नाम का मतलब
घुटनों के बल गिरने वाले (कयामत के दिन लोगों के घुटनों के बल गिरने के ज़िक्र से)
पृष्ठभूमि
सूरह अल-जासिया में कायनात की निशानियों, कयामत के दिन कौमों के घुटनों के बल गिरने और अपनी ख्वाहिशों को खुदा बना लेने वालों की मज़म्मत का ज़िक्र है।
फ़ज़ीलत / सार
यह सूरह कायनात में गौर-ओ-फिक्र करने और अपनी नफ्सानी ख्वाहिशों को मआबूद न बनाने की अहम नसीहत देती है।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
आयत 1
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ حمٓ
حمٓ
ح م
हा॰ मीम॰
तफ़्सीर:
{हा, मीम।} सूरतुल-बक़रा की शुरुआत में इस प्रकार के अक्षरों के बारे में बात गुज़र चुकी है।
आयत 2
تَنزِيلُ ٱلْكِتَـٰبِ مِنَ ٱللَّهِ ٱلْعَزِيزِ ٱلْحَكِيمِ
تَنزِيلُ
नाज़िल करना है
ٱلْكِتَـٰبِ
किताब का
مِنَ
(is) from
ٱللَّهِ
अल्लाह की तरफ़ से
ٱلْعَزِيزِ
जो बहुत ज़बरदस्त है
ٱلْحَكِيمِ
ख़ूब हिकमत वाला है
इस किताब का अवतरण अल्लाह की ओर से है, जो अत्यन्त प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है। -
तफ़्सीर:
क़ुरआन उस अल्लाह की ओर से उतारा गया है, जो प्रभुत्वशाली है, उसपर किसी का ज़ोर नहीं चलता। वह अपनी रचना, नियति और प्रबंधन में हिकमत वाला है।
आयत 3
إِنَّ فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ لَـَٔايَـٰتٍۢ لِّلْمُؤْمِنِينَ
إِنَّ
बेशक
فِى
in
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों में
وَٱلْأَرْضِ
और ज़मीन में
لَـَٔايَـٰتٍۢ
अलबत्ता निशानियाँ हैं
لِّلْمُؤْمِنِينَ
ईमान वालों के लिए
निस्संदेह आकाशों और धरती में ईमानवालों के लिए बहुत-सी निशानियाँ है
तफ़्सीर:
निःसंदेह आकाशों तथा धरती में ईमान वालों के लिए अल्लाह की शक्ति और उसकी एकता (एकेश्वरवाद) के बहुत-से प्रमाण हैं; क्योंकि वही लोग हैं जो निशानियों से इबरत हासिल करते हैं।
आयत 4
وَفِى خَلْقِكُمْ وَمَا يَبُثُّ مِن دَآبَّةٍ ءَايَـٰتٌۭ لِّقَوْمٍۢ يُوقِنُونَ
وَفِى
And in
خَلْقِكُمْ
और तुम्हारी पैदाइश में
وَمَا
और जो
يَبُثُّ
वो फैलाता है
مِن
of
دَآبَّةٍ
जानदारों में से
ءَايَـٰتٌۭ
निशानियाँ हैं
لِّقَوْمٍۢ
उन लोगों के लिए
يُوقِنُونَ
जो यक़ीन रखते हैं
और तुम्हारी संरचना में, और उनकी भी जो जानवर वह फैलाता रहता है, निशानियाँ है उन लोगों के लिए जो विश्वास करें
तफ़्सीर:
और (ऐ लोगों!) तुम्हें वीर्य से, फिर जमे हुए रक्त से, फिर मांस के टुकड़े से पैदा करने में, तथा धरती पर चलने वाले अल्लाह के फैलाए हुए जानवरों की रचना में, उन लोगों के लिए अल्लाह की एकता (एकेश्वरवाद) की बहुत-सी निशानियाँ हैं, जो इस बात पर विश्वास करते हैं कि अल्लाह ही सृष्टिकर्ता है।
आयत 5
وَٱخْتِلَـٰفِ ٱلَّيْلِ وَٱلنَّهَارِ وَمَآ أَنزَلَ ٱللَّهُ مِنَ ٱلسَّمَآءِ مِن رِّزْقٍۢ فَأَحْيَا بِهِ ٱلْأَرْضَ بَعْدَ مَوْتِهَا وَتَصْرِيفِ ٱلرِّيَـٰحِ ءَايَـٰتٌۭ لِّقَوْمٍۢ يَعْقِلُونَ
وَٱخْتِلَـٰفِ
और इख़्तिलाफ़ में
ٱلَّيْلِ
रात
وَٱلنَّهَارِ
और दिन के
وَمَآ
और जो
أَنزَلَ
उतारा
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
مِنَ
from
ٱلسَّمَآءِ
आसमान से
مِن
of
رِّزْقٍۢ
रिज़्क़ में से
فَأَحْيَا
फिर उसने ज़िन्दा किया
بِهِ
साथ उसके
ٱلْأَرْضَ
ज़मीन को
بَعْدَ
बाद
مَوْتِهَا
उसकी मौत के
وَتَصْرِيفِ
और गर्दिश में
ٱلرِّيَـٰحِ
हवाओं की
ءَايَـٰتٌۭ
निशानियाँ हैं
لِّقَوْمٍۢ
उन लोगों के लिए
يَعْقِلُونَ
जो अक़्ल रखते हैं
और रात और दिन के उलट-फेर में भी, और उस रोज़ी (पानी) में भी जिसे अल्लाह ने आकाश से उतारा, फिर उसके द्वारा धरती को उसके उन मुर्दा हो जाने के पश्चात जीवित किया और हवाओं की गर्दिश में भीलोगों के लिए बहुत-सी निशानियाँ है जो बुद्धि से काम लें
तफ़्सीर:
तथा रात और दिन के आने-जाने में, और उस बारिश (पानी) में जो अल्लाह ने आकाश से उतारा, फिर उसके द्वारा धरती को, उसमें पेड़-पौधे उगाकर, पुनर्जीवित कर दिया, जबकि वह मृत हो चुकी थी उसमें एक पौधा भी नहीं था। तथा हवाओं के फेरने में; तुम्हारे लाभ के लिए उन्हें कभी एक दिशा से लाकर, तो कभी दूसरी दिशा से चलाकर; इन सभी चीज़ों में ऐसे लोगों के लिए निशानियाँ हैं, जो बुद्धि से काम लेते हैं। चुनाँचे वे उनसे यह निष्कर्ष निकालते हैं कि अल्लाह एक है, मरणोपरांत पुनर्जीवित करने में सक्षम है और हर चीज़ पर शक्ति रखता है।
आयत 6
تِلْكَ ءَايَـٰتُ ٱللَّهِ نَتْلُوهَا عَلَيْكَ بِٱلْحَقِّ ۖ فَبِأَىِّ حَدِيثٍۭ بَعْدَ ٱللَّهِ وَءَايَـٰتِهِۦ يُؤْمِنُونَ
تِلْكَ
ये
ءَايَـٰتُ
आयात हैं
ٱللَّهِ
अल्लाह की
نَتْلُوهَا
हम पढ़ते हैं उन्हें
عَلَيْكَ
आप पर
بِٱلْحَقِّ ۖ
साथ हक़ के
فَبِأَىِّ
तो साथ किस
حَدِيثٍۭ
बात के
بَعْدَ
बाद
ٱللَّهِ
अल्लाह के
وَءَايَـٰتِهِۦ
और उसकी आयात के
يُؤْمِنُونَ
वो ईमान लाऐंगे
ये अल्लाह की आयतें हैं, हम उन्हें हक़ के साथ तुमको सुना रहे हैं। अब आख़िर अल्लाह और उसकी आयतों के पश्चात और कौन-सी बात है जिसपर वे ईमान लाएँगे?
तफ़्सीर:
इन निशानियों और प्रमाणों को हम (ऐ रसूल!) आपको सत्य के साथ सुना रहे हैं। अब अगर वे अल्लाह की अपने बंदे पर उतारी हुई वाणी और उसके प्रमाणों (तर्कों) पर ईमान नहीं लाते, तो इसके बाद वे किस बात पर ईमान लाएँगे और इसके बाद वे किन तर्कों को मानेंगे?
आयत 7
وَيْلٌۭ لِّكُلِّ أَفَّاكٍ أَثِيمٍۢ
وَيْلٌۭ
हलाकत है
لِّكُلِّ
वास्ते हर
أَفَّاكٍ
बहुत झूठे
أَثِيمٍۢ
बहुत गुनहगार के
तबाही है हर झूठ घड़नेवाले गुनहगार के लिए,
तफ़्सीर:
अल्लाह की यातना और विनाश है हर उस व्यक्ति के लिए, जो बहुत झूठ बोलने वाला और बहुत पाप करने वाला है।
आयत 8
يَسْمَعُ ءَايَـٰتِ ٱللَّهِ تُتْلَىٰ عَلَيْهِ ثُمَّ يُصِرُّ مُسْتَكْبِرًۭا كَأَن لَّمْ يَسْمَعْهَا ۖ فَبَشِّرْهُ بِعَذَابٍ أَلِيمٍۢ
يَسْمَعُ
वो सुनता है
ءَايَـٰتِ
आयात को
ٱللَّهِ
अल्लाह की
تُتْلَىٰ
जो पढ़ी जाती हैं
عَلَيْهِ
उस पर
ثُمَّ
फिर
يُصِرُّ
वो इसरार करता है
مُسْتَكْبِرًۭا
तकब्बुर करते हुए
كَأَن
गोया कि
لَّمْ
नहीं
يَسْمَعْهَا ۖ
उसने सुना उन्हें
فَبَشِّرْهُ
तो ख़ुशख़बरी दे दीजिए उसे
بِعَذَابٍ
अज़ाब
أَلِيمٍۢ
दर्दनाक की
जो अल्लाह की उन आयतों को सुनता है जो उसे पढ़कर सुनाई जाती है। फिर घमंड के साथ अपनी (इनकार की) नीति पर अड़ा रहता है मानो उसने उनको सुना ही नहीं। अतः उसको दुखद यातना की शुभ सूचना दे दो
तफ़्सीर:
यह काफ़िर क़ुरआन में अल्लाह की उन आयतों को सुनता है, जो उसके सामने पढ़ी जाती हैं, फिर वह अपने अभिमान के कारण सत्य का पालन करने से उपेक्षा करते हुए, अपने कुफ़्र और पाप की गतिविधि को जारी रखता है। मानो कि उसने उन आयतों को सुना ही नहीं, जो उसके सामने पढ़ी जाती हैं। तो (ऐ रसूल!) आप उसे आख़िरत में एक बुरी चीज़ की सूचना दे दीजिए और वह एक दर्दनाक यातना है जो उसका इंतज़ार कर रही है।
आयत 9
وَإِذَا عَلِمَ مِنْ ءَايَـٰتِنَا شَيْـًٔا ٱتَّخَذَهَا هُزُوًا ۚ أُو۟لَـٰٓئِكَ لَهُمْ عَذَابٌۭ مُّهِينٌۭ
وَإِذَا
और जब
عَلِمَ
वो जान लेता है
مِنْ
of
ءَايَـٰتِنَا
हमारी आयात में से
شَيْـًٔا
कोई चीज़
ٱتَّخَذَهَا
वो बना लेता है उसे
هُزُوًا ۚ
मज़ाक़
أُو۟لَـٰٓئِكَ
यही लोग हैं
لَهُمْ
उनके लिए
عَذَابٌۭ
अज़ाब है
مُّهِينٌۭ
ज़लील करने वाला
जब हमारी आयतों में से कोई बात वह जान लेता है तो वह उनका परिहास करता है, ऐसे लोगों के लिए रुसवा कर देनेवाली यातना है
तफ़्सीर:
जब उसे क़ुरआन की कोई बात पहुँचती है, तो उसे उपहास का सामान बनाकर उसकी हँसी उड़ाता है। यही क़ुरआन की हँसी उड़ाने वाले लोग हैं, जिनके लिए क़ियामत के दिन अपमानजनक यातना है।
आयत 10
مِّن وَرَآئِهِمْ جَهَنَّمُ ۖ وَلَا يُغْنِى عَنْهُم مَّا كَسَبُوا۟ شَيْـًۭٔا وَلَا مَا ٱتَّخَذُوا۟ مِن دُونِ ٱللَّهِ أَوْلِيَآءَ ۖ وَلَهُمْ عَذَابٌ عَظِيمٌ
مِّن
Before them
وَرَآئِهِمْ
उनके आगे
جَهَنَّمُ ۖ
जहन्नम है
وَلَا
और ना
يُغْنِى
काम आएगा
عَنْهُم
उन्हें
مَّا
जो
كَسَبُوا۟
उन्होंने ने कमाया
شَيْـًۭٔا
कुछ भी
وَلَا
और ना
مَا
वो जो
ٱتَّخَذُوا۟
उन्होंने बना लिए
مِن
besides
دُونِ
सिवाय
ٱللَّهِ
अल्लाह के
أَوْلِيَآءَ ۖ
हिमायती
وَلَهُمْ
और उनके लिए
عَذَابٌ
अज़ाब है
عَظِيمٌ
बहुत बड़ा
उनके आगे जहन्नम है, जो उन्होंने कमाया वह उनके कुछ काम न आएगा और न यही कि उन्होंने अल्लाह को छोड़कर अपने संरक्षक ठहरा रखे है। उनके लिए तो बड़ी यातना है
तफ़्सीर:
उनके आगे जहन्नम की आग है, जो आख़िरत में उनकी प्रतीक्षा कर रही है। और उनके कमाए हुए धन उन्हें अल्लाह की यातना से बचाने में कुछ काम न आएँगे और न ही वे मूर्तियाँ उनके कुछ काम आ सकेंगी, जिनकी वे अल्लाह के सिवा पूजा किया करते थे। तथा उनके लिए क़ियामत के दिन बड़ी यातना है।
आज की ज़िंदगी में सबक़
कायनात की निशानियों और गौर-ओ-फिक्र की दावत का ज़िक्र है। यह हमें सिखाता है कि कायनात में गौर करना ईमान को मज़बूत करता है, बस दिल का खुला होना ज़रूरी है।
आयत 11
هَـٰذَا هُدًۭى ۖ وَٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ بِـَٔايَـٰتِ رَبِّهِمْ لَهُمْ عَذَابٌۭ مِّن رِّجْزٍ أَلِيمٌ
هَـٰذَا
ये है
هُدًۭى ۖ
हिदायत
وَٱلَّذِينَ
और वो जिन्होंने
كَفَرُوا۟
इन्कार किया
بِـَٔايَـٰتِ
आयात का
رَبِّهِمْ
अपने रब की
لَهُمْ
उनके लिए
عَذَابٌۭ
अज़ाब है
مِّن
of
رِّجْزٍ
बदतरीन क़िस्म का
أَلِيمٌ
दर्दनाक
यह सर्वथा मार्गदर्शन है। और जिन लोगों ने अपने रब की आयतों को इनकार किया, उनके लिए हिला देनेवाली दुखद यातना है
तफ़्सीर:
यह पुस्तक जो हमने अपने रसूल मुहम्मद पर उतारी है, सत्य का मार्ग दिखाती है। और जिन लोगों ने अपने पालनहार की उसके रसूल पर अवतरित आयतों का इनकार क्या, उनके लिए एक बुरी, पीड़ादायक यातना है।
आयत 12
۞ ٱللَّهُ ٱلَّذِى سَخَّرَ لَكُمُ ٱلْبَحْرَ لِتَجْرِىَ ٱلْفُلْكُ فِيهِ بِأَمْرِهِۦ وَلِتَبْتَغُوا۟ مِن فَضْلِهِۦ وَلَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ
۞ ٱللَّهُ
अल्लाह
ٱلَّذِى
वो है जिसने
سَخَّرَ
मुसख़्खर किया
لَكُمُ
तुम्हारे लिए
ٱلْبَحْرَ
समुन्दर को
لِتَجْرِىَ
ताकि चलें
ٱلْفُلْكُ
कश्तियाँ
فِيهِ
उसमें
بِأَمْرِهِۦ
उसके हुक्म से
وَلِتَبْتَغُوا۟
और ताकि तुम तलाश करो
مِن
of
فَضْلِهِۦ
उसके फ़ज़ल से
وَلَعَلَّكُمْ
और ताकि तुम
تَشْكُرُونَ
तुम शुक्र अदा करो
वह अल्लाह ही है जिसने समुद्र को तुम्हारे लिए वशीभूत कर दिया है, ताकि उसके आदेश से नौकाएँ उसमें चलें; और ताकि तुम उसका उदार अनुग्रह तलाश करो; और इसलिए कि तुम कृतज्ञता दिखाओ
तफ़्सीर:
अकेला अल्लाह ही है, जिसने (ऐ लोगो!) तुम्हारे लिए समुद्र को वशीभूत कर दिया, ताकि उसके आदेश से उसमें नौकाएँ चलें, और ताकि तुम विभिन्न प्रकार की वैध कमाइयों के द्वारा उसका अनुग्रह तलाश करो और ताकि तुम अपने ऊपर अल्लाह की नेमतों के प्रति आभार प्रकट करो।
आयत 13
وَسَخَّرَ لَكُم مَّا فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَمَا فِى ٱلْأَرْضِ جَمِيعًۭا مِّنْهُ ۚ إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَـٰتٍۢ لِّقَوْمٍۢ يَتَفَكَّرُونَ
وَسَخَّرَ
और उसने मुसख़्खर किया
لَكُم
तुम्हारे लिए
مَّا
जो कुछ
فِى
(is) in
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों में है
وَمَا
और जो कुछ
فِى
(is) in
ٱلْأَرْضِ
ज़मीन में है
جَمِيعًۭا
सब का सब
مِّنْهُ ۚ
अपनी तरफ़ से
إِنَّ
बेशक
فِى
in
ذَٰلِكَ
इसमें
لَـَٔايَـٰتٍۢ
अलबत्ता निशानियाँ हैं
لِّقَوْمٍۢ
उन लोगों के लिए
يَتَفَكَّرُونَ
जो ग़ौर व फ़िक्र करते हैं
जो चीज़ें आकाशों में है और जो धरती में हैं, उसने उन सबको अपनी ओर से तुम्हारे काम में लगा रखा है। निश्चय ही इसमें उन लोगों के लिए निशानियाँ है जो सोच-विचार से काम लेते है
तफ़्सीर:
तथा उस महिमावान (अल्लाह) ने, आकाशों में जो सूरज, चाँद और सितारे तथा धरती में जो नदियाँ, पेड़ और पहाड़ आदि हैं, उन सबको तुम्हारे लिए वशीभूत कर दिया है। ये सभी नेमतें उसी की कृपा और उपकार से हैं। निःसंदेह इन चीज़ों को तुम्हारे लिए वशीभूत करने में उन लोगों के लिए अल्लाह की शक्ति और एकता की निशानियाँ हैं, जो उसकी निशानियों में चिंतन-मनन करते हैं और उनसे इबरत हासिल करते हैं।
आयत 14
قُل لِّلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ يَغْفِرُوا۟ لِلَّذِينَ لَا يَرْجُونَ أَيَّامَ ٱللَّهِ لِيَجْزِىَ قَوْمًۢا بِمَا كَانُوا۟ يَكْسِبُونَ
قُل
कह दीजिए
لِّلَّذِينَ
उन लोगों को जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
يَغْفِرُوا۟
कि वो माफ़ कर दें
لِلَّذِينَ
उनको जो
لَا
(do) not
يَرْجُونَ
नहीं वो उम्मीद रखते
أَيَّامَ
(for the) days
ٱللَّهِ
अल्लाह के दिनों कि
لِيَجْزِىَ
ताकि वो बदला दे
قَوْمًۢا
एक क़ौम को
بِمَا
बवजह उसके जो
كَانُوا۟
थे वो
يَكْسِبُونَ
वो कमाई करते
जो लोग ईमान लाए उनसे कह दो कि, "वे उन लोगों को क्षमा करें (उनकी करतूतों पर ध्यान न दे) अल्लाह के दिनों की आशा नहीं रखते, ताकि वह इसके परिणामस्वरूप उन लोगों को उनकी अपनी कमाई का बदला दे
तफ़्सीर:
(ऐ रसूल!) आप अल्लाह पर ईमान लाने वालों तथा उसके रसूल को सच्चा मानने वालों से कह दें : तुम अपने संग बुरा व्यवहार करने वाले काफ़िरों को क्षमा कर दो, जो अल्लाह की नेमतों या उसके प्रकोपों की परवाह नहीं करते हैं। निश्चय ही अल्लाह धैर्य रखने वाले मोमिनों तथा अतिक्रमण करने वाले काफ़िरों में से प्रत्येक को, उनके उन कर्मों का बदला देगा, जो वे संसार में किया करते थे।
आयत 15
مَنْ عَمِلَ صَـٰلِحًۭا فَلِنَفْسِهِۦ ۖ وَمَنْ أَسَآءَ فَعَلَيْهَا ۖ ثُمَّ إِلَىٰ رَبِّكُمْ تُرْجَعُونَ
مَنْ
जिसने
عَمِلَ
अमल किया
صَـٰلِحًۭا
नेक
فَلِنَفْسِهِۦ ۖ
तो उसी के लिए है
وَمَنْ
और जो
أَسَآءَ
बुराई करता है
فَعَلَيْهَا ۖ
तो उसी पर है
ثُمَّ
फिर
إِلَىٰ
to
رَبِّكُمْ
अपने रब ही की तरफ़
تُرْجَعُونَ
तुम लौटाए जाओगे
जो कुछ अच्छा कर्म करता है तो अपने ही लिए करेगा और जो कोई बुरा कर्म करता है तो उसका वबाल उसी पर होगा। फिर तुम अपने रब की ओर लौटाये जाओगे
तफ़्सीर:
जिसने अच्छे कर्म किए, उसके अच्छे कर्म का परिणाम उसी के लिए है। और अल्लाह उसके अच्छे कर्म से बेनियाज़ है। और जिसने बुरे कर्म किए, तो उसके बुरे कर्म का परिणाम उसी को भुगतना पड़ेगा। उसका बुरा कर्म करना अल्लाह को कोई नुकसान नहीं पहुँचाएगा। फिर तुम आख़िरत में अकेले हमारी ही ओर वापस आओगे, ताकि हम हर एक को वह बदला दें, जिसका वह हक़दार है।
आयत 16
وَلَقَدْ ءَاتَيْنَا بَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ ٱلْكِتَـٰبَ وَٱلْحُكْمَ وَٱلنُّبُوَّةَ وَرَزَقْنَـٰهُم مِّنَ ٱلطَّيِّبَـٰتِ وَفَضَّلْنَـٰهُمْ عَلَى ٱلْعَـٰلَمِينَ
وَلَقَدْ
और अलबत्ता तहक़ीक़
ءَاتَيْنَا
दी हमने
بَنِىٓ
(the) Children of Israel
إِسْرَٰٓءِيلَ
बनी इस्राईल को
ٱلْكِتَـٰبَ
किताब
وَٱلْحُكْمَ
और हुकूमत
وَٱلنُّبُوَّةَ
और नुबूव्वत
وَرَزَقْنَـٰهُم
और रिज़्क़ दिया हमने उन्हें
مِّنَ
of
ٱلطَّيِّبَـٰتِ
पाकीज़ा चीज़ों से
وَفَضَّلْنَـٰهُمْ
और फ़ज़ीलत हमने उन्हें
عَلَى
over
ٱلْعَـٰلَمِينَ
तमाम जहानों पर
निश्चय ही हमने इसराईल की सन्तान को किताब और हुक्म और पैग़म्बरी प्रदान की थी। और हमने उन्हें पवित्र चीज़ो की रोज़ी दी और उन्हें सारे संसारवालों पर श्रेष्ठता प्रदान की
तफ़्सीर:
निःसंदेह हमने बनी इसराईल को तौरात और उसके नियमों के अनुसार लोगों के बीच निर्णय करने का आदेश दिया, तथा हमने उनमें से अधिकांश नबियों को इबराहीम अलैहिस्सलाम के वंश से बनाया, और हमने उन्हें अनेक प्रकार की अच्छी चीज़ों से जीविका प्रदान की, और उन्हें उनके समय के संसार वालों पर श्रेष्ठता प्रदान की।
आयत 17
وَءَاتَيْنَـٰهُم بَيِّنَـٰتٍۢ مِّنَ ٱلْأَمْرِ ۖ فَمَا ٱخْتَلَفُوٓا۟ إِلَّا مِنۢ بَعْدِ مَا جَآءَهُمُ ٱلْعِلْمُ بَغْيًۢا بَيْنَهُمْ ۚ إِنَّ رَبَّكَ يَقْضِى بَيْنَهُمْ يَوْمَ ٱلْقِيَـٰمَةِ فِيمَا كَانُوا۟ فِيهِ يَخْتَلِفُونَ
وَءَاتَيْنَـٰهُم
और दीं हमने उन्हें
بَيِّنَـٰتٍۢ
वाज़ेह निशानियाँ
مِّنَ
of
ٱلْأَمْرِ ۖ
(मामले में) दीन के
فَمَا
तो नहीं
ٱخْتَلَفُوٓا۟
उन्होंने इख़्तिलाफ़ किया
إِلَّا
मगर
مِنۢ
after
بَعْدِ
बाद उसके
مَا
जो
جَآءَهُمُ
आया उनके पास
ٱلْعِلْمُ
इल्म
بَغْيًۢا
ज़िद की वजह से
بَيْنَهُمْ ۚ
आपस में
إِنَّ
बेशक
رَبَّكَ
रब आपका
يَقْضِى
वो फ़ैसला करेगा
بَيْنَهُمْ
दर्मियान उनके
يَوْمَ
दिन
ٱلْقِيَـٰمَةِ
क़यामत के
فِيمَا
उसमें जो
كَانُوا۟
थे वो
فِيهِ
जिसमें
يَخْتَلِفُونَ
वो इख़्तिलाफ़ करते
और हमने उन्हें इस मामले के विषय में स्पष्ट निशानियाँ प्रदान कीं। फिर जो भी विभेद उन्होंने किया, वह इसके पश्चात ही किया कि उनके पास ज्ञान आ चुका था और इस कारण कि वे परस्पर एक-दूसरे पर ज़्यादती करना चाहते थे। निश्चय ही तुम्हारा रब क़ियामत के दिन उनके बीच उन चीज़ों के बारे में फ़ैसला कर देगा, जिनमें वे परस्पर विभेद करते रहे है
तफ़्सीर:
और हमने उन्हें ऐसे प्रमाण दिए, जो सत्य को असत्य से स्पष्ट करते हैं। लेकिन उन्होंने उस समय विभेद किया, जब हमारे पैग़ंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के नबी बनाए जाने के द्वारा उनपर तर्क स्थापित हो चुका था। और उनके इस विभेद का एकमात्र कारण, वैभव और सरदारी के लोभ में, उनका एक-दूसरे पर अतिक्रमण करना था। निःसंदेह आपका पालनहार (ऐ रसूल!) क़ियामत के दिन उनके बीच उस चीज़ के बारे में फ़ैसला कर देगा, जिसमें वे दुनिया में मतभेद किया करते थे। अतः वह स्पष्ट कर देगा कि कौन सत्य पर था और कौन असत्य पर।
आयत 18
ثُمَّ جَعَلْنَـٰكَ عَلَىٰ شَرِيعَةٍۢ مِّنَ ٱلْأَمْرِ فَٱتَّبِعْهَا وَلَا تَتَّبِعْ أَهْوَآءَ ٱلَّذِينَ لَا يَعْلَمُونَ
ثُمَّ
फिर
جَعَلْنَـٰكَ
कर दिया हमने आपको
عَلَىٰ
on
شَرِيعَةٍۢ
वाज़ेह रास्ते पर
مِّنَ
of
ٱلْأَمْرِ
(मामले में) दीन के
فَٱتَّبِعْهَا
पस पैरवी कीजिए उसकी
وَلَا
और ना
تَتَّبِعْ
आप पैरवी कीजिए
أَهْوَآءَ
ख़्वाहिशात की
ٱلَّذِينَ
उन लोगों की जो
لَا
(do) not
يَعْلَمُونَ
नहीं वो इल्म रखते
फिर हमने तुम्हें इस मामलें में एक खुले मार्ग (शरीअत) पर कर दिया। अतः तुम उसी पर चलो और उन लोगों की इच्छाओं का अनुपालन न करना जो जानते नहीं
तफ़्सीर:
फिर हमने आपको अपने उस धर्म के एक स्पष्ट मार्ग, पद्वति और प्रणाली पर स्थापित कर दिया, जिसका आदेश हमने आपसे पूर्व अपने रसूलों को दिया था, जो ईमान और अच्छे कर्म की ओर बुलाता है। अतः आप इसी शरीयत का पालन करें और उन लोगों की इच्छाओं का पालन न करें, जो सत्य को नहीं जानते; क्योंकि उनकी इच्छाएँ सत्य से भ्रमित करने वाली हैं।
आयत 19
إِنَّهُمْ لَن يُغْنُوا۟ عَنكَ مِنَ ٱللَّهِ شَيْـًۭٔا ۚ وَإِنَّ ٱلظَّـٰلِمِينَ بَعْضُهُمْ أَوْلِيَآءُ بَعْضٍۢ ۖ وَٱللَّهُ وَلِىُّ ٱلْمُتَّقِينَ
إِنَّهُمْ
बेशक वो
لَن
हरगिज़ नहीं
يُغْنُوا۟
वो काम आऐंगे
عَنكَ
आपके
مِنَ
against
ٱللَّهِ
अल्लाह से
شَيْـًۭٔا ۚ
कुछ भी
وَإِنَّ
और बेशक
ٱلظَّـٰلِمِينَ
ज़ालिम लेग
بَعْضُهُمْ
बाज़ उनके
أَوْلِيَآءُ
दोस्त हैं
بَعْضٍۢ ۖ
बाज़ के
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
وَلِىُّ
दोस्त है
ٱلْمُتَّقِينَ
मुत्तक़ी लोगों का
वे अल्लाह के मुक़ाबले में तुम्हारे कदापि कुछ काम नहीं आ सकते। निश्चय ही ज़ालिम लोग एक-दूसरे के साथी है और डर रखनेवालों का साथी अल्लाह है
तफ़्सीर:
निःसंदेह जो लोग सत्य का ज्ञान नहीं रखते, वे आपसे अल्लाह की यातना को कदापि नहीं रोकेंगे यदि आप उनकी इच्छाओं का पालन करते हैं। निश्चय सभी धर्मों और संप्रदायों एवं समुदायों के अत्याचारी लोग, मोमिनों के विरुद्ध एक-दूसरे के सहायक और समर्थक हैं। और अल्लाह उन लोगों का सहायक है, जो उसके आदेशों का पालन करके और उसकी मना की हुई चीज़ों से बचकर, उससे डरने वाले हैं।
आयत 20
هَـٰذَا بَصَـٰٓئِرُ لِلنَّاسِ وَهُدًۭى وَرَحْمَةٌۭ لِّقَوْمٍۢ يُوقِنُونَ
هَـٰذَا
ये
بَصَـٰٓئِرُ
बसीरत की बातें हैं
لِلنَّاسِ
लोगों के लिए
وَهُدًۭى
और हिदायत
وَرَحْمَةٌۭ
और रहमत है
لِّقَوْمٍۢ
उन लोगों के लिए
يُوقِنُونَ
जो यक़ीन रखते हैं
वह लोगों के लिए सूझ के प्रकाशों का पुंज है, और मार्गदर्शन और दयालुता है उन लोगों के लिए जो विश्वास करें
तफ़्सीर:
हमारे रसूल पर अवतरित यह क़ुरआन अंतर्दृष्टि और प्रबुद्धता है, जिसके द्वारा लोग असत्य से सत्य को देख सकते हैं, तथा सत्य का मार्गदर्शन और विश्वास करने वालों के लिए दया है; क्योंकि वही लोग उसके द्वारा सीधा रास्ता प्राप्त करते हैं, ताकि उनका पालनहार उनसे प्रसन्न हो जाए। फिर वह उन्हें जन्नत में दाखिल कर दे और जहन्नम से बचा ले।
आज की ज़िंदगी में सबक़
अल्लाह की मुसख्खर (काम में लाई गई) चीज़ों का ज़िक्र है। यह सबक हमें सिखाता है कि कायनात की चीज़ें इंसान की खिदमत के लिए बनाई गई हैं, इनका शुक्र अदा करना चाहिए।
आयत 21
أَمْ حَسِبَ ٱلَّذِينَ ٱجْتَرَحُوا۟ ٱلسَّيِّـَٔاتِ أَن نَّجْعَلَهُمْ كَٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ سَوَآءًۭ مَّحْيَاهُمْ وَمَمَاتُهُمْ ۚ سَآءَ مَا يَحْكُمُونَ
أَمْ
या
حَسِبَ
समझ रखा है
ٱلَّذِينَ
उन लोगों ने जिन्होंने
ٱجْتَرَحُوا۟
इर्तिकाब किया
ٱلسَّيِّـَٔاتِ
बुराइयों का
أَن
कि
نَّجْعَلَهُمْ
हम कर देंगे उन्हें
كَٱلَّذِينَ
उन लोगों कि तरह जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
وَعَمِلُوا۟
और उन्होंने अमल किए
ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ
नेक
سَوَآءًۭ
बराबर है
مَّحْيَاهُمْ
जीना उनका
وَمَمَاتُهُمْ ۚ
और मरना उनका
سَآءَ
कितना बुरा है
مَا
जो
يَحْكُمُونَ
वो फ़ैसला करते हैं
(क्या मार्गदर्शन और पथभ्रष्ट ता समान है) या वे लोग, जिन्होंने बुराइयाँ कमाई है, यह समझ बैठे हैं कि हम उन्हें उन लोगों जैसा कर देंगे जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए कि उनका जीना और मरना समान हो जाए? बहुत ही बुरा है जो निर्णय वे करते है!
तफ़्सीर:
क्या अपने शरीर के अंगों द्वारा कुफ़्र और पाप करने वालों ने यह समझ रखा है कि हम उन्हें उन लोगों के समान बदला देंगे, जो अल्लाह पर ईमान लाए और अच्छे कर्म किए, ताकि वे इस दुनिया और आख़िरत में बराबर हो जाएँ?! उनका यह निर्णय बहुत बुरा है।
आयत 22
وَخَلَقَ ٱللَّهُ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ بِٱلْحَقِّ وَلِتُجْزَىٰ كُلُّ نَفْسٍۭ بِمَا كَسَبَتْ وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ
وَخَلَقَ
और पैदा किया
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों
وَٱلْأَرْضَ
और ज़मीन को
بِٱلْحَقِّ
हक़ के साथ
وَلِتُجْزَىٰ
और ताकि बदला दिया जाए
كُلُّ
हर
نَفْسٍۭ
नफ़्स को
بِمَا
उसका जो
كَسَبَتْ
उसने कमाई की
وَهُمْ
और वो
لَا
will not be wronged
يُظْلَمُونَ
वो ज़ुल्म ना किए जाऐंगे
अल्लाह ने आकाशों और धरती को हक़ के साथ पैदा किया और इसलिए कि प्रत्येक व्यक्ति को उसकी कमाई का बदला दिया जाए और उनपर ज़ुल्म न किया जाए
तफ़्सीर:
अल्लाह ने आकाशों तथा धरती की रचना व्यापक हिकमत के तहत की है, उसने उन्हें व्यर्थ नहीं बनाया है। और ताकि हर प्राणी को उसके किए हुए अच्छे या बुरे कर्म का बदला दिया जाए। तथा अल्लाह उनके अच्छे कामों में कमी करके, या उनकी बुराइयों में वृद्धि करके, उनपर अत्याचार नहीं करेगा।
आयत 23
أَفَرَءَيْتَ مَنِ ٱتَّخَذَ إِلَـٰهَهُۥ هَوَىٰهُ وَأَضَلَّهُ ٱللَّهُ عَلَىٰ عِلْمٍۢ وَخَتَمَ عَلَىٰ سَمْعِهِۦ وَقَلْبِهِۦ وَجَعَلَ عَلَىٰ بَصَرِهِۦ غِشَـٰوَةًۭ فَمَن يَهْدِيهِ مِنۢ بَعْدِ ٱللَّهِ ۚ أَفَلَا تَذَكَّرُونَ
أَفَرَءَيْتَ
क्या फिर देखा आपने
مَنِ
उसे जिसने
ٱتَّخَذَ
बना लिया
إِلَـٰهَهُۥ
इलाह अपना
هَوَىٰهُ
अपनी ख़्वाहिशे नफ़्स को
وَأَضَلَّهُ
और भटका दिया उसे
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
عَلَىٰ
knowingly
عِلْمٍۢ
इल्म के बावजूद
وَخَتَمَ
और उसने मोहर लगा दी
عَلَىٰ
upon
سَمْعِهِۦ
उसके कान पर
وَقَلْبِهِۦ
और उसके दिल पर
وَجَعَلَ
और उसने डाल दिया
عَلَىٰ
over
بَصَرِهِۦ
उसकी आँख पर
غِشَـٰوَةًۭ
एक पर्दा
فَمَن
तो कौन
يَهْدِيهِ
हिदायत देगा उसे
مِنۢ
after
بَعْدِ
बाद
ٱللَّهِ ۚ
अल्लाह के
أَفَلَا
क्या भला नहीं
تَذَكَّرُونَ
तुम नसीहत पकड़ते
क्या तुमने उस व्यक्ति को नहीं देखा जिसने अपनी इच्छा ही को अपना उपास्य बना लिया? अल्लाह ने (उसकी स्थिति) जानते हुए उसे गुमराही में डाल दिया, और उसके कान और उसके दिल पर ठप्पा लगा दिया और उसकी आँखों पर परदा डाल दिया। फिर अब अल्लाह के पश्चात कौन उसे मार्ग पर ला सकता है? तो क्या तुम शिक्षा नहीं ग्रहण करते?
तफ़्सीर:
(ऐ रसूल!) आप उस व्यक्ति को देखें, जो अपनी इच्छाओं के पीछे चलता है और उसे अपने पूज्य के समान बना रखा है, जिसका वह विरोध नहीं करता। अल्लाह ने उसे उसके जानने-समझने के उपरांत भी पथभ्रष्ट कर दिया है; क्योंकि वह पथभ्रष्ट किए जाने ही का पत्र है। तथा उसके दिल पर ठप्पा लगा दिया है, इसलिए वह उस तरह नहीं सुनता, जिससे उसे लाभ प्राप्त हो, तथा उसकी आँख पर पर्दा डाल दिया है, जो उसे सत्य को देखने से रोकता है। तो फिर अल्लाह के उसे पथभ्रष्ट कर देने के बाद कौन उसे सत्य की तौफ़ीक़ दे सकता है?! क्या तुम इच्छाओं के पीछे चलने के नुकसान और अल्लाह की शरीयत का पालन करने के लाभ को याद नहीं करते?!
आयत 24
وَقَالُوا۟ مَا هِىَ إِلَّا حَيَاتُنَا ٱلدُّنْيَا نَمُوتُ وَنَحْيَا وَمَا يُهْلِكُنَآ إِلَّا ٱلدَّهْرُ ۚ وَمَا لَهُم بِذَٰلِكَ مِنْ عِلْمٍ ۖ إِنْ هُمْ إِلَّا يَظُنُّونَ
وَقَالُوا۟
और उन्होंने कहा
مَا
नहीं है
هِىَ
ये
إِلَّا
मगर
حَيَاتُنَا
ज़िन्दगी हमारी
ٱلدُّنْيَا
दुनिया की
نَمُوتُ
हम मरते हैं
وَنَحْيَا
और हम जीते हैं
وَمَا
और नहीं
يُهْلِكُنَآ
हलाक करता हमें
إِلَّا
मगर
ٱلدَّهْرُ ۚ
ज़माना
وَمَا
और नहीं
لَهُم
उन्हें
بِذَٰلِكَ
उसका
مِنْ
any
عِلْمٍ ۖ
कोई इल्म
إِنْ
नहीं हैं
هُمْ
वो
إِلَّا
मगर
يَظُنُّونَ
वो गुमान करते
वे कहते है, "वह तो बस हमारा सांसारिक जीवन ही है। हम मरते और जीते है। हमें तो बस काल (समय) ही विनष्ट करता है।" हालाँकि उनके पास इसका कोई ज्ञान नहीं। वे तो बस अटकलें ही दौड़ाते है
तफ़्सीर:
मरणोपरांत पुनर्जीवित किए जाने का इनकार करने वाले काफ़िरों ने कहा : जीवन तो केवल यही हमारा सांसारिक जीवन है, इसके बाद कोई जीवन नहीं है। कुछ पीढ़ियाँ मर जाती हैं, फिर वे वापस नहीं लौटती हैं और कुछ दूसरी पीढ़ियाँ जीवित होती हैं। तथा हमारी मृत्यु का एकमात्र कारण रात और दिन का आना-जाना (कालचक्र) है। वास्तव में, उनके पास दोबारा जीवित होकर उठने के इनकार का कोई ज्ञान नहीं है। वे केवल अनुमान से काम ले रहे हैं और निश्चित रूप से, अनुमान का सत्य के सामने कोई लाभ नहीं है।
आयत 25
وَإِذَا تُتْلَىٰ عَلَيْهِمْ ءَايَـٰتُنَا بَيِّنَـٰتٍۢ مَّا كَانَ حُجَّتَهُمْ إِلَّآ أَن قَالُوا۟ ٱئْتُوا۟ بِـَٔابَآئِنَآ إِن كُنتُمْ صَـٰدِقِينَ
وَإِذَا
और जब
تُتْلَىٰ
पढ़ी जाती हैं
عَلَيْهِمْ
उन पर
ءَايَـٰتُنَا
आयात हमारी
بَيِّنَـٰتٍۢ
वाज़ेह
مَّا
नहीं
كَانَ
होती
حُجَّتَهُمْ
हुज्जत उनकी
إِلَّآ
मगर
أَن
ये कि
قَالُوا۟
वो कहते हैं
ٱئْتُوا۟
ले आओ
بِـَٔابَآئِنَآ
हमारे आबा ओ अजदाद को
إِن
अगर
كُنتُمْ
हो तुम
صَـٰدِقِينَ
सच्चे
और जब उनके सामने हमारी स्पष्ट आयतें पढ़ी जाती है, तो उनकी हुज्जत इसके सिवा कुछ और नहीं होती कि वे कहते है, "यदि तुम सच्चे हो तो हमारे बाप-दादा को ले आओ।"
तफ़्सीर:
और जब मरणोपरांत पुनर्जीवित करके उठाए जाने का इनकार करने वाले मश्रिकों के सामने हमारी स्पष्ट आयतें पढ़ी जाती हैं, तो उनके पास रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और आपके साथियों से यह कहने के अलावा कोई तर्क नहीं होता कि : हमारे उन बाप-दादाओं को जीवित करके दिखाओ, जिनकी मृत्यु हो चुकी, यदि तुम अपने इस दावे में सच्चे हो कि हम अपनी मृत्यु के बाद फिर से जीवित करके उठाए जाएँगे।
आयत 26
قُلِ ٱللَّهُ يُحْيِيكُمْ ثُمَّ يُمِيتُكُمْ ثُمَّ يَجْمَعُكُمْ إِلَىٰ يَوْمِ ٱلْقِيَـٰمَةِ لَا رَيْبَ فِيهِ وَلَـٰكِنَّ أَكْثَرَ ٱلنَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ
قُلِ
कह दीजिए कि
ٱللَّهُ
अल्लाह
يُحْيِيكُمْ
वो ज़िन्दा करता है तुम्हें
ثُمَّ
फिर
يُمِيتُكُمْ
वो मौत देता है तुम्हें
ثُمَّ
फिर
يَجْمَعُكُمْ
वो जमा करेगा तुम्हें
إِلَىٰ
to
يَوْمِ
तरफ़ दिन
ٱلْقِيَـٰمَةِ
क़यामत के
لَا
no
رَيْبَ
नहीं कोई शक
فِيهِ
जिसमें
وَلَـٰكِنَّ
और लेकिन
أَكْثَرَ
अक्सर
ٱلنَّاسِ
लोग
لَا
(do) not
يَعْلَمُونَ
नहीं वे इल्म रखते
कह दो, "अल्लाह ही तुम्हें जीवन प्रदान करता है। फिर वहीं तुम्हें मृत्यु देता है। फिर वही तुम्हें क़ियामत के दिन तक इकट्ठा कर रहा है, जिसमें कोई संदेह नहीं। किन्तु अधिकतर लोग जानते नहीं
तफ़्सीर:
(ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : अल्लाह ही तुम्हारी रचना करके तुम्हें जीवन प्रदान करता है, फिर वही तुम्हें मृत्यु देता है, फिर वही तुम्हारी मृत्य के पश्चात, तुम्हें क़ियामत के दिन हिसाब और बदले के लिए इकट्ठा करेगा। वह ऐसा दिन है, जिसके आने में कोई संदेह नहीं है, लेकिन अधिकांश लोग नहीं जानते; इसलिए, वे अच्छे कर्मों के साथ इसकी तैयारी नहीं करते हैं।
आयत 27
وَلِلَّهِ مُلْكُ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ ۚ وَيَوْمَ تَقُومُ ٱلسَّاعَةُ يَوْمَئِذٍۢ يَخْسَرُ ٱلْمُبْطِلُونَ
وَلِلَّهِ
और अल्लाह ही के लिए है
مُلْكُ
बादशाहत
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों
وَٱلْأَرْضِ ۚ
और ज़मीन की
وَيَوْمَ
और जिस दिन
تَقُومُ
क़ायम होगी
ٱلسَّاعَةُ
क़यामत
يَوْمَئِذٍۢ
उस दिन
يَخْسَرُ
ख़सारा पाऐंगे
ٱلْمُبْطِلُونَ
बातिल परस्त
आकाशों और धरती की बादशाही अल्लाह ही की है। और जिस दिन वह घड़ी घटित होगी उस दिन झूठवाले घाटे में होंगे
तफ़्सीर:
आकाशों तथा धरती का साम्राज्य अल्लाह ही के हाथ में है। इसलिए, वास्तव में उन दोनों में उसके सिवा किसी अन्य की पूजा नहीं की जाएगी। तथा जिस दिन क़ियामत क़ायम होगी, जिसमें अल्लाह मृतकों को हिसाब और बदले के लिए पुनर्जीवित करके उठाएगा, तो झूठे लोग, जो अल्लाह के अलावा अन्य की पूजा करते थे तथा सत्य को असत्य और असत्य को सत्य ठहराने का यत्न करते थे, घाटे का सामना करेंगे।
आयत 28
وَتَرَىٰ كُلَّ أُمَّةٍۢ جَاثِيَةًۭ ۚ كُلُّ أُمَّةٍۢ تُدْعَىٰٓ إِلَىٰ كِتَـٰبِهَا ٱلْيَوْمَ تُجْزَوْنَ مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
وَتَرَىٰ
और आप देखेंगे
كُلَّ
हर
أُمَّةٍۢ
उम्मत को
جَاثِيَةًۭ ۚ
घुटनों के बल गिरी हुई
كُلُّ
हर
أُمَّةٍۢ
उम्मत
تُدْعَىٰٓ
बुलाई जाएगी
إِلَىٰ
to
كِتَـٰبِهَا
तरफ़ अपनी किताब के
ٱلْيَوْمَ
आज के दिन
تُجْزَوْنَ
तुम बदला दिए जाओगे
مَا
उसका जो
كُنتُمْ
थे तुम
تَعْمَلُونَ
तुम अमल करते
और तुम प्रत्येक गिरोह को घुटनों के बल झुका हुआ देखोगे। प्रत्येक गिरोह अपनी किताब की ओर बुलाया जाएगा, "आज तुम्हें उसी का बदला दिया जाएगा, जो तुम करते थे
तफ़्सीर:
तथा (ऐ रसूल!) आप उस दिन देखेंगे कि हर समुदाय अपने घुटनों पर बैठकर इंतज़ार कर रहा है कि उसके साथ क्या किया जाएगा। प्रत्येक समुदाय को उसके कर्मपत्र की ओर बुलाया जाएगा, जिसे संरक्षक-फ़रिश्तों ने लिख रखा होगा। आज (ऐ लोगो!) तुम्हें उसका बदला दिया जाएगा, जो अच्छा या बुरा कर्म तुम संसार में किया करते थे।
आयत 29
هَـٰذَا كِتَـٰبُنَا يَنطِقُ عَلَيْكُم بِٱلْحَقِّ ۚ إِنَّا كُنَّا نَسْتَنسِخُ مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
هَـٰذَا
ये है
كِتَـٰبُنَا
किताब हमारी
يَنطِقُ
जो बोलती है
عَلَيْكُم
तुम पर
بِٱلْحَقِّ ۚ
साथ हक़ के
إِنَّا
बेशक हम
كُنَّا
थे हम
نَسْتَنسِخُ
हम लिखवाते
مَا
जो
كُنتُمْ
थे तुम
تَعْمَلُونَ
तुम अमल करते
"यह हमारी किताब है, जो तुम्हारे मुक़ाबले में ठीक-ठीक बोल रही है। निश्चय ही हम लिखवाते रहे हैं जो कुछ तुम करते थे।"
तफ़्सीर:
यह हमारी पंजिका, (जिसमें हमारे फ़रिश्ते तुम्हारे कामों को लिखते थे) तुम्हारे विरुद्ध सत्य के साथ साक्ष्य दे रही है। इसलिए इसे पढ़ो। निश्चय हम संरक्षक-फ़रिश्तों को, जो कुछ तुम दुनिया में कर रहे थे, उसे लिखने का आदेश दे रहे थे।
आयत 30
فَأَمَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ فَيُدْخِلُهُمْ رَبُّهُمْ فِى رَحْمَتِهِۦ ۚ ذَٰلِكَ هُوَ ٱلْفَوْزُ ٱلْمُبِينُ
فَأَمَّا
तो रहे
ٱلَّذِينَ
वो जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
وَعَمِلُوا۟
और उन्होंने अमल किए
ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ
नेक
فَيُدْخِلُهُمْ
तो दाख़िल करेगा उन्हें
رَبُّهُمْ
रब उनका
فِى
in(to)
رَحْمَتِهِۦ ۚ
अपनी रहमत में
ذَٰلِكَ
ये है
هُوَ
वो ही
ٱلْفَوْزُ
कामयाबी
ٱلْمُبِينُ
वाज़ेह
अतः जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए उन्हें उनका रब अपनी दयालुता में दाख़िल करेगा, यही स्पष्ट सफलता है
तफ़्सीर:
अतः जो लोग ईमान लाए और अच्छे कर्म किए, तो उनका महिमावान पालनहार उन्हें अपनी दया से अपनी जन्नत में दाख़िल करेगा। अल्लाह ने उन्हें जो प्रतिफल दिया है, वही वह स्पष्ट सफलता है, जिसकी बराबरी कोई अन्य सफलता नहीं कर सकती।
आज की ज़िंदगी में सबक़
नेक-बद बराबर न होने की दलील और कयामत के दिन घुटनों के बल गिरने का ज़िक्र है। यह हमें सिखाता है कि नेक और बद को बराबर समझना इंसाफ के खिलाफ है, हर एक को उसके अमल का बदला मिलेगा।
आयत 31
وَأَمَّا ٱلَّذِينَ كَفَرُوٓا۟ أَفَلَمْ تَكُنْ ءَايَـٰتِى تُتْلَىٰ عَلَيْكُمْ فَٱسْتَكْبَرْتُمْ وَكُنتُمْ قَوْمًۭا مُّجْرِمِينَ
وَأَمَّا
और रहे
ٱلَّذِينَ
वो जिन्होंने
كَفَرُوٓا۟
कुफ़्र किया
أَفَلَمْ
क्या फिर ना
تَكُنْ
थीं
ءَايَـٰتِى
आयात मेरी
تُتْلَىٰ
वो पढ़ी जातीं
عَلَيْكُمْ
तुम पर
فَٱسْتَكْبَرْتُمْ
तो तकब्बुर किया तुमने
وَكُنتُمْ
और थे तुम
قَوْمًۭا
क़ौम
مُّجْرِمِينَ
मुजरिम
रहे वे लोग जिन्होंने इनकार किया (उनसे कहा जाएगा,) "क्या तुम्हें हमारी आयतें पढ़कर नहीं सुनाई जाती थी? किन्तु तुमने घमंड किया और तुम थे ही अपराधी लोग
तफ़्सीर:
और रहे वे लोग जिन्होंने अल्लाह के साथ कुफ़्र किया, तो उन्हें फटकार लगाते हुए कहा जाएगा : क्या तुम्हें मेरी आयतें पढ़कर नहीं सुनाई जाती थीं, पर तुमने उनपर ईमान लाने से अहंकार किया, तथा तुम अपराधी लोग थे, कुफ़्र और गुनाहों में पड़े रहते थे?!
आयत 32
وَإِذَا قِيلَ إِنَّ وَعْدَ ٱللَّهِ حَقٌّۭ وَٱلسَّاعَةُ لَا رَيْبَ فِيهَا قُلْتُم مَّا نَدْرِى مَا ٱلسَّاعَةُ إِن نَّظُنُّ إِلَّا ظَنًّۭا وَمَا نَحْنُ بِمُسْتَيْقِنِينَ
وَإِذَا
और जब
قِيلَ
कहा गया
إِنَّ
बेशक
وَعْدَ
वादा
ٱللَّهِ
अल्लाह का
حَقٌّۭ
सच्चा है
وَٱلسَّاعَةُ
और क़यामत
لَا
(there is) no
رَيْبَ
नहीं कोई शक
فِيهَا
उसमें
قُلْتُم
कहा तुमने
مَّا
नहीं
نَدْرِى
हम जानते
مَا
क्या है
ٱلسَّاعَةُ
क़यामत
إِن
नहीं
نَّظُنُّ
हम समझते
إِلَّا
मगर
ظَنًّۭا
एक गुमान ही
وَمَا
और नहीं हैं
نَحْنُ
हम
بِمُسْتَيْقِنِينَ
यक़ीन करने वाले
और जब कहा जाता था कि अल्लाह का वादा सच्चा है और (क़ियामत की) घड़ी में कोई संदेह नहीं हैं। तो तुम कहते थे, "हम नहीं जानते कि वह घड़ी क्या हैं? तो तुम कहते थे, 'हम नहीं जानते कि वह घड़ी क्या है? हमें तो बस एक अनुमान-सा प्रतीत होता है और हमें विश्वास नहीं होता।'"
तफ़्सीर:
और जब तुमसे कहा जाता था कि : निःसंदेह अल्लाह का वादा - जो उसने अपने बंदों से वादा किया है कि वह उन्हें दोबारा जीवित करके उठाएगा और उन्हें बदला देगा - सच्चा है, जिसमें कोई संदेह नहीं है, तथा क़ियामत सत्य है, उसके बारे में कोई संदेह नहीं है, इसलिए तुम उसके लिए कार्य करो, तो तुम कहते थे : हम नहीं जानते कि यह क़ियामत क्या है। हमें केवल एक भ्रम-सा है कि वह आने वाली है, लेकिन हमें उसके आने पर पूर्ण विश्वास नहीं है।
आयत 33
وَبَدَا لَهُمْ سَيِّـَٔاتُ مَا عَمِلُوا۟ وَحَاقَ بِهِم مَّا كَانُوا۟ بِهِۦ يَسْتَهْزِءُونَ
وَبَدَا
और ज़ाहिर हो जाऐंगी
لَهُمْ
उनके लिए
سَيِّـَٔاتُ
बुराइयाँ
مَا
उनकी जो
عَمِلُوا۟
उन्होंने अमल किए
وَحَاقَ
और घेर लेगा
بِهِم
उन्हें
مَّا
वो जो
كَانُوا۟
थे वो
بِهِۦ
जिसका
يَسْتَهْزِءُونَ
वो मज़ाक़ उड़ाया करते
और जो कुछ वे करते रहे उसकी बुराइयाँ उनपर प्रकट हो गई और जिस चीज़ का वे परिहास करते थे उसी ने उन्हें आ घेरा
तफ़्सीर:
और दुनिया में उनके किए हुए कुफ़्र और पापों की बुराइयाँ उनके सामने प्रकट हो जाएँगी, और उनपर वह यातना उतर पड़ेगी, जिससे सावधान किए जाने पर वे उसका मज़ाक उड़ाया करते थे।
आयत 34
وَقِيلَ ٱلْيَوْمَ نَنسَىٰكُمْ كَمَا نَسِيتُمْ لِقَآءَ يَوْمِكُمْ هَـٰذَا وَمَأْوَىٰكُمُ ٱلنَّارُ وَمَا لَكُم مِّن نَّـٰصِرِينَ
وَقِيلَ
और कह दिया जाएगा
ٱلْيَوْمَ
आज
نَنسَىٰكُمْ
हम भुला देंगे तुम्हें
كَمَا
जैसा कि
نَسِيتُمْ
भुला दिया तुमने
لِقَآءَ
मुलाक़ात को
يَوْمِكُمْ
(of) this Day of yours
هَـٰذَا
अपने इस दिन की
وَمَأْوَىٰكُمُ
और ठिकाना तुम्हारा
ٱلنَّارُ
आग है
وَمَا
और नहीं
لَكُم
तुम्हारे लिए
مِّن
any
نَّـٰصِرِينَ
मददगारों में से कोई
और कह दिया जाएगा कि "आज हम तुम्हें भुला देते हैं जैसे तुमने इस दिन की भेंट को भुला रखा था। तुम्हारा ठिकाना अब आग है और तुम्हारा कोई सहायक नहीं
तफ़्सीर:
और अल्लाह उनसे कहेगा : आज हम तुम्हें आग में छोड़ देंगे, जैसे तुम अपने इस दिन के मिलने को भुला बैठे थे। इसलिए तुमने इसके लिए ईमान और अच्छे कर्मों के द्वारा तैयारी नहीं की। तथा तुम्हारा ठिकाना जहाँ तुम्हें जाना है, जहन्नम है। और तुम्हारे कोई सहायक नहीं हैं, जो तुमसे अल्लाह के अज़ाब को दूर कर सकें।
आयत 35
ذَٰلِكُم بِأَنَّكُمُ ٱتَّخَذْتُمْ ءَايَـٰتِ ٱللَّهِ هُزُوًۭا وَغَرَّتْكُمُ ٱلْحَيَوٰةُ ٱلدُّنْيَا ۚ فَٱلْيَوْمَ لَا يُخْرَجُونَ مِنْهَا وَلَا هُمْ يُسْتَعْتَبُونَ
ذَٰلِكُم
ये बात
بِأَنَّكُمُ
बवजह उसके कि तुम
ٱتَّخَذْتُمْ
बना लिया तुमने
ءَايَـٰتِ
आयात को
ٱللَّهِ
अल्लाह की
هُزُوًۭا
मज़ाक़
وَغَرَّتْكُمُ
और धोखा दिया तुम्हें
ٱلْحَيَوٰةُ
ज़िन्दगी ने
ٱلدُّنْيَا ۚ
दुनिया की
فَٱلْيَوْمَ
तो आज
لَا
not
يُخْرَجُونَ
ना वो निकाले जाऐंगे
مِنْهَا
उससे
وَلَا
और नहीं
هُمْ
वो
يُسْتَعْتَبُونَ
वो उज़्र क़ुबूल किए जाऐंगे
यह इस कारण कि तुमने अल्लाह की आयतों की हँसी उड़ाई थी और सांसारिक जीवन ने तुम्हें धोखे में डाले रखा।" अतः आज वे न तो उससे निकाले जाएँगे और न उनसे यह चाहा जाएगा कि वे किसी उपाय से (अल्लाह के) प्रकोप को दूर कर सकें
तफ़्सीर:
यह अज़ाब जिससे तुम पीड़ित किए गए हो, इस कारण है कि तुमने अल्लाह की आयतों का मज़ाक़ बनाकर उनकी हँसी उड़ाई थी और दुनिया के जीवन ने अपने सुखों और इच्छाओं के साथ तुम्हें धोखे में डाल रखा था। अतः आज ये अल्लाह की आयतों का मज़ाक़ उड़ाने वाले काफ़िर जहन्नम से नहीं निकाले जाएँगे। बल्कि हमेशा के लिए उसी में पड़े रहेंगे। तथा ये दुनिया के जीवन की ओर भी नहीं लौटाए जाएँगे कि अच्छे कार्य करके आएँ, और इनका पालनहार इनसे प्रसन्न नहीं होगा।
आयत 36
فَلِلَّهِ ٱلْحَمْدُ رَبِّ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَرَبِّ ٱلْأَرْضِ رَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ
فَلِلَّهِ
पस अल्लाह ही के लिए है
ٱلْحَمْدُ
सब तारीफ़
رَبِّ
जो रब है
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों का
وَرَبِّ
और रब है
ٱلْأَرْضِ
ज़मीन का
رَبِّ
जो रब है
ٱلْعَـٰلَمِينَ
तमाम जहानों का
अतः सारी प्रशंसा अल्लाह ही के लिए है जो आकाशों का रब और घरती का रब, सारे संसार का रब है
तफ़्सीर:
अतः केवल अल्लाह ही के लिए सारी प्रशंसा है, जो आकाशों का रब और धरती का रब और सभी प्राणियों का रब है।
आयत 37
وَلَهُ ٱلْكِبْرِيَآءُ فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ ۖ وَهُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلْحَكِيمُ
وَلَهُ
और उसी के लिए है
ٱلْكِبْرِيَآءُ
बड़ाई
فِى
in
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों में
وَٱلْأَرْضِ ۖ
और ज़मीन में
وَهُوَ
और वो
ٱلْعَزِيزُ
बहुत ज़बरदस्त है
ٱلْحَكِيمُ
ख़ूब हिकमत वाला है
आकाशों और धरती में बड़ाई उसी के लिए है, और वही प्रभुत्वशाली, अत्यन्त तत्वदर्शी है
तफ़्सीर:
और उसी की महिमा और प्रताप है आकाशों और धरती में। और वह प्रभुत्वशाली है, जिसे कोई पराजित नहीं कर सकता। वह अपनी रचना, तक़दीर (नियति), प्रबंधन और शरीयत में हिकमत वाला है।
आज की ज़िंदगी में सबक़
अपनी ख्वाहिशों को खुदा बना लेने वालों की मज़म्मत के साथ सूरह का इख्तिताम होता है। यह सबक हमें सिखाता है कि अपनी नफ्सानी ख्वाहिशों की अंधी पैरवी करना एक किस्म की गुमराही है, इससे बचना चाहिए।
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