَلَئِنِ ٱتَّبَعْتَ أَهْوَآءَهُم بَعْدَ مَا جَآءَكَ مِنَ ٱلْعِلْمِ مَا لَكَ مِنَ ٱللَّهِ مِن وَلِىٍّۢ وَلَا وَاقٍۢ
وَكَذَٰلِكَ
और इसी तरह
أَنزَلْنَـٰهُ
नाज़िल किया हमने उसे
حُكْمًا
हुक्म/फ़रमान
عَرَبِيًّۭا ۚ
अरबी ज़बान में
وَلَئِنِ
और अलबत्ता अगर
ٱتَّبَعْتَ
पैरवी की आपने
أَهْوَآءَهُم
उनकी ख़्वाहिशात की
بَعْدَ مَا
बाद इसके जो
جَآءَكَ
आ गया आपके पास
مِنَ
of
ٱلْعِلْمِ
इल्म में से
مَا
नहीं
لَكَ
आपके लिए
مِنَ
against
ٱللَّهِ
अल्लाह की तरफ़ से
مِن
any
وَلِىٍّۢ
कोई दोस्त
وَلَا
और ना
وَاقٍۢ
कोई बचाने वाला
और इसी प्रकार हमने इस (क़ुरआन) को एक अरबी फ़रमान के रूप में उतारा है। अब यदि तुम उस ज्ञान के पश्चात भी, जो तुम्हारे पास आ चुका है, उनकी इच्छाओं के पीछे चले तो अल्लाह के मुक़ाबले में न तो तुम्हारा कोई सहायक मित्र होगा और न कोई बचानेवाला
तफ़्सीर:
और जैसे हमने पिछली पुस्तकों को उनके समुदायों की भाषा में उतारा था, उसी प्रकार हमने (ऐ रसूल!) आपपर क़ुरआन को अरबी भाषा में सच्चाई को स्पष्ट करने वाला एक निर्णायक फ़रमान बनाकर उतारा है। और यदि (ऐ रसूल!) आपने अपने पास उस ज्ञान के आ जाने के पश्चात जो अल्लाह ने आपको सिखाया है, किताब वालों की इच्छाओं का पालन किया उनके उस चीज़ को हटाने की सौदेबाज़ी में जो उनकी इच्छाओं से मेल नहीं खाती, तो अल्लाह के मुक़ाबले में आपका कोई संरक्षक नहीं होगा, जो आपके मामले को संभाले और आपके दुश्मनों के खिलाफ़ आपकी सहायता करे, और न ही आपको अल्लाह की यातना से कोई बचाने वाला होगा।
आयत 38
وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا رُسُلًۭا مِّن قَبْلِكَ وَجَعَلْنَا لَهُمْ أَزْوَٰجًۭا وَذُرِّيَّةًۭ ۚ وَمَا كَانَ لِرَسُولٍ أَن يَأْتِىَ بِـَٔايَةٍ إِلَّا بِإِذْنِ ٱللَّهِ ۗ لِكُلِّ أَجَلٍۢ كِتَابٌۭ
وَلَقَدْ
और अलबत्ता तहक़ीक़
أَرْسَلْنَا
भेजा हमने
رُسُلًۭا
कई रसूलों को
مِّن
from
قَبْلِكَ
आपसे पहले
وَجَعَلْنَا
और बनाईं हमने
لَهُمْ
उनके लिए
أَزْوَٰجًۭا
बीवियाँ
وَذُرِّيَّةًۭ ۚ
और औलाद
وَمَا
और नहीं
كَانَ
था (मुमकिन)
لِرَسُولٍ
किसी रसूल के लिए
أَن
कि
يَأْتِىَ
वो ले आए
بِـَٔايَةٍ
कोई निशानी
إِلَّا
मगर
بِإِذْنِ
by the leave
ٱللَّهِ ۗ
अल्लाह के इज़्न से
لِكُلِّ
For everything
أَجَلٍۢ
हर मुद्दत के लिए
كِتَابٌۭ
एक किताब है
तुमसे पहले भी हम, कितने ही रसूल भेज चुके है और हमने उन्हें पत्नियों और बच्चे भी दिए थे, और किसी रसूल को यह अधिकार नहीं था कि वह अल्लाह की अनुमति के बिना कोई निशानी स्वयं ला लेता। हर चीज़ के एक समय जो अटल लिखित है
तफ़्सीर:
(ऐ रसूल!) हमने आपसे पहले रसूलों को मनुष्यों ही में से भेजे। इसलिए आप (दूसरे) रसूलों से अलग कोई (अनोखे) रसूल नहीं हैं। तथा हमने अन्य सभी मनुष्यों की तरह उनके लिए पत्नियाँ और बच्चे बनाए। हमने उन्हें फ़िरिश्ते नहीं बनाए,जो न शादी करते हैं और न बच्चे जनते हैं। और आप भी उन्हीं रसूलों में से हैं, जो मनुष्य थे, शादी-ब्याह करते थे और बच्चे पैदा करते थे, तो फिर आपके ऐसा होने पर इन मुश्रिकों को आश्चर्य क्यों होता है?! तथा किसी रसूल के बस की बात नहीं है कि अल्लाह की अनुमति के बिना अपनी ओर से कोई निशानी ले आए। हर मामले के लिए जिसका अल्लाह ने फ़ैसला किया है एक किताब है, जिसमें वह उल्लिखित है और उसका एक निर्धारित समय है, जो आगे-पीछे नहीं हो सकता।
आयत 39
يَمْحُوا۟ ٱللَّهُ مَا يَشَآءُ وَيُثْبِتُ ۖ وَعِندَهُۥٓ أُمُّ ٱلْكِتَـٰبِ
يَمْحُوا۟
मिटाता है
ٱللَّهُ
अल्लाह
مَا
जो
يَشَآءُ
वो चाहता है
وَيُثْبِتُ ۖ
और वो साबित रखता है
وَعِندَهُۥٓ
और उसी के पास है
أُمُّ
(is) the Mother (of) the Book
ٱلْكِتَـٰبِ
असल किताब
अल्लाह जो कुछ चाहता है मिटा देता है। इसी तरह वह क़ायम भी रखता है। मूल किताब तो स्वयं उसी के पास है
तफ़्सीर:
अल्लाह जिस भलाई, या बुराई, या सौभाग्य, या दुर्भाग्य को चाहता है, मिटा देता है और उनमें से जिसे चाहता है बाक़ी रखता है। और उसी के पास 'लौह़ -ए- महफ़ूज़' है। वह उन सब का संदर्भ है, और जो कुछ भी मिटाया जाता या बाक़ी रखा जाता है, उसी के अनुसार होता है, जो उसमें अंकित है।
आयत 40
وَإِن مَّا نُرِيَنَّكَ بَعْضَ ٱلَّذِى نَعِدُهُمْ أَوْ نَتَوَفَّيَنَّكَ فَإِنَّمَا عَلَيْكَ ٱلْبَلَـٰغُ وَعَلَيْنَا ٱلْحِسَابُ
وَإِن
And whether
مَّا
और अगर
نُرِيَنَّكَ
हम दिखाऐं आपको
بَعْضَ
बाज़
ٱلَّذِى
वो जिसका
نَعِدُهُمْ
हम वादा करते हैं उनसे
أَوْ
या
نَتَوَفَّيَنَّكَ
हम फ़ौत कर लें आपको
فَإِنَّمَا
तो बेशक
عَلَيْكَ
आपके ज़िम्मे है
ٱلْبَلَـٰغُ
पहुँचाना
وَعَلَيْنَا
और हमारे ज़िम्मे है
ٱلْحِسَابُ
हिसाब लेना
हम जो वादा उनसे कर रहे है चाहे उसमें से कुछ हम तुम्हें दिखा दें, या तुम्हें उठा लें। तुम्हारा दायित्व तो बस सन्देश का पहुँचा देना ही है, हिसाब लेना तो हमारे ज़िम्मे है
तफ़्सीर:
(ऐ नबी!) यदि हम आपकी मृत्यु से पहले आपको उस यातना का कुछ भाग दिखा दें जिसका हम उनसे वादा करते हैं, तो यह हमारा काम है, या उसे आपको दिखाने से पहले ही आपको मौत दे दें, तो आपका काम केवल उसको पहुँचा देना है, जिसे पहुँचाने का हमने आपको आदेश दिया है। आपका काम उन्हें बदला देना या उनका हिसाब लेना नहीं है। क्योंकि यह हमारा काम है।
आज की ज़िंदगी में सबक़
कुरआन के असर और अल्लाह के फैसलों का ज़िक्र है। यह सबक हमें सिखाता है कि दिलों को सुकून सिर्फ अल्लाह की याद से मिलता है, दुनिया की चीज़ों से नहीं।
आयत 41
أَوَلَمْ يَرَوْا۟ أَنَّا نَأْتِى ٱلْأَرْضَ نَنقُصُهَا مِنْ أَطْرَافِهَا ۚ وَٱللَّهُ يَحْكُمُ لَا مُعَقِّبَ لِحُكْمِهِۦ ۚ وَهُوَ سَرِيعُ ٱلْحِسَابِ
أَوَلَمْ
क्या भला नहीं
يَرَوْا۟
उन्होंने देखा
أَنَّا
बेशक हम
نَأْتِى
हम आ रहे हैं
ٱلْأَرْضَ
ज़मीन को
نَنقُصُهَا
हम घटा रहे है उसे
مِنْ
from
أَطْرَافِهَا ۚ
उसके किनारों से
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
يَحْكُمُ
फ़ैसला करता है
لَا
(there is) no
مُعَقِّبَ
नहीं कोई पीछा करने वाला
لِحُكْمِهِۦ ۚ
उसके फ़ैसले का
وَهُوَ
और वो
سَرِيعُ
जल्द लेने वाला है
ٱلْحِسَابِ
हिसाब
क्या उन्होंने देखा नहीं कि हम धरती पर चले आ रहे है, उसे उसके किनारों से घटाते हुए? अल्लाह ही फ़ैसला करता है। कोई नहीं जो उसके फ़ैसले को पीछे डाल सके। वह हिसाब भी जल्द लेता है
तफ़्सीर:
क्या इन काफ़िरों ने यह नहीं देखा कि हम कुफ़्र की धरती पर आते हैं, इस्लाम का प्रसार कर और मुसलमानों को उसपर विजय प्रदान करके उसे उसके किनारों से कम कर देते हैं। और अल्लाह जो कुछ चाहता है, आदेश देता है और अपने बंदों के बीच फ़ैसला करता है। उसके फ़ैसले को कोई टालने वाला, या उसमें संशोधन करने वाला, या उसे बदलने वाला नहीं है। वह महिमावान बहुत शीघ्र हिसाब लेने वाला है, वह अगले और पिछले सभी लोगों का एक ही दिन में हिसाब ले लेगा।
आयत 42
وَقَدْ مَكَرَ ٱلَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ فَلِلَّهِ ٱلْمَكْرُ جَمِيعًۭا ۖ يَعْلَمُ مَا تَكْسِبُ كُلُّ نَفْسٍۢ ۗ وَسَيَعْلَمُ ٱلْكُفَّـٰرُ لِمَنْ عُقْبَى ٱلدَّارِ
وَقَدْ
और तहक़ीक़
مَكَرَ
चाल चली
ٱلَّذِينَ
उन लोगों ने जो
مِن
(were) from
قَبْلِهِمْ
उनसे पहले थे
فَلِلَّهِ
तो अल्लाह ही के लिए है
ٱلْمَكْرُ
तदबीर
جَمِيعًۭا ۖ
सारी की सारी
يَعْلَمُ
वो जानता है
مَا
जो
تَكْسِبُ
कमाई करता है
كُلُّ
हर
نَفْسٍۢ ۗ
नफ़्स
وَسَيَعْلَمُ
और अनक़रीब जान लेंगे
ٱلْكُفَّـٰرُ
कुफ़्फ़ार
لِمَنْ
किस के लिए
عُقْبَى
अंजाम है
ٱلدَّارِ
घर का (आख़िरत के)
उनसे पहले जो लोग गुज़रे है, वे भी चालें चल चुके है, किन्तु वास्तविक चाल तो पूरी की पूरी अल्लाह ही के हाथ में है। प्रत्येक व्यक्ति जो कमाई कर रहा है उसे वह जानता है। इनकार करनेवालों को शीघ्र ही ज्ञात हो जाएगा कि परलोक-गृह के शुभ परिणाम के अधिकारी कौन है
तफ़्सीर:
पिछले समुदायों ने अपने नबियों के साथ छल किया, चालें चलीं और उनकी लाई हई बातों को झुठलाया। परंतु उन्होंने उनके ख़िलाफ़ उपाय (साज़िश) करके क्या कर लिया? कुछ नहीं; क्योंकि प्रभावी उपाय केवल अल्लाह का उपाय है, किसी और का नहीं। तथा वह महिमावान् (अल्लाह) ही है, जो सारी सृष्टि के सभी कर्मों को जानता है, उनमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है। और उस समय इन झुठलाने वालों को पता चल जाएगा कि वे अल्लाह पर ईमान न लाने में कितने गलत थे और ईमान वाले लोग कितने सही थे। इसलिए उन्होंने जन्नत और अच्छा परिणाम प्राप्त किया।
आयत 43
وَيَقُولُ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ لَسْتَ مُرْسَلًۭا ۚ قُلْ كَفَىٰ بِٱللَّهِ شَهِيدًۢا بَيْنِى وَبَيْنَكُمْ وَمَنْ عِندَهُۥ عِلْمُ ٱلْكِتَـٰبِ
وَيَقُولُ
और कहते हैं
ٱلَّذِينَ
वो लोग जिन्होंने
كَفَرُوا۟
कुफ़्र किया
لَسْتَ
नहीं हैं आप
مُرْسَلًۭا ۚ
रसूल
قُلْ
कह दीजिए
كَفَىٰ
काफ़ी है
بِٱللَّهِ
अल्लाह
شَهِيدًۢا
गवाह
بَيْنِى
दर्मियान मेरे
وَبَيْنَكُمْ
और दर्मियान तुम्हारे
وَمَنْ
और वो (भी) जो
عِندَهُۥ
अपने पास (रखता है)
عِلْمُ
इल्म
ٱلْكِتَـٰبِ
किताब का
जिन लोगों ने इनकार की नीति अपनाई, वे कहते है, "तुम कोई रसूल नहीं हो।" कह दो, "मेरे और तुम्हारे बीच अल्लाह की और जिस किसी के पास किताब का ज्ञान है उसकी, गवाही काफ़ी है।"
तफ़्सीर:
जिन लोगों ने कुफ़्र की नीति अपनाई, वे कहते हैं : (ऐ मुहम्मद!) आप अल्लाह द्वारा भेजे नहीं गए हैं। (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : मेरे और तुम्हारे बीच, इस बात पर अल्लाह गवाह के रूप में काफ़ी है कि मैं अपने पालनहार की ओर से तुम्हारी तरफ़ रसूल बनाकर भेजा गया हूँ, तथा उनकी भी गवाही काफ़ी है, जिनके पास आकाशीय ग्रंथों का ज्ञान है, जिनमें मेरी विशेषताएँ वर्णित हैं। और जिसकी सत्यता का साक्षी अल्लाह है, उसे किसी के झुठलाने से कोई नुकसान नहीं पहुँचता।
आज की ज़िंदगी में सबक़
अल्लाह ही हक की गवाही के लिए काफी होने के ज़िक्र के साथ सूरह का इख्तिताम होता है। यह हमें सिखाता है कि हक की गवाही के लिए अल्लाह और उसका इल्म काफी है, लोगों की तस्दीक का इंतज़ार करने की ज़रूरत नहीं।
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