नाम का मतलब
गिरोह / जत्थे (कयामत के दिन जन्नती-दोज़खी लोगों के गिरोह बनाकर लाए जाने से)
पृष्ठभूमि
सूरह अज़-ज़ुमर में इखलास (सिर्फ अल्लाह के लिए दीन) और तौहीद की ताकीद है। इसमें अल्लाह की रहमत की वुसअत और गुनाहगारों को मायूस न होने की तसल्ली भी दी गई है।
फ़ज़ीलत / सार
इसी सूरह में वह मशहूर आयत है जिसमें अल्लाह फरमाता है कि उसकी रहमत से मायूस मत हो, चाहे गुनाह कितने भी हों — यह उम्मीद की सबसे बड़ी दलील है।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
आयत 1
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ تَنزِيلُ ٱلْكِتَـٰبِ مِنَ ٱللَّهِ ٱلْعَزِيزِ ٱلْحَكِيمِ
تَنزِيلُ
नाज़िल करना हैं
ٱلْكِتَـٰبِ
किताब का
مِنَ
(is) from
ٱللَّهِ
अल्लाह की तरफ़ से
ٱلْعَزِيزِ
जो बहुत ज़बरदस्त है
ٱلْحَكِيمِ
ख़ूब हिकमत वाला है
इस किताब का अवतरण अल्लाह अत्यन्त प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी की ओर से है
तफ़्सीर:
क़ुरआन उस अल्लाह की ओर से उतारा गया है, जो सब पर प्रभुत्वशाली है, उसपर किसी का ज़ोर नहीं चलता, वह अपनी रचना, प्रबंधन और विधान में हिकमत वाला है। वह अल्लाह के सिवा किसी और की ओर से अवतरित नहीं हुआ है।
आयत 2
إِنَّآ أَنزَلْنَآ إِلَيْكَ ٱلْكِتَـٰبَ بِٱلْحَقِّ فَٱعْبُدِ ٱللَّهَ مُخْلِصًۭا لَّهُ ٱلدِّينَ
إِنَّآ
बेशक हम
أَنزَلْنَآ
नाज़िल की हमने
إِلَيْكَ
तरफ़ आपके
ٱلْكِتَـٰبَ
किताब
بِٱلْحَقِّ
साथ हक़ के
فَٱعْبُدِ
पस इबादत कीजिए
ٱللَّهَ
अल्लाह की
مُخْلِصًۭا
ख़ालिस करते हुए
لَّهُ
उसके लिए
ٱلدِّينَ
दीन को
निस्संदेह हमने यह किताब तुम्हारी ओर सत्य के साथ अवतरित की है
तफ़्सीर:
(ऐ रसूल!) हमने आपकी ओर यह सत्य पर आधारित क़ुरआन उतारा है। चुनाँचे उसके सभी समाचार सत्य हैं और उसके सभी नियम न्यायपूर्ण हैं। इसलिए एकेश्वरवादी होकर, उसके लिए तौहीद (एकेश्वरवाद) को शिर्क से शुद्ध (पवित्र) रखते हुए, अल्लाह की इबादत करें।
आयत 3
أَلَا لِلَّهِ ٱلدِّينُ ٱلْخَالِصُ ۚ وَٱلَّذِينَ ٱتَّخَذُوا۟ مِن دُونِهِۦٓ أَوْلِيَآءَ مَا نَعْبُدُهُمْ إِلَّا لِيُقَرِّبُونَآ إِلَى ٱللَّهِ زُلْفَىٰٓ إِنَّ ٱللَّهَ يَحْكُمُ بَيْنَهُمْ فِى مَا هُمْ فِيهِ يَخْتَلِفُونَ ۗ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يَهْدِى مَنْ هُوَ كَـٰذِبٌۭ كَفَّارٌۭ
أَلَا
ख़बरदार
لِلَّهِ
अल्लाह ही के लिए है
ٱلدِّينُ
दीन
ٱلْخَالِصُ ۚ
ख़ालिस
وَٱلَّذِينَ
और वो जिन्होंने
ٱتَّخَذُوا۟
बना रखे हैं
مِن
besides Him
دُونِهِۦٓ
उसके सिवा
أَوْلِيَآءَ
सरपरस्त
مَا
नहीं
نَعْبُدُهُمْ
हम इबादत करते उनकी
إِلَّا
मगर
لِيُقَرِّبُونَآ
ताकि वो क़रीब कर दें हमें
إِلَى
to
ٱللَّهِ
तरफ़ अल्लाह के
زُلْفَىٰٓ
क़रीब करना
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
يَحْكُمُ
वो फ़ैसला करेगा
بَيْنَهُمْ
दर्मियान उनके
فِى
in
مَا
उसमें जो
هُمْ
वो
فِيهِ
जिस में
يَخْتَلِفُونَ ۗ
वो इख़्तिलाफ़ करते हैं
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
لَا
(does) not
يَهْدِى
नहीं वो हिदायत देता
مَنْ
उसे जो है
هُوَ
वो
كَـٰذِبٌۭ
झूठा
كَفَّارٌۭ
बहुत नाशुक्रा
जान रखो कि विशुद्ध धर्म अल्लाह ही के लिए है। रहे वे लोग जिन्होंने उससे हटकर दूसरे समर्थक औऱ संरक्षक बना रखे है (कहते है,) "हम तो उनकी बन्दगी इसी लिए करते है कि वे हमें अल्लाह का सामीप्य प्राप्त करा दें।" निश्चय ही अल्लाह उनके बीच उस बात का फ़ैसला कर देगा जिसमें वे विभेद कर रहे है। अल्लाह उसे मार्ग नहीं दिखाता जो झूठा और बड़ा अकृतज्ञ हो
तफ़्सीर:
सुन लो, शिर्क से खाली धर्म केवल अल्लाह के लिए है। और जिन लोगों ने अल्लाह के सिवा मूर्तियों और ताग़ूतों को संरक्षक बना रखा है, जिनकी वे अल्लाह को छोड़कर पूजा करते हैं और उनकी पूजा करने का कारण बयान करते हुए कहते हैं : हम इनकी पूजा केवल इसलिए करते हैं कि ये हमें अल्लाह से निकट कर दें, हमारी ज़रूरतों को उसके सामने रखें और उसके निकट हमारी सिफ़ारिश करें। निश्चय अल्लाह क़ियामत के दिन एकेश्वरवादी मोमिनों और बहुदेववादी काफ़िरों के बीच, उस तौहीद के बारे में फ़ैसला कर देगा, जिसके विषय में वे मतभेद किया करते थे। निःसंदेह अल्लाह उस व्यक्ति को सत्य की राह नहीं दिखाता, जो अल्लाह पर झूठ गढ़ने वाला है, उसकी ओर साझी की निस्बत करता है, तथा अल्लाह की मिली हुई नेमतों की बहुत नाशुक्री करने वाला है।
आयत 4
لَّوْ أَرَادَ ٱللَّهُ أَن يَتَّخِذَ وَلَدًۭا لَّٱصْطَفَىٰ مِمَّا يَخْلُقُ مَا يَشَآءُ ۚ سُبْحَـٰنَهُۥ ۖ هُوَ ٱللَّهُ ٱلْوَٰحِدُ ٱلْقَهَّارُ
لَّوْ
अगर
أَرَادَ
चाहता
ٱللَّهُ
अल्लाह
أَن
कि
يَتَّخِذَ
वो बना ले
وَلَدًۭا
औलाद
لَّٱصْطَفَىٰ
अलबत्ता वो चुन लेता
مِمَّا
उसमें से जो
يَخْلُقُ
वो पैदा करता है
مَا
जो
يَشَآءُ ۚ
वो चाहता
سُبْحَـٰنَهُۥ ۖ
पाक है वो
هُوَ
वो
ٱللَّهُ
अल्लाह
ٱلْوَٰحِدُ
एक है
ٱلْقَهَّارُ
बहुत ज़बरदस्त है
यदि अल्लाह अपनी कोई सन्तान बनाना चाहता तो वह उसमें से, जिन्हें पैदा कर रहा है, चुन लेता। महान और उच्च है वह! वह अल्लाह है अकेला, सब पर क़ाबू रखनेवाला
तफ़्सीर:
अगर अल्लाह संतान बनाना चाहता, तो अपनी मख़लूक़ में से जिसे चाहता, अवश्य चुन लेता और उसे बेटे के समान बना देता। अल्लाह उन बातों से पवित्र एवं सर्वोच्च है, जो ये मुश्रिक लोग कहते हैं। वह अपने अस्तित्व, गुणों और कार्यों में अकेला है, उनमें उसका कोई भी साझी नहीं है। वह अपनी सारी मख़लूक़ पर हावी (प्रभावी) है।
आयत 5
خَلَقَ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ بِٱلْحَقِّ ۖ يُكَوِّرُ ٱلَّيْلَ عَلَى ٱلنَّهَارِ وَيُكَوِّرُ ٱلنَّهَارَ عَلَى ٱلَّيْلِ ۖ وَسَخَّرَ ٱلشَّمْسَ وَٱلْقَمَرَ ۖ كُلٌّۭ يَجْرِى لِأَجَلٍۢ مُّسَمًّى ۗ أَلَا هُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلْغَفَّـٰرُ
خَلَقَ
उसने पैदा किया
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों
وَٱلْأَرْضَ
और ज़मीन को
بِٱلْحَقِّ ۖ
साथ हक़ के
يُكَوِّرُ
वो लपेटता है
ٱلَّيْلَ
रात को
عَلَى
over
ٱلنَّهَارِ
दिन पर
وَيُكَوِّرُ
और वो लपेटता है
ٱلنَّهَارَ
दिन को
عَلَى
over
ٱلَّيْلِ ۖ
रात पर
وَسَخَّرَ
और उसने मुसख़्खर कर रखा है
ٱلشَّمْسَ
सूरज
وَٱلْقَمَرَ ۖ
और चाँद को
كُلٌّۭ
हर एक
يَجْرِى
चल रहा है
لِأَجَلٍۢ
एक वक़्त के लिए
مُّسَمًّى ۗ
मुक़र्रर
أَلَا
ख़बरदार
هُوَ
वो ही है
ٱلْعَزِيزُ
बहुत ज़बरदस्त
ٱلْغَفَّـٰرُ
बहुत बख़्शिश फ़रमाने वाला
उसने आकाशों और धरती को सत्य के साथ पैदा किया। रात को दिन पर लपेटता है और दिन को रात पर लपेटता है। और उसने सूर्य और चन्द्रमा को वशीभुत कर रखा है। प्रत्येक एक नियत समय को पूरा करने के लिए चल रहा है। जान रखो, वही प्रभुत्वशाली, बड़ा क्षमाशील है
तफ़्सीर:
उसने आकाशों और धरती को एक व्यापक हिकमत के तहत बनाया है, व्यर्थ नहीं, जैसा कि ये अत्याचारी कहते हैं। वह रात को दिन में दाखिल करता है और दिन को रात में दाखिल करता है। चुनाँचे उन दोनों में से एक आता है, तो दूसरा चला जाता है। उसने सूरज और चाँद को वश में कर रखा है। दोनों में से हर एक, एक निर्धारित समय के लिए चल रहा है जो इस जीवन का अंत है। सुन लो, वह पवित्र अल्लाह सब पर प्रभुत्वशाली है, जो अपने दुश्मनों से बदला लेता है और उसपर किसी का ज़ोर नहीं चलता, तथा वह अपने तौबा करने वाले बंदों के पापों को क्षमा करने वाला है।
आयत 6
خَلَقَكُم مِّن نَّفْسٍۢ وَٰحِدَةٍۢ ثُمَّ جَعَلَ مِنْهَا زَوْجَهَا وَأَنزَلَ لَكُم مِّنَ ٱلْأَنْعَـٰمِ ثَمَـٰنِيَةَ أَزْوَٰجٍۢ ۚ يَخْلُقُكُمْ فِى بُطُونِ أُمَّهَـٰتِكُمْ خَلْقًۭا مِّنۢ بَعْدِ خَلْقٍۢ فِى ظُلُمَـٰتٍۢ ثَلَـٰثٍۢ ۚ ذَٰلِكُمُ ٱللَّهُ رَبُّكُمْ لَهُ ٱلْمُلْكُ ۖ لَآ إِلَـٰهَ إِلَّا هُوَ ۖ فَأَنَّىٰ تُصْرَفُونَ
خَلَقَكُم
उसने पैदा किया तुम्हें
مِّن
from
نَّفْسٍۢ
जान से
وَٰحِدَةٍۢ
एक ही
ثُمَّ
फिर
جَعَلَ
उसने बनाया
مِنْهَا
उससे
زَوْجَهَا
जोड़ा उसका
وَأَنزَلَ
और उसने उतारे
لَكُم
तुम्हारे लिए
مِّنَ
of
ٱلْأَنْعَـٰمِ
मवेशियों में से
ثَمَـٰنِيَةَ
आठ
أَزْوَٰجٍۢ ۚ
जोड़े
يَخْلُقُكُمْ
वो तख़लीक़ करता है तुम्हारी
فِى
in
بُطُونِ
पेटों में
أُمَّهَـٰتِكُمْ
तुम्हारी माँओं के
خَلْقًۭا
एक तख़लीक़
مِّنۢ
after
بَعْدِ
बाद
خَلْقٍۢ
दूसरी (तख़लीक़ के)
فِى
in
ظُلُمَـٰتٍۢ
अंधेरों में
ثَلَـٰثٍۢ ۚ
तीन
ذَٰلِكُمُ
ये है
ٱللَّهُ
अल्लाह
رَبُّكُمْ
रब तुम्हारा
لَهُ
उसी के लिए है
ٱلْمُلْكُ ۖ
बादशाहत
لَآ
नहीं
إِلَـٰهَ
कोई इलाह (बरहक़)
إِلَّا
मगर
هُوَ ۖ
वो ही
فَأَنَّىٰ
तो किस तरह
تُصْرَفُونَ
तुम फेरे जाते हो
उसने तुम्हें अकेली जान पैदा किया; फिर उसी से उसका जोड़ा बनाया औऱ तुम्हारे लिए चौपायों में से आठ नर-मादा उतारे। वह तुम्हारी माँओं के पेटों में तीन अँधेरों के भीतर तुम्हें एक सृजनरूप के पश्चात अन्य एक सृजनरूप देता चला जाता है। वही अल्लाह तुम्हारा रब है। बादशाही उसी की है, उसके अतिरिक्त कोई पूज्य-प्रभु नहीं। फिर तुम कहाँ फिरे जाते हो?
तफ़्सीर:
(ऐ लोगो!) तुम्हारे पालनहार ने तुम्हें एक जान अर्थात् आदम से पैदा किया। फिर आदम से उनकी पत्नी ह़व्वा को पैदा किया। तथा तुम्हारे लिए ऊँटों, गायों, भेड़ों और बकरियों से आठ क़िस्म के जानवर पैदा किए, इनमें से हर प्रकार से नर और मादा बनाए। वह पवित्र अल्लाह तुम्हें तुम्हारी माताओं के पेटों में चरण-दर-चरण, पेट, गर्भाशय और झिल्ली के अंधेरों में पैदा करता है। वह जिसने यह सब पैदा किया, वही अल्लाह तुम्हारा पालनहार है। केवल उसी का राज्य है। उसके सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं। तो तुम उसकी इबादत से मुँह मोड़कर ऐसे लोगों की इबादत की ओर कैसे फिरे जाते हो, जो कुछ भी पैदा नहीं कर सकते, बल्कि वे खुद पैदा किए जाते हैं?!
आयत 7
إِن تَكْفُرُوا۟ فَإِنَّ ٱللَّهَ غَنِىٌّ عَنكُمْ ۖ وَلَا يَرْضَىٰ لِعِبَادِهِ ٱلْكُفْرَ ۖ وَإِن تَشْكُرُوا۟ يَرْضَهُ لَكُمْ ۗ وَلَا تَزِرُ وَازِرَةٌۭ وِزْرَ أُخْرَىٰ ۗ ثُمَّ إِلَىٰ رَبِّكُم مَّرْجِعُكُمْ فَيُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ ۚ إِنَّهُۥ عَلِيمٌۢ بِذَاتِ ٱلصُّدُورِ
إِن
अगर
تَكْفُرُوا۟
तुम नाशुक्री करोगे
فَإِنَّ
तो बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
غَنِىٌّ
बहुत बेनियाज़ है
عَنكُمْ ۖ
तुमसे
وَلَا
और नहीं
يَرْضَىٰ
वो पसंद करता
لِعِبَادِهِ
अपने बन्दों के लिए
ٱلْكُفْرَ ۖ
नाशुक्री को
وَإِن
और अगर
تَشْكُرُوا۟
तुम शुक्र करोगे
يَرْضَهُ
वो पसंद करता है उसे
لَكُمْ ۗ
तुम्हारे लिए
وَلَا
और नहीं
تَزِرُ
बोझ उठाएगी
وَازِرَةٌۭ
कोई बोझ उठाने वाली
وِزْرَ
बोझ
أُخْرَىٰ ۗ
दूसरी का
ثُمَّ
फिर
إِلَىٰ
to
رَبِّكُم
तरफ़ अपने रब ही के
مَّرْجِعُكُمْ
लौटना है तुम्हारा
فَيُنَبِّئُكُم
फिर वो बताएगा तुम्हें
بِمَا
वो जो
كُنتُمْ
थे तुम
تَعْمَلُونَ ۚ
तुम अमल करते
إِنَّهُۥ
बेशक वो
عَلِيمٌۢ
ख़ूब जानने वाला है
بِذَاتِ
of what (is) in the breasts
ٱلصُّدُورِ
सीनों के (भेद)
यदि तुम इनकार करोगे तो अल्लाह तुमसे निस्पृह है। यद्यपि वह अपने बन्दों के लिए इनकार को पसन्द नहीं करता, किन्तु यदि तुम कृतज्ञता दिखाओगे, तो उसे वह तुम्हारे लिए पसन्द करता है। कोई बोझ न उठाएगा। फिर तुम्हारी वापसी अपने रब ही की ओर है। और वह तुम्हे बता देगा, जो कुछ तुम करते रहे होगे। निश्चय ही वह सीनों तक की बातें जानता है
तफ़्सीर:
(ऐ लोगो!) अगर तुम अपने रब की नाशुक्री (या कुफ़्र) करोगे, तो अल्लाह तुम्हारे ईमान से बेपरवाह है। तुम्हारे कुफ़्र से उसका कोई नुक़सान नहीं होने वाला। तुम्हारे कुफ़्र का नुक़सान तुम्हारी ही ओर लौटेगा। अल्लाह इस बात को पसंद नहीं करता कि उसके बंदे उसकी नाशुक्री करें, और वह उन्हें नाशुक्री का आदेश नहीं देता। क्योंकि अल्लाह अनैतिकता और बुरे काम का आदेश नहीं देता। और अगर तुम अल्लाह का उसकी नेमतों पर शुक्रिया अदा करो और उसपर ईमान ले आओ, तो वह तुम्हारे शुक्र को पसंद करेगा और तुम्हें उसका बदला देगा। तथा कोई प्राणी किसी दूसरे प्राणी के गुनाह का बोझ नहीं उठाएगा। बल्कि हर प्राणी की उसके किए हुए कर्मों पर पकड़ होगी। फिर क़ियामत के दिन तुम्हारी वापसी अकेले तुम्हारे पालनहार ही की ओर होगी, और वह तुम्हें बताएगा कि तुम दुनिया में क्या करते थे, और तुम्हें तुम्हारे कर्मों का प्रतिफल देगा। वह पवित्र अल्लाह अपने बंदों के दिलों की बातों को ख़ूब जानने वाला है। उनके दिलों की कोई बात उससे छिपी नहीं है।
आयत 8
۞ وَإِذَا مَسَّ ٱلْإِنسَـٰنَ ضُرٌّۭ دَعَا رَبَّهُۥ مُنِيبًا إِلَيْهِ ثُمَّ إِذَا خَوَّلَهُۥ نِعْمَةًۭ مِّنْهُ نَسِىَ مَا كَانَ يَدْعُوٓا۟ إِلَيْهِ مِن قَبْلُ وَجَعَلَ لِلَّهِ أَندَادًۭا لِّيُضِلَّ عَن سَبِيلِهِۦ ۚ قُلْ تَمَتَّعْ بِكُفْرِكَ قَلِيلًا ۖ إِنَّكَ مِنْ أَصْحَـٰبِ ٱلنَّارِ
۞ وَإِذَا
और जब
مَسَّ
पहुँचती है
ٱلْإِنسَـٰنَ
इन्सान को
ضُرٌّۭ
कोई तक्लीफ़
دَعَا
वो पुकारता है
رَبَّهُۥ
अपने रब को
مُنِيبًا
रुजूअ करते हुए
إِلَيْهِ
तरफ़ उसके
ثُمَّ
फिर
إِذَا
जब
خَوَّلَهُۥ
वो अता कर देता है उसे
نِعْمَةًۭ
कोई नेअमत
مِّنْهُ
अपने पास से
نَسِىَ
वो भूल जाता है
مَا
उसे जो
كَانَ
था वो
يَدْعُوٓا۟
वो पुकारता
إِلَيْهِ
तरफ़ उसके
مِن
before
قَبْلُ
उससे पहले
وَجَعَلَ
और वो बना देता है
لِلَّهِ
अल्लाह के लिए
أَندَادًۭا
कुछ शरीक
لِّيُضِلَّ
ताकि वो भटका दे
عَن
from
سَبِيلِهِۦ ۚ
उसके रास्ते से
قُلْ
कह दीजिए
تَمَتَّعْ
फ़ायदा उठा ले
بِكُفْرِكَ
साथ अपने कुफ़्र के
قَلِيلًا ۖ
थोड़ा सा
إِنَّكَ
बेशक तू
مِنْ
(are) of
أَصْحَـٰبِ
(the) companions
ٱلنَّارِ
आग वालों में से है
जब मनुष्य को कोई तकलीफ़ पहुँचती है तो वह अपने रब को उसी की ओर रुजू होकर पुकारने लगता है, फिर जब वह उसपर अपनी अनुकम्पा करता है, तो वह उस चीज़ को भूल जाता है जिसके लिए पहले पुकार रहा था और (दूसरो को) अल्लाह के समकक्ष ठहराने लगता है, ताकि इसके परिणामस्वरूप वह उसकी राह से भटका दे। कह दो, "अपने इनकार का थोड़ा मज़ा ले लो। निस्संदेह तुम आगवालों में से हो।"
तफ़्सीर:
जब काफ़िर व्यक्ति को कोई बीमारी, धन की हानि और डूबने के डर जैसी कोई तकलीफ़ पहुँचती है, तो वह अपने पालनहार को पुकारता है कि उसे पहुँचने वाली तकलीफ़ को उससे दूर कर दे, इस हाल में कि वह केवल उसी की ओर लौटने वाला होता है। फिर जब अल्लाह उसे कोई नेमत प्रदान करता है, जैसे कि उसे पहुँचने वाली तकलीफ़ को उससे दूर कर देता है, तो वह पहले जिसके आगे गिड़गिड़ाता था, उसे छोड़ देता है, और वह अल्लाह है। तथा वह अल्लाह के साझी बनाकर, अल्लाह के सिवा उनकी पूजा करने लगता है। ताकि वह अन्य लोगों को उस रास्ते से भटका दे, जो अल्लाह की ओर पहुँचाने वाला है। (ऐ रसूल!) आप इस दशा वाले व्यक्ति से कह दें : अपने जीवन के बाक़ी हिस्सों के लिए अपने कुफ़्र का आनंद ले लो, जो कि बहुत थोड़ा समय है। क्योंकि तुम क़ियामत के दिन जहन्नम में जाने वालों में से हो, जो उसमें उस तरह रहने वाले हैं, जिस तरह एक साथी अपने साथी के साथ रहता है।
आयत 9
أَمَّنْ هُوَ قَـٰنِتٌ ءَانَآءَ ٱلَّيْلِ سَاجِدًۭا وَقَآئِمًۭا يَحْذَرُ ٱلْـَٔاخِرَةَ وَيَرْجُوا۟ رَحْمَةَ رَبِّهِۦ ۗ قُلْ هَلْ يَسْتَوِى ٱلَّذِينَ يَعْلَمُونَ وَٱلَّذِينَ لَا يَعْلَمُونَ ۗ إِنَّمَا يَتَذَكَّرُ أُو۟لُوا۟ ٱلْأَلْبَـٰبِ
أَمَّنْ
Is (one) who
هُوَ
क्या भला वो जो
قَـٰنِتٌ
बन्दगी करने वाला है
ءَانَآءَ
घड़ियों में
ٱلَّيْلِ
रात की
سَاجِدًۭا
सजदा करने वाला है
وَقَآئِمًۭا
और क़याम करने वाला है
يَحْذَرُ
डरता है
ٱلْـَٔاخِرَةَ
आख़िरत से
وَيَرْجُوا۟
और उम्मीद रखता है
رَحْمَةَ
रहमत की
رَبِّهِۦ ۗ
अपने रब की
قُلْ
कह दीजिए
هَلْ
क्या
يَسْتَوِى
बराबर हो सकते हैं
ٱلَّذِينَ
वो जो
يَعْلَمُونَ
इल्म रखते हैं
وَٱلَّذِينَ
और वो जो
لَا
(do) not
يَعْلَمُونَ ۗ
नहीं वो इल्म रखते
إِنَّمَا
बेशक
يَتَذَكَّرُ
नसीहत पकड़ते हैं
أُو۟لُوا۟
those of understanding
ٱلْأَلْبَـٰبِ
अक़्ल वाले
(क्या उक्त व्यक्ति अच्छा है) या वह व्यक्ति जो रात की घड़ियों में सजदा करता और खड़ा रहता है, आख़िरत से डरता है और अपने रब की दयालुता की आशा रखता हुआ विनयशीलता के साथ बन्दगी में लगा रहता है? कहो, "क्या वे लोग जो जानते है और वे लोग जो नहीं जानते दोनों समान होंगे? शिक्षा तो बुद्धि और समझवाले ही ग्रहण करते है।"
तफ़्सीर:
क्या वह व्यक्ति जो अल्लाह की आज्ञा का पालन करने वाला है, रात की घड़ियों को अपने रब के सामने सजदा करते हुए और उसके दरबार में खड़े होकर इबादत में गुज़ारता है, आख़िरत की यातना से डरता है और अपने रब की दया की आशा रखता है, वह उत्तम है, या वह काफ़िर जो परेशानी के समय अल्लाह की इबादत करता है और खुशहाली के समय उसका इनकार करता है और अल्लाह के साथ साझीदार बनाता है?! (ऐ रसूल!) आप कह दें : क्या वे लोग, जो अल्लाह से अवगत होने के कारण उसकी वाजिब की हुई चीज़ों को जानते हैं और वे लोग जो इनमें से कुछ भी नहीं जानते, बराबर हो सकते हैं?! इन दो समूहों के बीच का अंतर वही लोग जान सकते हैं, जिनके पास शुद्ध बुद्धि है।
आयत 10
قُلْ يَـٰعِبَادِ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ ٱتَّقُوا۟ رَبَّكُمْ ۚ لِلَّذِينَ أَحْسَنُوا۟ فِى هَـٰذِهِ ٱلدُّنْيَا حَسَنَةٌۭ ۗ وَأَرْضُ ٱللَّهِ وَٰسِعَةٌ ۗ إِنَّمَا يُوَفَّى ٱلصَّـٰبِرُونَ أَجْرَهُم بِغَيْرِ حِسَابٍۢ
قُلْ
कह दीजिए
يَـٰعِبَادِ
ऐ मेरे बन्दो
ٱلَّذِينَ
वो जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए हो
ٱتَّقُوا۟
डरो
رَبَّكُمْ ۚ
अपने रब से
لِلَّذِينَ
उनके लिए जिन्होंने
أَحْسَنُوا۟
अच्छा किया
فِى
in
هَـٰذِهِ
this
ٱلدُّنْيَا
इस दुनिया में
حَسَنَةٌۭ ۗ
भलाई है
وَأَرْضُ
और ज़मीन
ٱللَّهِ
अल्लाह की
وَٰسِعَةٌ ۗ
वसीअ है
إِنَّمَا
बेशक
يُوَفَّى
पूरा-पूरा दिए जाऐंगे
ٱلصَّـٰبِرُونَ
सब्र करने वाले
أَجْرَهُم
अजर अपना
بِغَيْرِ
बग़ैर
حِسَابٍۢ
हिसाब के
कह दो कि "ऐ मेरे बन्दो, जो ईमान लाए हो! अपने रब का डर रखो। जिन लोगों ने अच्छा कर दिखाया उनके लिए इस संसार में अच्छाई है, और अल्लाह की धरती विस्तृत है। जमे रहनेवालों को तो उनका बदला बेहिसाब मिलकर रहेगा।"
तफ़्सीर:
(ऐ रसूल!) आप मेरे उन बंदों से, जो मुझपर और मेरे रसूलों पर ईमान लाए हैं, कह दें : अपने पालनहार से डरो, उसके आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से दूर रहकर। तुममें से जिन लोगों ने दुनिया में अच्छे कार्य किए, उनके लिए दुनिया में विजय (मदद), स्वास्थ्य और धन के रूप में, तथा आख़िरत में जन्नत के रूप में, भलाई है। और अल्लाह की धरती विशाल है। इसलिए उसमें हिजरत करो यहाँ तक कि तुम्हें ऐसी जगह मिल जाए, जहाँ तुम बिना रोक-टोक के अल्लाह की इबादत कर सको। सब्र करने वालों को क़ियामत के दिन उनका बदला, उसकी बहुतायत और विविधता के कारण, बिना गिनती किए या बिना मात्रा के दिया जाएगा।
आज की ज़िंदगी में सबक़
इखलास (सिर्फ अल्लाह के लिए दीन) की ताकीद का ज़िक्र है। यह हमें सिखाता है कि हमारा हर अमल सिर्फ अल्लाह की रज़ा के लिए होना चाहिए, दिखावे के लिए नहीं।
आयत 11
قُلْ إِنِّىٓ أُمِرْتُ أَنْ أَعْبُدَ ٱللَّهَ مُخْلِصًۭا لَّهُ ٱلدِّينَ
قُلْ
कह दीजिए
إِنِّىٓ
बेशक मैं
أُمِرْتُ
हुक्म दिया गया हूँ मैं
أَنْ
कि
أَعْبُدَ
मैं इबादत करूँ
ٱللَّهَ
अल्लाह की
مُخْلِصًۭا
ख़ालिस करते हुए
لَّهُ
उसके लिए
ٱلدِّينَ
दीन को
कह दो, "मुझे तो आदेश दिया गया है कि मैं अल्लाह की बन्दगी करूँ, धर्म (भक्तिभाव एवं निष्ठान) को उसी के लिए विशुद्ध करते हुए
तफ़्सीर:
(ऐ रसूल!) आप कह दें : अल्लाह ने मुझे आदेश दिया है कि मैं केवल उसी की इबादत करूँ, उसके लिए इबादत को विशुद्ध करते हुए।
आयत 12
وَأُمِرْتُ لِأَنْ أَكُونَ أَوَّلَ ٱلْمُسْلِمِينَ
وَأُمِرْتُ
और हुक्म दिया गया हूँ मैं
لِأَنْ
ये कि
أَكُونَ
मैं हो जाऊँ
أَوَّلَ
सबसे पहला
ٱلْمُسْلِمِينَ
फ़रमाबरदारों में से
और मुझे आदेश दिया गया है कि सबसे बढ़कर मैं स्वयं आज्ञाकारी बनूँ।"
तफ़्सीर:
और उसने मुझे आदेश दिया है कि मैं इस उम्मत का सबसे पहला आज्ञाकारी और हुक्म मानने वाला बनूँ।
आयत 13
قُلْ إِنِّىٓ أَخَافُ إِنْ عَصَيْتُ رَبِّى عَذَابَ يَوْمٍ عَظِيمٍۢ
قُلْ
कह दीजिए
إِنِّىٓ
बेशक मैं
أَخَافُ
मैं डरता हूँ
إِنْ
अगर
عَصَيْتُ
नाफ़रमानी की मैं ने
رَبِّى
अपने रब की
عَذَابَ
अज़ाब से
يَوْمٍ
(of) a Day
عَظِيمٍۢ
बड़े दिन के
कहो, "यदि मैं अपने रब की अवज्ञा करूँ तो मुझे एक बड़े दिन की यातना का भय है।"
तफ़्सीर:
(ऐ रसूल!) आप कह दें : यदि मैं अल्लाह की अवज्ञा करता हूँ और उसकी बात नहीं मानता, तो मुझे एक महान दिन की यातना का डर है और वह क़ियामत का दिन है।
आयत 14
قُلِ ٱللَّهَ أَعْبُدُ مُخْلِصًۭا لَّهُۥ دِينِى
قُلِ
कह दीजिए
ٱللَّهَ
अल्लाह ही की
أَعْبُدُ
मैं इबादत करता हूँ
مُخْلِصًۭا
ख़ालिस करते हुए
لَّهُۥ
उसके लिए
دِينِى
अपने दीन को
कहो, "मैं तो अल्लाह ही की बन्दगी करता हूँ, अपने धर्म को उसी के लिए विशुद्ध करते हुए
तफ़्सीर:
(ऐ रसूल!) आप कह दें : मैं केवल अल्लाह की इबादत करता हूँ, उसी के लिए इबादत को ख़ालिस करते हुए। उसके साथ किसी अन्य की इबादत नहीं करता।
आयत 15
فَٱعْبُدُوا۟ مَا شِئْتُم مِّن دُونِهِۦ ۗ قُلْ إِنَّ ٱلْخَـٰسِرِينَ ٱلَّذِينَ خَسِرُوٓا۟ أَنفُسَهُمْ وَأَهْلِيهِمْ يَوْمَ ٱلْقِيَـٰمَةِ ۗ أَلَا ذَٰلِكَ هُوَ ٱلْخُسْرَانُ ٱلْمُبِينُ
فَٱعْبُدُوا۟
पस तुम इबादत करो
مَا
जिसकी
شِئْتُم
चाहो तुम
مِّن
besides Him
دُونِهِۦ ۗ
उसके सिवा
قُلْ
कह दीजिए
إِنَّ
बेशक
ٱلْخَـٰسِرِينَ
ख़सारा पाने वाले
ٱلَّذِينَ
वो हैं जिन्होंने
خَسِرُوٓا۟
ख़सारे में डाला
أَنفُسَهُمْ
अपने आपको
وَأَهْلِيهِمْ
और अपने घरवालों को
يَوْمَ
दिन
ٱلْقِيَـٰمَةِ ۗ
क़यामत के
أَلَا
ख़बरदार
ذَٰلِكَ
यही है
هُوَ
वो
ٱلْخُسْرَانُ
ख़सारा
ٱلْمُبِينُ
खुल्लम-खुल्ला
अब तुम उससे हटकर जिसकी चाहो बन्दगी करो।" कह दो, "वास्तव में घाटे में पड़नेवाले तो वही है, जिन्होंने अपने आपको और अपने लोगों को क़ियामत के दिन घाटे में डाल दिया। जान रखो, यही खुला घाटा है
तफ़्सीर:
(ऐ मुश्रिको!) तुम उसके सिवा जिन मूर्तियों की भी चाहो, पूजा करो, (यह आदेश धमकी के लिए है)। (ऐ रसूल!) आप कह दें : वास्तविक घाटा उठाने वाले वे लोग हैं, जिन्होंने अपना घाटा किया और अपने घर वालों का घाटा किया। चुनाँचे वे उनसे नहीं मिल सके। क्योंकि वे अकेले जन्नत में दाखिल होने के कारण, या उनके साथ ही जहन्नम में जाने की वजह से, उनका साथ छोड़ दिए। इसलिए वे कभी नहीं मिलेंगे। सुन लो! वास्तव में यही स्पष्ट घाटा है, जिसमें कोई संदेह नहीं है।
आयत 16
لَهُم مِّن فَوْقِهِمْ ظُلَلٌۭ مِّنَ ٱلنَّارِ وَمِن تَحْتِهِمْ ظُلَلٌۭ ۚ ذَٰلِكَ يُخَوِّفُ ٱللَّهُ بِهِۦ عِبَادَهُۥ ۚ يَـٰعِبَادِ فَٱتَّقُونِ
لَهُم
उनके लिए
مِّن
from
فَوْقِهِمْ
उनके ऊपर से
ظُلَلٌۭ
छतरियाँ हैं
مِّنَ
of
ٱلنَّارِ
आग की
وَمِن
and from
تَحْتِهِمْ
और उनके नीचे से
ظُلَلٌۭ ۚ
छतरियाँ हैं
ذَٰلِكَ
यही है
يُخَوِّفُ
डराता है
ٱللَّهُ
अल्लाह
بِهِۦ
साथ उसके
عِبَادَهُۥ ۚ
अपने बन्दों को
يَـٰعِبَادِ
ऐ मेरे बन्दो
فَٱتَّقُونِ
पस डरो मुझसे
उनके लिए उनके ऊपर से भी आग की छतरियाँ होंगी और उनके नीचे से भी छतरियाँ होंगी। यही वह चीज़ है, जिससे अल्लाह अपने बन्दों को डराता है, "ऐ मेरे बन्दो! अतः तुम मेरा डर रखो।"
तफ़्सीर:
उनके लिए उनके ऊपर से धुआँ, लौ और गर्मी होगी और उनके नीचे से भी धुआँ, लौ और गर्मी होगी। इस उल्लिखित यातना के द्वारा अल्लाह अपने बंदों को डराता है। अतः ऐ मेरे बंदो! मेरे आदेशों का पालन करके और मेरे निषेधों से बचकर मुझसे डरो।
आयत 17
وَٱلَّذِينَ ٱجْتَنَبُوا۟ ٱلطَّـٰغُوتَ أَن يَعْبُدُوهَا وَأَنَابُوٓا۟ إِلَى ٱللَّهِ لَهُمُ ٱلْبُشْرَىٰ ۚ فَبَشِّرْ عِبَادِ
وَٱلَّذِينَ
और वो जिन्होंने
ٱجْتَنَبُوا۟
इज्तिनाब किया
ٱلطَّـٰغُوتَ
ताग़ूत से
أَن
कि
يَعْبُدُوهَا
वो इबादत करें उसकी
وَأَنَابُوٓا۟
और रुजूअ किया
إِلَى
to
ٱللَّهِ
तरफ़ अल्लाह के
لَهُمُ
उनके लिए
ٱلْبُشْرَىٰ ۚ
ख़ुशख़बरी है
فَبَشِّرْ
पस ख़ुशख़बरी दे दीजिए
عِبَادِ
मेरे बन्दों को
रहे वे लोग जो इससे बचे कि वे ताग़ूत (बढ़े हुए फ़सादी) की बन्दगी करते है और अल्लाह की ओर रुजू हुए, उनके लिए शुभ सूचना है।
तफ़्सीर:
जो लोग मूर्तियों तथा अल्लाह के सिवा पूजी जाने वाली समस्त चीज़ों की पूजा से दूर रहे और अल्लाह की ओर तौबा करते हुए लौटे, उनके लिए मौत के समय, कब्र में और क़ियामत के दिन जन्नत की खुशख़बरी है। अतः (ऐ रसूल!) आप मेरे बंदों को खुशख़बरी सुना दें।
आयत 18
ٱلَّذِينَ يَسْتَمِعُونَ ٱلْقَوْلَ فَيَتَّبِعُونَ أَحْسَنَهُۥٓ ۚ أُو۟لَـٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ هَدَىٰهُمُ ٱللَّهُ ۖ وَأُو۟لَـٰٓئِكَ هُمْ أُو۟لُوا۟ ٱلْأَلْبَـٰبِ
ٱلَّذِينَ
वो लोग जो
يَسْتَمِعُونَ
ग़ौर से सुनते हैं
ٱلْقَوْلَ
बात को
فَيَتَّبِعُونَ
फिर वो पैरवी करते हैं
أَحْسَنَهُۥٓ ۚ
उसके बेहतरीन (हिस्से) की
أُو۟لَـٰٓئِكَ
यही लोग हैं
ٱلَّذِينَ
वो जो
هَدَىٰهُمُ
हिदायत दी उन्हें
ٱللَّهُ ۖ
अल्लाह ने
وَأُو۟لَـٰٓئِكَ
और यही लोग हैं
هُمْ
वो
أُو۟لُوا۟
the men of understanding
ٱلْأَلْبَـٰبِ
जो अक़्ल वाले हैं
अतः मेरे उन बन्दों को शुभ सूचना दे दो जो बात को ध्यान से सुनते है; फिर उस अच्छी से अच्छी बात का अनुपालन करते है। वही हैं, जिन्हें अल्लाह ने मार्ग दिखाया है और वही बुद्धि और समझवाले है
तफ़्सीर:
जो बात को सुनते हैं और अच्छी और बुरी बात के बीच अंतर करते हैं, फिर उसमें पाए जाने वाले लाभ के लिए सबसे अच्छी बात का अनुसरण करते हैं। इन विशेषताओं से सुसज्जित लोग ही हैं, जिन्हें अल्लाह ने हिदायत की तौफ़ीक़ दी है। और वही लोग शुद्ध विवेक वाले हैं।
आयत 19
أَفَمَنْ حَقَّ عَلَيْهِ كَلِمَةُ ٱلْعَذَابِ أَفَأَنتَ تُنقِذُ مَن فِى ٱلنَّارِ
أَفَمَنْ
क्या भला जो
حَقَّ
साबित हो गई
عَلَيْهِ
उस पर
كَلِمَةُ
बात
ٱلْعَذَابِ
अज़ाब की
أَفَأَنتَ
क्या भला आप
تُنقِذُ
आप बचाऐंगे
مَن
उसे जो
فِى
(is) in
ٱلنَّارِ
आग में है
तो क्या वह व्यक्ति जिसपर यातना की बात सत्यापित हो चुकी है (यातना से बच सकता है)? तो क्या तुम छुड़ा लोगे उसको जो आग में है
तफ़्सीर:
जिस व्यक्ति पर उसके कुफ़्र और गुमराही पर बने रहने के कारण यातना की बात सिद्ध हो चुकी, तो (ऐ रसूल!) उसके मार्गदर्शन और तौफ़ीक़ के लिए आपके पास कोई उपाय नहीं है। तो (ऐ रसूल!) क्या आप इस विशेषता वाले व्यक्ति को आग से बचा लेंगे?!
आयत 20
لَـٰكِنِ ٱلَّذِينَ ٱتَّقَوْا۟ رَبَّهُمْ لَهُمْ غُرَفٌۭ مِّن فَوْقِهَا غُرَفٌۭ مَّبْنِيَّةٌۭ تَجْرِى مِن تَحْتِهَا ٱلْأَنْهَـٰرُ ۖ وَعْدَ ٱللَّهِ ۖ لَا يُخْلِفُ ٱللَّهُ ٱلْمِيعَادَ
لَـٰكِنِ
लेकिन
ٱلَّذِينَ
वो जिन्होंने
ٱتَّقَوْا۟
तक़्वा किया
رَبَّهُمْ
अपने रब का
لَهُمْ
उनके लिए
غُرَفٌۭ
बालाख़ाने है
مِّن
above them
فَوْقِهَا
उनके ऊपर
غُرَفٌۭ
(और) बालाख़ाने है
مَّبْنِيَّةٌۭ
बनाए हुए
تَجْرِى
बहती हैं
مِن
from
تَحْتِهَا
उनके नीचे से
ٱلْأَنْهَـٰرُ ۖ
नहरें
وَعْدَ
वादा है
ٱللَّهِ ۖ
अल्लाह का
لَا
Not
يُخْلِفُ
ना ख़िलाफ़ करेगा
ٱللَّهُ
अल्लाह
ٱلْمِيعَادَ
वादे को
अलबत्ता जो लोग अपने रब से डरकर रहे उनके लिए ऊपरी मंज़िल पर कक्ष होंगे, जिनके ऊपर भी निर्मित कक्ष होंगे। उनके नीचे नहरें बह रही होगी। यह अल्लाह का वादा है। अल्लाह अपने वादे का उल्लंघन नहीं करता
तफ़्सीर:
लेकिन जो लोग अपने पालनहार के आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से दूर रहकर उससे डरते रहे, उनके लिए ऊँचे-ऊँचे भवन हैं, जो एक के ऊपर एक बने हुए हैं, जिनके नीचे से नहरें बह रही हैं। अल्लाह ने उनसे इसका वादा किया है और अल्लाह अपना वादा नहीं तोड़ता।
आज की ज़िंदगी में सबक़
तौहीद की दावत और इल्म वालों-जाहिलों के फर्क का ज़िक्र है। यह सबक हमें सिखाता है कि जानने वाला और न जानने वाला बराबर नहीं हो सकते, इल्म हासिल करना ज़रूरी है।
आयत 21
أَلَمْ تَرَ أَنَّ ٱللَّهَ أَنزَلَ مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءًۭ فَسَلَكَهُۥ يَنَـٰبِيعَ فِى ٱلْأَرْضِ ثُمَّ يُخْرِجُ بِهِۦ زَرْعًۭا مُّخْتَلِفًا أَلْوَٰنُهُۥ ثُمَّ يَهِيجُ فَتَرَىٰهُ مُصْفَرًّۭا ثُمَّ يَجْعَلُهُۥ حُطَـٰمًا ۚ إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَذِكْرَىٰ لِأُو۟لِى ٱلْأَلْبَـٰبِ
أَلَمْ
क्या नहीं
تَرَ
आपने देखा
أَنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह ने
أَنزَلَ
उतारा
مِنَ
from
ٱلسَّمَآءِ
आसमान से
مَآءًۭ
पानी
فَسَلَكَهُۥ
फिर उसने चलाया उसे
يَنَـٰبِيعَ
चश्मे (बना कर)
فِى
in
ٱلْأَرْضِ
ज़मीन में
ثُمَّ
फिर
يُخْرِجُ
वो निकालता है
بِهِۦ
साथ उसके
زَرْعًۭا
खेती को
مُّخْتَلِفًا
मुख़्तलिफ़ हैं
أَلْوَٰنُهُۥ
रंग उसके
ثُمَّ
फिर
يَهِيجُ
वो ख़ुश्क हो जाती है
فَتَرَىٰهُ
फिर तुम देखते हो उसे
مُصْفَرًّۭا
ज़र्द
ثُمَّ
फिर
يَجْعَلُهُۥ
वो कर देता है उसे
حُطَـٰمًا ۚ
रेज़ा-रेज़ा
إِنَّ
यक़ीनन
فِى
in
ذَٰلِكَ
उसमें
لَذِكْرَىٰ
अलबत्ता नसीहत है
لِأُو۟لِى
for those of understanding
ٱلْأَلْبَـٰبِ
अक़्ल वालों के लिए
क्या तुमने नहीं देखा कि अल्लाह ने आकाश से पानी उतारा, फिर धरती में उसके स्रोत प्रवाहित कर दिए; फिर उसने द्वारा खेती निकालता है, जिसके विभिन्न रंग होते है; फिर वह सूखने लगती है; फिर तुम देखते हो कि वह पीली पड़ गई; फिर वह उसे चूर्ण-विचूर्ण कर देता है? निस्संदेह इसमें बुद्धि और समझवालों के लिए बड़ी याददिहानी है
तफ़्सीर:
तुम देख कर जानते हो कि अल्लाह ने आसमान से बारिश का पानी उतारा, फिर उसे चश्मों और स्रोतों में घुसा दिया। फिर वह इस पानी के साथ अलग-अलग रंगों की खेती निकालता है। फिर खेती सूख जाती है, तो तुम उसे (ऐ देखने वाले!) पीले रंग की देखते हो, जबकि वह पहले हरी-भरी थी। फिर उसके सूखने के बाद अल्लाह उसे चूरा-चूरा बना देता है। यह जो कुछ उल्लेख किया गया है, इसमें जीवित दिलों के लिए एक अनुस्मारक (उपदेश) है।
आयत 22
أَفَمَن شَرَحَ ٱللَّهُ صَدْرَهُۥ لِلْإِسْلَـٰمِ فَهُوَ عَلَىٰ نُورٍۢ مِّن رَّبِّهِۦ ۚ فَوَيْلٌۭ لِّلْقَـٰسِيَةِ قُلُوبُهُم مِّن ذِكْرِ ٱللَّهِ ۚ أُو۟لَـٰٓئِكَ فِى ضَلَـٰلٍۢ مُّبِينٍ
أَفَمَن
क्या भला वो जो
شَرَحَ
खोल दिया
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
صَدْرَهُۥ
सीना उसका
لِلْإِسْلَـٰمِ
इस्लाम के लिए
فَهُوَ
पस वो है
عَلَىٰ
(is) upon
نُورٍۢ
एक नूर पर
مِّن
from
رَّبِّهِۦ ۚ
अपने रब की तरफ़ से
فَوَيْلٌۭ
तो हलाकत है
لِّلْقَـٰسِيَةِ
उनके लिए कि सख़्त हैं
قُلُوبُهُم
दिल जिनके
مِّن
from
ذِكْرِ
(the) remembrance of Allah
ٱللَّهِ ۚ
अल्लाह की याद से
أُو۟لَـٰٓئِكَ
यही लोग हैं
فِى
(are) in
ضَلَـٰلٍۢ
error
مُّبِينٍ
खुली गुमराही में
अब क्या वह व्यक्ति जिसका सीना (हृदय) अल्लाह ने इस्लाम के लिए खोल दिया, अतः वह अपने रब की ओर से प्रकाश पर है, (उस व्यक्ति के समान होगा जो कठोर हृदय और अल्लाह की याद से ग़ाफ़िल है)? अतः तबाही है उन लोगों के लिए जिनके दि कठोर हो चुके है, अल्लाह की याद से ख़ाली होकर! वही खुली गुमराही में पड़े हुए है
तफ़्सीर:
क्या वह आदमी, जिसके सीने को अल्लाह ने इस्लाम के लिए खोल दिया है, और उसने उसकी राह पा ली है, चुनाँचे वह अपने रब की ओर से अंतर्दृष्टि पर है, उस व्यक्ति के समान हो सकता है, जिसका दिल अल्लाह की याद से सख़्त हो गया है?! वे दोनों कभी भी बराबर नहीं हो सकते। चुनाँचे मोक्ष उनके लिए है जो हिदायत पाने वाले हैं और घाटा उन लोगों के लिए है, जिनके हृदय अल्लाह के स्मरण से कठोर हैं। ये लोग सत्य से स्पष्ट गुमराही में हैं।
आयत 23
ٱللَّهُ نَزَّلَ أَحْسَنَ ٱلْحَدِيثِ كِتَـٰبًۭا مُّتَشَـٰبِهًۭا مَّثَانِىَ تَقْشَعِرُّ مِنْهُ جُلُودُ ٱلَّذِينَ يَخْشَوْنَ رَبَّهُمْ ثُمَّ تَلِينُ جُلُودُهُمْ وَقُلُوبُهُمْ إِلَىٰ ذِكْرِ ٱللَّهِ ۚ ذَٰلِكَ هُدَى ٱللَّهِ يَهْدِى بِهِۦ مَن يَشَآءُ ۚ وَمَن يُضْلِلِ ٱللَّهُ فَمَا لَهُۥ مِنْ هَادٍ
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
نَزَّلَ
नाज़िल की
أَحْسَنَ
बेहतरीन
ٱلْحَدِيثِ
बात
كِتَـٰبًۭا
ऐसी किताब
مُّتَشَـٰبِهًۭا
आपस में मिलती जुलती है
مَّثَانِىَ
दोहराई जाने वाली है
تَقْشَعِرُّ
लरज़ने लगती हैं
مِنْهُ
उससे
جُلُودُ
जिल्दें
ٱلَّذِينَ
उन लोगों की जो
يَخْشَوْنَ
डरते हैं
رَبَّهُمْ
अपने रब से
ثُمَّ
फिर
تَلِينُ
नर्म हो जाती हैं
جُلُودُهُمْ
जिल्दें उनकी
وَقُلُوبُهُمْ
और दिल उनके
إِلَىٰ
at
ذِكْرِ
(the) remembrance
ٱللَّهِ ۚ
तरफ़ अल्लाह की याद के
ذَٰلِكَ
ये है
هُدَى
हिदायत
ٱللَّهِ
अल्लाह की
يَهْدِى
वो हिदायत देता है
بِهِۦ
साथ उसके
مَن
जिसे
يَشَآءُ ۚ
वो चाहता है
وَمَن
और जिसे
يُضْلِلِ
गुमराह कर दे
ٱللَّهُ
अल्लाह
فَمَا
तो नहीं
لَهُۥ
उसके लिए
مِنْ
any
هَادٍ
कोई हिदायत देने वाला
अल्लाह ने सर्वोत्तम वाणी अवतरित की, एक ऐसी किताब जिसके सभी भाग परस्पर मिलते-जुलते है, जो रुख़ फेर देनेवाली (क्रांतिकारी) है। उससे उन लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते है जो अपने रब से डरते है। फिर उनकी खालें (शरीर) और उनके दिल नर्म होकर अल्लाह की याद की ओर झुक जाते है। वह अल्लाह का मार्गदर्शन है, उसके द्वारा वह सीधे मार्ग पर ले आता है, जिसे चाहता है। और जिसको अल्लाह पथभ्रष्ट रहने दे, फिर उसके लिए कोई मार्गदर्शक नहीं
तफ़्सीर:
अल्लाह ने अपने रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर क़ुरआन उतारा है, जो सबसे उत्तम हदीस (बात) है। अल्लाह ने इसे परस्पर मिलता-जुलता उतारा है, इसका एक भाग दूसरे भाग से सच्चाई, अच्छाई, एकरूपता और विभेद-रहित होने में मिलता-जुलता है, जिसमें विभिन्न कहानियाँ और अहकाम (नियम), वादे और धमकियाँ, सत्यवादियों के गुण और असत्यवादियों की विशेषताएँ, आदि वर्णित हैं। इससे उन लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं, जो अपने पालनहार से डरते हैं, जब वे उसमें वर्णित सज़ा के वादों और दंड की धमकियों को सुनते हैं। फिर जब वे उसमें मौजूद आशा और शुभ समाचार को सुनते हैं, तो उनके चमड़े और दिल नरम होकर अल्लाह के ज़िक्र की ओर प्रेरित हो जाते हैं। यह उपर्युक्त क़ुरआन और उसका प्रभाव, अल्लाह का मार्गदर्शन है, वह जिसे चाहता है उसका मार्गदर्शन प्रदान करता है। और जिसे अल्लाह विफल कर दे और उसे हिदायत की तौफ़ीक़ न दे, तो उसके लिए मार्गदर्शन करने वाला कोई नहीं है।
आयत 24
أَفَمَن يَتَّقِى بِوَجْهِهِۦ سُوٓءَ ٱلْعَذَابِ يَوْمَ ٱلْقِيَـٰمَةِ ۚ وَقِيلَ لِلظَّـٰلِمِينَ ذُوقُوا۟ مَا كُنتُمْ تَكْسِبُونَ
أَفَمَن
क्या भला वो जो
يَتَّقِى
बचेगा
بِوَجْهِهِۦ
साथ अपने चेहरे के
سُوٓءَ
बुरे
ٱلْعَذَابِ
अज़ाब से
يَوْمَ
दिन
ٱلْقِيَـٰمَةِ ۚ
क़यामत के
وَقِيلَ
और कहा जाएगा
لِلظَّـٰلِمِينَ
ज़ालिमों से
ذُوقُوا۟
चखो
مَا
जो
كُنتُمْ
थे तुम
تَكْسِبُونَ
तुम कमाई करते
अब क्या जो क़ियामत के दिन अपने चहरें को बुरी यातना (से बचने) की ढाल बनाएगा वह (यातना से सुरक्षित लोगों जैसा होगा)? और ज़ालिमों से कहा जाएगा, "चखों मज़ा उस कमाई का, जो तुम करते रहे थे!"
तफ़्सीर:
क्या यह आदमी, जिसे अल्लाह ने हिदायत दी और दुनिया में उसे सफलता प्रदान की और आख़िरत में उसे जन्नत में दाखिल किया, उस आदमी के बराबर हो सकता है, जिसने कुफ़्र किया और कुफ़्र ही की अवस्था में मर गया, फिर अल्लाह ने उसके दोनों हाथों और पैरों को बेड़ियों में जकड़कर उसे जहन्नम में दाखिल कर दिया, जो आग से बचने के लिए अपने औंधे पड़े हुए चेहरे के सिवा किसी और अंग का प्रयोग नहीं कर सकता?! तथा कुफ़्र और पाप के द्वारा अपने ऊपर अत्याचार करने वालों से फटकार के रूप में कहा जाएगा : जो कुछ तुम कुफ़्र और पाप किया करते थे उसका स्वाद चखो। क्योंकि यही तुम्हारा प्रतिफल है।
आयत 25
كَذَّبَ ٱلَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ فَأَتَىٰهُمُ ٱلْعَذَابُ مِنْ حَيْثُ لَا يَشْعُرُونَ
كَذَّبَ
झुठलाया
ٱلَّذِينَ
उन लोगों ने जो
مِن
(were) before them
قَبْلِهِمْ
उनसे पहले थे
فَأَتَىٰهُمُ
तो आया उनके पास
ٱلْعَذَابُ
अज़ाब
مِنْ
from
حَيْثُ
जहाँ से
لَا
not
يَشْعُرُونَ
ना वो शऊर रखते थे
जो लोग उनसे पहले थे उन्होंने भी झूठलाया। अन्ततः उनपर वहाँ से यातना आ पहुँची, जिसका उन्हें कोई पता न था
तफ़्सीर:
जो समुदाय इन बहुदेववादियों से पहले थे, उन्होंने भी झुठलाया, तो उनपर अचानक वहाँ से यातना आई कि उन्हें उसका आभास भी न था कि वे उसके लिए तौबा के द्वारा तैयारी करते।
आयत 26
فَأَذَاقَهُمُ ٱللَّهُ ٱلْخِزْىَ فِى ٱلْحَيَوٰةِ ٱلدُّنْيَا ۖ وَلَعَذَابُ ٱلْـَٔاخِرَةِ أَكْبَرُ ۚ لَوْ كَانُوا۟ يَعْلَمُونَ
فَأَذَاقَهُمُ
तो चखाई उन्हें
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
ٱلْخِزْىَ
रुस्वाई
فِى
in
ٱلْحَيَوٰةِ
ज़िन्दगी में
ٱلدُّنْيَا ۖ
दुनिया की
وَلَعَذَابُ
और अलबत्ता अज़ाब
ٱلْـَٔاخِرَةِ
आख़िरत का
أَكْبَرُ ۚ
ज़्यादा बड़ा है
لَوْ
काश
كَانُوا۟
होते वो
يَعْلَمُونَ
वो जानते
फिर अल्लाह ने उन्हें सांसारिक जीवन में भी रुसवाई का मज़ा चखाया और आख़िरत की यातना तो इससे भी बड़ी है। काश! वे जानते
तफ़्सीर:
तो अल्लाह ने इस यातना के ज़रिए उन्हें सांसारिक जीवन में अपमान, लज्जा और रुसवाई (फ़ज़ीहत) चखाई। और आख़िरत की यातना जो उनकी प्रतीक्षा कर रही है, इससे भी बड़ी और अधिक गंभीर है, अगर वे जानते होते।
आयत 27
وَلَقَدْ ضَرَبْنَا لِلنَّاسِ فِى هَـٰذَا ٱلْقُرْءَانِ مِن كُلِّ مَثَلٍۢ لَّعَلَّهُمْ يَتَذَكَّرُونَ
وَلَقَدْ
और अलबत्ता तहक़ीक़
ضَرَبْنَا
बयान की हमने
لِلنَّاسِ
लोगों के लिए
فِى
in
هَـٰذَا
this
ٱلْقُرْءَانِ
इस क़ुरआन में
مِن
of
كُلِّ
हर क़िस्म की
مَثَلٍۢ
मिसाल
لَّعَلَّهُمْ
शायद की वो
يَتَذَكَّرُونَ
वो नसीहत पकड़ें
हमने इस क़ुरआन में लोगों के लिए हर प्रकार की मिसालें पेश कर दी हैं, ताकि वे शिक्षा ग्रहण करें
तफ़्सीर:
और हमने मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर उतरने वाले इस क़ुरआन में, लोगों के लिए, भलाई और बुराई, सत्य और असत्य तथा ईमान और कुफ़्र और अन्य चीज़ों के बारे में तरह तरह के उदाहरण प्रस्तुत किए हैं; इस आशा में कि लोग उन उदाहरणों से उपदेश ग्रहण करें, जो हमने उनसे बयान किया है, इसलिए वे सत्य पर अमल करें, और असत्य को छोड़ दें।
आयत 28
قُرْءَانًا عَرَبِيًّا غَيْرَ ذِى عِوَجٍۢ لَّعَلَّهُمْ يَتَّقُونَ
قُرْءَانًا
क़ुरआन
عَرَبِيًّا
अर्बी
غَيْرَ
नहीं है
ذِى
any
عِوَجٍۢ
टेढ़ वाला
لَّعَلَّهُمْ
शायद कि वो
يَتَّقُونَ
वो डरें
एक अरबी क़ुरआन के रूप में, जिसमें कोई टेढ़ नहीं, ताकि वे धर्मपरायणता अपनाएँ
तफ़्सीर:
हमने उसे अरबी भाषा में उतरने वाला क़ुरआन बनाया है। जिसमें किसी प्रकार का टेढ़ापन, कोई विचलन और कोई संदेह (गड़बड़) नहीं है। इस उम्मीद में कि लोग अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर, डरें।
आयत 29
ضَرَبَ ٱللَّهُ مَثَلًۭا رَّجُلًۭا فِيهِ شُرَكَآءُ مُتَشَـٰكِسُونَ وَرَجُلًۭا سَلَمًۭا لِّرَجُلٍ هَلْ يَسْتَوِيَانِ مَثَلًا ۚ ٱلْحَمْدُ لِلَّهِ ۚ بَلْ أَكْثَرُهُمْ لَا يَعْلَمُونَ
ضَرَبَ
बयान की
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
مَثَلًۭا
मिसाल
رَّجُلًۭا
एक आदमी की
فِيهِ
जिसमें
شُرَكَآءُ
कई शरीक हैं
مُتَشَـٰكِسُونَ
बाहम झगड़ने वाले
وَرَجُلًۭا
और एक शख़्स
سَلَمًۭا
जो सालिम/ पूरा है
لِّرَجُلٍ
एक ही शख़्स के लिए
هَلْ
क्या
يَسْتَوِيَانِ
वो दोनों बराबर हो सकते है
مَثَلًا ۚ
मिसाल में
ٱلْحَمْدُ
सब तारीफ़
لِلَّهِ ۚ
अल्लाह के लिए है
بَلْ
बल्कि
أَكْثَرُهُمْ
अक्सर उनके
لَا
(do) not
يَعْلَمُونَ
नहीं वो इल्म रखते
अल्लाह एक मिसाल पेश करता है कि एक व्यक्ति है, जिसके मालिक होने में कई क्यक्ति साक्षी है, आपस में खींचातानी करनेवाले, और एक क्यक्ति वह है जो पूरा का पूरा एक ही व्यक्ति का है। क्या दोनों का हाल एक जैसा होगा? सारी प्रशंसा अल्लाह ही के लिए है, किन्तु उनमें से अधिकांश लोग नहीं जानते
तफ़्सीर:
अल्लाह ने बहुदेववादी और एकेश्वरवादी का उदाहरण दिया है। एक व्यक्ति ऐसा है, जो परस्पर विरोधी भागीदारों के स्वामित्व में है; यदि वह उनमें से किसी एक को प्रसन्न करता है, तो किसी दूसरे को क्रोधित कर देता है। इस तरह वह हैरानी और उथल-पुथल में रहता है। जबकि दूसरा व्यक्ति एक ही आदमी के लिए विशिष्ट है। वही अकेला इसका मालिक है और यह उसकी मंशा को जानता है। इसलिए वह निश्चिंत और उसका मन शांत रहता है। ये दोनों व्यक्ति बराबर नहीं हो सकते। हर प्रकार की प्रशंसा अल्लाह के लिए है। लेकिन उनमें से अधिकांश नहीं जानते हैं। इसलिए वे अल्लाह के साथ उसके अलावा को साझी ठहराते हैं।
आयत 30
إِنَّكَ مَيِّتٌۭ وَإِنَّهُم مَّيِّتُونَ
إِنَّكَ
बेशक आप
مَيِّتٌۭ
मरने वाले हैं
وَإِنَّهُم
और बेशक वो भी
مَّيِّتُونَ
मरने वाले हैं
तुम्हें भी मरना है और उन्हें भी मरना है
तफ़्सीर:
(ऐ रसूल!) निश्चय आप मरने वाले हैं और निश्चय वे भी अनिवार्य रूप से मरने वाले हैं।
आज की ज़िंदगी में सबक़
कुरआन के असर और मिसालों से समझाने के अंदाज़ का ज़िक्र है। यह हमें सिखाता है कि कुरआन दिलों को नर्म करता है, इसे तवज्जो से सुनना और समझना चाहिए।
आयत 31
ثُمَّ إِنَّكُمْ يَوْمَ ٱلْقِيَـٰمَةِ عِندَ رَبِّكُمْ تَخْتَصِمُونَ
ثُمَّ
फिर
إِنَّكُمْ
बेशक तुम
يَوْمَ
दिन
ٱلْقِيَـٰمَةِ
क़यामत के
عِندَ
पास
رَبِّكُمْ
अपने रब के
تَخْتَصِمُونَ
तुम झगड़ा करोगे
फिर निश्चय ही तुम सब क़ियामत के दिन अपने रब के समक्ष झगड़ोगे
तफ़्सीर:
फिर (ऐ लोगो!) तुम क़ियामत के दिन अपने पालनहार के पास उन बातों को लेकर झगड़ोगे, जिनमें तुम वाद-विवाद किया करते हो। फिर यह स्पष्ट हो जाएगा कि कौन गलत है और कौन सही है।
आयत 32
۞ فَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّن كَذَبَ عَلَى ٱللَّهِ وَكَذَّبَ بِٱلصِّدْقِ إِذْ جَآءَهُۥٓ ۚ أَلَيْسَ فِى جَهَنَّمَ مَثْوًۭى لِّلْكَـٰفِرِينَ
۞ فَمَنْ
फिर कौन
أَظْلَمُ
बड़ा ज़ालिम है
مِمَّن
उससे जो
كَذَبَ
झूठ बोले
عَلَى
against
ٱللَّهِ
अल्लाह पर
وَكَذَّبَ
और वो झुठलाए
بِٱلصِّدْقِ
सच्चाई को
إِذْ
जब
جَآءَهُۥٓ ۚ
वो आ जाए उसके पास
أَلَيْسَ
क्या नहीं है
فِى
in
جَهَنَّمَ
जहन्नम में
مَثْوًۭى
ठिकाना
لِّلْكَـٰفِرِينَ
काफ़िरों के लिए
फिर उस व्यक्ति से बढ़कर अत्याचारी कौन होगा, जिसने झूठ घड़कर अल्लाह पर थोपा और सत्य को झूठला दिया जब वह उसके पास आया। क्या जहन्नम में इनकार करनेवालों का ठिकाना नहीं हैं?
तफ़्सीर:
उससे बड़ा ज़ालिम कोई नहीं, जो अल्लाह के साथ सहभागी, पत्नी एवं संतान संबंधित करता है, जो उसकी महिमा के योग्य नहीं है। इसी तरह उससे बढ़कर अत्याचारी कोई नहीं, जो उस वह़्य को झुठलाए, जो अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम लेकर आए हैं। क्या अल्लाह का तथा उसके रसूल के लाए हुए संदेश का इनकार करने वालों का ठिकाना और निवास जहन्नम में नहीं है?! क्यों नहीं, निश्चित रूप से उनका ठिकाना और निवास उसी के अंदर है।
आयत 33
وَٱلَّذِى جَآءَ بِٱلصِّدْقِ وَصَدَّقَ بِهِۦٓ ۙ أُو۟لَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلْمُتَّقُونَ
وَٱلَّذِى
और वो जो
جَآءَ
लाया
بِٱلصِّدْقِ
सच्चाई को
وَصَدَّقَ
और उसने तस्दीक़ की
بِهِۦٓ ۙ
उसकी
أُو۟لَـٰٓئِكَ
यही लोग हैं
هُمُ
वो
ٱلْمُتَّقُونَ
जो मुत्तक़ी हैं
और जो व्यक्ति सच्चाई लेकर आया और उसने उसकी पुष्टि की, ऐसे ही लोग डर रखते है
तफ़्सीर:
जो नबी अथवा कोई अन्य व्यक्ति अपनी कथनी व करनी में सत्य लेकर आया और जिसने उसे मानते हुए उसकी पुष्टी की तथा उसके अनुसार अमल किया, वही लोग हक़ीक़त में अल्लाह का भय रखते हैं, जो अपने पालनहार के आदेशों का पालन करते हैं और उसकी मना की हुई वस्तुओं से दूर रहते हैं।
आयत 34
لَهُم مَّا يَشَآءُونَ عِندَ رَبِّهِمْ ۚ ذَٰلِكَ جَزَآءُ ٱلْمُحْسِنِينَ
لَهُم
उनके लिए है
مَّا
जो
يَشَآءُونَ
वो चाहेंगे
عِندَ
पास
رَبِّهِمْ ۚ
उनके रब के
ذَٰلِكَ
ये
جَزَآءُ
बदला है
ٱلْمُحْسِنِينَ
नेकोकारों का
उनके लिए उनके रब के पास वह सब कुछ है, जो वे चाहेंगे। यह है उत्तमकारों का बदला
तफ़्सीर:
उनके लिए उनके पालनहार के यहाँ वह सारी कभी न ख़त्म होने वाली आनंद एवं सुख ही चीज़ें होंगी, जो वे चाहेंगे। यही बदला है उन सदाचारी बंदों का, जो अपने पैदा करने वाले अल्लाह तथा उसके बंदों के साथ अच्छा बरताव करते हैं।
आयत 35
لِيُكَفِّرَ ٱللَّهُ عَنْهُمْ أَسْوَأَ ٱلَّذِى عَمِلُوا۟ وَيَجْزِيَهُمْ أَجْرَهُم بِأَحْسَنِ ٱلَّذِى كَانُوا۟ يَعْمَلُونَ
لِيُكَفِّرَ
ताकि दूर कर दे
ٱللَّهُ
अल्लाह
عَنْهُمْ
उनसे
أَسْوَأَ
बदतरीन
ٱلَّذِى
वो जो
عَمِلُوا۟
उन्होंने अमल किए
وَيَجْزِيَهُمْ
और वो बदले में दे उन्हें
أَجْرَهُم
अजर उनके
بِأَحْسَنِ
बेहतरीन
ٱلَّذِى
वो जो
كَانُوا۟
थे वो
يَعْمَلُونَ
वो अमल करते
ताकि जो निकृष्टतम कर्म उन्होंने किए अल्लाह उन (के बुरे प्रभाव) को उनसे दूर कर दे। औऱ जो उत्तम कर्म वे करते रहे उसका उन्हें बदला प्रदान करे
तफ़्सीर:
ताकि अल्लाह उनके बुरे कर्मों को, जो वे संसार में करते थे, क्षमा याचना एवं अपने पालनहार के सामने गिड़गिड़ाने के कारण माफ़ कर दे और उनके अच्छे कर्मों का, जो वे करते थे, प्रतिफल प्रदान करे।
आयत 36
أَلَيْسَ ٱللَّهُ بِكَافٍ عَبْدَهُۥ ۖ وَيُخَوِّفُونَكَ بِٱلَّذِينَ مِن دُونِهِۦ ۚ وَمَن يُضْلِلِ ٱللَّهُ فَمَا لَهُۥ مِنْ هَادٍۢ
أَلَيْسَ
क्या नहीं है
ٱللَّهُ
अल्लाह
بِكَافٍ
काफ़ी
عَبْدَهُۥ ۖ
अपने बन्दे को
وَيُخَوِّفُونَكَ
और वो डराते हैं आप को
بِٱلَّذِينَ
उनसे जो
مِن
besides Him
دُونِهِۦ ۚ
उसके सिवा हैं
وَمَن
और जिसे
يُضْلِلِ
भटका दे
ٱللَّهُ
अल्लाह
فَمَا
तो नहीं
لَهُۥ
उसके लिए
مِنْ
any
هَادٍۢ
कोई हिदायत देने वाला
क्या अल्लाह अपने बन्दे के लिए काफ़ी नहीं है, यद्यपि वे तुम्हें उनसे डराते है, जो उसके सिवा (उन्होंने अपने सहायक बना रखे) है? अल्लाह जिसे गुमराही में डाल दे उसे मार्ग दिखानेवाला कोई नही
तफ़्सीर:
क्या अल्लाह अपने बंदे मुहम्मद सल्ल्लाहु अलैहि व सल्लम के धार्मिक एवं सांसारिक हितों की रक्षा और उन्हें उनके शत्रु से बचाने के लिए काफ़ी नहीं है?! क्यों नही, निश्चय वह आपके लिए काफी है। तथा (ऐ रसूल!) वे लोग अपनी अज्ञानता और मूर्खता के कारण, आपको उन मूर्तियों से डराते हैं, जिन्हें वे अल्लाह को छोड़कर पूजते हैं कि वे आपको कोई हानि पहुँचा देंगी। तथा जिसे अल्लाह असहाय छोड़ दे और उसे हिदायत की तौफ़ीक न दे, तो उसके लिए कोई मार्गदर्शक नहीं है, जो उसका मार्गदर्शन करे और उसे उसका सामर्थ्य प्रदान करे।
आयत 37
وَمَن يَهْدِ ٱللَّهُ فَمَا لَهُۥ مِن مُّضِلٍّ ۗ أَلَيْسَ ٱللَّهُ بِعَزِيزٍۢ ذِى ٱنتِقَامٍۢ
وَمَن
और जिसे
يَهْدِ
हिदायत दे
ٱللَّهُ
अल्लाह
فَمَا
तो नहीं
لَهُۥ
उसके लिए
مِن
any
مُّضِلٍّ ۗ
कोई भटकाने वाला
أَلَيْسَ
क्या नहीं है
ٱللَّهُ
अल्लाह
بِعَزِيزٍۢ
बहुत ज़बरदस्त
ذِى
All-Able of retribution
ٱنتِقَامٍۢ
इन्तिक़ाम लेने वाला
और जिसे अल्लाह मार्ग दिखाए उसे गुमराह करनेवाला भी कोई नहीं। क्या अल्लाह प्रभुत्वशाली, बदला लेनेवाला नहीं है?
तफ़्सीर:
और जिसे अल्लाह सीधा रास्ता दिखा दे, उसे कोई गुमराह करने वाला राह से हटा नहीं सकता। क्या अल्लाह प्रभुत्वशाली नहीं है, जिसे कोई पराजित नहीं कर सकता और वह अपना इनकार करने वाले तथा अवज्ञा करने वाले से बदला लेने वाला नहीं है?! अवश्य ही, वह बड़ा प्रभुत्वशाली और बदला लेने वाला है।
आयत 38
وَلَئِن سَأَلْتَهُم مَّنْ خَلَقَ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ لَيَقُولُنَّ ٱللَّهُ ۚ قُلْ أَفَرَءَيْتُم مَّا تَدْعُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ إِنْ أَرَادَنِىَ ٱللَّهُ بِضُرٍّ هَلْ هُنَّ كَـٰشِفَـٰتُ ضُرِّهِۦٓ أَوْ أَرَادَنِى بِرَحْمَةٍ هَلْ هُنَّ مُمْسِكَـٰتُ رَحْمَتِهِۦ ۚ قُلْ حَسْبِىَ ٱللَّهُ ۖ عَلَيْهِ يَتَوَكَّلُ ٱلْمُتَوَكِّلُونَ
وَلَئِن
और अलबत्ता अगर
سَأَلْتَهُم
पूछें आप उनसे
مَّنْ
किस ने
خَلَقَ
पैदा किया
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों
وَٱلْأَرْضَ
और ज़मीन को
لَيَقُولُنَّ
अलबत्ता वो ज़रूर कहेंगे
ٱللَّهُ ۚ
अल्लाह ने
قُلْ
कह दीजिए
أَفَرَءَيْتُم
क्या फिर देखा तुमने
مَّا
जिन्हें
تَدْعُونَ
तुम पुकारते हो
مِن
besides
دُونِ
सिवाए
ٱللَّهِ
अल्लाह के
إِنْ
अगर
أَرَادَنِىَ
इरादा करे मेरे साथ
ٱللَّهُ
अल्लाह
بِضُرٍّ
किसी तक्लीफ़ का
هَلْ
क्या
هُنَّ
वो सब
كَـٰشِفَـٰتُ
दूर करने वाली हैं
ضُرِّهِۦٓ
उसकी तक्लीफ़ को
أَوْ
या
أَرَادَنِى
वो इरादा करे मेरे साथ
بِرَحْمَةٍ
किसी रहमत का
هَلْ
क्या
هُنَّ
वो सब
مُمْسِكَـٰتُ
रोकने वाली हैं
رَحْمَتِهِۦ ۚ
उसकी रहमत को
قُلْ
कह दीजिए
حَسْبِىَ
काफ़ी है मुझे
ٱللَّهُ ۖ
अल्लाह
عَلَيْهِ
उसी पर
يَتَوَكَّلُ
तवक्कुल करते है
ٱلْمُتَوَكِّلُونَ
तवक्कुल करने वाले
यदि तुम उनसे पूछो कि "आकाशों और धरती को किसने पैदा किया?" को वे अवश्य कहेंगे, "अल्लाह ने।" कहो, "तुम्हारा क्या विचार है? यदि अल्लाह मुझे कोई तकलीफ़ पहुँचानी चाहे तो क्या अल्लाह से हटकर जिनको तुम पुकारते हो वे उसकी पहुँचाई हुई तकलीफ़ को दूर कर सकते है? या वह मुझपर कोई दयालुता दर्शानी चाहे तो क्या वे उसकी दयालुता को रोक सकते है?" कह दो, "मेरे लिए अल्लाह काफ़ी है। भरोसा करनेवाले उसी पर भरोसा करते है।"
तफ़्सीर:
और यदि आप (ऐ रसूल) इन बहूदेववादियों से प्रश्न करें कि आकाशों तथा धरती को किसने पैदा किया है? तो वे अवश्य कहेंगे कि अल्लाह ने उन्हें पैदा किया है। आप उनकी विवशता को ज़ाहिर करने के लिए कहिए कि तुम मुझे उन मूर्तियों के बारे में बताओ, जिन्हें तुम अल्लाह के सिवा पूजते हो कि यदि अल्लाह मुझे कोई हानि पहुँचाना चाहे, तो क्या ये उसकी हानि को मुझसे दूर कर सकती हैं? या मेरे साथ दया करना चाहे, तो क्या ये उसकी दया को रोक सकती हैं? आप कह दें कि मेरे लिए केवल अल्लाह ही काफ़ी है। उसी पर मैं अपने तमाम मामलों में भरोसा करता हूँ। और केवल उसीपर भरोसा करने वाले भरोसा करते हैं।
आयत 39
قُلْ يَـٰقَوْمِ ٱعْمَلُوا۟ عَلَىٰ مَكَانَتِكُمْ إِنِّى عَـٰمِلٌۭ ۖ فَسَوْفَ تَعْلَمُونَ
قُلْ
कह दीजिए
يَـٰقَوْمِ
ऐ मेरी क़ौम
ٱعْمَلُوا۟
अमल करो
عَلَىٰ
(according) to
مَكَانَتِكُمْ
अपनी जगह पर
إِنِّى
बेशक मैं
عَـٰمِلٌۭ ۖ
अमल करने वाला हूँ
فَسَوْفَ
पस अनक़रीब
تَعْلَمُونَ
तुम जान लोगे
कह दो, "ऐ मेरी क़ौम के लोगो! तुम अपनी जगह काम करो। मैं (अपनी जगह) काम करता हूँ। तो शीघ्र ही तुम जान लोगे
तफ़्सीर:
(ऐ रसूल) आप कह देंः ऐ मेरी जाति के लोगो! तुमने शिर्क की जिस परिस्थिति को अपने लिए पसंद कर लिया है, उसी के अनुसार अमल करते रहो। मैं भी अपने पालनहार के आदेश अनुसार अमल करते हुए, लोगों को एकेश्वरवाद तथा केवल एक अल्लाह की बंदगी की ओर बुलाता रहूँगा। फिर शीघ्र ही तुम्हें पता जल जाएगा कि किस रास्ते का किया अंजाम है।
आयत 40
مَن يَأْتِيهِ عَذَابٌۭ يُخْزِيهِ وَيَحِلُّ عَلَيْهِ عَذَابٌۭ مُّقِيمٌ
مَن
कौन है
يَأْتِيهِ
आता है उसके पास
عَذَابٌۭ
ऐसा अज़ाब
يُخْزِيهِ
जो रुस्वा करदे उसे
وَيَحِلُّ
और उतरता है
عَلَيْهِ
उस पर
عَذَابٌۭ
अज़ाब
مُّقِيمٌ
क़ायम रहने वाला/ दायमी
कि किस पर वह यातना आती है जो उसे रुसवा कर देगी और किसपर अटल यातना उतरती है।"
तफ़्सीर:
तुम्हें शीघ्र ही मालूम हो जाएगा कि किसपर दुनिया में अपमानकारी यातना आएगी तथा आख़िरत में स्थायी सज़ा उतरेगी, जो न कभी रुकेगी, न कभी खत्म होगी।
आज की ज़िंदगी में सबक़
कयामत के दिन झूठ बोलने वालों के अंजाम का ज़िक्र है। यह सबक हमें सिखाता है कि अल्लाह पर झूठ बांधना सबसे बड़ा गुनाह है, हमें सच्चाई का दामन थामे रखना चाहिए।
आयत 41
إِنَّآ أَنزَلْنَا عَلَيْكَ ٱلْكِتَـٰبَ لِلنَّاسِ بِٱلْحَقِّ ۖ فَمَنِ ٱهْتَدَىٰ فَلِنَفْسِهِۦ ۖ وَمَن ضَلَّ فَإِنَّمَا يَضِلُّ عَلَيْهَا ۖ وَمَآ أَنتَ عَلَيْهِم بِوَكِيلٍ
إِنَّآ
बेशक हम
أَنزَلْنَا
नाज़िल की हमने
عَلَيْكَ
आप पर
ٱلْكِتَـٰبَ
किताब
لِلنَّاسِ
लोगों के लिए
بِٱلْحَقِّ ۖ
साथ हक़ के
فَمَنِ
तो जो
ٱهْتَدَىٰ
हिदायत पा जाए
فَلِنَفْسِهِۦ ۖ
तो उसके अपने ही लिए है
وَمَن
और जो कोई
ضَلَّ
भटके
فَإِنَّمَا
तो बेशक
يَضِلُّ
वो भटकता है
عَلَيْهَا ۖ
अपने ख़िलाफ़
وَمَآ
और नहीं
أَنتَ
आप
عَلَيْهِم
उन पर
بِوَكِيلٍ
कोई ज़िम्मेदार
निश्चय ही हमने लोगों के लिए हक़ के साथ तुमपर किताब अवतरित की है। अतः जिसने सीधा मार्ग ग्रहण किया तो अपने ही लिए, और जो भटका, तो वह भटककर अपने ही को हानि पहुँचाता है। तुम उनके ज़िम्मेदार नहीं हो
तफ़्सीर:
निःसंदेह हमने (ऐ रसूल!) आपपर यह क़ुरआन लोगों के लिए सत्य के साथ उतारा है, ताकि आप उन्हें सावधान करें। अतः जो सीधे रास्ते पर आ गया, तो उसके सीधे रास्ते पर आने का लाभ उसी को होगा। उसके सीधे रास्ते पर आने से अल्लाह को कोई लाभ नहीं होगा। क्योंकि अल्लाह को उसकी आवश्यकता नहीं है। तथा जो सीधे मार्ग से भटक गया, तो उसके सीधे मार्ग से भटकने का नुकसान उसी को होगा। उसके पथ-भ्रष्ट होने से अल्लाह को कोई नुकसान नहीं पहुँचता। तथा आप उनके ऊपर नियुक्त नहीं हैं कि उन्हें सीधा रास्ता ग्रहण करने पर मजबूर करें। आपका काम केवल उन्हें वह बात पहुँचा देना है, जिसे पहुँचाने का आपको आदेश दिया गया है।
आयत 42
ٱللَّهُ يَتَوَفَّى ٱلْأَنفُسَ حِينَ مَوْتِهَا وَٱلَّتِى لَمْ تَمُتْ فِى مَنَامِهَا ۖ فَيُمْسِكُ ٱلَّتِى قَضَىٰ عَلَيْهَا ٱلْمَوْتَ وَيُرْسِلُ ٱلْأُخْرَىٰٓ إِلَىٰٓ أَجَلٍۢ مُّسَمًّى ۚ إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَـٰتٍۢ لِّقَوْمٍۢ يَتَفَكَّرُونَ
ٱللَّهُ
अल्लाह
يَتَوَفَّى
वो फ़ौत करता है
ٱلْأَنفُسَ
जानों को
حِينَ
वक़्त पर
مَوْتِهَا
उनकी मौत के
وَٱلَّتِى
और वो जो
لَمْ
ना
تَمُتْ
वो मरें
فِى
in
مَنَامِهَا ۖ
अपनी नींद में
فَيُمْسِكُ
पस वो रोक लेता है
ٱلَّتِى
उसको
قَضَىٰ
उसने फ़ैसला किया
عَلَيْهَا
जिस पर
ٱلْمَوْتَ
मौत का
وَيُرْسِلُ
और वो भेज देता है
ٱلْأُخْرَىٰٓ
दूसरी (रूहों )को
إِلَىٰٓ
for
أَجَلٍۢ
एक वक़्त तक
مُّسَمًّى ۚ
जो मुक़र्रर है
إِنَّ
बेशक
فِى
in
ذَٰلِكَ
उसमें
لَـَٔايَـٰتٍۢ
अलबत्ता निशानियाँ हैं
لِّقَوْمٍۢ
उन लोगों के लिए
يَتَفَكَّرُونَ
जो ग़ौर व फ़िक्र करते है
अल्लाह ही प्राणों को उनकी मृत्यु के समय ग्रस्त कर लेता है और जिसकी मृत्यु नहीं आई उसे उसकी निद्रा की अवस्था में (ग्रस्त कर लेता है) । फिर जिसकी मृत्यु का फ़ैसला कर दिया है उसे रोक रखता है। और दूसरों को एक नियत समय तक के लिए छोड़ देता है। निश्चय ही इसमें कितनी ही निशानियाँ है सोच-विचार करनेवालों के लिए
तफ़्सीर:
अल्लाह ही उन प्राणों को क़ब्ज़ करता है, जिनका निर्धारित समय खत्म हो चुका हो। और रहे वह, जिनका निर्धारित समय खत्म नही हुआ है, तो उनको नींद के समय क़ब्ज़ करता है। फिर जिसकी मौत का फ़ैसला हो चुका हो, उसे रोक लेता है और जिसकी मौत का फ़ैसला न हुआ हो, उसे अपने ज्ञान के उनुसार एक निर्धारित समय तक छोड़ देता है। अवश्य इस क़ब्ज़ करने तथा छोड़ने और मौत देने तथा जीवित रखने में, उन लोगों के लिए निशानियाँ हैं, जो इस बिंदु पर सोचते हैं कि वह हस्ती जो ऐसा करने की क्षमता रखती है, वह लोगों को मरने के पश्चात हिसाब व प्रतिफ़ल के लिए दोबारा ज़िंदा भी कर सकती है।
आयत 43
أَمِ ٱتَّخَذُوا۟ مِن دُونِ ٱللَّهِ شُفَعَآءَ ۚ قُلْ أَوَلَوْ كَانُوا۟ لَا يَمْلِكُونَ شَيْـًۭٔا وَلَا يَعْقِلُونَ
أَمِ
क्या
ٱتَّخَذُوا۟
उन्होंने बना रखे हैं
مِن
besides
دُونِ
सिवाए
ٱللَّهِ
अल्लाह के
شُفَعَآءَ ۚ
कुछ सिफ़ारिशी
قُلْ
कह दीजिए
أَوَلَوْ
क्या भला अगर
كَانُوا۟
हों वो
لَا
not
يَمْلِكُونَ
ना वो मिल्कियत रखते
شَيْـًۭٔا
किसी चीज़ की
وَلَا
और ना
يَعْقِلُونَ
वो अक़्ल रखते
(क्या उनके उपास्य प्रभुता में साझीदार है) या उन्होंने अल्लाह से हटकर दूसरों को सिफ़ारिशी बना रखा है? कहो, "क्या यद्यपि वे किसी चीज़ का अधिकार न रखते हों और न कुछ समझते ही हो तब भी?"
तफ़्सीर:
इन मुश्रिकों ने अपने कुछ बुतों को अपना सिफ़ारिशी बना लिया है और अल्लाह के स्थान पर उन्हीं से लाभ की उम्मीद लगाए बैठे हैं। ऐ रसूल! आप कह दें: क्या तुम इनको सिफ़ारिशी बनाकर ही रहोगे, यद्यपि वे अपने लिए और तुम्हारे लिए किसी चीज़ के मालिक न हों, और न ही कुछ समझ सकते हों? ये तो चेतना से खाली जड़ पदार्थ हैं, जो न बोलते हैं, न सुनते है, न देखते हैं, न लाभ दे सकते हैं और न क्षति पहुँचा सकते हैं।
आयत 44
قُل لِّلَّهِ ٱلشَّفَـٰعَةُ جَمِيعًۭا ۖ لَّهُۥ مُلْكُ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ ۖ ثُمَّ إِلَيْهِ تُرْجَعُونَ
قُل
कह दीजिए
لِّلَّهِ
अल्लाह ही के लिए है
ٱلشَّفَـٰعَةُ
शफ़ाअत/ सिफ़ारिश
جَمِيعًۭا ۖ
सारी की सारी
لَّهُۥ
उसी के लिए है
مُلْكُ
बादशाहत
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों
وَٱلْأَرْضِ ۖ
और ज़मीन की
ثُمَّ
फिर
إِلَيْهِ
तरफ़ उसी के
تُرْجَعُونَ
तुम लौटाए जाओगे
कहो, "सिफ़ारिश तो सारी की सारी अल्लाह के अधिकार में है। आकाशों और धरती की बादशाही उसी की है। फिर उसी की ओर तुम लौटाए जाओगे।"
तफ़्सीर:
ऐ रसूल! आप इन बहुदेववादियों से कह दें कि सारी अनुशंसा तो अल्लाह के अधिकार में है। उसकी अनुमति के बग़ैर कोई सिफ़ारिश नहीं कर सकता और सिफ़ारिश भी उसी की कर सकता है, जिससे अल्लाह राज़ी हो। आकाशों तथा धरती का राज्य उसी के लिए है। फिर उसी की ओर तुम क़ियामत के दिन लौटाए जाओगे, और वह तुम्हें तुम्हारे कर्मों का प्रतिफल देगा।
आयत 45
وَإِذَا ذُكِرَ ٱللَّهُ وَحْدَهُ ٱشْمَأَزَّتْ قُلُوبُ ٱلَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِٱلْـَٔاخِرَةِ ۖ وَإِذَا ذُكِرَ ٱلَّذِينَ مِن دُونِهِۦٓ إِذَا هُمْ يَسْتَبْشِرُونَ
وَإِذَا
और जब
ذُكِرَ
ज़िक्र किया जाता है
ٱللَّهُ
अल्लाह का
وَحْدَهُ
अकेले उसी का
ٱشْمَأَزَّتْ
नफ़रत करते हैं
قُلُوبُ
दिल
ٱلَّذِينَ
उन लोगों के जो
لَا
(do) not
يُؤْمِنُونَ
नहीं वो ईमान लाते
بِٱلْـَٔاخِرَةِ ۖ
आख़िरत पर
وَإِذَا
और जब
ذُكِرَ
ज़िक्र किया जाता है
ٱلَّذِينَ
उनका जो
مِن
besides Him
دُونِهِۦٓ
उसके अलावा हैं
إِذَا
यकायक
هُمْ
वो
يَسْتَبْشِرُونَ
वो ख़ुश हो जाते हैं
अकेले अल्लाह का ज़िक्र किया जाता है तो जो लोग आख़िरत पर ईमान नहीं रखते उनके दिल भिंचने लगते है, किन्तु जब उसके सिवा दूसरों का ज़िक्र होता है तो क्या देखते है कि वे खुशी से खिले जा रहे है
तफ़्सीर:
और जब अकेले अल्लाह का ज़िक्र किया जाता है, तो उन मुश्रिकों के दिल संकीर्ण होने लगते हैं, जो आख़िरत तथा उस दिन के जीवित होकर उठने, हिसाब-किताब और जज़ा-सज़ा पर ईमान नहीं रखते। परन्तु जब उन मूर्तियों का ज़िक्र किया जाता है, जिन्हें वे अल्लाह के सिवा पूजते हैं , तो बड़े प्रसन्न हो जाते हैं।
आयत 46
قُلِ ٱللَّهُمَّ فَاطِرَ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ عَـٰلِمَ ٱلْغَيْبِ وَٱلشَّهَـٰدَةِ أَنتَ تَحْكُمُ بَيْنَ عِبَادِكَ فِى مَا كَانُوا۟ فِيهِ يَخْتَلِفُونَ
قُلِ
कह दीजिए
ٱللَّهُمَّ
ऐ अल्लाह
فَاطِرَ
ऐ पैदा करने वाले
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों
وَٱلْأَرْضِ
और ज़मीन के
عَـٰلِمَ
ऐ जानने वाले
ٱلْغَيْبِ
ग़ैब
وَٱلشَّهَـٰدَةِ
और हाज़िर के
أَنتَ
तू ही
تَحْكُمُ
तू फ़ैसला करेगा
بَيْنَ
दर्मियान
عِبَادِكَ
अपने बन्दों के
فِى
in
مَا
उसमें जो
كَانُوا۟
हैं वो
فِيهِ
उसमें
يَخْتَلِفُونَ
वो इख़्तिलाफ़ करते
कहो, "ऐ अल्लाह, आकाशो और धरती को पैदा करनेवाले; परोक्ष और प्रत्यक्ष के जाननेवाले! तू ही अपने बन्दों के बीच उस चीज़ का फ़ैसला करेगा, जिसमें वे विभेद कर रहे है।"
तफ़्सीर:
(ऐ रसूल!) आप कह दें: ऐ अल्लाह, आकाशों तथा धरती को किसी पूर्व नमूने के बिना पैदा करने वाले, परोक्ष तथा प्रत्यक्ष के जानने वाले, जिससे कोई वस्तु छिपी नही है! तू ही क़ियामत के दिन अपने बंदों के बीच उस बात का निर्णय करेगा, जिसके बारे में वे दुनिया में झगड़ रहे थे। अतः तू स्पष्ट कर देगा कि कौन सत्य पर था और कौन असत्य पर तथा कौन सौभाग्यशाली था और कौन दुर्भाग्यशाली।
आयत 47
وَلَوْ أَنَّ لِلَّذِينَ ظَلَمُوا۟ مَا فِى ٱلْأَرْضِ جَمِيعًۭا وَمِثْلَهُۥ مَعَهُۥ لَٱفْتَدَوْا۟ بِهِۦ مِن سُوٓءِ ٱلْعَذَابِ يَوْمَ ٱلْقِيَـٰمَةِ ۚ وَبَدَا لَهُم مِّنَ ٱللَّهِ مَا لَمْ يَكُونُوا۟ يَحْتَسِبُونَ
وَلَوْ
और अगर
أَنَّ
बेशक हो
لِلَّذِينَ
उनके लिए जिन्होंने
ظَلَمُوا۟
ज़ुल्म किया
مَا
जो कुछ
فِى
(is) in
ٱلْأَرْضِ
ज़मीन में है
جَمِيعًۭا
सब का सब
وَمِثْلَهُۥ
और उसकी मानिन्द
مَعَهُۥ
साथ उसके
لَٱفْتَدَوْا۟
अलबत्ता वे फ़िदये में दे दें
بِهِۦ
उसे
مِن
from
سُوٓءِ
(the) evil
ٱلْعَذَابِ
(बचने के लिए) बुरे अज़ाब से
يَوْمَ
दिन
ٱلْقِيَـٰمَةِ ۚ
क़यामत के
وَبَدَا
और ज़ाहिर हो जाएगा
لَهُم
उनके लिए
مِّنَ
from
ٱللَّهِ
अल्लाह की तरफ़ से
مَا
जो
لَمْ
ना
يَكُونُوا۟
थे वो
يَحْتَسِبُونَ
वो गुमान रखते
जिन लोगों ने ज़ुल्म किया यदि उनके पास वह सब कुछ हो जो धरती में है और उसके साथ उतना ही और भी, तो वे क़ियामत के दिन बुरी यातना से बचने के लिए वह सब फ़िदया (प्राण-मुक्ति के बदले) में दे डाले। बात यह है कि अल्लाह की ओर से उनके सामने वह कुछ आ जाएगा जिसका वे गुमान तक न करते थे
तफ़्सीर:
अगर शिर्क और पापों के द्वारा स्वयं पर अत्याचार करने वालों के पास वह सब कुछ हो जाए, जो धरती पर क़ीमती वस्तुएँ, धन, आदि मौजूद है, और उसके साथ उतना ही और मिलकर दोगुना हो जाए; तो वे उस गंभीर यातना से बचने के लिए जो उन्होंने (क़ियामत के दिन) अपने पुनः जीवित होने के बाद देखी थी, वह सब कुछ फ़िदया (छुड़ौती) में दे देंगे। लेकिन धरती की सारी चीज़ें उनकी नहीं हो सकतीं। और यदि यह मान लिया जाए कि वे उनकी हो भी गईं, तो उन्हें उनकी ओर से स्वीकार नहीं किया जाएगा। तथा उनके लिए अल्लाह की ओर से ऐसी-ऐसी यातनाएँ सामने आएँगी, जिनकी उन्हें कोई उम्मीद नहीं थी।
आयत 48
وَبَدَا لَهُمْ سَيِّـَٔاتُ مَا كَسَبُوا۟ وَحَاقَ بِهِم مَّا كَانُوا۟ بِهِۦ يَسْتَهْزِءُونَ
وَبَدَا
और ज़ाहिर हो जाऐंगी
لَهُمْ
उनके लिए
سَيِّـَٔاتُ
बुराइयाँ
مَا
उन (आमाल)की जो
كَسَبُوا۟
उन्होंने कमाए
وَحَاقَ
और घेर लेगा
بِهِم
उन्हें
مَّا
वो जो
كَانُوا۟
थे वो
بِهِۦ
उसका
يَسْتَهْزِءُونَ
वो मज़ाक़ उड़ाते
और जो कुछ उन्होंने कमाया उसकी बुराइयाँ उनपर प्रकट हो जाएँगी। और वही चीज़ उन्हें घेर लेगी जिसकी वे हँसी उड़ाया करते थे
तफ़्सीर:
और उनके किए हुए शिर्क और गुनाह का दुष्परिणाम उनके सामने आ जाएगा और वही यातना उन्हें घेर लेगी, जिससे दुनिया में उन्हें डराया जाता, तो उसका मज़ाक उड़ाने लगते थे।
आयत 49
فَإِذَا مَسَّ ٱلْإِنسَـٰنَ ضُرٌّۭ دَعَانَا ثُمَّ إِذَا خَوَّلْنَـٰهُ نِعْمَةًۭ مِّنَّا قَالَ إِنَّمَآ أُوتِيتُهُۥ عَلَىٰ عِلْمٍۭ ۚ بَلْ هِىَ فِتْنَةٌۭ وَلَـٰكِنَّ أَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُونَ
فَإِذَا
फिर जब
مَسَّ
पहुँचता है
ٱلْإِنسَـٰنَ
इन्सान को
ضُرٌّۭ
कोई नुक़्सान
دَعَانَا
वो पुकारता है हमें
ثُمَّ
फिर
إِذَا
जब
خَوَّلْنَـٰهُ
हम अता करते हैं उसे
نِعْمَةًۭ
कोई नेअमत
مِّنَّا
अपने पास से
قَالَ
वो कहता है
إِنَّمَآ
बेशक
أُوتِيتُهُۥ
दिया गया हूँ मैं उसे
عَلَىٰ
for
عِلْمٍۭ ۚ
इल्म की बिना पर
بَلْ
बल्कि
هِىَ
वो
فِتْنَةٌۭ
एक फ़ितना है
وَلَـٰكِنَّ
और लेकिन
أَكْثَرَهُمْ
अक्सर उनके
لَا
(do) not
يَعْلَمُونَ
नहीं वो इल्म रखते
अतः जब मनुष्य को कोई तकलीफ़ पहुँचती है तो वह हमें पुकारने लगता है, फिर जब हमारी ओर से उसपर कोई अनुकम्पा होती है तो कहता है, "यह तो मुझे ज्ञान के कारण प्राप्त हुआ।" नहीं, बल्कि यह तो एक परीक्षा है, किन्तु उनमें से अधिकतर जानते नहीं
तफ़्सीर:
जब काफ़िर इनसान को कोई बीमारी या ग़रीबी आदि आती है, तो हमसे उसे दूर करने की प्रार्थाना करता है। फिर जब हम उसे स्वास्थ्य एवं धन आदि के रूप में कोई नेमत देते हैं, तो कहता हैः "मुझे अल्लाह ने यह सब कुछ इस लिए प्रदान किया है, क्योंकि उसे पता है कि मैं इसका हक़दार हूँ।" जबकि सच्चाई यह है कि यह अल्लाह की ओर से आज़माइश और ढील है। किन्तु अधिकतर काफ़िर लोग इससे परिचित नहीं हैंं। यही कारण है कि वे अल्लाह की नेमतों के धोखे में पड़ जाते हैं।
आयत 50
قَدْ قَالَهَا ٱلَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ فَمَآ أَغْنَىٰ عَنْهُم مَّا كَانُوا۟ يَكْسِبُونَ
قَدْ
तहक़ीक़
قَالَهَا
कहा था उसे
ٱلَّذِينَ
उन लोगों ने जो
مِن
before them
قَبْلِهِمْ
उनसे पहले थे
فَمَآ
तो ना
أَغْنَىٰ
काम आया
عَنْهُم
उनके
مَّا
जो
كَانُوا۟
थे वो
يَكْسِبُونَ
वो कमाई करते
यही बात वे लोग भी कह चुके है, जो उनसे पहले गुज़रे है। किन्तु जो कुछ कमाई वे करते है, वह उनके कुछ काम न आई
तफ़्सीर:
यही बात उनके पूर्ववर्ती काफ़िरों ने भी कही थीं। परन्तु उनका कमाया हुआ धन-सम्मान उनके कुछ काम न आया।
आज की ज़िंदगी में सबक़
मौत के वक्त रूह कब्ज़ होने का ज़िक्र है। यह हमें सिखाता है कि नींद और मौत दोनों अल्लाह के इख्तियार में हैं, इससे हमें अपनी बेबसी और अल्लाह की कुदरत का एहसास होना चाहिए।
आयत 51
فَأَصَابَهُمْ سَيِّـَٔاتُ مَا كَسَبُوا۟ ۚ وَٱلَّذِينَ ظَلَمُوا۟ مِنْ هَـٰٓؤُلَآءِ سَيُصِيبُهُمْ سَيِّـَٔاتُ مَا كَسَبُوا۟ وَمَا هُم بِمُعْجِزِينَ
فَأَصَابَهُمْ
तो पहुँचीं उन्हें
سَيِّـَٔاتُ
बुराइयाँ
مَا
उन (आमाल)की जो
كَسَبُوا۟ ۚ
उन्होंने कमाए
وَٱلَّذِينَ
और वो जिन्होंने
ظَلَمُوا۟
ज़ुल्म किया
مِنْ
of
هَـٰٓؤُلَآءِ
उन लोगों में से
سَيُصِيبُهُمْ
अनक़रीब पहुँचेंगी उन्हें
سَيِّـَٔاتُ
बुराइयाँ
مَا
उन (आमाल)की जो
كَسَبُوا۟
उन्होंने कमाए
وَمَا
और नहीं हैं
هُم
वो
بِمُعْجِزِينَ
आजिज़ करने वाले
फिर जो कुछ उन्होंने कमाया, उसकी बुराइयाँ उनपर आ पड़ी और इनमें से भी जिन लोगों ने ज़ुल्म किया, उनपर भी जो कुछ उन्होंने कमाया उसकी बुराइयाँ जल्द ही आ पड़ेगी। और वे काबू से बाहर निकलनेवाले नहीं
तफ़्सीर:
तो उन्हें अपने किए हुए शिर्क और गुनाह की बुराई के बदले ने घेर लिया। और इन उपस्थित लोगों में से भी जिन लोगों ने शिर्क और गुनाह के ज़रिए अपने ऊपर अत्याचार किया है, उन्हें भी पिछले लोगों की तरह उनके बुरे कर्मों का बदला घेर लेगा। और वे न अल्लाह की पकड़ से निकल सकते हैं और न उसे विवश कर सकते हैं।
आयत 52
أَوَلَمْ يَعْلَمُوٓا۟ أَنَّ ٱللَّهَ يَبْسُطُ ٱلرِّزْقَ لِمَن يَشَآءُ وَيَقْدِرُ ۚ إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَـٰتٍۢ لِّقَوْمٍۢ يُؤْمِنُونَ
أَوَلَمْ
क्या भला नहीं
يَعْلَمُوٓا۟
उन्होंने जाना
أَنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
يَبْسُطُ
वो कुशादा करता है
ٱلرِّزْقَ
रिज़्क़
لِمَن
जिसके लिए
يَشَآءُ
वो चाहता है
وَيَقْدِرُ ۚ
और वो तंग कर देता है
إِنَّ
बेशक
فِى
in
ذَٰلِكَ
इसमें
لَـَٔايَـٰتٍۢ
अलबत्ता निशानियाँ हैं
لِّقَوْمٍۢ
उन लोगों के लिए
يُؤْمِنُونَ
जो ईमान लाते हैं
क्या उन्हें मालूम नहीं कि अल्लाह जिसके लिए चाहता है रोज़ी कुशादा कर देता है और जिसके लिए चाहता है नपी-तुली कर देता है? निस्संदेह इसमें उन लोगों के लिए बड़ी निशानियाँ है जो ईमान लाएँ
तफ़्सीर:
क्या इन मुश्रिकों ने यह बात कहते समय इस तथ्य को ध्यान में नहीं रखा कि अल्लाह जिसके लिए चाहता है, रोज़ी को फैला देता है, यह आज़माने के लिए कि वह शुक्र करता है या नाशुक्री?! और जिसके लिए चाहता है, रोज़ी को तंग कर देता है, यह जानने के लिए कि वह सब्र करता है या अल्लाह के निर्णय पर नाराज़गी जताता है?! निश्चित रूप से इस रोज़ी को फैलाने और तंग करने में, उन लोगों के लिए बहुत-से निर्देश हैं, जो ईमान रखते हैं, क्योंकि वही निर्देशों का लाभ उठाते हैं। रही बात काफ़िरों की, तो वे उनसे मुँह फेरकर गुज़र जाते हैं।
आयत 53
۞ قُلْ يَـٰعِبَادِىَ ٱلَّذِينَ أَسْرَفُوا۟ عَلَىٰٓ أَنفُسِهِمْ لَا تَقْنَطُوا۟ مِن رَّحْمَةِ ٱللَّهِ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ يَغْفِرُ ٱلذُّنُوبَ جَمِيعًا ۚ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلْغَفُورُ ٱلرَّحِيمُ
۞ قُلْ
कह दीजिए
يَـٰعِبَادِىَ
ऐ मेरे बन्दो
ٱلَّذِينَ
वो जिन्होंने
أَسْرَفُوا۟
ज़्यादती की
عَلَىٰٓ
against
أَنفُسِهِمْ
अपने नफ़्सों पर
لَا
(do) not
تَقْنَطُوا۟
ना तुम मायूस हो
مِن
of
رَّحْمَةِ
रहमत से
ٱللَّهِ ۚ
अल्लाह की
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
يَغْفِرُ
वो बख़्श देता है
ٱلذُّنُوبَ
गुनाहों को
جَمِيعًا ۚ
सब के सब को
إِنَّهُۥ
बेशक वो
هُوَ
वो ही है
ٱلْغَفُورُ
बहुत बख़्शने वाला
ٱلرَّحِيمُ
निहायत रहम करने वाला
कह दो, "ऐ मेरे बन्दो, जिन्होंने अपने आप पर ज्यादती की है, अल्लाह की दयालुता से निराश न हो। निस्संदेह अल्लाह सारे ही गुनाहों का क्षमा कर देता है। निश्चय ही वह बड़ा क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है
तफ़्सीर:
(ऐ रसूल!) आप मेरे उन बंदों से कह दें, जिन्होंने अल्लाह के साथ शिर्क करके और गुनाहों में पड़कर अपने ऊपर अत्याचार किए हैं कि अल्लाह की दया और गुनाहों की माफ़ी से निराश न हों। अवश्य अल्लाह क्षमा याचना करने वालों के सारे पाप क्षमा कर देता है। निश्चय वह तौबा करने वालों के गुनाहों को क्षमा करने वाला और दयालु है।
आयत 54
وَأَنِيبُوٓا۟ إِلَىٰ رَبِّكُمْ وَأَسْلِمُوا۟ لَهُۥ مِن قَبْلِ أَن يَأْتِيَكُمُ ٱلْعَذَابُ ثُمَّ لَا تُنصَرُونَ
وَأَنِيبُوٓا۟
और रुजूअ करो
إِلَىٰ
to
رَبِّكُمْ
तरफ़ अपने रब के
وَأَسْلِمُوا۟
और फ़रमाबरदार बन जाओ
لَهُۥ
उसके लिए
مِن
before
قَبْلِ
इससे पहले
أَن
कि
يَأْتِيَكُمُ
आ जाए तुम्हारे पास
ٱلْعَذَابُ
अज़ाब
ثُمَّ
फिर
لَا
not
تُنصَرُونَ
ना तुम मदद किए जाओ
रुजू हो अपने रब की ओर और उसके आज्ञाकारी बन जाओ, इससे पहले कि तुमपर यातना आ जाए। फिर तुम्हारी सहायता न की जाएगी
तफ़्सीर:
अपने पालनहार की आेर तौबा और अच्छे कर्मों के ज़रिए लाैट चलो और उसी के कहे के अनुसार चलो, इससे पहले कि प्रलय की यातना आ पहुँचे, फ़िर तुम अपनी मूर्तियों तथा परिवार के लोगों में से किसी को न पाओ, जो तुम्हें जहन्नम की यातना से बचाने में तुम्हारी सहायता करे।
आयत 55
وَٱتَّبِعُوٓا۟ أَحْسَنَ مَآ أُنزِلَ إِلَيْكُم مِّن رَّبِّكُم مِّن قَبْلِ أَن يَأْتِيَكُمُ ٱلْعَذَابُ بَغْتَةًۭ وَأَنتُمْ لَا تَشْعُرُونَ
وَٱتَّبِعُوٓا۟
और पैरवी करो
أَحْسَنَ
बेहतरीन की
مَآ
जो
أُنزِلَ
नाज़िल किया गया
إِلَيْكُم
तरफ़ तुम्हारे
مِّن
from
رَّبِّكُم
तुम्हारे रब की तरफ़ से
مِّن
before
قَبْلِ
इससे पहले
أَن
कि
يَأْتِيَكُمُ
आ जाए तुम्हारे पास
ٱلْعَذَابُ
अज़ाब
بَغْتَةًۭ
अचानक
وَأَنتُمْ
और तुम
لَا
(do) not
تَشْعُرُونَ
ना तुम शऊर रखते हो
और अनुसर्ण करो उस सर्वोत्तम चीज़ का जो तुम्हारे रब की ओर से अवतरित हुई है, इससे पहले कि तुम पर अचानक यातना आ जाए और तुम्हें पता भी न हो।"
तफ़्सीर:
तथा उस क़ुरआन का पालन करो, जो तुम्हारे पालनहार की ओर से उसके रसूल पर उतरने वाली सबसे उत्तम वाणी है। चुनांचे उसके आदेशों पर अमल करो और उसकी मना की हुई बातों से बचो, इससे पहले कि तुमपर अचानक यातना आ जाए और तुम्हें उसकी आहट तक महसूस न हो कि तौबा करके उसके लिए कुछ तैयारी कर सको।
आयत 56
أَن تَقُولَ نَفْسٌۭ يَـٰحَسْرَتَىٰ عَلَىٰ مَا فَرَّطتُ فِى جَنۢبِ ٱللَّهِ وَإِن كُنتُ لَمِنَ ٱلسَّـٰخِرِينَ
أَن
(ऐसा ना हो) कि
تَقُولَ
कहे
نَفْسٌۭ
कोई नफ़्स
يَـٰحَسْرَتَىٰ
ऐ हसरत
عَلَىٰ
over
مَا
उस पर जो
فَرَّطتُ
कमी/ कोताही की मैं ने
فِى
in
جَنۢبِ
हक़ में
ٱللَّهِ
अल्लाह के
وَإِن
और बेशक
كُنتُ
था मैं
لَمِنَ
surely, among
ٱلسَّـٰخِرِينَ
अलबत्ता मज़ाक़ उड़ाने वालों में से
कहीं ऐसा न हो कि कोई व्यक्ति कहने लगे, "हाय, अफ़सोस उसपर! जो कोताही अल्लाह के हक़ में मैंने की। और मैं तो परिहास करनेवालों मं ही सम्मिलित रहा।"
तफ़्सीर:
यह काम करते रहो। डर है कि क़ियामत के दिन कोई व्यक्ति मारे अफ़सोस के यह न कहे कि अफ़सोस है उस कोताही पर, जो मैंने कुफ़्र और गुनाह पर क़ायम रहकर अल्लाह के हक़ में की है और ईमान वालों तथा आज्ञाकारियों का मज़ाक उड़ाया है।
आयत 57
أَوْ تَقُولَ لَوْ أَنَّ ٱللَّهَ هَدَىٰنِى لَكُنتُ مِنَ ٱلْمُتَّقِينَ
أَوْ
या
تَقُولَ
वो कहे
لَوْ
काश
أَنَّ
ये कि
ٱللَّهَ
अल्लाह
هَدَىٰنِى
हिदायत देता मुझे
لَكُنتُ
अलबत्ता होता मैं
مِنَ
among
ٱلْمُتَّقِينَ
मुत्तक़ी लोगों में से
या, कहने लगे कि "यदि अल्लाह मुझे मार्ग दिखाता तो अवश्य ही मैं डर रखनेवालों में से होता।"
तफ़्सीर:
अथवा तक़दीर का बहाना बनाते हुए कहे कि यदि अल्लाह मुझे सामर्थ्य देता, तो मैं उससे डरने वाला बन जाता; उसके आदेशों का पालन करता तथा उसकी मना की हुई वस्तुओं से बचता।
आयत 58
أَوْ تَقُولَ حِينَ تَرَى ٱلْعَذَابَ لَوْ أَنَّ لِى كَرَّةًۭ فَأَكُونَ مِنَ ٱلْمُحْسِنِينَ
أَوْ
या
تَقُولَ
वो कहे
حِينَ
जिस वक़्त
تَرَى
वो देखे
ٱلْعَذَابَ
अज़ाब
لَوْ
काश
أَنَّ
ये कि (हो)
لِى
मेरे लिए
كَرَّةًۭ
एक बार पलटना
فَأَكُونَ
तो मैं हो जाऊँ
مِنَ
among
ٱلْمُحْسِنِينَ
नेकोकारों में से
या, जब वह यातना देखे तो कहने लगे, "काश! मुझे एक बार फिर लौटकर जाना हो, तो मैं उत्तमकारों में सम्मिलित हो जाऊँ।"
तफ़्सीर:
या जब यातना नज़र आने लगे, तो कामना करते हुए कहे कि काश मुझे संसार मे फ़िरकर जाने मिलता, तो मैं अल्लाह से क्षमा याचना करता और उन लोगों में शामिल हो जाता, जो अच्छे कार्य करते हैं।
आयत 59
بَلَىٰ قَدْ جَآءَتْكَ ءَايَـٰتِى فَكَذَّبْتَ بِهَا وَٱسْتَكْبَرْتَ وَكُنتَ مِنَ ٱلْكَـٰفِرِينَ
بَلَىٰ
क्यों नहीं
قَدْ
तहक़ीक़
جَآءَتْكَ
आईं तेरे पास
ءَايَـٰتِى
आयात मेरी
فَكَذَّبْتَ
तो झुठला दिया तू ने
بِهَا
उन्हें
وَٱسْتَكْبَرْتَ
और तकब्बुर किया तू ने
وَكُنتَ
और था तू
مِنَ
among
ٱلْكَـٰفِرِينَ
काफ़िरों में से
"क्यों नहीं, मेरी आयतें तेरे पास आ चुकी थीं, किन्तु तूने उनको झूठलाया और घमंड किया और इनकार करनेवालों में सम्मिलित रहा
तफ़्सीर:
तुम्हारी यह हिदायत की कामना सच्ची नहीं है। क्योंकि तुम्हारे पास हमारी निशानियाँ आई थीं, तो तुमने उन्हें झुठला दिया था और अभिमान किया था तथा तुम थे ही अल्लाह, उसकी निशानियों और उसके रसूलों का इनकार करने वाले लोग।
आयत 60
وَيَوْمَ ٱلْقِيَـٰمَةِ تَرَى ٱلَّذِينَ كَذَبُوا۟ عَلَى ٱللَّهِ وُجُوهُهُم مُّسْوَدَّةٌ ۚ أَلَيْسَ فِى جَهَنَّمَ مَثْوًۭى لِّلْمُتَكَبِّرِينَ
وَيَوْمَ
और दिन
ٱلْقِيَـٰمَةِ
क़यामत के
تَرَى
आप देखेंगे
ٱلَّذِينَ
उनको जिन्होंने
كَذَبُوا۟
झूठ बोला
عَلَى
about
ٱللَّهِ
अल्लाह पर
وُجُوهُهُم
चेहरे उनके
مُّسْوَدَّةٌ ۚ
सयाह होंगे
أَلَيْسَ
क्या नहीं है
فِى
in
جَهَنَّمَ
जहन्नम में
مَثْوًۭى
कोई ठिकाना
لِّلْمُتَكَبِّرِينَ
तकब्बुर करने वालों के लिए
और क़ियामत के दिन तुम उन लोगों को देखोगे जिन्होंने अल्लाह पर झूठ घड़कर थोपा है कि उनके चेहरे स्याह है। क्या अहंकारियों का ठिकाना जहन्नम में नहीं हैं?"
तफ़्सीर:
आप देखेंगे कि क़ियामत के दिन उन लोगों के चेहरे काले पड़े होंगे, जिन्होंने अल्लाह का साझी और संतान ठहराकर उसपर झूठ घड़ा था। यह उनके दुर्भाग्यशाली होने का प्रमाण होगा। क्या जहन्नम में उन लोगों का ठिकाना नहीं होगा, जो अल्लाह और उसके रसूल को अहंकार दिखाते हैं?! यकीनन, उसीमें उनका ठिकाना होगा।
आज की ज़िंदगी में सबक़
अल्लाह की रहमत से मायूस न होने की मशहूर आयत का ज़िक्र है। यह सबक हमें सिखाता है कि चाहे गुनाह कितने भी हों, अल्लाह की रहमत से कभी मायूस नहीं होना चाहिए, तौबा का दरवाज़ा हमेशा खुला है।
आयत 61
وَيُنَجِّى ٱللَّهُ ٱلَّذِينَ ٱتَّقَوْا۟ بِمَفَازَتِهِمْ لَا يَمَسُّهُمُ ٱلسُّوٓءُ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَ
وَيُنَجِّى
और निजात देगा
ٱللَّهُ
अल्लाह
ٱلَّذِينَ
उनको जिन्होंने
ٱتَّقَوْا۟
तक़्वा किया
بِمَفَازَتِهِمْ
बवजह उनकी कामयाबी के
لَا
not
يَمَسُّهُمُ
नहीं पहुँचेगी उन्हें
ٱلسُّوٓءُ
कोई बुराई
وَلَا
और ना
هُمْ
वो
يَحْزَنُونَ
वो ग़मगीन होंगे
इसके विपरीत अल्लाह उन लोगों को जिन्होंने डर रखा उन्हें उनकी सफलता के साथ मुक्ति प्रदान करेगा। न तो उन्हें कोई अनिष्ट् छू सकेगा और न वे शोकाकुल होंगे
तफ़्सीर:
तथा अल्लाह उन लोगों को यातना से बचा लेगा, जो उसके आदेशों का पालन करके और उसकी मना की हुई चीज़ों से बचकर, उससे डरते रहे। वह उन्हें उनकी सफलता के स्थान अर्थात जन्नत में दाखिल करेगा। वहाँ न उन्हें पीड़ा छुएगा और न वे दुनिया के सुखों के छूटने पर शोक करेंगे।
आयत 62
ٱللَّهُ خَـٰلِقُ كُلِّ شَىْءٍۢ ۖ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍۢ وَكِيلٌۭ
ٱللَّهُ
अल्लाह
خَـٰلِقُ
ख़ालिक़ है
كُلِّ
हर
شَىْءٍۢ ۖ
चीज़ का
وَهُوَ
और वो
عَلَىٰ
ऊपर
كُلِّ
हर
شَىْءٍۢ
चीज़ के
وَكِيلٌۭ
निगरान है
अल्लाह हर चीज़ का स्रष्टा है और वही हर चीज़ का ज़िम्मा लेता है
तफ़्सीर:
अल्लाह ही प्रत्येक वस्तु का पैदा करने वाला है, अतः उसके अलावा कोई दूसरा पैदा करने वाला नहीं है। तथा वही प्रत्येक वस्तु का संरक्षक है। वही सारे विषयों का प्रबंध करता है और जैसे चाहता है, दुनिया को चलाता है।
आयत 63
لَّهُۥ مَقَالِيدُ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ ۗ وَٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ بِـَٔايَـٰتِ ٱللَّهِ أُو۟لَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلْخَـٰسِرُونَ
لَّهُۥ
उसी के लिए हैं
مَقَالِيدُ
कुंजियाँ
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों
وَٱلْأَرْضِ ۗ
और ज़मीन की
وَٱلَّذِينَ
और वो जिन्होंने
كَفَرُوا۟
कुफ़्र किया
بِـَٔايَـٰتِ
साथ आयात के
ٱللَّهِ
अल्लाह की
أُو۟لَـٰٓئِكَ
यही लोग हैं
هُمُ
वो
ٱلْخَـٰسِرُونَ
जो नुक़्सान उठाने वाले हैं
उसी के पास आकाशों और धरती की कुँजियाँ है। और जिन लोगों ने हमारी आयतों का इनकार किया, वही है जो घाटे में है
तफ़्सीर:
आकाशों तथा धरती की धन-संपत्तियों के खज़ानों की कुंजियाँ केवल उसी के पास हैं। वह जिसे चाहता है, धन-दौलत प्रदान करता है और जिसे चाहता है वंचित रखता है। तथा जिन लोगों ने अल्लाह की आयतों का इनकार किया, वही लोग क्षति में हैं। क्योंकि वे सांसारिक जीवन में ईमान की दौलत से वंचित रहे और आख़िरत में जहन्नम में प्रवेश करेंगे, जहाँ उन्हें हमेशा रहना पड़ेगा।
आयत 64
قُلْ أَفَغَيْرَ ٱللَّهِ تَأْمُرُوٓنِّىٓ أَعْبُدُ أَيُّهَا ٱلْجَـٰهِلُونَ
قُلْ
कह दीजिए
أَفَغَيْرَ
क्या फिर ग़ैर
ٱللَّهِ
अल्लाह के (बारे में )
تَأْمُرُوٓنِّىٓ
तुम हुक्म देते मुझे
أَعْبُدُ
कि मैं इबादत करूँ
أَيُّهَا
ऐ
ٱلْجَـٰهِلُونَ
जाहिलो
कहो, "क्या फिर भी तुम मुझसे कहते हो कि मैं अल्लाह के सिवा किसी और की बन्दगी करूँ, ऐ अज्ञानियों?"
तफ़्सीर:
ऐ रसूल! आप इन मुश्रिकों से कह दें, जो आपसे अपनी मूर्तियों की पूजा का मुतालबा करते हैंः ऐ नादानो! क्या तुम मुझे आदेश देते हो कि मैं अल्लाह के सिवा किसी और की वंदना करुँ? तो सुन लोः एक अल्लाह के सिवा कोई वंदना का हक़दार नहीं है। मैं उसके सिवा किसी की पूजा हरगिज़ नहीं करुँगा।
आयत 65
وَلَقَدْ أُوحِىَ إِلَيْكَ وَإِلَى ٱلَّذِينَ مِن قَبْلِكَ لَئِنْ أَشْرَكْتَ لَيَحْبَطَنَّ عَمَلُكَ وَلَتَكُونَنَّ مِنَ ٱلْخَـٰسِرِينَ
وَلَقَدْ
और अलबत्ता तहक़ीक़
أُوحِىَ
वही किया गया
إِلَيْكَ
तरफ़ आपके
وَإِلَى
and to
ٱلَّذِينَ
और तरफ़ उन लोगों के जो
مِن
(were) before you
قَبْلِكَ
आप से पहले थे
لَئِنْ
अलबत्ता अगर
أَشْرَكْتَ
शिर्क किया आपने
لَيَحْبَطَنَّ
यक़ीनन ज़रूर ज़ाय हो जाऐगा
عَمَلُكَ
अमल आपका
وَلَتَكُونَنَّ
और यक़ीनन ज़रूर आप हो जाऐंगे
مِنَ
among
ٱلْخَـٰسِرِينَ
नुक़्सान उठाने वालों में से
तुम्हारी ओर और जो तुमसे पहले गुज़र चुके हैं उनकी ओर भी वह्यस की जा चुकी है कि "यदि तुमने शिर्क किया तो तुम्हारा किया-धरा अनिवार्यतः अकारथ जाएगा और तुम अवश्य ही घाटे में पड़नेवालों में से हो जाओगे।"
तफ़्सीर:
(ऐ रसूल) अल्लाह ने आपकी ओर तथा आपसे पहले आने वाले रसूलों की आेर वह्य की है कि यदि तुमने अल्लाह के साथ किसी और की पूजा की, तो तुम्हारे सारे अच्छे कर्मों की नेकियाँ नष्ट हो जाएँगी और तुम घाटे में पड़ने वालों में से हो जाओगे। दुनिया में इस्लाम से वंचित होने का घाटा और आख़िरत में यातना में पड़ने का घाटा।
आयत 66
بَلِ ٱللَّهَ فَٱعْبُدْ وَكُن مِّنَ ٱلشَّـٰكِرِينَ
بَلِ
बल्कि
ٱللَّهَ
अल्लाह ही की
فَٱعْبُدْ
पस आप इबादत कीजिए
وَكُن
और हो जाइए
مِّنَ
among
ٱلشَّـٰكِرِينَ
शुक्र गुज़ारों में से
नहीं, बल्कि अल्लाह ही की बन्दगी करो और कृतज्ञता दिखानेवालों में से हो जाओ
तफ़्सीर:
बल्कि आप केवल एक अल्लाह की वंदना करें और किसी को उसका साझी न बनाएँ। तथा उसने आपको जो नेमतें प्रदान की हैं, उनपर उसका शुक्र अदा करें।
आयत 67
وَمَا قَدَرُوا۟ ٱللَّهَ حَقَّ قَدْرِهِۦ وَٱلْأَرْضُ جَمِيعًۭا قَبْضَتُهُۥ يَوْمَ ٱلْقِيَـٰمَةِ وَٱلسَّمَـٰوَٰتُ مَطْوِيَّـٰتٌۢ بِيَمِينِهِۦ ۚ سُبْحَـٰنَهُۥ وَتَعَـٰلَىٰ عَمَّا يُشْرِكُونَ
وَمَا
और नहीं
قَدَرُوا۟
उन्होंने क़द्र की
ٱللَّهَ
अल्लाह की
حَقَّ
जैसे हक़ था
قَدْرِهِۦ
उसकी क़द्र का
وَٱلْأَرْضُ
और ज़मीन
جَمِيعًۭا
सारी की सारी
قَبْضَتُهُۥ
उसकी मुट्ठी में होगी
يَوْمَ
दिन
ٱلْقِيَـٰمَةِ
क़यामत के
وَٱلسَّمَـٰوَٰتُ
और आसमान
مَطْوِيَّـٰتٌۢ
लपटे हुए होंगे
بِيَمِينِهِۦ ۚ
उसके दाऐं हाथ में
سُبْحَـٰنَهُۥ
पाक है वो
وَتَعَـٰلَىٰ
और बुलन्दतर है
عَمَّا
उससे जो
يُشْرِكُونَ
वो शरीक ठहराते हैं
उन्होंने अल्लाह की क़द्र न जानी, जैसी क़द्र उसकी जाननी चाहिए थी। हालाँकि क़ियामत के दिन सारी की सारी धरती उसकी मुट्ठी में होगी और आकाश उसके दाएँ हाथ में लिपटे हुए होंगे। महान और उच्च है वह उससे, जो वे साझी ठहराते है
तफ़्सीर:
तथा बहुदेववादियों ने अल्लाह का सम्मान नहीं किया, जैसा सम्मान करना चाहिए था, जब उन्होंने अल्लाह की कमज़ोर एवं विवश मख़लूक़ को उसका साझी बनाया और उसकी क्षमता की अनदेखी की, जबकि उसकी क्षमता का एक प्रमाण यह है कि क़ियामत के दिन धरती अपने पर्वतों, पेड़ों तथा नहरों एवं समुद्रों समेत उसकी एक मुट्ठी में होगी, तथा सातों आकाश उसके दाहिने हाथ में लिपटे होंगे। इस शान का मालिक अल्लाह पवित्र तथा उच्च है उस शिर्क से, जो वे कर रहे हैं।
आयत 68
وَنُفِخَ فِى ٱلصُّورِ فَصَعِقَ مَن فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَمَن فِى ٱلْأَرْضِ إِلَّا مَن شَآءَ ٱللَّهُ ۖ ثُمَّ نُفِخَ فِيهِ أُخْرَىٰ فَإِذَا هُمْ قِيَامٌۭ يَنظُرُونَ
وَنُفِخَ
और फ़ूँका जाएगा
فِى
[in]
ٱلصُّورِ
सूर में
فَصَعِقَ
तो बेहोश हो जाएगा
مَن
जो कोई
فِى
(is) in
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों में
وَمَن
और जो कोई
فِى
(is) on
ٱلْأَرْضِ
ज़मीन में (होगा)
إِلَّا
मगर
مَن
जिसे
شَآءَ
चाहे
ٱللَّهُ ۖ
अल्लाह
ثُمَّ
फिर
نُفِخَ
फ़ूँका जाएगा
فِيهِ
उसमें
أُخْرَىٰ
दूसरी मर्तबा
فَإِذَا
तो यकायक
هُمْ
वो
قِيَامٌۭ
खड़े
يَنظُرُونَ
वो देख रहें होंगे
और सूर (नरसिंघा) फूँका जाएगा, तो जो कोई आकाशों और जो कोई धरती में होगा वह अचेत हो जाएगा सिवाय उसके जिसको अल्लाह चाहे। फिर उसे दूबारा फूँका जाएगा, तो क्या देखेगे कि सहसा वे खड़े देख रहे है
तफ़्सीर:
जिस दिन सूर फूँकने पर नियुक्त फ़रिश्ता नरसिंघा में फूँक मारेगा, तो जो भी आकाशों में और जो भी धरती पर हैं, सभी की मृत्यु हो जाएगी, सिवाय उसके जिसका मरना अल्लाह न चाहे। फिर वह फ़रिश्ता लोगों के पुन: जीवित होने के लिए उसमें दूसरी बार फूँकेगा, तो एकाएक सभी जीवित लोग खड़े होकर देख रहे होंगे कि अल्लाह उनके साथ क्या करता है।
आयत 69
وَأَشْرَقَتِ ٱلْأَرْضُ بِنُورِ رَبِّهَا وَوُضِعَ ٱلْكِتَـٰبُ وَجِا۟ىٓءَ بِٱلنَّبِيِّـۧنَ وَٱلشُّهَدَآءِ وَقُضِىَ بَيْنَهُم بِٱلْحَقِّ وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ
وَأَشْرَقَتِ
और चमक उठेगी
ٱلْأَرْضُ
ज़मीन
بِنُورِ
नूर से
رَبِّهَا
अपने रब की
وَوُضِعَ
और रखदी जाएगी
ٱلْكِتَـٰبُ
किताब
وَجِا۟ىٓءَ
और लाए जाऐंगे
بِٱلنَّبِيِّـۧنَ
अम्बिया
وَٱلشُّهَدَآءِ
और गवाह
وَقُضِىَ
और फ़ैसला कर दिया जाएगा
بَيْنَهُم
दर्मियान उनके
بِٱلْحَقِّ
साथ हक़ के
وَهُمْ
और वो
لَا
will not be wronged
يُظْلَمُونَ
वो ज़ुल्म ना किए जाऐंगे
और धरती रब के प्रकाश से जगमगा उठेगी, और किताब रखी जाएगी और नबियों और गवाहों को लाया जाएगा और लोगों के बीच हक़ के साथ फ़ैसला कर दिया जाएगा, और उनपर कोई ज़ुल्म न होगा
तफ़्सीर:
जब महिमावान पालनहार अपने बंदों के बीच निर्णय करने के लिए प्रकट होगा, तो धरती चमक उठेगी, और लोगों के कर्मपत्र खोलकर सामने रख दिए जाएँगे, और नबियों को लाया जाएगा, तथा मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की उम्मत को नबियों के पक्ष में उनकी जातियों के विरुद्ध गवाही देने के लिए उपस्थित किया जाएगा, और अल्लाह समस्त लोगों के बीच न्याय के साथ फ़ैसला कर देगा और उस दिन लोगों पर किसी प्रकार का कोई अत्याचार नहीं होगा। अतः न किसी इनसान के गुनाह में कोई वृद्धि की जाएगी और न किसी की नेकी को घटाया जाएगा।
आयत 70
وَوُفِّيَتْ كُلُّ نَفْسٍۢ مَّا عَمِلَتْ وَهُوَ أَعْلَمُ بِمَا يَفْعَلُونَ
وَوُفِّيَتْ
और पूरा-पूरा दिया जाएगा
كُلُّ
हर
نَفْسٍۢ
नफ़्स को
مَّا
जो
عَمِلَتْ
उसने अमल किया
وَهُوَ
और वो
أَعْلَمُ
ज़्यादा जानता है
بِمَا
जो कुछ
يَفْعَلُونَ
वो करते हैं
और प्रत्येक व्यक्ति को उसका किया भरपूर दिया जाएगा। और वह भली-भाँति जानता है, जो कुछ वे करते है
तफ़्सीर:
और अल्लाह प्रत्येक प्राणी को उसके कर्मों का पूरा-पूरा बदला देगा। चाहे वह कर्म अच्छे हों अथवा बुरे। अल्लाह उनके कर्मों को भली-भाँति जानता है। उनके सुकर्म तथा कुकर्म में से कुछ भी उससे छिपा नहीं है। वह उद दिन उन्हें उनके कर्मों का बदला भी देगा।
आज की ज़िंदगी में सबक़
कयामत के दिन सूर फूंकने का ज़िक्र है। यह हमें सिखाता है कि कयामत के दिन हर इंसान अपने आमाल का सामना करेगा, इसलिए आज ही तैयारी करनी चाहिए।
आयत 71
وَسِيقَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوٓا۟ إِلَىٰ جَهَنَّمَ زُمَرًا ۖ حَتَّىٰٓ إِذَا جَآءُوهَا فُتِحَتْ أَبْوَٰبُهَا وَقَالَ لَهُمْ خَزَنَتُهَآ أَلَمْ يَأْتِكُمْ رُسُلٌۭ مِّنكُمْ يَتْلُونَ عَلَيْكُمْ ءَايَـٰتِ رَبِّكُمْ وَيُنذِرُونَكُمْ لِقَآءَ يَوْمِكُمْ هَـٰذَا ۚ قَالُوا۟ بَلَىٰ وَلَـٰكِنْ حَقَّتْ كَلِمَةُ ٱلْعَذَابِ عَلَى ٱلْكَـٰفِرِينَ
وَسِيقَ
और हाँके जाऐंगे
ٱلَّذِينَ
वो जिन्होंने
كَفَرُوٓا۟
कुफ़्र किया
إِلَىٰ
to
جَهَنَّمَ
तरफ़ जहन्नम के
زُمَرًا ۖ
गिरोह दर गिरोह
حَتَّىٰٓ
यहाँ तक कि
إِذَا
जब
جَآءُوهَا
वो आ जाऐंगे उसके पास
فُتِحَتْ
खोल दिए जाऐंगे
أَبْوَٰبُهَا
दरवाज़े उसके
وَقَالَ
और कहेंगे
لَهُمْ
उन्हें
خَزَنَتُهَآ
दरबान उसके
أَلَمْ
क्या नहीं
يَأْتِكُمْ
आए थे तुम्हारे पास
رُسُلٌۭ
कुछ रसूल
مِّنكُمْ
तुम में से
يَتْلُونَ
जो पढ़ते
عَلَيْكُمْ
तुम पर
ءَايَـٰتِ
आयात
رَبِّكُمْ
तुम्हारे रब की
وَيُنذِرُونَكُمْ
और डराते तुम्हें
لِقَآءَ
मुलाक़ात से
يَوْمِكُمْ
(of) your Day
هَـٰذَا ۚ
तुम्हारे इस दिन की
قَالُوا۟
वो कहेंगे
بَلَىٰ
क्यों नहीं
وَلَـٰكِنْ
और लेकिन
حَقَّتْ
साबित हो गई
كَلِمَةُ
बात
ٱلْعَذَابِ
अज़ाब की
عَلَى
against
ٱلْكَـٰفِرِينَ
काफ़िरों पर
जिन लोगों ने इनकार किया, वे गिरोह के गिरोह जहन्नम की ओर ले जाए जाएँगे, यहाँ तक कि जब वे वहाँ पहुँचेगे तो उसके द्वार खोल दिए जाएँगे और उसके प्रहरी उनसे कहेंगे, "क्या तुम्हारे पास तुम्हीं में से रसूल नहीं आए थे जो तुम्हें तुम्हारे रब की आयतें सुनाते रहे हों और तुम्हें इस दिन की मुलाक़ात से सचेत करते रहे हों?" वे कहेंगे, "क्यों नहीं (वे तो आए थे) ।" किन्तु इनकार करनेवालों पर यातना की बात सत्यापित होकर रही
तफ़्सीर:
तथा फ़रिश्ते, अल्लाह का इनकार करने वाले लोगों को अपमानित गिरोहों की शक्ल में जहन्नम की ओर हाँककर ले जाएँगे। यहाँ तक कि जब वे जहन्नम के पास पहुँच जाएँगे, तो उसके रक्षक के तौर पर नियुक्त फ़रिश्ते उसके द्वार खोल देंगे और उन्हें यह कहकर डाँटते हुए उनका स्वागत करेंगेः क्या तुम्हारे पास, तुम्हारे ही जैसे रसूल नहीं आए, जो तुम्हें तुम्हारे पालनहार की आयतें सुनाते तथा क़ियामत के दिन के सामना करने और उसकी यातना से डराते? तो काफ़िर लोग अपने गुनाह का इकरार करते हुए कहेंगेः क्यों नहीं?! आए तो थे। लेकिन काफ़िरों के हक में यातना की बात सिद्ध हो चुकी थी और हम काफ़िर थे।
आयत 72
قِيلَ ٱدْخُلُوٓا۟ أَبْوَٰبَ جَهَنَّمَ خَـٰلِدِينَ فِيهَا ۖ فَبِئْسَ مَثْوَى ٱلْمُتَكَبِّرِينَ
قِيلَ
कहा जाएगा
ٱدْخُلُوٓا۟
दाख़िल हो जाओ
أَبْوَٰبَ
दरवाज़ों में
جَهَنَّمَ
जहन्नम के
خَـٰلِدِينَ
हमेशा रहने वाले
فِيهَا ۖ
उसमें
فَبِئْسَ
तो कितना बुरा है
مَثْوَى
ठिकाना
ٱلْمُتَكَبِّرِينَ
तकब्बुर करने वालों का
कहा जाएगा, "जहन्नम के द्वारों में प्रवेश करो। उसमें सदैव रहने के लिए।" तो बहुत ही बुरा ठिकाना है अहंकारियों का!
तफ़्सीर:
उनका अपमान करते हुए और उन्हें अल्लाह की दया से तथा जहन्नम से बाहर निकलने से निराश करते हुए कहा जाएगा : जहन्नम के द्वारों से उसमें प्रवेश कर जाओ, तुम्हें उसी में हमेशा के लिए रहना है। चुनाँचे घमंड करने वालों, सत्य पर अभिमान दिखाने वालों का ठिकाना बहुत बुरा है।
आयत 73
وَسِيقَ ٱلَّذِينَ ٱتَّقَوْا۟ رَبَّهُمْ إِلَى ٱلْجَنَّةِ زُمَرًا ۖ حَتَّىٰٓ إِذَا جَآءُوهَا وَفُتِحَتْ أَبْوَٰبُهَا وَقَالَ لَهُمْ خَزَنَتُهَا سَلَـٰمٌ عَلَيْكُمْ طِبْتُمْ فَٱدْخُلُوهَا خَـٰلِدِينَ
وَسِيقَ
और ले जाए जाऐंगे
ٱلَّذِينَ
वो लोग जो
ٱتَّقَوْا۟
डरे
رَبَّهُمْ
अपने रब से
إِلَى
to
ٱلْجَنَّةِ
तरफ़ जन्नत के
زُمَرًا ۖ
गिरोह दर गिरोह
حَتَّىٰٓ
यहाँ तक कि
إِذَا
जब
جَآءُوهَا
वो आ जाऐंगे उसके पास
وَفُتِحَتْ
और खोल दिए जाऐंगे
أَبْوَٰبُهَا
दरवाज़े उसके
وَقَالَ
और कहेंगे
لَهُمْ
उन्हें
خَزَنَتُهَا
दरबान उसके
سَلَـٰمٌ
सलामती हो
عَلَيْكُمْ
तुम पर
طِبْتُمْ
तुम अच्छे रहे
فَٱدْخُلُوهَا
पस दाख़िल हो जाओ उनमें
خَـٰلِدِينَ
हमेशा रहने वाले
और जो लोग अपने रब का डर रखते थे, वे गिरोह के गिरोह जन्नत की ओर ले जाएँगे, यहाँ तक कि जब वे वहाँ पहुँचेंगे इस हाल में कि उसके द्वार खुले होंगे। और उसके प्रहरी उनसे कहेंगे, "सलाम हो तुमपर! बहुत अच्छे रहे! अतः इसमें प्रवेश करो सदैव रहने के लिए तो (उनकी ख़ुशियों का क्या हाल होगा!)
तफ़्सीर:
और फ़रिश्ते उन मोमिनों को, जो अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसकी मना की हुई वस्तुओं से बचकर उससे डरते थे, सम्मानित गिरोहों की शक्ल में, बड़ी विनम्रता से, जन्नत की ओर ले जाएँगे। यहाँ तक कि जब वे वहाँ पहुँच जाएँगे, तो जन्नत के द्वार खोल दिए जाएँगे, और वहाँ नियुक्त फ़रिश्ते उनसे कहेंगेः तुम्हारे लिए हर कष्ट तथा हर अप्रिय वस्तु से सलामती है। तुम्हारे दिल एवं कर्म पवित्र हैं। अतः, जन्नत में हमेशा रहने को प्रवेश कर जाओ।
आयत 74
وَقَالُوا۟ ٱلْحَمْدُ لِلَّهِ ٱلَّذِى صَدَقَنَا وَعْدَهُۥ وَأَوْرَثَنَا ٱلْأَرْضَ نَتَبَوَّأُ مِنَ ٱلْجَنَّةِ حَيْثُ نَشَآءُ ۖ فَنِعْمَ أَجْرُ ٱلْعَـٰمِلِينَ
وَقَالُوا۟
और वो कहेंगे
ٱلْحَمْدُ
सब तारीफ़
لِلَّهِ
अल्लाह के लिए है
ٱلَّذِى
जिसने
صَدَقَنَا
सच्चा किया हम से
وَعْدَهُۥ
वादा अपना
وَأَوْرَثَنَا
और वारिस बना दिया हमें
ٱلْأَرْضَ
ज़मीन का
نَتَبَوَّأُ
हम जगह बना सकते है
مِنَ
[from]
ٱلْجَنَّةِ
जन्नत में से
حَيْثُ
जहाँ
نَشَآءُ ۖ
हम चाहें
فَنِعْمَ
तो कितना अच्छा है
أَجْرُ
अजर
ٱلْعَـٰمِلِينَ
अमल करने वालों का
और वे कहेंगे, "प्रशंसा अल्लाह के लिए, जिसने हमारे साथ अपना वादा सच कर दिखाया, और हमें इस भूमि का वारिस बनाया कि हम जन्नत में जहाँ चाहें वहाँ रहें-बसे।" अतः क्या ही अच्छा प्रतिदान है कर्म करनेवालों का!-
तफ़्सीर:
और जब ईमान वाले जन्नत में प्रवेश करेंगे, तो कहेंगेः सब प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जिसने अपने रसूल के माध्यम से हमें जो वचन दिया था, उसे सच कर दिखाया। चुनांचे उसने वचन दिया था कि हमें जन्नत में प्रवेश करने का सौभाग्य प्रदान करेगा तथा हमें जन्नत की धरती का उत्तराधिकारी बनाएगा, हम स्वर्ग के अंदर जहाँ चाहेंगे, रहेंगे। चुनांचे उन लोगों का प्रतिफल क्या ही अच्छा है, जो अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए अच्छे कार्य करते हैं।
आयत 75
وَتَرَى ٱلْمَلَـٰٓئِكَةَ حَآفِّينَ مِنْ حَوْلِ ٱلْعَرْشِ يُسَبِّحُونَ بِحَمْدِ رَبِّهِمْ ۖ وَقُضِىَ بَيْنَهُم بِٱلْحَقِّ وَقِيلَ ٱلْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ
وَتَرَى
और आप देखेंगे
ٱلْمَلَـٰٓئِكَةَ
फ़रिश्तों को
حَآفِّينَ
घेरा डाले हुए
مِنْ
[from]
حَوْلِ
इर्द-गिर्द
ٱلْعَرْشِ
अर्श के
يُسَبِّحُونَ
वो तस्बीह कर रहे होंगे
بِحَمْدِ
साथ तारीफ़ के
رَبِّهِمْ ۖ
अपने रब की
وَقُضِىَ
और फ़ैसला कर दिया जाएगा
بَيْنَهُم
दर्मियान उनके
بِٱلْحَقِّ
साथ हक़ के
وَقِيلَ
और कह दिया जाएगा
ٱلْحَمْدُ
सब तारीफ़
لِلَّهِ
अल्लाह के लिए है
رَبِّ
जो रब है
ٱلْعَـٰلَمِينَ
तमाम जहानों का
और तुम फ़रिश्तों को देखोगे कि वे सिंहासन के गिर्द घेरा बाँधे हुए, अपने रब का गुणगान कर रहे है। और लोगों के बीच ठीक-ठीक फ़ैसला कर दिया जाएगा और कहा जाएगा, "सारी प्रशंसा अल्लाह, सारे संसार के रब, के लिए है।"
तफ़्सीर:
उस दिन फ़रिश्ते अर्श को घेरे हुए होंगे। वे अल्लाह की, काफ़िरों की उन बातों से पाकी बयान कर रहे होंगे, जो उसकी शान के अनुरूप नहीं हैं। और अल्लाह सारी मखलूक़ के बीच न्याय के साथ निर्णय कर देगा और जिसे नेमतें देनी होंगी उसे नेमतें देगा तथा जिसे यातना देनी होगी, उसे यातना देगा। और कहा जाएगाः सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जो सारी मख़लूकों का पालनहार है और जिसने अपने मोमिन बंदों के साथ दया का निर्णय किया तथा काफ़िरों को यातनाग्रस्त करने का निर्णय किया।
आज की ज़िंदगी में सबक़
जन्नतियों और दोज़खियों के गुटों में तक्सीम के साथ सूरह का इख्तिताम होता है। यह सबक हमें सिखाता है कि नेक अमल करने वालों का इस्तकबाल (स्वागत) खुशी से होगा, यह हमें नेकी की तरगीब देता है।
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