सूरह अल-हज سورة الحج
मदनी 78 आयतें
नाम का मतलब
हज (हज के अहकाम और उसकी हिकमत के ज़िक्र से)
पृष्ठभूमि
सूरह अल-हज में हज के अहकाम, कयामत की हौलनाकी और जिहाद की इजाज़त का ज़िक्र है। यह सूरह मक्की और मदनी दोनों तरह के मौज़ूआत को समेटे हुए है।
फ़ज़ीलत / सार
इस सूरह में सजदे की दो आयतें हैं, जो इसे तिलावत के दौरान खास बनाती हैं।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
आयत 1
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ ٱتَّقُوا۟ رَبَّكُمْ ۚ إِنَّ زَلْزَلَةَ ٱلسَّاعَةِ شَىْءٌ عَظِيمٌۭ
يَـٰٓأَيُّهَا
ٱلنَّاسُ
लोगो
ٱتَّقُوا۟
डरो
رَبَّكُمْ ۚ
अपने रब से
إِنَّ
बेशक
زَلْزَلَةَ
ज़लज़ला
ٱلسَّاعَةِ
क़यामत का
شَىْءٌ
चीज़ है
عَظِيمٌۭ
बहुत बड़ी
ऐ लोगो! अपने रब का डर रखो! निश्चय ही क़ियामत की घड़ी का भूकम्प बड़ी भयानक चीज़ है
तफ़्सीर:
ऐ लोगो! अल्लाह से डरो, उसके आदेशों का पालन करके और उसकी मना की हुई बातों से बचकर। निश्चय क़ियामत के साथ जो भूकंप आदि भयानक वस्तुएँ आएँगी, उनका मामला बड़ा सख़्त है। जिसके लिए, अल्लाह को खुश करने वाले कार्य करके, तैयारी करनी चाहिए।
आयत 2
يَوْمَ تَرَوْنَهَا تَذْهَلُ كُلُّ مُرْضِعَةٍ عَمَّآ أَرْضَعَتْ وَتَضَعُ كُلُّ ذَاتِ حَمْلٍ حَمْلَهَا وَتَرَى ٱلنَّاسَ سُكَـٰرَىٰ وَمَا هُم بِسُكَـٰرَىٰ وَلَـٰكِنَّ عَذَابَ ٱللَّهِ شَدِيدٌۭ
يَوْمَ
जिस दिन
تَرَوْنَهَا
तुम देखोगे उसे
تَذْهَلُ
ग़ाफ़िल हो जाएगी
كُلُّ
हर
مُرْضِعَةٍ
दूध पिलाने वाली
عَمَّآ
उससे जिसे
أَرْضَعَتْ
उसने दूध पिलाया था
وَتَضَعُ
और गिरा देगी
كُلُّ
हर
ذَاتِ
pregnant woman
حَمْلٍ
हमल वाली
حَمْلَهَا
हमल अपना
وَتَرَى
और आप देखेंगे
ٱلنَّاسَ
लोगों को
سُكَـٰرَىٰ
नशे में
وَمَا
हालाँकि नहीं (होंगे)
هُم
वो
بِسُكَـٰرَىٰ
नशे में
وَلَـٰكِنَّ
और लेकिन
عَذَابَ
अज़ाब
ٱللَّهِ
अल्लाह का
شَدِيدٌۭ
बहुत सख़्त है
जिस जिन तुम उसे देखोगे, हाल यह होगा कि प्रत्येक दूध पिलानेवाली अपने दूध पीते बच्चे को भूल जाएगी और प्रत्येक गर्भवती अपना गर्भभार रख देगी। और लोगों को तुम नशे में देखोगे, हालाँकि वे नशे में न होंगे, बल्कि अल्लाह की यातना है ही बड़ी कठोर चीज़
तफ़्सीर:
जिस दिन तुम उसे देखोगे (उस दिन यह हाल होगा कि) हर दूध पिलाने वाली अपने दूध पीते बच्चे से गाफ़िल हो जाएगी और हर गर्भवती भय की गंभीरता से अपना गर्भ गिरा देगी और तू लोगों को उस दिन की भयावहता की तीव्रता से नशे में धुत व्यक्ति की तरह देखेगा, हालाँकि वे शराब के नशे में धुत नहीं होंगे, बल्कि अल्लाह की यातना बड़ी सख़्त है। वह उनके होश उड़ा देगी।
आयत 3
وَمِنَ ٱلنَّاسِ مَن يُجَـٰدِلُ فِى ٱللَّهِ بِغَيْرِ عِلْمٍۢ وَيَتَّبِعُ كُلَّ شَيْطَـٰنٍۢ مَّرِيدٍۢ
وَمِنَ
And among
ٱلنَّاسِ
और लोगों में से कोई है
مَن
जो
يُجَـٰدِلُ
झगड़ता है
فِى
concerning
ٱللَّهِ
अल्लाह ( के बारे ) में
بِغَيْرِ
बग़ैर
عِلْمٍۢ
इल्म के
وَيَتَّبِعُ
और वो पैरवी करता है
كُلَّ
हर
شَيْطَـٰنٍۢ
शैतान
مَّرِيدٍۢ
सरकश की
लोगों में कोई ऐसा भी है, जो ज्ञान के बिना अल्लाह के विषय में झगड़ता है और प्रत्येक सरकश शैतान का अनुसरण करता है
तफ़्सीर:
और लोगों में से कोई ऐसा भी है, जो बिना ज्ञान के आधार के मृतकों को जीवित करने की अल्लाह की शक्ति के बारे में बहस करता है, और वह अपने विश्वास और कथन में शैतानों में से और गुमराही के इमामों में से, अपने पालनहार से सरकशी करने वाले के पीछे चलता है।
आयत 4
كُتِبَ عَلَيْهِ أَنَّهُۥ مَن تَوَلَّاهُ فَأَنَّهُۥ يُضِلُّهُۥ وَيَهْدِيهِ إِلَىٰ عَذَابِ ٱلسَّعِيرِ
كُتِبَ
लिख दिया गया
عَلَيْهِ
उस पर
أَنَّهُۥ
कि बेशक वो
مَن
जो कोई
تَوَلَّاهُ
दोस्त बनाएगा उसे
فَأَنَّهُۥ
तो बेशक वो
يُضِلُّهُۥ
वो भटका देगा उसे
وَيَهْدِيهِ
और वो रहनुमाई करेगा उसकी
إِلَىٰ
to
عَذَابِ
तरफ़ अज़ाबे
ٱلسَّعِيرِ
दोज़ख़ के
जबकि उसके लिए लिख दिया गया है कि जो उससे मित्रता का सम्बन्ध रखेगा उसे वह पथभ्रष्ट करके रहेगा और उसे दहकती अग्नि की यातना की ओर ले जाएगा
तफ़्सीर:
इनसान और जिन्न के शैतानों में से उस सरकश के बारे में लिख दिया गया है कि जो उसके पीछे चलेगा और उसे सच्चा जानेगा, तो वह उसे सत्य मार्ग से भटका देगा और कुफ़्र तथा गुनाह के रास्ते पर डालकर उसे जहन्नम की यातना की ओर ले जाएगा।
आयत 5
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ إِن كُنتُمْ فِى رَيْبٍۢ مِّنَ ٱلْبَعْثِ فَإِنَّا خَلَقْنَـٰكُم مِّن تُرَابٍۢ ثُمَّ مِن نُّطْفَةٍۢ ثُمَّ مِنْ عَلَقَةٍۢ ثُمَّ مِن مُّضْغَةٍۢ مُّخَلَّقَةٍۢ وَغَيْرِ مُخَلَّقَةٍۢ لِّنُبَيِّنَ لَكُمْ ۚ وَنُقِرُّ فِى ٱلْأَرْحَامِ مَا نَشَآءُ إِلَىٰٓ أَجَلٍۢ مُّسَمًّۭى ثُمَّ نُخْرِجُكُمْ طِفْلًۭا ثُمَّ لِتَبْلُغُوٓا۟ أَشُدَّكُمْ ۖ وَمِنكُم مَّن يُتَوَفَّىٰ وَمِنكُم مَّن يُرَدُّ إِلَىٰٓ أَرْذَلِ ٱلْعُمُرِ لِكَيْلَا يَعْلَمَ مِنۢ بَعْدِ عِلْمٍۢ شَيْـًۭٔا ۚ وَتَرَى ٱلْأَرْضَ هَامِدَةًۭ فَإِذَآ أَنزَلْنَا عَلَيْهَا ٱلْمَآءَ ٱهْتَزَّتْ وَرَبَتْ وَأَنۢبَتَتْ مِن كُلِّ زَوْجٍۭ بَهِيجٍۢ
يَـٰٓأَيُّهَا
ٱلنَّاسُ
लोगो
إِن
अगर
كُنتُمْ
हो तुम
فِى
in
رَيْبٍۢ
किसी शक में
مِّنَ
about
ٱلْبَعْثِ
दोबारा जी उठने से
فَإِنَّا
तो बेशक हम
خَلَقْنَـٰكُم
पैदा किया हमने तुम्हें
مِّن
from
تُرَابٍۢ
मिट्टी से
ثُمَّ
फिर
مِن
from
نُّطْفَةٍۢ
नुत्फ़े से
ثُمَّ
फिर
مِنْ
from
عَلَقَةٍۢ
जमे हुए ख़ून से
ثُمَّ
फिर
مِن
from
مُّضْغَةٍۢ
गोश्त की बोटी से
مُّخَلَّقَةٍۢ
शक्ल वाली
وَغَيْرِ
और बग़ैर
مُخَلَّقَةٍۢ
शक्ल वाली
لِّنُبَيِّنَ
ताकि हम वाज़ेह करें
لَكُمْ ۚ
तुम्हारे लिए
وَنُقِرُّ
और हम ठहराते हैं
فِى
in
ٱلْأَرْحَامِ
रहमों में
مَا
जिसको
نَشَآءُ
हम चाहते हैं
إِلَىٰٓ
for
أَجَلٍۢ
a term
مُّسَمًّۭى
मुक़र्रराह मुद्दत तक
ثُمَّ
फिर
نُخْرِجُكُمْ
हम निकालते हैं तुम्हें
طِفْلًۭا
बच्चा बना कर
ثُمَّ
फिर
لِتَبْلُغُوٓا۟
ताकि तुम पहुँचो
أَشُدَّكُمْ ۖ
अपनी जवानी को
وَمِنكُم
और तुम में से कोई है
مَّن
जो
يُتَوَفَّىٰ
फ़ौत किया जाता है
وَمِنكُم
और तुम में से कोई है
مَّن
जो
يُرَدُّ
लौटाया जाता है
إِلَىٰٓ
तरफ़
أَرْذَلِ
नाकारा
ٱلْعُمُرِ
उम्र के
لِكَيْلَا
ताकि ना
يَعْلَمَ
वो जाने
مِنۢ
after
بَعْدِ
बाद
عِلْمٍۢ
जानने के
شَيْـًۭٔا ۚ
कुछ भी
وَتَرَى
और आप देखते हैं
ٱلْأَرْضَ
ज़मीन को
هَامِدَةًۭ
ख़ुश्क
فَإِذَآ
तो जब
أَنزَلْنَا
उतारते हैं हम
عَلَيْهَا
उस पर
ٱلْمَآءَ
पानी
ٱهْتَزَّتْ
वो तरो ताज़ा हो जाती है
وَرَبَتْ
और वो उभर आती है
وَأَنۢبَتَتْ
और वो उगाती है
مِن
of
كُلِّ
every
زَوْجٍۭ
हर क़िस्म के
بَهِيجٍۢ
रौनक़ वाले (पौधे)
ऐ लोगो! यदि तुम्हें दोबारा जी उठने के विषय में कोई सन्देह हो तो देखो, हमने तुम्हें मिट्टी से पैदा किया, फिर वीर्य से, फिर लोथड़े से, फिर माँस की बोटी से जो बनावट में पूर्ण दशा में भी होती है और अपूर्ण दशा में भी, ताकि हम तुमपर स्पष्ट कर दें और हम जिसे चाहते है एक नियत समय तक गर्भाशयों में ठहराए रखते है। फिर तुम्हें एक बच्चे के रूप में निकाल लाते है। फिर (तुम्हारा पालन-पोषण होता है) ताकि तुम अपनी युवावस्था को प्राप्त हो और तुममें से कोई तो पहले मर जाता है और कोई बुढ़ापे की जीर्ण अवस्था की ओर फेर दिया जाता है जिसके परिणामस्वरूप, जानने के पश्चात वह कुछ भी नहीं जानता। और तुम भूमि को देखते हो कि सूखी पड़ी है। फिर जहाँ हमने उसपर पानी बरसाया कि वह फबक उठी और वह उभर आई और उसने हर प्रकार की शोभायमान चीज़े उगाई
तफ़्सीर:
ऐ लोगो! अगर तुम्हें, मौत के बाद दोबारा ज़िंदा करने की हमारी शक्ति में संदेह है, तो अपनी रचना पर ग़ौर करो, हमने तुम्हारे पिता आदम को मिट्टी से पैदा किया, फिर उनकी संतान को वीर्य से पैदा किया, जिसे पुरुष स्त्री के गर्भाशय में डालता है, फिर वह वीर्य खून का थक्का बन जाता है, फिर वह खून का थक्का माँस के एक छोटे-से टुकड़े में बदल जाता है, जो एक बार मुँह में डालकर चबाया जा सके, फिर वह माँस का टुकड़ा या तो पूर्ण रचना में परिवर्तित होकर गर्भाशय में मौजूद रहता है, यहाँ तक कि ज़िंदा शिशु के रूप में निकलता है, या अपूर्ण रचना में बदल जाता है जिसे गर्भाशय गिरा देता है, ताकि हम तुम्हें विभिन्न चरणों में पैदा करके अपनी शक्ति के दृश्य दिखाएँ, और हम जिस भ्रूण को चाहते हैं, गर्भाशय में ठहराए रखते हैं, यहाँ तक कि एक निर्धारित समय अर्थात नौ महीने में वह जन्म लेता है, फिर हम तुम्हें तुम्हारी माताओं के पेट से शिशुओं के रूप में निकालते हैं, फिर तुम्हें भरपूर शक्ति और बुद्धि प्रदान करते हैं, तथा तुममें से कुछ लोग इससे पहले मर जाते हैं, और तुममें से कुछ लोग तब तक जीवित रहते हैं जब तक वे जीर्ण आयु तक नहीं पहुँच जाते, जहाँ ताक़त कमज़ोर हो जाती है और दिमाग़ कमज़ोर हो जाता है, यहाँ तक कि बच्चे से भी बदतर हो जाते हैं, उसमें से कुछ भी नहीं जानते जो वे जानते थे। और (इसी तरह) तुम धरती को सूखी देखते हो, उसमें पेड़-पौधे नहीं होते, फिर हम उसमें बारिश का पानी उतारते हैं, तो उसमें पौधे उग आते हैं, वह अपने पौधे की वृद्धि के कारण ऊँची हो जाती है और हर तरह के सुंदर पौधे उगाती है।
आयत 6
ذَٰلِكَ بِأَنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلْحَقُّ وَأَنَّهُۥ يُحْىِ ٱلْمَوْتَىٰ وَأَنَّهُۥ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍۢ قَدِيرٌۭ
ذَٰلِكَ
ये
بِأَنَّ
बवजह इसके कि
ٱللَّهَ
अल्लाह
هُوَ
वो ही
ٱلْحَقُّ
हक़ है
وَأَنَّهُۥ
और बेशक वो
يُحْىِ
वो ज़िन्दा करता है
ٱلْمَوْتَىٰ
मुर्दों को
وَأَنَّهُۥ
और बेशक वो
عَلَىٰ
ऊपर
كُلِّ
हर
شَىْءٍۢ
चीज़ के
قَدِيرٌۭ
ख़ूब क़ुदरत वाला है
यह इसलिए कि अल्लाह ही सत्य है और वह मुर्दों को जीवित करता है और उसे हर चीज़ की सामर्थ्य प्राप्ती है
तफ़्सीर:
यह सब जो हमने तुम्हारे लिए उल्लेख किया है (जैसे तुम्हारी रचना की शुरुआत और उसके चरण और उन लोगों की स्थितियाँ जो तुममें से पैदा होते हैं) इस उद्देश्य के लिए है कि तुम इस बात पर ईमान लाओ कि वह अल्लाह जिसने तुम्हें पैदा किया, वही सत्य है, जिसमें कोई संदेह नहीं है, जबकि तुम्हारी उन मूर्तियों का मामला इसके विपरीत है जिनकी तुम पूजा करते हो। और एक उद्देश्य यह भी है कि तुम यह विश्वास रखो कि अल्लाह ही मरे हुए लोगों को जीवित करेगा और यह कि वह हर चीज़ का सामर्थ्य रखता है, उसे कोई चीज़ विवश नहीं कर सकती।
आयत 7
وَأَنَّ ٱلسَّاعَةَ ءَاتِيَةٌۭ لَّا رَيْبَ فِيهَا وَأَنَّ ٱللَّهَ يَبْعَثُ مَن فِى ٱلْقُبُورِ
وَأَنَّ
और बेशक
ٱلسَّاعَةَ
क़यामत
ءَاتِيَةٌۭ
आने वाली है
لَّا
(there is) no
رَيْبَ
नहीं कोई शक
فِيهَا
इसमें
وَأَنَّ
और बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
يَبْعَثُ
दोबारा उठाएगा
مَن
उन्हें जो
فِى
(are) in
ٱلْقُبُورِ
क़ब्रों में हैं
और यह कि क़ियामत की घड़ी आनेवाली है, इसमें कोई सन्देह नहीं है। और यह कि अल्लाह उन्हें उठाएगा जो क़ब्रों में है
तफ़्सीर:
और ताकि तुम इस बात का भी विश्वास रखो कि क़ियामत आने वाली है, उसके आने में कोई शक नहीं है, और यह कि अल्लाह मरे हुए लोगों को उनकी क़ब्रों से जीवित करके उठाएगा, ताकि उन्हें उनके कार्यों का बदला दे।
आयत 8
وَمِنَ ٱلنَّاسِ مَن يُجَـٰدِلُ فِى ٱللَّهِ بِغَيْرِ عِلْمٍۢ وَلَا هُدًۭى وَلَا كِتَـٰبٍۢ مُّنِيرٍۢ
وَمِنَ
And among
ٱلنَّاسِ
और लोगों में से कोई है
مَن
जो
يُجَـٰدِلُ
झगड़ता है
فِى
concerning
ٱللَّهِ
अल्लाह के बारे में
بِغَيْرِ
बग़ैर
عِلْمٍۢ
इल्म के
وَلَا
और बग़ैर
هُدًۭى
हिदायत के
وَلَا
और बग़ैर
كِتَـٰبٍۢ
किताबे
مُّنِيرٍۢ
रौशन के
और लोगों मे कोई ऐसा है जो किसी ज्ञान, मार्गदर्शन और प्रकाशमान किताब के बिना अल्लाह के विषय में (घमंड से) अपने पहलू मोड़ते हुए झगड़ता है,
तफ़्सीर:
काफ़िरों में से कुछ लोग ऐसे हैं, जो अल्लाह की तौहीद के बारे में झगड़ते हैं, जबकि उनके पास सत्य तक पहुँचाने वाला कोई ज्ञान नहीं है, न वे किसी मार्गदर्शक का पालन करते हैं जो उन्हें सत्य का मार्गदर्शन करे, और न ही उनके पास अल्लाह की ओर से उतरी हुई कोई दीप्तिमान पुस्तक है, जो उन्हें मार्ग दिखाए।
आयत 9
ثَانِىَ عِطْفِهِۦ لِيُضِلَّ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ ۖ لَهُۥ فِى ٱلدُّنْيَا خِزْىٌۭ ۖ وَنُذِيقُهُۥ يَوْمَ ٱلْقِيَـٰمَةِ عَذَابَ ٱلْحَرِيقِ
ثَانِىَ
मोड़ने वाला है
عِطْفِهِۦ
शाना अपना
لِيُضِلَّ
ताकि वो भटका दे
عَن
from
سَبِيلِ
(the) way
ٱللَّهِ ۖ
अल्लाह के रास्ते से
لَهُۥ
उसके लिए है
فِى
in
ٱلدُّنْيَا
दुनिया में
خِزْىٌۭ ۖ
रुस्वाई
وَنُذِيقُهُۥ
और हम चखाऐंगे उसे
يَوْمَ
दिन
ٱلْقِيَـٰمَةِ
क़यामत के
عَذَابَ
अज़ाब
ٱلْحَرِيقِ
आग का
ताकि अल्लाह के मार्ग से भटका दे। उसके लिए दुनिया में भी रुसवाई है और क़ियामत के दिन हम उसे जलने की यातना का मज़ा चखाएँगे
तफ़्सीर:
वह घमंड से अपनी गरदन मोड़ने वाला है, ताकि लोगों को ईमान और इस्लाम ग्रहण करने से रोक दे। जिसकी विशेषता यह हो, उसके लिए दुनिया में अपमान है उसे मिलने वाले दंड के कारण, तथा आख़िरत में हम उसे जलाने वाली आग की यातना चखाएँगे।
आयत 10
ذَٰلِكَ بِمَا قَدَّمَتْ يَدَاكَ وَأَنَّ ٱللَّهَ لَيْسَ بِظَلَّـٰمٍۢ لِّلْعَبِيدِ
ذَٰلِكَ
ये
بِمَا
बवजह उसके जो
قَدَّمَتْ
आगे भेजा
يَدَاكَ
तेरे दोनों हाथों ने
وَأَنَّ
और बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
لَيْسَ
नहीं है
بِظَلَّـٰمٍۢ
ज़ुल्म करने वाला
لِّلْعَبِيدِ
बन्दों पर
(कहा जाएगा,) यह उसके कारण है जो तेरे हाथों ने आगे भेजा था और इसलिए कि अल्लाह बन्दों पर तनिक भी ज़ुल्म करनेवाला नहीं
तफ़्सीर:
और उससे कहा जाएगा : यह यातना जो तूने चखी है, तेरे कुफ्र एवं गुनाहों के कारण है, जो तूने कमाए हैं। और अल्लाह अपनी किसी मख़लूक़ को नाहक़ अज़ाब नहीं देता।
आज की ज़िंदगी में सबक़
कयामत की हौलनाकी का ज़िक्र है। यह हमें सिखाता है कि कयामत का मंज़र इतना संगीन होगा कि दूध पिलाने वाली मां भी अपने बच्चे को भूल जाएगी, इसलिए तैयारी अभी से ज़रूरी है।
आयत 11
وَمِنَ ٱلنَّاسِ مَن يَعْبُدُ ٱللَّهَ عَلَىٰ حَرْفٍۢ ۖ فَإِنْ أَصَابَهُۥ خَيْرٌ ٱطْمَأَنَّ بِهِۦ ۖ وَإِنْ أَصَابَتْهُ فِتْنَةٌ ٱنقَلَبَ عَلَىٰ وَجْهِهِۦ خَسِرَ ٱلدُّنْيَا وَٱلْـَٔاخِرَةَ ۚ ذَٰلِكَ هُوَ ٱلْخُسْرَانُ ٱلْمُبِينُ
وَمِنَ
And among
ٱلنَّاسِ
और लोगों में से कोई है
مَن
जो
يَعْبُدُ
इबादत करता है
ٱللَّهَ
अल्लाह की
عَلَىٰ
on
حَرْفٍۢ ۖ
किनारे पर
فَإِنْ
फिर अगर
أَصَابَهُۥ
पहुँचे उसे
خَيْرٌ
भलाई
ٱطْمَأَنَّ
वो मुत्मइन हो जाता है
بِهِۦ ۖ
उस पर
وَإِنْ
और अगर
أَصَابَتْهُ
पहुँचे उसे
فِتْنَةٌ
आज़माइश
ٱنقَلَبَ
वो पलट जाता है
عَلَىٰ
on
وَجْهِهِۦ
अपने चेहरे पर
خَسِرَ
उसने नुक़्सान उठाया
ٱلدُّنْيَا
दुनिया
وَٱلْـَٔاخِرَةَ ۚ
और आख़िरत का
ذَٰلِكَ
ये है
هُوَ
वो
ٱلْخُسْرَانُ
ख़सारा/नुक़्सान
ٱلْمُبِينُ
खुला
और लोगों में कोई ऐसा है, जो एक किनारे पर रहकर अल्लाह की बन्दगी करता है। यदि उसे लाभ पहुँचा तो उससे सन्तुष्ट हो गया और यदि उसे कोई आज़माइश पेश आ गई तो औंधा होकर पलट गया। दुनिया भी खोई और आख़िरत भी। यही है खुला घाटा
तफ़्सीर:
लोगों में से कोई व्यक्ति ढुलमुल-यक़ीन होता है, जो अल्लाह की इबादत संदेह के साथ करता है। अगर उसे स्वास्थ्य और धन जैसी कोई भलाई प्राप्त होती है, तो वह अपने ईमान और अल्लाह की इबादत पर बना रहता है। और अगर उसे बीमारी और ग़रीबी के रूप में कोई आज़माइश आती है, तो अपने धर्म के प्रति निराशावादी होकर उससे फिर जाता है। इस तरह वह अपनी दुनिया का घाटा करता है, क्योंकि उसके कुफ़्र के कारण उसे दुनिया की कोई ऐसी चीज़ हरगिज़ नहीं मिलेगी, जो उसके भाग्य में नहीं लिखी थी। तथा वह अपनी आख़िरत का भी घाटा करता है, क्योंकि वह अल्लाह की यातना का सामना करेगा। यही तो स्पष्ट घाटा है।
आयत 12
يَدْعُوا۟ مِن دُونِ ٱللَّهِ مَا لَا يَضُرُّهُۥ وَمَا لَا يَنفَعُهُۥ ۚ ذَٰلِكَ هُوَ ٱلضَّلَـٰلُ ٱلْبَعِيدُ
يَدْعُوا۟
वो पुकारता है
مِن
besides
دُونِ
सिवाए
ٱللَّهِ
अल्लाह के
مَا
उसे जो
لَا
not
يَضُرُّهُۥ
नहीं नुक़्सान देता उसे
وَمَا
और जो
لَا
not
يَنفَعُهُۥ ۚ
नहीं फ़ायदा देता उसे
ذَٰلِكَ
यही है
هُوَ
वो
ٱلضَّلَـٰلُ
गुमराही
ٱلْبَعِيدُ
दूर की
वह अल्लाह को छोड़कर उसे पुकारता है, जो न उसे हानि पहुँचा सके और न उसे लाभ पहुँचा सके। यही हैं परले दर्जे की गुमराही
तफ़्सीर:
वह अल्लाह को छोड़कर ऐसे बुतों की पूजा करता है, जो न अवज्ञा के कारण नुक़सान पहुँचाते हैं और न आज्ञापालन के नतीजे में लाभ पहुँचाते हैं। यह ऐसे बुतों को पुकारना, जो हानि या लाभ नहीं पहुँचाते, ऐसी गुमराही है, जो सत्य से बहुत दूर है।
आयत 13
يَدْعُوا۟ لَمَن ضَرُّهُۥٓ أَقْرَبُ مِن نَّفْعِهِۦ ۚ لَبِئْسَ ٱلْمَوْلَىٰ وَلَبِئْسَ ٱلْعَشِيرُ
يَدْعُوا۟
वो पुकारता है
لَمَن
यक़ीनन उसे
ضَرُّهُۥٓ
नुक़्सान जिसका
أَقْرَبُ
क़रीब तर है
مِن
than
نَّفْعِهِۦ ۚ
उसके नफ़े से
لَبِئْسَ
अलबत्ता कितना बुरा है
ٱلْمَوْلَىٰ
दोस्त
وَلَبِئْسَ
और अलबत्ता कितना बुरा है
ٱلْعَشِيرُ
साथी
वह उसको पुकारता है जिससे पहुँचनेवाली हानि उससे अपेक्षित लाभ की अपेक्षा अधिक निकट है। बहुत ही बुरा संरक्षक है वह और बहुत ही बुरा साथी!
तफ़्सीर:
बुतों की पूजा करने वाला यह काफ़िर ऐसी चीज़ को पुकारता है, जिसका निश्चित नुक़सान, उसके लुप्त लाभ से अधिक निकट है। वह पूज्य बहुत बुरा है, जिसका नुक़सान उसके लाभ से अधिक निकट है। वह बुरा मददगार है उसके लिए जो उससे मदद माँगता है और बुरा साथी है उसके लिए जो उसका साथ पकड़ता है।
आयत 14
إِنَّ ٱللَّهَ يُدْخِلُ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ جَنَّـٰتٍۢ تَجْرِى مِن تَحْتِهَا ٱلْأَنْهَـٰرُ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ يَفْعَلُ مَا يُرِيدُ
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
يُدْخِلُ
वो दाख़िल करेगा
ٱلَّذِينَ
उन्हें जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
وَعَمِلُوا۟
और उन्होंने अमल किए
ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ
नेक
جَنَّـٰتٍۢ
बाग़ात में
تَجْرِى
बहती हैं
مِن
from
تَحْتِهَا
उनके नीचे से
ٱلْأَنْهَـٰرُ ۚ
नहरें
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
يَفْعَلُ
करता है
مَا
जो
يُرِيدُ
वो चाहता है
निश्चय ही अल्लाह उन लोगों को, जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए, ऐसे बाग़ों में दाखिल करेगा, जिनके नीचे नहरें बह रही होंगी। निस्संदेह अल्लाह जो चाहे करे
तफ़्सीर:
निःसंदेह अल्लाह उन लोगों को जो ईमान लाए और अच्छे कार्य किए, ऐसे बाग़ों में दाख़िल करेगा, जिनके महलों के नीचे से नहरें बहती हैं। निःसंदेह अल्लाह जो चाहता है, करता है। जिसपर चाहता है, दया करता है, और जिसे चाहता है सज़ा देता है, उसे कोई मजबूर करने वाला नहीं है।
आयत 15
مَن كَانَ يَظُنُّ أَن لَّن يَنصُرَهُ ٱللَّهُ فِى ٱلدُّنْيَا وَٱلْـَٔاخِرَةِ فَلْيَمْدُدْ بِسَبَبٍ إِلَى ٱلسَّمَآءِ ثُمَّ لْيَقْطَعْ فَلْيَنظُرْ هَلْ يُذْهِبَنَّ كَيْدُهُۥ مَا يَغِيظُ
مَن
जो कोई
كَانَ
है
يَظُنُّ
समझता
أَن
ये कि
لَّن
हरगिज़ नहीं
يَنصُرَهُ
मदद करेगा उसकी
ٱللَّهُ
अल्लाह
فِى
in
ٱلدُّنْيَا
दुनिया में
وَٱلْـَٔاخِرَةِ
और आख़िरत में
فَلْيَمْدُدْ
पस चाहिए कि वो दराज़ कर ले
بِسَبَبٍ
एक रस्सी
إِلَى
to
ٱلسَّمَآءِ
तरफ़ आसमान के
ثُمَّ
then
لْيَقْطَعْ
फिर चाहिए कि वो काट डाले
فَلْيَنظُرْ
फिर चाहिए कि वो देखे
هَلْ
क्या
يُذْهِبَنَّ
वाक़ई ले जाती है
كَيْدُهُۥ
तदबीर उसकी
مَا
उस (चीज़) को
يَغِيظُ
जो ग़ुस्सा दिलाती है
जो कोई यह समझता है कि अल्लाह दुनिया औऱ आख़िरत में उसकी (रसूल की) कदापि कोई सहायता न करेगा तो उसे चाहिए कि वह आकाश की ओर एक रस्सी ताने, फिर (अल्लाह की सहायता के सिलसिले को) काट दे। फिर देख ले कि क्या उसका उपाय उस चीज़ को दूर कर सकता है जो उसे क्रोध में डाले हुए है
तफ़्सीर:
जो व्यक्ति यह सोचता है कि अल्लाह दुनिया और आख़िरत में अपने नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की मदद नहीं करेगा, वह अपने घर की छत से एक रस्सी बाँध ले, फिर अपने शरीर को धरती से अलग करके उसके साथ अपना गला घोंट ले (और मर जाए), फिर देखे कि क्या इससे उसके दिल में पाया जाने वाला क्रोध समाप्त हो जाता है? अल्लाह हर हाल में अपने रसूल की मदद करने वाला है, आपका शत्रु चाहे या न चाहे।
आयत 16
وَكَذَٰلِكَ أَنزَلْنَـٰهُ ءَايَـٰتٍۭ بَيِّنَـٰتٍۢ وَأَنَّ ٱللَّهَ يَهْدِى مَن يُرِيدُ
وَكَذَٰلِكَ
और इसी तरह
أَنزَلْنَـٰهُ
नाज़िल किया हमने इसे
ءَايَـٰتٍۭ
आयात
بَيِّنَـٰتٍۢ
वाज़ेह (की शक्ल में)
وَأَنَّ
और बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
يَهْدِى
वो हिदायत देता है
مَن
जिसे
يُرِيدُ
वो चाहता है
इसी प्रकार हमने इस (क़ुरआन) को स्पष्ट आयतों के रूप में अवतरित किया। और बात यह है कि अल्लाह जिसे चाहता है मार्ग दिखाता है
तफ़्सीर:
जिस तरह हमने तुम्हारे सामने मरने के बाद पुनर्जीवित करके उठाने के स्पष्ट प्रमाण प्रस्तुत किए हैं, उसी तरह हमने मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर क़ुरआन को खुली आयतों के रूप में उतारा है, और यह कि अल्लाह जिसे चाहता हे, अपने अनुग्रह से सीधे रास्ते पर लगा देता है।
आयत 17
إِنَّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَٱلَّذِينَ هَادُوا۟ وَٱلصَّـٰبِـِٔينَ وَٱلنَّصَـٰرَىٰ وَٱلْمَجُوسَ وَٱلَّذِينَ أَشْرَكُوٓا۟ إِنَّ ٱللَّهَ يَفْصِلُ بَيْنَهُمْ يَوْمَ ٱلْقِيَـٰمَةِ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍۢ شَهِيدٌ
إِنَّ
बेशक
ٱلَّذِينَ
वो जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
وَٱلَّذِينَ
और वो जो
هَادُوا۟
यहूदी बन गए
وَٱلصَّـٰبِـِٔينَ
और साबी
وَٱلنَّصَـٰرَىٰ
और नसारा
وَٱلْمَجُوسَ
और मजूसी
وَٱلَّذِينَ
और वो जिन्होंने
أَشْرَكُوٓا۟
शिर्क किया
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
يَفْصِلُ
फ़ैसला करेगा
بَيْنَهُمْ
दर्मियान उनके
يَوْمَ
दिन
ٱلْقِيَـٰمَةِ ۚ
क़यामत के
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
عَلَىٰ
ऊपर
كُلِّ
हर
شَىْءٍۢ
चीज़ के
شَهِيدٌ
ख़ूब गवाह है
जो लोग ईमान लाए और जो यहूदी हुए और साबिई और ईसाई और मजूस और जिन लोगों ने शिर्क किया - इस सबके बीच अल्लाह क़ियामत के दिन फ़ैसला कर देगा। निस्संदेह अल्लाह की दृष्टि में हर चीज़ है
तफ़्सीर:
इस उम्मत के जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए, तथा यहूदी, साबी (किसी नबी के अनुयायियों का एक समूह), ईसाई, अग्नि पूजक और मूर्तिपूजा करने वाले - अल्लाह क़ियामत के दिन इनके बीच फैसला कर देगा। चुनाँचे मोमिनों को जन्नत में दाखिल करेगा और उनके सिवा अन्य लोगों को जहन्नम में दाखिल करेगा। अल्लाह अपने बंदों के कथनों और कर्मों में से हर चीज़ से अवगत है। इनमें से कोई चीज़ उससे छिपी नहीं है और वह उन्हें इनका बदला देगा।
आयत 18
أَلَمْ تَرَ أَنَّ ٱللَّهَ يَسْجُدُ لَهُۥ مَن فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَمَن فِى ٱلْأَرْضِ وَٱلشَّمْسُ وَٱلْقَمَرُ وَٱلنُّجُومُ وَٱلْجِبَالُ وَٱلشَّجَرُ وَٱلدَّوَآبُّ وَكَثِيرٌۭ مِّنَ ٱلنَّاسِ ۖ وَكَثِيرٌ حَقَّ عَلَيْهِ ٱلْعَذَابُ ۗ وَمَن يُهِنِ ٱللَّهُ فَمَا لَهُۥ مِن مُّكْرِمٍ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ يَفْعَلُ مَا يَشَآءُ ۩
أَلَمْ
क्या नहीं
تَرَ
आपने देखा
أَنَّ
कि बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह को
يَسْجُدُ
सजदा करता है
لَهُۥ
उसी को
مَن
जो
فِى
(is) in
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों में है
وَمَن
और जो
فِى
(is) in
ٱلْأَرْضِ
ज़मीन में है
وَٱلشَّمْسُ
और सूरज
وَٱلْقَمَرُ
और चाँद
وَٱلنُّجُومُ
और सितारे
وَٱلْجِبَالُ
और पहाड़
وَٱلشَّجَرُ
और दरख़्त
وَٱلدَّوَآبُّ
और चौपाए
وَكَثِيرٌۭ
और बहुत से
مِّنَ
of
ٱلنَّاسِ ۖ
लोगों में से
وَكَثِيرٌ
और बहुत से
حَقَّ
साबित हो चुका
عَلَيْهِ
उन पर
ٱلْعَذَابُ ۗ
अज़ाब
وَمَن
और जिसे
يُهِنِ
रुस्वा कर दे
ٱللَّهُ
अल्लाह
فَمَا
तो नहीं
لَهُۥ
उसके लिए
مِن
any
مُّكْرِمٍ ۚ
कोई इज़्ज़त देने वाला
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
يَفْعَلُ
वो करता है
مَا
जो
يَشَآءُ ۩
वो चाहता है
क्या तुमनें देखा नहीं कि अल्लाह ही को सजदा करते है वे सब जो आकाशों में है और जो धरती में है, और सूर्य, चन्द्रमा, तारे पहाड़, वृक्ष, जानवर और बहुत-से मनुष्य? और बहुत-से ऐसे है जिनपर यातना का औचित्य सिद्ध हो चुका है, और जिसे अल्लाह अपमानित करे उस सम्मानित करनेवाला कोई नहीं। निस्संदेह अल्लाह जो चाहे करता है
तफ़्सीर:
(ऐ रसूल!) क्या आप नहीं जानते कि आसमान के सारे फ़रिश्ते, ज़मीन के सारे ईमान वाले जिन्न और इनसान अल्लाह को, उसकी आज्ञाकारिता के तौर पर सजदा करते हैं, तथा सूरज उसी को सजदा करता है, चाँद उसी को सजदा करता है, तथा आसमान के सितारे और धरती के पर्वत, पेड़ और सारे जानवर अधीनता के तौर पर उसी को सजदा करते हैं। तथा बहुत-से लोग भी आज्ञाकारिता के तौर पर उसी को सजदा करते हैं, जबकि बहुत-से लोग आज्ञाकारिता के तौर पर उसके सामने सजदा करने से उपेक्षा करते हैं। तो ऐसे लोगों पर उनके कुफ़्र के कारण अल्लाह की यातना साबित हो गई। और अल्लाह जिस व्यक्ति पर उसके कुफ़्र के कारण अपमान एवं तिरस्कार का फैसला कर दे, तो उसका सम्मान करने वाला कोई नहीं है। निःसंदेह अल्लाह जो चाहता है, करता है। उसे कोई मजबूर करने वाला नहीं है।
आयत 19
۞ هَـٰذَانِ خَصْمَانِ ٱخْتَصَمُوا۟ فِى رَبِّهِمْ ۖ فَٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ قُطِّعَتْ لَهُمْ ثِيَابٌۭ مِّن نَّارٍۢ يُصَبُّ مِن فَوْقِ رُءُوسِهِمُ ٱلْحَمِيمُ
۞ هَـٰذَانِ
ये दो
خَصْمَانِ
झगड़ने वाले हैं
ٱخْتَصَمُوا۟
जिन्होंने झगड़ा किया
فِى
concerning
رَبِّهِمْ ۖ
अपने रब के बारे में
فَٱلَّذِينَ
तो वो जिन्होंने
كَفَرُوا۟
कुफ़्र किया
قُطِّعَتْ
काटे जा चुके हैं
لَهُمْ
उनके लिए
ثِيَابٌۭ
कपड़े
مِّن
of
نَّارٍۢ
आग से
يُصَبُّ
डाला जाएगा
مِن
over
فَوْقِ
ऊपर से
رُءُوسِهِمُ
उनके सिरों के
ٱلْحَمِيمُ
खौलता पानी
ये दो विवादी हैं, जो अपने रब के विषय में आपस में झगड़े। अतः जिन लोगों ने कुफ्र किया उनके लिए आग के वस्त्र काटे जा चुके है। उनके सिरों पर खौलता हुआ पानी डाला जाएगा
तफ़्सीर:
ये दो समूह हैं, जो अपने पालनहार के बारे में इस बात पर झगड़ने वाले हैं कि उनमें से कौन सत्य पर है : एक समूह ईमान वालों का और एक समूह काफ़िरों का है। काफ़िरों के समूह को आग उसी तरह घेर लेगी, जिस तरह वस्त्र, उसके पहनने वाले को घेर लेता है, और उनके सिरों पर अत्यंत गर्म पानी उंडेला जाएगा।
आयत 20
يُصْهَرُ بِهِۦ مَا فِى بُطُونِهِمْ وَٱلْجُلُودُ
يُصْهَرُ
पिघला दिया जाएगा
بِهِۦ
साथ उसके
مَا
जो कुछ
فِى
(is) in
بُطُونِهِمْ
उनके पेटों में है
وَٱلْجُلُودُ
और खालें भी
इससे जो कुछ उनके पेटों में है, वह पिघल जाएगा और खालें भी
तफ़्सीर:
उसकी गर्मी की तीव्रता के कारण उसके साथ उनके पेट के अंदर की अंतड़ियाँ पिघला दी जाएँगी और वह उनकी त्वचा तक पहुँचकर उन्हें भी पिघला देगा।
आज की ज़िंदगी में सबक़
कमज़ोर ईमान वालों की मिसाल का ज़िक्र है। यह सबक हमें सिखाता है कि ईमान को सिर्फ फायदे की शर्त पर नहीं रखना चाहिए, बल्कि मुश्किल में भी मज़बूत रहना चाहिए।
आयत 21
وَلَهُم مَّقَـٰمِعُ مِنْ حَدِيدٍۢ
وَلَهُم
और उनके लिए
مَّقَـٰمِعُ
गुर्ज़/ हथौड़े होंगे
مِنْ
of
حَدِيدٍۢ
लोहे के
और उनके लिए (दंड देने को) लोहे के गुर्ज़ होंगे
तफ़्सीर:
और उनके लिए जहन्नम में लोहे के हथौड़े हैं, जिनसे फ़रिश्ते उनके सिरों पर मारेंगे।
आयत 22
كُلَّمَآ أَرَادُوٓا۟ أَن يَخْرُجُوا۟ مِنْهَا مِنْ غَمٍّ أُعِيدُوا۟ فِيهَا وَذُوقُوا۟ عَذَابَ ٱلْحَرِيقِ
كُلَّمَآ
जब भी
أَرَادُوٓا۟
वो चाहेंगे
أَن
कि
يَخْرُجُوا۟
वो निकल जाऐं
مِنْهَا
उससे
مِنْ
from
غَمٍّ
ग़म से
أُعِيدُوا۟
वो लौटा दिए जाऐंगे
فِيهَا
उसी में
وَذُوقُوا۟
और चखो
عَذَابَ
अज़ाब
ٱلْحَرِيقِ
आग का
जब कभी भी घबराकर उससे निकलना चाहेंगे तो उसी में लौटा दिए जाएँगे और (कहा जाएगा,) "चखो दहकती आग की यातना का मज़ा!"
तफ़्सीर:
जब भी वे उसकी कठोर यातना से तंग आकर जहन्नम से बाहर निकलने की कोशिश करेंगे, उन्हें उसी में लौटा दिया जाएगा और उनसे कहा जाएगा : जलाने वाली आग का स्वाद चखो।
आयत 23
إِنَّ ٱللَّهَ يُدْخِلُ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ جَنَّـٰتٍۢ تَجْرِى مِن تَحْتِهَا ٱلْأَنْهَـٰرُ يُحَلَّوْنَ فِيهَا مِنْ أَسَاوِرَ مِن ذَهَبٍۢ وَلُؤْلُؤًۭا ۖ وَلِبَاسُهُمْ فِيهَا حَرِيرٌۭ
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
يُدْخِلُ
दाख़िल करेगा
ٱلَّذِينَ
उन्हें जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
وَعَمِلُوا۟
और उन्होंने अमल किए
ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ
नेक
جَنَّـٰتٍۢ
बाग़ात में
تَجْرِى
बहती हैं
مِن
from
تَحْتِهَا
उनके नीचे से
ٱلْأَنْهَـٰرُ
नहरें
يُحَلَّوْنَ
वो आरासता किए जाऐंगे
فِيهَا
उनमें
مِنْ
with
أَسَاوِرَ
कंगनों से
مِن
of
ذَهَبٍۢ
सोने के
وَلُؤْلُؤًۭا ۖ
और मोती के
وَلِبَاسُهُمْ
और लिबास होगा उनका
فِيهَا
उनमें
حَرِيرٌۭ
रेशम
निस्संदेह अल्लाह उन लोगों को, जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए, ऐसे बाग़ों में दाखिल करेगा जिनके नीचें नहरें बह रही होंगी। वहाँ वे सोने के कंगनों और मोती से आभूषित किए जाएँगे और वहाँ उनका परिधान रेशमी होगा
तफ़्सीर:
और ईमान वालों का समूह, अर्थात् वे लोग, जो अल्लाह पर ईमान लाए और अच्छे कार्य किए, अल्लाह उन्हें ऐसे बाग़ों में दाख़िल करेगा, जिनके महलों और पेड़ों के नीचे से नहरें बहती हैं। अल्लाह उन्हें सोने के कंगन के साथ सुशोभित करेगा और उन्हें मोतियों से अलंकृत करेगा, तथा वहाँ उनके कपड़े रेशम के होंगे।
आयत 24
وَهُدُوٓا۟ إِلَى ٱلطَّيِّبِ مِنَ ٱلْقَوْلِ وَهُدُوٓا۟ إِلَىٰ صِرَٰطِ ٱلْحَمِيدِ
وَهُدُوٓا۟
और वो राह दिखाए गए
إِلَى
to
ٱلطَّيِّبِ
तरफ़ पाकीज़ा
مِنَ
of
ٱلْقَوْلِ
बात के
وَهُدُوٓا۟
और वो राह दिखाए गए
إِلَىٰ
to
صِرَٰطِ
तरफ़ रास्ते
ٱلْحَمِيدِ
ख़ूब तारीफ़ वाले (रब) के
निर्देशित किया गया उन्हें अच्छे पाक बोल की ओर और उनको प्रशंसित अल्लाह का मार्ग दिखाया गया
तफ़्सीर:
तथा अल्लाह ने उन्हें इस सांसारिक जीवन में पवित्र बातों का मार्ग दिखाया, जैसे इस बात की गवाही देना कि अल्लाह के सिवा कोई पूज्य नहीं है, अल्लाह की बड़ाई बयान करना और उसकी प्रशंसा करना। तथा उन्हें इस्लाम के प्रशंसित मार्ग का मार्गदर्शन किया।
आयत 25
إِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ وَيَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ وَٱلْمَسْجِدِ ٱلْحَرَامِ ٱلَّذِى جَعَلْنَـٰهُ لِلنَّاسِ سَوَآءً ٱلْعَـٰكِفُ فِيهِ وَٱلْبَادِ ۚ وَمَن يُرِدْ فِيهِ بِإِلْحَادٍۭ بِظُلْمٍۢ نُّذِقْهُ مِنْ عَذَابٍ أَلِيمٍۢ
إِنَّ
बेशक
ٱلَّذِينَ
वो जिन्होंने
كَفَرُوا۟
कुफ़्र किया
وَيَصُدُّونَ
और वो रोकते हैं
عَن
from
سَبِيلِ
(the) way
ٱللَّهِ
अल्लाह के रास्ते से
وَٱلْمَسْجِدِ
और मस्जिदे
ٱلْحَرَامِ
हराम से
ٱلَّذِى
वो जो
جَعَلْنَـٰهُ
बनाया हमने उसे
لِلنَّاسِ
लोगों के लिए
سَوَآءً
यक्साँ / बराबर है
ٱلْعَـٰكِفُ
रहने वाला
فِيهِ
उसमें
وَٱلْبَادِ ۚ
और बाहर से आने वाला
وَمَن
और जो कोई
يُرِدْ
इरादा करेगा
فِيهِ
इसमें
بِإِلْحَادٍۭ
इलहाद/ कज रवी का
بِظُلْمٍۢ
साथ ज़ुल्म के
نُّذِقْهُ
हम चखाऐंगे उसे
مِنْ
of
عَذَابٍ
अज़ाब में से
أَلِيمٍۢ
दर्दनाक
जिन लोगों ने इनकार किया और वे अल्लाह के मार्ग से रोकते हैं और प्रतिष्ठित मस्जिद (काबा) से, जिसे हमने सब लोगों के लिए ऐसा बनाया है कि उसमें बराबर है वहाँ का रहनेवाला और बाहर से आया हुआ। और जो व्यक्ति उस (प्रतिष्ठित मस्जिद) में कुटिलता अर्थात ज़ूल्म के साथ कुछ करना चाहेगा, उसे हम दुखद यातना का मज़ा चखाएँगे
तफ़्सीर:
निश्चय जिन लोगों ने अल्लाह के साथ कुफ़्र किया और दूसरे लोगों को इस्लाम ग्रहण करने से रोकते हैं, और लोगों को मस्जिदे हराम से रोकते हैं, जैसा कि मुश्रिकों ने हुदैबिया के वर्ष किया, तो हम उन्हें दर्दनाक यातना चखाएँगे। वह मस्जिद जिसे हमने लोगों के लिए उनकी नमाज़ में क़िबला, तथा हज्ज और उम्रा के अनुष्ठानों में से एक अनुष्ठान बनाया है, उसमें मक्के में रहने वाले उसके निवासी और मक्के के अलावा दूसरे स्थानों से आने वाले (ग़ैर मक्कावासी) सब बराबर हैं। और जो भी वहाँ जानबूझकर किसी गुनाह का कार्य करके सत्य से हटने का इरादा करेगा, हम उसे दर्दनाक यातना चखाएँगे।
आयत 26
وَإِذْ بَوَّأْنَا لِإِبْرَٰهِيمَ مَكَانَ ٱلْبَيْتِ أَن لَّا تُشْرِكْ بِى شَيْـًۭٔا وَطَهِّرْ بَيْتِىَ لِلطَّآئِفِينَ وَٱلْقَآئِمِينَ وَٱلرُّكَّعِ ٱلسُّجُودِ
وَإِذْ
और जब
بَوَّأْنَا
मुक़र्रर कर दी हमने
لِإِبْرَٰهِيمَ
इब्राहीम के लिए
مَكَانَ
जगह
ٱلْبَيْتِ
बैतुल्लाह की
أَن
कि
لَّا
(do) not
تُشْرِكْ
ना तुम शरीक करो
بِى
मेरे साथ
شَيْـًۭٔا
किसी चीज़ को
وَطَهِّرْ
और पाक रखो
بَيْتِىَ
मेरे घर को
لِلطَّآئِفِينَ
वास्ते तवाफ़ करने वालों के
وَٱلْقَآئِمِينَ
और क़याम करने वालों
وَٱلرُّكَّعِ
और रूकूअ करने वालों
ٱلسُّجُودِ
और सजदा करने वालों के
याद करो जब कि हमने इबराहीम के लिए अल्लाह के घर को ठिकाना बनाया, इस आदेश के साथ कि "मेरे साथ किसी चीज़ को साझी न ठहराना और मेरे घर को तवाफ़ (परिक्रमा) करनेवालों और खड़े होने और झुकने और सजदा करनेवालों के लिए पाक-साफ़ रखना।"
तफ़्सीर:
और (ऐ रसूल) उस समय को याद करें, जब हमने इबराहीम अलैहिस्सलाम को काबा का स्थान और उसकी सीमाएँ बता दीं, जबकि वह अज्ञात था। और हमने उनकी ओर वह़्य भेजी कि मेरी इबादत में किसी को साझी न बनाना, बल्कि केवल मेरी ही इबादत करना और मेरे घर को उसका तवाफ़ करने वालों और उसमें नमाज़ पढ़ने वालों के लिए नज़र आने वाली और नज़र न आने वाली (ज़ाहिरी व बातिनी) अशुद्धियों से पवित्र रखना।
आयत 27
وَأَذِّن فِى ٱلنَّاسِ بِٱلْحَجِّ يَأْتُوكَ رِجَالًۭا وَعَلَىٰ كُلِّ ضَامِرٍۢ يَأْتِينَ مِن كُلِّ فَجٍّ عَمِيقٍۢ
وَأَذِّن
और एलान कर दो
فِى
to
ٱلنَّاسِ
लोगों में
بِٱلْحَجِّ
हज का
يَأْتُوكَ
वो आऐंगे तेरे पास
رِجَالًۭا
पैदल
وَعَلَىٰ
और ऊपर
كُلِّ
हर
ضَامِرٍۢ
लाग़र ऊँट के
يَأْتِينَ
वो आऐंगे
مِن
from
كُلِّ
every
فَجٍّ
हर कुशादा रास्ते से
عَمِيقٍۢ
दूर दराज़ के
और लोगों में हज के लिए उद्घोषणा कर दो कि "वे प्रत्येक गहरे मार्ग से, पैदल भी और दुबली-दुबली ऊँटनियों पर, तेरे पास आएँ
तफ़्सीर:
और लोगों को इस घर के हज्ज की ओर बुलाते हुए घोषणा कर दें, जिसे हमने आपको बनाने का आदेश दिया है; वे आपके पास पैदल या ऐसे ऊँटों पर सवार होकर चले आएँगे, जो लंबी दूरी तय करने के कारण कमज़ोर हो चुके होंगे, ऊँट उन्हें अपने ऊपर सवार करके हर दूर-दराज़ रास्ते से ले आएँगे।
आयत 28
لِّيَشْهَدُوا۟ مَنَـٰفِعَ لَهُمْ وَيَذْكُرُوا۟ ٱسْمَ ٱللَّهِ فِىٓ أَيَّامٍۢ مَّعْلُومَـٰتٍ عَلَىٰ مَا رَزَقَهُم مِّنۢ بَهِيمَةِ ٱلْأَنْعَـٰمِ ۖ فَكُلُوا۟ مِنْهَا وَأَطْعِمُوا۟ ٱلْبَآئِسَ ٱلْفَقِيرَ
لِّيَشْهَدُوا۟
ताकि वो देखें
مَنَـٰفِعَ
फ़ायदों को
لَهُمْ
अपने लिए
وَيَذْكُرُوا۟
और वो ज़िक्र करें
ٱسْمَ
नाम
ٱللَّهِ
अल्लाह का
فِىٓ
on
أَيَّامٍۢ
days
مَّعْلُومَـٰتٍ
मालूम दिनों में
عَلَىٰ
उस पर
مَا
जो
رَزَقَهُم
उसने रिज़्क़ दिया उन्हें
مِّنۢ
of
بَهِيمَةِ
चौपायों में से
ٱلْأَنْعَـٰمِ ۖ
मवेशियों के
فَكُلُوا۟
पस खाओ
مِنْهَا
उसमें से
وَأَطْعِمُوا۟
और खिलाओ
ٱلْبَآئِسَ
भूके
ٱلْفَقِيرَ
मोहताज को
ताकि वे उन लाभों को देखें जो वहाँ उनके लिए रखे गए है। और कुछ ज्ञात और निश्चित दिनों में उन चौपाए अर्थात मवेशियों पर अल्लाह का नाम लें, जो उसने उन्हें दिए है। फिर उसमें से स्वयं भी खाओ और तंगहाल मुहताज को भी खिलाओ।"
तफ़्सीर:
ताकि वे उन लाभों को प्राप्त करने के लिए हाज़िर हों, जो उन्हें मिलने वाले हैं, जैसे गुनाहों की माफ़ी, सवाब की प्राप्ति और मुसलमानों के अंदर एकता पैदा करना आदि, और ताकि वे ज्ञात दिनों अर्थात : ज़ुल-हिज्जा की दसवीं तारीख़ और उसके बाद के तीन दिनों में जो 'हदी' (क़ुर्बानी के जानवर) ज़बह करते हैं, उनपर अल्लाह का नाम लें, उसपर अल्लाह का शुक्रिया अदा करते हुए जो उसने उन्हें ऊँट, गाय और भेड़-बकरी जैसे चौपाए प्रदान किए। तो तुम इन 'हदी' के जानवरों का मांस खुद खाओ और सख्त निर्धनों को खिलाओ।
आयत 29
ثُمَّ لْيَقْضُوا۟ تَفَثَهُمْ وَلْيُوفُوا۟ نُذُورَهُمْ وَلْيَطَّوَّفُوا۟ بِٱلْبَيْتِ ٱلْعَتِيقِ
ثُمَّ
Then
لْيَقْضُوا۟
फिर चाहिए कि वो दूर करें
تَفَثَهُمْ
मैल अपना
وَلْيُوفُوا۟
और चाहिए कि वो पूरी करें
نُذُورَهُمْ
नज़रें अपनी
وَلْيَطَّوَّفُوا۟
और चाहिए कि वो तवाफ़ करें
بِٱلْبَيْتِ
उस घर का
ٱلْعَتِيقِ
जो क़दीम है
फिर उन्हें चाहिए कि अपना मैल-कुचैल दूर करें और अपनी मन्नतें पूरी करें और इस पुरातन घर का तवाफ़ (परिक्रमा) करें
तफ़्सीर:
फिर वे अपने हज्ज के शेष अनुष्ठानों को पूरा करें, तथा अपने सिर मुंडवाकर और अपने नाखूनों को काटकर और एहराम के कारण अपने शरीर पर जमी गंदगी को हटाकर हलाल हो जाएँ। फिर वे हज्ज या उम्रा या क़ुर्बानी की अपनी मानी हुई मन्नत पूरी करें, और उस घर का तवाफ़े-इफ़ाज़ा करें, जिसे अल्लाह ने दमन करने वाले शासकों के प्रभुत्व से मुक्त रखा है।
आयत 30
ذَٰلِكَ وَمَن يُعَظِّمْ حُرُمَـٰتِ ٱللَّهِ فَهُوَ خَيْرٌۭ لَّهُۥ عِندَ رَبِّهِۦ ۗ وَأُحِلَّتْ لَكُمُ ٱلْأَنْعَـٰمُ إِلَّا مَا يُتْلَىٰ عَلَيْكُمْ ۖ فَٱجْتَنِبُوا۟ ٱلرِّجْسَ مِنَ ٱلْأَوْثَـٰنِ وَٱجْتَنِبُوا۟ قَوْلَ ٱلزُّورِ
ذَٰلِكَ
ये है (हुक्म)
وَمَن
और जो कोई
يُعَظِّمْ
ताज़ीम करेगा
حُرُمَـٰتِ
(the) sacred rites
ٱللَّهِ
अल्लाह की हुरमतों की
فَهُوَ
तो वो
خَيْرٌۭ
बेहतर है
لَّهُۥ
उसके लिए
عِندَ
नज़दीक
رَبِّهِۦ ۗ
उसके रब के
وَأُحِلَّتْ
और हलाल किए गए
لَكُمُ
तुम्हारे लिए
ٱلْأَنْعَـٰمُ
चौपाए
إِلَّا
सिवाए
مَا
उनके जो
يُتْلَىٰ
पढ़े जाते हैं
عَلَيْكُمْ ۖ
तुम पर
فَٱجْتَنِبُوا۟
पस बचो
ٱلرِّجْسَ
गन्दगी से
مِنَ
of
ٱلْأَوْثَـٰنِ
बुतों की
وَٱجْتَنِبُوا۟
और बचो
قَوْلَ
बात
ٱلزُّورِ
झूठी से
इन बातों का ध्यान रखों और जो कोई अल्लाह द्वारा निर्धारित मर्यादाओं का आदर करे, तो यह उसके रब के यहाँ उसी के लिए अच्छा है। और तुम्हारे लिए चौपाए हलाल है, सिवाय उनके जो तुम्हें बताए गए हैं। तो मूर्तियों की गन्दगी से बचो और बचो झूठी बातों से
तफ़्सीर:
ये जो तुम्हें आदेश दिए गए हैं (जैसे सिर मुंडवाना, नाखून काटना और मैल-कुचैल दूर करना, मन्नत पूरी करना और का'बा का तवाफ़ करना), इन्हें अल्लाह ने तुमपर अनिवार्य किया है। अतः अल्लाह की अनिवार्य की हुई चीज़ों का सम्मान करो। और जो व्यक्ति अपने एहराम की स्थिति में उन चीज़ों से बचता है जिनसे बचने का अल्लाह ने उसे आदेश दिया है; अल्लाह की सीमाओं का सम्मान करते हुए उनका उल्लंघन करने और उसके निषेधों को हलाल ठहराने से बचता है, तो यह उसके लिए उसके रब के पास दुनिया एवं आख़िरत में बेहतर है। और (ऐ लोगो!) तुम्हारे लिए चौपायों अर्थात ऊँट, गाय और भेड़-बकरी को हलाल किया गया है। चुनाँचे उनमें से तुम्हारे लिए 'हामी', 'बहीरा' और 'वसीला' आदि जानवरों को हराम नहीं किया है। उनमें से केवल वही हराम किया है, जिनका वर्णन तुम क़ुरआन में पाते हो, जैसे मरे हुए जानवर और बहते रक्त आदि का हराम होना। इसलिए गंदगी अर्थात् मूर्तियों से बचो, और हर असत्य बात से बचो, जिसे अल्लाह या उसकी मख़लूक की ओर झूठे तौर पर मनसूब कर दिया गया हो।
आज की ज़िंदगी में सबक़
हज के अहकाम और काबा की तामीर का ज़िक्र है। यह हमें सिखाता है कि हज सिर्फ रस्म नहीं बल्कि इखलास और कुर्बानी की मुकम्मल तरबियत है।
आयत 31
حُنَفَآءَ لِلَّهِ غَيْرَ مُشْرِكِينَ بِهِۦ ۚ وَمَن يُشْرِكْ بِٱللَّهِ فَكَأَنَّمَا خَرَّ مِنَ ٱلسَّمَآءِ فَتَخْطَفُهُ ٱلطَّيْرُ أَوْ تَهْوِى بِهِ ٱلرِّيحُ فِى مَكَانٍۢ سَحِيقٍۢ
حُنَفَآءَ
यक्सू हो कर
لِلَّهِ
अल्लाह के लिए
غَيْرَ
ना
مُشْرِكِينَ
शरीक करने वाले
بِهِۦ ۚ
साथ उसके
وَمَن
और जो
يُشْرِكْ
शिर्क करेगा
بِٱللَّهِ
साथ अल्लाह के
فَكَأَنَّمَا
तो गोया कि
خَرَّ
वो गिर पड़ा
مِنَ
from
ٱلسَّمَآءِ
आसमान से
فَتَخْطَفُهُ
फिर उचक लेते हैं उसे
ٱلطَّيْرُ
परिन्दे
أَوْ
या
تَهْوِى
गिरा देती है
بِهِ
उसे
ٱلرِّيحُ
हवा
فِى
to
مَكَانٍۢ
किसी जगह में
سَحِيقٍۢ
दूर दराज़ की
इस तरह कि अल्लाह ही की ओर के होकर रहो। उसके साथ किसी को साझी न ठहराओ, क्योंकि जो कोई अल्लाह के साथ साझी ठहराता है तो मानो वह आकाश से गिर पड़ा। फिर चाहे उसे पक्षी उचक ले जाएँ या वायु उसे किसी दूरवर्ती स्थान पर फेंक दे
तफ़्सीर:
इन सभी चीज़ों से बचो, इस हाल में कि अल्लाह के निकट पसंदीदा धर्म के अलावा हर धर्म से अलग होने वाले हो, उसके साथ इबादत में किसी को शरीक ठहराने वाले न हो। और जिसने अल्लाह के साथ किसी को साझी ठहराया, वह ऐसा है जैसे वह आसमान से गिर गया, अब या तो पक्षी उसके मांस और हड्डियों को उचक लेंगे, या हवा उसे कहीं दूर फेंक देगी।
आयत 32
ذَٰلِكَ وَمَن يُعَظِّمْ شَعَـٰٓئِرَ ٱللَّهِ فَإِنَّهَا مِن تَقْوَى ٱلْقُلُوبِ
ذَٰلِكَ
ये है (हुक्म)
وَمَن
और जो
يُعَظِّمْ
ताज़ीम करेगा
شَعَـٰٓئِرَ
(the) Symbols
ٱللَّهِ
अल्लाह की निशानियों की
فَإِنَّهَا
तो बेशक वो
مِن
(is) from
تَقْوَى
तक़्वा में से है
ٱلْقُلُوبِ
दिलों के
इन बातों का ख़याल रखो। और जो कोई अल्लाह के नाम लगी चीज़ों का आदर करे, तो निस्संदेह वे (चीज़ें) दिलों के तक़वा (धर्मपरायणता) से सम्बन्ध रखती है
तफ़्सीर:
यह वे काम हैं, जिनका अल्लाह ने आदेश दिया है, जैसे अल्लाह को एकमात्र पूज्य मानना, खालिस उसी की पूजा करना और बुतों तथा झूठी बात से बचना। और जो अल्लाह के धर्म के प्रतीकों (जैसे क़ुर्बानी के जानवर और हज्ज के अनुष्ठानों आदि) का सम्मान करता है, तो उनका सम्मान इस बात का प्रमाण है कि दिलों में अल्लाह का तक़वा (भय) है।
आयत 33
لَكُمْ فِيهَا مَنَـٰفِعُ إِلَىٰٓ أَجَلٍۢ مُّسَمًّۭى ثُمَّ مَحِلُّهَآ إِلَى ٱلْبَيْتِ ٱلْعَتِيقِ
لَكُمْ
तुम्हारे लिए
فِيهَا
उसमें
مَنَـٰفِعُ
कुछ फ़ायदे हैं
إِلَىٰٓ
for
أَجَلٍۢ
एक वक़्त तक
مُّسَمًّۭى
जो मुक़र्रर है
ثُمَّ
फिर
مَحِلُّهَآ
हलाल होने की जगह उनकी
إِلَى
(is) at
ٱلْبَيْتِ
तरफ़ उस घर के है
ٱلْعَتِيقِ
जो क़दीम है
उनमें एक निश्चित समय तक तुम्हारे लिए फ़ायदे है। फिर उनको उस पुरातन घर तक (क़ुरबानी के लिए) पहुँचना है
तफ़्सीर:
तुम्हारे लिए उन क़ुर्बानी के जानवरों में, जिन्हें तुम काबा के पास ज़बह करते हो, कई लाभ हैं, जैसे कि सवारी, ऊन, नस्ल की बढ़ोतरी और दूध आदि। एक विशिष्ट अवधि के लिए है, जो अल्लाह के उस घर के पास ज़बह करने के समय के साथ निर्धारित है, जिसे अल्लाह ने दमन करने वाले शासकों के प्रभुत्व से मुक्त रखा रखा है।
आयत 34
وَلِكُلِّ أُمَّةٍۢ جَعَلْنَا مَنسَكًۭا لِّيَذْكُرُوا۟ ٱسْمَ ٱللَّهِ عَلَىٰ مَا رَزَقَهُم مِّنۢ بَهِيمَةِ ٱلْأَنْعَـٰمِ ۗ فَإِلَـٰهُكُمْ إِلَـٰهٌۭ وَٰحِدٌۭ فَلَهُۥٓ أَسْلِمُوا۟ ۗ وَبَشِّرِ ٱلْمُخْبِتِينَ
وَلِكُلِّ
और वास्ते हर
أُمَّةٍۢ
उम्मत के
جَعَلْنَا
मुक़र्रर किया हमने
مَنسَكًۭا
क़ुरबानी करना
لِّيَذْكُرُوا۟
ताकि वो ज़िक्र करें
ٱسْمَ
नाम
ٱللَّهِ
अल्लाह का
عَلَىٰ
उस पर
مَا
जो
رَزَقَهُم
उसने रिज़्क़ दिया उन्हें
مِّنۢ
of
بَهِيمَةِ
चौपायों में से
ٱلْأَنْعَـٰمِ ۗ
मवेशियों के
فَإِلَـٰهُكُمْ
तो इलाह तुम्हारा
إِلَـٰهٌۭ
इलाह है
وَٰحِدٌۭ
एक ही
فَلَهُۥٓ
तो उसी के लिए
أَسْلِمُوا۟ ۗ
फ़रमाबरदार हो जाओ
وَبَشِّرِ
और ख़ुशख़बरी दे दीजिए
ٱلْمُخْبِتِينَ
आजिज़ी करने वालों को
और प्रत्येक समुदाय के लिए हमने क़ुरबानी का विधान किया, ताकि वे उन जानवरों अर्थात मवेशियों पर अल्लाह का नाम लें, जो उसने उन्हें प्रदान किए हैं। अतः तुम्हारा पूज्य-प्रभु अकेला पूज्य-प्रभु है। तो उसी के आज्ञाकारी बनकर रहो और विनम्रता अपनानेवालों को शुभ सूचना दे दो
तफ़्सीर:
और हमने गुज़रे हुए हर समुदाय के लिए अल्लाह को अर्पण के रूप में खून बहाने के लिए एक अनुष्ठान निर्धारित किया है, इस आशा में कि वे उन बलिदानों को ज़बह करते समय इस बात पर अल्लाह का शुक्रिया अदा करते हुए उसका नाम लें कि उसने उन्हें ऊँट, गाय और भेड़-बकरी आदि चौपाए प्रदान किए। तो (ऐ लोगो!) तुम्हारा पूज्य एक ही पूज्य है, जिसका कोई साझी नहीं। इसलिए अकेले उसी के अधीन रहो और उसके आदेशानुसार चलो। और (ऐ रसूल!) अपने रब के आगे झुकने वालों और केवल उसी की पूजा करने वालों को उस चीज़ की सूचना दे दें, जो उन्हें खुश करने वाली है।
आयत 35
ٱلَّذِينَ إِذَا ذُكِرَ ٱللَّهُ وَجِلَتْ قُلُوبُهُمْ وَٱلصَّـٰبِرِينَ عَلَىٰ مَآ أَصَابَهُمْ وَٱلْمُقِيمِى ٱلصَّلَوٰةِ وَمِمَّا رَزَقْنَـٰهُمْ يُنفِقُونَ
ٱلَّذِينَ
वो लोग
إِذَا
जब
ذُكِرَ
ज़िक्र किया जाता है
ٱللَّهُ
अल्लाह का
وَجِلَتْ
डर जाते हैं
قُلُوبُهُمْ
दिल उनके
وَٱلصَّـٰبِرِينَ
और जो सब्र करने वाले हैं
عَلَىٰ
उस पर
مَآ
जो
أَصَابَهُمْ
मुसीबत पहुँचे उन्हें
وَٱلْمُقِيمِى
और क़ायम करने वाले हैं
ٱلصَّلَوٰةِ
नमाज़
وَمِمَّا
और उसमें से जो
رَزَقْنَـٰهُمْ
रिज़्क़ दिया हमने उन्हें
يُنفِقُونَ
वो ख़र्च करते हैं
ये वे लोग है कि जब अल्लाह को याद किया जाता है तो उनके दिल दहल जाते है और जो मुसीबत उनपर आती है उसपर धैर्य से काम लेते है और नमाज़ को क़ायम करते है, और जो कुछ हमने उन्हें दिया है उसमें से ख़र्च करते है
तफ़्सीर:
जिनका हाल यह है कि जब अल्लाह का नाम लिया जाता है, तो उसकी सज़ा से भयभीत होकर उसके आदेश का उल्लंघन करने से बचते हैं, और यदि उनपर कोई विपत्ति आती है तो वे धैर्य रखते हैं, तथा पूर्ण रूप से नमाज़ पढ़ते हैं, और अल्लाह के दिए धन से नेकी के कार्यों पर खर्च करते हैं।
आयत 36
وَٱلْبُدْنَ جَعَلْنَـٰهَا لَكُم مِّن شَعَـٰٓئِرِ ٱللَّهِ لَكُمْ فِيهَا خَيْرٌۭ ۖ فَٱذْكُرُوا۟ ٱسْمَ ٱللَّهِ عَلَيْهَا صَوَآفَّ ۖ فَإِذَا وَجَبَتْ جُنُوبُهَا فَكُلُوا۟ مِنْهَا وَأَطْعِمُوا۟ ٱلْقَانِعَ وَٱلْمُعْتَرَّ ۚ كَذَٰلِكَ سَخَّرْنَـٰهَا لَكُمْ لَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ
وَٱلْبُدْنَ
और क़ुरबानी के ऊँट
جَعَلْنَـٰهَا
बनाया हमने उन्हें
لَكُم
तुम्हारे लिए
مِّن
among
شَعَـٰٓئِرِ
निशानियों में से
ٱللَّهِ
अल्लाह की
لَكُمْ
तुम्हारे लिए
فِيهَا
उनमें
خَيْرٌۭ ۖ
भलाई है
فَٱذْكُرُوا۟
पस ज़िक्र करो
ٱسْمَ
नाम
ٱللَّهِ
अल्लाह का
عَلَيْهَا
उन पर
صَوَآفَّ ۖ
सफ़ बस्ता खड़ा कर के
فَإِذَا
फिर जब
وَجَبَتْ
गिर पड़ें
جُنُوبُهَا
पहलू उनके
فَكُلُوا۟
पस खाओ
مِنْهَا
उनमें से
وَأَطْعِمُوا۟
और खिलाओ
ٱلْقَانِعَ
क़नाअत करने वाले
وَٱلْمُعْتَرَّ ۚ
और सवाल करने वाले को
كَذَٰلِكَ
इसी तरह
سَخَّرْنَـٰهَا
मुसख़्ख़र किया हमने उन्हें
لَكُمْ
तुम्हारे लिए
لَعَلَّكُمْ
ताकि तुम
تَشْكُرُونَ
तुम शुक्र करो
(क़ुरबानी के) ऊँटों को हमने तुम्हारे लिए अल्लाह की निशानियों में से बनाया है। तुम्हारे लिए उनमें भलाई है। अतः खड़ा करके उनपर अल्लाह का नाम लो। फिर जब उनके पहलू भूमि से आ लगें तो उनमें से स्वयं भी खाओ औऱ संतोष से बैठनेवालों को भी खिलाओ और माँगनेवालों को भी। ऐसी ही करो। हमने उनको तुम्हारे लिए वशीभूत कर दिया है, ताकि तुम कृतज्ञता दिखाओ
तफ़्सीर:
हमने उन क़ुर्बानी के ऊँटों और गायों को, जिन्हें अल्लाह के घर की तरफ़ ले जाया जाता है, तुम्हारे लिए धर्म के अनुष्ठानों और प्रतीकों में से बनाया है। उनके अंदर तुम्हारे लिए धार्मिक और सांसारिक लाभ हैं। अतः उन्हें ज़बह करते समय (बिस्मिल्लाह) कहो, जबकि तीन टाँगों के बल खड़ा करके एक अगली टाँग बाँधी हुई हो, ताकि भाग न सकें। फिर जब ज़बह करने के बाद अपने पहलू के बल लेट जाएँ, तो (ऐ क़ुर्बानी करने वालो !) उनका मांस खुद खाओ और उस निर्धन को दो, जो माँगने से बचता है और उस निर्धन को भी दो, जो माँगता है। जिस तरह हमने उन्हें तुम्हारे वश में कर दिया है, ताकि तुम उनके ऊपर सामान लादो और उनकी सवारी करो, उसी तरह हमने उन्हें तुम्हारे वश में कर दिया है कि वहाँ तक चले जाते हैं, जहाँ तुम उन्हें अल्लाह की निकटता प्राप्त करने के लिए ज़बह करते हो। ताकि तुम उन्हें तुम्हारे वश में करने की इस नेमत पर अल्लाह का शुक्रिया अदा करो।
आयत 37
لَن يَنَالَ ٱللَّهَ لُحُومُهَا وَلَا دِمَآؤُهَا وَلَـٰكِن يَنَالُهُ ٱلتَّقْوَىٰ مِنكُمْ ۚ كَذَٰلِكَ سَخَّرَهَا لَكُمْ لِتُكَبِّرُوا۟ ٱللَّهَ عَلَىٰ مَا هَدَىٰكُمْ ۗ وَبَشِّرِ ٱلْمُحْسِنِينَ
لَن
हरगिज़ नहीं
يَنَالَ
पहुँचते
ٱللَّهَ
अल्लाह को
لُحُومُهَا
गोश्त उनके
وَلَا
और ना
دِمَآؤُهَا
ख़ून उनके
وَلَـٰكِن
और लेकिन
يَنَالُهُ
पहुँचता है उसे
ٱلتَّقْوَىٰ
तक़्वा
مِنكُمْ ۚ
तुम्हारा
كَذَٰلِكَ
इसी तरह
سَخَّرَهَا
उसने मुसख़्ख़र किया उन्हें
لَكُمْ
तुम्हारे लिए
لِتُكَبِّرُوا۟
ताकि तुम बड़ाई बयान करो
ٱللَّهَ
अल्लाह की
عَلَىٰ
उस पर
مَا
जो
هَدَىٰكُمْ ۗ
उसने हिदायत दी तुम्हें
وَبَشِّرِ
और ख़ुशख़बरी दे दीजिए
ٱلْمُحْسِنِينَ
नेकी करने वालों को
न उनके माँस अल्लाह को पहुँचते है और न उनके रक्त। किन्तु उसे तुम्हारा तक़वा (धर्मपरायणता) पहुँचता है। इस प्रकार उसने उन्हें तुम्हारे लिए वशीभूत किया है, ताकि तुम अल्लाह की बड़ाई बयान करो, इसपर कि उसने तुम्हारा मार्गदर्शन किया और सुकर्मियों को शुभ सूचना दे दो
तफ़्सीर:
तुम्हारे क़ुर्बानी किए हुए जानवरों का मांस या रक्त अल्लाह के पास हरगिज़ नहीं पहुँचेगा। और न हीं उन्हें उस तक पहुँचाया जाएगा। लेकिन उसके पास तुम्हारा उनके बारे में अल्लाह से डरना पहुँचाया जाएगा; इस प्रकार कि तुम उन्हें केवल अल्लाह की निकटता प्राप्त करने के लिए ज़बह करो। इसी तरह, अल्लाह ने उन्हें तुम्हारे वश में कर दिया है, ताकि तुम सत्य मार्ग दिखाने पर अल्लाह का शुक्रिया अदा करते हुए उसकी महिमा का गान करो। और (ऐ रसूल!) उन लोगों को खुशख़बरी दे दें, जो अच्छी तरह अल्लाह की इबादत करते हैं और उसकी मख़लूक़ के साथ अच्छा व्यवहार करते हैं।
आयत 38
۞ إِنَّ ٱللَّهَ يُدَٰفِعُ عَنِ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ ۗ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يُحِبُّ كُلَّ خَوَّانٍۢ كَفُورٍ
۞ إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
يُدَٰفِعُ
दफ़ा करता है
عَنِ
defends
ٱلَّذِينَ
उन लोगों की तरफ़ से जो
ءَامَنُوٓا۟ ۗ
ईमान लाए
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
لَا
(does) not
يُحِبُّ
नहीं वो पसन्द करता
كُلَّ
हर
خَوَّانٍۢ
बहुत ख़ियानत करने वाले
كَفُورٍ
बहुत नाशुक्रे को
निश्चय ही अल्लाह उन लोगों की ओर से प्रतिरक्षा करता है, जो ईमान लाए। निस्संदेह अल्लाह किसी विश्वासघाती, अकृतज्ञ को पसन्द नहीं करता
तफ़्सीर:
निःसंदेह अल्लाह ईमान वालों को उनके दुश्मनों की बुराई से बचाता है। निश्चय अल्लाह हर उस व्यक्ति से प्रेम नहीं करता, जो अमानत में ख़ियानत करने वाला और अल्लाह की नेमतों की नाशुक्री करने वाला हो। चुनाँचे वह उसका शुक्रिया अदा न करता हो, बल्कि उससे घृणा करता हो।
आयत 39
أُذِنَ لِلَّذِينَ يُقَـٰتَلُونَ بِأَنَّهُمْ ظُلِمُوا۟ ۚ وَإِنَّ ٱللَّهَ عَلَىٰ نَصْرِهِمْ لَقَدِيرٌ
أُذِنَ
इजाज़त दे दी गई (जंग की)
لِلَّذِينَ
उनको जो
يُقَـٰتَلُونَ
जंग किए जाते हैं
بِأَنَّهُمْ
क्योंकि वो
ظُلِمُوا۟ ۚ
ज़ुल्म किए गए हैं
وَإِنَّ
और बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
عَلَىٰ
for
نَصْرِهِمْ
उनकी मदद पर
لَقَدِيرٌ
अलबत्ता ख़ूब क़ुदरत रखने वाला है
अनुमति दी गई उन लोगों को जिनके विरुद्ध युद्ध किया जा रहा है, क्योंकि उनपर ज़ुल्म किया गया - और निश्चय ही अल्लाह उनकी सहायता की पूरी सामर्थ्य रखता है। -
तफ़्सीर:
अल्लाह ने उन ईमान वालों को युद्ध की अनुमति दे दी है, जिनसे मुश्रिक लोग युद्ध करते हैं, क्योंकि उनके दुश्मनों की ओर से उनपर बड़ा अत्याचार हुआ है, और निश्चय अल्लाह युद्ध के बिना ही ईमान वालों को उनके शत्रुओं पर विजय प्रदान करने की शक्ति रखता है, लेकिन उसकी हिकमत की अपेक्षा यह है कि वह मोमिनों को काफ़िरों से युद्ध के माध्यम से आज़माए।
आयत 40
ٱلَّذِينَ أُخْرِجُوا۟ مِن دِيَـٰرِهِم بِغَيْرِ حَقٍّ إِلَّآ أَن يَقُولُوا۟ رَبُّنَا ٱللَّهُ ۗ وَلَوْلَا دَفْعُ ٱللَّهِ ٱلنَّاسَ بَعْضَهُم بِبَعْضٍۢ لَّهُدِّمَتْ صَوَٰمِعُ وَبِيَعٌۭ وَصَلَوَٰتٌۭ وَمَسَـٰجِدُ يُذْكَرُ فِيهَا ٱسْمُ ٱللَّهِ كَثِيرًۭا ۗ وَلَيَنصُرَنَّ ٱللَّهُ مَن يَنصُرُهُۥٓ ۗ إِنَّ ٱللَّهَ لَقَوِىٌّ عَزِيزٌ
ٱلَّذِينَ
वो जो
أُخْرِجُوا۟
निकाले गए
مِن
from
دِيَـٰرِهِم
अपने घरों से
بِغَيْرِ
बग़ैर
حَقٍّ
हक़ के
إِلَّآ
मगर
أَن
ये कि
يَقُولُوا۟
वो कहते हैं
رَبُّنَا
रब हमारा
ٱللَّهُ ۗ
अल्लाह है
وَلَوْلَا
और अगर ना होता
دَفْعُ
दूर करना
ٱللَّهِ
अल्लाह का
ٱلنَّاسَ
लोगों को
بَعْضَهُم
उनके बाज़ को
بِبَعْضٍۢ
साथ बाज़ के
لَّهُدِّمَتْ
अलबत्ता मुनहदिम कर दी जातीं
صَوَٰمِعُ
ख़ानक़ाहें
وَبِيَعٌۭ
और गिरजे
وَصَلَوَٰتٌۭ
और इबादत ख़ाने
وَمَسَـٰجِدُ
और मस्जिदें
يُذْكَرُ
ज़िक्र किया जाता है
فِيهَا
जिन में
ٱسْمُ
नाम
ٱللَّهِ
अल्लाह का
كَثِيرًۭا ۗ
बहुत /बकसरत
وَلَيَنصُرَنَّ
और अलबत्ता ज़रूर मदद करेगा
ٱللَّهُ
अल्लाह
مَن
उसकी जो
يَنصُرُهُۥٓ ۗ
मदद करता है उसकी
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
لَقَوِىٌّ
अलबत्ता बहुत क़ुव्वत वाला है
عَزِيزٌ
बहुत ज़बरदस्त है
ये वे लोग है जो अपने घरों से नाहक़ निकाले गए, केवल इसलिए कि वे कहते है कि "हमारा रब अल्लाह है।" यदि अल्लाह लोगों को एक-दूसरे के द्वारा हटाता न रहता तो मठ और गिरजा और यहूदी प्रार्थना भवन और मस्जिदें, जिनमें अल्लाह का अधिक नाम लिया जाता है, सब ढा दी जातीं। अल्लाह अवश्य उसकी सहायता करेगा, जो उसकी सहायता करेगा - निश्चय ही अल्लाह बड़ा बलवान, प्रभुत्वशाली है
तफ़्सीर:
वे लोग जिन्हें काफ़िरों ने उनके घरों से अन्यायपूर्ण तरीक़े से निकाल दिया, न कि उनके द्वारा किए गए किसी अपराध के कारण, उन्होंने केवल इतना कहा था : हमारा पालनहार अल्लाह है, उसके सिवा हमारा कोई पालनहार नहीं है। और अगर अल्लाह नबियों और ईमान वालों के लिए दुश्मनों से युद्ध करना धर्मसंगत न बनाया होता, तो वे इबादत के स्थानों पर हमला करते और संतों के आश्रम, ईसाइयों के गिरजे, यहूदियों के पूजा स्थल और मुसलमानों की मस्जिदों को ध्वस्त कर देते, जिनमें मुसलमान अल्लाह को बहुत ज़्यादा याद करते हैं। निश्चय अल्लाह ज़रूर उसकी मदद करेगा, जो उसके धर्म और नबी की मदद करने वाला है। निःसंदेह अल्लाह उसकी मदद करने में सक्षम है, जो उसके धर्म की मदद करता है। वह प्रभुत्वशाली है, उसपर किसी का ज़ोर नहीं चलता।
आज की ज़िंदगी में सबक़
कुर्बानी की हिकमत और जिहाद की इजाज़त का ज़िक्र है। यह सबक हमें सिखाता है कि कुर्बानी का गोश्त नहीं बल्कि तक़वा (नीयत की सच्चाई) अल्लाह तक पहुंचता है।
आयत 41
ٱلَّذِينَ إِن مَّكَّنَّـٰهُمْ فِى ٱلْأَرْضِ أَقَامُوا۟ ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتَوُا۟ ٱلزَّكَوٰةَ وَأَمَرُوا۟ بِٱلْمَعْرُوفِ وَنَهَوْا۟ عَنِ ٱلْمُنكَرِ ۗ وَلِلَّهِ عَـٰقِبَةُ ٱلْأُمُورِ
ٱلَّذِينَ
वो लोग जो
إِن
अगर
مَّكَّنَّـٰهُمْ
इक़्तिदार दें हम उन्हें
فِى
in
ٱلْأَرْضِ
ज़मीन में
أَقَامُوا۟
वो क़ायम करें
ٱلصَّلَوٰةَ
नमाज़
وَءَاتَوُا۟
और अदा करें
ٱلزَّكَوٰةَ
ज़कात
وَأَمَرُوا۟
और वो हुक्म दें
بِٱلْمَعْرُوفِ
नेकी का
وَنَهَوْا۟
और वो रोकें
عَنِ
from
ٱلْمُنكَرِ ۗ
बुराई से
وَلِلَّهِ
और अल्लाह ही के लिए है
عَـٰقِبَةُ
अंजाम
ٱلْأُمُورِ
सब कामों का
ये वे लोग है कि यदि धरती में हम उन्हें सत्ता प्रदान करें तो वे नमाज़ का आयोजन करेंगे और ज़कात देंगे और भलाई का आदेश करेंगे और बुराई से रोकेंगे। और सब मामलों का अन्तिम परिणाम अल्लाह ही के हाथ में है
तफ़्सीर:
ये लोग जिनसे विजय का वादा किया गया है, वे हैं कि यदि हम उन्हें उनके दुश्मनों पर विजय देकर धर्ती में उन्हें आधिपत्य प्रदान करें, तो वे पूर्ण रूप से नमाज़ पढ़ेंगे, अपने धन की ज़कात देंगे, शरीयत ने जिन कामों का आदेश दिया है उनका हुक्म देंगे और जिन कामों से रोका है उनसे रोकेंगे। और सवाब तथा सज़ा देने के संबंध में सभी मामले केवल अल्लाह ही की ओर लौटते हैं।
आयत 42
وَإِن يُكَذِّبُوكَ فَقَدْ كَذَّبَتْ قَبْلَهُمْ قَوْمُ نُوحٍۢ وَعَادٌۭ وَثَمُودُ
وَإِن
और अगर
يُكَذِّبُوكَ
वो झुठलाऐं आपको
فَقَدْ
तो तहक़ीक़
كَذَّبَتْ
झुठलाया
قَبْلَهُمْ
उनसे पहले
قَوْمُ
क़ौमे
نُوحٍۢ
नूह ने
وَعَادٌۭ
और आद
وَثَمُودُ
और समूद ने
यदि वे तुम्हें झुठलाते है तो उनसे पहले नूह की क़ौम, आद और समूद
तफ़्सीर:
और (ऐ रसूल!) यदि आपकी जाति के लोग आपको झुठलाते हैं, तो आप सब्र से काम लें। क्योंकि आप पहले व्यक्ति नहीं हैं, जिसे उसकी जाति के लोगों ने झुठलाया हो। आपकी जाति से पहले नूह अलैहिस्सलाम की जाति के लोगों ने नूह अलैहिस्सलाम को, आद जाति के लोगों ने हूद अलैहिस्सलाम को और समूद जाति के लोगों ने सालेह अलैहिस्सलाम को झुठलाया।
आयत 43
وَقَوْمُ إِبْرَٰهِيمَ وَقَوْمُ لُوطٍۢ
وَقَوْمُ
और क़ौमे
إِبْرَٰهِيمَ
इब्राहीम
وَقَوْمُ
और क़ौमे
لُوطٍۢ
लूत
और इबराहीम की क़ौम और लूत की क़ौम
तफ़्सीर:
तथा इबराहीम अलैहिस्सलाम की जाति के लोगों ने इबराहीम अलैहिस्सलाम को और लूत अलैहिस्सलाम की जाति ने लूत अलैहिस्सलाम को झुठलाया।
आयत 44
وَأَصْحَـٰبُ مَدْيَنَ ۖ وَكُذِّبَ مُوسَىٰ فَأَمْلَيْتُ لِلْكَـٰفِرِينَ ثُمَّ أَخَذْتُهُمْ ۖ فَكَيْفَ كَانَ نَكِيرِ
وَأَصْحَـٰبُ
And the inhabitants
مَدْيَنَ ۖ
और मदयन के रहने वालों ने
وَكُذِّبَ
और झुठलाए गए
مُوسَىٰ
मूसा
فَأَمْلَيْتُ
तो ढील दी मैं ने
لِلْكَـٰفِرِينَ
काफ़िरों को
ثُمَّ
फिर
أَخَذْتُهُمْ ۖ
पकड़ लिया मैं ने उन्हें
فَكَيْفَ
तो कैसा था
كَانَ
था
نَكِيرِ
अज़ाब मेरा
और मदयनवाले भी झुठला चुके है और मूसा को भी झूठलाया जा चुका है। किन्तु मैंने इनकार करनेवालों को मुहलत दी, फिर उन्हें पकड़ लिया। तो कैसी रही मेरी यंत्रणा!
तफ़्सीर:
तथा मदयन वालों ने शुऐब अलैहिस्सलाम को झुठलाया, और फ़िरऔन और उसकी जाति के लोगों ने मूसा अलैहिस्सलाम को झुठलाया, तो मैंने उन्हें ढील देते हुए उनको यातना देने में देरी की, फिर उन्हें यातना से ग्रस्त कर दिया। तो विचार करो कि उनके प्रति मेरा इनकार कैसा था? मैंने उनके कुफ़्र के कारण उन्हें नष्ट कर दिया।
आयत 45
فَكَأَيِّن مِّن قَرْيَةٍ أَهْلَكْنَـٰهَا وَهِىَ ظَالِمَةٌۭ فَهِىَ خَاوِيَةٌ عَلَىٰ عُرُوشِهَا وَبِئْرٍۢ مُّعَطَّلَةٍۢ وَقَصْرٍۢ مَّشِيدٍ
فَكَأَيِّن
तो कितनी ही
مِّن
of
قَرْيَةٍ
बस्तियाँ
أَهْلَكْنَـٰهَا
हलाक किया हमने उन्हें
وَهِىَ
जब कि वो
ظَالِمَةٌۭ
ज़ालिम थीं
فَهِىَ
तो वो
خَاوِيَةٌ
गिरी पड़ी हैं
عَلَىٰ
ऊपर
عُرُوشِهَا
अपनी छतों के
وَبِئْرٍۢ
और कुएँ
مُّعَطَّلَةٍۢ
बेकार
وَقَصْرٍۢ
और महल
مَّشِيدٍ
पुख़्ता
कितनी ही बस्तियाँ है जिन्हें हमने विनष्ट कर दिया इस दशा में कि वे ज़ालिम थी, तो वे अपनी छतों के बल गिरी पड़ी है। और कितने ही परित्यक्त (उजाड़) कुएँ पड़े है और कितने ही पक्के महल भी!
तफ़्सीर:
कितनी ही ऐसी बस्तियाँ हैं, जिन्हें हमने एक उन्मूलन करने वाली यातना के द्वारा नष्ट कर दिया (जबकि वे अपने कुफ़्र के कारण अत्याचारी थीं)। तो उनके घर ध्वस्त होकर निवासियों से खाली पड़े हैं। तथा कितने ऐसे कुएँ हैं, जो उनपर पानी लेने के लिए आने वालों से उनके विनाश के कारण खाली पड़े हैं, और कितने ऐसे ऊँचे-ऊँचे अलंकृत महल हैं, जो अपने निवासियों को यातना से नहीं बचा सके।
आयत 46
أَفَلَمْ يَسِيرُوا۟ فِى ٱلْأَرْضِ فَتَكُونَ لَهُمْ قُلُوبٌۭ يَعْقِلُونَ بِهَآ أَوْ ءَاذَانٌۭ يَسْمَعُونَ بِهَا ۖ فَإِنَّهَا لَا تَعْمَى ٱلْأَبْصَـٰرُ وَلَـٰكِن تَعْمَى ٱلْقُلُوبُ ٱلَّتِى فِى ٱلصُّدُورِ
أَفَلَمْ
क्या भला नहीं
يَسِيرُوا۟
वो चले फिरे
فِى
in
ٱلْأَرْضِ
ज़मीन में
فَتَكُونَ
तो होते
لَهُمْ
उनके लिए
قُلُوبٌۭ
दिल
يَعْقِلُونَ
वो अक़्ल से काम लेते
بِهَآ
साथ उनके
أَوْ
या
ءَاذَانٌۭ
कान
يَسْمَعُونَ
वो सुनते
بِهَا ۖ
साथ उनके
فَإِنَّهَا
तो बेशक बात ये है कि
لَا
not
تَعْمَى
नहीं अँधी होतीं
ٱلْأَبْصَـٰرُ
आँखें
وَلَـٰكِن
और लेकिन
تَعْمَى
अँधे हो जाते हैं
ٱلْقُلُوبُ
दिल
ٱلَّتِى
वो जो
فِى
(are) in
ٱلصُّدُورِ
सीनों में हैं
क्या वे धरती में चले फिरे नहीं है कि उनके दिल होते जिनसे वे समझते या (कम से कम) कान होते जिनसे वे सुनते? बात यह है कि आँखें अंधी नहीं हो जातीं, बल्कि वे दिल अंधे हो जाते है जो सीनों में होते है
तफ़्सीर:
क्या रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की लाई हुई शिक्षाओं का इनकार करने वाले ये लोग धरती में नहीं चले-फिरे, ताकि उन विनष्ट बस्तियों के निशान (खंडहर) देखें, और अपने मन से विचार करके शिक्षा ग्रहण करें, तथा उनकी कहानियों को मानने के उद्देश्य से सुनकर सीख लें, क्योंकि असल अंधापन आँख का अंधापन नहीं है, बल्कि विनाशकारी अंधापन अंतर्दृष्टि का अंधापन है, जिसके बाद इनसान न शिक्षा ग्रहण करता है और न सीख प्राप्त करता है।
आयत 47
وَيَسْتَعْجِلُونَكَ بِٱلْعَذَابِ وَلَن يُخْلِفَ ٱللَّهُ وَعْدَهُۥ ۚ وَإِنَّ يَوْمًا عِندَ رَبِّكَ كَأَلْفِ سَنَةٍۢ مِّمَّا تَعُدُّونَ
وَيَسْتَعْجِلُونَكَ
और जल्दी माँगते हैं आपसे
بِٱلْعَذَابِ
अज़ाब को
وَلَن
और हरगिज़ ना
يُخْلِفَ
ख़िलाफ़ करेगा
ٱللَّهُ
अल्लाह
وَعْدَهُۥ ۚ
अपने वादे के
وَإِنَّ
और बेशक
يَوْمًا
एक दिन
عِندَ
नज़दीक
رَبِّكَ
आपके रब के
كَأَلْفِ
मानिन्द एक हज़ार
سَنَةٍۢ
साल के है
مِّمَّا
उससे जो
تَعُدُّونَ
तु गिनते हो
और वे तुमसे यातना के लिए जल्दी मचा रहे है! अल्लाह कदापि अपने वादे के विरुद्ध न करेंगा। किन्तु तुम्हारे रब के यहाँ एक दिन, तुम्हारी गणना के अनुसार, एक हजार वर्ष जैसा है
तफ़्सीर:
और (ऐ रसूल!) आपकी जाति के काफ़िरों को जब दुनिया एवं आख़िरत की यातना से डराया जाता है, तो उसे जल्दी लाने की माँग करने लगते हैं, हालाँकि अल्लाह ने उनसे जो वादा किया है, वह उसके विरुद्ध हरगिज़ नहीं करेगा। दुनिया की यातना का एक अंश वह पराजय भी है, जिसका सामना उन्हें बद्र के दिन करना पड़ा, और आख़िरत की यातना का एक दिन, कष्टदायक होने के कारण, तुम्हारी दुनिया की गिनती के अनुसार एक हज़ार साल के बराबर है।
आयत 48
وَكَأَيِّن مِّن قَرْيَةٍ أَمْلَيْتُ لَهَا وَهِىَ ظَالِمَةٌۭ ثُمَّ أَخَذْتُهَا وَإِلَىَّ ٱلْمَصِيرُ
وَكَأَيِّن
और कितनी ही
مِّن
of
قَرْيَةٍ
बस्तियाँ
أَمْلَيْتُ
ढील दी मैं ने
لَهَا
उन्हें
وَهِىَ
जब कि वो
ظَالِمَةٌۭ
ज़ालिम थीं
ثُمَّ
फिर
أَخَذْتُهَا
पकड़ लिया मैं ने उन्हें
وَإِلَىَّ
और मेरी ही तरफ़
ٱلْمَصِيرُ
लौटना है
कितनी ही बस्तियाँ है जिनको मैंने मुहलत दी इस दशा में कि वे ज़ालिम थीं। फिर मैंने उन्हें पकड़ लिया और अन्ततः आना तो मेरी ही ओर है
तफ़्सीर:
और कितनी ही बस्तियाँ ऐसी हैं, जिन्हें मैंने यातना में मोहलत दी, जबकि वे अपने कुफ़्र के कारण अत्याचारी थीं, और उन्हें ढील देने के उद्देश्य से उन्हें दंडित करने में जल्दी नहीं की। फिर मैंने उन्हें विनाशकारी यातना से ग्रस्त कर दिया। और केवल मेरी ही ओर क़ियामत के दिन उन सब को लौटना है, फिर मैं उन्हें उनके कुफ़्र के कारण स्थायी यातना से ग्रस्त करूँगा।
आयत 49
قُلْ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ إِنَّمَآ أَنَا۠ لَكُمْ نَذِيرٌۭ مُّبِينٌۭ
قُلْ
कह दीजिए
يَـٰٓأَيُّهَا
ٱلنَّاسُ
लोगो
إِنَّمَآ
बेशक
أَنَا۠
मैं
لَكُمْ
तुम्हारे लिए
نَذِيرٌۭ
डराने वाला हूँ
مُّبِينٌۭ
खुल्लम-खुल्ला
कह दो, "ऐ लोगों! मैं तो तुम्हारे लिए बस एक साफ़-साफ़ सचेत करनेवाला हूँ।"
तफ़्सीर:
(ऐ नबी!) आप कह दें : ऐ लोगो! मैं तो केवल तुम्हें डराने वाला हूँ। मैं तुम्हें वह संदेश पहुँचाता हूँ, जिसे देकर मैं भेजा गया हूँ, अपने डराने में स्पष्ट हूँ।
आयत 50
فَٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ لَهُم مَّغْفِرَةٌۭ وَرِزْقٌۭ كَرِيمٌۭ
فَٱلَّذِينَ
तो वो जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
وَعَمِلُوا۟
और उन्होंने अमल किए
ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ
नेक
لَهُم
उनके लिए
مَّغْفِرَةٌۭ
बख़्शिश
وَرِزْقٌۭ
और रिज़्क़ है
كَرِيمٌۭ
इज़्ज़त वाला
फिर जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए उनके लिए क्षमादान और सम्मानपूर्वक आजीविका है
तफ़्सीर:
तो जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और अच्छे कार्य किए, उनके लिए उनके रब की ओर से उनके गुनाहों की क्षमा है और जन्नत में सम्मान की रोज़ी है, जो कभी ख़त्म नहीं होगी।
आज की ज़िंदगी में सबक़
मज़लूमों की मदद के हुक्म का ज़िक्र है। यह हमें सिखाता है कि जिन पर ज़ुल्म हो रहा हो, उनकी मदद करना और इंसाफ के लिए खड़ा होना दीन का तकाज़ा है।
आयत 51
وَٱلَّذِينَ سَعَوْا۟ فِىٓ ءَايَـٰتِنَا مُعَـٰجِزِينَ أُو۟لَـٰٓئِكَ أَصْحَـٰبُ ٱلْجَحِيمِ
وَٱلَّذِينَ
और वो जिन्होंने
سَعَوْا۟
कोशिश की
فِىٓ
against
ءَايَـٰتِنَا
हमारी आयात में
مُعَـٰجِزِينَ
आजिज़ करने वाले बनकर
أُو۟لَـٰٓئِكَ
यही लोग हैं
أَصْحَـٰبُ
साथी
ٱلْجَحِيمِ
जहन्नम के
किन्तु जिन लोगों ने हमारी आयतों को नीचा दिखाने की कोशिश की, वही भड़कती आगवाले है
तफ़्सीर:
और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाने के लिए दौड़-भाग की, यह अनुमान करते हुए कि वे अल्लाह को विवश कर देंगे और उससे बच निकलेंगे, इसलिए वह उन्हें अज़ाब नहीं दे सकेगा। यही लोग नरकवासी हैं, जो उसके साथ वैसे ही रहेंगे जैसे एक मित्र अपने मित्र के साथ रहता है।
आयत 52
وَمَآ أَرْسَلْنَا مِن قَبْلِكَ مِن رَّسُولٍۢ وَلَا نَبِىٍّ إِلَّآ إِذَا تَمَنَّىٰٓ أَلْقَى ٱلشَّيْطَـٰنُ فِىٓ أُمْنِيَّتِهِۦ فَيَنسَخُ ٱللَّهُ مَا يُلْقِى ٱلشَّيْطَـٰنُ ثُمَّ يُحْكِمُ ٱللَّهُ ءَايَـٰتِهِۦ ۗ وَٱللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌۭ
وَمَآ
और नहीं
أَرْسَلْنَا
भेजा हमने
مِن
before you
قَبْلِكَ
आपसे पहले
مِن
any
رَّسُولٍۢ
कोई रसूल
وَلَا
और ना
نَبِىٍّ
कोई नबी
إِلَّآ
मगर
إِذَا
जब
تَمَنَّىٰٓ
उसने पढ़ा
أَلْقَى
डाल दिया
ٱلشَّيْطَـٰنُ
शैतान ने
فِىٓ
in
أُمْنِيَّتِهِۦ
उसके पढ़ने में
فَيَنسَخُ
पस मिटा देता है
ٱللَّهُ
अल्लाह
مَا
उसे जो
يُلْقِى
डालता है
ٱلشَّيْطَـٰنُ
शैतान
ثُمَّ
फिर
يُحْكِمُ
मज़बूत करता है
ٱللَّهُ
अल्लाह
ءَايَـٰتِهِۦ ۗ
आयात अपनी
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
عَلِيمٌ
ख़ूब इल्म वाला है
حَكِيمٌۭ
ख़ूब हिकमत वाला है
तुमसे पहले जो रसूल और नबी भी हमने भेजा, तो जब भी उसने कोई कामना की तो शैतान ने उसकी कामना में विघ्न डालता है, अल्लाह उसे मिटा देता है। फिर अल्लाह अपनी आयतों को सुदृढ़ कर देता है। - अल्लाह सर्वज्ञ, बड़ा तत्वदर्शी है
तफ़्सीर:
हमने (ऐ रसूल!) आपसे पहले जिस रसूल या नबी को भेजा, (उसके साथ यह हुआ कि) जब वह अल्लाह की किताब पढ़ता, तो शैतान उसके पाठ में ऐसी चीज़ मिला देता, जिसके द्वारा वह लोगों को इस भ्रम में डाल देता कि वह अल्लाह की वह़्य में से है, तो अल्लाह शैतान की मिलाई हुई बात को मिटा देता और अपनी आयतों को सुदृढ़ कर देता। अल्लाह हर चीज़ को जानने वाला है, उससे कोई चीज़ छिपी नहीं रहती, अपनी रचना, नियति तथा प्रबंधन में हिकमत वाला है।
आयत 53
لِّيَجْعَلَ مَا يُلْقِى ٱلشَّيْطَـٰنُ فِتْنَةًۭ لِّلَّذِينَ فِى قُلُوبِهِم مَّرَضٌۭ وَٱلْقَاسِيَةِ قُلُوبُهُمْ ۗ وَإِنَّ ٱلظَّـٰلِمِينَ لَفِى شِقَاقٍۭ بَعِيدٍۢ
لِّيَجْعَلَ
ताकि वो बना दे
مَا
उसे जो
يُلْقِى
डालता है
ٱلشَّيْطَـٰنُ
शैतान
فِتْنَةًۭ
एक आज़माइश
لِّلَّذِينَ
उन लोगों के लिए
فِى
in
قُلُوبِهِم
जिनके दिलों में
مَّرَضٌۭ
बीमारी है
وَٱلْقَاسِيَةِ
और सख़्त हैं
قُلُوبُهُمْ ۗ
दिल उनके
وَإِنَّ
और यक़ीनन
ٱلظَّـٰلِمِينَ
ज़ालिम लोग
لَفِى
(are) surely, in
شِقَاقٍۭ
अलबत्ता मुख़ालिफ़त में हैं
بَعِيدٍۢ
दूर की
ताकि शैतान के डाले हुए विघ्न को उन लोगों के लिए आज़माइश बना दे जिनके दिलों में रोग है और जिनके दिल कठोर है। निस्संदेह ज़ालिम परले दर्ज के विरोध में ग्रस्त है। -
तफ़्सीर:
शैतान नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पढ़ने के समय कुछ बातें डालकर संदेह पैदा करता है, ताकि अल्लाह शैतान जो कुछ संशय डालता है उसे मुनाफ़िक़ों के लिए और उन मुश्रिकों के लिए जिनके दिल सख़्त हैं, एक परीक्षण बना दे। तथा मुनाफ़िक़ों और मुश्रिकों में से अत्याचारी लोग, अल्लाह और उसके रसूल की दुश्मनी में पड़े हुए हैं तथा सत्य एवं हिदायत से दूर हैं।
आयत 54
وَلِيَعْلَمَ ٱلَّذِينَ أُوتُوا۟ ٱلْعِلْمَ أَنَّهُ ٱلْحَقُّ مِن رَّبِّكَ فَيُؤْمِنُوا۟ بِهِۦ فَتُخْبِتَ لَهُۥ قُلُوبُهُمْ ۗ وَإِنَّ ٱللَّهَ لَهَادِ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ إِلَىٰ صِرَٰطٍۢ مُّسْتَقِيمٍۢ
وَلِيَعْلَمَ
और ताकि जान लें
ٱلَّذِينَ
वो लोग जो
أُوتُوا۟
दिए गए
ٱلْعِلْمَ
इल्म
أَنَّهُ
कि बेशक वो
ٱلْحَقُّ
हक़ है
مِن
from
رَّبِّكَ
आपके रब की तरफ़ से
فَيُؤْمِنُوا۟
फिर वो ईमान ले आऐं
بِهِۦ
उस पर
فَتُخْبِتَ
फिर वो आजिज़ी करें
لَهُۥ
उसके लिए
قُلُوبُهُمْ ۗ
दिल उनके
وَإِنَّ
और बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
لَهَادِ
अलबत्ता राह दिखाने वाला है
ٱلَّذِينَ
उनको जो
ءَامَنُوٓا۟
ईमान लाए
إِلَىٰ
to
صِرَٰطٍۢ
तरफ़ रास्ते
مُّسْتَقِيمٍۢ
सीधे के
और ताकि वे लोग जिन्हें ज्ञान मिला है, जान लें कि यह तुम्हारे रब की ओर से सत्य है। अतः वे इसपर ईमान लाएँ और उसके सामने उनके दिल झुक जाएँ और निश्चय ही अल्लाह ईमान लानेवालों को अवश्य सीधा मार्ग दिखाता है
तफ़्सीर:
और ताकि जिन लोगों को अल्लाह ने ज्ञान दिया है, वे निश्चित हो जाएँ कि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर उतरने वाला क़ुरआन ही वह सत्य है, जिसकी अल्लाह ने (ऐ रसूल!) आपकी ओर वह़्य (प्रकाशना) की है। इस प्रकार उनका उसपर ईमान बढ़ जाए और उनके हृदय उसके अधीन हो जाएँ और उसके सामने झुक जाएँ। निःसंदेह अल्लाह अपने ऊपर ईमान रखने वालों को, उनके उसके आगे झुकने के प्रतिफल के तौर पर, सत्य का सीधा मार्ग दिखाने वाला है, जिसमें कोई टेढ़ापन नहीं है।
आयत 55
وَلَا يَزَالُ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ فِى مِرْيَةٍۢ مِّنْهُ حَتَّىٰ تَأْتِيَهُمُ ٱلسَّاعَةُ بَغْتَةً أَوْ يَأْتِيَهُمْ عَذَابُ يَوْمٍ عَقِيمٍ
وَلَا
And not
يَزَالُ
और हमेशा रहेंगे
ٱلَّذِينَ
वो जिन्होंने
كَفَرُوا۟
कुफ़्र किया
فِى
(to be) in
مِرْيَةٍۢ
शक में
مِّنْهُ
उसकी तरफ़ से
حَتَّىٰ
यहाँ तक कि
تَأْتِيَهُمُ
आ जाएगी उनके पास
ٱلسَّاعَةُ
घड़ी
بَغْتَةً
अचानक
أَوْ
या
يَأْتِيَهُمْ
आ जाएगा उनके पास
عَذَابُ
अज़ाब
يَوْمٍ
दिन
عَقِيمٍ
बाँझ का
जिन लोगों ने इनकार किया वे सदैव इसकी ओर से सन्देह में पड़े रहेंगे, यहाँ तक कि क़ियामत की घड़ी अचानक उनपर आ जाए या एक अशुभ दिन की यातना उनपर आ पहुँचे
तफ़्सीर:
अल्लाह का इनकार करने वाले और उसके रसूल को झुठलाने वाले, आप पर अल्लाह की ओर से उतरने वाले क़ुरआन के बारे में निरंतर संदेह ही में पड़े रहेंगे, यहाँ तक कि उनके इसी हाल में रहते हुए अचानक उनके पास क़ियामत आ जाए, या उनपर ऐसे दिन की यातना आ जाए, जिसमें उन पर कोई दया या भलाई न होगी, और वह उनके लिए क़ियामत का दिन है।
आयत 56
ٱلْمُلْكُ يَوْمَئِذٍۢ لِّلَّهِ يَحْكُمُ بَيْنَهُمْ ۚ فَٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ فِى جَنَّـٰتِ ٱلنَّعِيمِ
ٱلْمُلْكُ
बादशाहत
يَوْمَئِذٍۢ
उस दिन ( होगी )
لِّلَّهِ
अल्लाह के लिए
يَحْكُمُ
वो फ़ैसला करेगा
بَيْنَهُمْ ۚ
दर्मियान उनके
فَٱلَّذِينَ
पस वो लोग जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
وَعَمِلُوا۟
और उन्होंने अमल किए
ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ
नेक
فِى
(will be) in
جَنَّـٰتِ
जन्नतों में (होंगे)
ٱلنَّعِيمِ
नेअमतों वाली
उस दिन बादशाही अल्लाह ही की होगी। वह उनके बीच फ़ैसला कर देगा। अतः जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए, वे नेमत भरी जन्नतों में होंगे
तफ़्सीर:
क़ियामत के दिन (जिस दिन इन लोगों के पास वह यातना आ जाएगी, जिसका उनसे वादा किया जाता था) संपूर्ण बादशाहत केवल अल्लाह की होगी, इसमें उसका कोई विरोधी नहीं होगा। वह महिमावान मोमिनों और काफ़िरों के बीच फ़ैसला करेगा। वह उनमें से प्रत्येक लिए उसी का निर्णय करेगा जिसका वह हक़दार होगा। चुनाँचे जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और अच्छे कार्य किए, उनके लिए एक महान बदला है और वह कभी खत्म न होने वाली अनंत आनंद की जन्नतें हैं।
आयत 57
وَٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ وَكَذَّبُوا۟ بِـَٔايَـٰتِنَا فَأُو۟لَـٰٓئِكَ لَهُمْ عَذَابٌۭ مُّهِينٌۭ
وَٱلَّذِينَ
और वो जिन्होंने
كَفَرُوا۟
कुफ़्र किया
وَكَذَّبُوا۟
और झुठलाया
بِـَٔايَـٰتِنَا
हमारी आयात को
فَأُو۟لَـٰٓئِكَ
तो यही लोग हैं
لَهُمْ
उनके लिए
عَذَابٌۭ
अज़ाब होगा
مُّهِينٌۭ
रुस्वाकुन
और जिन लोगों ने इनकार किया और हमारी आयतों को झुठलाया, उनके लिए अपमानजनक यातना है
तफ़्सीर:
जिन लोगों ने अल्लाह का इनकार किया और हमारे रसूलों पर उतरने वाली हमारी आयतों को झुठलाया, उन्हीं के लिए अपमानजनक यातना है, जिसके द्वारा अल्लाह उन्हें जहन्नम में अपमानित करेगा।
आयत 58
وَٱلَّذِينَ هَاجَرُوا۟ فِى سَبِيلِ ٱللَّهِ ثُمَّ قُتِلُوٓا۟ أَوْ مَاتُوا۟ لَيَرْزُقَنَّهُمُ ٱللَّهُ رِزْقًا حَسَنًۭا ۚ وَإِنَّ ٱللَّهَ لَهُوَ خَيْرُ ٱلرَّٰزِقِينَ
وَٱلَّذِينَ
और जिन्होंने
هَاجَرُوا۟
हिजरत की
فِى
in
سَبِيلِ
(the) way
ٱللَّهِ
अल्लाह के रास्ते में
ثُمَّ
फिर
قُتِلُوٓا۟
वो क़त्ल किए गए
أَوْ
या
مَاتُوا۟
वो मर गए
لَيَرْزُقَنَّهُمُ
अलबत्ता ज़रूर रिज़्क़ देगा उन्हें
ٱللَّهُ
अल्लाह
رِزْقًا
रिज़्क़
حَسَنًۭا ۚ
अच्छा
وَإِنَّ
और बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
لَهُوَ
अलबत्ता वो ही
خَيْرُ
बेहतर है
ٱلرَّٰزِقِينَ
सब रिज़्क़ देने वालों से
और जिन लोगों ने अल्लाह के मार्ग में घरबार छोड़ा, फिर मारे गए या मर गए, अल्लाह अवश्य उन्हें अच्छी आजीविका प्रदान करेगा। और निस्संदेह अल्लाह ही उत्तम आजीविका प्रदान करनेवाला है
तफ़्सीर:
जिन लोगों ने अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त करने और उसके धर्म को सर-बुलंद करने के लिए अपना घरबार और वतन छोड़ा, फिर उसके रास्ते में जिहाद करते हुए मारे गए या मर गए, निश्चय अल्लाह उन्हें जन्नत में बेहतरीन स्थायी रोज़ी देगा, जो कभी खत्म न होगी। और पवित्र अल्लाह ही सबसे उत्तम रोज़ी देने वाला है।
आयत 59
لَيُدْخِلَنَّهُم مُّدْخَلًۭا يَرْضَوْنَهُۥ ۗ وَإِنَّ ٱللَّهَ لَعَلِيمٌ حَلِيمٌۭ
لَيُدْخِلَنَّهُم
अलबत्ता वो ज़रूर दाख़िल करेगा उन्हें
مُّدْخَلًۭا
दाख़िल होने की जगह
يَرْضَوْنَهُۥ ۗ
वो पसन्द करेंगे जिसे
وَإِنَّ
और बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
لَعَلِيمٌ
अलबत्ता ख़ूब इल्म वाला है
حَلِيمٌۭ
ख़ूब हिल्म वाला है
वह उन्हें ऐसी जगह प्रवेश कराएगा जिससे वे प्रसन्न हो जाएँगे। और निश्चय ही अल्लाह सर्वज्ञ, अत्यन्त सहनशील है
तफ़्सीर:
निश्चित रूप से अल्लाह उन्हें ऐसे स्थान में अवश्य दाखिल करेगा, जिससे वे प्रसन्न हो जाएँगे और वह जन्नत है। निःसंदेह अल्लाह उनके कार्यों और इरादों को जानता है, और वह अत्यंत सहनशील है क्योंकि उसने उन्हें उनकी कोताहियों पर दंडित करने में जल्दी नहीं की।
आयत 60
۞ ذَٰلِكَ وَمَنْ عَاقَبَ بِمِثْلِ مَا عُوقِبَ بِهِۦ ثُمَّ بُغِىَ عَلَيْهِ لَيَنصُرَنَّهُ ٱللَّهُ ۗ إِنَّ ٱللَّهَ لَعَفُوٌّ غَفُورٌۭ
۞ ذَٰلِكَ
ये है
وَمَنْ
और जो कोई
عَاقَبَ
बदला ले
بِمِثْلِ
मानिन्द उसके
مَا
जो
عُوقِبَ
सताया गया
بِهِۦ
उसे
ثُمَّ
फिर
بُغِىَ
ज़्यादती की गई
عَلَيْهِ
उस पर
لَيَنصُرَنَّهُ
अलबत्ता ज़रूर मदद करेगा उसकी
ٱللَّهُ ۗ
अल्लाह
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
لَعَفُوٌّ
अलबत्ता बहुत माफ़ करने वाला है
غَفُورٌۭ
बहुत बख़्शने वाला है
यह बात तो सुन ली। और जो कोई बदला लें, वैसा ही जैसा उसके साथ किया गया और फिर उसपर ज़्यादती की गई, तो अल्लाह अवश्य उसकी सहायता करेगा। निश्चय ही अल्लाह दरगुज़र करनेवाला (छोड़ देनेवाला), बहुत क्षमाशील है
तफ़्सीर:
यह जिसका उल्लेख किया गया है; अल्लाह के रास्ते में अपना घरबार छोड़ने वालों को जन्नत में दाखिल करना और अत्याचार करने वाले से उसके अत्याचार का उसी के समान बदला लेने की अनुमति ताकि उसके लिए उस पर कोई पाप न हो। फिर यदि अत्याचारी दोबारा अत्याचार करे, तो अल्लाह उसकी अवश्य मदद करेगा जिसपर अत्याचार किया गया है। निःसंदेह अल्लाह ईमान वालों के गुनाहों को माफ़ करने वाला, उन्हें क्षमा करने वाला है।
आज की ज़िंदगी में सबक़
शैतान के वसवसों और नबियों की आज़माइश का ज़िक्र है। यह सबक हमें सिखाता है कि शैतान हर नबी और नेक इंसान की राह में रुकावट डालता रहा है, इससे मायूस नहीं होना चाहिए।
आयत 61
ذَٰلِكَ بِأَنَّ ٱللَّهَ يُولِجُ ٱلَّيْلَ فِى ٱلنَّهَارِ وَيُولِجُ ٱلنَّهَارَ فِى ٱلَّيْلِ وَأَنَّ ٱللَّهَ سَمِيعٌۢ بَصِيرٌۭ
ذَٰلِكَ
ये
بِأَنَّ
बवजह उसके कि
ٱللَّهَ
अल्लाह
يُولِجُ
दाख़िल करता है
ٱلَّيْلَ
रात को
فِى
in (to)
ٱلنَّهَارِ
दिन में
وَيُولِجُ
और वो दाख़िल करता है
ٱلنَّهَارَ
दिन को
فِى
in (to)
ٱلَّيْلِ
रात में
وَأَنَّ
और बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
سَمِيعٌۢ
ख़ूब सुनने वाला है
بَصِيرٌۭ
ख़ूब देखने वाला है
यह इसलिए कि अल्लाह ही है जो रात को दिन में पिरोता हुआ ले आता है और दिन को रात में पिरोता हुआ ले आता है। और यह कि अल्लाह सुनता, देखता है
तफ़्सीर:
अत्याचार के शिकार व्यक्ति की यह मदद इसलिए है, क्योंकि अल्लाह जो चाहे उसे करने में सक्षम है। और उसकी क्षमता में से रात को दिन में दाखिल करना और दिन को रात में दाखिल करना है; इस प्रकार कि वह उन दोनों में से एक में वृद्धि करता और दूसरे में कमी करता है। और यह कि अल्लाह अपने बंदों की बातों को सुनने वाला, उनके कार्यों को जानने वाला है। इनमें से कोई चीज़ उससे छिपी नहीं है और वह उन्हें उनका बदला देगा।
आयत 62
ذَٰلِكَ بِأَنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلْحَقُّ وَأَنَّ مَا يَدْعُونَ مِن دُونِهِۦ هُوَ ٱلْبَـٰطِلُ وَأَنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلْعَلِىُّ ٱلْكَبِيرُ
ذَٰلِكَ
ये
بِأَنَّ
बवजह उसके कि
ٱللَّهَ
अल्लाह
هُوَ
वो ही
ٱلْحَقُّ
हक़ है
وَأَنَّ
और बेशक
مَا
जिसे
يَدْعُونَ
वो पुकारते हैं
مِن
besides Him
دُونِهِۦ
उसके सिवा
هُوَ
वो
ٱلْبَـٰطِلُ
बातिल है
وَأَنَّ
और बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
هُوَ
वो ही
ٱلْعَلِىُّ
बहुत बुलन्द है
ٱلْكَبِيرُ
बहुत बड़ा है
यह इसलिए कि अल्लाह ही सत्य है और जिसे वे उसको छोड़कर पुकारते है, वे सब असत्य है, और यह कि अल्लाह ही सर्वोच्च, महान है
तफ़्सीर:
रात को दिन में दाखिल करने और दिन को रात में दाखिल करने का यह क्रम इसलिए है, क्योंकि अल्लाह ही सत्य है, उसका धर्म सत्य है, उसका वादा सत्य है और उसका ईमान वालों की मदद करना सत्य है, और यह कि मुश्रिक लोग जिन मूर्तियों की अल्लाह को छोड़कर पूजा करते हैं, वे झूठी और निराधार हैं, और यह कि अल्लाह ही अपनी मख़्लूक़ से व्यक्तित्व, सम्मान और शक्ति की दृष्टि से बहुत ऊँचा है, जो बहुत महान है, जिसके लिए बड़ाई, महानता और प्रताप है।
आयत 63
أَلَمْ تَرَ أَنَّ ٱللَّهَ أَنزَلَ مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءًۭ فَتُصْبِحُ ٱلْأَرْضُ مُخْضَرَّةً ۗ إِنَّ ٱللَّهَ لَطِيفٌ خَبِيرٌۭ
أَلَمْ
क्या नहीं
تَرَ
आपने देखा
أَنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह ने
أَنزَلَ
उतारा
مِنَ
from
ٱلسَّمَآءِ
आसमान से
مَآءًۭ
पानी
فَتُصْبِحُ
तो हो जाती है
ٱلْأَرْضُ
ज़मीन
مُخْضَرَّةً ۗ
सरसब्ज़
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
لَطِيفٌ
बहुत बारीक बीन है
خَبِيرٌۭ
ख़ूब ख़बर रखने वाला है
क्या तुमने देखा नहीं कि अल्लाह आकाश से पानी बरसाता है, तो धरती हरी-भरी हो जाती है? निस्संदेह अल्लाह सूक्ष्मदर्शी, ख़बर रखनेवाला है
तफ़्सीर:
(ऐ रसूल!) क्या आपने नहीं देखा कि अल्लाह ने आकाश से कुछ बारिश बरसाया, फिर धरती उसपर बारिश उतरने के बाद अपने उगाए हुए पौधों के साथ हरी-भरी हो जाती है। निश्चय अल्लाह अपने बंदों पर बहुत दया करने वाला है कि उनके लिए बारिश उतारा और उनके लिए धरती पर पौधे उगाए, उनके हितों से पूरी तरह अवगत है, उनमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है।
आयत 64
لَّهُۥ مَا فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَمَا فِى ٱلْأَرْضِ ۗ وَإِنَّ ٱللَّهَ لَهُوَ ٱلْغَنِىُّ ٱلْحَمِيدُ
لَّهُۥ
उसी के लिए है
مَا
जो कुछ
فِى
(is) in
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों में है
وَمَا
और जो कुछ
فِى
(is) in
ٱلْأَرْضِ ۗ
ज़मीन में है
وَإِنَّ
और बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
لَهُوَ
अलबत्ता वो
ٱلْغَنِىُّ
बहुत बेनियाज़ है
ٱلْحَمِيدُ
बहुत तारीफ़ वाला है
उसी का है जो कुछ आकाशों में और जो कुछ धरती में है। निस्संदेह अल्लाह ही निस्पृह प्रशंसनीय है
तफ़्सीर:
जो कुछ आकाशों में और जो कुछ धरती में है, उन सब का मालिक अकेला अल्लाह है, और अल्लाह ही वह बेनियाज़ है, जिसे अपनी किसी मख़लूक़ की आवश्यकता नहीं है, हर हाल में प्रशंसनीय है।
आयत 65
أَلَمْ تَرَ أَنَّ ٱللَّهَ سَخَّرَ لَكُم مَّا فِى ٱلْأَرْضِ وَٱلْفُلْكَ تَجْرِى فِى ٱلْبَحْرِ بِأَمْرِهِۦ وَيُمْسِكُ ٱلسَّمَآءَ أَن تَقَعَ عَلَى ٱلْأَرْضِ إِلَّا بِإِذْنِهِۦٓ ۗ إِنَّ ٱللَّهَ بِٱلنَّاسِ لَرَءُوفٌۭ رَّحِيمٌۭ
أَلَمْ
क्या नहीं
تَرَ
आपने देखा
أَنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह ने
سَخَّرَ
मुसख़्ख़र किया
لَكُم
तुम्हारे लिए
مَّا
जो कुछ
فِى
(is) in
ٱلْأَرْضِ
ज़मीन में है
وَٱلْفُلْكَ
और कश्तियों को
تَجْرِى
जो चलती हैं
فِى
through
ٱلْبَحْرِ
समुन्दर में
بِأَمْرِهِۦ
उसके हुक्म से
وَيُمْسِكُ
और वो थामे रखता है
ٱلسَّمَآءَ
आसमान को
أَن
इससे कि
تَقَعَ
वो गिर पड़े
عَلَى
on
ٱلْأَرْضِ
ज़मीन पर
إِلَّا
मगर
بِإِذْنِهِۦٓ ۗ
उसके इज़न से
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
بِٱلنَّاسِ
साथ लोगों के
لَرَءُوفٌۭ
अलबत्ता बहुत शफ़्क़त करने वाला है
رَّحِيمٌۭ
निहायत रहम करने वाला है
क्या तुमने देखा नहीं कि धरती में जो कुछ भी है उसे अल्लाह ने तुम्हारे लिए वशीभूत कर रखा है और नौका को भी कि उसके आदेश से दरिया में चलती है, और उसने आकाश को धरती पर गिरने से रोक रखा है। उसकी अनुज्ञा हो तो बात दूसरी है। निस्संदेह अल्लाह लोगों के हक़ में बड़ा करुणाशील, दयावान है
तफ़्सीर:
(ऐ रसूल!) क्या आपने नहीं देखा कि अल्लाह ने तुम्हारे लाभों तथा तुम्हारी आवश्यकताओं के लिए धरती के ऊपर मौजूद जानदारों और निर्जीव वस्तुओं को आपके तथा लोगों के वश में कर दिया है, और नावों को तुम्हारे वश में कर दिया है कि वे उसके आदेश और उसके वशीकरण से समुद्र में एक शहर (देश) से दूसरे शहर (देश) की ओर जाती हैं, और उसी ने आसमान को थाम रखा है ताकि उसकी अनुमति के बिना ज़मीन पर न गिरे। अगर वह उसे ज़मीन के ऊपर गिरने की अनुमति दे दे, तो वह गिर जाए। निःसंदेह अल्लाह लोगों के लिए अति करुणामय, अत्यंत दयावान् है, क्योंकि उसने उनके अत्याचार के बावजूद इन वस्तुओं को उनके वश में कर रखा है।
आयत 66
وَهُوَ ٱلَّذِىٓ أَحْيَاكُمْ ثُمَّ يُمِيتُكُمْ ثُمَّ يُحْيِيكُمْ ۗ إِنَّ ٱلْإِنسَـٰنَ لَكَفُورٌۭ
وَهُوَ
और वो ही है
ٱلَّذِىٓ
जिसने
أَحْيَاكُمْ
ज़िन्दा किया तुम्हें
ثُمَّ
फिर
يُمِيتُكُمْ
वो मौत देगा तुम्हें
ثُمَّ
फिर
يُحْيِيكُمْ ۗ
वो ज़िन्दा करेगा तुम्हें
إِنَّ
यक़ीनन
ٱلْإِنسَـٰنَ
इन्सान
لَكَفُورٌۭ
अलबत्ता बहुत नाशुक्रा है
और वही है जिसने तुम्हें जीवन प्रदान किया। फिर वही तुम्हें मृत्यु देता है और फिर वही तुम्हें जीवित करनेवाला है। निस्संदेह मानव बड़ा ही अकृतज्ञ है
तफ़्सीर:
अल्लाह वही है, जिसने तुम्हें अनस्तित्व से अस्तित्व में लाकर जीवन प्रदान किया, फिर जब तुम्हारी आयु समाप्त हो जाएगी, तो तुम्हें मौत देगा, फिर तुम्हारी मृत्यु के बाद तुम्हारे कर्मों का हिसाब लेने और तुम्हें उनका बदला देने के लिए तुम्हें फिर से जीवित करेगा। निश्चय इनसान, अल्लाह के साथ दूसरों की इबादत करके, उसकी नेमतों का (जबकि वे स्पष्ट हैं) बहुत ज़्यादा इनकार करने वाला है।
आयत 67
لِّكُلِّ أُمَّةٍۢ جَعَلْنَا مَنسَكًا هُمْ نَاسِكُوهُ ۖ فَلَا يُنَـٰزِعُنَّكَ فِى ٱلْأَمْرِ ۚ وَٱدْعُ إِلَىٰ رَبِّكَ ۖ إِنَّكَ لَعَلَىٰ هُدًۭى مُّسْتَقِيمٍۢ
لِّكُلِّ
वास्ते हर
أُمَّةٍۢ
उम्मत के
جَعَلْنَا
मुक़र्रर किया हमने
مَنسَكًا
इबादत का तरीक़ा
هُمْ
वो
نَاسِكُوهُ ۖ
चलने वाले हैं उस पर
فَلَا
तो ना
يُنَـٰزِعُنَّكَ
वो हरगिज़ झगड़ा करें आपसे
فِى
in
ٱلْأَمْرِ ۚ
इस मामले में
وَٱدْعُ
और दावत दीजिए
إِلَىٰ
to
رَبِّكَ ۖ
तरफ़ अपने रब के
إِنَّكَ
बेशक आप
لَعَلَىٰ
अलबत्ता ऊपर
هُدًۭى
हिदायत
مُّسْتَقِيمٍۢ
सीधी के हैं
प्रत्येक समुदाय के लिए हमने बन्दगी की एक रीति निर्धारित कर दी है, जिसका पालन उसके लोग करते है। अतः इस मामले में वे तुमसे झगड़ने की राह न पाएँ। तुम तो अपने रब की ओर बुलाए जाओ। निस्संदेह तुम सीधे मार्ग पर हो
तफ़्सीर:
हर समुदाय के लोगों के लिए हमने एक शरीयत बनाई है, और वे अपनी शरीयत के अुनसार कार्य करते हैं। इसलिए (ऐ रसूल!) मुश्रिकों और अन्य धर्मों के लोगों को आपकी शरीयत के बारे में हरगिज़ झगड़ना नहीं चाहिए, क्योंकि आप उनकी तुलना में सत्य के अधिक योग्य हैं। जबकि वे असत्य पर चलने वाले हैं। तथा आप लोगों को अल्लाह के लिए तौहीद को ख़ालिस करने की ओर बुलाएँ। निःसंदेह आप तो निश्चय एक सीधे रास्ते पर हैं, जिसमें कोई टेढ़ापन नहीं है।
आयत 68
وَإِن جَـٰدَلُوكَ فَقُلِ ٱللَّهُ أَعْلَمُ بِمَا تَعْمَلُونَ
وَإِن
और अगर
جَـٰدَلُوكَ
वो झगड़ा करें आपसे
فَقُلِ
तो कह दीजिए
ٱللَّهُ
अल्लाह
أَعْلَمُ
ज़्यादा जानता है
بِمَا
उसे जो
تَعْمَلُونَ
तुम अमल करते हो
और यदि वे तुमसे झगड़ा करें तो कह दो कि "तुम जो कुछ करते हो अल्लाह उसे भली-भाँति जानता है
तफ़्सीर:
और यदि वे तर्क स्पष्ट हो जाने के बाद भी आपके साथ बहस करने से बाज़ न आएँ, तो धमकी के तौर पर यह कहते हुए उनके मामले को अल्लाह के हवाले कर दें कि : तुम जो कुछ कर रहे हो, उससे अल्लाह अच्छी तरह अवगत है। तुम्हारे कामों में से कुछ भी उससे छिपा नहीं है और वह तुम्हें उनका बदला देगा।
आयत 69
ٱللَّهُ يَحْكُمُ بَيْنَكُمْ يَوْمَ ٱلْقِيَـٰمَةِ فِيمَا كُنتُمْ فِيهِ تَخْتَلِفُونَ
ٱللَّهُ
अल्लाह
يَحْكُمُ
वो फ़ैसला करेगा
بَيْنَكُمْ
दर्मियान तुम्हारे
يَوْمَ
दिन
ٱلْقِيَـٰمَةِ
क़यामत के
فِيمَا
उस मामले में जो
كُنتُمْ
थे तुम
فِيهِ
उसमें
تَخْتَلِفُونَ
तुम इख़्तिलाफ़ करते
अल्लाह क़ियामत के दिन तुम्हारे बीच उस चीज़ का फ़ैसला कर देगा, जिसमें तुम विभेद करते हो।"
तफ़्सीर:
अल्लाह अपने मोमिन और काफ़िर बंदों के बीच क़ियामत के दिन धर्म के उस मामले में फ़ैसला कर देगा, जिसके बारे में वे दुनिया में मतभेद किया करते थे।
आयत 70
أَلَمْ تَعْلَمْ أَنَّ ٱللَّهَ يَعْلَمُ مَا فِى ٱلسَّمَآءِ وَٱلْأَرْضِ ۗ إِنَّ ذَٰلِكَ فِى كِتَـٰبٍ ۚ إِنَّ ذَٰلِكَ عَلَى ٱللَّهِ يَسِيرٌۭ
أَلَمْ
क्या नहीं
تَعْلَمْ
आप जानते
أَنَّ
कि बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
يَعْلَمُ
जानता है
مَا
जो कुछ
فِى
(is) in
ٱلسَّمَآءِ
आसमान में
وَٱلْأَرْضِ ۗ
और ज़मीन में है
إِنَّ
बेशक
ذَٰلِكَ
ये
فِى
(is) in
كِتَـٰبٍ ۚ
एक किताब में है
إِنَّ
बेशक
ذَٰلِكَ
ये
عَلَى
(is) for
ٱللَّهِ
अल्लाह पर
يَسِيرٌۭ
बहुत आसान है
क्या तुम्हें नहीं मालूम कि अल्लाह जानता है जो कुछ आकाश और धरती मैं हैं? निश्चय ही वह (लोगों का कर्म) एक किताब में अंकित है। निस्संदेह वह (फ़ैसला करना) अल्लाह के लिए अत्यन्त सरल है
तफ़्सीर:
(ऐ रसूल!) क्या आप नहीं जानते कि अल्लाह आसमान की सारी चीज़ों को जानता है और धरती की सारी चीज़ों को जानता है। इन दोनों की कोई चीज़ उससे छिपी नहीं है। इन सारी बातों का ज्ञान लौहे महफ़ूज़ (संरक्षित पट्टिका) में अंकित है और इन चीज़ों का ज्ञान अल्लाह पर आसान है।
आज की ज़िंदगी में सबक़
अल्लाह की कुदरत की निशानियों का ज़िक्र है। यह हमें सिखाता है कि कायनात की हर चीज़ अल्लाह की तस्बीह कर रही है, यह हमें भी अल्लाह की याद में मशगूल रहने की तरगीब देता है।
आयत 71
وَيَعْبُدُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ مَا لَمْ يُنَزِّلْ بِهِۦ سُلْطَـٰنًۭا وَمَا لَيْسَ لَهُم بِهِۦ عِلْمٌۭ ۗ وَمَا لِلظَّـٰلِمِينَ مِن نَّصِيرٍۢ
وَيَعْبُدُونَ
और वो इबादत करते हैं
مِن
besides Allah
دُونِ
सिवाए
ٱللَّهِ
अल्लाह के
مَا
उसकी जो
لَمْ
नहीं
يُنَزِّلْ
उसने नाज़िल की
بِهِۦ
जिसकी
سُلْطَـٰنًۭا
कोई दलील
وَمَا
और उसकी जो
لَيْسَ
नहीं है
لَهُم
उनके लिए
بِهِۦ
जिसका
عِلْمٌۭ ۗ
कोई इल्म
وَمَا
और नहीं
لِلظَّـٰلِمِينَ
ज़ालिमों के लिए
مِن
any
نَّصِيرٍۢ
कोई मददगार
और वे अल्लाह से इतर उनकी बन्दगी करते है जिनके लिए न तो उसने कोई प्रमाण उतारा और न उन्हें उनके विषय में कोई ज्ञान ही है। और इन ज़ालिमों को कोई सहायक नहीं
तफ़्सीर:
और मुश्रिक लोग अल्लाह को छोड़कर ऐसी मूर्तियों की पूजा करते हैं, जिनकी पूजा करने का अल्लाह ने अपनी पुस्तकों में कोई प्रमाण नहीं उतारा है, तथा इसके लिए उनके पास ज्ञान का भी कोई सबूत नहीं है। उनका प्रमाण केवल अपने बाप-दादा का अंधा अनुकरण है। और ज़ालिमों का कोई मददगार नहीं, जो उन्हें अल्लाह की यातना से बचा सके।
आयत 72
وَإِذَا تُتْلَىٰ عَلَيْهِمْ ءَايَـٰتُنَا بَيِّنَـٰتٍۢ تَعْرِفُ فِى وُجُوهِ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ ٱلْمُنكَرَ ۖ يَكَادُونَ يَسْطُونَ بِٱلَّذِينَ يَتْلُونَ عَلَيْهِمْ ءَايَـٰتِنَا ۗ قُلْ أَفَأُنَبِّئُكُم بِشَرٍّۢ مِّن ذَٰلِكُمُ ۗ ٱلنَّارُ وَعَدَهَا ٱللَّهُ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ ۖ وَبِئْسَ ٱلْمَصِيرُ
وَإِذَا
और जब
تُتْلَىٰ
पढ़ी जाती हैं
عَلَيْهِمْ
उन पर
ءَايَـٰتُنَا
आयात हमारी
بَيِّنَـٰتٍۢ
वाज़ेह
تَعْرِفُ
आप पहचान सकते हैं
فِى
on
وُجُوهِ
चेहरों में
ٱلَّذِينَ
उनके जिन्होंने
كَفَرُوا۟
कुफ़्र किया
ٱلْمُنكَرَ ۖ
नागवारी को
يَكَادُونَ
क़रीब हैं
يَسْطُونَ
कि वो हमला कर दें
بِٱلَّذِينَ
उन पर जो
يَتْلُونَ
पढ़ते हैं
عَلَيْهِمْ
उन पर
ءَايَـٰتِنَا ۗ
आयात हमारी
قُلْ
कह दीजिए
أَفَأُنَبِّئُكُم
क्या फिर मैं बताऊँ तुम्हें
بِشَرٍّۢ
बुरी चीज़
مِّن
than
ذَٰلِكُمُ ۗ
इससे
ٱلنَّارُ
आग
وَعَدَهَا
वादा किया है उसका
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
ٱلَّذِينَ
उनसे जिन्होंने
كَفَرُوا۟ ۖ
कुफ़्र किया
وَبِئْسَ
और कितना बुरा है
ٱلْمَصِيرُ
ठिकाना
और जब उन्हें हमारी स्पष्ट आयतें सुनाई जाती है, तो इनकार करनेवालों के चेहरों पर तुम्हें नागवारी प्रतीत होती है। लगता है कि अभी वे उन लोगों पर टूट पड़ेगे जो उन्हें हमारी आयतें सुनाते है। कह दो, "क्या मैं तुम्हे इससे बुरी चीज़ की ख़बर दूँ? आग है वह - अल्लाह ने इनकार करनेवालों से उसी का वादा कर रखा है - और वह बहुत ही बुरा ठिकाना है।"
तफ़्सीर:
और जब उनके सामने हमारे क़ुरआन की स्पष्ट आयतें पढ़ी जाती हैं, तो आप अल्लाह के साथ कुफ़्र करने वालों के चेहरों में, क़ुरआन सुनने के समय उनकी त्योरी से उसकी अस्वीकृति को पहचान लेंगे। क़रीब होंगे कि वे क्रोध की तीव्रता से उन लोगों पर धावा बोल दें, जो उनके सामने हमारी आयतें पढ़ते हैं। (ऐ रसूल!) उनसे कह दें : क्या मैं तुम्हें वह चीज़ बताऊँ, जो तुम्हारे क्रोध और तुम्हारे मुँह बनाने से अधिक बुरी है? वह आग है, जिसमें अल्लाह ने काफ़िरों को दाखिल करने का वादा किया है। और वह बहुत बुरा ठिकाना है, जहाँ उन्हें जाना है।
आयत 73
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ ضُرِبَ مَثَلٌۭ فَٱسْتَمِعُوا۟ لَهُۥٓ ۚ إِنَّ ٱلَّذِينَ تَدْعُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ لَن يَخْلُقُوا۟ ذُبَابًۭا وَلَوِ ٱجْتَمَعُوا۟ لَهُۥ ۖ وَإِن يَسْلُبْهُمُ ٱلذُّبَابُ شَيْـًۭٔا لَّا يَسْتَنقِذُوهُ مِنْهُ ۚ ضَعُفَ ٱلطَّالِبُ وَٱلْمَطْلُوبُ
يَـٰٓأَيُّهَا
ٱلنَّاسُ
लोगो
ضُرِبَ
बयान की गई है
مَثَلٌۭ
मिसाल
فَٱسْتَمِعُوا۟
पस ग़ौर से सुनो
لَهُۥٓ ۚ
उसे
إِنَّ
बेशक
ٱلَّذِينَ
वो जिन्हें
تَدْعُونَ
तुम पुकारते हो
مِن
besides Allah
دُونِ
besides Allah
ٱللَّهِ
अल्लाह के सिवा
لَن
हरगिज़ नहीं
يَخْلُقُوا۟
वो पैदा कर सकते
ذُبَابًۭا
एक मक्खी
وَلَوِ
और अगरचे
ٱجْتَمَعُوا۟
वो जमा हो जाऐं
لَهُۥ ۖ
उसके लिए
وَإِن
और अगर
يَسْلُبْهُمُ
छीन ले उनसे
ٱلذُّبَابُ
मक्खी
شَيْـًۭٔا
कोई चीज़
لَّا
not
يَسْتَنقِذُوهُ
नहीं वो छुड़ा सकते उसको
مِنْهُ ۚ
उससे
ضَعُفَ
कितना कमज़ोर है
ٱلطَّالِبُ
तलब करने वाला
وَٱلْمَطْلُوبُ
और वो जिससे तलब किया जाता है
ऐ लोगों! एक मिसाल पेश की जाती है। उसे ध्यान से सुनो, अल्लाह से हटकर तुम जिन्हें पुकारते हो वे एक मक्खी भी पैदा नहीं कर सकते। यद्यपि इसके लिए वे सब इकट्ठे हो जाएँ और यदि मक्खी उनसे कोई चीज़ छीन ले जाए तो उससे वे उसको छुड़ा भी नहीं सकते। बेबस और असहाय रहा चाहनेवाला भी (उपासक) और उसका अभीष्ट (उपास्य) भी
तफ़्सीर:
ऐ लोगो! एक उदाहरण दिया जा रहा है, इसे ध्यान से सुनो और सीख ग्रहण करो। तुम अल्लाह के सिवा जिन मूर्तियों तथा अन्य वस्तुओं को पूजते हो, वे अपनी विवशता के कारण कभी एक मक्खी जैसी छोटी-सी चीज़ भी पैदा नहीं करेंगे। बल्कि अगर वे उसे पैदा करने के लिए सबके सब इकट्ठे हो जाएँ, तब भी उसे पैदा नहीं कर पाएँगे। और यदि मक्खी उनके पास मौजूद खुशबू या कोई और चीज़ ले उड़े, तो वे मक्खी से उसे छुड़ा नहीं सकते। इनके मक्खी को पैदा करने और उससे अपनी चीज़ों को छुड़ाने में असमर्थता से; यह स्पष्ट हो गया कि वे इससे बड़ा कुछ करने में असमर्थ हैं, फिर तुम - इनकी लाचारी के बावजूद - अल्लाह के सिवा इनकी पूजा कैसे करते हो?! कमज़ोर है यह तालिब, अर्थात् वह पूजी जाने वाली मूर्ति जो मक्खी से अपनी छीनी हुई चीज़ भी छुड़ा नहीं सकती, और कमज़ोर है यह मतलूब अर्थात् मक्खी।
आयत 74
مَا قَدَرُوا۟ ٱللَّهَ حَقَّ قَدْرِهِۦٓ ۗ إِنَّ ٱللَّهَ لَقَوِىٌّ عَزِيزٌ
مَا
नहीं
قَدَرُوا۟
उन्होंने क़द्र की
ٱللَّهَ
अल्लाह की
حَقَّ
जैसे हक़ है
قَدْرِهِۦٓ ۗ
उसकी क़द्र का
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
لَقَوِىٌّ
अलबत्ता बहुत क़ूव्वत वाला है
عَزِيزٌ
बहुत ज़बरदस्त है
उन्होंने अल्लाह की क़द्र ही नहीं पहचानी जैसी कि उसकी क़द्र पहचाननी चाहिए थी। निश्चय ही अल्लाह अत्यन्त बलवान, प्रभुत्वशाली है
तफ़्सीर:
उन्होंने अल्लाह का आदर-सम्मान नहीं किया, जैसा कि उसका आदर-सम्मान करना चाहिए, जब उन्होंने उसके साथ उसके कुछ प्राणियों की पूजा की। निःसंदेह अल्लाह अत्यंत शक्तिशाली है। उसकी शक्ति और क्षमता का एक नमूना यह है कि उसने आकाशों और धरती तथा उनके अंदर मौजूद सारी चीज़ों को पैदा किया, वह सब पर प्रभुत्वशाली है, उसपर किसी का ज़ोर नहीं चलता, इसके विपरीत मुश्रिकों की मूर्तियाँ कमज़ोर और हीन हैं, कुछ भी पैदा नहीं कर सकतीं।
आयत 75
ٱللَّهُ يَصْطَفِى مِنَ ٱلْمَلَـٰٓئِكَةِ رُسُلًۭا وَمِنَ ٱلنَّاسِ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ سَمِيعٌۢ بَصِيرٌۭ
ٱللَّهُ
अल्लाह
يَصْطَفِى
चुन लेता है
مِنَ
from
ٱلْمَلَـٰٓئِكَةِ
फ़रिश्तों में से
رُسُلًۭا
पैग़ाम पहुँचाने वाले
وَمِنَ
and from
ٱلنَّاسِ ۚ
और इन्सानों में से भी
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
سَمِيعٌۢ
ख़ूब सुनने वाला है
بَصِيرٌۭ
ख़ूब देखने वाला है
अल्लाह फ़रिश्तों में से संदेशवाहक चुनता और मनुष्यों में से भी। निश्चय ही अल्लाह सब कुछ सुनता, देखता है
तफ़्सीर:
अल्लाह तआला फ़रिश्तों में से कुछ संदेशवाहकों को चुनता है और इसी तरह इनसानों में से कुछ संदेशवाहकों को चुनता है। चुनाँचे वह कुछ फ़रिश्तों को नबियों के पास भेजता है, जैसे जिबरील अलैहिस्सलाम को इनसानों में से रसूलों के पास भेजा, तथा इनसानों में से रसूलों को लोगों के पास भेजता है। निःसंदेह अल्लाह उन बातों को सुनने वाला है, जो मुश्रिक लोग उसके रसूलों के बारे में कहते हैं, उसे देखने वाला है, जिसे वह अपने संदेश के लिए चुनता है।
आयत 76
يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ ۗ وَإِلَى ٱللَّهِ تُرْجَعُ ٱلْأُمُورُ
يَعْلَمُ
वो जानता है
مَا
जो कुछ
بَيْنَ
(is) before them
أَيْدِيهِمْ
उनके आगे है
وَمَا
और जो कुछ
خَلْفَهُمْ ۗ
उनके पीछे है
وَإِلَى
And to
ٱللَّهِ
और तरफ़ अल्लाह ही के
تُرْجَعُ
लौटाए जाते हैं
ٱلْأُمُورُ
सब काम
वह जानता है जो कुछ उनके आगे है और जो कुछ उनके पीछे है। और सारे मामले अल्लाह ही की ओर पलटते है
तफ़्सीर:
वह सर्वशक्तिमान फ़रिश्तों और इनसानों में से अपने संदेशवाहकों के उनके पैदा होने के पहले और उनके मरने के बाद के हालात से अवगत है। और उसी की ओर क़ियामत के दिन सारे मामले लौटाए जाएँगे, जब वह अपने बंदों को दोबारा जीवित करेगा और उन्हें उनके कर्मों का बदला देगा।
आयत 77
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ ٱرْكَعُوا۟ وَٱسْجُدُوا۟ وَٱعْبُدُوا۟ رَبَّكُمْ وَٱفْعَلُوا۟ ٱلْخَيْرَ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ ۩
يَـٰٓأَيُّهَا
O you who believe
ٱلَّذِينَ
ऐ लोगो जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए हो
ٱرْكَعُوا۟
रुकूअ करो
وَٱسْجُدُوا۟
और सजदा करो
وَٱعْبُدُوا۟
और इबादत करो
رَبَّكُمْ
अपने रब की
وَٱفْعَلُوا۟
और करो
ٱلْخَيْرَ
भलाई
لَعَلَّكُمْ
ताकि तुम
تُفْلِحُونَ ۩
तुम फ़लाह पा जाओ
ऐ ईमान लानेवालो! झुको और सजदा करो और अपने रब की बन्दही करो और भलाई करो, ताकि तुम्हें सफलता प्राप्त हो
तफ़्सीर:
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! अपनी नमाज़ में केवल अल्लाह के लिए रुकू' और सजदा करो, और अच्छे कार्य करो, जैसे सदक़ा (दान), रिश्तेदारों के साथ अच्छा व्यवहार और अन्य चीजें। इस आशा में कि तुम अपने उद्देश्य की प्राप्ति में सफल हो जाओ और भय से मुक्ति पा जाओ।
आयत 78
وَجَـٰهِدُوا۟ فِى ٱللَّهِ حَقَّ جِهَادِهِۦ ۚ هُوَ ٱجْتَبَىٰكُمْ وَمَا جَعَلَ عَلَيْكُمْ فِى ٱلدِّينِ مِنْ حَرَجٍۢ ۚ مِّلَّةَ أَبِيكُمْ إِبْرَٰهِيمَ ۚ هُوَ سَمَّىٰكُمُ ٱلْمُسْلِمِينَ مِن قَبْلُ وَفِى هَـٰذَا لِيَكُونَ ٱلرَّسُولُ شَهِيدًا عَلَيْكُمْ وَتَكُونُوا۟ شُهَدَآءَ عَلَى ٱلنَّاسِ ۚ فَأَقِيمُوا۟ ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتُوا۟ ٱلزَّكَوٰةَ وَٱعْتَصِمُوا۟ بِٱللَّهِ هُوَ مَوْلَىٰكُمْ ۖ فَنِعْمَ ٱلْمَوْلَىٰ وَنِعْمَ ٱلنَّصِيرُ
وَجَـٰهِدُوا۟
और जिहाद करो
فِى
for
ٱللَّهِ
अल्लाह (के रास्ते) में
حَقَّ
जैसा कि (हक़ है)
جِهَادِهِۦ ۚ
उसके जिहाद का
هُوَ
उसने
ٱجْتَبَىٰكُمْ
चुन लिया है तुम्हें
وَمَا
और नहीं
جَعَلَ
उसने बनाई
عَلَيْكُمْ
तुम पर
فِى
in
ٱلدِّينِ
दीन के मामले में
مِنْ
any
حَرَجٍۢ ۚ
कोई तंगी
مِّلَّةَ
ये दीन है
أَبِيكُمْ
तुम्हारे बाप
إِبْرَٰهِيمَ ۚ
इब्राहीम का
هُوَ
उस (अल्लाह) ने
سَمَّىٰكُمُ
नाम रखा है तुम्हारा
ٱلْمُسْلِمِينَ
मुसलमान
مِن
before
قَبْلُ
इससे पहले (भी)
وَفِى
and in
هَـٰذَا
और इसमें (भी)
لِيَكُونَ
ताकि हों
ٱلرَّسُولُ
रसूल
شَهِيدًا
गवाह
عَلَيْكُمْ
तुम पर
وَتَكُونُوا۟
और तुम हो जाओ
شُهَدَآءَ
गवाह
عَلَى
on
ٱلنَّاسِ ۚ
तमाम इन्सानों पर
فَأَقِيمُوا۟
पस क़ायम करो
ٱلصَّلَوٰةَ
नमाज़
وَءَاتُوا۟
और अदा करो
ٱلزَّكَوٰةَ
ज़कात
وَٱعْتَصِمُوا۟
और मज़बूत थाम लो
بِٱللَّهِ
अल्लाह को
هُوَ
वो ही
مَوْلَىٰكُمْ ۖ
मौला है तुम्हारा
فَنِعْمَ
पस कितना अच्छा है
ٱلْمَوْلَىٰ
मौला / दोस्त
وَنِعْمَ
और कितना अच्छा है
ٱلنَّصِيرُ
मददगार
और परस्पर मिलकर जिहाद करो अल्लाह के मार्ग में, जैसा कि जिहाद का हक़ है। उसने तुम्हें चुन लिया है - और धर्म के मामले में तुमपर कोई तंगी और कठिनाई नहीं रखी। तुम्हारे बाप इबराहीम के पंथ को तुम्हारे लिए पसन्द किया। उसने इससे पहले तुम्हारा नाम मुस्लिम (आज्ञाकारी) रखा था और इस ध्येय से - ताकि रसूल तुमपर गवाह हो और तुम लोगों पर गवाह हो। अतः नमाज़ का आयोजन करो और ज़कात दो और अल्लाह को मज़बूती से पकड़े रहो। वही तुम्हारा संरक्षक है। तो क्या ही अच्छा संरक्षक है और क्या ही अच्छा सहायक!
तफ़्सीर:
और अल्लाह के रास्ते में उसकी प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए जिहाद करो, उसने तुम्हें चुन लिया है और तुम्हारे धर्म को उदार एवं आसान बनाया है, जिसमें कोई तंगी और सख़्ती नहीं रखी है। यही उदार धर्म तुम्हारे पिता इबराहीम अलैहिस्सलाम का धर्म है। और अल्लाह ने तुम्हारा नाम पिछली किताबों में और क़ुरआन में मुसलमान रखा है। ताकि रसूल तुमपर इस बात की गवाही दे कि उसने तुम्हें वह संदेश पहुँचा दिया जिसका उसे पहुँचाने का आदेश दिया गया था, और तुम पिछली उम्मतों पर इस बात की गवाही दो कि उनके रसूलों ने उन्हें संदेश पहुँचा दिया था। इसलिए इसपर अल्लाह का शुक्रिया अदा करते हुए पूर्ण रूप से नमाज़ अदा करो, अपने धन की ज़कात दो, अल्लाह का सहारा लो और अपने सभी कामों में अल्लाह पर भरोसा करो। अल्लाह सर्वशक्तिमान अपने संरक्षण में आने वाले ईमान वालों का बेहतरीन संरक्षक है और मदद माँगने वालों का बेहतरीन मददगार है। इसलिए उसके संरक्षण में आओ, वह तुम्हें संरक्षण प्रदान करेगा और उससे मदद माँगो, वह तुम्हारी मदद करेगा।
आज की ज़िंदगी में सबक़
जिहाद फी सबीलिल्लाह और दीन में आसानी के ज़िक्र के साथ सूरह का इख्तिताम होता है। यह हमें सिखाता है कि अल्लाह ने दीन में हमारे लिए कोई तंगी नहीं रखी, इसलिए इसे बोझ नहीं बल्कि नेमत समझकर अपनाना चाहिए।
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