नाम का मतलब
लुक़मान (एक हकीम शख्स, जिनकी अपने बेटे को नसीहतें इस सूरह में हैं)
पृष्ठभूमि
सूरह लुक़मान में एक हिकमत वाले शख्स लुक़मान की अपने बेटे को दी गई नसीहतों का ज़िक्र है, जिसमें शिर्क से बचने, वालिदैन से नेकी और तवाज़ो जैसी तालीमात शामिल हैं।
फ़ज़ीलत / सार
लुक़मान अलैहिस्सलाम की नसीहतें आज भी माता-पिता के लिए औलाद की तरबियत की एक बेहतरीन मिसाल मानी जाती हैं।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
आयत 1
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ الٓمٓ
الٓمٓ
ا ل م
अलिफ़॰ लाम॰ मीम॰
तफ़्सीर:
(अलिफ़, लाम, मीम) सूरतुल-बक़रा की शुरुआत में इस प्रकार के अक्षरों के बारे में बात गुज़र चुकी है।
आयत 2
تِلْكَ ءَايَـٰتُ ٱلْكِتَـٰبِ ٱلْحَكِيمِ
تِلْكَ
ये
ءَايَـٰتُ
आयात हैं
ٱلْكِتَـٰبِ
किताब
ٱلْحَكِيمِ
हिकमत वाली की
(जो आयतें उतर रही हैं) वे तत्वज्ञान से परिपूर्ण किताब की आयते हैं
तफ़्सीर:
(ऐ रसूल) आपपर उतरने वाली ये आयतें, उस किताब की आयतें हैं, जो हिकमत की बात करती है।
आयत 3
هُدًۭى وَرَحْمَةًۭ لِّلْمُحْسِنِينَ
هُدًۭى
हिदायत
وَرَحْمَةًۭ
और रहमत है
لِّلْمُحْسِنِينَ
मोहसिनीन/नेकोकारों के लिए
मार्गदर्शन और दयालुता उत्तमकारों के लिए
तफ़्सीर:
वह उन लोगों के लिए मार्गदर्शन और दया है, जो अपने पालनहार के अधिकारों और उसके बंदों के अधिकारों को पूरा करके अच्छा कार्य करते हैं।
आयत 4
ٱلَّذِينَ يُقِيمُونَ ٱلصَّلَوٰةَ وَيُؤْتُونَ ٱلزَّكَوٰةَ وَهُم بِٱلْـَٔاخِرَةِ هُمْ يُوقِنُونَ
ٱلَّذِينَ
वो जो
يُقِيمُونَ
क़ायम करते हैं
ٱلصَّلَوٰةَ
नमाज़
وَيُؤْتُونَ
और वो अदा करते हैं
ٱلزَّكَوٰةَ
ज़कात
وَهُم
और वो
بِٱلْـَٔاخِرَةِ
आख़िरत पर
هُمْ
वो
يُوقِنُونَ
वो यक़ीन रखते हैं
जो नमाज़ का आयोजन करते है और ज़कात देते है और आख़िरत पर विश्वास रखते है
तफ़्सीर:
जो सम्पूर्ण रूप से नमाज़ अदा करते हैं, अपने धनों की ज़कात देते हैं तथा वे आख़िरत में पेश आने वाली घटनाओं : पुनर्जीवन, हिसाब, पुण्य और दंड पर विश्वास रखते हैंl
आयत 5
أُو۟لَـٰٓئِكَ عَلَىٰ هُدًۭى مِّن رَّبِّهِمْ ۖ وَأُو۟لَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلْمُفْلِحُونَ
أُو۟لَـٰٓئِكَ
यही लोग हैं
عَلَىٰ
(are) on
هُدًۭى
हिदायत पर
مِّن
from
رَّبِّهِمْ ۖ
अपने रब की तरफ़ से
وَأُو۟لَـٰٓئِكَ
और यही लोग हैं
هُمُ
वो
ٱلْمُفْلِحُونَ
जो फ़लाह पाने वाले हैं
वही अपने रब की और से मार्ग पर हैं और वही सफल है
तफ़्सीर:
जो लोग इन गुणों से विशिष्ट हैं, वे अपने पालनहार की ओर से मार्गदर्शन पर क़ायम हैं और वही अपनी मुराद को पहुँचने वाले और भय से मुक्ति पाने वाले हैं।
आयत 6
وَمِنَ ٱلنَّاسِ مَن يَشْتَرِى لَهْوَ ٱلْحَدِيثِ لِيُضِلَّ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ بِغَيْرِ عِلْمٍۢ وَيَتَّخِذَهَا هُزُوًا ۚ أُو۟لَـٰٓئِكَ لَهُمْ عَذَابٌۭ مُّهِينٌۭ
وَمِنَ
And of
ٱلنَّاسِ
और लोगों में से कोई है
مَن
जो
يَشْتَرِى
ख़रीदता है
لَهْوَ
खेल तमाशा (वाली)
ٱلْحَدِيثِ
बात
لِيُضِلَّ
ताकि वो भटकाए
عَن
from
سَبِيلِ
(the) path
ٱللَّهِ
अल्लाह के रास्ते से
بِغَيْرِ
बग़ैर
عِلْمٍۢ
इल्म के
وَيَتَّخِذَهَا
और वो बनाता है उसे
هُزُوًا ۚ
मज़ाक़
أُو۟لَـٰٓئِكَ
यही लोग हैं
لَهُمْ
उनके लिए
عَذَابٌۭ
अज़ाब है
مُّهِينٌۭ
ज़लील करने वाला
लोगों में से कोई ऐसा भी है जो दिल को लुभानेवाली बातों का ख़रीदार बनता है, ताकि बिना किसी ज्ञान के अल्लाह के मार्ग से (दूसरों को) भटकाए और उनका परिहास करे। वही है जिनके लिए अपमानजनक यातना है
तफ़्सीर:
तथा लोगों के बीच कोई (जैसे नज़्र बिन हारिस) ऐसा व्यक्ति भी है, जो असावधान करने वाली बातें अपनाता है, ताकि वह बिना किसी ज्ञान के लोगों को अल्लाह के दीन से हटाकर उन बातों में लगा दे, और अल्लाह की आयतों को मज़ाक का सामान बनाकर उनका परिहास करता है। इन विशेषताओं के साथ वर्णित लोगों के लिए आख़िरत में अपमानजनक यातना है।
आयत 7
وَإِذَا تُتْلَىٰ عَلَيْهِ ءَايَـٰتُنَا وَلَّىٰ مُسْتَكْبِرًۭا كَأَن لَّمْ يَسْمَعْهَا كَأَنَّ فِىٓ أُذُنَيْهِ وَقْرًۭا ۖ فَبَشِّرْهُ بِعَذَابٍ أَلِيمٍ
وَإِذَا
और जब
تُتْلَىٰ
पढ़ी जाती हैं
عَلَيْهِ
उस पर
ءَايَـٰتُنَا
आयात हमारी
وَلَّىٰ
वो मुँह मोड़ लेता है
مُسْتَكْبِرًۭا
तकब्बुर करते हुए
كَأَن
गोया कि
لَّمْ
नहीं
يَسْمَعْهَا
उसने सुना उन्हें
كَأَنَّ
गोया कि
فِىٓ
in
أُذُنَيْهِ
उसके दोनों कानों में
وَقْرًۭا ۖ
कोई बोझ है
فَبَشِّرْهُ
तो ख़ुशख़बरी दे दीजिए उसे
بِعَذَابٍ
अज़ाब
أَلِيمٍ
दर्दनाक की
जब उसे हमारी आयतें सुनाई जाती हैं तो वह स्वयं को बड़ा समझता हुआ पीठ फेरकर चल देता है, मानो उसने उन्हें सुना ही नहीं, मानो उसके काम बहरे है। अच्छा तो उसे एक दुखद यातना की शुभ सूचना दे दो
तफ़्सीर:
और जब उसके सामने हमारी आयतें पढ़ी जाती हैं, तो वह उन्हें सुनने से ऐसे घमंड करते हुए पीठ फेर लेता है, जैसे कि उसने उन्हें सुना ही न हो। मानो उसके कानों में आवाज़ें सुनने से बहरापन है। तो (ऐ रसूल) उसे कष्टदायी यातना की शुभसूचना दे दें, जो उसकी प्रतीक्षा कर रही है।
आयत 8
إِنَّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ لَهُمْ جَنَّـٰتُ ٱلنَّعِيمِ
إِنَّ
बेशक
ٱلَّذِينَ
वो जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
وَعَمِلُوا۟
और उन्होंने अमल किए
ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ
नेक
لَهُمْ
उनके लिए
جَنَّـٰتُ
बाग़ात हैं
ٱلنَّعِيمِ
नेअमतों वाले
अलबत्ता जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए उनके लिए नेमत भरी जन्नतें हैं,
तफ़्सीर:
जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और नेक कार्य किए, उनके लिए नेमत के बाग़ हैं, जिनमें वे उसका आनंद लेंगे, जो अल्लाह ने उनके लिए तैयार किया है।
आयत 9
خَـٰلِدِينَ فِيهَا ۖ وَعْدَ ٱللَّهِ حَقًّۭا ۚ وَهُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلْحَكِيمُ
خَـٰلِدِينَ
हमेशा रहने वाले हैं
فِيهَا ۖ
उनमें
وَعْدَ
वादा है
ٱللَّهِ
अल्लाह का
حَقًّۭا ۚ
सच्चा
وَهُوَ
और वो
ٱلْعَزِيزُ
बहुत ज़बरदस्त है
ٱلْحَكِيمُ
ख़ूब हिकमत वाला है
जिनमें वे सदैव रहेंगे। यह अल्लाह का सच्चा वादा है और वह अत्यन्त प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है
तफ़्सीर:
वे उन बागों में सदैव रहेंगे। अल्लाह ने उनसे इसका सच्चा वादा किया है, जिसमें कोई संदेह नहीं है। वह पवित्र अल्लाह प्रभुत्वशाली है, जिसपर किसी का ज़ोर नहीं चलता। वह अपनी रचना, नियति (तक़दीर नियत करने) और शरीयतसाज़ी में हिकमत वाला है।
आयत 10
خَلَقَ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ بِغَيْرِ عَمَدٍۢ تَرَوْنَهَا ۖ وَأَلْقَىٰ فِى ٱلْأَرْضِ رَوَٰسِىَ أَن تَمِيدَ بِكُمْ وَبَثَّ فِيهَا مِن كُلِّ دَآبَّةٍۢ ۚ وَأَنزَلْنَا مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءًۭ فَأَنۢبَتْنَا فِيهَا مِن كُلِّ زَوْجٍۢ كَرِيمٍ
خَلَقَ
उसने पैदा किया
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों को
بِغَيْرِ
बग़ैर
عَمَدٍۢ
सुतूनों के
تَرَوْنَهَا ۖ
तुम देखते हो उन्हें
وَأَلْقَىٰ
और उसने डाल दिए
فِى
in
ٱلْأَرْضِ
ज़मीन में
رَوَٰسِىَ
पहाड़
أَن
कि
تَمِيدَ
ना वो ढुलक जाए
بِكُمْ
तुम्हें लेकर
وَبَثَّ
और उसने फैला दिए
فِيهَا
उसमें
مِن
from
كُلِّ
हर क़िस्म के
دَآبَّةٍۢ ۚ
जानदार
وَأَنزَلْنَا
और उतारा हमने
مِنَ
from
ٱلسَّمَآءِ
आसमान से
مَآءًۭ
पानी
فَأَنۢبَتْنَا
फिर उगाए हमने
فِيهَا
उसमें
مِن
of
كُلِّ
हर क़िस्म के
زَوْجٍۢ
जोड़े
كَرِيمٍ
उमदा
उसने आकाशों को पैदा किया, (जो थमें हुए हैं) बिना ऐसे स्तम्भों के जो तुम्हें दिखाई दें। और उसने धरती में पहाड़ डाल दिए कि ऐसा न हो कि तुम्हें लेकर डाँवाडोल हो जाए और उसने उसमें हर प्रकार के जानवर फैला दिए। और हमने ही आकाश से पानी उतारा, फिर उसमें हर प्रकार की उत्तम चीज़े उगाई
तफ़्सीर:
पवित्र अल्लाह ने बिना खंभों के ऊपर उठे हुए आकाश पैदा किए, और धरती में अचल पहाड़ गाड़ दिए, ताकि वह तुम्हें लेकर हिलने-डुलने न लगे और धरती के ऊपर सभी प्रकार के जानवर फैला दिए। तथा हमने आकाश से बारिश का पानी उतारा। फिर हमने धरती के ऊपर हर तरह की खुश-मंज़र चीज़ें उगाईं, जिनसे इनसान और जानवर लाभ प्राप्त करते हैं।
आज की ज़िंदगी में सबक़
कुरआन की हिदायत और नमाज़-ज़कात की ताकीद का ज़िक्र है। यह हमें सिखाता है कि कुरआन की तालीम पर अमल करने वाले ही असली फायदे में हैं।
आयत 11
هَـٰذَا خَلْقُ ٱللَّهِ فَأَرُونِى مَاذَا خَلَقَ ٱلَّذِينَ مِن دُونِهِۦ ۚ بَلِ ٱلظَّـٰلِمُونَ فِى ضَلَـٰلٍۢ مُّبِينٍۢ
هَـٰذَا
ये है
خَلْقُ
तख़लीक़
ٱللَّهِ
अल्लाह की
فَأَرُونِى
तो दिखाओ मुझे
مَاذَا
क्या कुछ
خَلَقَ
पैदा किया
ٱلَّذِينَ
उन लोगों ने जो
مِن
besides Him
دُونِهِۦ ۚ
उसके सिवा हैं
بَلِ
बल्कि
ٱلظَّـٰلِمُونَ
ज़ालिम लोग
فِى
(are) in
ضَلَـٰلٍۢ
गुमराही में हैं
مُّبِينٍۢ
खुली-खुली
यह तो अल्लाह की संरचना है। अब तनिक मुझे दिखाओं कि उससे हटकर जो दूसरे हैं (तुम्हारे ठहराए हुए प्रुभ) उन्होंने क्या पैदा किया हैं! नहीं, बल्कि ज़ालिम तो एक खुली गुमराही में पड़े हुए है
तफ़्सीर:
यह उपर्युक्त अल्लाह की रचना है। तो (ऐ मुश्रिको) मुझे दिखाओ कि उन लोगों ने क्या कुछ पैदा किया है, जिन्हें तुम अल्लाह के सिवा पूजते हो?! बल्कि ये अत्याचारी लोग स्पष्ट रूप से सच्चाई से भटके हुए हैं। क्योंकि वे अपने पालनहार के साथ उनको साझी बनाते हैं, जो कुछ भी पैदा नहीं कर सकते, बल्कि वे स्वयं पैदा किए गए हैं।
आयत 12
وَلَقَدْ ءَاتَيْنَا لُقْمَـٰنَ ٱلْحِكْمَةَ أَنِ ٱشْكُرْ لِلَّهِ ۚ وَمَن يَشْكُرْ فَإِنَّمَا يَشْكُرُ لِنَفْسِهِۦ ۖ وَمَن كَفَرَ فَإِنَّ ٱللَّهَ غَنِىٌّ حَمِيدٌۭ
وَلَقَدْ
और अलबत्ता तहक़ीक़
ءَاتَيْنَا
दी हमने
لُقْمَـٰنَ
लुक़्मान को
ٱلْحِكْمَةَ
हिकमत
أَنِ
ये कि
ٱشْكُرْ
शुक्र करो
لِلَّهِ ۚ
अल्लाह का
وَمَن
और जो
يَشْكُرْ
शुक्र करे
فَإِنَّمَا
तो बेशक
يَشْكُرُ
वो शुक्र करता है
لِنَفْسِهِۦ ۖ
अपने ही नफ़्स के लिए
وَمَن
और जो
كَفَرَ
नाशुक्री करे
فَإِنَّ
तो बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
غَنِىٌّ
बहुत बेनियाज़ है
حَمِيدٌۭ
ख़ूब तारीफ़ वाला है
निश्चय ही हमने लुकमान को तत्वदर्शिता प्रदान की थी कि अल्लाह के प्रति कृतज्ञता दिखलाओ और जो कोई कृतज्ञता दिखलाए, वह अपने ही भले के लिए कृतज्ञता दिखलाता है। और जिसने अकृतज्ञता दिखलाई तो अल्लाह वास्तव में निस्पृह, प्रशंसनीय है
तफ़्सीर:
हमने लुक़मान को धर्म की गहन समझ और सही निर्णय की शक्ति प्रदान की थी और उससे कहा था : (ऐ लुक़मान) अपने पालनहार का शुक्रिया अदा करो कि उसने तुम्हें उसके आज्ञापालन का सामर्थ्य प्रदान किया है। और जो अपने रब का शुक्रिया अदा करेगा, तो उसके शुक्रिया का लाभ उसे ही प्राप्त होगा। अल्लाह को उसके शुक्रिया की कोई आवश्यकता नहीं है। और जिसने अल्लाह की ओर से मिली हुई नेमत का इनकार किया और उसके साथ कुफ़्र किया, तो उसके कुफ़्र का नुक़सान उसे ही होगा और वह अल्लाह को कुछ भी नुकसान नहीं पहुँचाएगा। क्योंकि वह अपनी सारी मख़लूक़ से बेनियाज़ है, हर हाल में प्रशंसनीय है।
आयत 13
وَإِذْ قَالَ لُقْمَـٰنُ لِٱبْنِهِۦ وَهُوَ يَعِظُهُۥ يَـٰبُنَىَّ لَا تُشْرِكْ بِٱللَّهِ ۖ إِنَّ ٱلشِّرْكَ لَظُلْمٌ عَظِيمٌۭ
وَإِذْ
और जब
قَالَ
कहा
لُقْمَـٰنُ
लुक़्मान ने
لِٱبْنِهِۦ
अपने बेटे से
وَهُوَ
जबकि वो
يَعِظُهُۥ
वो नसीहत कर रहा था उसे
يَـٰبُنَىَّ
ऐ मेरे बेटे
لَا
(Do) not
تُشْرِكْ
ना तू शरीक ठहरा
بِٱللَّهِ ۖ
साथ अल्लाह के
إِنَّ
बेशक
ٱلشِّرْكَ
शिर्क
لَظُلْمٌ
यक़ीनन ज़ुल्म है
عَظِيمٌۭ
बहुत बड़ा
याद करो जब लुकमान ने अपने बेटे से, उसे नसीहत करते हुए कहा, "ऐ मेरे बेटे! अल्लाह का साझी न ठहराना। निश्चय ही शिर्क (बहुदेववाद) बहुत बड़ा ज़ुल्म है।"
तफ़्सीर:
और (ऐ रसूल) याद करें, जब लुक़मान ने अपने बेटे से, उसे अच्छे कार्य में रुचि दिलाते हुए और बुरे कार्य से सावधान करते हुए कहा : ऐ मेरे बेटे! अल्लाह के साथ उसके अलावा की इबादत न कर। अल्लाह के साथ किसी अन्य पूज्य की इबादत करना, अपने आप पर बहुत बड़ा अत्याचार है। क्योंकि यह सबसे बड़ा गुनाह है और इसके नतीजे में इनसान सदा जहन्नम में रहने का हक़दार बन जाता है।
आयत 14
وَوَصَّيْنَا ٱلْإِنسَـٰنَ بِوَٰلِدَيْهِ حَمَلَتْهُ أُمُّهُۥ وَهْنًا عَلَىٰ وَهْنٍۢ وَفِصَـٰلُهُۥ فِى عَامَيْنِ أَنِ ٱشْكُرْ لِى وَلِوَٰلِدَيْكَ إِلَىَّ ٱلْمَصِيرُ
وَوَصَّيْنَا
और ताकीद की हमने
ٱلْإِنسَـٰنَ
इन्सान को
بِوَٰلِدَيْهِ
साथ अपने वालिदैन के(एहसान की)
حَمَلَتْهُ
उठाया उसको
أُمُّهُۥ
उसकी माँ ने
وَهْنًا
(in) weakness
عَلَىٰ
upon
وَهْنٍۢ
कमज़ोरी पर कमज़ोरी(सहते हुए)
وَفِصَـٰلُهُۥ
और दूध छुड़ाना हुआ उसका
فِى
(is) in
عَامَيْنِ
दो साल में
أَنِ
कि
ٱشْكُرْ
शुक्र करो
لِى
मेरा
وَلِوَٰلِدَيْكَ
और अपने वालिदैन का
إِلَىَّ
तरफ़ मेरे ही
ٱلْمَصِيرُ
लौटना है
और हमने मनुष्य को उसके अपने माँ-बाप के मामले में ताकीद की है - उसकी माँ ने निढाल होकर उसे पेट में रखा और दो वर्ष उसके दूध छूटने में लगे - कि "मेरे प्रति कृतज्ञ हो और अपने माँ-बाप के प्रति भी। अंततः मेरी ही ओर आना है
तफ़्सीर:
और हमने इनसान को उन चीज़ों में अपने माता-पिता की आज्ञा मानने और उनके साथ सद्व्यवहार करने की ताकीद की है, जिनमें अल्लाह की अवज्ञा नहीं है। उसकी माँ ने कष्ट के बाद कष्ट का सामना करते हुए उसे अपने पेट में रखा और दो साल में उसका स्तनपान छुड़ाया। और हमने उससे कहा : अल्लाह ने तुझे जो नेमतें प्रदान की हैं, उनपर अल्लाह का शुक्रिया अदा कर, फिर अपने माँ-बाप का शुक्रिया अदा कर कि उन्होंने तेरी परवरिश और देखभाल की। सबको मेरी ही ओर लौटकर आना है, फिर मैं हर एक को वह बदला दूँगा जिसका वह हक़दार है।
आयत 15
وَإِن جَـٰهَدَاكَ عَلَىٰٓ أَن تُشْرِكَ بِى مَا لَيْسَ لَكَ بِهِۦ عِلْمٌۭ فَلَا تُطِعْهُمَا ۖ وَصَاحِبْهُمَا فِى ٱلدُّنْيَا مَعْرُوفًۭا ۖ وَٱتَّبِعْ سَبِيلَ مَنْ أَنَابَ إِلَىَّ ۚ ثُمَّ إِلَىَّ مَرْجِعُكُمْ فَأُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
وَإِن
और अगर
جَـٰهَدَاكَ
दोनों कोशिश करें तुम्हारे साथ
عَلَىٰٓ
इस पर
أَن
कि
تُشْرِكَ
तुम शरीक करो
بِى
मेरे साथ
مَا
उसे जो
لَيْسَ
नहीं
لَكَ
तुम्हें
بِهِۦ
जिसका
عِلْمٌۭ
कोई इल्म
فَلَا
तो ना
تُطِعْهُمَا ۖ
तुम इताअत करो उन दोनों की
وَصَاحِبْهُمَا
और साथ रहो उन दोनों के
فِى
in
ٱلدُّنْيَا
दुनिया में
مَعْرُوفًۭا ۖ
भले तरीक़े से
وَٱتَّبِعْ
और पैरवी करो
سَبِيلَ
रास्ते की
مَنْ
उसके जो
أَنَابَ
रुजूअ करे
إِلَىَّ ۚ
मेरी तरफ़
ثُمَّ
फिर
إِلَىَّ
तरफ़ मेरे ही
مَرْجِعُكُمْ
लौटना है तुम्हारा
فَأُنَبِّئُكُم
फिर मैं बताऊँगा तुम्हें
بِمَا
वो जो
كُنتُمْ
थे तुम
تَعْمَلُونَ
तुम अमल करते
किन्तु यदि वे तुझपर दबाव डाले कि तू किसी को मेरे साथ साझी ठहराए, जिसका तुझे ज्ञान नहीं, तो उसकी बात न मानना और दुनिया में उसके साथ भले तरीके से रहना। किन्तु अनुसरण उस व्यक्ति के मार्ग का करना जो मेरी ओर रुजू हो। फिर तुम सबको मेरी ही ओर पलटना है; फिर मैं तुम्हें बता दूँगा जो कुछ तुम करते रहे होगे।"-
तफ़्सीर:
और यदि माता-पिता पूरा ज़ोर लगा दें कि तुम किसी और को अल्लाह का साझी बनाओ, तो इसमें उनकी बात न मानो, क्योंकि सृष्टिकर्ता की अवज्ञा में किसी प्राणी की बात नहीं मानी जा सकती। और दुनिया में उनके साथ सद्व्यवहार, अच्छे संबंध और भलाई के साथ रहो। और उन लोगों के रास्ते पर चलो, जो तौहीद और आज्ञापालन के द्वारा मेरी ओर लौटते हैं। फिर क़ियामत के दिन तुम सभी को अकेले मेरी ही ओर लौटकर आना है, तब मैं तुम्हें बताऊँगा कि तुम दुनिया में क्या किया करते थे और तुम्हें उसका बदला दूँगा।
आयत 16
يَـٰبُنَىَّ إِنَّهَآ إِن تَكُ مِثْقَالَ حَبَّةٍۢ مِّنْ خَرْدَلٍۢ فَتَكُن فِى صَخْرَةٍ أَوْ فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ أَوْ فِى ٱلْأَرْضِ يَأْتِ بِهَا ٱللَّهُ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ لَطِيفٌ خَبِيرٌۭ
يَـٰبُنَىَّ
ऐ मेरे बेटे
إِنَّهَآ
बेशक वो
إِن
अगर
تَكُ
हो वो(शै)
مِثْقَالَ
वज़न बराबर
حَبَّةٍۢ
दाने
مِّنْ
of
خَرْدَلٍۢ
राई के
فَتَكُن
फिर वो हो
فِى
in
صَخْرَةٍ
किसी चट्टान में
أَوْ
या
فِى
in
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों में
أَوْ
या
فِى
in
ٱلْأَرْضِ
ज़मीन में
يَأْتِ
ले आएगा
بِهَا
उसे
ٱللَّهُ ۚ
अल्लाह
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
لَطِيفٌ
बहुत बारीकबीन है
خَبِيرٌۭ
ख़ूब बाख़बर है
"ऐ मेरे बेटे! इसमें सन्देह नहीं कि यदि वह राई के दाने के बराबर भी हो, फिर वह किसी चट्टान के बीच हो या आकाशों में हो या धरती में हो, अल्लाह उसे ला उपस्थित करेगा। निस्संदेह अल्लाह अत्यन्त सूक्ष्मदर्शी, ख़बर रखनेवाला है।
तफ़्सीर:
ऐ मेरे बेटे! निश्चय कोई बुरा या अच्छा काम, चाहे वह कितना भी छोटा क्यों न हो, राई के एक दाने के वज़न के समान हो और वह किसी चट्टान के भीतर हो, जिसे कोई नहीं जानता, या वह आकाशों में या पृथ्वी में किसी भी स्थान पर हो - तो निश्चित रूप से अल्लाह उसे क़ियामत के दिन ले आएगा और बंदे को उसका बदला देगा। निश्चय अल्लाह सूक्ष्मदर्शी है, छोटी से छोटी चीज़ भी उससे छिपी नहीं है, वह उनके तथ्यों और उनके स्थान से पूरी तरह अवगत है।
आयत 17
يَـٰبُنَىَّ أَقِمِ ٱلصَّلَوٰةَ وَأْمُرْ بِٱلْمَعْرُوفِ وَٱنْهَ عَنِ ٱلْمُنكَرِ وَٱصْبِرْ عَلَىٰ مَآ أَصَابَكَ ۖ إِنَّ ذَٰلِكَ مِنْ عَزْمِ ٱلْأُمُورِ
يَـٰبُنَىَّ
ऐ मेरे बेटे
أَقِمِ
क़ायम करो
ٱلصَّلَوٰةَ
नमाज़
وَأْمُرْ
और हुक्म दो
بِٱلْمَعْرُوفِ
नेकी का
وَٱنْهَ
और रोको
عَنِ
from
ٱلْمُنكَرِ
बुराई से
وَٱصْبِرْ
और सब्र करो
عَلَىٰ
उस पर
مَآ
जो
أَصَابَكَ ۖ
पहुँचे तुझे
إِنَّ
बेशक
ذَٰلِكَ
ये है
مِنْ
(is) of
عَزْمِ
the matters requiring determination
ٱلْأُمُورِ
हिम्मत के कामों में से
"ऐ मेरे बेटे! नमाज़ का आयोजन कर और भलाई का हुक्म दे और बुराई से रोक और जो मुसीबत भी तुझपर पड़े उसपर धैर्य से काम ले। निस्संदेह ये उन कामों में से है जो अनिवार्य और ढृढसंकल्प के काम है
तफ़्सीर:
ऐ मेरे बेटे! नमाज़ को उसके संपूर्ण तरीक़े से अदा करके क़ायम कर, भलाई का आदेश दे और बुराई से रोक, तथा इस राह में तुझे जो भी कठिनाई का सामना हो, उसपर धैर्य रख। तुझे यहाँ जिस चीज़ का आदेश दिया गया है, उसका पालन करना तेरे लिए ज़रूरी है। इसलिए इसमें तेरे लिए चयन का कोई विकल्प नहीं है।
आयत 18
وَلَا تُصَعِّرْ خَدَّكَ لِلنَّاسِ وَلَا تَمْشِ فِى ٱلْأَرْضِ مَرَحًا ۖ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يُحِبُّ كُلَّ مُخْتَالٍۢ فَخُورٍۢ
وَلَا
और ना
تُصَعِّرْ
तुम मोड़ो
خَدَّكَ
अपना गाल
لِلنَّاسِ
लोगों से
وَلَا
और ना
تَمْشِ
तुम चलो
فِى
in
ٱلْأَرْضِ
ज़मीन में
مَرَحًا ۖ
अकड़ कर/इतरा कर
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
لَا
(does) not
يُحِبُّ
नहीं वो पसंद करता
كُلَّ
हर
مُخْتَالٍۢ
ख़ुद पसंद
فَخُورٍۢ
फ़ख़्र जताने वाले को
"और लोगों से अपना रूख़ न फेर और न धरती में इतराकर चल। निश्चय ही अल्लाह किसी अहंकारी, डींग मारनेवाले को पसन्द नहीं करता
तफ़्सीर:
और अहंकार के कारण लोगों से अपना मुँह न फेर तथा धरती पर अकड़कर और खुशी से खुद को निहारते हुए न चल। निश्चय अल्लाह अकड़कर चलने वाले और मिली हुई नेमतों पर गर्व करने वाले से प्रेम नहीं करता, जो उनके कारण लोगों के सामने गर्व करता हैं और उनपर अल्लाह का शुक्रिया अदा नहीं करता है।
आयत 19
وَٱقْصِدْ فِى مَشْيِكَ وَٱغْضُضْ مِن صَوْتِكَ ۚ إِنَّ أَنكَرَ ٱلْأَصْوَٰتِ لَصَوْتُ ٱلْحَمِيرِ
وَٱقْصِدْ
और मयाना रवी इख़्तियार करो
فِى
in
مَشْيِكَ
अपनी चाल में
وَٱغْضُضْ
और पस्त रखो
مِن
[of]
صَوْتِكَ ۚ
अपनी आवाज़ को
إِنَّ
बेशक
أَنكَرَ
सबसे ज़्यादा नापसंदीदा
ٱلْأَصْوَٰتِ
आवाज़ों में से
لَصَوْتُ
अलबत्ता आवाज़ है
ٱلْحَمِيرِ
गधे की
"और अपनी चाल में सहजता और संतुलन बनाए रख और अपनी आवाज़ धीमी रख। निस्संदेह आवाज़ों में सबसे बुरी आवाज़ गधों की आवाज़ होती है।"
तफ़्सीर:
अपनी चाल में बहुत तेज़ चलने और धीरे-धीरे चलने के बीच ऐसी मध्यम चाल अपनाओ, जिससे संजीदगी का पता चले। तथा अपनी आवाज़ कुछ नीची रखो। इतनी ऊँची न करो कि दूसरों को कष्ट हो। सबसे बुरी आवाज़ गधों की आवाज़ है, क्योंकि उनकी आवाजें ऊँची होती हैं।
आयत 20
أَلَمْ تَرَوْا۟ أَنَّ ٱللَّهَ سَخَّرَ لَكُم مَّا فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَمَا فِى ٱلْأَرْضِ وَأَسْبَغَ عَلَيْكُمْ نِعَمَهُۥ ظَـٰهِرَةًۭ وَبَاطِنَةًۭ ۗ وَمِنَ ٱلنَّاسِ مَن يُجَـٰدِلُ فِى ٱللَّهِ بِغَيْرِ عِلْمٍۢ وَلَا هُدًۭى وَلَا كِتَـٰبٍۢ مُّنِيرٍۢ
أَلَمْ
क्या नहीं
تَرَوْا۟
तुमने देखा
أَنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह ने
سَخَّرَ
मुसख़्खर किया
لَكُم
तुम्हारे लिए
مَّا
जो कुछ
فِى
(is) in
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों में है
وَمَا
और जो कुछ
فِى
(is) in
ٱلْأَرْضِ
ज़मीन में है
وَأَسْبَغَ
और उसने तमाम कर दीं
عَلَيْكُمْ
तुम पर
نِعَمَهُۥ
नेअमतें अपनी
ظَـٰهِرَةًۭ
ज़ाहिरी
وَبَاطِنَةًۭ ۗ
और बातिनी
وَمِنَ
But of
ٱلنَّاسِ
और लोगों में से कोई है
مَن
जो
يُجَـٰدِلُ
झगड़ता है
فِى
about
ٱللَّهِ
अल्लाह के बारे में
بِغَيْرِ
बग़ैर
عِلْمٍۢ
इल्म के
وَلَا
और बग़ैर
هُدًۭى
हिदायत के
وَلَا
और बग़ैर
كِتَـٰبٍۢ
किताबे
مُّنِيرٍۢ
रौशन के
क्या तुमने देखा नहीं कि अल्लाह ने, जो कुछ आकाशों में और जो कुछ धरती में है, सबको तुम्हारे काम में लगा रखा है और उसने तुमपर अपनी प्रकट और अप्रकट अनुकम्पाएँ पूर्ण कर दी है? इसपर भी कुछ लोग ऐसे है जो अल्लाह के विषय में बिना किसी ज्ञान, बिना किसी मार्गदर्शन और बिना किसी प्रकाशमान किताब के झगड़ते है
तफ़्सीर:
(ऐ लोगो!) क्या तुमने नहीं देखा कि अल्लाह ने तुम्हारे लिए आकाशों में जो कुछ सूर्य, चंद्रमा और ग्रहें हैं, उनसे लाभ उठाना आसान बना दिया है, तथा धरती में जो जानवर, पेड़ और पौधे हैं, उन्हें भी (उपयोग में लाना) तुम्हारे लिए आसान बना दिया है। और तुमपर अपनी नेमतें पूरी कर दी हैं, चाहे जो स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं, जैसे कि छवि की सुंदरता और अच्छे रूप, तथा जो अप्रत्यक्ष और गुप्त हैं, जैसे कि विवेक और ज्ञान। इन नेमतों की उपस्थिति के बावजूद, कुछ लोग ऐसे हैं, जो अल्लाह की तौहीद (एकेश्वरवाद) के बारे में अल्लाह की वह़्य (प्रकाशना) पर आधारित ज्ञान, प्रबुद्ध बुद्धि और अल्लाह की ओर से उतरने वाली किसी स्पष्ट किताब के बिना ही विवाद करते हैं।
आज की ज़िंदगी में सबक़
लुक़मान की अपने बेटे को नसीहतों (शिर्क से बचना, वालिदैन से नेकी) का ज़िक्र है। यह सबक हमें सिखाता है कि औलाद की तरबियत में सबसे पहले तौहीद और माता-पिता का अदब सिखाना चाहिए।
आयत 21
وَإِذَا قِيلَ لَهُمُ ٱتَّبِعُوا۟ مَآ أَنزَلَ ٱللَّهُ قَالُوا۟ بَلْ نَتَّبِعُ مَا وَجَدْنَا عَلَيْهِ ءَابَآءَنَآ ۚ أَوَلَوْ كَانَ ٱلشَّيْطَـٰنُ يَدْعُوهُمْ إِلَىٰ عَذَابِ ٱلسَّعِيرِ
وَإِذَا
और जब
قِيلَ
कहा जाता है
لَهُمُ
उन्हें
ٱتَّبِعُوا۟
पैरवी करो
مَآ
उसकी जो
أَنزَلَ
नाज़िल किया
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
قَالُوا۟
वो कहते हैं
بَلْ
बल्कि
نَتَّبِعُ
हम पैरवी करेंगे
مَا
उसकी जो
وَجَدْنَا
पाया हमने
عَلَيْهِ
उस पर
ءَابَآءَنَآ ۚ
अपने आबा ओ अजदाद को
أَوَلَوْ
क्या भला अगर
كَانَ
हो
ٱلشَّيْطَـٰنُ
शैतान
يَدْعُوهُمْ
वो बुलाता उन्हें
إِلَىٰ
to
عَذَابِ
तरफ़ अज़ाब के
ٱلسَّعِيرِ
भड़कती हुई आग के
अब जब उनसे कहा जाता है कि "उस चीज़ का अनुसरण करो जो अल्लाह न उतारी है," तो कहते है, "नहीं, बल्कि हम तो उस चीज़ का अनुसरण करेंगे जिसपर हमने अपने बाप-दादा को पाया है।" क्या यद्यपि शैतान उनको भड़कती आग की यातना की ओर बुला रहा हो तो भी?
तफ़्सीर:
और जब इन अल्लाह के एकेश्वरवाद के बारे में बहस करने वाले लोगों से कहा जाता है : अल्लाह ने अपने रसूल पर जो वह़्य (प्रकाशना) उतारी है, उसका अनुसरण करो, तो वे कहते हैं : हम उसका अनुसरण नहीं करेंगे। बल्कि हम तो उसका अनुसरण करेंगे, जिसपर हमने अपने पूर्वजों को पाया है कि वे हमारे देवताओं की पूजा करते थे। क्या वे अपने पूर्वजों का अनुसरण करेंगे, भले ही शैतान उन्हें (मूर्तियों की पूजा के द्वारा पथभ्रष्ट करके) क़ियामत के दिन भड़कती आग की यातना की ओर बुला रहा हो?!
आयत 22
۞ وَمَن يُسْلِمْ وَجْهَهُۥٓ إِلَى ٱللَّهِ وَهُوَ مُحْسِنٌۭ فَقَدِ ٱسْتَمْسَكَ بِٱلْعُرْوَةِ ٱلْوُثْقَىٰ ۗ وَإِلَى ٱللَّهِ عَـٰقِبَةُ ٱلْأُمُورِ
۞ وَمَن
और जो कोई
يُسْلِمْ
सुपुर्द कर दे
وَجْهَهُۥٓ
चेहरा अपना
إِلَى
to
ٱللَّهِ
तरफ़ अल्लाह के
وَهُوَ
और वो
مُحْسِنٌۭ
मोहसिन भी हो
فَقَدِ
तो यक़ीनन
ٱسْتَمْسَكَ
उसने थाम लिया
بِٱلْعُرْوَةِ
कड़ा
ٱلْوُثْقَىٰ ۗ
मज़बूत
وَإِلَى
And to
ٱللَّهِ
और तरफ़ अल्लाह ही के
عَـٰقِبَةُ
अंजाम है
ٱلْأُمُورِ
सब कामों का
जो कोई आज्ञाकारिता के साथ अपना रुख़ अल्लाह की ओर करे, और वह उत्तमकर भी हो तो उसने मज़बूत सहारा थाम लिया। सारे मामलों की परिणति अल्लाह ही की ओर है
तफ़्सीर:
जो व्यक्ति अल्लाह की ओर रुख कर ले, अपनी इबादत को उसी के लिए विशुद्ध करके और अपने काम को बेहतर बनाकर, तो उसने सबसे मज़बूत चीज़ थाम ली है, जिसे कोई मोक्ष की आशा रखने वाला व्यक्ति थाम सकता है। क्योंकि उसे उस चीज़ के टूटने का भय नहीं होता है, जो उसने पकड़ रखी है। और केवल अल्लाह ही की ओर समस्त मामलों अंजाम और उनका लौटना है, फिर वह हर एक को वह बदला देगा जिसका वह हक़दार है।
आयत 23
وَمَن كَفَرَ فَلَا يَحْزُنكَ كُفْرُهُۥٓ ۚ إِلَيْنَا مَرْجِعُهُمْ فَنُنَبِّئُهُم بِمَا عَمِلُوٓا۟ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ عَلِيمٌۢ بِذَاتِ ٱلصُّدُورِ
وَمَن
और जिसने
كَفَرَ
कुफ़्र किया
فَلَا
पस ना
يَحْزُنكَ
ग़मगीन करे आपको
كُفْرُهُۥٓ ۚ
कुफ़्र उसका
إِلَيْنَا
तरफ़ हमारे ही
مَرْجِعُهُمْ
लौटना है उनका
فَنُنَبِّئُهُم
फिर हम बताऐंगे उन्हें
بِمَا
वो जो
عَمِلُوٓا۟ ۚ
उन्होंने अमल किए
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
عَلِيمٌۢ
ख़ूब जानने वाला है
بِذَاتِ
of what
ٱلصُّدُورِ
सीनों के (भेद)
और जिस किसी ने इनकार किया तो उसका इनकार तुम्हें शोकाकुल न करे। हमारी ही ओर तो उन्हें पलटकर आना है। फिर जो कुछ वे करते रहे होंगे, उससे हम उन्हें अवगत करा देंगे। निस्संदेह अल्लाह सीनों की बात तक जानता है
तफ़्सीर:
तथा जिसने कुफ़्र किया, तो (ऐ रसूल) उसका कुफ़्र आपको शोकाकुल न करे। क़ियामत के दिन अकेले हमारी ही ओर उनको लौटना है। फिर हम उन्हें बताएँगे, जो कुछ उन्होंने दुनिया में पाप किए थे और उन्हें उनका बदला देंगे। निःसंदेह अल्लाह सीनों की बातों को ख़ूब जानने वाला है। इनमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है
आयत 24
نُمَتِّعُهُمْ قَلِيلًۭا ثُمَّ نَضْطَرُّهُمْ إِلَىٰ عَذَابٍ غَلِيظٍۢ
نُمَتِّعُهُمْ
हम फ़ायदा देंगे उन्हें
قَلِيلًۭا
थोड़ा सा
ثُمَّ
फिर
نَضْطَرُّهُمْ
हम मजबूर करेंगे उन्हें
إِلَىٰ
to
عَذَابٍ
तरफ़ अज़ाब
غَلِيظٍۢ
सख़्त के
हम उन्हें थोड़ा मज़ा उड़ाने देंगे। फिर उन्हें विवश करके एक कठोर यातना की ओर खींच ले जाएँगे
तफ़्सीर:
हम उन्हें इस दुनिया में थोड़े समय के लिए सुख-सामग्री प्रदान कर लाभ उठाने का अवसर देंगे, फिर उन्हें क़ियामत के दिन घोर यातना की ओर विवश कर देंगे, जो जहन्नम की यातना है।
आयत 25
وَلَئِن سَأَلْتَهُم مَّنْ خَلَقَ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ لَيَقُولُنَّ ٱللَّهُ ۚ قُلِ ٱلْحَمْدُ لِلَّهِ ۚ بَلْ أَكْثَرُهُمْ لَا يَعْلَمُونَ
وَلَئِن
और अलबत्ता अगर
سَأَلْتَهُم
पूछें आप उनसे
مَّنْ
किसने
خَلَقَ
पैदा किया
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों
وَٱلْأَرْضَ
और ज़मीन को
لَيَقُولُنَّ
अलबत्ता वो ज़रूर कहेंगे
ٱللَّهُ ۚ
अल्लाह ने
قُلِ
कह दीजिए
ٱلْحَمْدُ
सब तारीफ़
لِلَّهِ ۚ
अल्लाह के लिए है
بَلْ
बल्कि
أَكْثَرُهُمْ
अक्सर उनके
لَا
(do) not
يَعْلَمُونَ
वो इल्म नहीं रखते
यदि तुम उनसे पूछो कि "आकाशों और धरती को किसने पैदा किया?" तो वे अवश्य कहेंगे कि "अल्लाह ने।" कहो, "प्रशंसा भी अल्लाह के लिए है।" वरन उनमें से अधिकांश जानते नहीं
तफ़्सीर:
यदि (ऐ रसूल) आप इन मुश्रिकों से पूछें : आकाशों को किसने पैदा किया और धरती किसने बनाई? तो वे अवश्य यही कहेंगे : उन्हें अल्लाह ने पैदा किया है। उनसे कह दें : हर प्रकार की प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जिसने तुम्हारे ऊपर तर्क को प्रकट कर दिया। लेकिन उनमें से अधिकतर लोग अपनी अज्ञानता के कारण यह नहीं जानते कि प्रशंसा के पात्र कौन है।
आयत 26
لِلَّهِ مَا فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلْغَنِىُّ ٱلْحَمِيدُ
لِلَّهِ
अल्लाह ही के लिए है
مَا
जो कुछ
فِى
(is) in
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों में है
وَٱلْأَرْضِ ۚ
और ज़मीन में
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
هُوَ
वो ही है
ٱلْغَنِىُّ
बहुत बेनियाज़
ٱلْحَمِيدُ
ख़ूब तारीफ़ वाला
आकाशों और धरती में जो कुछ है अल्लाह ही का है। निस्संदेह अल्लाह ही निस्पृह, स्वतः प्रशंसित है
तफ़्सीर:
केवल अल्लाह ही का है, जो कुछ आकाशों में और जो कुछ धरती में है। वही उनका पैदा करने वाला, वही उनका मालिक और वही उनका प्रबंध करने वाला है। निःसंदेह अल्लाह अपने सभी प्राणियों से बेनियाज़, दुनिया एवं आख़िरत में सभी प्रशंसा के योग्य है।
आयत 27
وَلَوْ أَنَّمَا فِى ٱلْأَرْضِ مِن شَجَرَةٍ أَقْلَـٰمٌۭ وَٱلْبَحْرُ يَمُدُّهُۥ مِنۢ بَعْدِهِۦ سَبْعَةُ أَبْحُرٍۢ مَّا نَفِدَتْ كَلِمَـٰتُ ٱللَّهِ ۗ إِنَّ ٱللَّهَ عَزِيزٌ حَكِيمٌۭ
وَلَوْ
और अगर
أَنَّمَا
बेशक जो भी
فِى
(is) in
ٱلْأَرْضِ
ज़मीन में
مِن
of
شَجَرَةٍ
दरख़्त हैं
أَقْلَـٰمٌۭ
क़लमें हों
وَٱلْبَحْرُ
और समुन्दर (स्याही हो)
يَمُدُّهُۥ
बढ़ाऐं उसको
مِنۢ
after it
بَعْدِهِۦ
बाद उसके
سَبْعَةُ
सात
أَبْحُرٍۢ
(और) समुन्दर
مَّا
ना
نَفِدَتْ
ख़त्म होंगे
كَلِمَـٰتُ
कलिमात
ٱللَّهِ ۗ
अल्लाह के
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
عَزِيزٌ
बहुत ज़बरदस्त है
حَكِيمٌۭ
ख़ूब हिकमत वाला है
धरती में जितने वृक्ष है, यदि वे क़लम हो जाएँ और समुद्र उसकी स्याही हो जाए, उसके बाद सात और समुद्र हों, तब भी अल्लाह के बोल समाप्त न हो सकेंगे। निस्संदेह अल्लाह अत्यन्त प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है
तफ़्सीर:
अगर धरती के ऊपर जितने पेड़ हैं, सबको काटकर क़लम बना लिया जाए और समुद्र को इसके लिए स्याही बना दिया जाए, भले ही उसमें सात समुद्र और बढ़ा दिए जाएँ, तो अल्लाह के शब्द समाप्त नहीं होंगे, क्योंकि वे अनंत हैं। निःसंदेह अल्लाह अत्यंत प्रभुत्वशाली है, उसपर किसी का ज़ोर नहीं चलता, वह अपनी रचना और प्रबंधन में हिकमत वाला है।
आयत 28
مَّا خَلْقُكُمْ وَلَا بَعْثُكُمْ إِلَّا كَنَفْسٍۢ وَٰحِدَةٍ ۗ إِنَّ ٱللَّهَ سَمِيعٌۢ بَصِيرٌ
مَّا
नहीं
خَلْقُكُمْ
पैदा करना तुम्हारा
وَلَا
और ना
بَعْثُكُمْ
दोबारा उठना तुम्हारा
إِلَّا
मगर
كَنَفْسٍۢ
as a soul
وَٰحِدَةٍ ۗ
एक जान की तरह
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
سَمِيعٌۢ
ख़ूब सुनने वाला है
بَصِيرٌ
ख़ूब देखने वाला है
तुम सबका पैदा करना और तुम सबका जीवित करके पुनः उठाना तो बस ऐसा है, जैसे एक जीव का। अल्लाह तो सब कुछ सुनता, देखता है
तफ़्सीर:
(ऐ लोगो) तुम्हें पैदा करना और क़ियामत के दिन हिसाब और बदला के लिए पुनर्जीवित करना ऐसे ही आसान है, जैसे एक जीव को पैदा करना और मरणोपरांत उसे पुनर्जीवित करके उठाना आसान है। निःसंदेह अल्लाह सब कुछ सुनने वाला है, एक आवाज़ का सुनना उसे दूसरी आवाज़ के सुनने से ग़ाफ़िल नहीं करता है। वह सब कुछ देखने वाला है, एक चीज़ का देखना उसे दूसरी चीज़ को देखने से ग़ाफ़िल नहीं करता है। बिलकुल इसी तरह एक प्राणी को पैदा करना या उसे मरणोपरांत पुनर्जीवित करना उसे दूसरे प्राणी को पैदा करने और उसे मरणोपरांत पुनर्जीवित करने से ग़ाफ़िल नहीं करता है।
आयत 29
أَلَمْ تَرَ أَنَّ ٱللَّهَ يُولِجُ ٱلَّيْلَ فِى ٱلنَّهَارِ وَيُولِجُ ٱلنَّهَارَ فِى ٱلَّيْلِ وَسَخَّرَ ٱلشَّمْسَ وَٱلْقَمَرَ كُلٌّۭ يَجْرِىٓ إِلَىٰٓ أَجَلٍۢ مُّسَمًّۭى وَأَنَّ ٱللَّهَ بِمَا تَعْمَلُونَ خَبِيرٌۭ
أَلَمْ
क्या नहीं
تَرَ
आपने देखा
أَنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
يُولِجُ
वो दाख़िल करता है
ٱلَّيْلَ
रात को
فِى
into
ٱلنَّهَارِ
दिन में
وَيُولِجُ
और वो दाख़िल करता है
ٱلنَّهَارَ
दिन को
فِى
into
ٱلَّيْلِ
रात में
وَسَخَّرَ
और उसने मुसख़्ख़र कर दिया
ٱلشَّمْسَ
सूरज
وَٱلْقَمَرَ
और चाँद को
كُلٌّۭ
हर एक
يَجْرِىٓ
चल रहा है
إِلَىٰٓ
for
أَجَلٍۢ
a term
مُّسَمًّۭى
एक मुक़र्रर वक़्त तक
وَأَنَّ
और बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
بِمَا
उससे जो
تَعْمَلُونَ
तुम अमल करते हो
خَبِيرٌۭ
ख़ूब बाख़बर है
क्या तुमने देखा नहीं कि अल्लाह रात को दिन में प्रविष्ट करता है और दिन को रात में प्रविष्ट करता है। उसने सूर्य और चन्द्रमा को काम में लगा रखा है? प्रत्येक एक नियत समय तक चला जा रहा है और इसके साथ यह कि जो कुछ भी तुम करते हो, अल्लाह उसकी पूरी ख़बर रखता है
तफ़्सीर:
क्या तुमने नहीं देखा कि अल्लाह दिन को बढ़ाने के लिए रात को कम करता है, और दिन से घटाकर रात को बढ़ाता है, तथा उसने सूर्य और चंद्रमा के मार्ग निर्धारित कर दिए; क्योंकि प्रत्येक एक निर्दिष्ट अवधि तक अपनी कक्षा में आगे बढ़ता है। और यह कि अल्लाह तुम्हारे कर्मों से पूरी तरह सूचित है, उससे तुम्हारा कोई काम छिपा नहीं है और वह तुम्हें उनका बदला देगा।
आयत 30
ذَٰلِكَ بِأَنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلْحَقُّ وَأَنَّ مَا يَدْعُونَ مِن دُونِهِ ٱلْبَـٰطِلُ وَأَنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلْعَلِىُّ ٱلْكَبِيرُ
ذَٰلِكَ
ये
بِأَنَّ
बवजह उसके कि
ٱللَّهَ
अल्लाह
هُوَ
वो ही है
ٱلْحَقُّ
हक़
وَأَنَّ
और बेशक
مَا
जिसे
يَدْعُونَ
वो पुकारते हैं
مِن
besides Him
دُونِهِ
उसके सिवा
ٱلْبَـٰطِلُ
बातिल है
وَأَنَّ
और बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
هُوَ
वो ही है
ٱلْعَلِىُّ
बुलन्दतर
ٱلْكَبِيرُ
बहुत बड़ा
यह सब कुछ इस कारण से है कि अल्लाह ही सत्य है और यह कि उसे छोड़कर जिनको वे पुकारते है, वे असत्य है। और यह कि अल्लाह ही सर्वोच्च, महान है
तफ़्सीर:
यह प्रबंधन और तक़दीर इस बात की गवाही देती है कि अकेला अल्लाह ही सत्य है। चुनाँचे वह अपने अस्तित्व और अपने गुणों और कार्यों में सत्य है।और उसे छोड़कर मुश्रिक लोग जिसे पूजते हैं, वह असत्य है, उसका कोई आधार नहीं है। और यह कि अल्लाह अपने अस्तित्व, अपनी प्रबलता और शक्ति के साथ अपने समस्त प्राणियों पर सर्वोच्च है, जिससे ऊँचा कोई नहीं, जो हर चीज़ से बड़ा है।
आज की ज़िंदगी में सबक़
तवाज़ो, दरमियानी चाल और आवाज़ पस्त रखने की नसीहत का ज़िक्र है। यह हमें सिखाता है कि तकब्बुर से चलना और ऊंची आवाज़ में बात करना अच्छे किरदार की निशानी नहीं, नर्मी अपनानी चाहिए।
आयत 31
أَلَمْ تَرَ أَنَّ ٱلْفُلْكَ تَجْرِى فِى ٱلْبَحْرِ بِنِعْمَتِ ٱللَّهِ لِيُرِيَكُم مِّنْ ءَايَـٰتِهِۦٓ ۚ إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَـٰتٍۢ لِّكُلِّ صَبَّارٍۢ شَكُورٍۢ
أَلَمْ
क्या नहीं
تَرَ
आपने देखा
أَنَّ
बेशक
ٱلْفُلْكَ
कश्तियाँ
تَجْرِى
चलती हैं
فِى
through
ٱلْبَحْرِ
समुन्दर में
بِنِعْمَتِ
साथ नेअमत के
ٱللَّهِ
अल्लाह की
لِيُرِيَكُم
ताकि वो दिखाए तुम्हें
مِّنْ
of
ءَايَـٰتِهِۦٓ ۚ
अपनी निशानियों में से
إِنَّ
यक़ीनन
فِى
in
ذَٰلِكَ
उसमें
لَـَٔايَـٰتٍۢ
अलबत्ता निशानियाँ हैं
لِّكُلِّ
वास्ते हर
صَبَّارٍۢ
बहुत सब्र करने वाले
شَكُورٍۢ
बहुत शुक्र गुज़ार के
क्या तुमने देखा नहीं कि नौका समुद्र में अल्लाह के अनुग्रह से चलती है, ताकि वह तुम्हें अपनी कुछ निशानियाँ दिखाए। निस्संदेह इसमें प्रत्येक धैर्यवान, कृतज्ञ के लिए निशानियाँ है
तफ़्सीर:
क्या तुमने नहीं देखा कि समुद्र में नावें अल्लाह की दया और उसके वशीभूत करने से चलती हैं, ताकि वह (ऐ लोगो!) तुम्हें अपनी शक्ति और दया को दर्शाने वाली निशानियाँ दिखाए। निःसंदेह इसमें हर उस व्यक्ति के लिए अल्लाह की शक्ति की निशानियाँ हैं, जो विपत्तियों से ग्रस्त होने पर बहुत धैर्य रखने वाला, नेमतों के प्राप्त होने पर बहुत आभार प्रकट करने वाला है।
आयत 32
وَإِذَا غَشِيَهُم مَّوْجٌۭ كَٱلظُّلَلِ دَعَوُا۟ ٱللَّهَ مُخْلِصِينَ لَهُ ٱلدِّينَ فَلَمَّا نَجَّىٰهُمْ إِلَى ٱلْبَرِّ فَمِنْهُم مُّقْتَصِدٌۭ ۚ وَمَا يَجْحَدُ بِـَٔايَـٰتِنَآ إِلَّا كُلُّ خَتَّارٍۢ كَفُورٍۢ
وَإِذَا
और जब
غَشِيَهُم
छा जाती है उन पर
مَّوْجٌۭ
एक मौज
كَٱلظُّلَلِ
सायबानों की तरह
دَعَوُا۟
वो पुकारते हैं
ٱللَّهَ
अल्लाह को
مُخْلِصِينَ
ख़ालिस करने वाले हो कर
لَهُ
उसके लिए
ٱلدِّينَ
दीन को
فَلَمَّا
तो जब
نَجَّىٰهُمْ
वो निजात देता है उन्हें
إِلَى
to
ٱلْبَرِّ
तरफ़ ख़ुशकी के
فَمِنْهُم
तो उनमें से बाज़
مُّقْتَصِدٌۭ ۚ
सीधी राह पर क़ायम रहने वाले हैं
وَمَا
और नहीं
يَجْحَدُ
इन्कार करता
بِـَٔايَـٰتِنَآ
हमारी आयात का
إِلَّا
मगर
كُلُّ
हर
خَتَّارٍۢ
बहुत अहद शिकन
كَفُورٍۢ
इन्तिहाई नाशुक्रा
और जब कोई मौज छाया-छत्रों की तरह उन्हें ढाँक लेती है, तो वे अल्लाह को उसी के लिए अपने निष्ठाभाव के विशुद्ध करते हुए पुकारते है, फिर जब वह उन्हें बचाकर स्थल तक पहुँचा देता है, तो उनमें से कुछ लोग संतुलित मार्ग पर रहते है। (अधिकांश तो पुनः पथभ्रष्ट हो जाते है।) हमारी निशानियों का इनकार तो बस प्रत्येक वह व्यक्ति करता है जो विश्वासघाती, कृतध्न हो
तफ़्सीर:
जब उन्हें हर तरफ से पहाड़ों और बादलों की तरह लहरें घेर लेती हैं, तो वे अकेले अल्लाह ही को पुकारते हैं, इस हाल में कि दुआ और इबादत को उसी के लिए विशुद्ध करने वाले होते हैं। फिर जब अल्लाह उनकी दुआ स्वीकार कर लेता है और उन्हें बचाकर थल तक पहुँचा देता है और डूबने से सुरक्षित रखता है, तो उनमें से कुछ लोग मध्यम-मार्ग वाले होते हैं, जो आवश्यक आभार को आदर्श तरीक़े से पूरा नहीं करते हैं। और उनमें से कुछ लोग अल्लाह की नेमत का इनकार करने वाले होते हैं। और हमारी आयतों का इनकार वही करता है, जो बड़ा विश्वासघाती है (जैसे कि यह व्यक्ति है जिसने अल्लाह से वादा किया था कि यदि उसे बचा लिया, तो वह अवश्य उसका शुक्रिया अदा करने वालों में से हो जाएगा), तथा जो अल्लाह की नेमतों के प्रति बड़ा कृतघ्न है, वह अपने उस पालनहार का आभारी नहीं होता है, जिसने उनके साथ उसपर अनुग्रह किया है।
आयत 33
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ ٱتَّقُوا۟ رَبَّكُمْ وَٱخْشَوْا۟ يَوْمًۭا لَّا يَجْزِى وَالِدٌ عَن وَلَدِهِۦ وَلَا مَوْلُودٌ هُوَ جَازٍ عَن وَالِدِهِۦ شَيْـًٔا ۚ إِنَّ وَعْدَ ٱللَّهِ حَقٌّۭ ۖ فَلَا تَغُرَّنَّكُمُ ٱلْحَيَوٰةُ ٱلدُّنْيَا وَلَا يَغُرَّنَّكُم بِٱللَّهِ ٱلْغَرُورُ
يَـٰٓأَيُّهَا
O
ٱلنَّاسُ
ऐ लोगों
ٱتَّقُوا۟
डरो
رَبَّكُمْ
अपने रब से
وَٱخْشَوْا۟
और डरो
يَوْمًۭا
उस दिन से
لَّا
not
يَجْزِى
ना काम आएगा
وَالِدٌ
कोई बाप
عَن
[for]
وَلَدِهِۦ
अपने बच्चे के
وَلَا
और ना ही
مَوْلُودٌ
कोई बच्चा
هُوَ
वो
جَازٍ
काम आने वाला है
عَن
[for]
وَالِدِهِۦ
अपने बाप की तरफ़ से
شَيْـًٔا ۚ
कुछ भी
إِنَّ
यक़ीनन
وَعْدَ
वादा
ٱللَّهِ
अल्लाह का
حَقٌّۭ ۖ
सच्चा है
فَلَا
तो ना
تَغُرَّنَّكُمُ
हरगिज़ धोके में डाले तुम्हें
ٱلْحَيَوٰةُ
ज़िन्दगी
ٱلدُّنْيَا
दुनिया की
وَلَا
और ना
يَغُرَّنَّكُم
हरगिज़ धोके में डाले तुम्हें
بِٱللَّهِ
अल्लाह के बारे में
ٱلْغَرُورُ
बड़ा धोके बाज़
ऐ लोगों! अपने रब का डर रखो और उस दिन से डरो जब न कोई बाप अपनी औलाद की ओर से बदला देगा और न कोई औलाद ही अपने बाप की ओर से बदला देनेवाली होगी। निश्चय ही अल्लाह का वादा सच्चा है। अतः सांसारिक जीवन कदापि तुम्हें धोखे में न डाले। और न अल्लाह के विषय में वह धोखेबाज़ तुम्हें धोखें में डाले
तफ़्सीर:
ऐ लोगो! अपने रब से, उसके आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से दूर रहकर, डरो, और उस दिन की यातना से डरो, जिस दिन पिता न अपनी संतान के कुछ काम आएगा और न संतान अपने पिता के कुछ काम आएगी। निश्चय अल्लाह का क़ियामत के दिन बदला देने का वादा पक्का है और अपरिहार्य रूप से घटित होने वाला है। अतः दुनिया का जीवन और उसकी वासनाएँ और विचलित करने वाली चीज़ें तुम्हें धोखे में न डालें, तथा अल्लाह के तुम्हारे प्रति सहनशीलता से काम लेने और तुमसे यातना को विलंबित करने के कारण शैतान तुम्हें धोखा न देने पाए।
आयत 34
إِنَّ ٱللَّهَ عِندَهُۥ عِلْمُ ٱلسَّاعَةِ وَيُنَزِّلُ ٱلْغَيْثَ وَيَعْلَمُ مَا فِى ٱلْأَرْحَامِ ۖ وَمَا تَدْرِى نَفْسٌۭ مَّاذَا تَكْسِبُ غَدًۭا ۖ وَمَا تَدْرِى نَفْسٌۢ بِأَىِّ أَرْضٍۢ تَمُوتُ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ عَلِيمٌ خَبِيرٌۢ
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
عِندَهُۥ
उसके पास
عِلْمُ
इल्म है
ٱلسَّاعَةِ
क़यामत का
وَيُنَزِّلُ
और वो बरसाता है
ٱلْغَيْثَ
बारिश को
وَيَعْلَمُ
और वो जानता है
مَا
जो कुछ
فِى
(is) in
ٱلْأَرْحَامِ ۖ
रहमों में है
وَمَا
और नहीं
تَدْرِى
जानता
نَفْسٌۭ
कोई नफ़्स
مَّاذَا
क्या कुछ
تَكْسِبُ
वो कमाई करेगा
غَدًۭا ۖ
कल
وَمَا
और नहीं
تَدْرِى
जानता
نَفْسٌۢ
कोई नफ़्स
بِأَىِّ
कि किस
أَرْضٍۢ
ज़मीन पर
تَمُوتُ ۚ
वो मरेगा
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
عَلِيمٌ
बहुत इल्म वाला है
خَبِيرٌۢ
ख़ूब बाख़बर है
निस्संदेह उस घड़ी का ज्ञान अल्लाह ही के पास है। वही मेंह बरसाता है और जानता है जो कुछ गर्भाशयों में होता है। कोई क्यक्ति नहीं जानता कि कल वह क्या कमाएगा और कोई व्यक्ति नहीं जानता है कि किस भूभाग में उसक मृत्यु होगी। निस्संदेह अल्लाह जाननेवाला, ख़बर रखनेवाला है
तफ़्सीर:
निःसंदेह अकेले अल्लाह ही के पास क़ियामत का ज्ञान है; चुनाँचे वह जानता है कि वह कब आएगी। तथा वह जब चाहे बारिश बरसाता है। और वह जानता है कि गर्भाशयों में क्या है, क्या वह नर है या मादा?! सौभाग्यशाली है या दुर्भाग्यशाली?! तथा कोई प्राणी नहीं जानता कि वह कल अच्छा या बुरा क्या करेगा, और न कोई प्राणी यह जानता है कि किस धरती में उसकी मौत आएगी। बल्कि यह सब केवल अल्लाह ही जानता है। निःसंदेह अल्लाह इन सभी बातों को जानने वाला और इनकी खबर रखने वाला है। इनमें से कोई भी चीज़ उससे छिपी नहीं है।
आज की ज़िंदगी में सबक़
अल्लाह की कुदरत की निशानियों और कयामत का इल्म सिर्फ अल्लाह को होने के ज़िक्र के साथ सूरह का इख्तिताम होता है। यह सबक हमें सिखाता है कि कल का, मौत का और गैब का इल्म सिर्फ अल्लाह को है, इसलिए फिक्र से ज़्यादा भरोसे पर तवज्जो देनी चाहिए।
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