सूरह अद-दुख़ान سورة الدخان
मक्की 59 आयतें
नाम का मतलब
धुआं (कयामत की एक अलामत के तौर पर धुएं के ज़िक्र से)
पृष्ठभूमि
सूरह अद-दुखान में कुरआन के लैलतुल-कद्र में नाज़िल होने की शुरुआत, फिरऔन की तबाही और कयामत की एक अलामत (धुआं) का ज़िक्र है।
फ़ज़ीलत / सार
इस सूरह में लैलतुल-कद्र (बरकत वाली रात) का ज़िक्र है, जिसमें कुरआन का नुज़ूल शुरू हुआ, इसे खास फ़ज़ीलत वाला माना जाता है।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
आयत 1
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ حمٓ
حمٓ
ح م
हा॰ मीम॰
तफ़्सीर:
{हा, मीम।} सूरतुल-बक़रा की शुरुआत में इस प्रकार के अक्षरों के बारे में बात गुज़र चुकी है।
आयत 2
وَٱلْكِتَـٰبِ ٱلْمُبِينِ
وَٱلْكِتَـٰبِ
By the Book
ٱلْمُبِينِ
क़सम है वाज़ेह किताब की
गवाह है स्पष्ट किताब
तफ़्सीर:
अल्लाह ने सत्य का मार्ग दर्शाने वाले क़ुरआन की क़सम खाई है।
आयत 3
إِنَّآ أَنزَلْنَـٰهُ فِى لَيْلَةٍۢ مُّبَـٰرَكَةٍ ۚ إِنَّا كُنَّا مُنذِرِينَ
إِنَّآ
बेशक हम
أَنزَلْنَـٰهُ
नाज़िल किया हमने उसे
فِى
in
لَيْلَةٍۢ
एक रात में
مُّبَـٰرَكَةٍ ۚ
बरकत वाली
إِنَّا
बेशक हम
كُنَّا
हैं हम
مُنذِرِينَ
डराने वाले
निस्संदेह हमने उसे एक बरकत भरी रात में अवतरित किया है। - निश्चय ही हम सावधान करनेवाले है।-
तफ़्सीर:
निःसंदेह हमने क़ुरआन को लैलतुल-क़द्र (सम्मानित रात) में उतारा है, जो बहुत अच्छाइयों वाली रात है। हम इस क़ुरआन के माध्यम से डराने वाले हैं।
आयत 4
فِيهَا يُفْرَقُ كُلُّ أَمْرٍ حَكِيمٍ
فِيهَا
उसमें
يُفْرَقُ
फ़ैसला किया जाता है
كُلُّ
हर
أَمْرٍ
काम
حَكِيمٍ
मोहकम का
उस (रात) में तमाम तत्वदर्शिता युक्त मामलों का फ़ैसला किया जाता है,
तफ़्सीर:
इसी रात में आजीविका और मृत्यु (नियत समय) इत्यादि से संबंधित उस साल घटित होने वाले सभी सुदृढ़ मामलों का फैसला किया जाता है।
आयत 5
أَمْرًۭا مِّنْ عِندِنَآ ۚ إِنَّا كُنَّا مُرْسِلِينَ
أَمْرًۭا
एक हुक्म का
مِّنْ
from
عِندِنَآ ۚ
हमारे पास से
إِنَّا
बेशक हम
كُنَّا
थे हम
مُرْسِلِينَ
भेजने वाले
हमारे यहाँ से आदेश के रूप में। निस्संदेह रसूलों को भेजनेवाले हम ही है। -
तफ़्सीर:
हम प्रत्येक सुदृढ़ मामले का फैसला अपनी ओर से करते हैं। निःसंदेह हम ही रसूलों को भेजने वाले हैं।
आयत 6
رَحْمَةًۭ مِّن رَّبِّكَ ۚ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلسَّمِيعُ ٱلْعَلِيمُ
رَحْمَةًۭ
बतौर रहमत
مِّن
from
رَّبِّكَ ۚ
आपके रब की तरफ़ से
إِنَّهُۥ
बेशक
هُوَ
वो ही है
ٱلسَّمِيعُ
ख़ूब सुनने वाला
ٱلْعَلِيمُ
ख़ूब इल्म वाला
तुम्हारे रब की दयालुता के कारण। निस्संदेह वही सब कुछ सुननेवाला, जाननेवाला है
तफ़्सीर:
हम रसूलों को (ऐ रसूल!) आपके पालनहार की ओर से, उन लोगों पर दया के रूप में भेजते हैं, जिनकी ओर उन्हें भेजा जाता है। निःसंदेह वह महिमावान अल्लाह अपने बंदों की बातों को सुनने वाला, उनके कामों और इरादों को जानने वाला है। इनमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है।
आयत 7
رَبِّ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَآ ۖ إِن كُنتُم مُّوقِنِينَ
رَبِّ
रब है
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों
وَٱلْأَرْضِ
और ज़मीन का
وَمَا
और जो
بَيْنَهُمَآ ۖ
दर्मियान है उन दोनों के
إِن
अगर
كُنتُم
हो तुम
مُّوقِنِينَ
यक़ीन करने वाले
आकाशों और धरती का रब और जो कुछ उन दोनों के बीच है उसका भी, यदि तुम विश्वास रखनेवाले हो (तो विश्वास करो कि किताब का अवतरण अल्लाह की दयालुता है)
तफ़्सीर:
वह आकाशों का पालनहार, धरती का पालनहार और उन दोनों के बीच की चीज़ों का पालनहार है। यदि तुम इसपर विश्वास करने वाले हो, तो मेरे रसूल पर ईमान लाओ।
आयत 8
لَآ إِلَـٰهَ إِلَّا هُوَ يُحْىِۦ وَيُمِيتُ ۖ رَبُّكُمْ وَرَبُّ ءَابَآئِكُمُ ٱلْأَوَّلِينَ
لَآ
नहीं
إِلَـٰهَ
कोई इलाह (बरहक़)
إِلَّا
मगर
هُوَ
वो ही
يُحْىِۦ
वो ज़िन्दा करता है
وَيُمِيتُ ۖ
और वो मौत देता है
رَبُّكُمْ
रब तुम्हारा
وَرَبُّ
और रब
ءَابَآئِكُمُ
तुम्हारे आबा ओ अजदाद का
ٱلْأَوَّلِينَ
जो पहले थे
उसके अतिरिक्त कोई पूज्य-प्रभु नहीं; वही जीवित करता और मारता है; तुम्हारा रब और तुम्हारे अगले बाप-दादों का रब है
तफ़्सीर:
उसके सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं। वही जीवित करता और मारता है। उसके सिवा कोई जीवन तथा मृत्यु देने वाला नहीं है। वही तुम्हारा पालनहार तथा तुम्हारे पहले बाप-दादाओं का पालनहार है।
आयत 9
بَلْ هُمْ فِى شَكٍّۢ يَلْعَبُونَ
بَلْ
बल्कि
هُمْ
वो
فِى
(are) in
شَكٍّۢ
शक में
يَلْعَبُونَ
वो खेल रहे हैं
बल्कि वे संदेह में पड़े रहे हैं
तफ़्सीर:
ये मुश्रिक उसपर विश्वास करने वाले नहीं हैं, बल्कि वे उसके बारे में संदेह में पड़े हुए हैं और वे जिस झूठ पर क़ायम हैं उसके कारण उससे ग़ाफ़िल हैं।
आयत 10
فَٱرْتَقِبْ يَوْمَ تَأْتِى ٱلسَّمَآءُ بِدُخَانٍۢ مُّبِينٍۢ
فَٱرْتَقِبْ
पस इन्तज़ार कीजिए
يَوْمَ
जिस दिन
تَأْتِى
आएगा
ٱلسَّمَآءُ
आसमान
بِدُخَانٍۢ
साथ धुएँ के
مُّبِينٍۢ
खुले
अच्छा तो तुम उस दिन की प्रतीक्षा करो, जब आकाश प्रत्यक्ष धुँआ लाएगा।
तफ़्सीर:
तो (ऐ रसूल!) आप अपनी जाति पर जल्द ही आने वाली यातना की प्रतीक्षा करें, जो उस दिन आएगी, जिस दिन आकाश स्पष्ट धुएँ के साथ आएगा, जिसे वे गंभीर भूख के कारण अपनी आँखों से देख रहे होंगे।
आज की ज़िंदगी में सबक़
कुरआन के लैलतुल-कद्र में नाज़िल होने का ज़िक्र है। यह हमें सिखाता है कि बरकत वाली रातों की कद्र करनी चाहिए और उनमें इबादत का एहतमाम करना चाहिए।
आयत 11
يَغْشَى ٱلنَّاسَ ۖ هَـٰذَا عَذَابٌ أَلِيمٌۭ
يَغْشَى
जो ढाँप लेगा
ٱلنَّاسَ ۖ
लोगों को
هَـٰذَا
ये है
عَذَابٌ
अज़ाब
أَلِيمٌۭ
दर्दनाक
वह लोगों का ढाँक लेगा। यह है दुखद यातना!
तफ़्सीर:
वह यातना आपकी पूरी जाति को अपनी चपेट में ले लेगी और उनसे कहा जाएगा : यह यातना जो तुम्हें पहुँची है, एक दर्दनाक यातना है।
आयत 12
رَّبَّنَا ٱكْشِفْ عَنَّا ٱلْعَذَابَ إِنَّا مُؤْمِنُونَ
رَّبَّنَا
ऐ हमारे रब
ٱكْشِفْ
हटा दे
عَنَّا
हम से
ٱلْعَذَابَ
अज़ाब को
إِنَّا
बेशक हम
مُؤْمِنُونَ
ईमान लाने वाले हैं
वे कहेंगे, "ऐ हमारे रब! हमपर से यातना हटा दे। हम ईमान लाते है।"
तफ़्सीर:
तो वे अपने पालनहार से गिड़गिड़ाते हुए कहेंगे : ऐ हमारे पालनहार! हमसे उस अज़ाब को दूर कर दे, जिसे तूने हमपर भेजा है। अगर तूने उसे हमसे दूर कर दिया, तो हम तुझपर और तेरे रसूल पर ईमान ले आएँगे।
आयत 13
أَنَّىٰ لَهُمُ ٱلذِّكْرَىٰ وَقَدْ جَآءَهُمْ رَسُولٌۭ مُّبِينٌۭ
أَنَّىٰ
कहाँ से है
لَهُمُ
उनके लिए
ٱلذِّكْرَىٰ
नसीहत
وَقَدْ
हालाँकि तहक़ीक़
جَآءَهُمْ
आ चुका उनके पास
رَسُولٌۭ
एक रसूल
مُّبِينٌۭ
वाज़ेह करने वाला
अब उनके होश में आने का मौक़ा कहाँ बाक़ी रहा। उनका हाल तो यह है कि उनके पास साफ़-साफ़ बतानेवाला एक रसूल आ चुका है।
तफ़्सीर:
उनके लिए नसीहत हासिल करने और पश्चाताप कर अपने पालनहार की ओर लौटने का अवसर अब कहाँ रहा, जबकि उनके पास एक स्पष्ट संदेश वाला रसूल आ चुका है और वे उसकी सच्चाई और अमानतदारी से भी अवगत हैं?!
आयत 14
ثُمَّ تَوَلَّوْا۟ عَنْهُ وَقَالُوا۟ مُعَلَّمٌۭ مَّجْنُونٌ
ثُمَّ
फिर
تَوَلَّوْا۟
वो मुँह मोड़ गए
عَنْهُ
उससे
وَقَالُوا۟
और उन्होंने कहा
مُعَلَّمٌۭ
सिखाया पढ़ाया
مَّجْنُونٌ
दीवाना है
फिर उन्होंने उसकी ओर से मुँह मोड़ लिया और कहने लगे, "यह तो एक सिखाया-पढ़ाया दीवाना है।"
तफ़्सीर:
फिर उन्होंने उस पर विश्वास करने से मुँह फेर लिया और उन्होंने उसके बारे में कहा : वह एक सिखाया हुआ व्यक्ति है, जिसे कोई दूसरा सिखाता है, वह संदेशवाहक नहीं है। तथा उन्होंने उसके बारे में कहा कि : वह पागल है।
आयत 15
إِنَّا كَاشِفُوا۟ ٱلْعَذَابِ قَلِيلًا ۚ إِنَّكُمْ عَآئِدُونَ
إِنَّا
बेशक हम
كَاشِفُوا۟
हटाने वाले हैं
ٱلْعَذَابِ
अज़ाब को
قَلِيلًا ۚ
थोड़ी देर के लिए
إِنَّكُمْ
बेशक तुम
عَآئِدُونَ
लौटने वाले हो
"हम यातना थोड़ा हटा देते है तो तुम पुनः फिर जाते हो।
तफ़्सीर:
जब हम तुम पर से यातना को थोड़ा टाल देंगे, तो तुम अपने कुफ़्र और झुठलाने के रवैये की ओर लौट जाओगे।
आयत 16
يَوْمَ نَبْطِشُ ٱلْبَطْشَةَ ٱلْكُبْرَىٰٓ إِنَّا مُنتَقِمُونَ
يَوْمَ
जिस दिन
نَبْطِشُ
हम पकड़ेंगे
ٱلْبَطْشَةَ
पकड़
ٱلْكُبْرَىٰٓ
बहुत बड़ी
إِنَّا
बेशक हम
مُنتَقِمُونَ
इन्तक़ाम लेने वाले हैं
याद रखो, जिस दिन हम बड़ी पकड़ पकड़ेंगे, तो निश्चय ही हम बदला लेकर रहेंगे
तफ़्सीर:
(ऐ रसूल!) उनके लिए उस दिन की प्रतीक्षा करें, जब हम बद्र के दिन आपकी जाति के काफ़िरों की बड़ी पकड़ करेंगे। निश्चय ही हम उनसे, उनके अल्लाह के साथ कुफ़्र करने और उसके रसूल को झुठलाने के कारण, बदला लेने वाले हैं।
आयत 17
۞ وَلَقَدْ فَتَنَّا قَبْلَهُمْ قَوْمَ فِرْعَوْنَ وَجَآءَهُمْ رَسُولٌۭ كَرِيمٌ
۞ وَلَقَدْ
और अलबत्ता तहक़ीक़
فَتَنَّا
आज़माया हमने
قَبْلَهُمْ
उनसे क़ब्ल
قَوْمَ
क़ौमे
فِرْعَوْنَ
फ़िरऔन को
وَجَآءَهُمْ
और आया उनके पास
رَسُولٌۭ
रसूल
كَرِيمٌ
मुअज़िज़
उनसे पहले हम फ़िरऔन की क़ौम के लोगों को परीक्षा में डाल चुके हैं, जबकि उनके पास एक अत्यन्त सज्जन रसूल आया
तफ़्सीर:
निश्चय ही हमने उनसे पहले फ़िरऔन की जाति को आज़माया और उनके पास अल्लाह की ओर से एक सम्मानित रसूल आया, जिसने उन्हें अल्लाह के एकेश्वरवाद (अल्लाह को एकमात्र पूज्य मानने) और उसकी इबादत की ओर आमंत्रित किया। और वह मूसा अलैहिस्सलाम हैं।
आयत 18
أَنْ أَدُّوٓا۟ إِلَىَّ عِبَادَ ٱللَّهِ ۖ إِنِّى لَكُمْ رَسُولٌ أَمِينٌۭ
أَنْ
ये कि
أَدُّوٓا۟
हवाले कर दो
إِلَىَّ
मेरी तरफ़
عِبَادَ
बन्दों को
ٱللَّهِ ۖ
अल्लाह के
إِنِّى
बेशक मैं
لَكُمْ
तुम्हारे लिए
رَسُولٌ
एक रसूल हूँ
أَمِينٌۭ
अमानतदार
कि "तुम अल्लाह के बन्दों को मेरे हवाले कर दो। निश्चय ही मै तुम्हारे लिए एक विश्वसनीय रसूल हूँ
तफ़्सीर:
मूसा ने फ़िरऔन और उसके लोगों से कहा : बनी इसराईल को मेरे लिए छोड़ दो। क्योंकि वे अल्लाह के बंदे हैं। तुम्हें उन्हें दास बनाने का कोई अधिकार नहीं है। मैं तुम्हारे लिए अल्लाह की ओर से एक रसूल बनाकर भेजा गया हूँ। उस बात के प्रति विश्वसनीय हूँ, जिसे उसने मुझे तुमको पहुँचाने का आदेश दिया है, मैं उसमें कुछ कमी या वृद्धि नहीं करता हूँ।
आयत 19
وَأَن لَّا تَعْلُوا۟ عَلَى ٱللَّهِ ۖ إِنِّىٓ ءَاتِيكُم بِسُلْطَـٰنٍۢ مُّبِينٍۢ
وَأَن
और ये कि
لَّا
(do) not
تَعْلُوا۟
ना तुम सरकशी करो
عَلَى
against
ٱللَّهِ ۖ
अल्लाह (के मुक़ाबले) पर
إِنِّىٓ
बेशक मैं
ءَاتِيكُم
लाया हूँ तुम्हारे पास
بِسُلْطَـٰنٍۢ
दलील
مُّبِينٍۢ
वाज़ेह
और अल्लाह के मुक़ाबले में सरकशी न करो, मैं तुम्हारे लिए एक स्पष्ट प्रमाण लेकर आया हूँ
तफ़्सीर:
और तुम लोग अल्लाह की इबादत छोड़कर और उसके बंदों पर आधिपत्य जमाकर, उसके सामने घमंड मत करो। निश्चय मैं तुम्हारे पास स्पष्ट प्रमाण लेकर आया हूँ।
आयत 20
وَإِنِّى عُذْتُ بِرَبِّى وَرَبِّكُمْ أَن تَرْجُمُونِ
وَإِنِّى
और बेशक मैं
عُذْتُ
पनाह ले चुका मैं
بِرَبِّى
अपने रब की
وَرَبِّكُمْ
और तुम्हारे रब की
أَن
कि
تَرْجُمُونِ
तुम संगसार करो मुझे
और मैं इससे अपने रब और तुम्हारे रब की शरण ले चुका हूँ कि तुम मुझ पर पथराव करके मार डालो
तफ़्सीर:
मैंने अपने पालनहार तथा तुम्हारे पालनहार की शरण ली है, इस बात से कि तुम पत्थर मार-मारकर मेरी हत्या कर डालो।
आज की ज़िंदगी में सबक़
कयामत की एक अलामत (धुआं) का ज़िक्र है। यह सबक हमें सिखाता है कि मुश्किल वक्त में लोग फौरन दुआ मांगते हैं, मगर असली ईमान वह है जो हर हाल में बरकरार रहे।
आयत 21
وَإِن لَّمْ تُؤْمِنُوا۟ لِى فَٱعْتَزِلُونِ
وَإِن
और अगर
لَّمْ
नहीं
تُؤْمِنُوا۟
तुम ईमान लाते
لِى
मुझ पर
فَٱعْتَزِلُونِ
तो अलग हो जाओ मुझसे
किन्तु यदि तुम मेरी बात नहीं मानते तो मुझसे अलग हो जाओ!"
तफ़्सीर:
और अगर तुम मेरे लाए हुए संदेश पर विश्वास नहीं करते, तो मुझसे अलग रहो और किसी बुराई के साथ मेरे निकट न आओ।
आयत 22
فَدَعَا رَبَّهُۥٓ أَنَّ هَـٰٓؤُلَآءِ قَوْمٌۭ مُّجْرِمُونَ
فَدَعَا
तो उसने पुकारा
رَبَّهُۥٓ
अपने रब को
أَنَّ
बेशक
هَـٰٓؤُلَآءِ
ये
قَوْمٌۭ
लोग
مُّجْرِمُونَ
मुजरिम हैं
अन्ततः उसने अपने रब को पुकारा कि "ये अपराधी लोग है।"
तफ़्सीर:
अंततः मूसा अलैहिस्सलाम ने अपने पालनहार से प्रार्थना की : ये लोग - अर्थात् फ़िरऔन और उसके प्रमुख - अपराधी हैं, जो जल्द सज़ा दिए जाने के पात्र हैं।
आयत 23
فَأَسْرِ بِعِبَادِى لَيْلًا إِنَّكُم مُّتَّبَعُونَ
فَأَسْرِ
तो ले चलो
بِعِبَادِى
मेरे बन्दों को
لَيْلًا
रातों रात
إِنَّكُم
बेशक तुम
مُّتَّبَعُونَ
पीछा किए जाने वाले हो
"अच्छा तुम रातों रात मेरे बन्दों को लेकर चले जाओ। निश्चय ही तुम्हारा पीछा किया जाएगा
तफ़्सीर:
तब अल्लाह ने मूसा अलैहिस्सलाम को अपनी जाति के लोगों को लेकर रातों-रात निकल जाने का आदेश दिया और उन्हें यह भी बता दिया कि फ़िरऔन और उसकी जाति के लोग उनका पीछा करेंगे।
आयत 24
وَٱتْرُكِ ٱلْبَحْرَ رَهْوًا ۖ إِنَّهُمْ جُندٌۭ مُّغْرَقُونَ
وَٱتْرُكِ
और छोड़ दो
ٱلْبَحْرَ
समुन्दर को
رَهْوًا ۖ
साकिन
إِنَّهُمْ
बेशक वो
جُندٌۭ
लश्कर हैं
مُّغْرَقُونَ
ग़र्क़ किए जाने वाले
और सागर को स्थिर छोड़ दो। वे तो एक सेना दल हैं, डूब जानेवाले।"
तफ़्सीर:
तथा उन्हें आदेश दिया कि जब वह और बनी इसराईल समुद्र पार कर लें, तो उसे उसी तरह स्थिर छोड़ दें, जैसा कि वह था। निःसंदेह फ़िरऔन और उसके सैनिक समुद्र में डूबकर विनष्ट होने वाले हैं।
आयत 25
كَمْ تَرَكُوا۟ مِن جَنَّـٰتٍۢ وَعُيُونٍۢ
كَمْ
कितने ही
تَرَكُوا۟
वो छोड़ गए
مِن
of
جَنَّـٰتٍۢ
बाग़ात
وَعُيُونٍۢ
और चश्मे
वे छोड़ गये कितनॆ ही बाग़ और स्रोत
तफ़्सीर:
फ़िरऔन और उसकी जाति के लोग अपने पीछे कितने ही बाग़ और बहते हुए स्रोत छोड़ गए!
आयत 26
وَزُرُوعٍۢ وَمَقَامٍۢ كَرِيمٍۢ
وَزُرُوعٍۢ
और खेतियाँ
وَمَقَامٍۢ
और मक़ाम
كَرِيمٍۢ
उमदा
और ख़ेतियां और उत्तम आवास-
तफ़्सीर:
तथा वे अपने पीछे कितनी ही खेतियाँ तथा अच्छी सभाएँ छोड़ गए!
आयत 27
وَنَعْمَةٍۢ كَانُوا۟ فِيهَا فَـٰكِهِينَ
وَنَعْمَةٍۢ
और राहत व आसाइश
كَانُوا۟
थे वो
فِيهَا
जिसमें
فَـٰكِهِينَ
ऐश करने वाले
और सुख सामग्री जिनमें वे मज़े कर रहे थे।
तफ़्सीर:
और वे अपने पीछे कितनी ही सुख-सामग्रियाँ छोड़ गए, जिनका वे आनंद ले रहे थे।
आयत 28
كَذَٰلِكَ ۖ وَأَوْرَثْنَـٰهَا قَوْمًا ءَاخَرِينَ
كَذَٰلِكَ ۖ
इसी तरह
وَأَوْرَثْنَـٰهَا
और वारिस बना दिया हमने उनका
قَوْمًا
क़ौम
ءَاخَرِينَ
दूसरी
हम ऐसा ही मामला करते है, और उन चीज़ों का वारिस हमने दूसरे लोगों को बनाया
तफ़्सीर:
उनके साथ ऐसा ही हुआ, जिसका तुमसे वर्णन किया गया है। और हमने उनके बाग़ों, जल स्रोतों, खेतियों और घरों का वारिस अन्य लोगों अर्थात बनी इसराईल को बना दिया।
आयत 29
فَمَا بَكَتْ عَلَيْهِمُ ٱلسَّمَآءُ وَٱلْأَرْضُ وَمَا كَانُوا۟ مُنظَرِينَ
فَمَا
तो ना
بَكَتْ
रोए
عَلَيْهِمُ
उन पर
ٱلسَّمَآءُ
आसमान
وَٱلْأَرْضُ
और ज़मीन
وَمَا
और ना
كَانُوا۟
थे वो
مُنظَرِينَ
मोहलत दिए जाने वाले
फिर न तो आकाश और धरती ने उनपर विलाप किया और न उन्हें मुहलत ही मिली
तफ़्सीर:
जब फ़िरऔन तथा उसकी जाति के लोग डूब गए, तो उनपर न तो आकाश और धरती ने विलाप किया और न उन्हें तौबा करने की मोहलत दी गई।
आयत 30
وَلَقَدْ نَجَّيْنَا بَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ مِنَ ٱلْعَذَابِ ٱلْمُهِينِ
وَلَقَدْ
और अलबत्ता तहक़ीक़
نَجَّيْنَا
निजात दी हमने
بَنِىٓ
(the) Children of Israel
إِسْرَٰٓءِيلَ
बनी इस्राईल को
مِنَ
from
ٱلْعَذَابِ
अज़ाब से
ٱلْمُهِينِ
ज़िल्लत के
इस प्रकार हमने इसराईल की सन्तान को अपमानजनक यातना से
तफ़्सीर:
वस्तुतः हमने बनी इसराईल को अपमानजनक यातना से बचा लिया। क्योंकि फ़िरऔन और उसकी जाति के लोग उनके बेटों को मार डालते थे और उनकी स्त्रियों को जीवित रहने देते थे।
आज की ज़िंदगी में सबक़
मूसा अलैहिस्सलाम और फिरऔन की कौम की तबाही का ज़िक्र है। यह हमें सिखाता है कि ज़ुल्म करने वाली कौम को मोहलत मिलना उसकी बरी होने की दलील नहीं।
आयत 31
مِن فِرْعَوْنَ ۚ إِنَّهُۥ كَانَ عَالِيًۭا مِّنَ ٱلْمُسْرِفِينَ
مِن
From
فِرْعَوْنَ ۚ
फ़िरऔन से
إِنَّهُۥ
बेशक वो
كَانَ
था वो
عَالِيًۭا
सरकश
مِّنَ
among
ٱلْمُسْرِفِينَ
हद से बढ़ने वालों में से
अर्थात फ़िरऔन से छुटकारा दिया। निश्चय ही वह मर्यादाहीन लोगों में से बड़ा ही सरकश था
तफ़्सीर:
हमने उन्हें फ़िरऔन के उत्पीड़न से बचा लिया। निश्चय वह अल्लाह के आदेश तथा उसके धर्म का उल्लंघन करने वालों में से एक घमंडी व्यक्ति था।
आयत 32
وَلَقَدِ ٱخْتَرْنَـٰهُمْ عَلَىٰ عِلْمٍ عَلَى ٱلْعَـٰلَمِينَ
وَلَقَدِ
और अलबत्ता तहक़ीक़
ٱخْتَرْنَـٰهُمْ
मुन्तख़ब कर लिया हमने उन्हें
عَلَىٰ
by
عِلْمٍ
इल्म की बिना पर
عَلَى
over
ٱلْعَـٰلَمِينَ
तमाम जहानों पर
और हमने (उनकी स्थिति को) जानते हुए उन्हें सारे संसारवालों के मुक़ाबले मं चुन लिया
तफ़्सीर:
तथा हमने बनी इसराईल को अपने ज्ञान के आधार पर उनके समय के लोगों पर चुन लिया, उनके नबियों की अधिकता के कारण।
आयत 33
وَءَاتَيْنَـٰهُم مِّنَ ٱلْـَٔايَـٰتِ مَا فِيهِ بَلَـٰٓؤٌۭا۟ مُّبِينٌ
وَءَاتَيْنَـٰهُم
और दीं हमने उन्हें
مِّنَ
of
ٱلْـَٔايَـٰتِ
निशानियाँ
مَا
जो
فِيهِ
उनमें
بَلَـٰٓؤٌۭا۟
आज़माइश थी
مُّبِينٌ
वाज़ेह
और हमने उन्हें निशानियों के द्वारा वह चीज़ दी जिसमें स्पष्ट परीक्षा थी
तफ़्सीर:
और हमने उन्हें मूसा अलैहिस्सलाम के समर्थन में ऐसे प्रमाण और सबूत दिए, जिसमें उनके लिए स्पष्ट अनुग्रह थी, जैसे कि मन्न और सलवा इत्यादि।
आयत 34
إِنَّ هَـٰٓؤُلَآءِ لَيَقُولُونَ
إِنَّ
बेशक
هَـٰٓؤُلَآءِ
ये लोग
لَيَقُولُونَ
अलबत्ता वो कहते हैं
ये लोग बड़ी दृढ़तापूर्वक कहते है,
तफ़्सीर:
निश्चय ये झुठलाने वाले मुश्रिक मरणोपरांत पुनर्जीवित किए जाने का इनकार करते हुए कहते हैं :
आयत 35
إِنْ هِىَ إِلَّا مَوْتَتُنَا ٱلْأُولَىٰ وَمَا نَحْنُ بِمُنشَرِينَ
إِنْ
नहीं
هِىَ
ये
إِلَّا
मगर
مَوْتَتُنَا
मौत हमारी
ٱلْأُولَىٰ
पहली
وَمَا
और नहीं
نَحْنُ
हम
بِمُنشَرِينَ
उठाए जाने वाले
"बस यह हमारी पहली मृत्यु ही है, हम दोबारा उठाए जानेवाले नहीं हैं
तफ़्सीर:
यह केवल हमारी पहली मृत्यु है, इसके बाद कोई जीवन नहीं है। तथा हम इस मृत्यु के बाद पुनर्जीवित नहीं किए जाएँगे।
आयत 36
فَأْتُوا۟ بِـَٔابَآئِنَآ إِن كُنتُمْ صَـٰدِقِينَ
فَأْتُوا۟
पस ले आओ
بِـَٔابَآئِنَآ
हमारे आबा ओ अजदाद को
إِن
अगर
كُنتُمْ
हो तुम
صَـٰدِقِينَ
सच्चे
तो ले आओ हमारे बाप-दादा को, यदि तुम सच्चे हो!"
तफ़्सीर:
तो (ऐ मुहम्मद!) तुम और तुम्हारे साथ मौजूद तुम्हारे अनुयायी, हमारे उन बाप-दादाओं को जिनकी मृत्यु हो चुकी है, जीवित करके ले आओ, यदि तुम अपने इस दावे में सच्चे हो कि अल्लाह मरे हुए लोगों को हिसाब और बदले के लिए पुनः जीवित करके उठाएगा।
आयत 37
أَهُمْ خَيْرٌ أَمْ قَوْمُ تُبَّعٍۢ وَٱلَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۚ أَهْلَكْنَـٰهُمْ ۖ إِنَّهُمْ كَانُوا۟ مُجْرِمِينَ
أَهُمْ
क्या वो
خَيْرٌ
बेहतर हैं
أَمْ
या
قَوْمُ
क़ौम
تُبَّعٍۢ
तुब्बअ की
وَٱلَّذِينَ
और वो जो
مِن
before them
قَبْلِهِمْ ۚ
उनसे पहले थे
أَهْلَكْنَـٰهُمْ ۖ
हलाक कर दिया हमने उन्हें
إِنَّهُمْ
बेशक वो
كَانُوا۟
थे वो
مُجْرِمِينَ
मुजरिम
क्या वे अच्छे है या तुब्बा की क़ौम या वे लोग जो उनसे पहले गुज़र चुके है? हमने उन्हें विनष्ट कर दिया, निश्चय ही वे अपराधी थे
तफ़्सीर:
क्या (ऐ रसूल!) आपको झुठलाने वाले ये मुश्रिक शक्ति और ताकत में बेहतर हैं या तुब्बा' समुदाय और वे लोग जो उनसे पहले थे, जैसे आद और समूद। हमने उन सभी को नष्ट कर दिया। निःसंदेह वे अपराधी थे।
आयत 38
وَمَا خَلَقْنَا ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَا لَـٰعِبِينَ
وَمَا
और नहीं
خَلَقْنَا
पैदा किया हमने
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों
وَٱلْأَرْضَ
और ज़मीन को
وَمَا
और जो
بَيْنَهُمَا
दर्मियान है उन दोनों के
لَـٰعِبِينَ
खेलते हुए
हमने आकाशों और धरती को और जो कुछ उनके बीच है उन्हें खेल नहीं बनाया
तफ़्सीर:
हमने आकाशों और धरती को और जो कुछ उनके बीच है, उन्हें खेल के रूप में नहीं बनाया।
आयत 39
مَا خَلَقْنَـٰهُمَآ إِلَّا بِٱلْحَقِّ وَلَـٰكِنَّ أَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُونَ
مَا
नहीं
خَلَقْنَـٰهُمَآ
पैदा किया हमने उन दोनों को
إِلَّا
मगर
بِٱلْحَقِّ
साथ हक़ के
وَلَـٰكِنَّ
और लेकिन
أَكْثَرَهُمْ
अक्सर उनके
لَا
(do) not
يَعْلَمُونَ
नहीं वो इल्म रखते
हमने उन्हें हक़ के साथ पैदा किया, किन्तु उनमें से अधिककर लोग जानते नहीं
तफ़्सीर:
हमने आकाशों तथा धरती को एक बड़ी हिकमत के तहत पैदा किया है, लेकिन अधिकांश बहुदेववादियों को इसकी जानकारी नहीं है।
आयत 40
إِنَّ يَوْمَ ٱلْفَصْلِ مِيقَـٰتُهُمْ أَجْمَعِينَ
إِنَّ
बेशक
يَوْمَ
दिन
ٱلْفَصْلِ
फ़ैसले का
مِيقَـٰتُهُمْ
वक़्त मुक़र्रर है उनका
أَجْمَعِينَ
सब के सब का
निश्चय ही फ़ैसले का दिन उन सबका नियत समय है,
तफ़्सीर:
निःसंदेह क़ियामत का दिन, जिस दिन अल्लाह बंदों के बीच निर्णय करेगा, सभी प्राणियों के लिए एक नियत समय है, जिसमें अल्लाह उन्हें इकट्ठा करेगा।
आज की ज़िंदगी में सबक़
कयामत के इनकार करने वालों को जवाब दिया गया है। यह सबक हमें सिखाता है कि सिर्फ पहले लोगों को दलील समझकर कयामत का इनकार करना गलत है, हर इंसान अपने अमल का हिसाब देगा।
आयत 41
يَوْمَ لَا يُغْنِى مَوْلًى عَن مَّوْلًۭى شَيْـًۭٔا وَلَا هُمْ يُنصَرُونَ
يَوْمَ
जिस दिन
لَا
not
يُغْنِى
ना काम आएगा
مَوْلًى
कोई दोस्त
عَن
for
مَّوْلًۭى
किसी दोस्त के
شَيْـًۭٔا
कुछ भी
وَلَا
और ना
هُمْ
वो
يُنصَرُونَ
वो मदद किए जाऐंगे
जिस दिन कोई अपना किसी अपने के कुछ काम न आएगा और न कोई सहायता पहुँचेगी,
तफ़्सीर:
जिस दिन कोई रिश्तेदार अपने रिश्तेदार को और कोई मित्र अपने मित्र को कुछ लाभ नहीं पहुँचाएगा, और न ही वे अल्लाह की यातना से बचाए जाएँगे। क्योंकि उस दिन सत्ता केवल अल्लाह के हाथ में होगी। कोई भी उसका दावा नहीं कर सकता।
आयत 42
إِلَّا مَن رَّحِمَ ٱللَّهُ ۚ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلرَّحِيمُ
إِلَّا
मगर
مَن
जिस पर
رَّحِمَ
रहम फ़रमाय
ٱللَّهُ ۚ
अल्लाह
إِنَّهُۥ
यक़ीनन
هُوَ
वो ही है
ٱلْعَزِيزُ
बहुत ज़बरदस्त
ٱلرَّحِيمُ
निहायत रहम करने वाला
सिवाय उस व्यक्ति के जिसपर अल्लाह दया करे। निश्चय ही वह प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयावान है
तफ़्सीर:
सिवाय उस व्यक्ति के, जिसपर अल्लाह दया करे, तो उसे अपने किए हुए अच्छे कामों का लाभ होगा। निःसंदेह अल्लाह वह प्रभुत्वशाली है, जिसे कोई परास्त नहीं कर सकता, जो अपने तौबा करने वाले बंदों पर अत्यंत दयालु है।
आयत 43
إِنَّ شَجَرَتَ ٱلزَّقُّومِ
إِنَّ
बेशक
شَجَرَتَ
दरख़्त
ٱلزَّقُّومِ
जक़्क़ूम का
निस्संदेह ज़क़्क़ूम का वृक्ष
तफ़्सीर:
निःसंदेह ज़क़्क़ूम (थूहड़) का पेड़, जिसे अल्लाह ने जहन्नम के पाताल में उगाया है।
आयत 44
طَعَامُ ٱلْأَثِيمِ
طَعَامُ
खाना है
ٱلْأَثِيمِ
गुनहगार का
गुनहगार का भोजन होगा,
तफ़्सीर:
(वह) महा पाप वाले व्यक्ति अर्थात् काफ़िर का खाना है, जो उसके दुष्ट फल को खाएगा।
आयत 45
كَٱلْمُهْلِ يَغْلِى فِى ٱلْبُطُونِ
كَٱلْمُهْلِ
पिघले हुए ताँबे की तरह
يَغْلِى
जोश खाएगा
فِى
in
ٱلْبُطُونِ
पेटों में
तेल की तलछट जैसा, वह पेटों में खौलता होगा,
तफ़्सीर:
यह फल काले तेल की तरह होगा, जो तीव्र गर्मी से उनके पेट में खौलता होगा।
आयत 46
كَغَلْىِ ٱلْحَمِيمِ
كَغَلْىِ
मानिन्द जोश खाने
ٱلْحَمِيمِ
खौलते पानी के
जैसे गर्म पानी खौलता है
तफ़्सीर:
जिस तरह अत्यंत गर्म पानी खौलता है।
आयत 47
خُذُوهُ فَٱعْتِلُوهُ إِلَىٰ سَوَآءِ ٱلْجَحِيمِ
خُذُوهُ
(कहा जाएगा) पकड़ो उसे
فَٱعْتِلُوهُ
पस घसीटो उसे
إِلَىٰ
तरफ़
سَوَآءِ
दर्मियान
ٱلْجَحِيمِ
जहन्नम के
"पकड़ो उसे, और भड़कती हुई आग के बीच तक घसीट ले जाओ,
तफ़्सीर:
और जहन्नम के पहरेदारों से कहा जाएगा : इसे पकड़ो, तथा सख़्ती एवं कठोरता के साथ घसीटकर जहन्नम के बीच तक ले जाओ।
आयत 48
ثُمَّ صُبُّوا۟ فَوْقَ رَأْسِهِۦ مِنْ عَذَابِ ٱلْحَمِيمِ
ثُمَّ
फिर
صُبُّوا۟
उन्डेल दो
فَوْقَ
ऊपर
رَأْسِهِۦ
उसके सिर के
مِنْ
of
عَذَابِ
अज़ाब से
ٱلْحَمِيمِ
खौलते पानी के
फिर उसके सिर पर खौलते हुए पानी का यातना उंडेल दो!"
तफ़्सीर:
फिर इस यातना दिए जाने वाले व्यक्ति के सिर पर गरम पानी उंडेल दो। चुनाँचे यातना उसका पीछा नहीं छोड़ेगी।
आयत 49
ذُقْ إِنَّكَ أَنتَ ٱلْعَزِيزُ ٱلْكَرِيمُ
ذُقْ
(कहा जाऐगा) चखो
إِنَّكَ
बेशक तुम
أَنتَ
तुम ही
ٱلْعَزِيزُ
बहुत ज़बरदस्त
ٱلْكَرِيمُ
इज़्ज़त वाले थे
"मज़ा चख, तू तो बड़ा बलशाली, सज्जन और आदरणीय है!
तफ़्सीर:
तथा उसे व्यंग्यपूर्वक कहा जाएगा : इस दर्दनाक यातना का स्वाद चख; निःसंदेह तू ही वह व्यक्ति है, जो बड़ा शक्तिशाली और अपनी जाति के अंदर बड़ा सम्मानित और आदरणीय था।
आयत 50
إِنَّ هَـٰذَا مَا كُنتُم بِهِۦ تَمْتَرُونَ
إِنَّ
बेशक
هَـٰذَا
ये है
مَا
वो जो
كُنتُم
थे तुम
بِهِۦ
उसमें
تَمْتَرُونَ
तुम शक करते थे
यही तो है जिसके विषय में तुम संदेह करते थे।"
तफ़्सीर:
यह वही यातना है, जिसके क़ियामत के दिन घटित होने के बारे में तुम संदेह करते थे। परंतु अब उसे अपनी आँखों से देखकर तुम्हारा संदेह दूर हो गया।
आज की ज़िंदगी में सबक़
दोज़ख़ के अज़ाब और ज़क़्क़ूम के दरख्त का ज़िक्र है। यह हमें सिखाता है कि दुनिया में जो कमाई हराम तरीके से हो, वह आखिरत में तकलीफ का सबब बन सकती है।
आयत 51
إِنَّ ٱلْمُتَّقِينَ فِى مَقَامٍ أَمِينٍۢ
إِنَّ
बेशक
ٱلْمُتَّقِينَ
मुत्तक़ी लोग
فِى
(will be) in
مَقَامٍ
जगह पर होंगे
أَمِينٍۢ
अमन वाली
निस्संदेह डर रखनेवाले निश्चिन्तता की जगह होंगे,
तफ़्सीर:
निःसंदेह अपने पालनहार से, उसके आदेशों का पालन करके और उसकी मना की हुई चीज़ों से दूर रहकर, डरने वाले लोग, एक ऐसे निवास की जगह में होंगे, जहाँ हर बुराई और नुकसान से सुरक्षित होंगे।
आयत 52
فِى جَنَّـٰتٍۢ وَعُيُونٍۢ
فِى
In
جَنَّـٰتٍۢ
बाग़ों में
وَعُيُونٍۢ
और चश्मों में
बाग़ों और स्रोतों में
तफ़्सीर:
बाग़ों तथा बहते जल स्राेतों में होंगेl
आयत 53
يَلْبَسُونَ مِن سُندُسٍۢ وَإِسْتَبْرَقٍۢ مُّتَقَـٰبِلِينَ
يَلْبَسُونَ
वो पहनेंगे
مِن
of
سُندُسٍۢ
बारीक रेशम से
وَإِسْتَبْرَقٍۢ
और मोटे रेशम से
مُّتَقَـٰبِلِينَ
आमने-सामने बैठने वाले
बारीक और गाढ़े रेशम के वस्त्र पहने हुए, एक-दूसरे के आमने-सामने उपस्थित होंगे
तफ़्सीर:
वे जन्नत में पतले और मोटे रेशम के कपड़े पहने हुए, एक-दूसरे के आमने-सामने बैठे होंगे। कोई किसी की पीठ नहीं देखेगा।
आयत 54
كَذَٰلِكَ وَزَوَّجْنَـٰهُم بِحُورٍ عِينٍۢ
كَذَٰلِكَ
इसी तरह
وَزَوَّجْنَـٰهُم
और ब्याह देंगे हम उन्हें
بِحُورٍ
गोरी औरतों से
عِينٍۢ
बड़ी आँखों वाली
ऐसा ही उनके साथ मामला होगा। और हम साफ़ गोरी, बड़ी नेत्रोवाली स्त्रियों से उनका विवाह कर देंगे
तफ़्सीर:
जिस तरह हमने उन्हें उपर्युक्त चीज़ों से सम्मानित किया, उसी तरह हम जन्नत में उनका विवाह ऐसी सुंदर स्त्रियों से कर देंगे, जो बड़ी-बड़ी आँखों वाली होंगी और उन आँखों की सफेदी बहुत सफेद तथा उनका कालापन बहुत काला होगा।
आयत 55
يَدْعُونَ فِيهَا بِكُلِّ فَـٰكِهَةٍ ءَامِنِينَ
يَدْعُونَ
वो तलब करेंगे
فِيهَا
उसमें
بِكُلِّ
हर क़िस्म के
فَـٰكِهَةٍ
फल
ءَامِنِينَ
बेख़ौफ़ हो कर
वे वहाँ निश्चिन्तता के साथ हर प्रकार के स्वादिष्ट फल मँगवाते होंगे
तफ़्सीर:
वे वहाँ अपने सेवकों से इच्छानुसार हर प्रकार के फल मंगवाएँगे। वे उन फलों के खत्म होने और उनके हानिकारक प्रभावों से सुरक्षित होंगे।
आयत 56
لَا يَذُوقُونَ فِيهَا ٱلْمَوْتَ إِلَّا ٱلْمَوْتَةَ ٱلْأُولَىٰ ۖ وَوَقَىٰهُمْ عَذَابَ ٱلْجَحِيمِ
لَا
Not
يَذُوقُونَ
ना वो चखेंगे
فِيهَا
उसमें
ٱلْمَوْتَ
मौत को
إِلَّا
सिवाय
ٱلْمَوْتَةَ
मौत
ٱلْأُولَىٰ ۖ
पहली के
وَوَقَىٰهُمْ
और वो बचा लेगा उन्हें
عَذَابَ
अज़ाब से
ٱلْجَحِيمِ
जहन्नम के
वहाँ वे मृत्यु का मज़ा कभी न चखेगे। बस पहली मृत्यु जो हुई, सो हुई। और उसने उन्हें भड़कती हुई आग की यातना से बचा लिया
तफ़्सीर:
उसी में सदैव रहेंगे। वे दुनिया के जीवन में होने वाली पहली मौत के सिवा, उसमें मौत का स्वाद नहीं चखेंगे। तथा उनका पालनहार उन्हें जहन्नम की यातना से सुरक्षित रखेगा।
आयत 57
فَضْلًۭا مِّن رَّبِّكَ ۚ ذَٰلِكَ هُوَ ٱلْفَوْزُ ٱلْعَظِيمُ
فَضْلًۭا
फ़ज़ल है
مِّن
from
رَّبِّكَ ۚ
आपके रब की तरफ़ से
ذَٰلِكَ
यही
هُوَ
वो
ٱلْفَوْزُ
कामयाबी है
ٱلْعَظِيمُ
बहुत बड़ी
यह सब तुम्हारे रब के विशेष उदार अनुग्रह के कारण होगा, वही बड़ी सफलता है
तफ़्सीर:
यह आपके पालनहार की ओर से उनपर अनुग्रह और उपकार के तौर पर होगा। यह उपर्युक्त - अर्थात उन्हें जन्नत में प्रवेश देना और जहन्नम से बचाना - ही बड़ी सफलता है, जिसकी बराबरी कोई सफलता नहीं कर सकती।
आयत 58
فَإِنَّمَا يَسَّرْنَـٰهُ بِلِسَانِكَ لَعَلَّهُمْ يَتَذَكَّرُونَ
فَإِنَّمَا
पस बेशक
يَسَّرْنَـٰهُ
आसान कर दिया हमने उसे
بِلِسَانِكَ
आपकी ज़बान पर
لَعَلَّهُمْ
शायद कि वो
يَتَذَكَّرُونَ
वो नसीहत पकड़ें
हमने तो इस (क़ुरआन) को बस तुम्हारी भाषा में सहज एवं सुगम बना दिया है ताकि वे याददिहानी प्राप्त (करें
तफ़्सीर:
हमने इस क़ुरआन को (ऐ रसूल!) आपकी अरबी भाषा में उतारकर सरल और आसान कर दिया है, ताकि वे नसीहत पकड़ें।
आयत 59
فَٱرْتَقِبْ إِنَّهُم مُّرْتَقِبُونَ
فَٱرْتَقِبْ
पस इन्तज़ार कीजिए
إِنَّهُم
बेशक वो (भी)
مُّرْتَقِبُونَ
इन्तज़ार करने वाले हैं
अच्छा तुम भी प्रतीक्षा करो, वे भी प्रतीक्षा में हैं
तफ़्सीर:
अतः आप अपनी जीत और उनके विनाश की प्रतीक्षा करें। निःसंदेह वे (भी) आपके विनाश की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
आज की ज़िंदगी में सबक़
जन्नत की नेमतों और कुरआन को आसान बनाए जाने के ज़िक्र के साथ सूरह का इख्तिताम होता है। यह सबक हमें सिखाता है कि कुरआन को समझना और उस पर अमल करना आसान बनाया गया है, बस दिल से कोशिश करने की ज़रूरत है।
मेरा एक्शन प्लान

⚠️ कुछ गलत लगा?

अगर आपको इस पेज पर कोई ग़लती (तर्जुमा, तथ्य, या कुछ और) दिखी हो, तो हमें बताएं — हम जांच करके ठीक करेंगे।

0%