بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
आयत 1
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ أَوْفُوا۟ بِٱلْعُقُودِ ۚ أُحِلَّتْ لَكُم بَهِيمَةُ ٱلْأَنْعَـٰمِ إِلَّا مَا يُتْلَىٰ عَلَيْكُمْ غَيْرَ مُحِلِّى ٱلصَّيْدِ وَأَنتُمْ حُرُمٌ ۗ إِنَّ ٱللَّهَ يَحْكُمُ مَا يُرِيدُ
يَـٰٓأَيُّهَا
O
ٱلَّذِينَ
ऐ लोगो जो
ءَامَنُوٓا۟
ईमान लाए हो
أَوْفُوا۟
पूरा करो
بِٱلْعُقُودِ ۚ
अहदो पैमान को
أُحِلَّتْ
हलाल कर दिए गए
لَكُم
तुम्हारे लिए
بَهِيمَةُ
चौपाए
ٱلْأَنْعَـٰمِ
मवेशियों के
إِلَّا
सिवाय
مَا
उनके जो
يُتْلَىٰ
पढ़े जाऐंगे
عَلَيْكُمْ
तुम पर
غَيْرَ
ना
مُحِلِّى
हलाल करने वाले हो
ٱلصَّيْدِ
शिकार को
وَأَنتُمْ
जबकि तुम
حُرُمٌ ۗ
(हालत) ऐहराम में हो
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
يَحْكُمُ
वो फ़ैसला करता है
مَا
जो
يُرِيدُ
वो चाहता है
ऐ ईमान लानेवालो! प्रतिबन्धों (प्रतिज्ञाओं, समझौतों आदि) का पूर्ण रूप से पालन करो। तुम्हारे लिए चौपायों की जाति के जानवर हलाल हैं सिवाय उनके जो तुम्हें बताए जा रहें हैं; लेकिन जब तुम इहराम की दशा में हो तो शिकार को हलाल न समझना। निस्संदेह अल्लाह जो चाहते है, आदेश देता है
तफ़्सीर:
ऐ ईमान वालो! तुम उन सभी वचनों एवं प्रतिज्ञाओं को पूरा करो, जो तुमने अपने और अपने स्रष्टा के बीच तथा अपने और उसकी रचना के बीच किए हैं। अल्लाह ने तुमपर दया करते हुए तुम्हारे लिए पशुधन : (ऊँट, गाय तथा बकरी) को हलाल किया है, सिवाय उन जानवरों के जिनका हराम होना तुम्हें पढ़कर सुनाया जाएगा। इसके अतिरिक्त हज्ज या उम्रा का एहराम बाँधे होने की स्थिति में तुमपर जंगली जानवरों का शिकार करना भी हराम है। अल्लाह अपनी हिकमत के अनुसार जो चाहता है हलाल या हराम होने का फैसला करता है। क्योंकि उसे कोई बाध्य करने वाला नहीं और न ही कोई उसके हुक्म पर आपत्ति कर सकता है।
आयत 2
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ لَا تُحِلُّوا۟ شَعَـٰٓئِرَ ٱللَّهِ وَلَا ٱلشَّهْرَ ٱلْحَرَامَ وَلَا ٱلْهَدْىَ وَلَا ٱلْقَلَـٰٓئِدَ وَلَآ ءَآمِّينَ ٱلْبَيْتَ ٱلْحَرَامَ يَبْتَغُونَ فَضْلًۭا مِّن رَّبِّهِمْ وَرِضْوَٰنًۭا ۚ وَإِذَا حَلَلْتُمْ فَٱصْطَادُوا۟ ۚ وَلَا يَجْرِمَنَّكُمْ شَنَـَٔانُ قَوْمٍ أَن صَدُّوكُمْ عَنِ ٱلْمَسْجِدِ ٱلْحَرَامِ أَن تَعْتَدُوا۟ ۘ وَتَعَاوَنُوا۟ عَلَى ٱلْبِرِّ وَٱلتَّقْوَىٰ ۖ وَلَا تَعَاوَنُوا۟ عَلَى ٱلْإِثْمِ وَٱلْعُدْوَٰنِ ۚ وَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ ۖ إِنَّ ٱللَّهَ شَدِيدُ ٱلْعِقَابِ
يَـٰٓأَيُّهَا
O
ٱلَّذِينَ
ऐ लोगो जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए हो
لَا
(Do) not
تُحِلُّوا۟
ना तुम हलाल करो
شَعَـٰٓئِرَ
निशानियों को
ٱللَّهِ
अल्लाह की
وَلَا
और ना
ٱلشَّهْرَ
माहे
ٱلْحَرَامَ
हराम को
وَلَا
और ना
ٱلْهَدْىَ
क़ुर्बानी के जानवर को
وَلَا
और ना
ٱلْقَلَـٰٓئِدَ
पट्टे वाले जानवरों को
وَلَآ
और ना
ءَآمِّينَ
इरादा करने वालों को
ٱلْبَيْتَ
(to) the House
ٱلْحَرَامَ
बैतुल हराम का
يَبْتَغُونَ
जो चाहते हैं
فَضْلًۭا
फ़ज़ल
مِّن
of
رَّبِّهِمْ
अपने रब की तरफ़ से
وَرِضْوَٰنًۭا ۚ
और रज़ामन्दी
وَإِذَا
और जब
حَلَلْتُمْ
हलाल हो जाओ तुम
فَٱصْطَادُوا۟ ۚ
तो शिकार करो (अगर तुम चाहो)
وَلَا
और ना
يَجْرِمَنَّكُمْ
आमादा करे तुम्हें
شَنَـَٔانُ
दुश्मनी
قَوْمٍ
किसी क़ौम की
أَن
कि
صَدُّوكُمْ
उन्होंने रोका तुम्हें
عَنِ
from
ٱلْمَسْجِدِ
Al-Masjid
ٱلْحَرَامِ
मस्जिदे हराम से
أَن
कि
تَعْتَدُوا۟ ۘ
तुम ज़्यादती करो
وَتَعَاوَنُوا۟
और तआवुन करो
عَلَى
in
ٱلْبِرِّ
नेकी पर
وَٱلتَّقْوَىٰ ۖ
और तक़वा पर
وَلَا
और ना
تَعَاوَنُوا۟
तुम तआवुन करो
عَلَى
in
ٱلْإِثْمِ
गुनाह पर
وَٱلْعُدْوَٰنِ ۚ
और ज़्यादती पर
وَٱتَّقُوا۟
और डरो
ٱللَّهَ ۖ
अल्लाह से
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
شَدِيدُ
सख़्त
ٱلْعِقَابِ
सज़ा वाला है
ऐ ईमान लानेवालो! अल्लाह की निशानियों का अनादर न करो; न आदर के महीनों का, न क़ुरबानी के जानवरों का और न जानवरों का जिनका गरदनों में पट्टे पड़े हो और न उन लोगों का जो अपने रब के अनुग्रह और उसकी प्रसन्नता की चाह में प्रतिष्ठित गृह (काबा) को जाते हो। और जब इहराम की दशा से बाहर हो जाओ तो शिकार करो। और ऐसा न हो कि एक गिरोह की शत्रुता, जिसने तुम्हारे लिए प्रतिष्ठित घर का रास्ता बन्द कर दिया था, तुम्हें इस बात पर उभार दे कि तुम ज़्यादती करने लगो। हक़ अदा करने और ईश-भय के काम में तुम एक-दूसरे का सहयोग करो और हक़ मारने और ज़्यादती के काम में एक-दूसरे का सहयोग न करो। अल्लाह का डर रखो; निश्चय ही अल्लाह बड़ा कठोर दंड देनेवाला है
तफ़्सीर:
ऐ ईमान वालो! अल्लाह की उन हुर्मत वाली (सम्मानित) चीज़ों का अनादर न करो, जिनके सम्मान का उसने तुम्हें आदेश दिया है, तथा एहराम की अवस्था में निषिद्ध चीज़ों : जैसे सिले हुए कपड़े पहनने, तथा 'हरम' (की सीमा) के अंदर निषिद्ध चीज़ों, जैसे कि शिकार करने से दूर रहो। तथा सम्मानित महीनों अर्थात् ज़ुल-क़ादा, ज़ुल-ह़िज्जा, मुहर्रम और रजब में युद्ध को वैध न ठहराओ। जिन जानवरों को अल्लाह के नाम पर ज़बह करने के लिए हरम भेजा जाता है, उन्हें हथियाकर या उन्हें काबा जाने से रोककर उनका अनादर न करो। उन जानवरों का भी अपमान न करो, जिनके गले पर ऊन आदि के पट्टे डाले गए हों, ताकि पता चल जाए कि वे (हज्ज की) क़ुर्बानी के जानवर हैं। तथा उन लोगों का भी अनादर न करो, जो व्यापार के लाभ और अल्लाह की प्रसन्नता की तलाश में अल्लाह के सम्मानित घर की ओर जाते हैं। और जब तुम ह़ज्ज या उम्रा के एहराम से हलाल हो जाओ और हरम की सीमा से बाहर निकल जाओ, तो यदि चाहो तो शिकार करो। तथा जिन लोगों ने तुम्हें मस्जिदे-ह़राम से रोका है, उनसे दुश्मनी तुम्हें अत्याचार करने और उनके साथ न्याय करना छोड़ देने पर न उभारे। तथा (ऐ मोमिनो!) अल्लाह के आदेशों का पालन करने और उसके निषेधों से बचने में एक-दूसरे का सहयोग करो। और उन पापों में जिनका करने वाला गुनहगार होता है, तथा लोगों पर उनके खून, धन और सतीत्व के संबंध में ज़्यादती (आक्रमण) करने में सहयोग न करो। तथा अल्लाह की आज्ञाकारिता पर अडिग रहकर और उसकी अवज्ञा से दूर रहकर, उससे डरो। निःसंदेह अल्लाह उसे कठोर दंड देने वाला है जो उसकी अवज्ञा करने वाला है। इसलिए उसकी सज़ा से सावधान रहो।
आयत 3
حُرِّمَتْ عَلَيْكُمُ ٱلْمَيْتَةُ وَٱلدَّمُ وَلَحْمُ ٱلْخِنزِيرِ وَمَآ أُهِلَّ لِغَيْرِ ٱللَّهِ بِهِۦ وَٱلْمُنْخَنِقَةُ وَٱلْمَوْقُوذَةُ وَٱلْمُتَرَدِّيَةُ وَٱلنَّطِيحَةُ وَمَآ أَكَلَ ٱلسَّبُعُ إِلَّا مَا ذَكَّيْتُمْ وَمَا ذُبِحَ عَلَى ٱلنُّصُبِ وَأَن تَسْتَقْسِمُوا۟ بِٱلْأَزْلَـٰمِ ۚ ذَٰلِكُمْ فِسْقٌ ۗ ٱلْيَوْمَ يَئِسَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ مِن دِينِكُمْ فَلَا تَخْشَوْهُمْ وَٱخْشَوْنِ ۚ ٱلْيَوْمَ أَكْمَلْتُ لَكُمْ دِينَكُمْ وَأَتْمَمْتُ عَلَيْكُمْ نِعْمَتِى وَرَضِيتُ لَكُمُ ٱلْإِسْلَـٰمَ دِينًۭا ۚ فَمَنِ ٱضْطُرَّ فِى مَخْمَصَةٍ غَيْرَ مُتَجَانِفٍۢ لِّإِثْمٍۢ ۙ فَإِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٌۭ رَّحِيمٌۭ
حُرِّمَتْ
हराम किया गया
عَلَيْكُمُ
तुम पर
ٱلْمَيْتَةُ
मुर्दार
وَٱلدَّمُ
और ख़ून
وَلَحْمُ
और गोश्त
ٱلْخِنزِيرِ
ख़िन्ज़ीर का
وَمَآ
और जो
أُهِلَّ
पुकारा गया
لِغَيْرِ
वास्ते ग़ैर
ٱللَّهِ
अल्लाह के
بِهِۦ
उसको
وَٱلْمُنْخَنِقَةُ
और गला घुटकर मरने वाली
وَٱلْمَوْقُوذَةُ
और चोट लगकर मरने वाली
وَٱلْمُتَرَدِّيَةُ
और बुलन्दी से गिर कर मरने वाली
وَٱلنَّطِيحَةُ
और सींग लग कर मरने वाली
وَمَآ
और जिसे
أَكَلَ
खा जाए
ٱلسَّبُعُ
दरिन्दा
إِلَّا
मगर
مَا
जिसको
ذَكَّيْتُمْ
ज़िबह कर लिया तुमने
وَمَا
और जो
ذُبِحَ
ज़िबह किया गया
عَلَى
on
ٱلنُّصُبِ
आस्तानों पर
وَأَن
और ये कि
تَسْتَقْسِمُوا۟
तुम क़िस्मत मालूम करो
بِٱلْأَزْلَـٰمِ ۚ
तीरों/पाँसों के ज़रिए
ذَٰلِكُمْ
ये सब
فِسْقٌ ۗ
गुनाह (के काम) हैं
ٱلْيَوْمَ
आज के दिन
يَئِسَ
मायूस हो गए
ٱلَّذِينَ
वो जिन्होंने
كَفَرُوا۟
कुफ़्र किया
مِن
of
دِينِكُمْ
तुम्हारे दीन से
فَلَا
तो ना
تَخْشَوْهُمْ
तुम डरो उनसे
وَٱخْشَوْنِ ۚ
और डरो मुझसे
ٱلْيَوْمَ
आज के दिन
أَكْمَلْتُ
मुकम्मल कर दिया मैंने
لَكُمْ
तुम्हारे लिए
دِينَكُمْ
दीन तुम्हारा
وَأَتْمَمْتُ
और तमाम कर दी मैंने
عَلَيْكُمْ
तुम पर
نِعْمَتِى
नेअमत अपनी
وَرَضِيتُ
और पसंद कर लिया मैंने
لَكُمُ
तुम्हारे लिए
ٱلْإِسْلَـٰمَ
इस्लाम को
دِينًۭا ۚ
बतौर दीन
فَمَنِ
तो जो कोई
ٱضْطُرَّ
मजबूर किया गया
فِى
by
مَخْمَصَةٍ
भूख में
غَيْرَ
(and) not
مُتَجَانِفٍۢ
नहीं माइल होने वाला
لِّإِثْمٍۢ ۙ
तरफ़ गुनाह के
فَإِنَّ
तो बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
غَفُورٌۭ
बहुत बख़्शने वाला है
رَّحِيمٌۭ
निहायत रहम करने वाला है
तुम्हारे लिए हराम हुआ मुर्दार रक्त, सूअर का मांस और वह जानवर जिसपर अल्लाह के अतिरिक्त किसी और का नाम लिया गया हो और वह जो घुटकर या चोट खाकर या ऊँचाई से गिरकर या सींग लगने से मरा हो या जिसे किसी हिंसक पशु ने फाड़ खाया हो - सिवाय उसके जिसे तुमने ज़बह कर लिया हो - और वह किसी थान पर ज़बह कियी गया हो। और यह भी (तुम्हारे लिए हराम हैं) कि तीरो के द्वारा किस्मत मालूम करो। यह आज्ञा का उल्लंघन है - आज इनकार करनेवाले तुम्हारे धर्म की ओर से निराश हो चुके हैं तो तुम उनसे न डरो, बल्कि मुझसे डरो। आज मैंने तुम्हारे धर्म को पूर्ण कर दिया और तुमपर अपनी नेमत पूरी कर दी और मैंने तुम्हारे धर्म के रूप में इस्लाम को पसन्द किया - तो जो कोई भूख से विवश हो जाए, परन्तु गुनाह की ओर उसका झुकाव न हो, तो निश्चय ही अल्लाह अत्यन्त क्षमाशील, दयावान है
तफ़्सीर:
अल्लाह ने तुमपर वह जानवर हराम किया है, जो शरई तरीक़े से ज़बह किए बिना मर गया हो। तथा उसने तुमपर हराम किया है बहता हुआ रक्त, सूअर का माँस, वह जानवर जिसपर ज़बह करते समय अल्लाह के नाम के अलावा किसी और का नाम पुकारा जाए, तथा गला घुटने से मरा हुआ, चोट लगने से मरा हुआ, ऊँचे स्थान से गिरकर मरा हुआ, या दूसरे जानवर के सींग मारने के कारण मरा हुआ, तथा वह जानवर जिसे शेर, चीते और भेड़िये जैसे किसी हिंसक पशु (दरिंदे) ने फाड़ खाया हो। परंतु उक्त जानवरों में से जो तुम्हें जीवित मिले और तुम उसे ज़बह कर लो, तो वह तुम्हारे लिए हलाल है। तथा उसने तुमपर वह जानवर भी हराम किया है जो मूर्तियों के लिए ज़बह किया गया हो। तथा उसने तुमपर तीरों के द्वारा अपना भाग्य मालूम करना भी हराम किया है। ये दरअसल पत्थर या तीर होते थे, जिनमें (करो) या (मत करो) लिखा होता था, चुनाँचे भाग्य मालूम करने वाला उसी के अनुसार कार्य करता था, जो उसके लिए उससे निकलता था। उल्लिखित वर्जनाओं को करना अल्लाह की आज्ञाकारिता से बाहर निकलना है। आज काफ़िर लोग इस्लाम धर्म की शक्ति को देखकर, तुम्हारे इस्लाम धर्म को त्याग देने से निराश हो गए। इसलिए उनसे मत डरो, अकेले मुझसे डरो। आज मैंने तुम्हारे लिए तुम्हारे धर्म इस्लाम को परिपूर्ण कर दिया, तथा तुमपर अपनी खुली तथा छिपी नेमत पूरी कर दी और तुम्हारे लिए इस्लाम को धर्म के रूप में चुन लिया। इसलिए मैं उसके सिवा कोई और धर्म स्वीकार नहीं करुँगा। अतः जो व्यक्ति सख़्त भूख के कारण मरे हुए जानवर का माँस खाने पर मजबूर कर दिया जाए जबकि उसका झुकाव पाप की ओर न हो, तो उसपर इसमें कोई पाप नहीं। निःसंदेह अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
आयत 4
يَسْـَٔلُونَكَ مَاذَآ أُحِلَّ لَهُمْ ۖ قُلْ أُحِلَّ لَكُمُ ٱلطَّيِّبَـٰتُ ۙ وَمَا عَلَّمْتُم مِّنَ ٱلْجَوَارِحِ مُكَلِّبِينَ تُعَلِّمُونَهُنَّ مِمَّا عَلَّمَكُمُ ٱللَّهُ ۖ فَكُلُوا۟ مِمَّآ أَمْسَكْنَ عَلَيْكُمْ وَٱذْكُرُوا۟ ٱسْمَ ٱللَّهِ عَلَيْهِ ۖ وَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ سَرِيعُ ٱلْحِسَابِ
يَسْـَٔلُونَكَ
वो सवाल करते हैं आपसे
مَاذَآ
क्या कुछ
أُحِلَّ
हलाल किया गया
لَهُمْ ۖ
उनके लिए
قُلْ
कह दीजिए
أُحِلَّ
हलाल की गईं
لَكُمُ
तुम्हारे लिए
ٱلطَّيِّبَـٰتُ ۙ
पाकीज़ा चीज़ें
وَمَا
और जो
عَلَّمْتُم
सिखाया तुमने
مِّنَ
of
ٱلْجَوَارِحِ
शिकारी जानवरों को
مُكَلِّبِينَ
शिकार की तालीम देने वाले
تُعَلِّمُونَهُنَّ
तुम सिखाते हो उन्हें
مِمَّا
उसमें से जो
عَلَّمَكُمُ
सिखाया तुम्हें
ٱللَّهُ ۖ
अल्लाह ने
فَكُلُوا۟
तो खाओ
مِمَّآ
उसमें से जो
أَمْسَكْنَ
वो रोक रखें
عَلَيْكُمْ
तुम पर
وَٱذْكُرُوا۟
और ज़िक्र करो
ٱسْمَ
नाम
ٱللَّهِ
अल्लाह का
عَلَيْهِ ۖ
उस पर
وَٱتَّقُوا۟
और डरो
ٱللَّهَ ۚ
अल्लाह से
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
سَرِيعُ
जल्द लेने वाला है
ٱلْحِسَابِ
हिसाब
वे तुमसे पूछते है कि "उनके लिए क्या हलाल है?" कह दो, "तुम्हारे लिए सारी अच्छी स्वच्छ चीज़ें हलाल है और जिन शिकारी जानवरों को तुमने सधे हुए शिकारी जानवर के रूप में सधा रखा हो - जिनको जैस अल्लाह ने तुम्हें सिखाया हैं, सिखाते हो - वे जिस शिकार को तुम्हारे लिए पकड़े रखे, उसको खाओ और उसपर अल्लाह का नाम लो। और अल्लाह का डर रखो। निश्चय ही अल्लाह जल्द हिसाब लेनेवाला है।"
तफ़्सीर:
ऐ रसूल! आपके सहाबा आपसे पूछते हैं कि अल्लाह ने उनके लिए किन-किन चीज़ों का खाना हलाल किया है? (ऐ रसूल!) आप कह दें : अल्लाह ने तुम्हारे लिए अच्छी खाने की चीज़ें और उस शिकार को हलाल किया है, जिसे कुचली वाले जानवरों जैसे कुत्तों और तेंदुओं, तथा पंजे से शिकार करने वाले पक्षियों जैसे बाज़ों, में से प्रशिक्षित जानवरों ने पकड़ा है। तुम उन्हें उसमें से शिकार का ढंग सिखाते हो, जो अल्लाह ने तुम्हें उसके शिष्टाचार का ज्ञान प्रदान किया है। यहाँ तक कि वे इस तरह प्रशिक्षित हो जाएँ कि जब उन्हें आदेश दिया जाए, तो वे आदेश का पालन करें, तथा जब उन्हें रोका जाए, तो वे रुक जाएँ। फिर वे जो शिकार पकड़कर रोक रखें, भले ही वे उसे मार डालें, तो तुम उसे खाओ। तथा इन शिकारी जानवरों को छोड़ते समय अल्लाह का नाम लिया करो। तथा अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से दूर रहकर, डरते रहो। निःसंदेह अल्लाह कर्मों का बहुत शीघ्र हिसाब लेने वाला है।
आयत 5
ٱلْيَوْمَ أُحِلَّ لَكُمُ ٱلطَّيِّبَـٰتُ ۖ وَطَعَامُ ٱلَّذِينَ أُوتُوا۟ ٱلْكِتَـٰبَ حِلٌّۭ لَّكُمْ وَطَعَامُكُمْ حِلٌّۭ لَّهُمْ ۖ وَٱلْمُحْصَنَـٰتُ مِنَ ٱلْمُؤْمِنَـٰتِ وَٱلْمُحْصَنَـٰتُ مِنَ ٱلَّذِينَ أُوتُوا۟ ٱلْكِتَـٰبَ مِن قَبْلِكُمْ إِذَآ ءَاتَيْتُمُوهُنَّ أُجُورَهُنَّ مُحْصِنِينَ غَيْرَ مُسَـٰفِحِينَ وَلَا مُتَّخِذِىٓ أَخْدَانٍۢ ۗ وَمَن يَكْفُرْ بِٱلْإِيمَـٰنِ فَقَدْ حَبِطَ عَمَلُهُۥ وَهُوَ فِى ٱلْـَٔاخِرَةِ مِنَ ٱلْخَـٰسِرِينَ
ٱلْيَوْمَ
आज के दिन
أُحِلَّ
हलाल कर दी गईं
لَكُمُ
तुम्हारे लिए
ٱلطَّيِّبَـٰتُ ۖ
पाकीज़ा चीज़ें
وَطَعَامُ
और खाना
ٱلَّذِينَ
उनका जो
أُوتُوا۟
दिए गए
ٱلْكِتَـٰبَ
किताब
حِلٌّۭ
हलाल है
لَّكُمْ
तुम्हारे लिए
وَطَعَامُكُمْ
और खाना तुम्हारा
حِلٌّۭ
हलाल है
لَّهُمْ ۖ
उनके लिए
وَٱلْمُحْصَنَـٰتُ
और पाक दामन औरतें
مِنَ
from
ٱلْمُؤْمِنَـٰتِ
मोमिन औरतों में से
وَٱلْمُحْصَنَـٰتُ
और पाक दामन औरतें
مِنَ
from
ٱلَّذِينَ
उनमें से जो
أُوتُوا۟
दिए गए
ٱلْكِتَـٰبَ
किताब
مِن
from
قَبْلِكُمْ
तुमसे पहले
إِذَآ
जब
ءَاتَيْتُمُوهُنَّ
दे दो तुम उन्हें
أُجُورَهُنَّ
महर उनके
مُحْصِنِينَ
निकाह में लाने वाले
غَيْرَ
not
مُسَـٰفِحِينَ
ना बदकारी करने वाले
وَلَا
और ना
مُتَّخِذِىٓ
बनाने वाले
أَخْدَانٍۢ ۗ
छुपे दोस्त
وَمَن
और जो कोई
يَكْفُرْ
कुफ़्र करेगा
بِٱلْإِيمَـٰنِ
साथ ईमान के
فَقَدْ
पस तहक़ीक़
حَبِطَ
ज़ाया हो गया
عَمَلُهُۥ
अमल उसका
وَهُوَ
और वो
فِى
in
ٱلْـَٔاخِرَةِ
आख़िरत में
مِنَ
(will be) among
ٱلْخَـٰسِرِينَ
ख़सारा पाने वालों में से होगा
आज तुम्हारे लिए अच्छी स्वच्छ चीज़ें हलाल कर दी गई और जिन्हें किताब दी गई उनका भोजन भी तुम्हारे लिए हलाल है और तुम्हारा भोजन उनके लिए हलाल है और शरीफ़ और स्वतंत्र ईमानवाली स्त्रियाँ भी जो तुमसे पहले के किताबवालों में से हो, जबकि तुम उनका हक़ (मेहर) देकर उन्हें निकाह में लाओ। न तो यह काम स्वछन्द कामतृप्ति के लिए हो और न चोरी-छिपे याराना करने को। और जिस किसी ने ईमान से इनकार किया, उसका सारा किया-धरा अकारथ गया और वह आख़िरत में भी घाटे में रहेगा
तफ़्सीर:
आज अल्लाह ने तुम्हारे लिए अच्छी चीज़ों को खाना तथा अह्ले किताब यानी यहूदियों एवं ईसाइयों द्वारा ज़बह किए गए जानवरों को खाना हलाल कर दिया है। और तुम्हारे ज़बह किए हुए जानवर उनके लिए हलाल कर दिए गए हैं। तुम्हारे लिए ईमान वाली स्त्रियों में से पाक-दामन आज़ाद स्त्रियों तथा तुमसे पहले किताब दिए गए यहूदियों एवं ईसाइयों में से पाक-दामन आज़ाद स्त्रियों से शादी करना हलाल कर दिया गया है, जब तुम उन्हें उनके महर दे दो और तुम अनैतिक काम करने से परहेज़ करने वाले हो, उन्हें प्रेमिकाएँ बनाने वाले न हो कि तुम उनके साथ व्यभिचार करना चाहते हो। जो व्यक्ति उन विधानों का इनकार करे, जिन्हें अल्लाह ने अपने बंदों के लिए निर्धारित किया है, तो निश्चय उसका कर्म, उसके क़बूल होने की शर्त अर्थात् ईमान न होने के कारण अमान्य (नष्ट) हो गया, तथा वह क़ियामत के दिन नुक़सान उठाने वाले लोगों में शामिल होगा, क्योंकि वह सदा-सर्वदा के लिए आग में प्रवेश करेगा।
आयत 6
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ إِذَا قُمْتُمْ إِلَى ٱلصَّلَوٰةِ فَٱغْسِلُوا۟ وُجُوهَكُمْ وَأَيْدِيَكُمْ إِلَى ٱلْمَرَافِقِ وَٱمْسَحُوا۟ بِرُءُوسِكُمْ وَأَرْجُلَكُمْ إِلَى ٱلْكَعْبَيْنِ ۚ وَإِن كُنتُمْ جُنُبًۭا فَٱطَّهَّرُوا۟ ۚ وَإِن كُنتُم مَّرْضَىٰٓ أَوْ عَلَىٰ سَفَرٍ أَوْ جَآءَ أَحَدٌۭ مِّنكُم مِّنَ ٱلْغَآئِطِ أَوْ لَـٰمَسْتُمُ ٱلنِّسَآءَ فَلَمْ تَجِدُوا۟ مَآءًۭ فَتَيَمَّمُوا۟ صَعِيدًۭا طَيِّبًۭا فَٱمْسَحُوا۟ بِوُجُوهِكُمْ وَأَيْدِيكُم مِّنْهُ ۚ مَا يُرِيدُ ٱللَّهُ لِيَجْعَلَ عَلَيْكُم مِّنْ حَرَجٍۢ وَلَـٰكِن يُرِيدُ لِيُطَهِّرَكُمْ وَلِيُتِمَّ نِعْمَتَهُۥ عَلَيْكُمْ لَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ
يَـٰٓأَيُّهَا
O you
ٱلَّذِينَ
ऐ लोगो जो
ءَامَنُوٓا۟
ईमान लाए हो
إِذَا
जब
قُمْتُمْ
खड़े हो तुम
إِلَى
for
ٱلصَّلَوٰةِ
तरफ़ नमाज़ के
فَٱغْسِلُوا۟
तो धो लो तुम
وُجُوهَكُمْ
अपने चेहरों को
وَأَيْدِيَكُمْ
और अपने हाथों के
إِلَى
till
ٱلْمَرَافِقِ
कोहनियों तक
وَٱمْسَحُوا۟
और मसह कर लो
بِرُءُوسِكُمْ
अपने सरों का
وَأَرْجُلَكُمْ
और अपने पाँवों को (धो लो)
إِلَى
till
ٱلْكَعْبَيْنِ ۚ
टख़नों तक
وَإِن
और अगर
كُنتُمْ
हो तुम
جُنُبًۭا
हालते जनाबत में
فَٱطَّهَّرُوا۟ ۚ
तो ख़ूब पाक हो जाओ
وَإِن
और अगर
كُنتُم
हो तुम
مَّرْضَىٰٓ
बीमार
أَوْ
या
عَلَىٰ
on
سَفَرٍ
किसी सफ़र पर
أَوْ
या
جَآءَ
आया
أَحَدٌۭ
कोई एक
مِّنكُم
तुम में से
مِّنَ
from
ٱلْغَآئِطِ
क़ज़ा-ए-हाजत से
أَوْ
या
لَـٰمَسْتُمُ
छुआ हो तुमने
ٱلنِّسَآءَ
औरतों को
فَلَمْ
फिर ना
تَجِدُوا۟
तुम पाओ
مَآءًۭ
पानी
فَتَيَمَّمُوا۟
तो तयम्मुम कर लो
صَعِيدًۭا
मिट्टी
طَيِّبًۭا
पाक से
فَٱمْسَحُوا۟
फिर मसह करो
بِوُجُوهِكُمْ
अपने चेहरों का
وَأَيْدِيكُم
और अपने हाथों का
مِّنْهُ ۚ
उससे
مَا
नहीं
يُرِيدُ
चाहता
ٱللَّهُ
अल्लाह
لِيَجْعَلَ
कि वो कर दे
عَلَيْكُم
तुम पर
مِّنْ
any
حَرَجٍۢ
कोई तंगी
وَلَـٰكِن
और लेकिन
يُرِيدُ
वो चाहता है
لِيُطَهِّرَكُمْ
कि वो पाक कर दे तुम्हें
وَلِيُتِمَّ
और ताकि वो पूरा कर दे
نِعْمَتَهُۥ
अपनी नेअमत को
عَلَيْكُمْ
तुम पर
لَعَلَّكُمْ
ताकि तुम
تَشْكُرُونَ
तुम शुक्र अदा करो
ऐ ईमान लेनेवालो! जब तुम नमाज़ के लिए उठो तो अपने चहरों को और हाथों को कुहनियों तक धो लिया करो और अपने सिरों पर हाथ फेर लो और अपने पैरों को भी टखनों तक धो लो। और यदि नापाक हो तो अच्छी तरह पाक हो जाओ। परन्तु यदि बीमार हो या सफ़र में हो या तुममें से कोई शौच करके आया हो या तुमने स्त्रियों को हाथ लगया हो, फिर पानी न मिले तो पाक मिट्टी से काम लो। उसपर हाथ मारकर अपने मुँह और हाथों पर फेर लो। अल्लाह तुम्हें किसी तंगी में नहीं डालना चाहता। अपितु वह चाहता हैं कि तुम्हें पवित्र करे और अपनी नेमत तुमपर पूरी कर दे, ताकि तुम कृतज्ञ बनो
तफ़्सीर:
ऐ ईमान वालो! जब तुम नमाज़ अदा करने के लिए उठना चाहो, और तुम 'हदस-ए-असग़र' (छोटी नापाकी, बे-वुज़ू होने) की हालत में हो, तो वुज़ू कर लो, इस प्रकार कि अपने मुँह धो लो तथा अपने हाथों को कुहनियों समेत धो लो और अपने सिरों का मसह़ करो, तथा अपने पाँवों को टखनों समेत धो लो, जो पिंडली के जोड़ पर उभरे हुए होते हैं। यदि तुम 'हदस-ए-अकबर' (बड़ी नापाकी, जिसके लिए ग़ुस्ल की आवश्यता होती है) की हालत में हो, तो स्नान कर लो। तथा यदि तुम बीमार हो, तुम्हें बीमारी के बढ़ने या ठीक होने में देरी होने का डर है, या तुम स्वस्थ होने की स्थिति में यात्रा कर रहे हो, या तुम उदाहरण के तौर पर शौचकर्म के कारण 'हदस-ए-असग़र' (छोटी अशुद्धता) की हालत में हो, या महिलाओं के साथ संभोग करके 'हदस-ए-अकबर' (बड़ी अशुद्धता) की हालत में हो, और खोजने के बाद भी तुम्हें पानी न मिले - जिससे अपने आपको शुद्ध (पाक) कर सको -, तो ज़मीन की सतह (मिट्टी) का क़सद करो और उसपर अपने हाथों को मारो और (उन्हें) अपने चेहरों पर फेरो तथा अपने हाथों पर फेरो (यानी मसह़ करो)। अल्लाह तुम्हें पानी का उपयोग करने के लिए बाध्य करके, जो तुम्हें नुक़सान पहुँचाता है, अपने प्रावधानों में तुमपर तंगी नहीं करना चाहता है। इसलिए किसी बीमारी या पानी न मिलने के कारण उसका उपयोग दुर्लभ होने के समय उसने तुम्हारे लिए उसका एक विकल्प निर्धारित किया है, ताकि वह तुमपर अपना अनुग्रह पूरा कर दे, तथा तुम अपने ऊपर अल्लाह की नेमत का शुक्र अदा करो और उसकी नाशुक्री न करो।
आयत 7
وَٱذْكُرُوا۟ نِعْمَةَ ٱللَّهِ عَلَيْكُمْ وَمِيثَـٰقَهُ ٱلَّذِى وَاثَقَكُم بِهِۦٓ إِذْ قُلْتُمْ سَمِعْنَا وَأَطَعْنَا ۖ وَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ عَلِيمٌۢ بِذَاتِ ٱلصُّدُورِ
وَٱذْكُرُوا۟
और याद करो
نِعْمَةَ
नेअमत को
ٱللَّهِ
अल्लाह की
عَلَيْكُمْ
जो तुम पर है
وَمِيثَـٰقَهُ
और उसका पुख़्ता अहद
ٱلَّذِى
वो जो
وَاثَقَكُم
उसने तुमसे अहद लिया
بِهِۦٓ
साथ उसके
إِذْ
जब
قُلْتُمْ
कहा तुमने
سَمِعْنَا
सुना हमने
وَأَطَعْنَا ۖ
और इताअत की हमने
وَٱتَّقُوا۟
और डरो
ٱللَّهَ ۚ
अल्लाह से
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
عَلِيمٌۢ
ख़ूब जानने वाला है
بِذَاتِ
of what
ٱلصُّدُورِ
सीनों वाले (भेद)
और अल्लाह के उस अनुग्रह को याद करो जो उसने तुमपर किया हैं और उस प्रतिज्ञा को भी जो उसने तुमसे की है, जबकि तुमने कहा था - "हमने सुना और माना।" अल्लाह जो कुछ सीनों (दिलों) में है, उसे भी जानता हैं
तफ़्सीर:
तथा अपने ऊपर अल्लाह के इस अनुग्रह को याद करो कि उसने तुम्हें इस्लाम का मार्गदर्शन प्रदान किया, और उसकी उस प्रतिज्ञा को याद करो, जो उसने तुमसे उस समय ली थी, जब तुमने नबी सल्लल्लाहू अलैहि व सल्लम से सुखद और अप्रिय चीज़ों में बात सुनने और मानने की बैअत करते हुए कहा था : 'हमने आपकी बात सुनी और हमने आपका आदेश मान लिया'। तथा अल्लाह के आदेशों (जिनमें उसके वचन भी हैं) का पालन करके तथा उसकी मना की हुई बातों से बचकर, उससे डरो। निश्चय अल्लाह जो कुछ दिलों में है उसे ख़ूब जानने वाला है, अतः उससे कोई भी चीज़ छिपी नहीं है।
आयत 8
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ كُونُوا۟ قَوَّٰمِينَ لِلَّهِ شُهَدَآءَ بِٱلْقِسْطِ ۖ وَلَا يَجْرِمَنَّكُمْ شَنَـَٔانُ قَوْمٍ عَلَىٰٓ أَلَّا تَعْدِلُوا۟ ۚ ٱعْدِلُوا۟ هُوَ أَقْرَبُ لِلتَّقْوَىٰ ۖ وَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ خَبِيرٌۢ بِمَا تَعْمَلُونَ
يَـٰٓأَيُّهَا
O you
ٱلَّذِينَ
ऐ लोगो जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए हो
كُونُوا۟
हो जाओ तुम
قَوَّٰمِينَ
क़ायम रहने वाले
لِلَّهِ
अल्लाह के लिए
شُهَدَآءَ
गवाह
بِٱلْقِسْطِ ۖ
साथ इन्साफ़ के
وَلَا
और ना
يَجْرِمَنَّكُمْ
हरगिज़ आमादा करे तुम्हें
شَنَـَٔانُ
दुश्मनी
قَوْمٍ
किसी क़ौम की
عَلَىٰٓ
इस पर
أَلَّا
कि ना
تَعْدِلُوا۟ ۚ
तुम अदल करोगे
ٱعْدِلُوا۟
अदल करो
هُوَ
वो
أَقْرَبُ
ज़्यादा क़रीब है
لِلتَّقْوَىٰ ۖ
तक़वा के
وَٱتَّقُوا۟
और डरो
ٱللَّهَ ۚ
अल्लाह से
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
خَبِيرٌۢ
ख़ूब ख़बर रखने वाला है
بِمَا
उसकी जो
تَعْمَلُونَ
तुम अमल करते हो
ऐ ईमान लेनेवालो! अल्लाह के लिए खूब उठनेवाले, इनसाफ़ की निगरानी करनेवाले बनो और ऐसा न हो कि किसी गिरोह की शत्रुता तुम्हें इस बात पर उभार दे कि तुम इनसाफ़ करना छोड़ दो। इनसाफ़ करो, यही धर्मपरायणता से अधिक निकट है। अल्लाह का डर रखो, निश्चय ही जो कुछ तुम करते हो, अल्लाह को उसकी ख़बर हैं
तफ़्सीर:
ऐ लोगो जो अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाए हो! अपने ऊपर अनिवार्य अल्लाह के अधिकारों का निष्पादन करो उसके द्वारा उसकी प्रसन्नता तलाश करते हुए, तथा न्याय के गवाह बनो, अन्याय के नहीं। किसी जाति की शत्रुता तुम्हें न्याय को त्यागने के लिए प्रेरित न करे। क्योंकि न्याय करना मित्र और शत्रु दोनों के साथ आवश्यक है। इसलिए उन दोनों के साथ न्याय करो। क्योंकि न्याय अल्लाह से डरने के अधिक निकट है, और अन्याय अल्लाह के विरुद्ध दुस्साहस के अधिक निकट है। तथा अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसकी मना की हुई बातों से बचकर, उससे डरो। तुम जो कुछ भी करते हो, अल्लाह को उसकी पूरी ख़बर है। तुम्हारे कर्मों में से कुछ भी उससे छिपा नहीं है, और वह तुम्हें उसका प्रतिफल देगा।
आयत 9
وَعَدَ ٱللَّهُ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ ۙ لَهُم مَّغْفِرَةٌۭ وَأَجْرٌ عَظِيمٌۭ
وَعَدَ
वादा किया
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
ٱلَّذِينَ
उनसे जो
ءَامَنُوا۟
जो ईमान लाए
وَعَمِلُوا۟
और उन्होंने अमल किए
ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ ۙ
नेक
لَهُم
उनके लिए
مَّغْفِرَةٌۭ
मग़फ़िरत
وَأَجْرٌ
और अजर है
عَظِيمٌۭ
बहुत बड़ा
जो लोग ईमान लाए और उन्होंन अच्छे कर्म किए उनसे अल्लाह का वादा है कि उनके लिए क्षमा और बड़ा प्रतिदान है
तफ़्सीर:
अल्लाह (जो अपना वादा नहीं तोड़ता) ने उन लोगों से वादा किया है, जो अल्लाह तथा उसके रसूलों पर ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए कि उनके पापों को क्षमा कर देगा और उन्हें बड़ा सवाब (प्रतिफल) प्रदान करेगा और वह जन्नत में प्रवेश है।
आयत 10
وَٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ وَكَذَّبُوا۟ بِـَٔايَـٰتِنَآ أُو۟لَـٰٓئِكَ أَصْحَـٰبُ ٱلْجَحِيمِ
وَٱلَّذِينَ
और वो जिन्होंने
كَفَرُوا۟
कुफ़्र किया
وَكَذَّبُوا۟
और उन्होंने झुठलाया
بِـَٔايَـٰتِنَآ
हमारी आयात को
أُو۟لَـٰٓئِكَ
यही लोग हैं
أَصْحَـٰبُ
साथी
ٱلْجَحِيمِ
जहन्नम के
रहे वे लोग जिन्होंने इनकार किया और हमारी आयतों को झुठलाया, वही भड़कती आग में पड़नेवाले है
तफ़्सीर:
जिन लोगों ने अल्लाह के साथ कुफ़्र किया तथा उसकी आयतों को झुठलाया, वही लोग आग वाले हैं जो अपने कुफ़्र और झुठलाने की सज़ा के रूप में उसमें प्रवेश करेंगे, जिसमें वे सदैव रहेंगे जैसे साथी अपने साथी के साथ हमेशा लगा रहता है।
आयत 11
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ ٱذْكُرُوا۟ نِعْمَتَ ٱللَّهِ عَلَيْكُمْ إِذْ هَمَّ قَوْمٌ أَن يَبْسُطُوٓا۟ إِلَيْكُمْ أَيْدِيَهُمْ فَكَفَّ أَيْدِيَهُمْ عَنكُمْ ۖ وَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ ۚ وَعَلَى ٱللَّهِ فَلْيَتَوَكَّلِ ٱلْمُؤْمِنُونَ
يَـٰٓأَيُّهَا
O you
ٱلَّذِينَ
ऐ लोगो जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए हो
ٱذْكُرُوا۟
याद करो
نِعْمَتَ
नेअमत को
ٱللَّهِ
अल्लाह की
عَلَيْكُمْ
जो तुम पर है
إِذْ
जब
هَمَّ
इरादा किया
قَوْمٌ
एक क़ौम ने
أَن
कि
يَبْسُطُوٓا۟
वो बढ़ाऐं
إِلَيْكُمْ
तरफ़ तुम्हारे
أَيْدِيَهُمْ
हाथ अपने
فَكَفَّ
तो उसने रोक दिए
أَيْدِيَهُمْ
हाथ उनके
عَنكُمْ ۖ
तुमसे
وَٱتَّقُوا۟
और डरो
ٱللَّهَ ۚ
अल्लाह से
وَعَلَى
And upon
ٱللَّهِ
और अल्लाह ही पर
فَلْيَتَوَكَّلِ
पस चाहिए कि तवक्कल करें
ٱلْمُؤْمِنُونَ
ईमान वाले
ऐ ईमान लेनेवालो! अल्लाह के उस अनुग्रह को याद करो जो उसने तुमपर किया है, जबकि कुछ लोगों ने तुम्हारी ओर हाथ बढ़ाने का निश्चय कर लिया था तो उसने उनके हाथ तुमसे रोक दिए। अल्लाह का डर रखो, और ईमानवालों को अल्लाह ही पर भरोसा करना चाहिए
तफ़्सीर:
ऐ ईमान वालो! अपने दिलों से तथा अपनी ज़बानों से अल्लाह के इस उपकार को याद करो कि उसने तुम्हें सुरक्षा प्रदान की और तुम्हारे दुश्मनों के दिलों में भय डाल दिया, जब उन्होंने तुम्हें पकड़ने और तुम्हारा उन्मूलन करने के लिए तुम्हारी ओर हाथ बढ़ाना चाहा। चुनाँचे अल्लाह ने उन्हें तुमसे फेर दिया और तुम्हें उनसे बचा लिया। तथा अल्लाह के आदेशों का पालन करके तथा उसके निषेधों से बचकर उससे डरो। तथा मोमिनों को चाहिए कि वे अपने धार्मिक और सांसारिक हितों की प्राप्ति में केवल अल्लाह पर भरोसा करें।
आयत 12
۞ وَلَقَدْ أَخَذَ ٱللَّهُ مِيثَـٰقَ بَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ وَبَعَثْنَا مِنْهُمُ ٱثْنَىْ عَشَرَ نَقِيبًۭا ۖ وَقَالَ ٱللَّهُ إِنِّى مَعَكُمْ ۖ لَئِنْ أَقَمْتُمُ ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتَيْتُمُ ٱلزَّكَوٰةَ وَءَامَنتُم بِرُسُلِى وَعَزَّرْتُمُوهُمْ وَأَقْرَضْتُمُ ٱللَّهَ قَرْضًا حَسَنًۭا لَّأُكَفِّرَنَّ عَنكُمْ سَيِّـَٔاتِكُمْ وَلَأُدْخِلَنَّكُمْ جَنَّـٰتٍۢ تَجْرِى مِن تَحْتِهَا ٱلْأَنْهَـٰرُ ۚ فَمَن كَفَرَ بَعْدَ ذَٰلِكَ مِنكُمْ فَقَدْ ضَلَّ سَوَآءَ ٱلسَّبِيلِ
۞ وَلَقَدْ
और अलबत्ता तहक़ीक़
أَخَذَ
लिया
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
مِيثَـٰقَ
पुख़्ता अहद
بَنِىٓ
(from the) Children
إِسْرَٰٓءِيلَ
बनी इस्राईल से
وَبَعَثْنَا
और मुक़र्रर किए हमने
مِنْهُمُ
उनमें से
ٱثْنَىْ
two
عَشَرَ
बारह
نَقِيبًۭا ۖ
निगरान
وَقَالَ
और कहा
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
إِنِّى
बेशक मैं
مَعَكُمْ ۖ
साथ हूँ तुम्हारे
لَئِنْ
अलबत्ता अगर
أَقَمْتُمُ
क़ायम की तुमने
ٱلصَّلَوٰةَ
नमाज़
وَءَاتَيْتُمُ
और दी तुमने
ٱلزَّكَوٰةَ
ज़कात
وَءَامَنتُم
और ईमान लाए तुम
بِرُسُلِى
मेरे रसूलों पर
وَعَزَّرْتُمُوهُمْ
और मदद की तुमने उनकी
وَأَقْرَضْتُمُ
और क़र्ज़ दिया तुमने
ٱللَّهَ
अल्लाह को
قَرْضًا
क़र्ज़
حَسَنًۭا
अच्छा
لَّأُكَفِّرَنَّ
अलबत्ता मैं ज़रूर दूर कर दूँगा
عَنكُمْ
तुम से
سَيِّـَٔاتِكُمْ
बुराईयाँ तुम्हारी
وَلَأُدْخِلَنَّكُمْ
और अलबत्ता मैं ज़रूर दाख़िल करुँगा
جَنَّـٰتٍۢ
बाग़ात में
تَجْرِى
बहती हैं
مِن
from
تَحْتِهَا
उनके नीचे से
ٱلْأَنْهَـٰرُ ۚ
नहरें
فَمَن
तो जिसने
كَفَرَ
कुफ़्र किया
بَعْدَ
बाद
ذَٰلِكَ
इसके
مِنكُمْ
तुम में से
فَقَدْ
तो तहक़ीक़
ضَلَّ
वो भटक गया
سَوَآءَ
सीधे
ٱلسَّبِيلِ
रास्ते से
अल्लाह ने इसराईल की सन्तान से वचन लिया था और हमने उनमें से बारह सरदार नियुक्त किए थे। और अल्लाह ने कहा, "मैं तुम्हारे साथ हूँ, यदि तुमने नमाज़ क़ायम रखी, ज़कात देते रहे, मेरे रसूलों पर ईमान लाए और उनकी सहायता की और अल्लाह को अच्छा ऋण दिया तो मैं अवश्य तुम्हारी बुराइयाँ तुमसे दूर कर दूँगा और तुम्हें निश्चय ही ऐसे बाग़ों में दाख़िल करूँगा, जिनके नीचे नहरें बह रही होगी। फिर इसके पश्चात तुमनें से जिनसे इनकार किया, तो वास्तव में वह ठीक और सही रास्ते से भटक गया।"
तफ़्सीर:
निश्चय अल्लाह ने बनी इसराईल से उस बात का दृढ़ वचन लिया, जिसका शीघ्र ही उल्लेख किया जाएगा, तथा उसने उनपर बारह प्रमुख नियुक्त किए, जिनमें से प्रत्येक अपने अधीन रहने वालों की देखरेख करते थे। तथा अल्लाह ने बनी इसराईल से कहा : मैं सहायता और समर्थन के द्वारा तुम्हारे साथ हूँ, यदि तुम सबसे पूर्ण तरीक़े से नमाज़ अदा करते रहे, अपने धनों की ज़कात देते रहे, मेरे सभी रसूलों को उनके बीच भेदभाव (अंतर) किए बिना सत्य माना, उनका सम्मान किया, उनकी सहायता की और भले कामों पर खर्च किया। यदि तुमने यह सब किया, तो निश्चय मैं उन बुराइयों को तुमसे अवश्य दूर कर दूँगा, जो तुमने की हैं, तथा मैं क़ियामत के दिन तुम्हें ऐसे बाग़ों में अवश्य प्रवेश दूँगा, जिनके महलों के नीचे से नहरें बहती हैं। फिर जिसने इस दृढ़ वचन लिए जाने के बाद कुफ़्र किया, तो निश्चय वह जानबूझकर सत्य के मार्ग से अलग हो गया।
आयत 13
فَبِمَا نَقْضِهِم مِّيثَـٰقَهُمْ لَعَنَّـٰهُمْ وَجَعَلْنَا قُلُوبَهُمْ قَـٰسِيَةًۭ ۖ يُحَرِّفُونَ ٱلْكَلِمَ عَن مَّوَاضِعِهِۦ ۙ وَنَسُوا۟ حَظًّۭا مِّمَّا ذُكِّرُوا۟ بِهِۦ ۚ وَلَا تَزَالُ تَطَّلِعُ عَلَىٰ خَآئِنَةٍۢ مِّنْهُمْ إِلَّا قَلِيلًۭا مِّنْهُمْ ۖ فَٱعْفُ عَنْهُمْ وَٱصْفَحْ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ يُحِبُّ ٱلْمُحْسِنِينَ
فَبِمَا
तो बवजह
نَقْضِهِم
उनके तोड़ने के
مِّيثَـٰقَهُمْ
अपने पुख़्ता अहद को
لَعَنَّـٰهُمْ
लानत की हमने उन पर
وَجَعَلْنَا
और कर दिया हमने
قُلُوبَهُمْ
उनके दिलों को
قَـٰسِيَةًۭ ۖ
सख़्त
يُحَرِّفُونَ
वो तब्दील कर देते हैं
ٱلْكَلِمَ
अलफ़ाज़ को
عَن
from
مَّوَاضِعِهِۦ ۙ
उनकी जगहों से
وَنَسُوا۟
और वो भूल गए हैं
حَظًّۭا
बड़ा हिस्सा
مِّمَّا
उसमें से जो
ذُكِّرُوا۟
वो नसीहत किए गए थे
بِهِۦ ۚ
जिसकी
وَلَا
And not
تَزَالُ
और हमेशा
تَطَّلِعُ
आप इत्तिला पाते रहते हैं
عَلَىٰ
of
خَآئِنَةٍۢ
किसी ना किसी ख़यानत पर
مِّنْهُمْ
उनकी तरफ़ से
إِلَّا
मगर
قَلِيلًۭا
बहुत थोड़े
مِّنْهُمْ ۖ
उनमें से
فَٱعْفُ
पस माफ़ कर दीजिए
عَنْهُمْ
उन्हें
وَٱصْفَحْ ۚ
और दरगुज़र कीजिए
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
يُحِبُّ
वो मोहब्बत करता है
ٱلْمُحْسِنِينَ
एहसान करने वालों से
फिर उनके बार-बार अपने वचन को भंग कर देने के कारण हमने उनपर लानत की और उनके हृदय कठोर कर दिए। वे शब्दों को उनके स्थान से फेरकर कुछ का कुछ कर देते है और जिनके द्वारा उन्हें याद दिलाया गया था, उसका एक बड़ा भाग वे भुला बैठे। और तुम्हें उनके किसी न किसी विश्वासघात का बराबर पता चलता रहेगा। उनमें ऐसा न करनेवाले थोड़े लोग है, तो तुम उन्हें क्षमा कर दो और उन्हें छोड़ो। निश्चय ही अल्लाह को वे लोग प्रिय है जो उत्तमकर्मी है
तफ़्सीर:
उनके उस वचन का उल्लंघन करने के कारण, जो उनसे लिया गया था, हमने उन्हें अपनी दया से निष्कासित कर दिया, तथा उनके दिलों को कठोर और सख़्त बना दिया, जिस तक न तो कोई अच्छाई पहुँचती है और न ही उसे कोई नसीहत लाभ देती है। वे (अल्लाह के) शब्दों को उनके स्थानों से फेर देते हैं, इस प्रकार कि उनके शब्दों को बदल देते हैं और उनके अर्थों की व्याख्या इस तरह करते हैं जो उनकी इच्छाओं से मेल खाती है। तथा उन्होंने उनमें से कुछ बातों पर अमल करना छोड़ दिया, जिनका उन्हें उपदेश दिया गया था। (ऐ रसूल!) आपके पास उनकी अल्लाह तथा उसके मोमिन बंदों के साथ किसी न किसी विश्वासघात की ख़बर आती रहेगी। परंतु उनमें से कुछ लोगों को छोड़कर, जिन्होंने उस वचन को पूरा किया, जो उनसे लिया गया था। अतः आप उन्हें क्षमा कर दें, उनकी पकड़ न करें और उन्हें माफ़ कर दें। क्योंकि यह उपकार में से है और अल्लाह उपकार करने वालों से प्रेम करता है।
आयत 14
وَمِنَ ٱلَّذِينَ قَالُوٓا۟ إِنَّا نَصَـٰرَىٰٓ أَخَذْنَا مِيثَـٰقَهُمْ فَنَسُوا۟ حَظًّۭا مِّمَّا ذُكِّرُوا۟ بِهِۦ فَأَغْرَيْنَا بَيْنَهُمُ ٱلْعَدَاوَةَ وَٱلْبَغْضَآءَ إِلَىٰ يَوْمِ ٱلْقِيَـٰمَةِ ۚ وَسَوْفَ يُنَبِّئُهُمُ ٱللَّهُ بِمَا كَانُوا۟ يَصْنَعُونَ
وَمِنَ
And from
ٱلَّذِينَ
और उनमें से जिन्होंने
قَالُوٓا۟
कहा
إِنَّا
बेशक हम
نَصَـٰرَىٰٓ
नस्रानी हैं
أَخَذْنَا
लिया हमने
مِيثَـٰقَهُمْ
पुख़्ता अहद उनका
فَنَسُوا۟
तो वो भूल गए
حَظًّۭا
एक हिस्सा
مِّمَّا
उसमें से जो
ذُكِّرُوا۟
वो नसीहत किए गए थे
بِهِۦ
जिसकी
فَأَغْرَيْنَا
तो डाल दिया हमने
بَيْنَهُمُ
दर्मियान उनके
ٱلْعَدَاوَةَ
अदावत
وَٱلْبَغْضَآءَ
और बुग़्ज़ को
إِلَىٰ
till
يَوْمِ
(the) Day
ٱلْقِيَـٰمَةِ ۚ
क़यामत के दिन तक
وَسَوْفَ
और अनक़रीब
يُنَبِّئُهُمُ
ख़बर देगा उन्हें
ٱللَّهُ
अल्लाह
بِمَا
उसकी जो
كَانُوا۟
थे वो
يَصْنَعُونَ
वो करते/बनाते
और हमने उन लोगों से भी दृढ़ वचन लिया था, जिन्होंने कहा था कि हम नसारा (ईसाई) हैं, किन्तु जो कुछ उन्हें जिसके द्वारा याद कराया गया था उसका एक बड़ा भाग भुला बैठे। फिर हमने उनके बीच क़ियामत तक के लिए शत्रुता और द्वेष की आग भड़का दी, और अल्लाह जल्द उन्हें बता देगा, जो कुछ वे बनाते रहे थे
तफ़्सीर:
जिस तरह हमने यहूदियों से दृढ़ वचन लिया था, उसी तरह हमने उन लोगों से भी वचन लिया, जिन्होंने अपनी पवित्रता जताते हुए कहा कि वे ईसा अलैहिस्सलाम के मानने वाले हैं। फिर उन्होंने उसमें से एक भाग पर अमल करना छोड़ दिया, जिसका उन्हें उपदेश दिया गया था, जैसा कि यहूदियों में से उनके पूर्वजों ने किया था। तथा हमने उनके बीच क़ियामत के दिन तक के लिए शत्रुता तथा सख़्त घृणा डाल दी। अतः वे आपस में लड़ने वाले बन गए, वे एक-दूसरे को काफ़िर कहने लगे। शीघ्र ही अल्लाह उन्हें बताएगा जो कुछ वे किया करते थे और उन्हें उसका बदला देगा।
आयत 15
يَـٰٓأَهْلَ ٱلْكِتَـٰبِ قَدْ جَآءَكُمْ رَسُولُنَا يُبَيِّنُ لَكُمْ كَثِيرًۭا مِّمَّا كُنتُمْ تُخْفُونَ مِنَ ٱلْكِتَـٰبِ وَيَعْفُوا۟ عَن كَثِيرٍۢ ۚ قَدْ جَآءَكُم مِّنَ ٱللَّهِ نُورٌۭ وَكِتَـٰبٌۭ مُّبِينٌۭ
يَـٰٓأَهْلَ
O People
ٱلْكِتَـٰبِ
ऐ अहले किताब
قَدْ
तहक़ीक़
جَآءَكُمْ
आ गया तुम्हारे पास
رَسُولُنَا
रसूल हमारा
يُبَيِّنُ
जो वाज़ेह करता है
لَكُمْ
तुम्हारे लिए
كَثِيرًۭا
बकसरत
مِّمَّا
उसमें से जो
كُنتُمْ
थे तुम
تُخْفُونَ
तुम छुपाते
مِنَ
of
ٱلْكِتَـٰبِ
किताब में से
وَيَعْفُوا۟
और वो दरगुज़र करता है
عَن
of
كَثِيرٍۢ ۚ
बहुत सी (बातों) से
قَدْ
तहक़ीक़
جَآءَكُم
आ गया तुम्हारे पास
مِّنَ
from
ٱللَّهِ
अल्लाह की तरफ़ से
نُورٌۭ
एक नूर
وَكِتَـٰبٌۭ
और किताब
مُّبِينٌۭ
वाज़ेह
ऐ किताबवालों! हमारा रसूल तुम्हारे पास आ गया है। किताब की जो बातें तुम छिपाते थे, उसमें से बहुत-सी बातें वह तुम्हारे सामने खोल रहा है और बहुत-सी बातों को छोड़ देता है। तुम्हारे पास अल्लाह की ओर से प्रकाश और एक स्पष्ट किताब आ गई है,
तफ़्सीर:
ऐ किताब वालो! अर्थात् तौरात वाले यहूदियो और इंजील वाले ईसाइयो! तुम्हारे पास हमारे रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम आ चुके हैं, जो तुम्हारे लिए उनमें से बहुत-सी बातों को स्पष्ट रूप से बयान करते हैं, जो तुम अपने ऊपर उतरने वाली किताब में से छिपाया करते थे, तथा उसमें से बहुत कुछ नज़रअंदाज़ कर देते हैं जिसमें तुम्हें बेनक़ाब करने के सिवा कोई लाभ नहीं। क़ुरआन तुम्हारे पास अल्लाह की ओर से एक पुस्तक के रूप में आया है, और यह एक प्रकाश है जिससे प्रकाश प्राप्त किया जाता है, तथा हर उस चीज़ के लिए एक स्पष्ट पुस्तक है, जिसकी लोगों के अपने सांसारिक और आख़िरत के मामलों में आवश्यकता होती है।
आयत 16
يَهْدِى بِهِ ٱللَّهُ مَنِ ٱتَّبَعَ رِضْوَٰنَهُۥ سُبُلَ ٱلسَّلَـٰمِ وَيُخْرِجُهُم مِّنَ ٱلظُّلُمَـٰتِ إِلَى ٱلنُّورِ بِإِذْنِهِۦ وَيَهْدِيهِمْ إِلَىٰ صِرَٰطٍۢ مُّسْتَقِيمٍۢ
يَهْدِى
हिदायत देता है
بِهِ
साथ उसके
ٱللَّهُ
अल्लाह
مَنِ
उसको जो
ٱتَّبَعَ
पैरवी करे
رِضْوَٰنَهُۥ
उसकी रज़ामन्दी की
سُبُلَ
रास्तों की (तरफ़)
ٱلسَّلَـٰمِ
सलामती के
وَيُخْرِجُهُم
और वो निकालता है उन्हें
مِّنَ
from
ٱلظُّلُمَـٰتِ
अंधेरों से
إِلَى
to
ٱلنُّورِ
तरफ़ रोशनी के
بِإِذْنِهِۦ
अपने इज़्न से
وَيَهْدِيهِمْ
और वो हिदायत देता है उन्हें
إِلَىٰ
to
صِرَٰطٍۢ
तरफ़ रास्ते
مُّسْتَقِيمٍۢ
सीधे के
जिसके द्वारा अल्लाह उस व्यक्ति को जो उसकी प्रसन्नता का अनुगामी है, सलामती की राहें दिखा रहा है और अपनी अनुज्ञा से ऐसे लोगों को अँधेरों से निकालकर उजाले की ओर ला रहा है और उन्हें सीधे मार्ग पर चला रहा है
तफ़्सीर:
अल्लाह इस किताब के द्वारा उन लोगों को, जो उसे प्रसन्न करने वाली चीज़ों जैसे ईमान और अच्छे कर्म का अनुसरण करते हैं, अल्लाह की यातना से सुरक्षा के रास्तों का मार्गदर्शन करता है, जो कि जन्नत की ओर ले जाने वाले रास्ते हैं। तथा उन्हें अपनी अनुमति से कुफ़्र और अवज्ञा के अँधेरे से बाहर निकालकर ईमान और आज्ञाकारिता के प्रकाश में लाता है, और उन्हें सीधे रास्ते, इस्लाम के मार्ग पर चलने का सामर्थ्य प्रदान करता है।
आयत 17
لَّقَدْ كَفَرَ ٱلَّذِينَ قَالُوٓا۟ إِنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلْمَسِيحُ ٱبْنُ مَرْيَمَ ۚ قُلْ فَمَن يَمْلِكُ مِنَ ٱللَّهِ شَيْـًٔا إِنْ أَرَادَ أَن يُهْلِكَ ٱلْمَسِيحَ ٱبْنَ مَرْيَمَ وَأُمَّهُۥ وَمَن فِى ٱلْأَرْضِ جَمِيعًۭا ۗ وَلِلَّهِ مُلْكُ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا ۚ يَخْلُقُ مَا يَشَآءُ ۚ وَٱللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍۢ قَدِيرٌۭ
لَّقَدْ
अलबत्ता तहक़ीक़
كَفَرَ
कुफ़्र किया
ٱلَّذِينَ
जिन्होंने
قَالُوٓا۟
कहा
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
هُوَ
वो ही
ٱلْمَسِيحُ
(is) the Messiah
ٱبْنُ
son
مَرْيَمَ ۚ
मसीह इब्ने मरियम है
قُلْ
कह दीजिए
فَمَن
तो कौन
يَمْلِكُ
मालिक होगा
مِنَ
against
ٱللَّهِ
अल्लाह से
شَيْـًٔا
किसी चीज़ का
إِنْ
अगर
أَرَادَ
उसने इरादा किया
أَن
कि
يُهْلِكَ
वो हलाक कर दे
ٱلْمَسِيحَ
the Messiah
ٱبْنَ
son
مَرْيَمَ
मसीह इब्ने मरियम को
وَأُمَّهُۥ
और उसकी माँ को
وَمَن
और जो भी
فِى
(is) in
ٱلْأَرْضِ
ज़मीन में है
جَمِيعًۭا ۗ
सबके-सबको
وَلِلَّهِ
और अल्लाह ही के लिए है
مُلْكُ
बादशाहत
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों
وَٱلْأَرْضِ
और ज़मीन की
وَمَا
और जो कुछ
بَيْنَهُمَا ۚ
दर्मियान है उन दोनों के
يَخْلُقُ
वो पैदा करता है
مَا
जो
يَشَآءُ ۚ
वो चाहता है
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
عَلَىٰ
ऊपर
كُلِّ
हर
شَىْءٍۢ
चीज़ के
قَدِيرٌۭ
ख़ूब क़ादिर है
निश्चय ही उन लोगों ने इनकार किया, जिन्होंने कहा, "अल्लाह तो वही मरयम का बेटा मसीह है।" कहो, "अल्लाह के आगे किसका कुछ बस चल सकता है, यदि वह मरयम का पुत्र मसीह को और उसकी माँ (मरयम) को और समस्त धरतीवालो को विनष्ट करना चाहे? और अल्लाह ही के लिए है बादशाही आकाशों और धरती की ओर जो कुछ उनके मध्य है उसकी भी। वह जो चाहता है पैदा करता है। और अल्लाह को हर चीज़ की सामर्थ्य प्राप्त है।"
तफ़्सीर:
निश्चय ईसाइयों में से उन लोगों ने कुफ़्र किया, जिनका कहना है कि निःसंदेह अल्लाह मरयम का पुत्र मसीह ही है। (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : मरयम के बेटे ईसा मसीह को विनष्ट करने से, उनकी माँ (मरयम) को विनष्ट करने से तथा धरती पर उपस्थित सभी लोगों को विनष्ट करने से, अल्लाह को कौन रोक सकता है यदि वह उन्हें नष्ट करना चाहे?! यदि कोई भी उसे इससे रोकने में सक्षम नहीं है, तो यह इंगित करता है कि अल्लाह के अलावा कोई पूज्य नहीं है और यह कि : ईसा बिन मरयम, उनकी माता तथा शेष सृष्टि सब अल्लाह की रचना हैं। तथा आकाशों और धरती का राज्य और जो कुछ उनके बीच है उसका राज्य अल्लाह ही के लिए है। वह जो चाहता है, पैदा करता है और उसने जिन चीज़ों को पैदा करना चाहा है, उनमें से ईसा अलैहिस्सलाम भी हैं। चुनाँचे वह उसके बंदे और उसके रसूल हैं। तथा अल्लाह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।
आयत 18
وَقَالَتِ ٱلْيَهُودُ وَٱلنَّصَـٰرَىٰ نَحْنُ أَبْنَـٰٓؤُا۟ ٱللَّهِ وَأَحِبَّـٰٓؤُهُۥ ۚ قُلْ فَلِمَ يُعَذِّبُكُم بِذُنُوبِكُم ۖ بَلْ أَنتُم بَشَرٌۭ مِّمَّنْ خَلَقَ ۚ يَغْفِرُ لِمَن يَشَآءُ وَيُعَذِّبُ مَن يَشَآءُ ۚ وَلِلَّهِ مُلْكُ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا ۖ وَإِلَيْهِ ٱلْمَصِيرُ
وَقَالَتِ
और कहा
ٱلْيَهُودُ
यहूद
وَٱلنَّصَـٰرَىٰ
और नसारा ने
نَحْنُ
हम
أَبْنَـٰٓؤُا۟
बेटे हैं
ٱللَّهِ
अल्लाह के
وَأَحِبَّـٰٓؤُهُۥ ۚ
और उसके प्यारे हैं
قُلْ
कह दीजिए
فَلِمَ
फिर क्यों
يُعَذِّبُكُم
वो अज़ाब देता है तुम्हें
بِذُنُوبِكُم ۖ
बवजह तुम्हारे गुनाहों के
بَلْ
बल्कि
أَنتُم
तुम
بَشَرٌۭ
एक इन्सान हो
مِّمَّنْ
उनमें से जिन्हें
خَلَقَ ۚ
उसने पैदा किया
يَغْفِرُ
वो बख़्श देगा
لِمَن
जिसे
يَشَآءُ
वो चाहेगा
وَيُعَذِّبُ
और वो अज़ाब देगा
مَن
जिसे
يَشَآءُ ۚ
वो चाहेगा
وَلِلَّهِ
और अल्लाह ही के लिए है
مُلْكُ
बादशाहत
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों की
وَٱلْأَرْضِ
और ज़मीन की
وَمَا
और जो
بَيْنَهُمَا ۖ
दर्मियान है उन दोनों के
وَإِلَيْهِ
तरफ़ उसी के
ٱلْمَصِيرُ
लौटना है
यहूदी और ईसाई कहते है, "हम तो अल्लाह के बेटे और उसके चहेते है।" कहो, "फिर वह तुम्हें तुम्हारे गुनाहों पर दंड क्यों देता है? बात यह नहीं है, बल्कि तुम भी उसके पैदा किए हुए प्राणियों में से एक मनुष्य हो। वह जिसे चाहे क्षमा करे और जिसे चाहे दंड दे।" और अल्लाह ही के लिए है बादशाही आकाशों और धरती को और जो कुछ उनके बीच है वह भी, और जाना भी उसी की ओर है
तफ़्सीर:
यहूदी और ईसाई दोनों ने दावा किया कि वे अल्लाह के पुत्र और उसके प्रिय हैं। (ऐ रसूल!) आप उनके जवाब में कह दें : अल्लाह तुम्हें तुम्हारे द्वारा किए गए पापों के कारण दंड क्यों देता है?! यदि तुम उसके प्रियजन होते, जैसा कि तुमने दावा किया है, तो वह तुम्हें इस दुनिया में हत्या और विरूपण के साथ तथा परलोक में आग के द्वारा दंड न देता; क्योंकि वह जिसे प्यार करता है उसे यातना नहीं देता है। बल्कि तुम भी अन्य सभी मनुष्यों की तरह मनुष्य हो। जो उनमें से अच्छा कर्म करेगा, वह उसे जन्नत का प्रतिफल देगा, और जो कोई भी बुराई करेगा, वह उसे (जहन्नम की) आग से दंडित करेगा। अल्लाह जिसे चाहता है, अपनी कृपा से क्षमा करता है और वह जिसे चाहता है, अपने न्याय से दंडित करता है। तथा आकाशों और धरती का राज्य और जो कुछ उनके बीच है उसका राज्य अल्लाह ही के लिए है। और अकेले उसी की ओर लौटकर जाना है।
आयत 19
يَـٰٓأَهْلَ ٱلْكِتَـٰبِ قَدْ جَآءَكُمْ رَسُولُنَا يُبَيِّنُ لَكُمْ عَلَىٰ فَتْرَةٍۢ مِّنَ ٱلرُّسُلِ أَن تَقُولُوا۟ مَا جَآءَنَا مِنۢ بَشِيرٍۢ وَلَا نَذِيرٍۢ ۖ فَقَدْ جَآءَكُم بَشِيرٌۭ وَنَذِيرٌۭ ۗ وَٱللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍۢ قَدِيرٌۭ
يَـٰٓأَهْلَ
O People
ٱلْكِتَـٰبِ
ऐ अहले किताब
قَدْ
तहक़ीक़
جَآءَكُمْ
आ गया तुम्हारे पास
رَسُولُنَا
रसूल हमारा
يُبَيِّنُ
वो वाज़ेह करता है
لَكُمْ
तुम्हारे लिए
عَلَىٰ
[on]
فَتْرَةٍۢ
वक़्फ़े पर
مِّنَ
of
ٱلرُّسُلِ
रसूलों के
أَن
कि
تَقُولُوا۟
तुम कहो (ना)
مَا
नहीं
جَآءَنَا
आया हमारे पास
مِنۢ
any
بَشِيرٍۢ
कोई ख़ुशखबरी देने वाला
وَلَا
और ना
نَذِيرٍۢ ۖ
कोई डराने वाला
فَقَدْ
पस तहक़ीक़
جَآءَكُم
आ गया तुम्हारे पास
بَشِيرٌۭ
ख़ुशख़बरी देने वाला
وَنَذِيرٌۭ ۗ
और डराने वाला
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
عَلَىٰ
ऊपर
كُلِّ
हर
شَىْءٍۢ
चीज़ के
قَدِيرٌۭ
ख़ूब क़ुदरत रखने वाला है
ऐ किताबवालो! हमारा रसूल ऐसे समय तुम्हारे पास आया है और तुम्हारे लिए (हमारा आदेश) खोल-खोलकर बयान करता है, जबकि रसूलों के आने का सिलसिला एक मुद्दत से बन्द था, ताकि तुम यह न कह सको कि "हमारे पास कोई शुभ-समाचार देनेवाला और सचेत करनेवाला नहीं आया।" तो देखो! अब तुम्हारे पास शुभ-समाचार देनेवाला और सचेत करनेवाला आ गया है। अल्लाह को हर चीज़ की सामर्थ्य प्राप्त है
तफ़्सीर:
ऐ किताब वाले यहूदियो तथा ईसाइयो! तुम्हारे पास हमारे रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम आ चुके हैं। वह ऐसे समय में आए हैं जब रसूलों का आगमन एक समय से बंद था तथा उनके आगमन की सख़्त आवश्यकता थी। ताकि तुम क्षमाप्रार्थी बनकर यह न को : हमारे पास कोई रसूल नहीं आया, जो हमें अल्लाह के प्रतिफल की शुभ सूचना देता और हमें उसके दंड से सावधान करता। अतः (अब) तुम्हारे पास मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम आ चुके हैं, जो उसके प्रतिफल की शुभ सूचना देने वाले और उसके दंड से सावधान करने वाले हैं। तथा अल्लाह हर चीज़ की क्षमता रखने वाला है, उसे कोई चीज़ विवश नहीं कर सकती। और रसूलों को भेजना और उनके क्रम को मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर समाप्त कर देना उसकी क्षमता में से है।
आयत 20
وَإِذْ قَالَ مُوسَىٰ لِقَوْمِهِۦ يَـٰقَوْمِ ٱذْكُرُوا۟ نِعْمَةَ ٱللَّهِ عَلَيْكُمْ إِذْ جَعَلَ فِيكُمْ أَنۢبِيَآءَ وَجَعَلَكُم مُّلُوكًۭا وَءَاتَىٰكُم مَّا لَمْ يُؤْتِ أَحَدًۭا مِّنَ ٱلْعَـٰلَمِينَ
وَإِذْ
और जब
قَالَ
कहा
مُوسَىٰ
मूसा ने
لِقَوْمِهِۦ
अपनी क़ौम से
يَـٰقَوْمِ
ऐ मेरी क़ौम
ٱذْكُرُوا۟
याद करो
نِعْمَةَ
नेअमत
ٱللَّهِ
अल्लाह की
عَلَيْكُمْ
जो तुम पर (हुई)
إِذْ
जब
جَعَلَ
उसने बनाए
فِيكُمْ
तुम में
أَنۢبِيَآءَ
अम्बिया
وَجَعَلَكُم
और उसने बनाया तुम्हें
مُّلُوكًۭا
बादशाह
وَءَاتَىٰكُم
और उसने दिया तुम्हें
مَّا
वो जो
لَمْ
नहीं
يُؤْتِ
उसने दिया
أَحَدًۭا
किसी एक को
مِّنَ
from
ٱلْعَـٰلَمِينَ
तमाम जहान वालों में से
और याद करो जब मूसा ने अपनी क़ौम के लोगों से कहा था, "ऐ लोगों! अल्लाह की उस नेमत को याद करो जो उसने तुम्हें प्रदान की है। उसनें तुममें नबी पैदा किए और तुम्हें शासक बनाया और तुमको वह कुछ दिया जो संसार में किसी को नहीं दिया था
तफ़्सीर:
(ऐ रसूल!) उस समय को याद करो, जब मूसा अलैहिस्सलाम ने अपनी जाति बनी इसराईल से कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! तुम अपने दिलों से तथा अपनी ज़बानों से अपने ऊपर अल्लाह की उस नेमत को याद करो जब उसने तुममें से कुछ नबी बनाए, जो तुम्हें मार्गदर्शन की ओर बुलाते थे, तथा तुम्हें बादशाह बनाए कि तुम खुद के मामलों के मालिक हो गए जबकि तुम दास और ग़ुलाम हुआ करते थे, तथा उसने तुम्हें अपनी नेमतों में से वह प्रदान किया, जो उसने तुम्हारे समय में दुनिया वालों में से किसी को भी नहीं दिया।
आयत 21
يَـٰقَوْمِ ٱدْخُلُوا۟ ٱلْأَرْضَ ٱلْمُقَدَّسَةَ ٱلَّتِى كَتَبَ ٱللَّهُ لَكُمْ وَلَا تَرْتَدُّوا۟ عَلَىٰٓ أَدْبَارِكُمْ فَتَنقَلِبُوا۟ خَـٰسِرِينَ
يَـٰقَوْمِ
ऐ मेरी क़ौम
ٱدْخُلُوا۟
दाख़िल हो जाओ
ٱلْأَرْضَ
अरदे
ٱلْمُقَدَّسَةَ
मुक़द्दस में
ٱلَّتِى
वो जो
كَتَبَ
लिख दी
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
لَكُمْ
तुम्हारे लिए
وَلَا
और ना
تَرْتَدُّوا۟
तुम फिर जाना
عَلَىٰٓ
on
أَدْبَارِكُمْ
अपनी पुश्तों पर
فَتَنقَلِبُوا۟
वरना तुम लौट जाओगे
خَـٰسِرِينَ
ख़सारा पाने वाले होकर
"ऐ मेरे लोगो! इस पवित्र भूमि में प्रवेश करो, जो अल्लाह ने तुम्हारे लिए लिख दी है। और पीछे न हटो, अन्यथा, घाटे में पड़ जाओगे।"
तफ़्सीर:
मूसा अलैहिस्सलाम ने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! उस पवित्र भूमि (यानी बैतुल मक़दिस तथा उसके आसपास के क्षेत्र) में प्रवेश करो, जिसमें प्रवेश करने और वहाँ के काफ़िरों से लड़ाई करने का अल्लाह ने तुमसे वादा किया था, तथा शक्तिशाली लोगों के सामने हार मत मानो, अन्यथा तुम्हारा परिणाम इस दुनिया और आख़िरत में घाटा होगा।
आयत 22
قَالُوا۟ يَـٰمُوسَىٰٓ إِنَّ فِيهَا قَوْمًۭا جَبَّارِينَ وَإِنَّا لَن نَّدْخُلَهَا حَتَّىٰ يَخْرُجُوا۟ مِنْهَا فَإِن يَخْرُجُوا۟ مِنْهَا فَإِنَّا دَٰخِلُونَ
قَالُوا۟
उन्होंने कहा
يَـٰمُوسَىٰٓ
ऐ मूसा
إِنَّ
बेशक
فِيهَا
उसमें
قَوْمًۭا
एक क़ौम है
جَبَّارِينَ
बड़े ज़बरदस्त लोगों की
وَإِنَّا
और बेशक हम
لَن
हरगिज़ ना
نَّدْخُلَهَا
हम दाख़िल होंगे उसमें
حَتَّىٰ
यहाँ तक कि
يَخْرُجُوا۟
वो निकल जाऐं
مِنْهَا
उससे
فَإِن
फिर अगर
يَخْرُجُوا۟
वो निकल जाऐं
مِنْهَا
उससे
فَإِنَّا
तो बेशक हम
دَٰخِلُونَ
दाख़िल होने वाले हैं
उन्होंने कहा, "ऐ मूसा! उसमें तो बड़े शक्तिशाली लोग रहते है। हम तो वहाँ कदापि नहीं जा सकते, जब तक कि वे वहाँ से निकल नहीं जाते। हाँ, यदि वे वहाँ से निकल जाएँ, तो हम अवश्य प्रविष्ट हो जाएँगे।"
तफ़्सीर:
उनकी जाति के लोगों ने उनसे कहा : ऐ मूसा! पवित्र भूमि में ऐसे लोग हैं, जो बड़े बली और शक्तिशाली हैं। और यह हमें उसमें प्रवेश करने से रोकता है। इसलिए जब तक वे उसमें हैं, तब तक हम उसमें हरगिज़ प्रवेश नहीं करेंगे; क्योंकि हमारे पास उनसे लड़ने की कोई शक्ति और क्षमता नहीं है। अतः यदि वे उससे निकल जाएँ, तो हम उसमें अवश्य प्रवेश करेंगे।
आयत 23
قَالَ رَجُلَانِ مِنَ ٱلَّذِينَ يَخَافُونَ أَنْعَمَ ٱللَّهُ عَلَيْهِمَا ٱدْخُلُوا۟ عَلَيْهِمُ ٱلْبَابَ فَإِذَا دَخَلْتُمُوهُ فَإِنَّكُمْ غَـٰلِبُونَ ۚ وَعَلَى ٱللَّهِ فَتَوَكَّلُوٓا۟ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ
قَالَ
कहा
رَجُلَانِ
दो आदमियों ने
مِنَ
from
ٱلَّذِينَ
उसमें से जो
يَخَافُونَ
डरते थे
أَنْعَمَ
इनाम किया था
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
عَلَيْهِمَا
उन दोनों पर
ٱدْخُلُوا۟
दाख़िल हो जाओ
عَلَيْهِمُ
उन पर
ٱلْبَابَ
दरवाज़े से
فَإِذَا
फिर जब
دَخَلْتُمُوهُ
तुम दाख़िल हो जाओगे उसमें
فَإِنَّكُمْ
तो बेशक तुम
غَـٰلِبُونَ ۚ
ग़ालिब आने वाले हो
وَعَلَى
And upon
ٱللَّهِ
और अल्लाह ही पर
فَتَوَكَّلُوٓا۟
पस तुम तवक्कल करो
إِن
अगर
كُنتُم
हो तुम
مُّؤْمِنِينَ
ईमान लाने वाले
उन डरनेवालों में से ही दो व्यक्ति ऐसे भी थे जिनपर अल्लाह का अनुग्रह था। उन्होंने कहा, "उन लोगों के मुक़ाबले में दरवाज़े से प्रविष्ट हो जाओ। जब तुम उसमें प्रविष्टि हो जाओगे, तो तुम ही प्रभावी होगे। अल्लाह पर भरोसा रखो, यदि तुम ईमानवाले हो।"
तफ़्सीर:
मूसा अलैहिस्सलाम के साथियों में से दो व्यक्तियों ने, जो उन लोगों में से थे जो अल्लाह का भय रखते थे और उसकी यातना से डरते थे, अल्लाह ने उन दोनों को अपनी आज्ञाकारिता का सामर्थ्य प्रदान किया था, उन दोनों ने अपनी जाति के लोगों से मूसा अलैहिस्सलाम की आज्ञा का पालन करने का आग्रह करते हुए कहा : तुम शक्तिशाली लोगों पर शहर के दरवाज़े में प्रवेश कर जाओ। यदि तुम दरवाज़े में प्रवेश कर गए, तो तुम - अल्लाह की अनुमति से - उन्हें पराजित कर दोगे, अल्लाह की इस सुन्नत (नियम) पर भरोसा करते हुए कि अल्लाह पर ईमान और भौतिक साधनों को तैयार करने जैसे कारणों को अपनाने पर वह विजय प्रदान करता है। तथा यदि तुम सच्चे मोमिन हो, तो केवल अल्लाह ही पर भरोसा करो। क्योंकि ईमान आवश्यक रूप से अल्लाह ही पर भरोसा करने की अपेक्षा करता है।
आयत 24
قَالُوا۟ يَـٰمُوسَىٰٓ إِنَّا لَن نَّدْخُلَهَآ أَبَدًۭا مَّا دَامُوا۟ فِيهَا ۖ فَٱذْهَبْ أَنتَ وَرَبُّكَ فَقَـٰتِلَآ إِنَّا هَـٰهُنَا قَـٰعِدُونَ
قَالُوا۟
उन्होंने कहा
يَـٰمُوسَىٰٓ
ऐ मूसा
إِنَّا
बेशक हम
لَن
हरगिज़ नहीं
نَّدْخُلَهَآ
हम दाख़िल होंगे उसमें
أَبَدًۭا
कभी भी
مَّا
for
دَامُوا۟
जब तक वो रहेंगे
فِيهَا ۖ
उसमें
فَٱذْهَبْ
पस जाओ
أَنتَ
तुम
وَرَبُّكَ
और रब तुम्हारा
فَقَـٰتِلَآ
पस तुम दोनों जंग करो
إِنَّا
बेशक हम
هَـٰهُنَا
यहीं
قَـٰعِدُونَ
बैठने वाले हैं
उन्होंने कहा, "ऐ मूसा! जब तक वे लोग वहाँ है, हम तो कदापि नहीं जाएँगे। ऐसा ही है तो जाओ तुम और तुम्हारा रब, और दोनों लड़ो। हम तो यहीं बैठे रहेंगे।"
तफ़्सीर:
बनी इसराईल में से मूसा की जाति के लोगों ने अपने नबी मूसा अलैहिस्सलाम के आदेश का उल्लंघन करने पर अडिग रहते हुए कहा : हम शहर में हरगिज़ प्रवेश नहीं करेंगे जब तक कि उसमें शक्तिशाली लोग मौजूद हैं। इसलिए ऐ मूसा! आप अपने पालनहार के साथ जाएँ और उन शक्तिशाली लोगों से लड़ें। जहाँ तक हमारी बात है, तो हम अपने स्थान पर रहेंगे, आपके साथ युद्ध करने के लिए नहीं निकलेंगे।
आयत 25
قَالَ رَبِّ إِنِّى لَآ أَمْلِكُ إِلَّا نَفْسِى وَأَخِى ۖ فَٱفْرُقْ بَيْنَنَا وَبَيْنَ ٱلْقَوْمِ ٱلْفَـٰسِقِينَ
قَالَ
कहा
رَبِّ
ऐ मेरे रब
إِنِّى
बेशक मैं
لَآ
(do) not
أَمْلِكُ
नहीं मैं मालिक
إِلَّا
मगर
نَفْسِى
अपने नफ़्स का
وَأَخِى ۖ
और अपने भाई का
فَٱفْرُقْ
पस जुदाई डाल दे
بَيْنَنَا
दर्मियान हमारे
وَبَيْنَ
और दर्मियान
ٱلْقَوْمِ
उन लोगों के
ٱلْفَـٰسِقِينَ
जो फ़ासिक़ हैं
उसने कहा, "मेरे रब! मेरा स्वयं अपने और अपने भाई के अतिरिक्त किसी पर अधिकार नहीं है। अतः तू हमारे और इन अवज्ञाकारी लोगों के बीच अलगाव पैदा कर दे।"
तफ़्सीर:
मूसा अलैहिस्सलाम ने अपने पालनहार से कहा : ऐ मेरे पालनहार! मेरा स्वयं अपने और अपने भाई हारून के अतिरिक्त किसी पर कोई अधिकार नहीं है। अतः तू हमारे तथा ऐसे लोगों के बीच अलगाव कर दे, जो तेरे तथा तेरे रसूल के आज्ञापालन से निकल जाने वाले हैं।
आयत 26
قَالَ فَإِنَّهَا مُحَرَّمَةٌ عَلَيْهِمْ ۛ أَرْبَعِينَ سَنَةًۭ ۛ يَتِيهُونَ فِى ٱلْأَرْضِ ۚ فَلَا تَأْسَ عَلَى ٱلْقَوْمِ ٱلْفَـٰسِقِينَ
قَالَ
फ़रमाया
فَإِنَّهَا
पस बेशक वो
مُحَرَّمَةٌ
हराम कर दी गई
عَلَيْهِمْ ۛ
उन पर
أَرْبَعِينَ
चालीस
سَنَةًۭ ۛ
साल
يَتِيهُونَ
वो भटकते फिरेंगे
فِى
in
ٱلْأَرْضِ ۚ
ज़मीन में
فَلَا
पस ना
تَأْسَ
तुम अफ़सोस करो
عَلَى
over
ٱلْقَوْمِ
उन लोगों पर
ٱلْفَـٰسِقِينَ
जो फ़ासिक़ हैं
कहा, "अच्छा तो अब यह भूमि चालीस वर्ष कर इनके लिए वर्जित है। ये धरती में मारे-मारे फिरेंगे तो तुम इन अवज्ञाकारी लोगों के प्रति शोक न करो"
तफ़्सीर:
अल्लाह ने अपने नबी मूसा अलैहिस्सलाम से कहा : अल्लाह ने बनी इसराईल पर चालीस साल तक पवित्र भूमि में प्रवेश करना हराम कर दिया है। वे इस अवधि के दौरान रेगिस्तान में भ्रमित भटकते रहेंगे, वे निर्देशित नहीं होंगे। अतः (ऐ मूसा!) आप अल्लाह की अवज्ञा करने वालों पर अफ़सोस न करें। क्योंकि जो दंड उन्हें भुगतना पड़ रहा है, वह उनकी अवज्ञा और पापों के कारण है।
आयत 27
۞ وَٱتْلُ عَلَيْهِمْ نَبَأَ ٱبْنَىْ ءَادَمَ بِٱلْحَقِّ إِذْ قَرَّبَا قُرْبَانًۭا فَتُقُبِّلَ مِنْ أَحَدِهِمَا وَلَمْ يُتَقَبَّلْ مِنَ ٱلْـَٔاخَرِ قَالَ لَأَقْتُلَنَّكَ ۖ قَالَ إِنَّمَا يَتَقَبَّلُ ٱللَّهُ مِنَ ٱلْمُتَّقِينَ
۞ وَٱتْلُ
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عَلَيْهِمْ
उन पर
نَبَأَ
ख़बर
ٱبْنَىْ
दो बेटों की
ءَادَمَ
आदम के
بِٱلْحَقِّ
साथ हक़ के
إِذْ
जब
قَرَّبَا
उन दोनों ने क़ुर्बानी की
قُرْبَانًۭا
क़ुर्बानी करना
فَتُقُبِّلَ
तो वो क़ुबूल कर ली गई
مِنْ
from
أَحَدِهِمَا
उन दोनों में से एक से
وَلَمْ
और ना
يُتَقَبَّلْ
वो क़ुबूल की गई
مِنَ
from
ٱلْـَٔاخَرِ
दूसरे से
قَالَ
कहा
لَأَقْتُلَنَّكَ ۖ
अलबत्ता मैं ज़रूर क़त्ल करुँगा तुझे
قَالَ
कहा
إِنَّمَا
बेशक
يَتَقَبَّلُ
क़ुबूल करता है
ٱللَّهُ
अल्लाह
مِنَ
from
ٱلْمُتَّقِينَ
मुत्तक़ी लोगों से
और इन्हें आदम के दो बेटों का सच्चा वृतान्त सुना दो। जब दोनों ने क़ुरबानी की, तो उनमें से एक की क़ुरबानी स्वीकृत हुई और दूसरे की स्वीकृत न हुई। उसने कहा, "मै तुझे अवश्य मार डालूँगा।" दूसरे न कहा, "अल्लाह तो उन्हीं की (क़ुरबानी) स्वीकृत करता है, जो डर रखनेवाले है।
तफ़्सीर:
तथा (ऐ रसूल!) इन ईर्ष्यालु, अत्याचारी यहूदियों को आदम के दोनों बेटों : क़ाबील और हाबील की कहानी, संदेह रहित सच्चाई के साथ सुना दें। जब उन दोनों ने अल्लाह की निकटता प्राप्त करने के लिए एक क़ुर्बानी पेश की। अल्लाह ने हाबील की पेश की हुई क़ुर्बानी स्वीकार कर ली, क्योंकि वह तक़्वा (घर्मपरायणता) वालों में से था, जबकि क़ाबील की क़ुर्बानी को स्वीकार नहीं किया, क्योंकि वह तक़वा वालों में से नहीं था। क़ाबील ने ईर्ष्या के कारण हाबील की क़ुर्बानी की स्वीकृति की निंदा की और कहा : ऐ हाबील! मैं तुझे मार डालूँगा। तो हाबील ने कहा : अल्लाह केवल उसकी क़ुर्बानी स्वीकार करता है, जो उसके आदेशों का पालन करते हुए तथा उसके निषेधों से बचते हुए, उससे डरने वाला है।
आयत 28
لَئِنۢ بَسَطتَ إِلَىَّ يَدَكَ لِتَقْتُلَنِى مَآ أَنَا۠ بِبَاسِطٍۢ يَدِىَ إِلَيْكَ لِأَقْتُلَكَ ۖ إِنِّىٓ أَخَافُ ٱللَّهَ رَبَّ ٱلْعَـٰلَمِينَ
لَئِنۢ
अलबत्ता अगर
بَسَطتَ
बढ़ाया तूने
إِلَىَّ
मेरी तरफ़
يَدَكَ
हाथ अपना
لِتَقْتُلَنِى
ताकि तू क़त्ल कर दे मुझे
مَآ
नहीं
أَنَا۠
मैं
بِبَاسِطٍۢ
बढ़ाने वाला
يَدِىَ
हाथ अपना
إِلَيْكَ
तरफ़ तेरे
لِأَقْتُلَكَ ۖ
ताकि मैं क़त्ल कर दूँ तुझे
إِنِّىٓ
बेशक मैं
أَخَافُ
मैं डरता हूँ
ٱللَّهَ
अल्लाह से
رَبَّ
जो रब है
ٱلْعَـٰلَمِينَ
तमाम जहानों का
"यदि तू मेरी हत्या करने के लिए मेरी ओर हाथ बढ़ाएगा तो मैं तेरी हत्या करने के लिए तेरी ओर अपना हाथ नहीं बढ़ाऊँगा। मैं तो अल्लाह से डरता हूँ, जो सारे संसार का रब है
तफ़्सीर:
यदि तूने मुझे मार डालने की नीयत से मेरी ओर अपना हाथ बढ़ाया, तो जो कुछ तूने किया है, मैं तुझे उसका बदला देने वाला नहीं हूँ। यह मेरी ओर से कायरता नहीं है, लेकिन मैं सृष्टि के पालनहार अल्लाह से डरता हूँ।
आयत 29
إِنِّىٓ أُرِيدُ أَن تَبُوٓأَ بِإِثْمِى وَإِثْمِكَ فَتَكُونَ مِنْ أَصْحَـٰبِ ٱلنَّارِ ۚ وَذَٰلِكَ جَزَٰٓؤُا۟ ٱلظَّـٰلِمِينَ
إِنِّىٓ
बेशक मैं
أُرِيدُ
मैं चाहता हूँ
أَن
कि
تَبُوٓأَ
तू पलटे
بِإِثْمِى
साथ मेरे गुनाह के
وَإِثْمِكَ
और अपने गुनाह के
فَتَكُونَ
फिर तू हो जाएगा
مِنْ
among
أَصْحَـٰبِ
साथियों में से
ٱلنَّارِ ۚ
आग के
وَذَٰلِكَ
और ये
جَزَٰٓؤُا۟
बदला है
ٱلظَّـٰلِمِينَ
ज़ालिमों का
"मैं तो चाहता हूँ कि मेरा गुनाह और अपना गुनाह तू ही अपने सिर ले ले, फिर आग (जहन्नम) में पड़नेवालों में से एक हो जाए, और वही अत्याचारियों का बदला है।"
तफ़्सीर:
फिर उसने उसे डराते हुए कहा : मैं चाहता हूँ कि तू अपने पिछले पापों के साथ-साथ मेरी अवैध और आक्रामकता में हत्या करने के पाप के साथ लौटे। फिर तू उन आग (जहन्नम) वालों में से हो जाए, जो क़ियामत के दिन उसमें प्रवेश करेंगे। यही अत्याचारियों का बदला है, और मैं तेरी हत्या करने के पाप के साथ लौटकर उन लोगों में से नहीं होना चाहता।
आयत 30
فَطَوَّعَتْ لَهُۥ نَفْسُهُۥ قَتْلَ أَخِيهِ فَقَتَلَهُۥ فَأَصْبَحَ مِنَ ٱلْخَـٰسِرِينَ
فَطَوَّعَتْ
तो आसान कर दिया
لَهُۥ
उसके लिए
نَفْسُهُۥ
उसके नफ़्स ने
قَتْلَ
क़त्ल करना
أَخِيهِ
अपने भाई का
فَقَتَلَهُۥ
तो उसने क़त्ल कर दिया उसे
فَأَصْبَحَ
पस वो हो गया
مِنَ
of
ٱلْخَـٰسِرِينَ
ख़सारा पाने वालों में से
अन्ततः उसके जी ने उस अपने भाई की हत्या के लिए उद्यत कर दिया, तो उसने उसकी हत्या कर डाली और घाटे में पड़ गया
तफ़्सीर:
क़ाबील के लिए उसके 'नफ़्से अम्मारा' (बुराई का आदेश देने वाली आत्मा) ने अपने भाई की अन्यायपूर्ण तरीक़े से हत्या को सुसज्जित कर दिया, और उसने उसकी हत्या कर दी। अतः वह इसके कारण उन लोगों में से हो गया, जिनके अंश दुनिया तथा आख़िरत दोनों स्थानों में कम हो गए।
आयत 31
فَبَعَثَ ٱللَّهُ غُرَابًۭا يَبْحَثُ فِى ٱلْأَرْضِ لِيُرِيَهُۥ كَيْفَ يُوَٰرِى سَوْءَةَ أَخِيهِ ۚ قَالَ يَـٰوَيْلَتَىٰٓ أَعَجَزْتُ أَنْ أَكُونَ مِثْلَ هَـٰذَا ٱلْغُرَابِ فَأُوَٰرِىَ سَوْءَةَ أَخِى ۖ فَأَصْبَحَ مِنَ ٱلنَّـٰدِمِينَ
فَبَعَثَ
फिर भेजा
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
غُرَابًۭا
एक कौआ
يَبْحَثُ
वो खोदता था
فِى
in
ٱلْأَرْضِ
ज़मीन में
لِيُرِيَهُۥ
ताकि वो दिखाए उसे
كَيْفَ
किस तरह
يُوَٰرِى
वो छुपाए
سَوْءَةَ
लाश
أَخِيهِ ۚ
अपने भाई की
قَالَ
उसने कहा
يَـٰوَيْلَتَىٰٓ
हाय अफ़सोस मुझ पर
أَعَجَزْتُ
क्या आजिज़ हुआ मैं
أَنْ
इससे (भी) कि
أَكُونَ
मैं हो जाऊँ
مِثْلَ
मानिन्द
هَـٰذَا
इस
ٱلْغُرَابِ
कौए के
فَأُوَٰرِىَ
कि मैं छुपाऊँ
سَوْءَةَ
लाश
أَخِى ۖ
अपने भाई की
فَأَصْبَحَ
तो वो हो गया
مِنَ
of
ٱلنَّـٰدِمِينَ
नादिम होने वालों में से
तब अल्लाह ने एक कौआ भेजा जो भूमि कुरेदने लगा, ताकि उसे दिखा दे कि वह अपने भाई के शव को कैसे छिपाए। कहने लगा, "अफ़सोस मुझ पर! क्या मैं इस कौए जैसा भी न हो सका कि अपने भाई का शव छिपा देता?" फिर वह लज्जित हुआ
तफ़्सीर:
फिर अल्लाह ने एक कौआ भेजा, जो उसके सामने भूमि को कुरेदता था, ताकि उसमें एक मरे हुए कौए को गाड़कर, उसे यह सिखाए कि वह अपने भाई के शव को कैसे छिपाए। उस समय अपने भाई के हत्यारे ने कहा : हाय मेरा विनाश! क्या मैं इस कौए जैसा भी न हो सका, जिसने दूसरे मरे हुए कौवे को दफन कर दिया, कि मैं अपने भाई के शव को छिपा सकूँ, फिर उसने उस समय उसे दफ़न किया; इस तरह वह पछताने वालों में से हो गया।
आयत 32
مِنْ أَجْلِ ذَٰلِكَ كَتَبْنَا عَلَىٰ بَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ أَنَّهُۥ مَن قَتَلَ نَفْسًۢا بِغَيْرِ نَفْسٍ أَوْ فَسَادٍۢ فِى ٱلْأَرْضِ فَكَأَنَّمَا قَتَلَ ٱلنَّاسَ جَمِيعًۭا وَمَنْ أَحْيَاهَا فَكَأَنَّمَآ أَحْيَا ٱلنَّاسَ جَمِيعًۭا ۚ وَلَقَدْ جَآءَتْهُمْ رُسُلُنَا بِٱلْبَيِّنَـٰتِ ثُمَّ إِنَّ كَثِيرًۭا مِّنْهُم بَعْدَ ذَٰلِكَ فِى ٱلْأَرْضِ لَمُسْرِفُونَ
مِنْ
From
أَجْلِ
बवजह
ذَٰلِكَ
उसके
كَتَبْنَا
लिख दिया हमने
عَلَىٰ
on
بَنِىٓ
(the) Children
إِسْرَٰٓءِيلَ
बनी इस्राईल पर
أَنَّهُۥ
कि बेशक वो
مَن
जिसने
قَتَلَ
क़त्ल किया
نَفْسًۢا
किसी जान को
بِغَيْرِ
बग़ैर
نَفْسٍ
किसी जान के
أَوْ
या
فَسَادٍۢ
फ़साद करने के
فِى
in
ٱلْأَرْضِ
ज़मीन में
فَكَأَنَّمَا
तो गोया कि
قَتَلَ
उसने क़त्ल कर दिया
ٱلنَّاسَ
लोगों को
جَمِيعًۭا
सबके-सबको
وَمَنْ
और जिसने
أَحْيَاهَا
ज़िन्दगी बचाई उसकी
فَكَأَنَّمَآ
तो गोया कि
أَحْيَا
उसने ज़िन्दा किया
ٱلنَّاسَ
लोगों को
جَمِيعًۭا ۚ
सबके-सबको
وَلَقَدْ
और अलबत्ता तहक़ीक़
جَآءَتْهُمْ
आए उनके पास
رُسُلُنَا
रसूल हमारे
بِٱلْبَيِّنَـٰتِ
साथ वाज़ेह निशानियों के
ثُمَّ
फिर
إِنَّ
बेशक
كَثِيرًۭا
बहुत से
مِّنْهُم
उनमें से
بَعْدَ
बाद
ذَٰلِكَ
उसके
فِى
in
ٱلْأَرْضِ
ज़मीन में
لَمُسْرِفُونَ
अलबत्ता ज़्यादती करने वाले हैं
इसी कारण हमने इसराईल का सन्तान के लिए लिख दिया था कि जिसने किसी व्यक्ति को किसी के ख़ून का बदला लेने या धरती में फ़साद फैलाने के अतिरिक्त किसी और कारण से मार डाला तो मानो उसने सारे ही इनसानों की हत्या कर डाली। और जिसने उसे जीवन प्रदान किया, उसने मानो सारे इनसानों को जीवन दान किया। उसने पास हमारे रसूल स्पष्टि प्रमाण ला चुके हैं, फिर भी उनमें बहुत-से लोग धरती में ज़्यादतियाँ करनेवाले ही हैं
तफ़्सीर:
क़ाबील द्वारा अपने भाई की हत्या के कारण, हमने बनी इसराईल को सूचित किया कि जिसने किसी व्यक्ति की क़िसास (खून के बदले खून) या कुफ़्र अथवा विद्रोह द्वारा धरती में बिगाड़ पैदा करने के कारण के बिना हत्या कर दी, तो मानो उसने सभी लोगों की हत्या कर दी, क्योंकि उसके निकट निर्दोष और अपराधी के बीच कोई अंतर नहीं है। तथा जिसने किसी प्राणी की, जिसे अल्लाह ने हराम ठहराया है, यह मानते हुए हत्या करने से परहेज़ किया कि उसकी हत्या करना निषिद्ध (हराम) है और उसकी हत्या नहीं की; तो मानो उसने सभी लोगों को जीवन प्रदान किया; क्योंकि उसके इस व्यवहार में सभी लोगों की सुरक्षा है। निःसंदेह हमारे रसूल बनी इसराईल के पास स्पष्ट प्रमाण और खुली निशानियाँ लेकर आए, लेकिन इसके बावजूद उनमें से बहुत से लोग पाप करके तथा अपने रसूलों का विरोध करके अल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन करने वाले हैं।
आयत 33
إِنَّمَا جَزَٰٓؤُا۟ ٱلَّذِينَ يُحَارِبُونَ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥ وَيَسْعَوْنَ فِى ٱلْأَرْضِ فَسَادًا أَن يُقَتَّلُوٓا۟ أَوْ يُصَلَّبُوٓا۟ أَوْ تُقَطَّعَ أَيْدِيهِمْ وَأَرْجُلُهُم مِّنْ خِلَـٰفٍ أَوْ يُنفَوْا۟ مِنَ ٱلْأَرْضِ ۚ ذَٰلِكَ لَهُمْ خِزْىٌۭ فِى ٱلدُّنْيَا ۖ وَلَهُمْ فِى ٱلْـَٔاخِرَةِ عَذَابٌ عَظِيمٌ
إِنَّمَا
बेशक
جَزَٰٓؤُا۟
बदला
ٱلَّذِينَ
उनका जो
يُحَارِبُونَ
जंग करते हैं
ٱللَّهَ
अल्लाह से
وَرَسُولَهُۥ
और उसके रसूल से
وَيَسْعَوْنَ
और वो दौड़ धूप करते हैं
فِى
in
ٱلْأَرْضِ
ज़मीन में
فَسَادًا
फ़साद के लिए
أَن
ये कि
يُقَتَّلُوٓا۟
वो क़त्ल कर दिए जाऐं
أَوْ
या
يُصَلَّبُوٓا۟
वो सूली चढ़ा दिए जाऐं
أَوْ
or
تُقَطَّعَ
या काट दिए जाऐं
أَيْدِيهِمْ
हाथ उनके
وَأَرْجُلُهُم
और पाँव उनके
مِّنْ
of
خِلَـٰفٍ
मुख़ालिफ़ सिम्त से
أَوْ
or
يُنفَوْا۟
या वो निकाल दिए जाऐं
مِنَ
from
ٱلْأَرْضِ ۚ
उस ज़मीन से
ذَٰلِكَ
ये
لَهُمْ
उनके लिए
خِزْىٌۭ
रुस्वाई है
فِى
in
ٱلدُّنْيَا ۖ
दुनिया में
وَلَهُمْ
और उनके लिए
فِى
in
ٱلْـَٔاخِرَةِ
आख़िरत में
عَذَابٌ
अज़ाब है
عَظِيمٌ
बहुत बड़ा
जो लोग अल्लाह और उसके रसूल से लड़ते है और धरती के लिए बिगाड़ पैदा करने के लिए दौड़-धूप करते है, उनका बदला तो बस यही है कि बुरी तरह से क़त्ल किए जाए या सूली पर चढ़ाए जाएँ या उनके हाथ-पाँव विपरीत दिशाओं में काट डाले जाएँ या उन्हें देश से निष्कासित कर दिया जाए। यह अपमान और तिरस्कार उनके लिए दुनिया में है और आख़िरत में उनके लिए बड़ी यातना है
तफ़्सीर:
जो लोग अल्लाह और उसके रसूल से युद्ध करते हैं, और उनसे खुली दुश्मनी करते हुए हत्या, लूटमार और डकैती के द्वारा धरती में उत्पात मचाते हैं, उनकी सज़ा यही है कि उन्हें सूली पर चढ़ाए बिना क़त्ल कर दिया जाए, या उन्हें सूली पर चढ़ाकर क़त्ल कर दिया जाए, या उनका दायाँ हाथ और बायाँ पैर काट दिया जाए, यदि वह फिर से ऐसी हरकत करे, तो उसका बायाँ हाथ और दायाँ पैर काट दिया जाए, या उन्हें देश से निकाल दिया जाए। यह सज़ा उनके लिए इस दुनिया में एक अपमान है, तथा आख़िरत में उनके लिए बहुत बड़ी यातना है।
आयत 34
إِلَّا ٱلَّذِينَ تَابُوا۟ مِن قَبْلِ أَن تَقْدِرُوا۟ عَلَيْهِمْ ۖ فَٱعْلَمُوٓا۟ أَنَّ ٱللَّهَ غَفُورٌۭ رَّحِيمٌۭ
إِلَّا
सिवाय
ٱلَّذِينَ
उन लोगों के जो
تَابُوا۟
तौबा करें
مِن
from
قَبْلِ
इससे क़ब्ल
أَن
कि
تَقْدِرُوا۟
तुम क़ादिर हो जाओ
عَلَيْهِمْ ۖ
उन पर
فَٱعْلَمُوٓا۟
तो जान लो
أَنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
غَفُورٌۭ
बहुत बख़्शने वाला है
رَّحِيمٌۭ
निहायत रहम करने वाला है
किन्तु जो लोग, इससे पहले कि तुम्हें उनपर अधिकार प्राप्त हो, पलट आएँ (अर्थात तौबा कर लें) तो ऐसी दशा में तुम्हें मालूम होना चाहिए कि अल्लाह बड़ा क्षमाशील, दयावान है
तफ़्सीर:
परंतु (ऐ अधिकार वालो!) इन लड़ाई करने वालों में से जो लोग तुम्हारी पकड़ में आने से पहले तौबा कर लें, तो जान लो कि अल्लाह तौबा के बाद उन्हें क्षमा करने वाला और उनपर दया करने वाला है। और उनपर उसकी दया में से उनसे दंड को हटा देना है।
आयत 35
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ ٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ وَٱبْتَغُوٓا۟ إِلَيْهِ ٱلْوَسِيلَةَ وَجَـٰهِدُوا۟ فِى سَبِيلِهِۦ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ
يَـٰٓأَيُّهَا
O you
ٱلَّذِينَ
ऐ लोगो जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए हो
ٱتَّقُوا۟
डरो
ٱللَّهَ
अल्लाह से
وَٱبْتَغُوٓا۟
और तलाश करो
إِلَيْهِ
तरफ़ उसके
ٱلْوَسِيلَةَ
वसीला/ज़रिया
وَجَـٰهِدُوا۟
और जिहाद करो
فِى
in
سَبِيلِهِۦ
उसके रास्ते में
لَعَلَّكُمْ
ताकि तुम
تُفْلِحُونَ
तुम फ़लाह पा जाओ
ऐ ईमान लानेवालो! अल्लाह का डर रखो और उसका सामीप्य प्राप्त करो और उसके मार्ग में जी-तोड़ संघर्ष करो, ताकि तुम्हें सफलता प्राप्त हो
तफ़्सीर:
ऐ ईमान वालो! अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर उससे डरो, तथा उसने तुम्हें जिसका हुक्म दिया है, उसे पूरा करके और जिससे उसने तुम्हें मना किया है, उससे दूर रहकर उसकी निकटता तलाश करो, और उसकी प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए काफ़िरों से जिहाद करो। ताकि ऐसा करने पर तुम्हें वह चीज़ प्राप्त हो जाए, जो तुम माँगते हो और उस चीज़ से बचा लिए जाओ, जिससे तुम डरते हो।
आयत 36
إِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ لَوْ أَنَّ لَهُم مَّا فِى ٱلْأَرْضِ جَمِيعًۭا وَمِثْلَهُۥ مَعَهُۥ لِيَفْتَدُوا۟ بِهِۦ مِنْ عَذَابِ يَوْمِ ٱلْقِيَـٰمَةِ مَا تُقُبِّلَ مِنْهُمْ ۖ وَلَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌۭ
إِنَّ
बेशक
ٱلَّذِينَ
वो जिन्होंने
كَفَرُوا۟
कुफ़्र किया
لَوْ
अगर
أَنَّ
बेशक
لَهُم
उनके लिए हो
مَّا
जो कुछ
فِى
(is) in
ٱلْأَرْضِ
ज़मीन में है
جَمِيعًۭا
सारे का सारा
وَمِثْلَهُۥ
और मानिन्द उसी के
مَعَهُۥ
साथ उसके
لِيَفْتَدُوا۟
ताकि वो फ़िदया दें
بِهِۦ
साथ उसके
مِنْ
from
عَذَابِ
अज़ाब से (बचने के लिए)
يَوْمِ
दिन
ٱلْقِيَـٰمَةِ
क़यामत के
مَا
ना
تُقُبِّلَ
वो क़ुबूल किया जाएगा
مِنْهُمْ ۖ
उनसे
وَلَهُمْ
और उनके लिए
عَذَابٌ
अज़ाब है
أَلِيمٌۭ
दर्दनाक
जिन लोगों ने इनकार किया यदि उनके पास वह सब कुछ हो जो सारी धरती में है और उतना ही उसके साथ भी हो कि वह उसे देकर क़ियामत के दिन की यातना से बच जाएँ; तब भी उनकी ओर से यह सब दी जानेवाली वस्तुएँ स्वीकार न की जाएँगी। उनके लिए दुखद यातना ही है
तफ़्सीर:
जिन लोगों ने अल्लाह और उसके रसूल के साथ कुफ़्र किया, यदि मान लिया जाए कि उनमें से हर एक धरती की सारी धन-दौलत का मालिक हो जाए और उसके साथ उतना ही और भी हो, फिर वे क़ियामत के दिन अपने आपको अल्लाह की यातना से मुक्त करने के लिए उसे पेश कर दें, तो वह उनसे स्वीकार नहीं किया जाएगा, और उनके लिए दर्दनाक यातना है।
आयत 37
يُرِيدُونَ أَن يَخْرُجُوا۟ مِنَ ٱلنَّارِ وَمَا هُم بِخَـٰرِجِينَ مِنْهَا ۖ وَلَهُمْ عَذَابٌۭ مُّقِيمٌۭ
يُرِيدُونَ
वो चाहेंगे
أَن
कि
يَخْرُجُوا۟
वो निकल जाऐं
مِنَ
of
ٱلنَّارِ
आग से
وَمَا
और नहीं
هُم
वो
بِخَـٰرِجِينَ
निकलने वाले
مِنْهَا ۖ
उससे
وَلَهُمْ
और उनके लिए
عَذَابٌۭ
अज़ाब है
مُّقِيمٌۭ
क़ायम रहने वाला
वे चाहेंगे कि आग (जहन्नम) से निकल जाएँ, परन्तु वे उससे न निकल सकेंगे। उनके लिए चिरस्थायी यातना है
तफ़्सीर:
वे जहन्नम की आग में प्रवेश करने के बाद उससे बाहर निकलना चाहेंगे, परंतु वे ऐसा कैसे कर सकते हैं?! वे उससे हाबर हरगिज़ नहीं निकलेंगे, तथा उनके लिए उसमें एक स्थायी यातना है।
आयत 38
وَٱلسَّارِقُ وَٱلسَّارِقَةُ فَٱقْطَعُوٓا۟ أَيْدِيَهُمَا جَزَآءًۢ بِمَا كَسَبَا نَكَـٰلًۭا مِّنَ ٱللَّهِ ۗ وَٱللَّهُ عَزِيزٌ حَكِيمٌۭ
وَٱلسَّارِقُ
और चोर मर्द
وَٱلسَّارِقَةُ
और चोर औरत
فَٱقْطَعُوٓا۟
पस काट दो
أَيْدِيَهُمَا
हाथ उन दोनों के
جَزَآءًۢ
बदला है
بِمَا
बवजह उसके जो
كَسَبَا
उन दोनों ने कमाया
نَكَـٰلًۭا
इबरतनाक सज़ा है
مِّنَ
from
ٱللَّهِ ۗ
अल्लाह की तरफ़ से
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
عَزِيزٌ
बहुत ज़बरदस्त है
حَكِيمٌۭ
ख़ूब हिकमत वाला है
और चोर चाहे स्त्री हो या पुरुष दोनों के हाथ काट दो। यह उनकी कमाई का बदला है और अल्लाह की ओर से शिक्षाप्रद दंड। अल्लाह प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है
तफ़्सीर:
जो चोरी करने वाला (पुरुष) और जो चोरी करने वाली (स्त्री) है (ऐ शासको!) उनमें से प्रत्येक के दाहिने हाथ को काट दो, यह उनके लिए अल्लाह की ओर से उसके बदले एवं दंड के रूप में है जो उन दोनों ने अवैध रूप से लोगों का माल लिया है, तथा उन्हें और दूसरों को डराने के लिए है। तथा अल्लाह सब पर प्रभुत्वशाली है, उसपर किसी का ज़ोर नहीं चलता। वह अपनी (सभी चीज़ों की) पूर्वनियति (तक़दीर) और अपने विधान में हिकमत वाला है।
आयत 39
فَمَن تَابَ مِنۢ بَعْدِ ظُلْمِهِۦ وَأَصْلَحَ فَإِنَّ ٱللَّهَ يَتُوبُ عَلَيْهِ ۗ إِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٌۭ رَّحِيمٌ
فَمَن
तो जो कोई
تَابَ
तौबा कर ले
مِنۢ
from
بَعْدِ
बाद
ظُلْمِهِۦ
अपने ज़ुल्म के
وَأَصْلَحَ
और वो इस्लाह कर ले
فَإِنَّ
तो बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
يَتُوبُ
वो मेहरबान होगा
عَلَيْهِ ۗ
उस पर
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
غَفُورٌۭ
बहुत बख़्शने वाला है
رَّحِيمٌ
निहायत रहम करने वाला है
फिर जो व्यक्ति अत्याचार करने के बाद पलट आए और अपने को सुधार ले, तो निश्चय ही वह अल्लाह की कृपा का पात्र होगा। निस्संदेह, अल्लाह बड़ा क्षमाशील, दयावान है
तफ़्सीर:
जो व्यक्ति चोरी से अल्लाह के समक्ष तौबा कर ले और अपने कार्य को सुधार ले, तो अल्लाह अपने अनुग्रह से उसकी तौबा स्वीकार कर लेगा; क्योंकि अल्लाह अपने बंदों में से तौबा करने वालों के पापों को क्षमा करने वाला, उनपर दया करने वाला है। लेकिन अगर मामला शासकों के पास पहुँच गया है, तो तौबा करने से उनका शरई ह़द समाप्त नहीं होगा।
आयत 40
أَلَمْ تَعْلَمْ أَنَّ ٱللَّهَ لَهُۥ مُلْكُ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ يُعَذِّبُ مَن يَشَآءُ وَيَغْفِرُ لِمَن يَشَآءُ ۗ وَٱللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍۢ قَدِيرٌۭ
أَلَمْ
क्या नहीं
تَعْلَمْ
आपने जाना
أَنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
لَهُۥ
उसी के लिए है
مُلْكُ
बादशाहत
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों
وَٱلْأَرْضِ
और ज़मीन की
يُعَذِّبُ
वो अज़ाब देता है
مَن
जिसे
يَشَآءُ
वो चाहता है
وَيَغْفِرُ
और वो बख़्श देता है
لِمَن
जिसे
يَشَآءُ ۗ
वो चाहता है
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
عَلَىٰ
ऊपर
كُلِّ
हर
شَىْءٍۢ
चीज़ के
قَدِيرٌۭ
ख़ूब क़ुदरत रखने वाला है
क्या तुम नहीं जानते कि अल्लाह ही आकाशों और धरती के राज्य का अधिकारी है? वह जिसे चाहे यातना दे और जिसे चाहे क्षमा कर दे। अल्लाह को हर चीज़ की सामर्थ्य प्राप्त है
तफ़्सीर:
(ऐ रसूल!) निश्चय आपको मालूम है कि अल्लाह ही के पास आकाशों तथा धरती का राज्य है। वह उनमें अपनी इच्छानुसार व्यवहार करता है। वह जिसे चाहता है, अपने न्याय से दंडित करता है और जिसे चाहता है, अपने अनुग्रह से क्षमा कर देता है। निःसंदेह अल्लाह सब कुछ करने में सक्षम है, उसे कोई चीज़ विवश नहीं कर सकती।
आयत 41
۞ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلرَّسُولُ لَا يَحْزُنكَ ٱلَّذِينَ يُسَـٰرِعُونَ فِى ٱلْكُفْرِ مِنَ ٱلَّذِينَ قَالُوٓا۟ ءَامَنَّا بِأَفْوَٰهِهِمْ وَلَمْ تُؤْمِن قُلُوبُهُمْ ۛ وَمِنَ ٱلَّذِينَ هَادُوا۟ ۛ سَمَّـٰعُونَ لِلْكَذِبِ سَمَّـٰعُونَ لِقَوْمٍ ءَاخَرِينَ لَمْ يَأْتُوكَ ۖ يُحَرِّفُونَ ٱلْكَلِمَ مِنۢ بَعْدِ مَوَاضِعِهِۦ ۖ يَقُولُونَ إِنْ أُوتِيتُمْ هَـٰذَا فَخُذُوهُ وَإِن لَّمْ تُؤْتَوْهُ فَٱحْذَرُوا۟ ۚ وَمَن يُرِدِ ٱللَّهُ فِتْنَتَهُۥ فَلَن تَمْلِكَ لَهُۥ مِنَ ٱللَّهِ شَيْـًٔا ۚ أُو۟لَـٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ لَمْ يُرِدِ ٱللَّهُ أَن يُطَهِّرَ قُلُوبَهُمْ ۚ لَهُمْ فِى ٱلدُّنْيَا خِزْىٌۭ ۖ وَلَهُمْ فِى ٱلْـَٔاخِرَةِ عَذَابٌ عَظِيمٌۭ
۞ يَـٰٓأَيُّهَا
ऐ
ٱلرَّسُولُ
रसूल
لَا
Let not
يَحْزُنكَ
ना ग़मगीन करें आपको
ٱلَّذِينَ
वो लोग जो
يُسَـٰرِعُونَ
दौड़ धूप करते हैं
فِى
in (to)
ٱلْكُفْرِ
कुफ़्र में
مِنَ
of
ٱلَّذِينَ
उन लोगों में से जो
قَالُوٓا۟
कहते हैं
ءَامَنَّا
ईमान लाए हम
بِأَفْوَٰهِهِمْ
अपने मुँहों से
وَلَمْ
हालाँकि नहीं
تُؤْمِن
ईमान लाए
قُلُوبُهُمْ ۛ
दिल उनके
وَمِنَ
and from
ٱلَّذِينَ
और उनमें से जो
هَادُوا۟ ۛ
यहूदी बन गए
سَمَّـٰعُونَ
बहुत ज़्यादा सुनने वाले हैं
لِلْكَذِبِ
झूठ को
سَمَّـٰعُونَ
बहुत ज़्यादा सुनने वाले हैं
لِقَوْمٍ
for people
ءَاخَرِينَ
दूसरी क़ौम के लिए
لَمْ
नहीं
يَأْتُوكَ ۖ
वो आए आपके पास
يُحَرِّفُونَ
वो बदल देते हैं
ٱلْكَلِمَ
अलफ़ाज़ को
مِنۢ
from
بَعْدِ
बाद
مَوَاضِعِهِۦ ۖ
उनकी जगहें (मुक़र्रर होने के)
يَقُولُونَ
वो कहते हैं
إِنْ
अगर
أُوتِيتُمْ
दिए जाओ तुम
هَـٰذَا
ये
فَخُذُوهُ
तो ले लो उसे
وَإِن
और अगर
لَّمْ
ना
تُؤْتَوْهُ
तुम दिए जाओ उसे
فَٱحْذَرُوا۟ ۚ
पस बचो
وَمَن
और वो जो
يُرِدِ
इरादा कर ले
ٱللَّهُ
अल्लाह
فِتْنَتَهُۥ
उसकी आज़माइश का
فَلَن
तो हरगिज़ नहीं
تَمْلِكَ
आप मालिक हो सकते
لَهُۥ
उसके लिए
مِنَ
against
ٱللَّهِ
अल्लाह से
شَيْـًٔا ۚ
किसी चीज़ के
أُو۟لَـٰٓئِكَ
यही लोग हैं
ٱلَّذِينَ
वो जो
لَمْ
नहीं
يُرِدِ
चाहा
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
أَن
कि
يُطَهِّرَ
वो पाक करे
قُلُوبَهُمْ ۚ
उनके दिलों को
لَهُمْ
उनके लिए
فِى
in
ٱلدُّنْيَا
दुनिया में
خِزْىٌۭ ۖ
रुस्वाई है
وَلَهُمْ
और उनके लिए
فِى
in
ٱلْـَٔاخِرَةِ
आख़िरत में
عَذَابٌ
अज़ाब है
عَظِيمٌۭ
बहुत बड़ा
ऐ रसूल! जो लोग अधर्म के मार्ग में दौड़ते है, उनके कारण तुम दुखी न होना; वे जिन्होंने अपने मुँह से कहा कि "हम ईमान ले आए," किन्तु उनके दिल ईमान नहीं लाए; और वे जो यहूदी हैं, वे झूठ के लिए कान लगाते हैं और उन दूसरे लोगों की भली-भाँति सुनते है, जो तुम्हारे पास नहीं आए, शब्दों को उनका स्थान निश्चित होने के बाद भी उनके स्थान से हटा देते है। कहते है, "यदि तुम्हें यह (आदेश) मिले, तो इसे स्वीकार करना और यदि न मिले तो बचना।" जिसे अल्लाह ही आपदा में डालना चाहे उसके लिए अल्लाह के यहाँ तुम्हारी कुछ भी नहीं चल सकती। ये वही लोग है जिनके दिलों को अल्लाह ने स्वच्छ करना नहीं चाहा। उनके लिए संसार में भी अपमान और तिरस्कार है और आख़िरत में भी बड़ी यातना है
तफ़्सीर:
ऐ रसूल! वे लोग आपको दुःखित न करें जो आपको क्रोधित करने के लिए कुफ़्र के कृत्यों को प्रकट करने में जल्दबाज़ी करते हैं, जो कि उन मुनाफ़िक़ों (पाखंडियों) में से हैं, जो ईमान को प्रदर्शित करते हैं और कुफ़्र को छिपाते हैं। इसी तरह वे यहूदी भी आपको दुखी न करें जो अपने बड़ों के झूठ को सुनते और उसे स्वीकार करते हैं, वे अपने उन नेताओं की नक़ल करते हैं, जो आपसे उपेक्षा करने के कारण आपके पास नहीं आए। ये लोग तौरात में मौजूद अल्लाह के शब्दों को अपनी इच्छाओं के अनुसार बदल देते हैं। वे अपने अनुयायियों से कहते हैं : यदि मुहम्मद का फैसला तुम्हारी इच्छाओं के अनुसार है, तो उसका अनुसरण करो और यदि वह उसके विरुद्ध हो, तो उससे सावधान रहना। तथा अल्लाह लोगों में से जिसे पथभ्रष्ट करना चाहे, तो (ऐ रसूल!) आप किसी ऐसे व्यक्ति को नहीं पाएँगे, जो उससे गुमराही को हटा सके और उसे सत्य के मार्ग पर ले जाए। इन विशेषताओं से विशेषित यहूदी और मुनाफ़िक़ वे लोग हैं, जिनके दिलों को अल्लाह ने कुफ़्र से पवित्र करना नहीं चाहा, उनके लिए इस दुनिया में अपमान और तिरस्कार है और आख़िरत में उनके लिए बहुत बड़ी यातना है, जो कि आग की यातना है।
आयत 42
سَمَّـٰعُونَ لِلْكَذِبِ أَكَّـٰلُونَ لِلسُّحْتِ ۚ فَإِن جَآءُوكَ فَٱحْكُم بَيْنَهُمْ أَوْ أَعْرِضْ عَنْهُمْ ۖ وَإِن تُعْرِضْ عَنْهُمْ فَلَن يَضُرُّوكَ شَيْـًۭٔا ۖ وَإِنْ حَكَمْتَ فَٱحْكُم بَيْنَهُم بِٱلْقِسْطِ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ يُحِبُّ ٱلْمُقْسِطِينَ
سَمَّـٰعُونَ
बहुत ज़्यादा सुनने वाले हैं
لِلْكَذِبِ
झूठ को
أَكَّـٰلُونَ
बहुत ज़्यादा खाने वाले हैं
لِلسُّحْتِ ۚ
हराम को
فَإِن
फिर अगर
جَآءُوكَ
वो आऐं आपके पास
فَٱحْكُم
तो फ़ैसला कीजिए
بَيْنَهُمْ
दर्मियान उनके
أَوْ
या
أَعْرِضْ
ऐराज़ कीजिए
عَنْهُمْ ۖ
उनसे
وَإِن
और अगर
تُعْرِضْ
आप ऐराज़ करेंगे
عَنْهُمْ
उनसे
فَلَن
तो हरगिज़ नहीं
يَضُرُّوكَ
वो नुक़सान पहुँचा सकते आपको
شَيْـًۭٔا ۖ
कुछ भी
وَإِنْ
और अगर
حَكَمْتَ
फ़ैसला करें आप
فَٱحْكُم
तो फ़ैसला कीजिए
بَيْنَهُم
दर्मियान उनके
بِٱلْقِسْطِ ۚ
साथ इन्साफ़ के
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
يُحِبُّ
वो मोहब्बत रखता है
ٱلْمُقْسِطِينَ
इन्साफ़ करने वालों से
वे झूठ के लिए कान लगाते रहनेवाले और बड़े हराम खानेवाले है। अतः यदि वे तुम्हारे पास आएँ, तो या तुम उनके बीच फ़ैसला कर दो या उन्हें टाल जाओ। यदि तुम उन्हें टाल गए तो वे तुम्हारा कुछ भी नहीं बिगाड़ सकते। परन्तु यदि फ़ैसला करो तो उनके बीच इनसाफ़ के साथ फ़ैसला करो। निश्चय ही अल्लाह इनसाफ़ करनेवालों से प्रेम करता है
तफ़्सीर:
ये यहूदी झूठी बातें बहुत सुनते हैं, सूद की तरह हराम धन बहुत खाते हैं। अतः यदि वे (ऐ रसूल!) आपके पास फ़ैसला करवाने के लिए आएँ, तो अगर आप चाहें, तो उनके बीच निर्णय कर दें, या अगर आप चाहें, तो उनके बीच फ़ैसला न करें। आपके पास दोनों के बीच एक विकल्प है। यदि आप उनके बीच फैसला न करें, तो वे आपको कुछ भी नुक़सान नहीं पहुँचा पाएँगे, और यदि आप उनके बीच निर्णय करें, तो उनके बीच न्याय के साथ निर्णय करें, भले ही वे अत्याचारी और दुश्मन हों। निःसंदेह अल्लाह ऐसे लोगों से प्रेम करता है, जो अपने फ़ैसले में न्याय करने वाले हैं, भले ही फ़ैसले के लिए आने वाले फ़ैसला करने वाले के दुश्मन हों।
आयत 43
وَكَيْفَ يُحَكِّمُونَكَ وَعِندَهُمُ ٱلتَّوْرَىٰةُ فِيهَا حُكْمُ ٱللَّهِ ثُمَّ يَتَوَلَّوْنَ مِنۢ بَعْدِ ذَٰلِكَ ۚ وَمَآ أُو۟لَـٰٓئِكَ بِٱلْمُؤْمِنِينَ
وَكَيْفَ
और किस तरह
يُحَكِّمُونَكَ
वो मुन्सिफ़ बनाते हैं आपको
وَعِندَهُمُ
हालाँकि उनके पास
ٱلتَّوْرَىٰةُ
तौरात है
فِيهَا
जिसमें
حُكْمُ
हुक्म है
ٱللَّهِ
अल्लाह का
ثُمَّ
फिर
يَتَوَلَّوْنَ
वो मुँह मोड़ जाते हैं
مِنۢ
from
بَعْدِ
बाद
ذَٰلِكَ ۚ
इसके
وَمَآ
और नहीं
أُو۟لَـٰٓئِكَ
ये लोग
بِٱلْمُؤْمِنِينَ
ईमान लाने वाले
वे तुमसे फ़ैसला कराएँगे भी कैसे, जबकि उनके पास तौरात है, जिसमें अल्लाह का हुक्म मौजूद है! फिर इसके पश्चात भी वे मुँह मोड़ते है। वे तो ईमान नहीं रखते
तफ़्सीर:
इन लोगों का मामला निश्चय आश्चर्यजनक है। वे आपपर विश्वास नहीं रखते हैं, फिर भी अपने मामले का फ़ैसला कराने के लिए आपके पास इस आशा में आते हैं कि आपका फ़ैसला उनकी इच्छाओं के अनुसार हो जाए। जबकि उनके पास तौरात है, जिसपर वे ईमान रखने का दावा करते हैं, जिसमें अल्लाह का आदेश (फ़ैसला) मौजूद है। फिर वे आपके फ़ैसले से मुँह मोड़ लेते हैं, यदि वह उनकी इच्छाओं से मेल नहीं खाता है। इस तरह उन्होंने अपनी किताब में मौजूद हुक्म का इनकार किया है और आपके फ़ैसले से मुँह फेरा है। इनका यह व्यवहार ईमान वालों का व्यवहार नहीं है। इसलिए वे आपपर और आपकी लाई हुई शरीयत पर ईमान रखने वाले नहीं हैं।
आयत 44
إِنَّآ أَنزَلْنَا ٱلتَّوْرَىٰةَ فِيهَا هُدًۭى وَنُورٌۭ ۚ يَحْكُمُ بِهَا ٱلنَّبِيُّونَ ٱلَّذِينَ أَسْلَمُوا۟ لِلَّذِينَ هَادُوا۟ وَٱلرَّبَّـٰنِيُّونَ وَٱلْأَحْبَارُ بِمَا ٱسْتُحْفِظُوا۟ مِن كِتَـٰبِ ٱللَّهِ وَكَانُوا۟ عَلَيْهِ شُهَدَآءَ ۚ فَلَا تَخْشَوُا۟ ٱلنَّاسَ وَٱخْشَوْنِ وَلَا تَشْتَرُوا۟ بِـَٔايَـٰتِى ثَمَنًۭا قَلِيلًۭا ۚ وَمَن لَّمْ يَحْكُم بِمَآ أَنزَلَ ٱللَّهُ فَأُو۟لَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلْكَـٰفِرُونَ
إِنَّآ
बेशक हम
أَنزَلْنَا
नाज़िल की हमने
ٱلتَّوْرَىٰةَ
तौरात
فِيهَا
उसमें
هُدًۭى
हिदायत
وَنُورٌۭ ۚ
और नूर था
يَحْكُمُ
फ़ैसला करते थे
بِهَا
साथ उसके
ٱلنَّبِيُّونَ
अम्बिया
ٱلَّذِينَ
वो जो
أَسْلَمُوا۟
इस्लाम लाए थे
لِلَّذِينَ
उनके लिए जो
هَادُوا۟
यहूदी बन गए थे
وَٱلرَّبَّـٰنِيُّونَ
और रब्बानी/रब वाले भी
وَٱلْأَحْبَارُ
और उलेमा/फ़ुक़्हा भी
بِمَا
बवजह उसके जो
ٱسْتُحْفِظُوا۟
वो मुहाफ़िज़ बनाए गए थे
مِن
of
كِتَـٰبِ
(the) Book
ٱللَّهِ
अल्लाह की किताब के
وَكَانُوا۟
और थे वो
عَلَيْهِ
उस पर
شُهَدَآءَ ۚ
गवाह
فَلَا
तो ना
تَخْشَوُا۟
तुम डरो
ٱلنَّاسَ
लोगों से
وَٱخْشَوْنِ
और डरो मुझसे
وَلَا
और ना
تَشْتَرُوا۟
तुम लो
بِـَٔايَـٰتِى
बदले मेरी आयात के
ثَمَنًۭا
क़ीमत
قَلِيلًۭا ۚ
थोड़ी
وَمَن
और जो
لَّمْ
ना
يَحْكُم
फ़ैसला करे
بِمَآ
उसके मुताबिक़ जो
أَنزَلَ
नाज़िल किया
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
فَأُو۟لَـٰٓئِكَ
तो यही लोग हैं
هُمُ
वो
ٱلْكَـٰفِرُونَ
जो काफ़िर हैं
निस्संदेह हमने तौरात उतारी, जिसमें मार्गदर्शन और प्रकाश था। नबी जो आज्ञाकारी थे, उसको यहूदियों के लिए अनिवार्य ठहराते थे कि वे उसका पालन करें और इसी प्रकार अल्लाहवाले और शास्त्रवेत्ता भी। क्योंकि उन्हें अल्लाह की किताब की सुरक्षा का आदेश दिया गया था और वे उसके संरक्षक थे। तो तुम लोगों से न डरो, बल्कि मुझ ही से डरो और मेरी आयतों के बदले थोड़ा मूल्य प्राप्त न करना। जो लोग उस विधान के अनुसार फ़ैसला न करें, जिसे अल्लाह ने उतारा है, तो ऐसे ही लोग विधर्मी है
तफ़्सीर:
निःसंदेह हमने मूसा अलैहिस्सलाम पर तौरात उतारी, जिसमें भलाई का मार्गदर्शन और ऐसा प्रकाश है जिसके द्वारा रौशनी हासिल की जाती है। उसके अनुसार बनी इसराईल के वे नबी जो अल्लाह के आज्ञाकारी थे, फ़ैसला करते हैं। तथा उसी के अनुसार वे विद्वान और धर्मशास्त्री (फुक़हा) भी फ़ैसला करते हैं जो लोगों का प्रशिक्षण करते हैं, क्योंकि अल्लाह ने उन्हें अपनी पुस्तक का निरीक्षक और संरक्षक बनाया है, जो उसे विकृति और परिवर्तन से बचाते हैं। तथा वे इस बात के गवाह हैं कि यह पुस्तक सत्य है। और लोग इस (पुस्तक) से संबंधित मामले में उन्हीं की तरफ लौटते हैं। अतः (ऐ यहूदियो!) लोगों से न डरो, केवल मुझसे डरो। तथा अल्लाह की उतारी हुई किताब के अनुसार फ़ैसला करने की बजाय सरदारी, पद-प्रतिष्ठा या धन की एक छोटी सी क़ीमत न लो। और जो अल्लाह की उतारी हुई वह़्य के अनुसार फ़ैसला न करे, उसे हलाल (अनुमेय) समझते हुए, या उसके अलावा को उसपर वरीयता देते हुए, या उसे उसके साथ बराबर ठहराते हुए, तो वही लोग वास्तव में काफ़िर हैं।
आयत 45
وَكَتَبْنَا عَلَيْهِمْ فِيهَآ أَنَّ ٱلنَّفْسَ بِٱلنَّفْسِ وَٱلْعَيْنَ بِٱلْعَيْنِ وَٱلْأَنفَ بِٱلْأَنفِ وَٱلْأُذُنَ بِٱلْأُذُنِ وَٱلسِّنَّ بِٱلسِّنِّ وَٱلْجُرُوحَ قِصَاصٌۭ ۚ فَمَن تَصَدَّقَ بِهِۦ فَهُوَ كَفَّارَةٌۭ لَّهُۥ ۚ وَمَن لَّمْ يَحْكُم بِمَآ أَنزَلَ ٱللَّهُ فَأُو۟لَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلظَّـٰلِمُونَ
وَكَتَبْنَا
और लिख दिया हमने
عَلَيْهِمْ
उन पर
فِيهَآ
उसमें
أَنَّ
बेशक
ٱلنَّفْسَ
जान
بِٱلنَّفْسِ
बदले जान के
وَٱلْعَيْنَ
और आँख
بِٱلْعَيْنِ
बदले आँख के
وَٱلْأَنفَ
और नाक
بِٱلْأَنفِ
बदले नाक के
وَٱلْأُذُنَ
और कान
بِٱلْأُذُنِ
बदले कान के
وَٱلسِّنَّ
और दाँत
بِٱلسِّنِّ
बदले दाँत के
وَٱلْجُرُوحَ
और तमाम ज़ख़्मों का भी
قِصَاصٌۭ ۚ
बदला है
فَمَن
तो जो कोई
تَصَدَّقَ
सदक़ा (माफ़) कर दे
بِهِۦ
उसको
فَهُوَ
तो वो
كَفَّارَةٌۭ
कफ़्फ़ारा होगा
لَّهُۥ ۚ
उसके लिए
وَمَن
और जो कोई
لَّمْ
ना
يَحْكُم
फ़ैसला करे
بِمَآ
उसके मुताबिक़ जो
أَنزَلَ
नाज़िल किया
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
فَأُو۟لَـٰٓئِكَ
तो यही लोग हैं
هُمُ
वो
ٱلظَّـٰلِمُونَ
जो ज़लिम हैं
और हमने उस (तौरात) में उनके लिए लिख दिया था कि जान जान के बराबर है, आँख आँख के बराहर है, नाक नाक के बराबर है, कान कान के बराबर, दाँत दाँत के बराबर और सब आघातों के लिए इसी तरह बराबर का बदला है। तो जो कोई उसे क्षमा कर दे तो यह उसके लिए प्रायश्चित होगा और जो लोग उस विधान के अनुसार फ़ैसला न करें, जिसे अल्लाह ने उतारा है जो ऐसे लोग अत्याचारी है
तफ़्सीर:
हमने तौरात में यहूदियों पर अनिवार्य कर दिया कि जो कोई जान-बूझकर किसी आत्मा को बिना हक़ के क़त्ल करेगा, तो वह उसके बदले में क़त्ल कर दिया जाएगा, और जो कोई जान-बूझकर आँख निकालेगा, उसकी आँख निकाल दी जाएगी, और जो कोई जान-बूझकर नाक काटेगा, उसकी नाक काट दी जाएगी, और जो कोई जान-बूझकर कान काटेगा, उसका कान काट दिया जाएगा, और जो कोई जान-बूझकर दाँत निकालेगा, उसका दाँत निकाल निकाल दिया जाएगा। और हमने उनपर यह भी अनिवार्य कर दिया कि घावों के मामले में अपराधी को उसके अपराध के समान ही दंडित किया जाएगा। तथा जो कोई भी स्वेच्छा से अपराधी को क्षमा कर दे, तो उसकी क्षमा उसके पापों का प्रायश्चित है; क्योंकि उसने उस व्यक्ति को क्षमा कर दिया, जिसने उसपर अत्याचार किया है। और जो उसके अनुसार फ़ैसला न करे जौ अल्लाह ने 'क़िसास' के बारे में तथा उसके अलावा चीज़ों के बारे में उतारा है, तो वह अल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन करने वाला है।
आयत 46
وَقَفَّيْنَا عَلَىٰٓ ءَاثَـٰرِهِم بِعِيسَى ٱبْنِ مَرْيَمَ مُصَدِّقًۭا لِّمَا بَيْنَ يَدَيْهِ مِنَ ٱلتَّوْرَىٰةِ ۖ وَءَاتَيْنَـٰهُ ٱلْإِنجِيلَ فِيهِ هُدًۭى وَنُورٌۭ وَمُصَدِّقًۭا لِّمَا بَيْنَ يَدَيْهِ مِنَ ٱلتَّوْرَىٰةِ وَهُدًۭى وَمَوْعِظَةًۭ لِّلْمُتَّقِينَ
وَقَفَّيْنَا
और पीछे भेजा हमने
عَلَىٰٓ
on
ءَاثَـٰرِهِم
उनके आसार पर
بِعِيسَى
Isa
ٱبْنِ
son
مَرْيَمَ
ईसा इब्ने मरियम को
مُصَدِّقًۭا
तसदीक़ करने वाला
لِّمَا
उसकी जो
بَيْنَ
(was) between
يَدَيْهِ
पहले है इससे
مِنَ
of
ٱلتَّوْرَىٰةِ ۖ
तौरात में से
وَءَاتَيْنَـٰهُ
और दी हमने उसे
ٱلْإِنجِيلَ
इन्जील
فِيهِ
उसमें थी
هُدًۭى
हिदायत
وَنُورٌۭ
और नूर
وَمُصَدِّقًۭا
और तसदीक़ करने वाली
لِّمَا
उसकी जो
بَيْنَ
(was) between
يَدَيْهِ
पहले है इससे
مِنَ
of
ٱلتَّوْرَىٰةِ
तौरात में से
وَهُدًۭى
और हिदायत
وَمَوْعِظَةًۭ
और नसीहत
لِّلْمُتَّقِينَ
मुत्तक़ी लोगों से
और उनके पीछ उन्हीं के पद-चिन्हों पर हमने मरयम के बेटे ईसा को भेजा जो पहले से उसके सामने मौजूद किताब 'तौरात' की पुष्टि करनेवाला था। और हमने उसे इनजील प्रदान की, जिसमें मार्गदर्शन और प्रकाश था। और वह अपनी पूर्ववर्ती किताब तौरात की पुष्टि करनेवाली थी, और वह डर रखनेवालों के लिए मार्गदर्शन और नसीहत थी
तफ़्सीर:
और हमने बनी इसराईल के नबियों के पद-चिन्हों पर मरयम के पुत्र ईसा को भेजा, जो उसपर ईमान रखने वाले थे जो कुछ तौरात में था और उसी के अनुसार फैसला करने वाले थे। तथा हमने उन्हें इंजील प्रदान की, जिसमें सत्य के लिए मार्गदर्शन शामिल है, तथा उसमें ऐसे प्रमाण हैं, जो संदेहों को दूर करते हैं और ऐसे प्रावधान हैं जो समस्याओं का समाधान करते हैं, तथा वह उससे पहले उतरने वाली पुस्तक तौरात के अनुकूल है, सिवाय उसके कुछ नियमों में, जिन्हें उसने निरस्त कर दिया है। तथा हमने इंजील को संयमियों (परहेज़गारों) के लिए पथप्रदर्शक और उस चीज़ को करने से रोकने वाला बना दिया जिसे उसने उनपर निषिद्ध किया था।
आयत 47
وَلْيَحْكُمْ أَهْلُ ٱلْإِنجِيلِ بِمَآ أَنزَلَ ٱللَّهُ فِيهِ ۚ وَمَن لَّمْ يَحْكُم بِمَآ أَنزَلَ ٱللَّهُ فَأُو۟لَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلْفَـٰسِقُونَ
وَلْيَحْكُمْ
और चाहिए कि फ़ैसला करें
أَهْلُ
(the) People
ٱلْإِنجِيلِ
अहले इन्जील
بِمَآ
उसके मुताबिक़ जो
أَنزَلَ
नाज़िल किया
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
فِيهِ ۚ
उसमें
وَمَن
और जो
لَّمْ
ना
يَحْكُم
फ़ैसला करे
بِمَآ
उसके मुताबिक़ जो
أَنزَلَ
नाज़िल किया
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
فَأُو۟لَـٰٓئِكَ
तो यही लोग हैं
هُمُ
वो
ٱلْفَـٰسِقُونَ
जो फ़ासिक़ हैं
अतः इनजील वालों को चाहिए कि उस विधान के अनुसार फ़ैसला करें, जो अल्लाह ने उस इनजील में उतारा है। और जो उसके अनुसार फ़ैसला न करें, जो अल्लाह ने उतारा है, तो ऐसे ही लोग उल्लंघनकारी है
तफ़्सीर:
ईसाइयों को चाहिए कि उसपर विश्वास करें, जो अल्लाह ने इंजील में उतारा है तथा (मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के उनके बीच नबी बनाकर भेजे जाने से पहले उसमें जो सच्चाई आई) उसके अनुसार फ़ैसला करें। और जो उसके अनुसार फ़ैसला न करे, जो अल्लाह ने उतारा है, तो वही लोग अल्लाह की अवज्ञा करने वाले, सत्य को छोड़ने वाले तथा असत्य की ओर झुकने वाले हैं।
आयत 48
وَأَنزَلْنَآ إِلَيْكَ ٱلْكِتَـٰبَ بِٱلْحَقِّ مُصَدِّقًۭا لِّمَا بَيْنَ يَدَيْهِ مِنَ ٱلْكِتَـٰبِ وَمُهَيْمِنًا عَلَيْهِ ۖ فَٱحْكُم بَيْنَهُم بِمَآ أَنزَلَ ٱللَّهُ ۖ وَلَا تَتَّبِعْ أَهْوَآءَهُمْ عَمَّا جَآءَكَ مِنَ ٱلْحَقِّ ۚ لِكُلٍّۢ جَعَلْنَا مِنكُمْ شِرْعَةًۭ وَمِنْهَاجًۭا ۚ وَلَوْ شَآءَ ٱللَّهُ لَجَعَلَكُمْ أُمَّةًۭ وَٰحِدَةًۭ وَلَـٰكِن لِّيَبْلُوَكُمْ فِى مَآ ءَاتَىٰكُمْ ۖ فَٱسْتَبِقُوا۟ ٱلْخَيْرَٰتِ ۚ إِلَى ٱللَّهِ مَرْجِعُكُمْ جَمِيعًۭا فَيُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمْ فِيهِ تَخْتَلِفُونَ
وَأَنزَلْنَآ
और नाज़िल की हमने
إِلَيْكَ
तरफ़ आपके
ٱلْكِتَـٰبَ
किताब
بِٱلْحَقِّ
साथ हक़ के
مُصَدِّقًۭا
तसदीक़ करने वाली
لِّمَا
उसकी जो
بَيْنَ
(was) before
يَدَيْهِ
पहले है इससे
مِنَ
of
ٱلْكِتَـٰبِ
किताबों में से
وَمُهَيْمِنًا
और निगहबान है
عَلَيْهِ ۖ
उस पर
فَٱحْكُم
पस फ़ैसला कीजिए
بَيْنَهُم
दर्मियान उनके
بِمَآ
उसके मुताबिक़ जो
أَنزَلَ
नाज़िल किया
ٱللَّهُ ۖ
अल्लाह ने
وَلَا
और ना
تَتَّبِعْ
आप पैरवी कीजिए
أَهْوَآءَهُمْ
उनकी ख़्वाहिशात की
عَمَّا
उससे (हट कर) जो
جَآءَكَ
आ गया आपके पास
مِنَ
of
ٱلْحَقِّ ۚ
हक़ में से
لِكُلٍّۢ
हर एक के लिए
جَعَلْنَا
बनाया हमने
مِنكُمْ
तुम में से
شِرْعَةًۭ
एक रास्ता
وَمِنْهَاجًۭا ۚ
और एक तरीक़ा
وَلَوْ
और अगर
شَآءَ
चाहता
ٱللَّهُ
अल्लाह
لَجَعَلَكُمْ
अलबत्ता वो बना देता तुम्हें
أُمَّةًۭ
उम्मत
وَٰحِدَةًۭ
एक ही
وَلَـٰكِن
और लेकिन
لِّيَبْلُوَكُمْ
इस लिए कि वो आज़माए तुम्हें
فِى
in
مَآ
उसमें जो
ءَاتَىٰكُمْ ۖ
उसने दिया तुम्हें
فَٱسْتَبِقُوا۟
पस सबक़त करो/आगे बढ़ो
ٱلْخَيْرَٰتِ ۚ
नेकियों में
إِلَى
To
ٱللَّهِ
तरफ़ अल्लाह ही के
مَرْجِعُكُمْ
लौटना है तुम्हारा
جَمِيعًۭا
सबके-सबका
فَيُنَبِّئُكُم
फिर वो बता देगा तुम्हें
بِمَا
वो जो
كُنتُمْ
थे तुम
فِيهِ
जिसमें
تَخْتَلِفُونَ
तुम इख़्तिलाफ़ करते
और हमने तुम्हारी ओर यह किताब हक़ के साथ उतारी है, जो उस किताब की पुष्टि करती है जो उसके पहले से मौजूद है और उसकी संरक्षक है। अतः लोगों के बीच तुम मामलों में वही फ़ैसला करना जो अल्लाह ने उतारा है और जो सत्य तुम्हारे पास आ चुका है उसे छोड़कर उनकी इच्छाओं का पालन न करना। हमने तुममें से प्रत्येक के लिए एक ही घाट (शरीअत) और एक ही मार्ग निश्चित किया है। यदि अल्लाह चाहता तो तुम सबको एक समुदाय बना देता। परन्तु जो कुछ उसने तुम्हें दिया है, उसमें वह तुम्हारी परीक्षा करना चाहता है। अतः भलाई के कामों में एक-दूसरे से आगे बढ़ो। तुम सबको अल्लाह ही की ओर लौटना है। फिर वह तुम्हें बता देगा, जिसमें तुम विभेद करते रहे हो
तफ़्सीर:
(ऐ रसूल!) हमने आपकी ओर क़ुरआन को सच्चाई के साथ उतारा है, जिसके अल्लाह की ओर से होने में कोई शक एवं संदेह नहीं है। जो इससे पहले उतरी हुई पुस्तकों की पुष्टि करने वाला तथा उनका संरक्षक है। अतः उनमें से जो कुछ इसके मुताबिक़ है, वह सत्य है और जो कुछ इसके विरुद्ध है, वह असत्य है। इसलिए आप लोगों के बीच उसके अनुसार फ़ैसला करें, जो अल्लाह ने इस (क़ुरआन) में आपपर उतारा है, तथा आपके ऊपर जो संदेह रहित सत्य अवतिरत किया गया है उसे छोड़कर उनकी उन इच्छाओं का पालन न करें, जो उन्होंने ग्रहण की हैं। हमने हर समुदाय के लिए व्यावहारिक नियमों का एक कानून और एक स्पष्ट तरीक़ा बनाया है जिसके द्वारा वे मार्गदर्शन प्राप्त करते हैं। यदि अल्लाह सारी शरीयतों को एक करना चाहता, तो वह उन्हें एक कर देता। परंतु उसने प्रत्येक समुदाय के लिए एक (स्थायी) शरीयत बनाई है, ताकि वह सबकी परीक्षा ले, और आज्ञापालन करने वाला अवज्ञाकारी से प्रगट हो जाए। अतः अच्छे काम करने और बुरे काम छोड़ने में जल्दी करो। क्योंकि क़ियामत के दिन तुम सबको अकेले अल्लाह ही की ओर लौटना है, और वह तुम्हें उससे सूचित करेगा, जिसके बारे में तुम मतभेद किया करते थे, तथा वह तुम्हें तुम्हारे द्वारा किए गए कामों का बदला देगा।
आयत 49
وَأَنِ ٱحْكُم بَيْنَهُم بِمَآ أَنزَلَ ٱللَّهُ وَلَا تَتَّبِعْ أَهْوَآءَهُمْ وَٱحْذَرْهُمْ أَن يَفْتِنُوكَ عَنۢ بَعْضِ مَآ أَنزَلَ ٱللَّهُ إِلَيْكَ ۖ فَإِن تَوَلَّوْا۟ فَٱعْلَمْ أَنَّمَا يُرِيدُ ٱللَّهُ أَن يُصِيبَهُم بِبَعْضِ ذُنُوبِهِمْ ۗ وَإِنَّ كَثِيرًۭا مِّنَ ٱلنَّاسِ لَفَـٰسِقُونَ
وَأَنِ
और ये कि
ٱحْكُم
फैसला कीजिए
بَيْنَهُم
दर्मियान उनके
بِمَآ
उसके मुताबिक़ जो
أَنزَلَ
नाज़िल किया
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
وَلَا
और ना
تَتَّبِعْ
आप पैरवी कीजिए
أَهْوَآءَهُمْ
उनकी ख़्वाहिशात की
وَٱحْذَرْهُمْ
और मोहतात रहिए उनसे
أَن
कि
يَفْتِنُوكَ
वो फ़ितना में ना डालें आपको
عَنۢ
from
بَعْضِ
बाज़ (उस) से
مَآ
जो
أَنزَلَ
नाज़िल किया
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
إِلَيْكَ ۖ
तरफ़ आपके
فَإِن
फिर अगर
تَوَلَّوْا۟
वो मुँह मोड़ जाऐं
فَٱعْلَمْ
तो जान लीजिए
أَنَّمَا
बेशक
يُرِيدُ
चाहता है
ٱللَّهُ
अल्लाह
أَن
कि
يُصِيبَهُم
वो पहुँचाए उन्हें (मुसीबत)
بِبَعْضِ
बवजह बाज़
ذُنُوبِهِمْ ۗ
उनके गुनाहों के
وَإِنَّ
और बेशक
كَثِيرًۭا
बहुत से
مِّنَ
of
ٱلنَّاسِ
लोगों में से
لَفَـٰسِقُونَ
अलबत्ता फ़ासिक़ हैं
और यह कि तुम उनके बीच वही फ़ैसला करो जो अल्लाह ने उतारा है और उनकी इच्छाओं का पालन न करो और उनसे बचते रहो कि कहीं ऐसा न हो कि वे तुम्हें फ़रेब में डालकर जो कुछ अल्लाह ने तुम्हारी ओर उतारा है उसके किसी भाग से वे तुम्हें हटा दें। फिर यदि वे मुँह मोड़े तो जान लो कि अल्लाह ही उनके गुनाहों के कारण उन्हें संकट में डालना चाहता है। निश्चय ही अधिकांश लोग उल्लंघनकारी है
तफ़्सीर:
(ऐ रसूल!) उनके बीच उसके अनुसार निर्णय करें, जो अल्लाह ने आपकी ओर अवतिरत किया है और उनके उन विचारों का पालन न करें जो इच्छाओं का पालन करने से उत्पन्न हुए हैं, तथा उनसे सावधान रहें कि ऐसा न हो कि वे आपको किसी ऐसी चीज़ से भटका दें, जो अल्लाह ने आपपर अवतरित किया है। क्योंकि वे ऐसा करने में कोई कसर न छोड़ेंगे। यदि वे अल्लाह के द्वारा आपपर उतारी गई शरीयत के अनुसार फ़ैसला को स्वीकार करने से इनकार करें, तो आप जान लें कि अल्लाह उन्हें उनके कुछ पापों की सज़ा दुनिया ही में देना चाहता है। जबकि उन सभी पर उन्हें आख़िरत में दंडित करेगा। और सच्चाई यह है कि बहुत-से लोग अल्लाह के आज्ञापालन से निकल जाने वाले हैं।
आयत 50
أَفَحُكْمَ ٱلْجَـٰهِلِيَّةِ يَبْغُونَ ۚ وَمَنْ أَحْسَنُ مِنَ ٱللَّهِ حُكْمًۭا لِّقَوْمٍۢ يُوقِنُونَ
أَفَحُكْمَ
क्या फिर फ़ैसला
ٱلْجَـٰهِلِيَّةِ
जाहिलियत का
يَبْغُونَ ۚ
वो चाहते हैं
وَمَنْ
और कौन
أَحْسَنُ
ज़्यादा अच्छा है
مِنَ
than
ٱللَّهِ
अल्लाह से
حُكْمًۭا
फ़ैसला करने में
لِّقَوْمٍۢ
उन लोगों के लिए
يُوقِنُونَ
जो यक़ीन रखते हैं
अब क्या वे अज्ञान का फ़ैसला चाहते है? तो विश्वास करनेवाले लोगों के लिए अल्लाह से अच्छा फ़ैसला करनेवाला कौन हो सकता है?
तफ़्सीर:
क्या वे आपके फ़ैसले को छोड़कर मूर्तिपूजा करने वाले जाहिलिय्यत (पूर्व-इस्लामिक काल) के लोगों का फ़ैसला चाहते हैं, जो अपनी इच्छाओं के अनुसार फ़ैसला करते हैं?! विश्वास रखने वालों के निकट, जो अल्लाह के बारे में उस चीज़ को समझते हैं जो उसने अपने रसूल पर उतारी है, अल्लाह से बेहतर फ़ैसला करने वाला कोई नहीं है। न कि अज्ञानता और इच्छाओं के पीछे चलने वाले लोग, जो केवल वही स्वीकार करते हैं जो उनकी इच्छाओं से मेल खाता है, भले ही वह ग़लत हो।
आयत 51
۞ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ لَا تَتَّخِذُوا۟ ٱلْيَهُودَ وَٱلنَّصَـٰرَىٰٓ أَوْلِيَآءَ ۘ بَعْضُهُمْ أَوْلِيَآءُ بَعْضٍۢ ۚ وَمَن يَتَوَلَّهُم مِّنكُمْ فَإِنَّهُۥ مِنْهُمْ ۗ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يَهْدِى ٱلْقَوْمَ ٱلظَّـٰلِمِينَ
۞ يَـٰٓأَيُّهَا
O you
ٱلَّذِينَ
ऐ लोगो जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए हो
لَا
(Do) not
تَتَّخِذُوا۟
ना तुम बनाओ
ٱلْيَهُودَ
यहूद
وَٱلنَّصَـٰرَىٰٓ
और नसारा को
أَوْلِيَآءَ ۘ
दोस्त
بَعْضُهُمْ
बाज़ उनके
أَوْلِيَآءُ
दोस्त हैं
بَعْضٍۢ ۚ
बाज़ के
وَمَن
और जो कोई
يَتَوَلَّهُم
दोस्त बनाएगा उन्हें
مِّنكُمْ
तुम में से
فَإِنَّهُۥ
पस बेशक वो
مِنْهُمْ ۗ
उन्हीं में से हैं
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
لَا
(does) not
يَهْدِى
नहीं वो हिदायत देता
ٱلْقَوْمَ
उन लोगों को
ٱلظَّـٰلِمِينَ
जो ज़ालिम हैं
ऐ ईमान लानेवालो! तुम यहूदियों और ईसाइयों को अपना मित्र (राज़दार) न बनाओ। वे (तुम्हारे विरुद्ध) परस्पर एक-दूसरे के मित्र है। तुममें से जो कोई उनको अपना मित्र बनाएगा, वह उन्हीं लोगों में से होगा। निस्संदेह अल्लाह अत्याचारियों को मार्ग नहीं दिखाता
तफ़्सीर:
ऐ लोगो जो अल्लाह तथा उसके रसूल पर ईमान लाए हो! यहूदियों तथा ईसाइयों को सहयोगी एवं खास मित्र बनाकर उनसे दिली दोस्ती (वफ़ादारी) न रखो, क्योंकि यहूदी अपने धर्म वालों से दोस्ती (वफ़ादारी) रखते हैं और ईसाई अपने धर्म वालों से दोस्ती (वफ़ादारी) रखते हैं और दोनों समूह तुम्हारी दुश्मनी में एकजुट हैं। अतः तुममें से जो उनसे दोस्ती रखेगा, वह उन्हीं में गिना जाएगा। निःसंदेह अल्लाह काफ़िरों से दोस्ती (वफ़ादारी) रखकर अपने ऊपर अत्याचार करने वाले लोगों को सीधा मार्ग नहीं दिखाता।
आयत 52
فَتَرَى ٱلَّذِينَ فِى قُلُوبِهِم مَّرَضٌۭ يُسَـٰرِعُونَ فِيهِمْ يَقُولُونَ نَخْشَىٰٓ أَن تُصِيبَنَا دَآئِرَةٌۭ ۚ فَعَسَى ٱللَّهُ أَن يَأْتِىَ بِٱلْفَتْحِ أَوْ أَمْرٍۢ مِّنْ عِندِهِۦ فَيُصْبِحُوا۟ عَلَىٰ مَآ أَسَرُّوا۟ فِىٓ أَنفُسِهِمْ نَـٰدِمِينَ
فَتَرَى
फिर आप देखेंगे
ٱلَّذِينَ
उन्हें
فِى
in
قُلُوبِهِم
दिलों में जिनके
مَّرَضٌۭ
बीमारी है
يُسَـٰرِعُونَ
वो दौड़ धूप करते हैं
فِيهِمْ
उनमें
يَقُولُونَ
वो कहते हैं
نَخْشَىٰٓ
हम डरते हैं
أَن
कि
تُصِيبَنَا
पहुँचेगी हमें
دَآئِرَ ةٌۭ ۚ
कोई गर्दिश/मुसीबत
فَعَسَى
तो उम्मीद है
ٱللَّهُ
अल्लाह
أَن
कि
يَأْتِىَ
वो ले आए
بِٱلْفَتْحِ
फ़तह
أَوْ
या
أَمْرٍۢ
कोई हुक्म
مِّنْ
from
عِندِهِۦ
अपनी तरफ़ से
فَيُصْبِحُوا۟
फिर वो हो जाऐं
عَلَىٰ
उस पर
مَآ
जो
أَسَرُّوا۟
उन्होंने छुपाया
فِىٓ
within
أَنفُسِهِمْ
अपने नफ़्सों में
نَـٰدِمِينَ
नादिम
तो तुम देखते हो कि जिन लोगों के दिलों में रोग है, वे उनके यहाँ जाकर उनके बीच दौड़-धूप कर रहे है। वे कहते है, "हमें भय है कि कहीं हम किसी संकट में न ग्रस्त हो जाएँ।" तो सम्भव है कि जल्द ही अल्लाह (तुम्हे) विजय प्रदान करे या उसकी ओर से कोई और बात प्रकट हो। फिर तो ये लोग जो कुछ अपने जी में छिपाए हुए है, उसपर लज्जित होंगे
तफ़्सीर:
तो (ऐ रसूल!) आप कमज़ोर ईमान वाले मुनाफ़िक़ों को यहूदियों तथा ईसाइयों से दोस्ती करने के लिए दौड़ते हुए देखेंगे, कहते हैं : ''हमें डर है कि ये लोग जीत हासिल कर लेंगे, और उनके पास राज्य होगा, फिर हमें उनसे नुक़सान पहुँचेगा।'' तो संभव है कि अल्लाह अपने रसूल तथा मोमिनों को जीत प्रदान कर दे, या अपनी ओर से कोई ऐसा मामला प्रकट कर दे, जिससे यहूदियों और उनके सहयोगियों का प्रभाव (दबदबा) समाप्त हो जाए। फिर उनसे दोस्ती करने के लिए जल्दी करने वाले अपने दिलों में छिपाए हुए निफ़ाक़ पर लज्जित होंगे; क्योंकि जिन कमज़ोर कारणों का उन्होंने सहारा लिया था सब व्यर्थ हो गया।
आयत 53
وَيَقُولُ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ أَهَـٰٓؤُلَآءِ ٱلَّذِينَ أَقْسَمُوا۟ بِٱللَّهِ جَهْدَ أَيْمَـٰنِهِمْ ۙ إِنَّهُمْ لَمَعَكُمْ ۚ حَبِطَتْ أَعْمَـٰلُهُمْ فَأَصْبَحُوا۟ خَـٰسِرِينَ
وَيَقُولُ
और कहते हैं
ٱلَّذِينَ
वो जो
ءَامَنُوٓا۟
ईमान लाए
أَهَـٰٓؤُلَآءِ
क्या ये हैं
ٱلَّذِينَ
वो जिन्होंने
أَقْسَمُوا۟
क़समें खाईं
بِٱللَّهِ
अल्लाह की
جَهْدَ
पक्की
أَيْمَـٰنِهِمْ ۙ
क़समें अपनी
إِنَّهُمْ
कि बेशक वो
لَمَعَكُمْ ۚ
अलबत्ता साथ हैं तुम्हारे
حَبِطَتْ
ज़ाया हो गए
أَعْمَـٰلُهُمْ
आमाल उनके
فَأَصْبَحُوا۟
पस वो हो गए
خَـٰسِرِينَ
ख़सारा पाने वाले
उस समय ईमानवाले कहेंगे, "क्या ये वही लोग है जो अल्लाह की कड़ी-कड़ी क़समें खाकर विश्वास दिलाते थे कि हम तुम्हारे साथ है?" इनका किया-धरा सब अकारथ गया और ये घाटे में पड़कर रहे
तफ़्सीर:
ईमान वाले, इन मुनाफ़िक़ों (पाखंडियों) की स्थिति से चकित होकर कहते हैं : क्या यही लोग हैं जिन्होंने अपनी क़समों की पुष्टि करते हुए यह क़सम खाई थी : निःसंदेह वे ईमान, समर्थन और निष्ठा (वफ़ादारी) में (ऐ ईमान वालो!) तुम्हारे साथ हैं?! उनके कार्य व्यर्थ हो गए। अतः वे अपने उद्देश्य को खो देने और उनके लिए तैयार किए जाने वाले अज़ाब के कारण घाटा उठाने वाले हो गए।
आयत 54
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ مَن يَرْتَدَّ مِنكُمْ عَن دِينِهِۦ فَسَوْفَ يَأْتِى ٱللَّهُ بِقَوْمٍۢ يُحِبُّهُمْ وَيُحِبُّونَهُۥٓ أَذِلَّةٍ عَلَى ٱلْمُؤْمِنِينَ أَعِزَّةٍ عَلَى ٱلْكَـٰفِرِينَ يُجَـٰهِدُونَ فِى سَبِيلِ ٱللَّهِ وَلَا يَخَافُونَ لَوْمَةَ لَآئِمٍۢ ۚ ذَٰلِكَ فَضْلُ ٱللَّهِ يُؤْتِيهِ مَن يَشَآءُ ۚ وَٱللَّهُ وَٰسِعٌ عَلِيمٌ
يَـٰٓأَيُّهَا
O you
ٱلَّذِينَ
ऐ लोगो जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए हो
مَن
जो कोई
يَرْتَدَّ
फिर जाएगा
مِنكُمْ
तुम में से
عَن
from
دِينِهِۦ
अपने दीन से
فَسَوْفَ
तो अनक़रीब
يَأْتِى
ले आएगा
ٱللَّهُ
अल्लाह
بِقَوْمٍۢ
ऐसे लोग
يُحِبُّهُمْ
वो मोहब्बत करेगा उनसे
وَيُحِبُّونَهُۥٓ
और वो मोहब्बत करेंगे उससे
أَذِلَّةٍ
बहुत नर्म (होंगे)
عَلَى
towards
ٱلْمُؤْمِنِينَ
मोमिनों पर
أَعِزَّةٍ
बहुत सख़्त
عَلَى
towards
ٱلْكَـٰفِرِينَ
काफ़िरों पर
يُجَـٰهِدُونَ
वो जिहाद करेंगे
فِى
in
سَبِيلِ
(the) way
ٱللَّهِ
अल्लाह के रास्ते में
وَلَا
और ना
يَخَافُونَ
वो डरेंगे
لَوْمَةَ
मलामत से
لَآئِمٍۢ ۚ
मलामत करने वाले की
ذَٰلِكَ
ये
فَضْلُ
फ़ज़ल है
ٱللَّهِ
अल्लाह का
يُؤْتِيهِ
वो देता है उसे
مَن
जिसे
يَشَآءُ ۚ
वो चाहता है
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
وَٰسِعٌ
वुसअत वाला है
عَلِيمٌ
ख़ूब इल्म वाला है
ऐ ईमान लानेवालो! तुममें से जो कोई अपने धर्म से फिरेगा तो अल्लाह जल्द ही ऐसे लोगों को लाएगा जिनसे उसे प्रेम होगा और जो उससे प्रेम करेंगे। वे ईमानवालों के प्रति नरम और अविश्वासियों के प्रति कठोर होंगे। अल्लाह की राह में जी-तोड़ कोशिश करेंगे और किसी भर्त्सना करनेवाले की भर्त्सना से न डरेंगे। यह अल्लाह का उदार अनुग्रह है, जिसे चाहता है प्रदान करता है। अल्लाह बड़ी समाईवाला, सर्वज्ञ है
तफ़्सीर:
ऐ ईमान वालो! तुममें से जो कोई अपने धर्म को छोड़कर कुफ़्र की ओर पलट जाए, तो अल्लाह उनके बदले ऐसे लोगों को लाएगा, जिनसे वह उनके सीधे मार्ग पर चलने के कारण प्रेम करेगा तथा वे उससे प्रेम करेंगे, वे ईमान वालों के प्रति दयालु तथा काफ़िरों पर बहुत सख़्त होंगे। वे अपने मालों और अपनी जानों के साथ (अल्लाह के मार्ग में) जिहाद करेंगे, ताकि अल्लाह का वचन सर्वोच्च हो। वे निंदा करने वालों की निंदा से नहीं डरेंगे, क्योंकि वे अल्लाह की प्रसन्नता को प्राणियों की प्रसन्नता से ऊपर रखने वाले होंगे। यह अल्लाह का प्रदान है, जिसे अल्लाह अपने बंदों में से उसे देता है, जिसे वह चाहता है। अल्लाह विस्तृत अनुग्रह और उपकार वाला है। उसे मालूम है कि कौन उसके अनुग्रह के योग्य है, तो वह उसे प्रदान करता है, तथा कौन उसके लायक़ नहीं है, तो उसे वंचित कर देता है।
आयत 55
إِنَّمَا وَلِيُّكُمُ ٱللَّهُ وَرَسُولُهُۥ وَٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ ٱلَّذِينَ يُقِيمُونَ ٱلصَّلَوٰةَ وَيُؤْتُونَ ٱلزَّكَوٰةَ وَهُمْ رَٰكِعُونَ
إِنَّمَا
बेशक
وَلِيُّكُمُ
दोस्त तुम्हारा
ٱللَّهُ
अल्लाह है
وَرَسُولُهُۥ
और उसका रसूल
وَٱلَّذِينَ
और वो जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
ٱلَّذِينَ
वो जो
يُقِيمُونَ
क़ायम करते हैं
ٱلصَّلَوٰةَ
नमाज़
وَيُؤْتُونَ
और वो देते हैं
ٱلزَّكَوٰةَ
ज़कात
وَهُمْ
और वो
رَٰكِعُونَ
रुकुअ करने वाले हैं
तुम्हारे मित्र को केवल अल्लाह और उसका रसूल और वे ईमानवाले है; जो विनम्रता के साथ नमाज़ क़ायम करते है और ज़कात देते है
तफ़्सीर:
यहूदी, ईसाई तथा अन्य काफिर तुम्हारे मित्र नहीं हैं, बल्कि तुम्हारे मित्र और सहायक केवल अल्लाह, उसके रसूल और वे ईमान वाले हैं, जो पूरी तरह से नमाज़ अदा करते हैं, और अपने धन की ज़कात देते हैं तथा वे अल्लाह के प्रति विनीत और विनम्र होते हैं।
आयत 56
وَمَن يَتَوَلَّ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥ وَٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ فَإِنَّ حِزْبَ ٱللَّهِ هُمُ ٱلْغَـٰلِبُونَ
وَمَن
और जो कोई
يَتَوَلَّ
दोस्ती करेगा
ٱللَّهَ
अल्लाह से
وَرَسُولَهُۥ
और उसके रसूलों से
وَٱلَّذِينَ
और उनसे जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
فَإِنَّ
तो बेशक
حِزْبَ
गिरोह
ٱللَّهِ
अल्लाह का
هُمُ
वो ही
ٱلْغَـٰلِبُونَ
ग़ालिब आने वाले हैं
अब जो कोई अल्लाह और उसके रसूल और ईमानवालों को अपना मित्र बनाए, तो निश्चय ही अल्लाह का गिरोह प्रभावी होकर रहेगा
तफ़्सीर:
जो कोई अल्लाह, उसके रसूल तथा मोमिनों से दोस्ती रखे और उनका समर्थन करे, वह अल्लाह के दल में से है। और अल्लाह का दल ही वे लोग हैं, जो विजयी रहने वाले हैं, क्योंकि अल्लाह उनका सहायक है।
आयत 57
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ لَا تَتَّخِذُوا۟ ٱلَّذِينَ ٱتَّخَذُوا۟ دِينَكُمْ هُزُوًۭا وَلَعِبًۭا مِّنَ ٱلَّذِينَ أُوتُوا۟ ٱلْكِتَـٰبَ مِن قَبْلِكُمْ وَٱلْكُفَّارَ أَوْلِيَآءَ ۚ وَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ
يَـٰٓأَيُّهَا
O you
ٱلَّذِينَ
ऐ लोगो जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए हो
لَا
(Do) not
تَتَّخِذُوا۟
ना तुम बनाओ
ٱلَّذِينَ
उनको जिन्होंने
ٱتَّخَذُوا۟
बना लिया
دِينَكُمْ
तुम्हारे दीन को
هُزُوًۭا
मज़ाक़
وَلَعِبًۭا
और खेल
مِّنَ
from
ٱلَّذِينَ
उनमें से जो
أُوتُوا۟
दिए गए
ٱلْكِتَـٰبَ
किताब
مِن
from
قَبْلِكُمْ
तुम से पहले
وَٱلْكُفَّارَ
और काफ़िरों को
أَوْلِيَآءَ ۚ
दोस्त
وَٱتَّقُوا۟
और डरो
ٱللَّهَ
अल्लाह से
إِن
अगर
كُنتُم
हो तुम
مُّؤْمِنِينَ
ईमान लाने वाले
ऐ ईमान लानेवालो! तुमसे पहले जिनको किताब दी गई थी, जिन्होंने तुम्हारे धर्म को हँसी-खेल बना लिया है, उन्हें और इनकार करनेवालों को अपना मित्र न बनाओ। और अल्लाह का डर रखों यदि तुम ईमानवाले हो
तफ़्सीर:
ऐ ईमान वालो! उन यहूदियों और ईसाइयों को जो तुमसे पहले किताब दिए गए तथा मुश्रिकों को सहयोगी और दिली दोस्त न बनाओ, जो तुम्हारे धर्म का मज़ाक उड़ाते हैं और उसके साथ खिलवाड़ करते हैं। तथा अल्लाह से उस चीज़ से बचकर डरो, जो उसने तुम्हें उनकी दोस्ती से मना किया है, यदि तुम अल्लाह पर तथा उसपर ईमान रखने वाले हो, जो उसने तुमपर उतारा है।
आयत 58
وَإِذَا نَادَيْتُمْ إِلَى ٱلصَّلَوٰةِ ٱتَّخَذُوهَا هُزُوًۭا وَلَعِبًۭا ۚ ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ قَوْمٌۭ لَّا يَعْقِلُونَ
وَإِذَا
और जब
نَادَيْتُمْ
पुकारते हो तुम
إِلَى
for
ٱلصَّلَوٰةِ
तरफ़ नमाज़ के
ٱتَّخَذُوهَا
वो बना लेते हैं उसे
هُزُوًۭا
मज़ाक़
وَلَعِبًۭا ۚ
और खेल
ذَٰلِكَ
ये
بِأَنَّهُمْ
बवजह उसके कि वो
قَوْمٌۭ
ऐसे लोग हैं
لَّا
(who do) not
يَعْقِلُونَ
जो अक़्ल नहीं रखते
जब तुम नमाज़ के लिए पुकारते हो तो वे उसे हँसी और खेल बना लेते है। इसका कारण यह है कि वे बुद्धिहीन लोग है
तफ़्सीर:
इसी तरह, वे उस समय (भी) मज़ाक उड़ाते और खेलते हैं, जब तुम नमाज़ के लिए अज़ान देते हो, जो कि अल्लाह की निकटता का सबसे महान कार्य है। ऐसा इसलिए है क्योंकि वे ऐसे लोग हैं जो अल्लाह की उपासना के अर्थ और उन विधानों को नहीं समझते जो उसने लोगों के लिए बनाए हैं।
आयत 59
قُلْ يَـٰٓأَهْلَ ٱلْكِتَـٰبِ هَلْ تَنقِمُونَ مِنَّآ إِلَّآ أَنْ ءَامَنَّا بِٱللَّهِ وَمَآ أُنزِلَ إِلَيْنَا وَمَآ أُنزِلَ مِن قَبْلُ وَأَنَّ أَكْثَرَكُمْ فَـٰسِقُونَ
قُلْ
कह दीजिए
يَـٰٓأَهْلَ
O People
ٱلْكِتَـٰبِ
ऐ अहले किताब
هَلْ
नहीं
تَنقِمُونَ
तुम बैर/दुश्मनी रखते
مِنَّآ
हमसे
إِلَّآ
मगर
أَنْ
ये कि
ءَامَنَّا
ईमान लाए हम
بِٱللَّهِ
अल्लाह पर
وَمَآ
और जो कुछ
أُنزِلَ
नाज़िल किया गया
إِلَيْنَا
तरफ़ हमारे
وَمَآ
और जो कुछ
أُنزِلَ
नाज़िल किया गया
مِن
from
قَبْلُ
इससे पहले
وَأَنَّ
और बेशक
أَكْثَرَكُمْ
अक्सर तुम्हारे
فَـٰسِقُونَ
फ़ासिक़ हैं
कहो, "ऐ किताबवालों! क्या इसके सिवा हमारी कोई और बात तुम्हें बुरी लगती है कि हम अल्लाह और उस चीज़ पर ईमान लाए, जो हमारी ओर उतारी गई, और जो पहले उतारी जा चुकी है? और यह कि तुममें से अधिकांश लोग अवज्ञाकारी है।"
तफ़्सीर:
(ऐ रसूल!) आप अह्ले किताब के उपहास करने वालों से कह दें : क्या तुम हमें केवल इस बात का दोष देते हो कि हम अल्लाह पर ईमान लाए, और उसपर जो हमारी ओर उतारा गया और उसपर भी जो हमसे पहले के लोगों पर उतारा गया, तथा इस बात पर ईमान लाए कि तुममें से अधिकांश लोग ईमान और आदेशों का पालन छोड़कर अल्लाह की आज्ञाकारिता से बाहर हैं?! इस तरह तुम हमें जिस चीज़ का दोष देते हो, वह हमारे लिए प्रशंसा की बात है, निंदनीय नहीं।
आयत 60
قُلْ هَلْ أُنَبِّئُكُم بِشَرٍّۢ مِّن ذَٰلِكَ مَثُوبَةً عِندَ ٱللَّهِ ۚ مَن لَّعَنَهُ ٱللَّهُ وَغَضِبَ عَلَيْهِ وَجَعَلَ مِنْهُمُ ٱلْقِرَدَةَ وَٱلْخَنَازِيرَ وَعَبَدَ ٱلطَّـٰغُوتَ ۚ أُو۟لَـٰٓئِكَ شَرٌّۭ مَّكَانًۭا وَأَضَلُّ عَن سَوَآءِ ٱلسَّبِيلِ
قُلْ
कह दीजिए
هَلْ
क्या
أُنَبِّئُكُم
मैं बताऊँ तुम्हें
بِشَرٍّۢ
बदतर
مِّن
than
ذَٰلِكَ
उससे
مَثُوبَةً
बदले के ऐतबार से
عِندَ
from
ٱللَّهِ ۚ
अल्लाह के नज़दीक
مَن
वो जो
لَّعَنَهُ
लानत की हो उस पर
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
وَغَضِبَ
और वो ग़ज़बनाक हुआ
عَلَيْهِ
उस पर
وَجَعَلَ
और उसने बनाए
مِنْهُمُ
उनमें से
ٱلْقِرَدَةَ
बन्दर
وَٱلْخَنَازِيرَ
और ख़िन्ज़ीर
وَعَبَدَ
और जिसने बंदगी की
ٱلطَّـٰغُوتَ ۚ
ताग़ूत की
أُو۟لَـٰٓئِكَ
यही लोग
شَرٌّۭ
बदतरीन हैं
مَّكَانًۭا
दर्जे में
وَأَضَلُّ
और ज़्यादा भटके हुए
عَن
from
سَوَآءِ
(the) even
ٱلسَّبِيلِ
सीधे रास्ते से
कहो, "क्या मैं तुम्हें बताऊँ कि अल्लाह के यहाँ परिणाम की स्पष्ट से इससे भी बुरी नीति क्या है? कौन गिरोह है जिसपर अल्लाह की फिटकार पड़ी और जिसपर अल्लाह का प्रकोप हुआ और जिसमें से उसने बन्दर और सूअर बनाए और जिसने बढ़े हुए फ़सादी (ताग़ूत) की बन्दगी की, वे लोग (तुमसे भी) निकृष्ट दर्जे के थे। और वे (तुमसे भी अधिक) सीधे मार्ग से भटके हुए थे।"
तफ़्सीर:
(ऐ रसूल!) आप कह दें : क्या मैं तुम्हें उन लोगों के बारे में बताऊँ, जो इनकी तुलना में दोष के अधिक योग्य हैं और अधिक कठोर सज़ा के हक़दार हैं? वे इनके पूर्वज ही हैं, जिन्हें अल्लाह ने अपनी दया से निकाल दिया, उनपर क्रोधित हुआ, उन्हें विरूपण के बाद वानर और सूअर बना दिया और उनमें से कुछ लोगों को ताग़ूत का पुजारी बना दिया। 'ताग़ूत' कहते हैं जिसकी अल्लाह के अलावा इस हाल में पूजा कि जाए कि वह उससे सहमत हो। ये लोग जिनका उल्लेख किया गया है, क़ियामत के दिन सबसे खराब स्थिति में होंगे, तथा सीधे रास्ते से बहुत भटके हुए होंगे।
आयत 61
وَإِذَا جَآءُوكُمْ قَالُوٓا۟ ءَامَنَّا وَقَد دَّخَلُوا۟ بِٱلْكُفْرِ وَهُمْ قَدْ خَرَجُوا۟ بِهِۦ ۚ وَٱللَّهُ أَعْلَمُ بِمَا كَانُوا۟ يَكْتُمُونَ
وَإِذَا
और जब
جَآءُوكُمْ
वो आते हैं तुम्हारे पास
قَالُوٓا۟
वो कहते हैं
ءَامَنَّا
ईमान लाए हम
وَقَد
हालाँकि तहक़ीक़
دَّخَلُوا۟
वो दाख़िल हुए थे
بِٱلْكُفْرِ
साथ कुफ़्र के
وَهُمْ
और वो
قَدْ
यक़ीनन
خَرَجُوا۟
वो निकल गए
بِهِۦ ۚ
साथ उसी के
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
أَعْلَمُ
ज़्यादा जानता है
بِمَا
उसको जो
كَانُوا۟
थे वो
يَكْتُمُونَ
वो छुपाते
जब वे (यहूदी) तुम लोगों के पास आते है तो कहते है, "हम ईमान ले आए।" हालाँकि वे इनकार के साथ आए थे और उसी के साथ चले गए। अल्लाह भली-भाँति जानता है जो कुछ वे छिपाते है
तफ़्सीर:
(ऐ ईमान वालो!) जब उनमें से मुनाफ़िक़ लोग तुम्हारे पास आते हैं, तो वे अपने निफ़ाक़ के कारण तुम्हारे सामने ईमान को ज़ाहिर करते हैं। जबकि सच्चाई यह है कि वे प्रवेश करते और निकलते समय कुफ़्र में लिप्त होते हैं, उससे अलग नहीं होते। तथा अल्लाह उस कुफ़्र को अच्छी तरह जानता है जो वे अपने दिलों में छिपाते हैं, यदि वे तुम्हारे सामने ईमान को ज़ाहिर करते हैं और वह शीघ्र ही उन्हें उसका प्रतिफल देगा।
आयत 62
وَتَرَىٰ كَثِيرًۭا مِّنْهُمْ يُسَـٰرِعُونَ فِى ٱلْإِثْمِ وَٱلْعُدْوَٰنِ وَأَكْلِهِمُ ٱلسُّحْتَ ۚ لَبِئْسَ مَا كَانُوا۟ يَعْمَلُونَ
وَتَرَىٰ
और आप देखेंगे
كَثِيرًۭا
कसीर तादाद को
مِّنْهُمْ
उनमें से
يُسَـٰرِعُونَ
वो दौड़ धूप करते हैं
فِى
into
ٱلْإِثْمِ
गुनाह में
وَٱلْعُدْوَٰنِ
और ज़्यादती में
وَأَكْلِهِمُ
और अपने खाने में
ٱلسُّحْتَ ۚ
हराम को
لَبِئْسَ
अलबत्ता कितना बुरा है
مَا
जो
كَانُوا۟
थे वो
يَعْمَلُونَ
वो अमल करते
तुम देखते हो कि उनमें से बहुतेरे लोग हक़ मारने, ज़्यादती करने और हरामख़ोरी में बड़ी तेज़ी दिखाते है। निश्चय ही बहुत ही बुरा है, जो वे कर रहे है
तफ़्सीर:
(ऐ रसूल!) आप देखेंगे कि बहुत से यहूदी और मुनाफ़िक़ पाप करने के लिए जल्दी करते हैं, जैसे कि झूठ बोलना, दूसरों पर अत्याचार करना और लोगों के माल को निषिद्ध तरीक़े से खाना। बहुत बुरा है जो कुछ वे कर रहे हैं।
आयत 63
لَوْلَا يَنْهَىٰهُمُ ٱلرَّبَّـٰنِيُّونَ وَٱلْأَحْبَارُ عَن قَوْلِهِمُ ٱلْإِثْمَ وَأَكْلِهِمُ ٱلسُّحْتَ ۚ لَبِئْسَ مَا كَانُوا۟ يَصْنَعُونَ
لَوْلَا
क्यों नहीं
يَنْهَىٰهُمُ
रोकते उन्हें
ٱلرَّبَّـٰنِيُّونَ
रब्बानी/रब वाले
وَٱلْأَحْبَارُ
और उलेमा
عَن
from
قَوْلِهِمُ
उनके क़ौल से
ٱلْإِثْمَ
गुनाह के
وَأَكْلِهِمُ
और उनके खाने से
ٱلسُّحْتَ ۚ
हराम को
لَبِئْسَ
अलबत्ता कितना बुरा है
مَا
जो
كَانُوا۟
थे वो
يَصْنَعُونَ
वो करते/बनाते
उनके सन्त और धर्मज्ञाता उन्हें गुनाह की बात बकने और हराम खाने से क्यों नहीं रोकते? निश्चय ही बहुत बुरा है जो काम वे कर रहे है
तफ़्सीर:
उनके इमाम (पथ-प्रदर्शक) और विद्वान उन्हें झूठ बोलने, झूठी गवाही देने तथा अवैध रूप से लोगों का धन खाने से क्यों नहीं रोकते? उनके इमामों और विद्वानों का रवैया जो उन्हें बुराई करने से मना नहीं करते, बहुत बुरा है।
आयत 64
وَقَالَتِ ٱلْيَهُودُ يَدُ ٱللَّهِ مَغْلُولَةٌ ۚ غُلَّتْ أَيْدِيهِمْ وَلُعِنُوا۟ بِمَا قَالُوا۟ ۘ بَلْ يَدَاهُ مَبْسُوطَتَانِ يُنفِقُ كَيْفَ يَشَآءُ ۚ وَلَيَزِيدَنَّ كَثِيرًۭا مِّنْهُم مَّآ أُنزِلَ إِلَيْكَ مِن رَّبِّكَ طُغْيَـٰنًۭا وَكُفْرًۭا ۚ وَأَلْقَيْنَا بَيْنَهُمُ ٱلْعَدَٰوَةَ وَٱلْبَغْضَآءَ إِلَىٰ يَوْمِ ٱلْقِيَـٰمَةِ ۚ كُلَّمَآ أَوْقَدُوا۟ نَارًۭا لِّلْحَرْبِ أَطْفَأَهَا ٱللَّهُ ۚ وَيَسْعَوْنَ فِى ٱلْأَرْضِ فَسَادًۭا ۚ وَٱللَّهُ لَا يُحِبُّ ٱلْمُفْسِدِينَ
وَقَالَتِ
और कहा
ٱلْيَهُودُ
यहूद ने
يَدُ
हाथ
ٱللَّهِ
अल्लाह का
مَغْلُولَةٌ ۚ
बँधा हुआ है
غُلَّتْ
बाँध दिए गए
أَيْدِيهِمْ
हाथ उनके
وَلُعِنُوا۟
और वो लानत किए गए
بِمَا
बवजह उसके जो
قَالُوا۟ ۘ
उन्होंने कहा
بَلْ
बल्कि
يَدَاهُ
उसके दोनों हाथ
مَبْسُوطَتَانِ
दोनों खुले हुए हैं
يُنفِقُ
वो ख़र्च करता है
كَيْفَ
जिस तरह
يَشَآءُ ۚ
वो चाहता है
وَلَيَزِيدَنَّ
और अलबत्ता वो ज़रूर ज़्यादा कर देगा
كَثِيرًۭا
कसीर तादाद को
مِّنْهُم
उनमें से
مَّآ
जो कुछ
أُنزِلَ
नाज़िल किया गया
إِلَيْكَ
तरफ़ आपके
مِن
from
رَّبِّكَ
आपके रब की तरफ़ से
طُغْيَـٰنًۭا
सरकशी में
وَكُفْرًۭا ۚ
और कुफ़्र में
وَأَلْقَيْنَا
और डाल दी हमने
بَيْنَهُمُ
दर्मियान उनके
ٱلْعَدَٰوَةَ
अदावत
وَٱلْبَغْضَآءَ
और बुग़्ज़
إِلَىٰ
till
يَوْمِ
(the) Day
ٱلْقِيَـٰمَةِ ۚ
क़यामत के दिन तक
كُلَّمَآ
जब कभी
أَوْقَدُوا۟
उन्होंने भड़काई
نَارًۭا
आग
لِّلْحَرْبِ
जंग के लिए
أَطْفَأَهَا
बुझा दिया उसे
ٱللَّهُ ۚ
अल्लाह ने
وَيَسْعَوْنَ
और वो दौड़ धूप करते हैं
فِى
in
ٱلْأَرْضِ
ज़मीन में
فَسَادًۭا ۚ
फ़साद की
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
لَا
(does) not
يُحِبُّ
नहीं वो पसंद करता
ٱلْمُفْسِدِينَ
फ़साद करने वालों को
और यहूदी कहते है, "अल्लाह का हाथ बँध गया है।" उन्हीं के हाथ-बँधे है, और फिटकार है उनपर, उस बकबास के कारण जो वे करते है, बल्कि उसके दोनो हाथ तो खुले हुए है। वह जिस तरह चाहता है, ख़र्च करता है। जो कुछ तुम्हारे रब की ओर से तुम्हारी ओर उतारा गया है, उससे अवश्य ही उनके अधिकतर लोगों की सरकशी और इनकार ही में अभिवृद्धि होगी। और हमने उनके बीच क़ियामत तक के लिए शत्रुता और द्वेष डाल दिया है। वे जब भी युद्ध की आग भड़काते है, अल्लाह उसे बुझा देता है। वे धरती में बिगाड़ फैलाने के लिए प्रयास कर रहे है, हालाँकि अल्लाह बिगाड़ फैलानेवालों को पसन्द नहीं करता
तफ़्सीर:
जब यहूदी कठिनाई और अकाल से पीड़ित हुए, तो कहने लगे : अल्लाह का हाथ दान करने तथा प्रदान करने से रुका हुआ है, उसके पास जो कुछ है उसे हमसे रोक रखा है। सुन लो, उनके हाथ भलाई करने और दान करने से बाँध दिए गए, और वे अपने इस कथन के कारण अल्लाह की दया से वंचित कर दिए गए। बल्कि अल्लाह सर्वशक्तिमान के दोनों हाथ भलाई और दान के साथ खुले हुए हैं, वह जैसे चाहता है, खर्च करता है। कभी विस्तार करता और कभी तंगी करता है। न कोई उसे रोकने वाला है, न कोई मजबूर करने वाला। और (ऐ रसूल!) आपकी ओर जो उतारा गया है, वह यहूदियों को सीमा के उल्लंघन और इनकार ही में बढ़ाता है; क्योंकि उनके दिल ईर्ष्या से भरे हुए हैं। तथा हमने यहूदियों के संप्रदायों के बीच शत्रुता और द्वेष डाल दिया। जब भी वे युद्ध के लिए इकट्ठे होते हैं और उसकी तैयारी करते हैं या उसे भड़काने की साज़िश रचते हैं, तो अल्लाह उन्हें तितर-बितर कर देता है और उनकी शक्ति छीन लेता है। तथा वे निरंतर ऐसा कार्य करने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे धरती पर उपद्रव हो, जैसे कि इस्लाम को खत्म करने और उसके विरुद्ध साज़िश रचने का प्रयास। और अल्लाह उपद्रव करने वालों से प्रेम नहीं करता।
आयत 65
وَلَوْ أَنَّ أَهْلَ ٱلْكِتَـٰبِ ءَامَنُوا۟ وَٱتَّقَوْا۟ لَكَفَّرْنَا عَنْهُمْ سَيِّـَٔاتِهِمْ وَلَأَدْخَلْنَـٰهُمْ جَنَّـٰتِ ٱلنَّعِيمِ
وَلَوْ
और अगर
أَنَّ
बेशक
أَهْلَ
(the) People
ٱلْكِتَـٰبِ
अहले किताब
ءَامَنُوا۟
ईमान लाते
وَٱتَّقَوْا۟
और तक़वा करते
لَكَفَّرْنَا
अलबत्ता दूर कर देते हम
عَنْهُمْ
उनसे
سَيِّـَٔاتِهِمْ
बुराईयाँ उनकी
وَلَأَدْخَلْنَـٰهُمْ
और अलबत्ता हम दाख़िल करते उन्हें
جَنَّـٰتِ
बाग़ों में
ٱلنَّعِيمِ
नेअमतों वाले
और यदि किताबवाले ईमान लाते और (अल्लाह का) डर रखते तो हम उनकी बुराइयाँ उनसे दूर कर देते और उन्हें नेमत भरी जन्नतों में दाख़िल कर देते
तफ़्सीर:
यदि यहूदी और ईसाई मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम द्वारा लाई हुई शरीयत पर ईमान ले आते तथा पापों से बचकर अल्लाह से डरते, तो हम अवश्य उनके द्वारा किए गए पापों को उनसे दूर कर देते, भले ही वे बहुत थे। तथा हम अवश्य उन्हें क़ियामत के दिन नेमतों वाली जन्नतों में दाख़िल करते, जिसमें वे निर्बाध नेमतों का आनंद लेते।
आयत 66
وَلَوْ أَنَّهُمْ أَقَامُوا۟ ٱلتَّوْرَىٰةَ وَٱلْإِنجِيلَ وَمَآ أُنزِلَ إِلَيْهِم مِّن رَّبِّهِمْ لَأَكَلُوا۟ مِن فَوْقِهِمْ وَمِن تَحْتِ أَرْجُلِهِم ۚ مِّنْهُمْ أُمَّةٌۭ مُّقْتَصِدَةٌۭ ۖ وَكَثِيرٌۭ مِّنْهُمْ سَآءَ مَا يَعْمَلُونَ
وَلَوْ
और अगर
أَنَّهُمْ
बेशक वो
أَقَامُوا۟
क़ायम करते
ٱلتَّوْرَىٰةَ
तौरात को
وَٱلْإِنجِيلَ
और इन्जील को
وَمَآ
और जो
أُنزِلَ
नाज़िल किया गया
إِلَيْهِم
तरफ़ उनके
مِّن
from
رَّبِّهِمْ
उनके रब की तरफ़ से
لَأَكَلُوا۟
अलबत्ता वो खाते
مِن
from
فَوْقِهِمْ
अपने ऊपर से
وَمِن
and from
تَحْتِ
और नीचे से
أَرْجُلِهِم ۚ
अपने पाँव के
مِّنْهُمْ
उनमें से
أُمَّةٌۭ
एक गिरोह
مُّقْتَصِدَةٌۭ ۖ
मयाना रु है
وَكَثِيرٌۭ
और बहुत से
مِّنْهُمْ
उनमें से
سَآءَ
बहुत बुरा है
مَا
जो
يَعْمَلُونَ
वो अमल करते हैं
और यदि वे तौरात और इनजील को और जो कुछ उनके रब की ओर से उनकी ओर उतारा गया है, उसे क़ायम रखते, तो उन्हें अपने ऊपर से भी खाने को मिलता और अपने पाँव के नीचे से भी। उनमें से एक गिरोह सीधे मार्ग पर चलनेवाला भी है, किन्तु उनमें से अधिकतर ऐसे है कि जो भी करते है बुरा होता है
तफ़्सीर:
यदि यहूदी उसके अनुसार काम करते जो तौरात में है, तथा ईसाई उसके अनुसार काम करते जो इंजील में है और वे सभी उसके अनुसार काम करते जो उनपर क़ुरआन उतारा गया है - तो मैं उनके लिए बारिश उतारने और अन्न उगाने जैसे जीविका के साधन सुगम कर देता। किताब वालों में से कुछ लोग सत्य पर स्थिर मध्यम मार्ग वाले हैं। जबकि उनमें से बहुत से लोग ईमान न होने के कारण बुरे कार्य करने वाले हैं।
आयत 67
۞ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلرَّسُولُ بَلِّغْ مَآ أُنزِلَ إِلَيْكَ مِن رَّبِّكَ ۖ وَإِن لَّمْ تَفْعَلْ فَمَا بَلَّغْتَ رِسَالَتَهُۥ ۚ وَٱللَّهُ يَعْصِمُكَ مِنَ ٱلنَّاسِ ۗ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يَهْدِى ٱلْقَوْمَ ٱلْكَـٰفِرِينَ
۞ يَـٰٓأَيُّهَا
ऐ
ٱلرَّسُولُ
रसूल
بَلِّغْ
पहुँचा दीजिए
مَآ
जो
أُنزِلَ
नाज़िल किया गया
إِلَيْكَ
तरफ़ आपके
مِن
from
رَّبِّكَ ۖ
आपके रब की तरफ़ से
وَإِن
और अगर
لَّمْ
ना
تَفْعَلْ
आपने किया (ऐसा)
فَمَا
तो नहीं
بَلَّغْتَ
पहुँचाया आपने
رِسَالَتَهُۥ ۚ
पैग़ाम उसका
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
يَعْصِمُكَ
वो बचाएगा आपको
مِنَ
from
ٱلنَّاسِ ۗ
लोगों से
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
لَا
(does) not
يَهْدِى
नहीं हिदायत देता
ٱلْقَوْمَ
उस क़ौम को
ٱلْكَـٰفِرِينَ
जो काफ़िर है
ऐ रसूल! तुम्हारे रब की ओर से तुम पर जो कुछ उतारा गया है, उसे पहुँचा दो। यदि ऐसा न किया तो तुमने उसका सन्देश नहीं पहुँचाया। अल्लाह तुम्हें लोगों (की बुराइयों) से बचाएगा। निश्चय ही अल्लाह इनकार करनेवाले लोगों को मार्ग नहीं दिखाता
तफ़्सीर:
ऐ रसूल! जो कुछ आपके पालनहार की ओर से आपपर उतारा गया है, उसे पूरी तरह से पहुँचा दें, उसमें से कुछ भी न छिपाएँ। यदि आपने उसमें से कुछ भी छिपा लिया, तो आप अपने रब के संदेश को पहुँचाने वाले नहीं माने जाएँगे। (वस्तुतः अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने हर उस चीज़ को पहुँचा दिया है, जिसके पहुँचाने का आपको आदेश दिया गया था। अतः जो कोई भी इसके विपरीत दावा करे, तो निःसंदेह उसने अल्लाह के खिलाफ़ सबसे बड़ा झूठ बोला है)। तथा अल्लाह आज के बाद लोगों से आपकी रक्षा करेगा। इसलिए वे आप तक बुराई के साथ नहीं पहुँच सकते। अतः आपका काम केवल पहुँचा देना है। और अल्लाह उन काफ़िरों को मार्गदर्शन नहीं प्रदान करता, जो मार्गदर्शन नहीं चाहते हैं।
आयत 68
قُلْ يَـٰٓأَهْلَ ٱلْكِتَـٰبِ لَسْتُمْ عَلَىٰ شَىْءٍ حَتَّىٰ تُقِيمُوا۟ ٱلتَّوْرَىٰةَ وَٱلْإِنجِيلَ وَمَآ أُنزِلَ إِلَيْكُم مِّن رَّبِّكُمْ ۗ وَلَيَزِيدَنَّ كَثِيرًۭا مِّنْهُم مَّآ أُنزِلَ إِلَيْكَ مِن رَّبِّكَ طُغْيَـٰنًۭا وَكُفْرًۭا ۖ فَلَا تَأْسَ عَلَى ٱلْقَوْمِ ٱلْكَـٰفِرِينَ
قُلْ
कह दीजिए
يَـٰٓأَهْلَ
O People
ٱلْكِتَـٰبِ
ऐ अहले किताब
لَسْتُمْ
नहीं हो तुम
عَلَىٰ
on
شَىْءٍ
किसी चीज़ पर
حَتَّىٰ
यहाँ तक कि
تُقِيمُوا۟
तुम क़ायम करो
ٱلتَّوْرَىٰةَ
तौरात को
وَٱلْإِنجِيلَ
और इन्जील को
وَمَآ
और जो
أُنزِلَ
नाज़िल किया गया
إِلَيْكُم
तरफ़ तुम्हारे
مِّن
from
رَّبِّكُمْ ۗ
तुम्हारे रब की तरफ़ से
وَلَيَزِيدَنَّ
और अलबत्ता वो ज़रूर ज़्यादा कर देगा
كَثِيرًۭا
कसीर तादाद को
مِّنْهُم
उनमें से
مَّآ
जो कुछ
أُنزِلَ
नाज़िल किया गया
إِلَيْكَ
तरफ़ आपके
مِن
from
رَّبِّكَ
आपके रब की तरफ़ से
طُغْيَـٰنًۭا
सरकशी में
وَكُفْرًۭا ۖ
और कुफ़्र में
فَلَا
पस ना
تَأْسَ
आप अफ़सोस कीजिए
عَلَى
over
ٱلْقَوْمِ
इस क़ौम पर
ٱلْكَـٰفِرِينَ
जो काफ़िर है
कह दो, ॅ"ऐ किताबवालो! तुम किसी भी चीज़ पर नहीं हो, जब तक कि तौरात और इनजील को और जो कुछ तुम्हारे रब की ओर से तुम्हारी ओर अवतरित हुआ है, उसे क़ायम न रखो।" किन्तु (ऐ नबी!) तुम्हारे रब की ओर से तुम्हारी ओर जो कुछ अवतरित हुआ है, वह अवश्य ही उनमें से बहुतों की सरकशी और इनकार में अभिवृद्धि करनेवाला है। अतः तुम इनकार करनेवाले लोगों की दशा पर दुखी न होना
तफ़्सीर:
(ऐ रसूल!) आप कह दें : (ऐ यहूदियो तथा ईसाइयो!) तुम धर्म की किसी गणनीय चीज़ पर नहीं हो, यहाँ तक कि तुम उसके अनुसार काम करो जो कुछ तौरात और इंजील में है तथा उस क़ुरआन पर अमल करो जो तुमपर उतारा गया है, कि जिसपर ईमान लाए और उसकी शिक्षाओं पर अमल किए बिना तुम्हारा ईमान सही नहीं हो सकता। तथा निश्चय ही आपकी ओर आपके पालनहार की तरफ़ से जो पुस्तक उतारी गई है, वह बहुत से किताब वालों को, उनकी ईर्ष्या के कारण, सरकशी और कुफ़्र में अवश्य बढ़ा देगी।अतः आप इन काफ़िरों पर खेद न करें। तथा ईमान वालों में से जो आपका अनुसरण करने वाले हैं, वही आपके लिए काफ़ी हैं।
आयत 69
إِنَّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَٱلَّذِينَ هَادُوا۟ وَٱلصَّـٰبِـُٔونَ وَٱلنَّصَـٰرَىٰ مَنْ ءَامَنَ بِٱللَّهِ وَٱلْيَوْمِ ٱلْـَٔاخِرِ وَعَمِلَ صَـٰلِحًۭا فَلَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَ
إِنَّ
बेशक
ٱلَّذِينَ
वो जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
وَٱلَّذِينَ
और जो
هَادُوا۟
यहूदी बन गए
وَٱلصَّـٰبِـُٔونَ
और जो साबी हैं
وَٱلنَّصَـٰرَىٰ
और जो नसारा हैं
مَنْ
जो कोई
ءَامَنَ
ईमान लाया
بِٱللَّهِ
अल्लाह पर
وَٱلْيَوْمِ
and the Day
ٱلْـَٔاخِرِ
और आख़िरी दिन पर
وَعَمِلَ
और उसने अमल किए
صَـٰلِحًۭا
नेक
فَلَا
तो ना
خَوْفٌ
कोई खौफ़ होगा
عَلَيْهِمْ
उन पर
وَلَا
और ना
هُمْ
वो
يَحْزَنُونَ
वो ग़मगीन होंगे
निस्संदेह वे लोग जो ईमान लाए है और जो यहूदी हुए है और साबई और ईसाई, उनमें से जो कोई भी अल्लाह और अन्तिम दिन पर ईमान लाए और अच्छा कर्म करे तो ऐसे लोगों को न तो कोई डर होगा और न वे शोकाकुल होंगे
तफ़्सीर:
मोमिन, यहूदी, साबी (ये किसी नबी को मानने वालों का एक समूह था) तथा ईसाई, इनमें से जो कोई भी अल्लाह तथा अंतिम दिन पर ईमान लाए और अच्छे कर्म करे, तो ऐसे लोगों को उस चीज़ के बारे में जिसका वे सामना करने वाले हैं न कोई भय है, और न ही दुनिया में से जो चीज़ उनसे छूट गई है, उसके लिए उन्हें कोई मलाल होगा।
आयत 70
لَقَدْ أَخَذْنَا مِيثَـٰقَ بَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ وَأَرْسَلْنَآ إِلَيْهِمْ رُسُلًۭا ۖ كُلَّمَا جَآءَهُمْ رَسُولٌۢ بِمَا لَا تَهْوَىٰٓ أَنفُسُهُمْ فَرِيقًۭا كَذَّبُوا۟ وَفَرِيقًۭا يَقْتُلُونَ
لَقَدْ
अलबत्ता तहक़ीक़
أَخَذْنَا
लिया हमने
مِيثَـٰقَ
पुख़्ता अहद
بَنِىٓ
(from the) Children
إِسْرَٰٓءِيلَ
बनी इस्राईल से
وَأَرْسَلْنَآ
और भेजे हमने
إِلَيْهِمْ
तरफ़ उनके
رُسُلًۭا ۖ
कई रसूल
كُلَّمَا
जब कभी
جَآءَهُمْ
आया उनके पास
رَسُولٌۢ
कोई रसूल
بِمَا
साथ उसके जो
لَا
not
تَهْوَىٰٓ
नहीं चाहते थे
أَنفُسُهُمْ
नफ़्स उनके
فَرِيقًۭا
एक गिरोह को
كَذَّبُوا۟
उन्होंने झुठलाया
وَفَرِيقًۭا
और एक गिरोह को
يَقْتُلُونَ
वो क़त्ल करते थे
हमने इसराईल की सन्तान से दृढ़ वचन लिया और उनकी ओर रसूल भेजे। उनके पास जब भी कोई रसूल वह कुछ लेकर आया जो उन्हें पसन्द न था, तो कितनों को तो उन्होंने झुठलाया और कितनों की हत्या करने लगे
तफ़्सीर:
हमने बनी इसराईल से सुनने और मानने का दृढ़ वचन लिया, और हमने उनकी ओर रसूल भेजे ताकि उन्हें अल्लाह की शरीयत (नियम) पहुँचाएँ। परंतु उन्होंने उस वचन को तोड़ दिया जो उनसे लिया गया था, तथा उन्होंने अपनी इच्छाओं के पीछे चलते हुए उस चीज़ से उपेक्षा की जो उनके रसूल उनके पास लेकर आए थे, तथा उनमें से कुछ को झुठला दिया तथा कुछ को क़त्ल कर दिया।
आयत 71
وَحَسِبُوٓا۟ أَلَّا تَكُونَ فِتْنَةٌۭ فَعَمُوا۟ وَصَمُّوا۟ ثُمَّ تَابَ ٱللَّهُ عَلَيْهِمْ ثُمَّ عَمُوا۟ وَصَمُّوا۟ كَثِيرٌۭ مِّنْهُمْ ۚ وَٱللَّهُ بَصِيرٌۢ بِمَا يَعْمَلُونَ
وَحَسِبُوٓا۟
और उन्होंने समझा
أَلَّا
कि ना
تَكُونَ
होगा
فِتْنَةٌۭ
कोई फ़ितना
فَعَمُوا۟
तो वो अन्धे हो गए
وَصَمُّوا۟
और वो बहरे हो गए
ثُمَّ
फिर
تَابَ
मेहरबान हुआ
ٱللَّهُ
अल्लाह
عَلَيْهِمْ
उन पर
ثُمَّ
फिर
عَمُوا۟
वो अन्धे हो गए
وَصَمُّوا۟
और बहरे हो गए
كَثِيرٌۭ
अक्सर
مِّنْهُمْ ۚ
उनमें से
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
بَصِيرٌۢ
ख़ूब देखने वाला है
بِمَا
उसको जो
يَعْمَلُونَ
वो अमल करते हैं
और उन्होंने समझा कि कोई आपदा न आएगी; इसलिए वे अंधे और बहरे बन गए। फिर अल्लाह ने उनपर दयादृष्टि की, फिर भी उनमें से बहुत-से अंधे और बहरे हो गए। अल्लाह देख रहा है, जो कुछ वे करते है
तफ़्सीर:
उन्होंने सोचा कि उनके अनुबंधों और वचनों को तोड़ने, तथा नबियों को झुठलाने और उन्हें क़त्ल करने के परिणामस्वरूप उन्हें कोई नुक़सान नहीं होगा। परंतु उसका वह परिणाम सामने आया जो उन्होंने नहीं सोचा था। चुनाँचे वे सत्य से अंधे हो गए, उन्हें उसका रास्ता नज़र नहीं आता, तथा वे उसे स्वीकार करने के इरादे से सुनने से बहरे हो गए। फिर अल्लाह ने अपने अनुग्रह से उनकी तौबा क़बूल की। फिर इसके बाद वे पुनः सत्य से अंधे हो गए, और उसे सुनने से बहरे हो गए। उनमें से बहुतों के साथ ऐसा हुआ। तथा वे जो कुछ करते हैं, अल्लाह उसे ख़ूब देखने वाला है। इसमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है और वह उन्हें इसका बदला देगा।
आयत 72
لَقَدْ كَفَرَ ٱلَّذِينَ قَالُوٓا۟ إِنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلْمَسِيحُ ٱبْنُ مَرْيَمَ ۖ وَقَالَ ٱلْمَسِيحُ يَـٰبَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ ٱعْبُدُوا۟ ٱللَّهَ رَبِّى وَرَبَّكُمْ ۖ إِنَّهُۥ مَن يُشْرِكْ بِٱللَّهِ فَقَدْ حَرَّمَ ٱللَّهُ عَلَيْهِ ٱلْجَنَّةَ وَمَأْوَىٰهُ ٱلنَّارُ ۖ وَمَا لِلظَّـٰلِمِينَ مِنْ أَنصَارٍۢ
لَقَدْ
अलबत्ता तहक़ीक़
كَفَرَ
कुफ़्र किया
ٱلَّذِينَ
उन लोगों ने
قَالُوٓا۟
जिन्होंने कहा
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
هُوَ
वो ही
ٱلْمَسِيحُ
(is) the Messiah
ٱبْنُ
son
مَرْيَمَ ۖ
मसीह इब्ने मरियम है
وَقَالَ
और कहा था
ٱلْمَسِيحُ
मसीह ने
يَـٰبَنِىٓ
O Children
إِسْرَٰٓءِيلَ
ऐ बनी इस्राईल
ٱعْبُدُوا۟
इबादत करो
ٱللَّهَ
अल्लाह की
رَبِّى
जो रब है मेरा
وَرَبَّكُمْ ۖ
और रब है तुम्हारा
إِنَّهُۥ
बेशक वो
مَن
जो
يُشْرِكْ
शिर्क करे
بِٱللَّهِ
साथ अल्लाह के
فَقَدْ
तो तहक़ीक़
حَرَّمَ
हराम ठहरा दी
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
عَلَيْهِ
उस पर
ٱلْجَنَّةَ
जन्नत
وَمَأْوَىٰهُ
और ठिकाना उसका
ٱلنَّارُ ۖ
आग है
وَمَا
और नहीं है
لِلظَّـٰلِمِينَ
ज़लिमों के लिए
مِنْ
any
أَنصَارٍۢ
कोई मददगार
निश्चय ही उन्होंने (सत्य का) इनकार किया, जिन्होंने कहा, "अल्लाह मरयम का बेटा मसीह ही है।" जब मसीह ने कहा था, "ऐ इसराईल की सन्तान! अल्लाह की बन्दगी करो, जो मेरा भी रब है और तुम्हारा भी रब है। जो कोई अल्लाह का साझी ठहराएगा, उसपर तो अल्लाह ने जन्नत हराम कर दी है और उसका ठिकाना आग है। अत्याचारियों को कोई सहायक नहीं।"
तफ़्सीर:
निःसंदेह उन ईसाइयों ने कुफ़्र किया, जिन्होंने कहा कि "अल्लाह तो ईसा बिन मरयम ही है।" क्योंकि उन्होंने अल्लाह के सिवा दूसरे को पूज्य बना दिया। जबकि स्वयं ईसा बिन मरयम ने उनसे कहा था : ऐ बनी इसराईल! केवल अल्लाह की इबादत करो। क्योंकि वही मेरा पालनहार और तुम्हारा पालनहार है। इसलिए हम उसके बंदे होने में बराबर हैं। इसका कारण यह है कि जो कोई भी अल्लाह के साथ उसके अलावा किसी भी चीज़ को साझी ठहराता है, तो अल्लाह ने उसे हमेशा के लिए जन्नत में प्रवेश करने से रोक दिया है, और उसका ठिकाना जहन्नम की आग है। उसके लिए अल्लाह के पास न कोई सहायक है, न कोई मददगार, और न ही कोई उद्धारकर्ता है जो उसे उस यातना से बचा सके, जिसकी वह प्रतीक्षा कर रहा है।
आयत 73
لَّقَدْ كَفَرَ ٱلَّذِينَ قَالُوٓا۟ إِنَّ ٱللَّهَ ثَالِثُ ثَلَـٰثَةٍۢ ۘ وَمَا مِنْ إِلَـٰهٍ إِلَّآ إِلَـٰهٌۭ وَٰحِدٌۭ ۚ وَإِن لَّمْ يَنتَهُوا۟ عَمَّا يَقُولُونَ لَيَمَسَّنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ مِنْهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ
لَّقَدْ
अलबत्ता तहक़ीक़
كَفَرَ
कुफ़्र किया
ٱلَّذِينَ
उन लोगों ने
قَالُوٓا۟
जिन्होंने कहा
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
ثَالِثُ
तीसरा है
ثَلَـٰثَةٍۢ ۘ
तीन का
وَمَا
और नहीं
مِنْ
[of]
إِلَـٰهٍ
कोई इलाह (बरहक़)
إِلَّآ
मगर
إِلَـٰهٌۭ
इलाह
وَٰحِدٌۭ ۚ
एक ही
وَإِن
और अगर
لَّمْ
ना
يَنتَهُوا۟
वो बाज़ आए
عَمَّا
उससे जो
يَقُولُونَ
वो कहते हैं
لَيَمَسَّنَّ
अलबत्ता ज़रूर पहुँचेगा
ٱلَّذِينَ
उनको जिन्होंने
كَفَرُوا۟
कुफ़्र किया
مِنْهُمْ
उनमें से
عَذَابٌ
अज़ाब
أَلِيمٌ
दर्दनाक
निश्चय ही उन्होंने इनकार किया, जिन्होंने कहा, "अल्लाह तीन में का एक है।" हालाँकि अकेले पूज्य के अतिरिक्त कोई पूज्य नहीं। जो कुछ वे कहते है यदि इससे बाज़ न आएँ तो उनमें से जिन्होंने इनकार किया है, उन्हें दुखद यातना पहुँचकर रहेगी
तफ़्सीर:
उन ईसाइयों ने (भी) कुफ़्र किया, जो कहते हैं : अल्लाह तीन से बना है, वे हैं : पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा। अल्लाह उनकी इन बातों से बहुत बुलंद है। क्योंकि अल्लाह अनेक नहीं है। बल्कि वह केवल एक पूज्य है, जिसका कोई साझी नहीं। यदि वे इस जघन्य बात से नहीं रुके, तो उन्हें एक दर्दनाक यातना पहुँचेगी।
आयत 74
أَفَلَا يَتُوبُونَ إِلَى ٱللَّهِ وَيَسْتَغْفِرُونَهُۥ ۚ وَٱللَّهُ غَفُورٌۭ رَّحِيمٌۭ
أَفَلَا
क्या भला नहीं
يَتُوبُونَ
वो तौबा करेंगे
إِلَى
to
ٱللَّهِ
तरफ़ अल्लाह के
وَيَسْتَغْفِرُونَهُۥ ۚ
और वो बख़्शिश माँगेंगे उससे
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
غَفُورٌۭ
बहुत बख़्शने वाला है
رَّحِيمٌۭ
निहायत रहम करने वाला है
फिर क्या वे लोग अल्लाह की ओर नहीं पलटेंगे और उससे क्षमा याचना नहीं करेंगे, जबकि अल्लाह बड़ा क्षमाशील, दयावान है
तफ़्सीर:
तो क्या ये लोग अपनी इस बात से, अल्लाह के समक्ष उससे तौबा करते हुए, पीछे नहीं हटते और उस शिर्क के लिए उससे क्षमा नहीं माँगते जो उन्होंने किया था?! तथा अल्लाह किसी भी गुनाह से तौबा करने वाले को क्षमा कर देने वाला है, भले ही वह गुनाह कुफ़्र ही क्यों न हो, वह ईमान वालों पर बहुत मेहरबान है।
आयत 75
مَّا ٱلْمَسِيحُ ٱبْنُ مَرْيَمَ إِلَّا رَسُولٌۭ قَدْ خَلَتْ مِن قَبْلِهِ ٱلرُّسُلُ وَأُمُّهُۥ صِدِّيقَةٌۭ ۖ كَانَا يَأْكُلَانِ ٱلطَّعَامَ ۗ ٱنظُرْ كَيْفَ نُبَيِّنُ لَهُمُ ٱلْـَٔايَـٰتِ ثُمَّ ٱنظُرْ أَنَّىٰ يُؤْفَكُونَ
مَّا
नहीं
ٱلْمَسِيحُ
(is) the Messiah
ٱبْنُ
son
مَرْيَمَ
मसीह इब्ने मरियम
إِلَّا
मगर
رَسُولٌۭ
एक रसूल
قَدْ
तहक़ीक़
خَلَتْ
गुज़र चुके
مِن
from
قَبْلِهِ
उससे क़ब्ल
ٱلرُّسُلُ
कई रसूल
وَأُمُّهُۥ
और उसकी माँ
صِدِّيقَةٌۭ ۖ
बहुत सच्ची थी
كَانَا
थे वो
يَأْكُلَانِ
वो दोनों खाया करते
ٱلطَّعَامَ ۗ
खाना
ٱنظُرْ
देखिए
كَيْفَ
किस तरह
نُبَيِّنُ
हम वाज़ेह करते हैं
لَهُمُ
उनके लिए
ٱلْـَٔايَـٰتِ
आयात
ثُمَّ
फिर
ٱنظُرْ
देखिए
أَنَّىٰ
कहाँ से
يُؤْفَكُونَ
वो फेरे जाते हैं
मरयम का बेटा मसीह एक रसूल के अतिरिक्त और कुछ भी नहीं। उससे पहले भी बहुत-से रसूल गुज़र चुके हैं। उसकी माण अत्यन्त सत्यवती थी। दोनों ही भोजन करते थे। देखो, हम किस प्रकार उनके सामने निशानियाँ स्पष्ट करते है; फिर देखो, ये किस प्रकार उलटे फिरे जा रहे है!
तफ़्सीर:
मरयम के पुत्र ईसा मसीह (अल्लाह के) रसूलों में से एक रसूल के अलावा कुछ नहीं हैं। उन्हें भी उन्हीं रसूलों की तरह मौत से गुज़रना पड़ेगा। तथा उनकी माँ मरयम - अलैहस्सलाम - बहुत सच्ची तथा अल्लाह की बातों की पुष्टि करने वाली थीं और वे दोनों ही खाना खाया करते थे, क्योंकि उन्हें इसकी आवश्यकता थी। फिर भला वे भोजन की आवश्यकता के साथ पूज्य कैसे हो सकते हैं?! (ऐ रसूल!) आप चिंतनशील दृष्टि से देखें : हम उनके लिए उन निशानियों को किस प्रकार खोल-खोलकर बयान करते हैें, जो अल्लाह के एकेश्वरवाद को दर्शाती हैं तथा अल्लाह के अलावा की ओर उलूहियत (पूज्य होने) की निस्बत करने में उनकी अतिशयोक्ति की अमान्यता को इंगित करती हैं। इसके बावजूद वे इन निशानियों की उपेक्षा करते हैं। फिर आप एक चिंतनशील दृष्टि से देखें : अल्लाह के एकत्व को दर्शाने वाली इन स्पष्ट निशानियों के बावजूद, वे किस प्रकार सत्य से पूरी तरह से फेरे जाते हैं।
आयत 76
قُلْ أَتَعْبُدُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ مَا لَا يَمْلِكُ لَكُمْ ضَرًّۭا وَلَا نَفْعًۭا ۚ وَٱللَّهُ هُوَ ٱلسَّمِيعُ ٱلْعَلِيمُ
قُلْ
कह दीजिए
أَتَعْبُدُونَ
क्या तुम इबादत करते हो
مِن
from
دُونِ
सिवाय
ٱللَّهِ
अल्लाह के
مَا
उसकी जो
لَا
not
يَمْلِكُ
नहीं मिल्कियत रखता
لَكُمْ
तुम्हारे लिए
ضَرًّۭا
किसी नुक़सान का
وَلَا
और ना
نَفْعًۭا ۚ
किसी नफ़ा के
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
هُوَ
वो ही है
ٱلسَّمِيعُ
ख़ूब सुनने वाला
ٱلْعَلِيمُ
ख़ूब जानने वाला
कह दो, "क्या तुम अल्लाह से हटकर उसकी बन्दगी करते हो जो न तुम्हारी हानि का अधिकारी है, न लाभ का? हालाँकि सुननेवाला, जाननेवाला अल्लाह ही है।"
तफ़्सीर:
(ऐ रसूल!) आप उनके अल्लाह के अलावा की इबादत करने में उनके विरुद्ध तर्क देते हुए कह दें : क्या तुम ऐसी चीज़ की इबादत करते हो, जो न तुम्हें कोई लाभ पहुँचा सकती है और न तुमसे कोई नुक़सान दूर कर सकती है?! अतः वह अक्षम और विवश है, और अल्लाह विवशता से पाक है। तथा केवल अल्लाह ही तुम्हारी सभी बातों को सुनने वाला है, इसलिए उनमें से कोई भी चीज़ उससे नहीं छूटती है, तुम्हारे सभी कर्मों को जानने वाला है, इसलिए उनमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है। तथा वह तुम्हें उनका बदला देगा।
आयत 77
قُلْ يَـٰٓأَهْلَ ٱلْكِتَـٰبِ لَا تَغْلُوا۟ فِى دِينِكُمْ غَيْرَ ٱلْحَقِّ وَلَا تَتَّبِعُوٓا۟ أَهْوَآءَ قَوْمٍۢ قَدْ ضَلُّوا۟ مِن قَبْلُ وَأَضَلُّوا۟ كَثِيرًۭا وَضَلُّوا۟ عَن سَوَآءِ ٱلسَّبِيلِ
قُلْ
कह दीजिए
يَـٰٓأَهْلَ
O People
ٱلْكِتَـٰبِ
ऐ अहले किताब
لَا
(Do) not
تَغْلُوا۟
ना तुम ग़ुलुव करो
فِى
in
دِينِكُمْ
अपने दीन में
غَيْرَ
बग़ैर
ٱلْحَقِّ
हक़ के
وَلَا
और ना
تَتَّبِعُوٓا۟
तुम पैरवी करो
أَهْوَآءَ
ख़्वाहिशात की
قَوْمٍۢ
एक क़ौम की
قَدْ
तहक़ीक़
ضَلُّوا۟
वो गुमराह हो गए
مِن
from
قَبْلُ
उससे पहले
وَأَضَلُّوا۟
और उन्होंने गुमराह किया
كَثِيرًۭا
कसीर तादाद को
وَضَلُّوا۟
और वो भटक गए
عَن
from
سَوَآءِ
(the) right
ٱلسَّبِيلِ
सीधे रास्ते से
कह दो, "ऐ किताबवालो! अपने धर्म में नाहक़ हद से आगे न बढ़ो और उन लोगों की इच्छाओं का पालन न करो, जो इससे पहले स्वयं पथभ्रष्ट हुए और बहुतो को पथभ्रष्ट किया और सीधे मार्ग से भटक गए
तफ़्सीर:
(ऐ रसूल!) आप ईसाइयों से कह दें : तुम्हें सत्य का अनुसरण करने का जो आदेश दिया गया है, उसमें सीमा से आगे न बढ़ो, तथा तुम्हें जिनके सम्मान का हुक्म दिया गया है (जैसे कि नबी गण), उनका सम्मान करने में अतिशयोक्ति न करो कि उनके बारे में ईश्वरत्व की आस्था रखने लगो, जैसा कि तुमने ईसा बिन मरयम के साथ किया। तुमने ऐसा अपने उन पथभ्रष्ट पूर्वजों का अनुसरण करने के कारण किया है, जिन्होंने बहुत-से लोगों को सीधे मार्ग से भटकाया और खुद भी सत्य के मार्ग से भटक गए।
आयत 78
لُعِنَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ مِنۢ بَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ عَلَىٰ لِسَانِ دَاوُۥدَ وَعِيسَى ٱبْنِ مَرْيَمَ ۚ ذَٰلِكَ بِمَا عَصَوا۟ وَّكَانُوا۟ يَعْتَدُونَ
لُعِنَ
लानत किए गए
ٱلَّذِينَ
वो जिन्होंने
كَفَرُوا۟
कुफ़्र किया
مِنۢ
from
بَنِىٓ
(the) Children
إِسْرَٰٓءِيلَ
बनी इस्राईल में से
عَلَىٰ
by
لِسَانِ
ज़बान पर
دَاوُۥدَ
दाऊद की
وَعِيسَى
and Isa
ٱبْنِ
son
مَرْيَمَ ۚ
और ईसा इब्ने मरियम की
ذَٰلِكَ
ये
بِمَا
बवजह उसके जो
عَصَوا۟
उन्होंने नाफ़रमानी की
وَّكَانُوا۟
और थे वो
يَعْتَدُونَ
वो हद से बढ़ जाते
इसराईल की सन्तान में से जिन लोगों ने इनकार किया, उनपर दाऊद और मरयम के बेटे ईसा की ज़बान से फिटकार पड़ी, क्योंकि उन्होंने अवज्ञा की और वे हद से आगे बढ़े जा रहे थे
तफ़्सीर:
अल्लाह तआला बता रहा है कि उसने बनी इसराईल के काफ़िरों को अपनी दया से निष्कासित कर दिया। इसका वर्णन उस किताब में है, जो उसने दाऊद अलैहिस्सलाम पर उतारी अर्थात् ज़बूर, तथा उस किताब में है, जो उसने ईसा बिन मरयम पर अवतिरत की और वह इंजील है। दया से यह निष्कासन उनके द्वारा किए गए पापों और अल्लाह की वर्जनाओं की पवित्रता भंग करने के कारण था।
आयत 79
كَانُوا۟ لَا يَتَنَاهَوْنَ عَن مُّنكَرٍۢ فَعَلُوهُ ۚ لَبِئْسَ مَا كَانُوا۟ يَفْعَلُونَ
كَانُوا۟
थे वो
لَا
not
يَتَنَاهَوْنَ
ना वो रोकते एक दूसरे को
عَن
from
مُّنكَرٍۢ
किसी बुराई से
فَعَلُوهُ ۚ
वो करते थे जिसे
لَبِئْسَ
अलबत्ता कितना बुरा है
مَا
जो
كَانُوا۟
थे वो
يَفْعَلُونَ
वो करते
जो बुरा काम वे करते थे, उससे वे एक-दूसरे को रोकते न थे। निश्चय ही बहुत ही बुरा था, जो वे कर रहे थे
तफ़्सीर:
वे एक-दूसरे को बुराई करने से रोकते नहीं थे। बल्कि उनमें से अवज्ञाकारी लोग उन पापों और बुराइयों को सार्वजनिक रूप से किया करते थे। क्योंकि उन्हें बुराई से रोकने वाला कोई नहीं था। बुराई से रोकना छोड़कर वे बहुत बुरा कर रहे थे।
आयत 80
تَرَىٰ كَثِيرًۭا مِّنْهُمْ يَتَوَلَّوْنَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ ۚ لَبِئْسَ مَا قَدَّمَتْ لَهُمْ أَنفُسُهُمْ أَن سَخِطَ ٱللَّهُ عَلَيْهِمْ وَفِى ٱلْعَذَابِ هُمْ خَـٰلِدُونَ
تَرَىٰ
आप देखेंगे
كَثِيرًۭا
कसीर तादाद को
مِّنْهُمْ
उनमें से
يَتَوَلَّوْنَ
वो दोस्ती करते हैं
ٱلَّذِينَ
उनसे जिन्होंने
كَفَرُوا۟ ۚ
कुफ़्र किया
لَبِئْسَ
अलबत्ता कितना बुरा है
مَا
जो
قَدَّمَتْ
आगे भेजा
لَهُمْ
उनके लिए
أَنفُسُهُمْ
उनके नफ़्सों ने
أَن
ये कि
سَخِطَ
नाराज़ हुआ
ٱللَّهُ
अल्लाह
عَلَيْهِمْ
उन पर
وَفِى
and in
ٱلْعَذَابِ
और अज़ाब में
هُمْ
वो
خَـٰلِدُونَ
हमेशा रहने वाले हैं
तुम उनमें से बहुतेरे लोगों को देखते हो जो इनकार करनेवालो से मित्रता रखते है। निश्चय ही बहुत बुरा है, जो उन्होंने अपने आगे रखा है। अल्लाह का उनपर प्रकोप हुआ और यातना में वे सदैव ग्रस्त रहेंगे
तफ़्सीर:
(ऐ रसूल!) इन यहूदियों में से बहुत-से काफ़िरों को आप देखेंगे कि वे काफ़िरों से प्रेम करते हैं तथा उनकी ओर झुकाव रखते हैं, जबकि वे आपके प्रति शत्रुतापूर्ण हैं और एकेश्वरवादियों से शत्रुता रखते हैं। उनका काफ़िरों से दोस्ती रखने का यह कार्य बहुत बुरा है। क्योंकि यह अल्लाह के उनपर क्रोधित होने और उन्हें नरक की आग में डालने का कारण है, जिसमें वे हमेशा के लिए रहेंगे, वहाँ से वे कभी न निकलेंगे।
आयत 81
وَلَوْ كَانُوا۟ يُؤْمِنُونَ بِٱللَّهِ وَٱلنَّبِىِّ وَمَآ أُنزِلَ إِلَيْهِ مَا ٱتَّخَذُوهُمْ أَوْلِيَآءَ وَلَـٰكِنَّ كَثِيرًۭا مِّنْهُمْ فَـٰسِقُونَ
وَلَوْ
और अगर
كَانُوا۟
होते वो
يُؤْمِنُونَ
वो ईमान लाते
بِٱللَّهِ
अल्लाह पर
وَٱلنَّبِىِّ
और नबी पर
وَمَآ
और जो कुछ
أُنزِلَ
नाज़िल किया गया
إِلَيْهِ
तरफ़ उनके
مَا
ना
ٱتَّخَذُوهُمْ
वो बनाते उन्हें
أَوْلِيَآءَ
दोस्त
وَلَـٰكِنَّ
और लेकिन
كَثِيرًۭا
बहुत से
مِّنْهُمْ
उनमें से
فَـٰسِقُونَ
नाफ़रमान हैं
और यदि वे अल्लाह और नबी पर और उस चीज़ पर ईमान लाते, जो उसकी ओर अवतरित हुईस तो वे उनको मित्र न बनाते। किन्तु उनमें अधिकतर अवज्ञाकारी है
तफ़्सीर:
यदि ये यहूदी वास्तव में अल्लाह तथा उसके रसूल पर ईमान रखते होते, तो बहुदेववादियों को मित्र न बनाते कि मोमिनों को छोड़कर उनसे प्यार करते और उनकी ओर झुकाव रखते। क्योंकि उन्हें काफ़िरों को दोस्त बनाने से मना किया गया था। लेकिन इन यहूदियों में से बहुत-से लोग अल्लाह की आज्ञाकारिता और उसकी संरक्षकता तथा मोमिनों की संरक्षकता से बाहर हैं।
आयत 82
۞ لَتَجِدَنَّ أَشَدَّ ٱلنَّاسِ عَدَٰوَةًۭ لِّلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ ٱلْيَهُودَ وَٱلَّذِينَ أَشْرَكُوا۟ ۖ وَلَتَجِدَنَّ أَقْرَبَهُم مَّوَدَّةًۭ لِّلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ ٱلَّذِينَ قَالُوٓا۟ إِنَّا نَصَـٰرَىٰ ۚ ذَٰلِكَ بِأَنَّ مِنْهُمْ قِسِّيسِينَ وَرُهْبَانًۭا وَأَنَّهُمْ لَا يَسْتَكْبِرُونَ
۞ لَتَجِدَنَّ
अलबत्ता आप ज़रूर पाऐंगे
أَشَدَّ
सबसे ज़्यादा सख़्त
ٱلنَّاسِ
लोगों में से
عَدَٰوَةًۭ
अदावत/दुश्मनी में
لِّلَّذِينَ
उन लोगों के लिए जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
ٱلْيَهُودَ
यहूद को
وَٱلَّذِينَ
और उनको जिन्होंने
أَشْرَكُوا۟ ۖ
शिर्क किया
وَلَتَجِدَنَّ
और अलबत्ता आप ज़रूर पाऐंगे
أَقْرَبَهُم
सबसे क़रीब उनमें
مَّوَدَّةًۭ
मोहब्बत में
لِّلَّذِينَ
उनके लिए जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
ٱلَّذِينَ
उनको जिन्होंने
قَالُوٓا۟
कहा
إِنَّا
बेशक हम
نَصَـٰرَىٰ ۚ
नसारा हैं
ذَٰلِكَ
ये
بِأَنَّ
बवजह उसके कि
مِنْهُمْ
उनमें
قِسِّيسِينَ
उलेमा हैं
وَرُهْبَانًۭا
और राहिब हैं
وَأَنَّهُمْ
और बेशक वो
لَا
(are) not
يَسْتَكْبِرُونَ
नहीं वो तकब्बुर करते
तुम ईमानवालों का शत्रु सब लोगों से बढ़कर यहूदियों और बहुदेववादियों को पाओगे। और ईमान लानेवालो के लिए मित्रता में सबसे निकट उन लोगों को पाओगे, जिन्होंने कहा कि 'हम नसारा हैं।' यह इस कारण है कि उनमें बहुत-से धर्मज्ञाता और संसार-त्यागी सन्त पाए जाते हैं। और इस कारण कि वे अहंकार नहीं करते
तफ़्सीर:
(ऐ रसूल!) आप उन लोगों के लिए, जो आपपर और आपकी लाई हुई शरीयत पर ईमान लाने वाले हैं, सभी लोगों में सबसे बड़ी दुश्मनी रखने वाला यहूदियों को पाएँगे; क्योंकि उनके अंदर द्वेष, ईर्ष्या और अहंकार पाया जाता है, तथा मूर्तिपूजकों और अन्य शिर्क करने वालों को पाएँगे। तथा आप उन लोगों के लिए, जो आपपर और आपकी लाई हुई शरीयत पर ईमान लाने वाले हैं, उनमें से दोस्ती में सबसे निकट उन लोगों को पाएँगे, जो अपने बारे में कहते हैं कि : वे ईसाई हैं। ईमान वालों के साथ उनके स्नेह की निकटता का कारण यह है कि उनमें विद्वान हैं और उपासक हैं। और यह कि वे विनीत हैं, अभिमानी नहीं हैं, क्योंकि अभिमानी के हृदय में अच्छी बात प्रवेश नहीं करती।
आयत 83
وَإِذَا سَمِعُوا۟ مَآ أُنزِلَ إِلَى ٱلرَّسُولِ تَرَىٰٓ أَعْيُنَهُمْ تَفِيضُ مِنَ ٱلدَّمْعِ مِمَّا عَرَفُوا۟ مِنَ ٱلْحَقِّ ۖ يَقُولُونَ رَبَّنَآ ءَامَنَّا فَٱكْتُبْنَا مَعَ ٱلشَّـٰهِدِينَ
وَإِذَا
और जब
سَمِعُوا۟
वो सुनते हैं
مَآ
जो
أُنزِلَ
नाज़िल किया गया
إِلَى
to
ٱلرَّسُولِ
तरफ़ रसूल के
تَرَىٰٓ
आप देखते हैं
أَعْيُنَهُمْ
उनकी आँखों को
تَفِيضُ
बह पड़ती हैं
مِنَ
with
ٱلدَّمْعِ
आँसुओं से
مِمَّا
इस (वजह) से जो
عَرَفُوا۟
उन्होंने पहचान लिया
مِنَ
of
ٱلْحَقِّ ۖ
हक़ को
يَقُولُونَ
वो कहते हैं
رَبَّنَآ
ऐ हमारे रब
ءَامَنَّا
ईमान लाए हम
فَٱكْتُبْنَا
पस लिख दे हमें
مَعَ
साथ
ٱلشَّـٰهِدِينَ
शहादत देने वालों के
जब वे उसे सुनते है जो रसूल पर अवतरित हुआ तो तुम देखते हो कि उनकी आँखे आँसुओ से छलकने लगती है। इसका कारण यह है कि उन्होंने सत्य को पहचान लिया। वे कहते हैं, "हमारे रब! हम ईमान ले आए। अतएव तू हमारा नाम गवाही देनेवालों में लिख ले
तफ़्सीर:
और इन लोगों (जैसे नजाशी और उनके साथियों) के दिल बड़े नरम हैं। यही कारण है कि क़ुरआन का पाठ सुनने के समय जब उन्हें पता चलता है कि वह सत्य है, तो विनम्रता से रोते हैं; क्योंकि वे उसे पहचानते हैं जो ईसा अलैहिस्सलाम लेकर आए थे। वे कहते हैं : ऐ हमारे रब! हम उसपर ईमान लाए, जो तूने अपने रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर उतारा है। अतः (ऐ हमारे रब!) हमें मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की उम्मत के साथ लिख ले, जो क़ियामत के दिन लोगों के ख़िलाफ हुज्जत (गवाही देने वाले) होंगे।
आयत 84
وَمَا لَنَا لَا نُؤْمِنُ بِٱللَّهِ وَمَا جَآءَنَا مِنَ ٱلْحَقِّ وَنَطْمَعُ أَن يُدْخِلَنَا رَبُّنَا مَعَ ٱلْقَوْمِ ٱلصَّـٰلِحِينَ
وَمَا
और क्या है
لَنَا
हमें
لَا
not
نُؤْمِنُ
कि ना हम ईमान लाऐं
بِٱللَّهِ
अल्लाह पर
وَمَا
और (उस पर) जो
جَآءَنَا
आया हमारे पास
مِنَ
from
ٱلْحَقِّ
हक़ में से
وَنَطْمَعُ
और हम उम्मीद रखते हैं
أَن
कि
يُدْخِلَنَا
दाख़िल करेगा हमें
رَبُّنَا
रब हमारा
مَعَ
साथ
ٱلْقَوْمِ
उन लोगों के
ٱلصَّـٰلِحِينَ
जो सालेह हैं
"और हम अल्लाह पर और जो सत्य हमारे पास पहुँचा है उसपर ईमान क्यों न लाएँ, जबकि हमें आशा है कि हमारा रब हमें अच्छे लोगों के साथ (जन्नत में) प्रविष्ट, करेगा।"
तफ़्सीर:
वह कौन-सा कारण है जो हमें अल्लाह पर तथा उस सत्य पर ईमान लाने से रोकता है, जो मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम लेकर आए हैं?! हालाँकि हम नबियों तथा उनके अनुयायियों के साथ जन्नत में प्रवेश करने की आशा करते हैं, जो अल्लाह के आज्ञाकारी हैं और उसकी सज़ा से डरने वाले हैं।
आयत 85
فَأَثَـٰبَهُمُ ٱللَّهُ بِمَا قَالُوا۟ جَنَّـٰتٍۢ تَجْرِى مِن تَحْتِهَا ٱلْأَنْهَـٰرُ خَـٰلِدِينَ فِيهَا ۚ وَذَٰلِكَ جَزَآءُ ٱلْمُحْسِنِينَ
فَأَثَـٰبَهُمُ
पस बदले में दिया उन्हें
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
بِمَا
बवजह उसके जो
قَالُوا۟
उन्होंने कहा
جَنَّـٰتٍۢ
बाग़ात को
تَجْرِى
बहती हैं
مِن
from
تَحْتِهَا
उनके नीचे से
ٱلْأَنْهَـٰرُ
नहरें
خَـٰلِدِينَ
हमेशा रहने वाले हैं
فِيهَا ۚ
उनमें
وَذَٰلِكَ
और ये
جَزَآءُ
बदला है
ٱلْمُحْسِنِينَ
एहसान करने वालों का
फिर अल्लाह ने उनके इस कथन के कारण उन्हें ऐसे बाग़ प्रदान किए, जिनके नीचे नहरें बहती है, जिनमें वे सदैव रहेंगे। और यही सत्कर्मी लोगो का बदला है
तफ़्सीर:
इसलिए अल्लाह ने उनके ईमान लाने तथा सत्य को मानने के बदले में उन्हें ऐसे बाग़ प्रदान किए, जिनके महलों तथा पेड़ों के नीचे से नहरें बहती हैं, जिनमें वे सदा सर्वदा के लिए रहेंगे। तथा यही उत्तमता के साथ सत्य का पालन करने और बिना शर्त के उसके अधीन होने वालों का प्रतिफल है।
आयत 86
وَٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ وَكَذَّبُوا۟ بِـَٔايَـٰتِنَآ أُو۟لَـٰٓئِكَ أَصْحَـٰبُ ٱلْجَحِيمِ
وَٱلَّذِينَ
और वो जिन्होंने
كَفَرُوا۟
कुफ़्र किया
وَكَذَّبُوا۟
और उन्होंने झुठलाया
بِـَٔايَـٰتِنَآ
हमारी आयात को
أُو۟لَـٰٓئِكَ
यही लोग हैं
أَصْحَـٰبُ
साथी
ٱلْجَحِيمِ
जहन्नम के
रहे वे लोग जिन्होंने इनकार किया और हमारी आयतों को झुठलाया, वे भड़कती आग (में पड़ने) वाले है
तफ़्सीर:
जिन लोगों ने अल्लाह और उसके रसूल के साथ कुफ़्र किया, तथा अल्लाह की उन आयतों को झुठलाया, जो उसने अपने रसूल पर उतारी थीं, वही लोग सदैव धधकती आग में रहने वाले हैं, वे कभी भी उससे बाहर नहीं निकलेंगे।
आयत 87
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ لَا تُحَرِّمُوا۟ طَيِّبَـٰتِ مَآ أَحَلَّ ٱللَّهُ لَكُمْ وَلَا تَعْتَدُوٓا۟ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يُحِبُّ ٱلْمُعْتَدِينَ
يَـٰٓأَيُّهَا
O you
ٱلَّذِينَ
ऐ लोगो जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए हो
لَا
(Do) not
تُحَرِّمُوا۟
ना तुम हराम करो
طَيِّبَـٰتِ
पाकीज़ा चीज़ें
مَآ
जो
أَحَلَّ
हलाल कीं
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
لَكُمْ
तुम्हारे लिए
وَلَا
और ना
تَعْتَدُوٓا۟ ۚ
तुम हद से तजावुज़ करो
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
لَا
(does) not
يُحِبُّ
नहीं वो पसंद करता
ٱلْمُعْتَدِينَ
हद से तजावुज़ करने वालों को
ऐ ईमान लानेवालो! जो अच्छी पाक चीज़े अल्लाह ने तुम्हारे लिए हलाल की है, उन्हें हराम न कर लो और हद से आगे न बढ़ो। निश्चय ही अल्लाह को वे लोग प्रिय नहीं है, जो हद से आगे बढ़ते है
तफ़्सीर:
ऐ ईमान वालो! खाने, पीने और महिलाओं में से आनंददायक वैध चीज़ों को हराम न ठहराओ, उन्हें ज़ुह्द (दुनिया से अरूचि) या उपासना के रूप में निषिद्ध मत करो, तथा उसकी सीमा से आगे न बढ़ो, जो अल्लाह ने तुमपर हराम किया है। निःसंदेह अल्लाह उन लोगों से प्यार नहीं करता, जो उसकी सीमाओं का उल्लंघन करते हैं, बल्कि वह उनसे नफ़रत करता है।
आयत 88
وَكُلُوا۟ مِمَّا رَزَقَكُمُ ٱللَّهُ حَلَـٰلًۭا طَيِّبًۭا ۚ وَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ ٱلَّذِىٓ أَنتُم بِهِۦ مُؤْمِنُونَ
وَكُلُوا۟
और खाओ
مِمَّا
उसमें से जो
رَزَقَكُمُ
रिज़्क़ दिया तुम्हें
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
حَلَـٰلًۭا
हलाल
طَيِّبًۭا ۚ
पाकीज़ा
وَٱتَّقُوا۟
और डरो
ٱللَّهَ
अल्लाह से
ٱلَّذِىٓ
वो जो
أَنتُم
तुम
بِهِۦ
जिस पर
مُؤْمِنُونَ
ईमान रखते हो
जो कुछ अल्लाह ने हलाल और पाक रोज़ी तुम्हें ही है, उसे खाओ और अल्लाह का डर रखो, जिसपर तुम ईमान लाए हो
तफ़्सीर:
अल्लाह अपनी जीविका में से जो कुछ तुम्हें प्रदान करता है, उसमें से इस हाल में खाओ कि वह हलाल और पवित्र (अच्छी) हो, उस समय नहीं अगर वह हराम हो जैसे कि बलपूर्वक ली गई या गंदी चीज़। तथा अल्लाह से, उसकी आज्ञाओं का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर, डरो। क्योंकि अल्लाह वही है जिसपर तुम ईमान रखते हो और तुम्हारा उसपर ईमान रखना तुम्हारे लिए यह आवश्यक कर देता है कि तुम उससे डरो।
आयत 89
لَا يُؤَاخِذُكُمُ ٱللَّهُ بِٱللَّغْوِ فِىٓ أَيْمَـٰنِكُمْ وَلَـٰكِن يُؤَاخِذُكُم بِمَا عَقَّدتُّمُ ٱلْأَيْمَـٰنَ ۖ فَكَفَّـٰرَتُهُۥٓ إِطْعَامُ عَشَرَةِ مَسَـٰكِينَ مِنْ أَوْسَطِ مَا تُطْعِمُونَ أَهْلِيكُمْ أَوْ كِسْوَتُهُمْ أَوْ تَحْرِيرُ رَقَبَةٍۢ ۖ فَمَن لَّمْ يَجِدْ فَصِيَامُ ثَلَـٰثَةِ أَيَّامٍۢ ۚ ذَٰلِكَ كَفَّـٰرَةُ أَيْمَـٰنِكُمْ إِذَا حَلَفْتُمْ ۚ وَٱحْفَظُوٓا۟ أَيْمَـٰنَكُمْ ۚ كَذَٰلِكَ يُبَيِّنُ ٱللَّهُ لَكُمْ ءَايَـٰتِهِۦ لَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ
لَا
Not
يُؤَاخِذُكُمُ
नहीं मुआख़ज़ा करता तुम्हारा
ٱللَّهُ
अल्लाह
بِٱللَّغْوِ
लग़्व पर
فِىٓ
in
أَيْمَـٰنِكُمْ
तुम्हारी क़समों में
وَلَـٰكِن
और लेकिन
يُؤَاخِذُكُم
वो मुआख़ज़ा करता है तुम्हारा
بِمَا
उन पर जो
عَقَّدتُّمُ
मज़बूत बाँधीं तुम ने
ٱلْأَيْمَـٰنَ ۖ
क़समें
فَكَفَّـٰرَتُهُۥٓ
तो कफ़्फ़ारा है उसका
إِطْعَامُ
खाना खिलाना
عَشَرَةِ
दस
مَسَـٰكِينَ
मिस्कीनों को
مِنْ
of
أَوْسَطِ
औसत दर्जे का
مَا
जो
تُطْعِمُونَ
तुम खिलाते हो
أَهْلِيكُمْ
अपने घर वालों को
أَوْ
या
كِسْوَتُهُمْ
कपड़े पहनाना उन्हें
أَوْ
या
تَحْرِيرُ
आज़ाद करना
رَقَبَةٍۢ ۖ
एक गर्दन का
فَمَن
पस जो कोई
لَّمْ
ना
يَجِدْ
पाए
فَصِيَامُ
तो रोज़े रखना हैं
ثَلَـٰثَةِ
तीन
أَيَّامٍۢ ۚ
दिनों के
ذَٰلِكَ
ये
كَفَّـٰرَةُ
कफ़्फ़ारा है
أَيْمَـٰنِكُمْ
तुम्हारी क़समों का
إِذَا
जब
حَلَفْتُمْ ۚ
क़सम खाओ तुम
وَٱحْفَظُوٓا۟
और हिफ़ाज़त किया करो
أَيْمَـٰنَكُمْ ۚ
अपनी क़समों की
كَذَٰلِكَ
इसी तरह
يُبَيِّنُ
वाज़ेह करता है
ٱللَّهُ
अल्लाह
لَكُمْ
तुम्हारे लिए
ءَايَـٰتِهِۦ
अपनी आयात को
لَعَلَّكُمْ
ताकि तुम
تَشْكُرُونَ
तुम शुक्र करो
तुम्हारी उन क़समों पर अल्लाह तुम्हें नहीं पकड़ता जो यूँ ही असावधानी से ज़बान से निकल जाती है। परन्तु जो तुमने पक्की क़समें खाई हों, उनपर वह तुम्हें पकड़ेगा। तो इसका प्रायश्चित दस मुहताजों को औसत दर्जें का खाना खिला देना है, जो तुम अपने बाल-बच्चों को खिलाते हो या फिर उन्हें कपड़े पहनाना या एक ग़ुलाम आज़ाद करना होगा। और जिसे इसकी सामर्थ्य न हो, तो उसे तीन दिन के रोज़े रखने होंगे। यह तुम्हारी क़समों का प्रायश्चित है, जबकि तुम क़सम खा बैठो। तुम अपनी क़समों की हिफ़ाजत किया करो। इस प्रकार अल्लाह अपनी आयतें तुम्हारे सामने खोल-खोलकर बयान करता है, ताकि तुम कृतज्ञता दिखलाओ
तफ़्सीर:
ऐ मोमिनो! अल्लाह तुमसे उन क़समों का कोई हिसाब नहीं लेगा, जो तुम्हारी ज़बानों पर बिना इरादे के आ जाती हैं। वह केवल तुमसे उस क़सम का हिसाब लेगा, जिसका तुमने दृढ़ निश्चय किया और अपने दिल से उसका पक्का इरादा किया और फिर उसे तोड़ दिया। जब तुम ऐसी क़सम को तोड़ दो, जिसका तुमने दृढ़ निश्चय किया था, तो तीन चीज़ों में से किसी एक चीज़ का करना तुमसे उसके पाप को मिटा देगा : अपने शहर के औसत भोजन से दस ग़रीबों को प्रत्येक ग़रीब के लिए आधा सा' के हिसाब से खाना खिलाना, या उन्हें ऐसे कपड़े पहनाना जो प्रथागत कपड़ा माना जाता है, अथवा एक मोमिन दास मुक्त करना। यदि अपनी क़सम का प्रायश्चित करने वाला इन तीनों चीज़ों में से कोई एक भी न पाए, तो वह अपनी क़सम का प्रायश्चित तीन दिन के रोज़े रखकर करेगा। (ऐ मोमिनो!) यह जिसका उल्लेख किया गया है, तुम्हारी क़समों का प्रायश्चित है - जब तुम अल्लाह की क़सम खा लो और उसे तोड़ दो। तथा अपनी क़समों की हिफ़ाज़त करते हुए अल्लाह की झूठी क़सम खाने से, तथा अल्लाह की बहुत अधिक क़सम खाने से और क़सम को न पूरी करने से बचो, सिवाय इसके कि क़सम पूरी न करना बेहतर हो। तो ऐसी स्थिति में जो कर्म अच्छा हो उसे करो तथा अपनी क़समों का प्रायश्चित करो। जिस प्रकार अल्लाह ने तुम्हारे लिए क़सम का कफ़्फ़ारा वर्णन किया है, उसी तरह वह तुम्हारे लिए हलाल व हराम को स्पष्ट करने वाले प्रावधानों को स्पष्ट करता है, ताकि तुम अल्लाह के आभारी बनो कि उसने तुम्हें उन चीज़ों का ज्ञान प्रदान किया है, जो तुम नहीं जानते थे।
आयत 90
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ إِنَّمَا ٱلْخَمْرُ وَٱلْمَيْسِرُ وَٱلْأَنصَابُ وَٱلْأَزْلَـٰمُ رِجْسٌۭ مِّنْ عَمَلِ ٱلشَّيْطَـٰنِ فَٱجْتَنِبُوهُ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ
يَـٰٓأَيُّهَا
O you
ٱلَّذِينَ
ऐ लोगो जो
ءَامَنُوٓا۟
ईमान लाए हो
إِنَّمَا
बेशक
ٱلْخَمْرُ
शराब (नशा)
وَٱلْمَيْسِرُ
और जुआ
وَٱلْأَنصَابُ
और बुत
وَٱلْأَزْلَـٰمُ
और फ़ाल के तीर
رِجْسٌۭ
नापाक हैं
مِّنْ
from
عَمَلِ
अमल से हैं
ٱلشَّيْطَـٰنِ
शैतान के
فَٱجْتَنِبُوهُ
पस बचो इससे
لَعَلَّكُمْ
ताकि तुम
تُفْلِحُونَ
तुम फ़लाह पाओ
ऐ ईमान लानेवालो! ये शराब और जुआ और देवस्थान और पाँसे तो गन्दे शैतानी काम है। अतः तुम इनसे अलग रहो, ताकि तुम सफल हो
तफ़्सीर:
ऐ ईमान वालो! नशा पैदा करने वाली चीज़ जिससे चेतना शून्य हो जाए, जुआ जिसमें दोनों पक्षों की ओर से धन लगा हो, वह पत्थर जिसके पास मुश्रिक लोग उसके सम्मान में जानवर ज़बह करते हैं अथवा जिसे उसकी पूजा करने के लिए लगाते हैं, और पाँसे के तीर जिनके द्वारा वे अपना अनदेखा भाग्य जानने की कोशिश करते थे, ये सब शैतान द्वारा शोभित किए गए पाप के काम हैं। अतः इनसे दूर रहो, ताकि तुम्हें दुनिया में अच्छा जीवन तथा आख़िरत में जन्नत का आनंद प्राप्त हो।
आयत 91
إِنَّمَا يُرِيدُ ٱلشَّيْطَـٰنُ أَن يُوقِعَ بَيْنَكُمُ ٱلْعَدَٰوَةَ وَٱلْبَغْضَآءَ فِى ٱلْخَمْرِ وَٱلْمَيْسِرِ وَيَصُدَّكُمْ عَن ذِكْرِ ٱللَّهِ وَعَنِ ٱلصَّلَوٰةِ ۖ فَهَلْ أَنتُم مُّنتَهُونَ
إِنَّمَا
बेशक
يُرِيدُ
चाहता है
ٱلشَّيْطَـٰنُ
शैतान
أَن
कि
يُوقِعَ
वो डाल दे
بَيْنَكُمُ
दर्मियान तुम्हारे
ٱلْعَدَٰوَةَ
अदावत
وَٱلْبَغْضَآءَ
और बुग़्ज़
فِى
through
ٱلْخَمْرِ
बवजह शराब (नशे)
وَٱلْمَيْسِرِ
और जुए के
وَيَصُدَّكُمْ
और रोक दे तुम्हें
عَن
from
ذِكْرِ
ज़िक्र से
ٱللَّهِ
अल्लाह के
وَعَنِ
and from
ٱلصَّلَوٰةِ ۖ
और नमाज़ से
فَهَلْ
तो क्या
أَنتُم
तुम
مُّنتَهُونَ
बाज़ आने वाले हो
शैतान तो बस यही चाहता है कि शराब और जुए के द्वारा तुम्हारे बीच शत्रुता और द्वेष पैदा कर दे और तुम्हें अल्लाह की याद से और नमाज़ से रोक दे, तो क्या तुम बाज़ न आओगे?
तफ़्सीर:
मादक पदार्थों तथा जुए को सुंदर बनाकर शैतान का इरादा तो सिर्फ दिलों के बीच दुश्मनी और नफरत पैदा करना, तथा अल्लाह के स्मरण से और नमाज़ से ध्यान भटकाना है। तो क्या तुम (ऐ मोमिनो!) इन बुरे कामों को छोड़ने वाले हो? इसमें कोई संदेह नहीं कि यही तुम्हारे लिए उपयुक्त है, इसलिए बाज़ आ जाओ।
आयत 92
وَأَطِيعُوا۟ ٱللَّهَ وَأَطِيعُوا۟ ٱلرَّسُولَ وَٱحْذَرُوا۟ ۚ فَإِن تَوَلَّيْتُمْ فَٱعْلَمُوٓا۟ أَنَّمَا عَلَىٰ رَسُولِنَا ٱلْبَلَـٰغُ ٱلْمُبِينُ
وَأَطِيعُوا۟
और इताअत करो
ٱللَّهَ
अल्लाह की
وَأَطِيعُوا۟
और इताअत करो
ٱلرَّسُولَ
रसूल की
وَٱحْذَرُوا۟ ۚ
और डरो
فَإِن
फिर अगर
تَوَلَّيْتُمْ
मुँह मोड़ लिया तुमने
فَٱعْلَمُوٓا۟
तो जान लो
أَنَّمَا
बेशक
عَلَىٰ
upon
رَسُولِنَا
हमारे रसूल के ज़िम्मे
ٱلْبَلَـٰغُ
पहुँचा देना है
ٱلْمُبِينُ
खुल्लम-खुल्ला
अल्लाह की आज्ञा का पालन करो और रसूल की आज्ञा का पालन करो और बचते रहो, किन्तु यदि तुमने मुँह मोड़ा तो जान लो कि हमारे रसूल पर केवल स्पष्ट रूप से (संदेश) पहुँचा देने की ज़िम्मेदारी है
तफ़्सीर:
शरीयत के आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से दूर रहकर अल्लाह का आज्ञापालन करो और रसूल का आज्ञापालन करो तथा अवज्ञा से सावधान रहो। फिर यदि तुम उससे मुँह मोड़ो, तो जान लो कि हमारे रसूल का दायित्व केवल उस संदेश को पहुँचा देना है, जिसका अल्लाह ने उन्हें पहुँचाने का आदेश दिया है और वह उसे पहुँचा चुके हैं। इसलिए यदि तुम मार्गदर्शन अपना लो, तो इसमें तुम्हारा ही लाभ है, और यदि बुरे कर्म करो, तो तुम्हारा ही नुक़सान होगा।
आयत 93
لَيْسَ عَلَى ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ جُنَاحٌۭ فِيمَا طَعِمُوٓا۟ إِذَا مَا ٱتَّقَوا۟ وَّءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ ثُمَّ ٱتَّقَوا۟ وَّءَامَنُوا۟ ثُمَّ ٱتَّقَوا۟ وَّأَحْسَنُوا۟ ۗ وَٱللَّهُ يُحِبُّ ٱلْمُحْسِنِينَ
لَيْسَ
नहीं है
عَلَى
on
ٱلَّذِينَ
ऊपर उनके जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
وَعَمِلُوا۟
और उन्होंने अमल किए
ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ
नेक
جُنَاحٌۭ
कोई गुनाह
فِيمَا
उसमें जो
طَعِمُوٓا۟
उन्होंने खाया
إِذَا
when
مَا
जब
ٱتَّقَوا۟
उन्होंने तक़वा किया
وَّءَامَنُوا۟
और वो ईमान लाए
وَعَمِلُوا۟
और उन्होंने अमल किए
ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ
नेक
ثُمَّ
फिर
ٱتَّقَوا۟
उन्होंने तक़वा किया
وَّءَامَنُوا۟
और वो ईमान लाए
ثُمَّ
फिर
ٱتَّقَوا۟
उन्होंने तक़वा किया
وَّأَحْسَنُوا۟ ۗ
और उन्होंने नेक काम किए
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
يُحِبُّ
वो पसंद करता है
ٱلْمُحْسِنِينَ
नेक काम करने वालों को
जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए, वे पहले जो कुछ खा-पी चुके उसके लिए उनपर कोई गुनाह नहीं; जबकि वे डर रखें और ईमान पर क़ायम रहें और अच्छे कर्म करें। फिर डर रखें और ईमान लाए, फिर डर रखे और अच्छे से अच्छा कर्म करें। अल्लाह सत्कर्मियों से प्रेम करता है
तफ़्सीर:
जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए, तथा उसकी निकटता प्राप्त करने के लिए अच्छे कर्म किए, उनपर उसमें कोई पाप नहीं जो उन्होंने शराब का उसके निषिद्ध होने से पहले सेवन किया था, यदि वे निषिद्ध चीज़ों से परहेज़ करते थे, अपने ऊपर अल्लाह के क्रोध से डरने वाले, उसपर ईमान रखने वाले, अच्छे कर्म करने वाले थे, फिर अल्लाह के प्रति उनका ध्यान बढ़ गया यहाँ तक कि वे उसकी इस तरह इबादत करने लगें, मानो कि वे उसे देख रहे हों, और अल्लाह उन लोगों से प्रेम करता है जो उसकी इस तरह इबादत करते हैं कि मानो वे उसे देख रहे हों; क्योंकि वे उसमें हमेशा अल्लाह के निरीक्षण का आभास करने वाले होते हैं। और यह स्थिति मोमिन को अपने काम को अच्छी तरह और पूर्ण रूप से करने के लिए प्रेरित करती है।
आयत 94
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ لَيَبْلُوَنَّكُمُ ٱللَّهُ بِشَىْءٍۢ مِّنَ ٱلصَّيْدِ تَنَالُهُۥٓ أَيْدِيكُمْ وَرِمَاحُكُمْ لِيَعْلَمَ ٱللَّهُ مَن يَخَافُهُۥ بِٱلْغَيْبِ ۚ فَمَنِ ٱعْتَدَىٰ بَعْدَ ذَٰلِكَ فَلَهُۥ عَذَابٌ أَلِيمٌۭ
يَـٰٓأَيُّهَا
O you
ٱلَّذِينَ
ऐ लोगो जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए हो
لَيَبْلُوَنَّكُمُ
अलबत्ता ज़रूर आज़माएगा तुम्हें
ٱللَّهُ
अल्लाह
بِشَىْءٍۢ
साथ एक चीज़ के
مِّنَ
of
ٱلصَّيْدِ
शिकार में से
تَنَالُهُۥٓ
पा लेंगे उसे
أَيْدِيكُمْ
हाथ तुम्हारे
وَرِمَاحُكُمْ
और नेज़े तुम्हारे
لِيَعْلَمَ
ताकि जान ले
ٱللَّهُ
अल्लाह
مَن
कौन
يَخَافُهُۥ
डरता है उस से
بِٱلْغَيْبِ ۚ
ग़ायबाना तौर पर
فَمَنِ
तो जो कोई
ٱعْتَدَىٰ
ज़्यादती करे
بَعْدَ
after
ذَٰلِكَ
बाद इसके
فَلَهُۥ
तो उसके लिए
عَذَابٌ
अज़ाब है
أَلِيمٌۭ
दर्दनाक
ऐ ईमान लानेवालो! अल्लाह उस शिकार के द्वारा तुम्हारी अवश्य परीक्षा लेगा जिस तक तुम्हारे हाथ और नेज़े पहुँच सकें, ताकि अल्लाह यह जान ले कि उससे बिन देखे कौन डरता है। फिर इसके पश्चात जिसने ज़्यादती की, उसके लिए दुखद यातना है
तफ़्सीर:
ऐ ईमान वालो! अल्लाह तुम्हारी इस तरह परीक्षा लेगा कि वह जंगली शिकार में से कुछ तुम्हारे पास ले आएगा, जबकि तुम एहराम की अवस्था में होगे। उनमें से छोटे शिकार को तुम अपने हाथों से पकड़ोगे और बड़े शिकार को अपने भालों से, ताकि अल्लाह जान ले (प्रत्यक्ष रूप से जानना जिसपर बंदों की पकड़ होती है) कि कौन अल्लाह के ज्ञान पर पूर्ण ईमान रखने की वजह से उससे बिन देखे डरता है। इसलिए वह अपने उस स्रष्टा के डर से शिकार करने से रुक जाता है, जिससे उसका कार्य छिपा नहीं रहता है। अतः जो हद से आगे बढ़े और ह़ज्ज या उम्रा के एहराम की हालत में शिकार करे, तो उसके लिए क़ियामत के दिन दर्दनाक अज़ाब है; क्योंकि उसने वह कार्य किया है जिससे अल्लाह ने मना किया था।
आयत 95
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ لَا تَقْتُلُوا۟ ٱلصَّيْدَ وَأَنتُمْ حُرُمٌۭ ۚ وَمَن قَتَلَهُۥ مِنكُم مُّتَعَمِّدًۭا فَجَزَآءٌۭ مِّثْلُ مَا قَتَلَ مِنَ ٱلنَّعَمِ يَحْكُمُ بِهِۦ ذَوَا عَدْلٍۢ مِّنكُمْ هَدْيًۢا بَـٰلِغَ ٱلْكَعْبَةِ أَوْ كَفَّـٰرَةٌۭ طَعَامُ مَسَـٰكِينَ أَوْ عَدْلُ ذَٰلِكَ صِيَامًۭا لِّيَذُوقَ وَبَالَ أَمْرِهِۦ ۗ عَفَا ٱللَّهُ عَمَّا سَلَفَ ۚ وَمَنْ عَادَ فَيَنتَقِمُ ٱللَّهُ مِنْهُ ۗ وَٱللَّهُ عَزِيزٌۭ ذُو ٱنتِقَامٍ
يَـٰٓأَيُّهَا
O you
ٱلَّذِينَ
ऐ लोगो जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए हो
لَا
(Do) not
تَقْتُلُوا۟
ना तुम मारो
ٱلصَّيْدَ
शिकार को
وَأَنتُمْ
जब कि तुम
حُرُمٌۭ ۚ
एहराम में हो
وَمَن
और जिसने
قَتَلَهُۥ
मारा उसे
مِنكُم
तुम में से
مُّتَعَمِّدًۭا
जान बूझ कर
فَجَزَآءٌۭ
तो बदला है
مِّثْلُ
मानिन्द
مَا
उसके जो
قَتَلَ
उसने मारा
مِنَ
of
ٱلنَّعَمِ
चौपायों में से
يَحْكُمُ
फ़ैसला करेंगे
بِهِۦ
उसका
ذَوَا
two men
عَدْلٍۢ
दो अदल वाले
مِّنكُمْ
तुम में से
هَدْيًۢا
बतौर क़ुर्बानी के
بَـٰلِغَ
पहुँचने वाली
ٱلْكَعْبَةِ
काबा तक
أَوْ
या
كَفَّـٰرَةٌۭ
कफ़्फ़ारा है
طَعَامُ
खाना खिलाना
مَسَـٰكِينَ
चंद मिस्कीनों का
أَوْ
या
عَدْلُ
बराबर
ذَٰلِكَ
उसके
صِيَامًۭا
रोज़े रखना है
لِّيَذُوقَ
ताकि वो चखें
وَبَالَ
वबाल
أَمْرِهِۦ ۗ
अपने काम का
عَفَا
दरगुज़र किया
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
عَمَّا
उससे जो
سَلَفَ ۚ
गुज़र चुका
وَمَنْ
और जो कोई
عَادَ
लौटा
فَيَنتَقِمُ
तो इन्तिक़ाम लेगा
ٱللَّهُ
अल्लाह
مِنْهُ ۗ
उससे
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
عَزِيزٌۭ
बहुत ज़बरदस्त है
ذُو
Owner
ٱنتِقَامٍ
इन्तिक़ाम लेने वाला है
ऐ ईमान लानेवालो! इहराम की हालत में तुम शिकार न मारो। तुम में जो कोई जान-बूझकर उसे मारे, तो उसने जो जानवर मारा हो, चौपायों में से उसी जैसा एक जानवर - जिसका फ़ैसला तुम्हारे दो न्यायप्रिय व्यक्ति कर दें - काबा पहुँचाकर क़ुरबान किया जाए, या प्रायश्चित के रूप में मुहताजों को भोजन कराना होगा या उसके बराबर रोज़े रखने होंगे, ताकि वह अपने किए का मज़ा चख ले। जो पहले हो चुका उसे अल्लाह ने क्षमा कर दिया; परन्तु जिस किसी ने फिर ऐसा किया तो अल्लाह उससे बदला लेगा। अल्लाह प्रभुत्वशाली, बदला लेनेवाला है
तफ़्सीर:
ऐ ईमान वालो! हज्ज या उम्रा के एहराम की स्थिति में जंगली शिकार न मारो। तथा तुममें से जो व्यक्ति जान-बूझकर शिकार मारे, तो उसने जो शिकार मारा है उसी के समान उसपर ऊँट, या गाय, या बकरी में से बदला (दंड) अनिवार्य है, जिसका निर्णय मुसलमानों में से दो न्यायप्रिय व्यक्ति करेंगे। और जिस पशु का वे निर्णय कर दें, उसके साथ वही किया जाएगा जो हज्ज की क़ुर्बानी के जानवर के साथ किया जाता है। अर्थात् उसे मक्का भेजा जाएगा और हरम में ज़बह किया जाएगा, या उस जानवर की क़ीमत के बराबर खाद्य पदार्थ हरम के निर्धनों को दिया जाएगा, हर निर्धन को आधा सा'। या हर आधे सा' खाद्य पदार्थ के बदले एक दिन रोज़ा रखना होगा। यह सब इसलिए कि शिकार करने वाला अपने किए के परिणाम का स्वाद चख ले। अल्लाह ने उसे क्षमा कर दिया, जो अतीत में हरम का शिकार मारा गया और एहराम की स्थिति में जो भूमि का शिकार मारा गया उसके हराम ठहराए जाने से पहले। जो व्यक्ति हराम घोषित होने के बाद भी ऐसा करेगा, अल्लाह उसे उसपर यातना देकर उससे बदला लेगा। अल्लाह बहुत शक्तिशाली, ताक़त वाला है और उसकी शक्ति में से एक यह है कि वह उससे बदला लेता है जो उसकी अवज्ञा करता है, यदि वह चाहे, उसे कोई ऐसा करने से रोक नहीं सकता।
आयत 96
أُحِلَّ لَكُمْ صَيْدُ ٱلْبَحْرِ وَطَعَامُهُۥ مَتَـٰعًۭا لَّكُمْ وَلِلسَّيَّارَةِ ۖ وَحُرِّمَ عَلَيْكُمْ صَيْدُ ٱلْبَرِّ مَا دُمْتُمْ حُرُمًۭا ۗ وَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ ٱلَّذِىٓ إِلَيْهِ تُحْشَرُونَ
أُحِلَّ
हलाल किया गया है
لَكُمْ
तुम्हारे लिए
صَيْدُ
शिकार
ٱلْبَحْرِ
समुन्दर का
وَطَعَامُهُۥ
और खाना उसका
مَتَـٰعًۭا
फ़ायदामंद है
لَّكُمْ
तुम्हारे लिए
وَلِلسَّيَّارَةِ ۖ
और क़ाफ़िले के लिए
وَحُرِّمَ
और हराम किया गया
عَلَيْكُمْ
तुम पर
صَيْدُ
शिकार
ٱلْبَرِّ
ख़ुश्की का
مَا
as
دُمْتُمْ
जब तक हो तुम
حُرُمًۭا ۗ
ऐहराम में
وَٱتَّقُوا۟
और डरो
ٱللَّهَ
अल्लाह से
ٱلَّذِىٓ
वो जो
إِلَيْهِ
तरफ़ उसके
تُحْشَرُونَ
तुम इकट्ठे किए जाओगे
तुम्हारे लिए जल की शिकार और उसका खाना हलाल है कि तुम उससे फ़ायदा उठाओ और मुसाफ़िर भी। किन्तु थलीय शिकार जब तक तुम इहराम में हो, तुमपर हराम है। और अल्लाह से डरते रहो, जिसकी ओर तुम इकट्ठा होगे
तफ़्सीर:
अल्लाह ने तुम्हारे लिए जलीय जानवरों का शिकार करना तथा उस जानवर को हलाल कर दिया है, जो समुद्र तुम्हारे लिए फेंक देता है, चाहे वह जीवित हो या मृत, यह तुममें से उसके लाभ के लिए है जो निवासी है या यात्री है जिसके साथ वह खुद की आपूर्ति करता है, तथा उसने तुमपर भूमि का शिकार करना हराम कर दिया है जब तक कि तुम हज्ज या उम्रा के एहराम की स्थिति में हो। तथा अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर, उससे डरो। क्योंकि उसी अकेले की ओर तुम क़ियामत के दिन लौटाए जाओगे, फिर वह तुम्हें तुम्हारे कर्मों का बदला देगा।
आयत 97
۞ جَعَلَ ٱللَّهُ ٱلْكَعْبَةَ ٱلْبَيْتَ ٱلْحَرَامَ قِيَـٰمًۭا لِّلنَّاسِ وَٱلشَّهْرَ ٱلْحَرَامَ وَٱلْهَدْىَ وَٱلْقَلَـٰٓئِدَ ۚ ذَٰلِكَ لِتَعْلَمُوٓا۟ أَنَّ ٱللَّهَ يَعْلَمُ مَا فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَمَا فِى ٱلْأَرْضِ وَأَنَّ ٱللَّهَ بِكُلِّ شَىْءٍ عَلِيمٌ
۞ جَعَلَ
बनाया
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
ٱلْكَعْبَةَ
काबा को
ٱلْبَيْتَ
घर
ٱلْحَرَامَ
हुरमत वाला
قِيَـٰمًۭا
क़याम का ज़रिया
لِّلنَّاسِ
लोगों के लिए
وَٱلشَّهْرَ
और माहे
ٱلْحَرَامَ
हराम को
وَٱلْهَدْىَ
और क़ुर्बानी को
وَٱلْقَلَـٰٓئِدَ ۚ
और पट्टे वाले जानवरों को
ذَٰلِكَ
ये (इसलिए)
لِتَعْلَمُوٓا۟
ताकि तुम जान लो
أَنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
يَعْلَمُ
वो जानता है
مَا
जो कुछ
فِى
(is) in
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों में है
وَمَا
और जो कुछ
فِى
(is) in
ٱلْأَرْضِ
ज़मीन में है
وَأَنَّ
और बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
بِكُلِّ
हर
شَىْءٍ
चीज़ को
عَلِيمٌ
ख़ूब जानने वाला है
अल्लाह ने आदरणीय घर काबा को लोगों के लिए क़ायम रहने का साधन बनाया और आदरणीय महीनों और क़ुरबानी के जानबरों और उन जानवरों को भी जिनके गले में पट्टे बँधे हो, यह इसलिए कि तुम जान लो कि अल्लाह जानता है जो कुछ आकाशों में है और जो कुछ धरती में है। और यह कि अल्लाह हर चीज़ से अवगत है
तफ़्सीर:
अल्लाह ने सम्मानित घर काबा को लोगों के लिए स्थापना का साधन बनाया है, जिसके साथ उनके धार्मिक हितों जैसे नमाज़, रोज़ा, ह़ज्ज एवं उम्रा की, तथा उनके सांसारिक हितों की स्थापना होती है, जैसे हरम में सुरक्षा एवं शांति और वहाँ हर चीज़ के फलों का पहुँचना। तथा उसने सम्मानित महीनों अर्थात् : ज़ुल-क़ा'दा, ज़ुल-ह़िज्जा, मुहर्रम और रजब को उनके लिए स्थापना का कारण बनाया है कि वे उनमें दूसरों कि ओर से लड़ाई से सुरक्षित रहते हैं, इसी तरह ह़ज्ज की क़ुर्बानी के जानवरों तथा उन पट्टों को जो यह इंगित करते हैं कि वे हरम के लिए ले जाए गए हैं, उनके लिए स्थापना का साधन बनाया है, क्योंकि वे अपने स्वामियों को हानि पहुँचाए जाने से बचाते हैं। अल्लाह ने तुमपर यह उपकार इसलिए किया ताकि तुम जान लो कि अल्लाह जानता है जो कुछ आकाशों में तथा जो कुछ धरती में है, और यह कि अल्लाह हर चीज़ को ख़ूब जानने वाला है। क्योंकि उसका - तुम्हारे लिए हितों को लाने और तुमसे नुक़सान को उनके आने से पहले दूर करने के लिए - इन नियमों को बनाना, इस बात का प्रमाण है कि वह बंदों के हितों की चीज़ों को जानता है।
आयत 98
ٱعْلَمُوٓا۟ أَنَّ ٱللَّهَ شَدِيدُ ٱلْعِقَابِ وَأَنَّ ٱللَّهَ غَفُورٌۭ رَّحِيمٌۭ
ٱعْلَمُوٓا۟
जान लो
أَنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
شَدِيدُ
सख़्त
ٱلْعِقَابِ
सज़ा वाला है
وَأَنَّ
और बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
غَفُورٌۭ
बहुत बख़्शने वाला है
رَّحِيمٌۭ
निहायत रहम करने वाला है
जान लो अल्लाह कठोर दड देनेवाला है और यह कि अल्लाह बड़ा क्षमाशील, दयावान है
तफ़्सीर:
(ऐ लोगो!) यह जान लो कि निःसंदेह अल्लाह उसे बहुत कठोर दंड देने वाला है, जो उसकी अवज्ञा करे, तथा तौबा करने वाले को बहुत क्षमा करने वाला, उसपर बड़ा दयालु है।
आयत 99
مَّا عَلَى ٱلرَّسُولِ إِلَّا ٱلْبَلَـٰغُ ۗ وَٱللَّهُ يَعْلَمُ مَا تُبْدُونَ وَمَا تَكْتُمُونَ
مَّا
नहीं है
عَلَى
on
ٱلرَّسُولِ
रसूल पर
إِلَّا
मगर
ٱلْبَلَـٰغُ ۗ
पहुँचा देना
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
يَعْلَمُ
जानता है
مَا
जो
تُبْدُونَ
तुम ज़ाहिर करते हो
وَمَا
और जो
تَكْتُمُونَ
तुम छुपाते हो
रसूल पर (सन्देश) पहुँचा देने के अतिरिक्त और कोई ज़िम्मेदारी नहीं। अल्लाह तो जानता है, जो कुछ तुम प्रकट करते हो और जो कुछ तुम छिपाते हो
तफ़्सीर:
रसूल का दायित्व केवल यह है कि उस उपदेश को पहुँचा दे, जिसको पहुँचाने का अल्लाह ने उसे आदेश दिया है, उसकी यह ज़िम्मेदारी नहीं कि लोगों को हिदायत की तौफीक़ दे, क्योंकि यह केवल अल्लाह के हाथ में है, तथा अल्लाह उसे जानता है जो कुछ तुम मार्गदर्शन या पथभ्रष्टता में से प्रकट करते और छिपाते हो। और वह तुम्हें उसका बदला देगा।
आयत 100
قُل لَّا يَسْتَوِى ٱلْخَبِيثُ وَٱلطَّيِّبُ وَلَوْ أَعْجَبَكَ كَثْرَةُ ٱلْخَبِيثِ ۚ فَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ يَـٰٓأُو۟لِى ٱلْأَلْبَـٰبِ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ
قُل
कह दीजिए
لَّا
Not
يَسْتَوِى
नहीं बराबर हो सकते
ٱلْخَبِيثُ
नापाक
وَٱلطَّيِّبُ
और पाक
وَلَوْ
और अगरचे
أَعْجَبَكَ
अच्छी लगे तुम्हें
كَثْرَةُ
कसरत
ٱلْخَبِيثِ ۚ
नापाक की
فَٱتَّقُوا۟
पस डरो
ٱللَّهَ
अल्लाह से
يَـٰٓأُو۟لِى
O men
ٱلْأَلْبَـٰبِ
ऐ अक़्ल वालो
لَعَلَّكُمْ
ताकि तुम
تُفْلِحُونَ
तुम फ़लाह पा जाओ
कह दो, "बुरी चीज़ और अच्छी चीज़ समान नहीं होती, चाहे बुरी चीज़ों की बहुतायत तुम्हें प्रिय ही क्यों न लगे।" अतः ऐ बुद्धि और समझवालों! अल्लाह का डर रखो, ताकि तुम सफल हो सको
तफ़्सीर:
(ऐ रसूल!) आप कह दें कि कोई भी अपवित्र (बुरी) चीज़ किसी भी पवित्र (अच्छी) चीज़ के बराबर नहीं है, यद्यपि अपवित्र (बुरी) चीज़ की बहुतायत आपको भली लगे। क्योंकि उसकी बहुतायत उसकी श्रेष्ठता का संकेत नहीं देती है। अतः (ऐ बुद्धि वालो!) अपवित्र को छोड़कर और पवित्र को करके अल्लाह से डरो, ताकि तुम्हें जन्नत प्राप्त हो।
आयत 101
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ لَا تَسْـَٔلُوا۟ عَنْ أَشْيَآءَ إِن تُبْدَ لَكُمْ تَسُؤْكُمْ وَإِن تَسْـَٔلُوا۟ عَنْهَا حِينَ يُنَزَّلُ ٱلْقُرْءَانُ تُبْدَ لَكُمْ عَفَا ٱللَّهُ عَنْهَا ۗ وَٱللَّهُ غَفُورٌ حَلِيمٌۭ
يَـٰٓأَيُّهَا
O you
ٱلَّذِينَ
ऐ लोगों जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए हो
لَا
(Do) not
تَسْـَٔلُوا۟
ना तुम सवाल करो
عَنْ
about
أَشْيَآءَ
ऐसी चीज़ों के बारे में
إِن
अगर
تُبْدَ
वो ज़ाहिर कर दी जाऐं
لَكُمْ
तुम्हारे लिए
تَسُؤْكُمْ
बुरी लगें तुम्हें
وَإِن
और अगर
تَسْـَٔلُوا۟
तुम सवाल करोगे
عَنْهَا
उनके बारे में
حِينَ
जिस वक़्त
يُنَزَّلُ
नाज़िल किया जाता है
ٱلْقُرْءَانُ
क़ुरआन
تُبْدَ
वो ज़ाहिर कर दी जाऐंगी
لَكُمْ
तुम्हारे लिए
عَفَا
दरगुज़र किया
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
عَنْهَا ۗ
उनसे
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
غَفُورٌ
बहुत बख़्शने वाला
حَلِيمٌۭ
बहुत बुर्दबार है
ऐ ईमान लानेवालो! ऐसी चीज़ों के विषय में न पूछो कि वे यदि तुम पर स्पष्ट कर दी जाएँ, तो तुम्हें बूरी लगें। यदि तुम उन्हें ऐसे समय में पूछोगे, जबकि क़ुरआन अवतरित हो रहा है, तो वे तुमपर स्पष्ट कर दी जाएँगी। अल्लाह ने उसे क्षमा कर दिया। अल्लाह बहुत क्षमा करनेवाला, सहनशील है
तफ़्सीर:
ऐ ईमान वालो! अपने रसूल से उन चीज़ों के संबंध में प्रश्न न करो, जिनकी तुम्हें कोई ज़रूरत नहीं है, और जो तुम्हारे धर्म के मामले में तुम्हारी मदद नहीं करती हैं। यदि वे तुम्हारे लिए प्रकट कर दी जाएँ, तो उनमें पाई जाने वाली कठिनाई के कारण तुम्हें बुरी लगेंगी। यदि तुम इन चीज़ों के बारे में जिनके बारे में पूछने से तुम्हें मना किया गया है उस समय प्रश्न करोगे जब रसूल पर वह़्य उतारी जाती है, तो वे तुम्हारे लिए स्पष्ट कर दी जाएँगी, और यह अल्लाह के लिए बड़ा आसान है। अल्लाह ने उन चीज़ों को नज़रअंदाज़ कर दिया है जिनके बारे में क़ुरआन खामोश है। अतः उनके बारे में प्रश्न न करो, क्योंकि अगर तुम उनके बारे में प्रश्न करोगे, तो तुम्हें उनके आदेश का बाध्य कर दिया जाएगा। तथा अल्लाह अपने बंदों के पापों को क्षमा करने वाला है यदि वे तौबा करते हैं, अत्यंत सहनशील है उन्हें उनपर दंडित नहीं करता है।
आयत 102
قَدْ سَأَلَهَا قَوْمٌۭ مِّن قَبْلِكُمْ ثُمَّ أَصْبَحُوا۟ بِهَا كَـٰفِرِينَ
قَدْ
तहक़ीक़
سَأَلَهَا
सवाल किया था उनके बारे में
قَوْمٌۭ
एक क़ौम ने
مِّن
from
قَبْلِكُمْ
तुम से पहले
ثُمَّ
फिर
أَصْبَحُوا۟
वो हो गए
بِهَا
उनका
كَـٰفِرِينَ
इन्कार करने वाले
तुमसे पहले कुछ लोग इस तरह के प्रश्न कर चुके हैं, फिर वे उसके कारण इनकार करनेवाले हो गए
तफ़्सीर:
तुमसे पहले भी कुछ लोगों ने इसी तरह की बातों के बारे में प्रश्न किए थे, फिर जब उन्हें उनका बाध्य कर दिया गया, तो उन्होंने उनके अनुसार कार्य नहीं किया। इसलिए वे उसके कारण काफ़िर हो गए।
आयत 103
مَا جَعَلَ ٱللَّهُ مِنۢ بَحِيرَةٍۢ وَلَا سَآئِبَةٍۢ وَلَا وَصِيلَةٍۢ وَلَا حَامٍۢ ۙ وَلَـٰكِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ يَفْتَرُونَ عَلَى ٱللَّهِ ٱلْكَذِبَ ۖ وَأَكْثَرُهُمْ لَا يَعْقِلُونَ
مَا
नहीं
جَعَلَ
बनाया
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
مِنۢ
of
بَحِيرَةٍۢ
कोई बहीरह
وَلَا
और ना
سَآئِبَةٍۢ
कोई साएबा
وَلَا
और ना
وَصِيلَةٍۢ
कोई वसीला
وَلَا
and not
حَامٍۢ ۙ
और ना कोई हाम
وَلَـٰكِنَّ
और लेकिन
ٱلَّذِينَ
वो जिन्होंने
كَفَرُوا۟
कुफ़्र किया
يَفْتَرُونَ
वो गढ़ लेते हैं
عَلَى
against
ٱللَّهِ
अल्लाह पर
ٱلْكَذِبَ ۖ
झूठ
وَأَكْثَرُهُمْ
और अक्सर उनके
لَا
(do) not
يَعْقِلُونَ
नहीं वो अक़्ल रखते
अल्लाह ने न कोई 'बहीरा' ठहराया है और न 'सायबा' और न 'वसीला' और न 'हाम', परन्तु इनकार करनेवाले अल्लाह पर झूठ का आरोपण करते है और उनमें अधिकतर बुद्धि से काम नहीं लेते
तफ़्सीर:
अल्लाह ने चौपायों को हलाल किया है। चुनाँचे उसने उनमें से उन जानवरों को हराम नहीं किया है, जिन्हें मुश्रिकों ने अपनी मूर्तियों के लिए अपने ऊपर हराम ठहरा लिया है। जैसे कि बहीरा, जो उस ऊँटनी को कहा जाता है, जिसके कान एक निश्चित संख्या में बच्चे जनने के बाद काट दिए जाते थे। तथा साइबा, जो उस ऊँटनी को कहा जाता है, जो एक निश्चित उम्र तक पहुँचने पर उनकी मूर्तियों के लिए छोड़ दी जाती थी। तथा वसीला, जो उस ऊँटनी को कहा जाता है, जिसने लगातार दो मादा बच्चे जने हों। तथा हामी, जो उस नर ऊँट को कहा जाता है, जिसकी पुश्त से कई ऊँट जन्म ले चुके हों। (अल्लाह ने इन्हें हराम नहीं किया), परंतु काफ़िरों ने झूठ-मूठ और मिथ्यारोपण करते हुए यह दावा किया कि अल्लाह ने उक्त जानवरों को हराम किया है, तथा अधिकांश काफ़िर सत्य और असत्य, हलाल और हराम के बीच अंतर नहीं करते हैं।
आयत 104
وَإِذَا قِيلَ لَهُمْ تَعَالَوْا۟ إِلَىٰ مَآ أَنزَلَ ٱللَّهُ وَإِلَى ٱلرَّسُولِ قَالُوا۟ حَسْبُنَا مَا وَجَدْنَا عَلَيْهِ ءَابَآءَنَآ ۚ أَوَلَوْ كَانَ ءَابَآؤُهُمْ لَا يَعْلَمُونَ شَيْـًۭٔا وَلَا يَهْتَدُونَ
وَإِذَا
और जब
قِيلَ
कहा जाता है
لَهُمْ
उन्हें
تَعَالَوْا۟
आओ
إِلَىٰ
तरफ़
مَآ
उसके जो
أَنزَلَ
नाज़िल किया
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
وَإِلَى
and to
ٱلرَّسُولِ
और तरफ़ रसूल के
قَالُوا۟
वो कहते हैं
حَسْبُنَا
काफ़ी है हमें
مَا
जो
وَجَدْنَا
पाया हमने
عَلَيْهِ
उस पर
ءَابَآءَنَآ ۚ
अपने आबा ओ अजदाद को
أَوَلَوْ
क्या भला अगरचे
كَانَ
हों
ءَابَآؤُهُمْ
आबा ओ अजदाद उनके
لَا
(were) not
يَعْلَمُونَ
ना वो इल्म रखते
شَيْـًۭٔا
कुछ भी
وَلَا
और ना
يَهْتَدُونَ
वो हिदायत याफ़्ता हों
और जब उनसे कहा जाता है कि उस चीज़ की ओर आओ जो अल्लाह ने अवतरित की है और रसूल की ओर, तो वे कहते है, "हमारे लिए तो वही काफ़ी है, जिस पर हमने अपने बाप-दादा को पाया है।" क्या यद्यपि उनके बापृ-दादा कुछ भी न जानते रहे हों और न सीधे मार्ग पर रहे हो?
तफ़्सीर:
जब अल्लाह पर कुछ चौपायों को हराम ठहराने का झूठा आरोप लगाने वाले इन लोगों से कहा जाता है : अल्लाह के उतारे हुए क़ुरआन की ओर आओ, तथा रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की सुन्नत की ओर आओ, ताकि तुम हलाल और हराम को पहचान सको, तो वे कहते हैं : हमने जिन विश्वासों, कथनों और कार्यों को अपने पूर्वजों से लिया है और हमें विरासत में मिला है, वही हमारे लिए काफ़ी हैं। उनके लिए यह कैसे काफ़ी है जबकि उनके पूर्वज कुछ नहीं जानते थे, और न तो उन्हें सत्य का मार्गदर्शन प्राप्त था?! इसलिए उनका अनुसरण वही करेगा, जो उनसे अधिक अज्ञानी और उनसे अधिक मार्ग से भटका हुआ होगा। अतः वे अज्ञानी और पथभ्रष्ट हैं।
आयत 105
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ عَلَيْكُمْ أَنفُسَكُمْ ۖ لَا يَضُرُّكُم مَّن ضَلَّ إِذَا ٱهْتَدَيْتُمْ ۚ إِلَى ٱللَّهِ مَرْجِعُكُمْ جَمِيعًۭا فَيُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
يَـٰٓأَيُّهَا
O you
ٱلَّذِينَ
ऐ लोगो जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए हो
عَلَيْكُمْ
लाज़िम है तुम पर (बचाना)
أَنفُسَكُمْ ۖ
अपनी जानों को
لَا
Not
يَضُرُّكُم
ना नुक़सान देगा तुम्हें
مَّن
जो
ضَلَّ
भटक गया
إِذَا
जब
ٱهْتَدَيْتُمْ ۚ
हिदायत पा चुके तुम
إِلَى
To
ٱللَّهِ
तरफ़ अल्लाह ही के
مَرْجِعُكُمْ
लौटना है तुम्हारा
جَمِيعًۭا
सब का
فَيُنَبِّئُكُم
फिर वो बता देगा तुम्हें
بِمَا
वो जो
كُنتُمْ
थे तुम
تَعْمَلُونَ
तुम अमल करते
ऐ ईमान लानेवालो! तुमपर अपनी चिन्ता अनिवार्य है, जब तुम रास्ते पर हो, तो जो कोई भटक जाए वह तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता। अल्लाह की ओर तुम सबको लौटकर जाना है। फिर वह तुम्हें बता देगा, जो कुछ तुम करते रहे होगे
तफ़्सीर:
ऐ ईमान वालो! तुम अपनी चिंता करो। अतः अपने आपको ऐसा कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध करो, जिससे तुम्हारा सुधार हो। यदि तुम स्वयं मार्गदर्शन पा चुके, तो लोगों में से जो व्यक्ति गुमराह हो गया और उसने तुम्हारी बात नहीं मानी, वह तुम्हें कोई हानि नहीं पहुँचाएगा। तथा तुम्हारे मार्गदर्शन प्राप्त होने की अपेक्षा यह कि तुम भलाई का आदेश दो और बुराई से रोको। क़ियामत के दिन तुम्हें अकेले अल्लाह ही की ओर लौटकर जाना है, फिर वह तुम्हें बताएगा कि तुम दुनिया में क्या किया करते थे और तुम्हें उसका बदला देगा।
आयत 106
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ شَهَـٰدَةُ بَيْنِكُمْ إِذَا حَضَرَ أَحَدَكُمُ ٱلْمَوْتُ حِينَ ٱلْوَصِيَّةِ ٱثْنَانِ ذَوَا عَدْلٍۢ مِّنكُمْ أَوْ ءَاخَرَانِ مِنْ غَيْرِكُمْ إِنْ أَنتُمْ ضَرَبْتُمْ فِى ٱلْأَرْضِ فَأَصَـٰبَتْكُم مُّصِيبَةُ ٱلْمَوْتِ ۚ تَحْبِسُونَهُمَا مِنۢ بَعْدِ ٱلصَّلَوٰةِ فَيُقْسِمَانِ بِٱللَّهِ إِنِ ٱرْتَبْتُمْ لَا نَشْتَرِى بِهِۦ ثَمَنًۭا وَلَوْ كَانَ ذَا قُرْبَىٰ ۙ وَلَا نَكْتُمُ شَهَـٰدَةَ ٱللَّهِ إِنَّآ إِذًۭا لَّمِنَ ٱلْـَٔاثِمِينَ
يَـٰٓأَيُّهَا
O you
ٱلَّذِينَ
ऐ लोगो जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए हो
شَهَـٰدَةُ
गवाही हो
بَيْنِكُمْ
तुम्हारे दर्मियान
إِذَا
जब
حَضَرَ
हाज़िर हो
أَحَدَكُمُ
तुम में से किसी एक को
ٱلْمَوْتُ
मौत
حِينَ
वक़्त
ٱلْوَصِيَّةِ
वसीयत के
ٱثْنَانِ
दो
ذَوَا
men
عَدْلٍۢ
अदल वालों के
مِّنكُمْ
तुम में से
أَوْ
या
ءَاخَرَانِ
दो और
مِنْ
from
غَيْرِكُمْ
तुम्हारे अलावा से
إِنْ
अगर
أَنتُمْ
तुम
ضَرَبْتُمْ
सफ़र कर रहे हो तुम
فِى
in
ٱلْأَرْضِ
ज़मीन में
فَأَصَـٰبَتْكُم
फिर पहुँचे तुम्हें
مُّصِيبَةُ
मुसीबत
ٱلْمَوْتِ ۚ
मौत की
تَحْبِسُونَهُمَا
तुम रोक लो उन दोनों को
مِنۢ
from
بَعْدِ
बाद
ٱلصَّلَوٰةِ
नमाज़ के
فَيُقْسِمَانِ
फिर वो दोनों क़समें खाऐं
بِٱللَّهِ
अल्लाह की
إِنِ
अगर
ٱرْتَبْتُمْ
शक करो तुम
لَا
Not
نَشْتَرِى
ना हम लेंगे
بِهِۦ
साथ उसके
ثَمَنًۭا
कोई क़ीमत
وَلَوْ
और अगरचे
كَانَ
हो वो
ذَا
(of)
قُرْبَىٰ ۙ
रिश्तेदार
وَلَا
और ना
نَكْتُمُ
हम छुपाऐंगे
شَهَـٰدَةَ
गवाही को
ٱللَّهِ
अल्लाह की
إِنَّآ
बेशक हम
إِذًۭا
तब
لَّمِنَ
(will) surely (be) of
ٱلْـَٔاثِمِينَ
अलबत्ता गुनाहगारों में से होंगे
ऐ ईमान लानेवालों! जब तुममें से किसी की मृत्यु का समय आ जाए तो वसीयत के समय तुममें से दो न्यायप्रिय व्यक्ति गवाह हों, या तुम्हारे ग़ैर लोगों में से दूसरे दो व्यक्ति गवाह बन जाएँ, यह उस समय कि यदि तुम कहीं सफ़र में गए हो और मृत्यु तुमपर आ पहुँचे। यदि तुम्हें कोई सन्देह हो तो नमाज़ के पश्चात उन दोनों को रोक लो, फिर वे दोनों अल्लाह की क़समें खाएँ कि "हम इसके बदले कोई मूल्य स्वीकार करनेवाले नहीं हैं चाहे कोई नातेदार ही क्यों न हो और न हम अल्लाह की गवाही छिपाते है। निस्सन्देह ऐसा किया तो हम गुनाहगार ठहरेंगे।"
तफ़्सीर:
ऐ ईमान वालो! यदि तुममें से किसी की मृत्यु का समय मौत की किसी निशानी के प्रकट होने के साथ निकट आ जाए, तो वह अपनी वसीयत पर मुसलमानों में से दो न्यायप्रिय व्यक्तियों को, या मुसलमानों की अनुपस्थिति के कारण ज़रूरत पड़ने पर काफ़िरों में से दो आदमियों को गवाह बना दे, यदि तुम यात्रा कर रहे हो और तुमपर मृत्यु आ पहुँचे। यदि तुम्हें उन दोनों की गवाही के विषय में संदेह हो, तो किसी नमाज़ के बाद उन्हें रोक लो और वे दोनों अल्लाह की क़सम खाएँ कि : वे दोनों अल्लाह की ओर से मिले हुए अपने हिस्से (यानी अपनी क़सम) को किसी मुआवज़े के बदले नहीं बेचेंगे, और न उसके साथ किसी संबंधी का पक्ष लेंगे (लाभ पहुँचाएँगे), तथा वे दोनों अपने पास मौजूद अल्लाह की किसी गवाही को नहीं छिपाएँगे, और यदि उन्होंने ऐसा किया तो वे दोनों अल्लाह की अवज्ञा करने वाले पापियों में से होंगे।
आयत 107
فَإِنْ عُثِرَ عَلَىٰٓ أَنَّهُمَا ٱسْتَحَقَّآ إِثْمًۭا فَـَٔاخَرَانِ يَقُومَانِ مَقَامَهُمَا مِنَ ٱلَّذِينَ ٱسْتَحَقَّ عَلَيْهِمُ ٱلْأَوْلَيَـٰنِ فَيُقْسِمَانِ بِٱللَّهِ لَشَهَـٰدَتُنَآ أَحَقُّ مِن شَهَـٰدَتِهِمَا وَمَا ٱعْتَدَيْنَآ إِنَّآ إِذًۭا لَّمِنَ ٱلظَّـٰلِمِينَ
فَإِنْ
फिर अगर
عُثِرَ
इत्तिला हो जाए
عَلَىٰٓ
उस पर
أَنَّهُمَا
कि बेशक वो दोनों
ٱسْتَحَقَّآ
वो मुस्तहिक़ हुए हैं
إِثْمًۭا
गुनाह के
فَـَٔاخَرَانِ
पस दो दूसरे
يَقُومَانِ
वो दोनों खड़े होंगे
مَقَامَهُمَا
उन दोनों की जगह
مِنَ
from
ٱلَّذِينَ
उन लोगों में से
ٱسْتَحَقَّ
हक़ साबित हो गया
عَلَيْهِمُ
जिन पर
ٱلْأَوْلَيَـٰنِ
दो क़रीब तरीन
فَيُقْسِمَانِ
फिर वो दोनों क़समें खाऐंगे
بِٱللَّهِ
अल्लाह की
لَشَهَـٰدَتُنَآ
अलबत्ता गवाही हमारी
أَحَقُّ
ज़्यादा सच्ची है
مِن
than
شَهَـٰدَتِهِمَا
उन दोनों की गवाही से
وَمَا
और नहीं
ٱعْتَدَيْنَآ
ज़्यादती की हमने
إِنَّآ
बेशक हम
إِذًۭا
तब
لَّمِنَ
(will be) of
ٱلظَّـٰلِمِينَ
अलबत्ता ज़ालिमों में से होंगे
फिर यदि पता चल जाए कि उन दोनों ने हक़ मारकर अपने को गुनाह में डाल लिया है, तो उनकी जगह दूसरे दो व्यक्ति उन लोगों में से खड़े हो जाएँ, जिनका हक़ पिछले दोनों ने मारना चाहा था, फिर वे दोनों अल्लाह की क़समें खाएँ कि "हम दोनों की गवाही उन दोनों की गवाही से अधिक सच्ची है और हमने कोई ज़्यादती नहीं की है। निस्सन्देह हमने ऐसा किया तो अत्याचारियों में से होंगे।"
तफ़्सीर:
यदि क़सम खिलाने के बाद यह स्पष्ट हो जाए कि उन दोनों ने गवाही अथवा क़सम में झूठ बोला है, या उन दोनों की ख़यानत (विश्वासघात) प्रकट हो जाए; तो उनके स्थान पर मरे हुए व्यक्ति के निकटतम संबंधियों में से दो व्यक्ति खड़े होकर सत्य की गवाही दें या क़सम खाएँ। वे दोनों अल्लाह की क़सम खाते हुए कहें : निश्चय उनके झूठ और ख़यानत पर हमारी गवाही, उन दोनों की अपनी सच्चाई और अमानत पर गवाही से अधिक सच्ची है, और हमने झूठी क़सम नहीं खाई है। यदि हमने झूठी गवाही दी है, तो निश्चय हम उन अत्याचारियों में से होंगे जो अल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन करने वाले हैं।
आयत 108
ذَٰلِكَ أَدْنَىٰٓ أَن يَأْتُوا۟ بِٱلشَّهَـٰدَةِ عَلَىٰ وَجْهِهَآ أَوْ يَخَافُوٓا۟ أَن تُرَدَّ أَيْمَـٰنٌۢ بَعْدَ أَيْمَـٰنِهِمْ ۗ وَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ وَٱسْمَعُوا۟ ۗ وَٱللَّهُ لَا يَهْدِى ٱلْقَوْمَ ٱلْفَـٰسِقِينَ
ذَٰلِكَ
ये
أَدْنَىٰٓ
ज़्यादा क़रीब है
أَن
कि
يَأْتُوا۟
वो लाऐं
بِٱلشَّهَـٰدَةِ
गवाही को
عَلَىٰ
in
وَجْهِهَآ
उसके (असल) रुख़ पर
أَوْ
या
يَخَافُوٓا۟
वो डरें
أَن
कि
تُرَدَّ
रद्द कर दी जाऐंगी
أَيْمَـٰنٌۢ
क़समें (उनकी)
بَعْدَ
बाद
أَيْمَـٰنِهِمْ ۗ
उन (वुरसा) की क़समों के
وَٱتَّقُوا۟
और डरो
ٱللَّهَ
अल्लाह से
وَٱسْمَعُوا۟ ۗ
और सुनो
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
لَا
(does) not
يَهْدِى
नहीं वो हिदायत देता
ٱلْقَوْمَ
उन लोगों को
ٱلْفَـٰسِقِينَ
जो फ़ासिक़ हैं
इसमें इसकी सम्भावना है कि वे ठीक-ठीक गवाही देंगे या डरेंगे कि उनकी क़समों के पश्चात क़समें ली जाएँगी। अल्लाह का डर रखो और सुनो। अल्लाह अवज्ञाकारी लोगों को मार्ग नहीं दिखाता
तफ़्सीर:
दोनों गवाहों की गवाही में संदेह होने पर उन्हें नमाज़ के बाद क़सम खिलाने और उनकी गवाही को रद्द करने का जो उल्लेख किया गया है, यह इस बात के अधिक क़रीब है कि वे दोनों गवाही का निष्पादन उसके शरई तरीक़े के अनुसार करें। अतः वे गवाही को विकृत न करें या उसमें बदलाव न करें या ख़यानत (विश्वासघात) न करें। तथा यह इस तथ्य के अधिक क़रीब है कि वे इस बात से डरें कि वारिसों की क़सम उन दोनों की क़सम को ख़ारिज कर देगी, चुनाँचे वे लोग उन दोनों की गवाही के विपरीत क़सम खा लेंगे, इस तरह वे दोनों बेनक़ाब हो जाएँगे। गवाही और क़सम में झूठ और ख़यानत (विश्वासघात) को त्यागकर अल्लाह से डरो, तथा तुम्हें जिस बात का आदेश दिया गया है उसे सुनो और स्वीकार करो। और अल्लाह उन लोगों को सामर्थ्य प्रदान नहीं करता, जो उसके आज्ञापालन से निकल जाने वाले हैं।
आयत 109
۞ يَوْمَ يَجْمَعُ ٱللَّهُ ٱلرُّسُلَ فَيَقُولُ مَاذَآ أُجِبْتُمْ ۖ قَالُوا۟ لَا عِلْمَ لَنَآ ۖ إِنَّكَ أَنتَ عَلَّـٰمُ ٱلْغُيُوبِ
۞ يَوْمَ
जिस दिन
يَجْمَعُ
जमा करेगा
ٱللَّهُ
अल्लाह
ٱلرُّسُلَ
रसूलों को
فَيَقُولُ
फिर कहेगा
مَاذَآ
क्या
أُجِبْتُمْ ۖ
जवाब दिए गए थे तुम
قَالُوا۟
वो कहेंगे
لَا
(There is) no
عِلْمَ
नहीं कोई इल्म
لَنَآ ۖ
हमें
إِنَّكَ
बेशक तू
أَنتَ
तू ही है
عَلَّـٰمُ
खूब जानने वाला
ٱلْغُيُوبِ
ग़ैबों का
जिस दिन अल्लाह रसूलों को इकट्ठा करेगा, फिर कहेगा, "तुम्हें क्या जवाब मिला?" वे कहेंगे, "हमें कुछ नहीं मालूम। तू ही छिपी बातों को जानता है।"
तफ़्सीर:
ऐ लेगो! क़ियामत के दिन को याद करो, जब अल्लाह सभी रसूलों को इकट्ठा करेगा। फिर उनसे कहेगा : तुम्हारे उन समुदायों ने, जिनकी ओर तुम्हें भेजा गया था, तुम्हें क्या जवाब दिया? वे उसका जवाब अल्लाह को सौंपते हुए कहेंगे : हमें कुछ ज्ञान नहीं। बल्कि सारा ज्ञान - ऐ हमारे पालनहार! - केवल तुझे ही है, निःसंदेह तू ही एक अकेला है जो अनदेखी चीज़ों को जानता है।
आयत 110
إِذْ قَالَ ٱللَّهُ يَـٰعِيسَى ٱبْنَ مَرْيَمَ ٱذْكُرْ نِعْمَتِى عَلَيْكَ وَعَلَىٰ وَٰلِدَتِكَ إِذْ أَيَّدتُّكَ بِرُوحِ ٱلْقُدُسِ تُكَلِّمُ ٱلنَّاسَ فِى ٱلْمَهْدِ وَكَهْلًۭا ۖ وَإِذْ عَلَّمْتُكَ ٱلْكِتَـٰبَ وَٱلْحِكْمَةَ وَٱلتَّوْرَىٰةَ وَٱلْإِنجِيلَ ۖ وَإِذْ تَخْلُقُ مِنَ ٱلطِّينِ كَهَيْـَٔةِ ٱلطَّيْرِ بِإِذْنِى فَتَنفُخُ فِيهَا فَتَكُونُ طَيْرًۢا بِإِذْنِى ۖ وَتُبْرِئُ ٱلْأَكْمَهَ وَٱلْأَبْرَصَ بِإِذْنِى ۖ وَإِذْ تُخْرِجُ ٱلْمَوْتَىٰ بِإِذْنِى ۖ وَإِذْ كَفَفْتُ بَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ عَنكَ إِذْ جِئْتَهُم بِٱلْبَيِّنَـٰتِ فَقَالَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ مِنْهُمْ إِنْ هَـٰذَآ إِلَّا سِحْرٌۭ مُّبِينٌۭ
إِذْ
जब
قَالَ
फ़रमाएगा
ٱللَّهُ
अल्लाह
يَـٰعِيسَى
O Isa
ٱبْنَ
son
مَرْيَمَ
ऐ ईसा इब्ने मरियम
ٱذْكُرْ
याद करो
نِعْمَتِى
मेरी नेअमत (जो)
عَلَيْكَ
तुझ पर है
وَعَلَىٰ
and upon
وَٰلِدَتِكَ
और तेरी वालिदा पर
إِذْ
जब
أَيَّدتُّكَ
ताईद की मैंने तुम्हारी
بِرُوحِ
with (the) Spirit
ٱلْقُدُسِ
साथ रूहुल क़ुदुस के
تُكَلِّمُ
तू कलाम करता था
ٱلنَّاسَ
लोगों से
فِى
in
ٱلْمَهْدِ
गहवारे में
وَكَهْلًۭا ۖ
और अधेड़ उम्र में
وَإِذْ
और जब
عَلَّمْتُكَ
तालीम दी मैंने तुझे
ٱلْكِتَـٰبَ
किताब
وَٱلْحِكْمَةَ
और हिकमत
وَٱلتَّوْرَىٰةَ
और तौरात
وَٱلْإِنجِيلَ ۖ
और इन्जील की
وَإِذْ
और जब
تَخْلُقُ
तू बनाता था
مِنَ
from
ٱلطِّينِ
मिट्टी से
كَهَيْـَٔةِ
मानिन्द शक्ल
ٱلطَّيْرِ
परिन्दे की
بِإِذْنِى
मेरे इज़्न से
فَتَنفُخُ
फिर तू फूँक मारता था
فِيهَا
उस में
فَتَكُونُ
फिर वो हो जाता था
طَيْرًۢا
परिन्दा
بِإِذْنِى ۖ
मेरे इज़्न से
وَتُبْرِئُ
और तू अच्छा कर देता था
ٱلْأَكْمَهَ
पैदाइशी अँधे को
وَٱلْأَبْرَصَ
और बर्स वाले को
بِإِذْنِى ۖ
मेरे इज़्न से
وَإِذْ
और जब
تُخْرِجُ
तू निकालता था
ٱلْمَوْتَىٰ
मुर्दों को
بِإِذْنِى ۖ
मेरे इज़्न से
وَإِذْ
और जब
كَفَفْتُ
रोका मैंने
بَنِىٓ
(the) Children
إِسْرَٰٓءِيلَ
बनी इस्राईल को
عَنكَ
तुझसे
إِذْ
जब
جِئْتَهُم
लाया तू उनके पास
بِٱلْبَيِّنَـٰتِ
वाज़ेह निशानियाँ
فَقَالَ
तो कहा
ٱلَّذِينَ
उन्होंने जिन्होंने
كَفَرُوا۟
कुफ़्र किया
مِنْهُمْ
उनमें से
إِنْ
नहीं है
هَـٰذَآ
ये
إِلَّا
मगर
سِحْرٌۭ
जादू
مُّبِينٌۭ
खुल्लम-खुल्ला
जब अल्लाह कहेगा, "ऐ मरयम के बेटे ईसा! मेरे उस अनुग्रह को याद करो जो तुमपर और तुम्हारी माँ पर हुआ है। जब मैंने पवित्र आत्मा से तुम्हें शक्ति प्रदान की; तुम पालने में भी लोगों से बात करते थे और बड़ी अवस्था को पहुँचकर भी। और याद करो, जबकि मैंने तुम्हें किताब और हिकमत और तौरात और इनजील की शिक्षा दी थी। और याद करो जब तुम मेरे आदेश से मिट्टी से पक्षी का प्रारूपण करते थे; फिर उसमें फूँक मारते थे, तो वह मेरे आदेश से उड़नेवाली बन जाती थी। और तुम मेरे आदेश से मुर्दों को जीवित निकाल खड़ा करते थे। और याद करो जबकि मैंने तुमसे इसराइलियों को रोके रखा, जबकि तुम उनके पास खुली-खुली निशानियाँ लेकर पहुँचे थे, तो उनमें से जो इनकार करनेवाले थे, उन्होंने कहा, यह तो बस खुला जादू है।"
तफ़्सीर:
तथा याद करो, जब अल्लाह (क़ियामत के दिन) ईसा अलैहिस्सलाम को संबोधित करते हुए कहेगा : ऐ मरयम के पुत्र ईसा! तुम अपने ऊपर मेरे अनुग्रह को याद करो जब मैंने तुम्हें बिना पिता के बनाया था, और अपनी माता मरयम अलैहस्सलाम के ऊपर मेरे अनुग्रह को याद करो, जब मैंने उसे उसके समय की महिलाओं के ऊपर चुन लिया। तथा अपने ऊपर मेरी उस नेमत को याद करो जो मैंने तुम्हें उस समय प्रदान की, जब मैंने तुम्हें जिबरील (अलैहिस्सलाम) द्वारा शक्ति प्रदान की, तुम लोगों से बात करते थे - जबकि तुम दूध पीते बच्चे थे - उन्हें अल्लाह की ओर बुलाते थे, तथा तुम अपनी अधेड़ आयु में उनसे उस चीज़ के बारे में बात करते थे जिसके साथ मैंने तुम्हें उनकी ओर भेजा था। मैंने तुमपर एक अनुग्रह यह किया कि तुम्हें लिखना सिखाया और उस तौरात का ज्ञान प्रदान किया जो मूसा (अलैहिस्सलाम) पर उतारी गई थी और उस इंजील की शिक्षा दी जो तुमपर उतारी गई, और मैंने तुम्हें शरीयत के रहस्य, उसके फ़ायदे तथा उसकी हिकमतें बताईं। तुम्हारे ऊपर मेरी नेमतों में से एक यह है कि तुम मिट्टी से पक्षी के रूप समान आकृति बनाते थे, फिर उसमें फूँक मारते थे, तो वह पक्षी बन जाती थी। तथा तुम जन्म से अंधे को उसकी अंधता से चंगा कर देते थे और कोढ़ी को रोगमुक्त कर देते थे, तो उसकी त्वचा स्वस्थ हो जाती थी। तथा तुम मुर्दों को अल्लाह से उन्हें पुनर्जीवित करने की दुआ करके उन्हें पुनर्जीवित कर देते थे। यह सब मेरी अनुमति से संपन्न होता था। मैंने तुमपर जो उपकार किया, उनमें से एक यह भी है कि मैंने बनी इसराईल को उस समय तुमसे दूर कर दिया जब वे तुम्हें मार डालने ही वाले थे, जब तुम उनके पास स्पष्ट चमत्कार लेकर आए थे। तो उन्होंने उनका इनकार कर दिया, और कहा : यह ईसा जो कुछ लेकर आए हैं एक स्पष्ट जादू के सिवा कुछ नहीं।
आयत 111
وَإِذْ أَوْحَيْتُ إِلَى ٱلْحَوَارِيِّـۧنَ أَنْ ءَامِنُوا۟ بِى وَبِرَسُولِى قَالُوٓا۟ ءَامَنَّا وَٱشْهَدْ بِأَنَّنَا مُسْلِمُونَ
وَإِذْ
और जब
أَوْحَيْتُ
वही की मैंने
إِلَى
to
ٱلْحَوَارِيِّـۧنَ
तरफ़ हवारियों के
أَنْ
ये कि
ءَامِنُوا۟
ईमान लाओ
بِى
मुझ पर
وَبِرَسُولِى
और मेरे रसूल पर
قَالُوٓا۟
उन्होंने कहा
ءَامَنَّا
ईमान लाए हम
وَٱشْهَدْ
और गवाह रह
بِأَنَّنَا
बेशक हम
مُسْلِمُونَ
मुसलमान हैं
और याद करो, जब मैंने हबारियों (साथियों और शागिर्दों) के दिल में डाला कि "मुझपर और मेरे रसूल पर ईमान लाओ," तो उन्होंने कहा, "हम ईमान लाए और तुम गवाह रहो कि हम मुस्लिम है।"
तफ़्सीर:
तथा तुम अपने ऊपर मेरे इस उपकार को भी याद करो कि मैंने तुम्हें कुछ सहायक प्रदान किए जब मैंने हवारियों (साथियों) के दिल में यह बात डाल दी कि वे मुझ पर और तुम पर ईमान लाएँ। तो उन्होंने आज्ञा मानी और जवाब देते हुए कहा : हम ईमान लाए, और - ऐ हमारे रब! - तू गवाह रह कि हम तेरे आज्ञाकारी और अधीन हैं।
आयत 112
إِذْ قَالَ ٱلْحَوَارِيُّونَ يَـٰعِيسَى ٱبْنَ مَرْيَمَ هَلْ يَسْتَطِيعُ رَبُّكَ أَن يُنَزِّلَ عَلَيْنَا مَآئِدَةًۭ مِّنَ ٱلسَّمَآءِ ۖ قَالَ ٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ
إِذْ
जब
قَالَ
कहा
ٱلْحَوَارِيُّونَ
हवारियों ने
يَـٰعِيسَى
O Isa
ٱبْنَ
son
مَرْيَمَ
ऐ ईसा इब्ने मरियम
هَلْ
क्या
يَسْتَطِيعُ
इस्तिताअत रखता है
رَبُّكَ
रब तेरा
أَن
कि
يُنَزِّلَ
वो उतारे
عَلَيْنَا
हम पर
مَآئِدَةًۭ
एक दस्तरख़्वान
مِّنَ
from
ٱلسَّمَآءِ ۖ
आसमान से
قَالَ
उसने कहा
ٱتَّقُوا۟
डरो
ٱللَّهَ
अल्लाह से
إِن
अगर
كُنتُم
हो तुम
مُّؤْمِنِينَ
मोमिन
और याद करो जब हवारियों ने कहा, "ऐ मरयम के बेटे ईसा! क्या तुम्हारा रब आकाश से खाने से भरा भाल उतार सकता है?" कहा, "अल्लाह से डरो, यदि तुम ईमानवाले हो।"
तफ़्सीर:
उस समय को याद करो, जब हवारियों ने कहा कि क्या आपका पालनहार, यदि आप उससे दुआ करें, तो हमपर आकाश से एक थाल (भोजन सहित दस्तर-ख़्वान) उतार सकता है? तो ईसा (अलैहिस्सलाम) उन्हें अल्लाह से डरने और जो कुछ उन्होंने माँगा था, उसे त्यागने का आदेश देकर उन्हें उत्तर दिया। क्योंकि हो सकता है उसमें उनकी कोई परीक्षा हो, और उनसे कहा : जीविका की तलाश में अपने रब पर भरोसा करो, यदि तुम मोमिन हो।
आयत 113
قَالُوا۟ نُرِيدُ أَن نَّأْكُلَ مِنْهَا وَتَطْمَئِنَّ قُلُوبُنَا وَنَعْلَمَ أَن قَدْ صَدَقْتَنَا وَنَكُونَ عَلَيْهَا مِنَ ٱلشَّـٰهِدِينَ
قَالُوا۟
उन्होंने कहा
نُرِيدُ
हम चाहते हैं
أَن
कि
نَّأْكُلَ
हम खाऐं
مِنْهَا
उससे
وَتَطْمَئِنَّ
और मुत्मईन हो जाऐं
قُلُوبُنَا
दिल हमारे
وَنَعْلَمَ
और हम जान लें
أَن
कि
قَدْ
तहक़ीक़
صَدَقْتَنَا
सच कहा तूने हम से
وَنَكُونَ
और हम हो जाऐं
عَلَيْهَا
उस पर
مِنَ
among
ٱلشَّـٰهِدِينَ
गवाहों में से
वे बोले, "हम चाहते हैं कि उनमें से खाएँ और हमारे हृदय सन्तुष्ट हो और हमें मालूम हो जाए कि तूने हमने सच कहा और हम उसपर गवाह रहें।"
तफ़्सीर:
हवारियों ने ईसा से कहा : हम चाहते हैं कि इस दस्तर-ख़्वान से खाएँ, और हमारे दिल अल्लाह की शक्ति की पूर्णता से और इस बात से आश्वस्त हो जाएँ कि आप उसके रसूल हैं, तथा हम निश्चित रूप से जान लें कि आप अल्लाह के पास से जो कुछ लेकर आए हैं, उसमें आपने हमसे सच्च कहा है, और हम उन लोगों के लिए इस बात के साक्षी बन जाएँ, जो यहाँ मौजूद नहीं हैं।
आयत 114
قَالَ عِيسَى ٱبْنُ مَرْيَمَ ٱللَّهُمَّ رَبَّنَآ أَنزِلْ عَلَيْنَا مَآئِدَةًۭ مِّنَ ٱلسَّمَآءِ تَكُونُ لَنَا عِيدًۭا لِّأَوَّلِنَا وَءَاخِرِنَا وَءَايَةًۭ مِّنكَ ۖ وَٱرْزُقْنَا وَأَنتَ خَيْرُ ٱلرَّٰزِقِينَ
قَالَ
कहा
عِيسَى
Isa
ٱبْنُ
son
مَرْيَمَ
ईसा इब्ने मरियम ने
ٱللَّهُمَّ
ऐ अल्लाह
رَبَّنَآ
ऐ हमारे रब
أَنزِلْ
उतार
عَلَيْنَا
हम पर
مَآئِدَةًۭ
एक दस्तरख़्वान
مِّنَ
from
ٱلسَّمَآءِ
आसमान से
تَكُونُ
वो हो जाए
لَنَا
हमारे लिए
عِيدًۭا
ईद
لِّأَوَّلِنَا
वास्ते हमारे पहलों के
وَءَاخِرِنَا
और हमारे पिछलों के
وَءَايَةًۭ
और एक निशानी
مِّنكَ ۖ
तेरी तरफ़ से
وَٱرْزُقْنَا
और रिज़्क़ दे हमें
وَأَنتَ
और तू
خَيْرُ
बेहतर है
ٱلرَّٰزِقِينَ
सब रिज़्क़ देने वालों से
मरयम के बेटे ईसा ने कहा, "ऐ अल्लाह, हमारे रब! हमपर आकाश से खाने से भरा खाल उतार, जो हमारे लिए और हमारे अंगलों और हमारे पिछलों के लिए ख़ुशी का कारण बने और तेरी ओर से एक निशानी हो, और हमें आहार प्रदान कर। तू सबसे अच्छा प्रदान करनेवाला है।"
तफ़्सीर:
ईसा अलैहिस्सलाम ने उनके अनुरोध का उत्तर दिया और अल्लाह से यह कहते हुए दुआ की : हे हमारे रब! हमपर खाने का एक दस्तर-ख़्वान उतार दे, जिसके उतरने के दिन को हम एक पर्व बनाकर तेरे लिए आभार प्रकट करते हुए उसका सम्मान करें, तथा वह तेरे एकत्व (एकमात्र पूज्य होने) की निशानी और प्रमाण, तथा जिस चीज़ के साथ मैं भेजा गया हूँ उसकी सच्चाई का प्रमाण हो। तथा हमें ऐसी जीविका प्रदान कर, जो तेरी इबादत करने में हमारी मदद करे, और - ऐ हमारे रब! - तू सबसे उत्तम जीविका प्रदान करने वाला है।
आयत 115
قَالَ ٱللَّهُ إِنِّى مُنَزِّلُهَا عَلَيْكُمْ ۖ فَمَن يَكْفُرْ بَعْدُ مِنكُمْ فَإِنِّىٓ أُعَذِّبُهُۥ عَذَابًۭا لَّآ أُعَذِّبُهُۥٓ أَحَدًۭا مِّنَ ٱلْعَـٰلَمِينَ
قَالَ
फ़रमाया
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
إِنِّى
बेशक मैं
مُنَزِّلُهَا
नाज़िल करने वाला हूँ उसे
عَلَيْكُمْ ۖ
तुम पर
فَمَن
तो जो कोई
يَكْفُرْ
कुफ़्र करेगा
بَعْدُ
बाद उसके
مِنكُمْ
तुम में से
فَإِنِّىٓ
तो बेशक मैं
أُعَذِّبُهُۥ
मैं अज़ाब दूँगा उसे
عَذَابًۭا
ऐसा अज़ाब
لَّآ
not
أُعَذِّبُهُۥٓ
नहीं मैं अज़ाब दूँगा वो
أَحَدًۭا
किसी एक को
مِّنَ
among
ٱلْعَـٰلَمِينَ
तमाम जहान वालों में से
अल्लाह ने कहा, "मैं उसे तुमपर उतारूँगा, फिर उसके पश्चात तुममें से जो कोई इनकार करेगा तो मैं अवश्य उसे ऐसी यातना दूँगा जो सम्पूर्ण संसार में किसी को न दूँगा।"
तफ़्सीर:
अल्लाह ने ईसा अलैहिस्सलाम की दुआ क़बूल कर ली और फरमाया : मैं यह दस्तर-ख़्वान उतारने वाला हूँ, जो तुमने अपने ऊपर उतारने की माँग की है। अतः जो कोई भी उसके उतरने के बाद कुफ्र करे, वह केवल खुद को दोषी ठहराए। क्योंकि मैं उसे ऐसी कड़ी यातना दूँगा, जो किसी और को नहीं दूँगा। क्योंकि उसने प्रकाशमान (स्पष्ट) निशानी देखी, इसलिए उसका कुफ़्र हठ का कुफ़्र है। तथा अल्लाह ने उनसे अपना वचन पूरा किया, सो उसे उनपर उतार दिया।
आयत 116
وَإِذْ قَالَ ٱللَّهُ يَـٰعِيسَى ٱبْنَ مَرْيَمَ ءَأَنتَ قُلْتَ لِلنَّاسِ ٱتَّخِذُونِى وَأُمِّىَ إِلَـٰهَيْنِ مِن دُونِ ٱللَّهِ ۖ قَالَ سُبْحَـٰنَكَ مَا يَكُونُ لِىٓ أَنْ أَقُولَ مَا لَيْسَ لِى بِحَقٍّ ۚ إِن كُنتُ قُلْتُهُۥ فَقَدْ عَلِمْتَهُۥ ۚ تَعْلَمُ مَا فِى نَفْسِى وَلَآ أَعْلَمُ مَا فِى نَفْسِكَ ۚ إِنَّكَ أَنتَ عَلَّـٰمُ ٱلْغُيُوبِ
وَإِذْ
और जब
قَالَ
फ़रमाएगा
ٱللَّهُ
अल्लाह
يَـٰعِيسَى
O Isa
ٱبْنَ
son
مَرْيَمَ
ऐ ईसा इब्ने मरियम
ءَأَنتَ
क्या तूने
قُلْتَ
कहा था तूने
لِلنَّاسِ
लोगों से
ٱتَّخِذُونِى
बना लो मुझे
وَأُمِّىَ
और मेरी माँ को
إِلَـٰهَيْنِ
दो इलाह
مِن
from
دُونِ
सिवाय
ٱللَّهِ ۖ
अल्लाह के
قَالَ
वो कहेंगे
سُبْحَـٰنَكَ
पाक है तू
مَا
नहीं
يَكُونُ
है
لِىٓ
मेरे लिए
أَنْ
कि
أَقُولَ
मैं कहूँ (वो बात)
مَا
जिसका
لَيْسَ
नहीं है
لِى
मुझे
بِحَقٍّ ۚ
कोई हक़
إِن
अगर
كُنتُ
था मैं
قُلْتُهُۥ
कहता मैं उसको
فَقَدْ
तो तहक़ीक़
عَلِمْتَهُۥ ۚ
तू जान लेता उसे
تَعْلَمُ
तू जानता है
مَا
जो
فِى
(is) in
نَفْسِى
मेरे नफ़्स में है
وَلَآ
और नहीं
أَعْلَمُ
मैं जानता
مَا
जो
فِى
(is) in
نَفْسِكَ ۚ
तेरे नफ़्स में है
إِنَّكَ
बेशक तू
أَنتَ
तू ही है
عَلَّـٰمُ
ख़ूब जानने वाला
ٱلْغُيُوبِ
ग़ैबों का
और याद करो जब अल्लाह कहेगा, "ऐ मरयम के बेटे ईसा! क्या तुमने लोगों से कहा था कि अल्लाह के अतिरिक्त दो और पूज्य मुझ और मेरी माँ को बना लो?" वह कहेगा, "महिमावान है तू! मुझसे यह नहीं हो सकता कि मैं यह बात कहूँ, जिसका मुझे कोई हक़ नहीं है। यदि मैंने यह कहा होता तो तुझे मालूम होता। तू जानता है, जो कुछ मेरे मन में है। परन्तु मैं नहीं जानता जो कुछ तेरे मन में है। निश्चय ही, तू छिपी बातों का भली-भाँति जाननेवाला है
तफ़्सीर:
और उस समय को याद करो, जब अल्लाह तआला क़ियामत के दिन ईसा बिन मरयम अलैहिमस्सलाम को संबोधित करते हुए कहेगा : ऐ ईसा बिन मरयम! क्या तुमने लोगों से कहा था : मुझे और मेरी माँ को अल्लाह के अलावा पूज्य बना लो? तो ईसा अलैहिस्सलाम अपने पालनहार की पवित्रता बयान करते हुए कहेंगे : मेरे लिए उचित ही नहीं कि मैं उनसे सत्य के अलावा कुछ कहूँ। और यदि मान लिया जाए कि मैंने ऐसा कहा था, तो निश्चय तुझे उसका ज्ञान है, क्योंकि तुझसे कुछ भी छिपा नहीं है। तू जानता है जो कुछ मैं अपने दिल में छिपाता हूँ, और मुझे नहीं पता जो तेरे मन में है। निश्चय अकेला तू ही है जो हर परोक्ष (अनुपस्थित), हर छिपी हुई और हर प्रत्यक्ष चीज़ को जानता है।
आयत 117
مَا قُلْتُ لَهُمْ إِلَّا مَآ أَمَرْتَنِى بِهِۦٓ أَنِ ٱعْبُدُوا۟ ٱللَّهَ رَبِّى وَرَبَّكُمْ ۚ وَكُنتُ عَلَيْهِمْ شَهِيدًۭا مَّا دُمْتُ فِيهِمْ ۖ فَلَمَّا تَوَفَّيْتَنِى كُنتَ أَنتَ ٱلرَّقِيبَ عَلَيْهِمْ ۚ وَأَنتَ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍۢ شَهِيدٌ
مَا
नहीं
قُلْتُ
कहा था मैंने
لَهُمْ
उन्हें
إِلَّا
मगर
مَآ
जो
أَمَرْتَنِى
हुक्म दिया तूने मुझे
بِهِۦٓ
जिसका
أَنِ
कि
ٱعْبُدُوا۟
इबादत करो
ٱللَّهَ
अल्लाह की
رَبِّى
जो रब है मेरा
وَرَبَّكُمْ ۚ
और रब है तुम्हारा
وَكُنتُ
और था मैं
عَلَيْهِمْ
उन पर
شَهِيدًۭا
गवाह
مَّا
that
دُمْتُ
जब तक मैं रहा
فِيهِمْ ۖ
उनमें
فَلَمَّا
फिर जब
تَوَفَّيْتَنِى
फ़ौत कर दिया तूने मुझे
كُنتَ
था तू
أَنتَ
तू ही
ٱلرَّقِيبَ
निगरान
عَلَيْهِمْ ۚ
उन पर
وَأَنتَ
और तू
عَلَىٰ
ऊपर
كُلِّ
हर
شَىْءٍۢ
चीज़ के
شَهِيدٌ
ख़ूब गवाह है
"मैंने उनसे उसके सिवा और कुछ नहीं कहा, जिसका तूने मुझे आदेश दिया था, यह कि अल्लाह की बन्दगी करो, जो मेरा भी रब है और तुम्हारा भी रब है। और जब तक मैं उनमें रहा उनकी ख़बर रखता था, फिर जब तूने मुझे उठा लिया तो फिर तू ही उनका निरीक्षक था। और तू ही हर चीज़ का साक्षी है
तफ़्सीर:
ईसा (अलैहिस्सलाम) ने अपने रब से कहा : मैंने उनसे केवल वही कहा, जो कुछ तूने मुझे कहने का आदेश दिया था कि उन्हें एकमात्र तेरी इबादत करने का आदेश दूँ। और जब तक मैं उनके बीच मौजूद था तो वे जो कुछ कहते थे मैं उसकी निगरानी करता था। फिर जब तूने मुझे जीवित आकाश पर उठाकर उनके बीच मेरे रहने की अवधि का समापन कर दिया, तो - ऐ मेरे रब! - तू ही उनके कर्मों का संरक्षक था, और तू हर चीज़ का साक्षी है, कोई भी चीज़ तुझसे छिपी नहीं। अतः जो कुछ मैंने उनसे कहा और जो कुछ उन्होंने मेरे बाद कहा, वह तुझसे छिपा नहीं।
आयत 118
إِن تُعَذِّبْهُمْ فَإِنَّهُمْ عِبَادُكَ ۖ وَإِن تَغْفِرْ لَهُمْ فَإِنَّكَ أَنتَ ٱلْعَزِيزُ ٱلْحَكِيمُ
إِن
अगर
تُعَذِّبْهُمْ
तू अज़ाब दे उन्हें
فَإِنَّهُمْ
तो बेशक वो
عِبَادُكَ ۖ
बन्दे हैं तेरे
وَإِن
और अगर
تَغْفِرْ
तू बख़्श दे
لَهُمْ
उन्हें
فَإِنَّكَ
तो बेशक तू
أَنتَ
तू ही है
ٱلْعَزِيزُ
बहुत ज़बरदस्त
ٱلْحَكِيمُ
बहुत हिकमत वाला
"यदि तू उन्हें यातना दे तो वे तो तेरे ही बन्दे ही है और यदि तू उन्हें क्षमा कर दे, तो निस्सन्देह तू अत्यन्त प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है।"
तफ़्सीर:
(ऐ मेरे पालनहार!) यदि तू उन्हें दंड दे, तो बेशक वे तेरे बंदे हैं, तू उनके साथ जो चाहे करे, और यदि तू उनमें से ईमान लाने वालों पर उपकार करते हुए उन्हें क्षमा कर दे, तो कोई तुझे उससे रोकने वाला नहीं। क्योंकि तू सबपर प्रभुत्वशाली है जिसे पराजित नहीं किया जा सकता, तथा अपने प्रबंधन में हिकमत वाला है।
आयत 119
قَالَ ٱللَّهُ هَـٰذَا يَوْمُ يَنفَعُ ٱلصَّـٰدِقِينَ صِدْقُهُمْ ۚ لَهُمْ جَنَّـٰتٌۭ تَجْرِى مِن تَحْتِهَا ٱلْأَنْهَـٰرُ خَـٰلِدِينَ فِيهَآ أَبَدًۭا ۚ رَّضِىَ ٱللَّهُ عَنْهُمْ وَرَضُوا۟ عَنْهُ ۚ ذَٰلِكَ ٱلْفَوْزُ ٱلْعَظِيمُ
قَالَ
फ़रमाएगा
ٱللَّهُ
अल्लाह
هَـٰذَا
ये
يَوْمُ
दिन है
يَنفَعُ
नफ़ा देगा
ٱلصَّـٰدِقِينَ
सच्चों को
صِدْقُهُمْ ۚ
सच उनका
لَهُمْ
उनके लिए
جَنَّـٰتٌۭ
बाग़ात हैं
تَجْرِى
बहती हैं
مِن
from
تَحْتِهَا
उनके नीचे से
ٱلْأَنْهَـٰرُ
नहरें
خَـٰلِدِينَ
हमेशा रहने वाले हैं
فِيهَآ
उनमें
أَبَدًۭا ۚ
अब्द तक /हमेशा
رَّضِىَ
राज़ी हो गया
ٱللَّهُ
अल्लाह
عَنْهُمْ
उनसे
وَرَضُوا۟
और वो राज़ी हो गए
عَنْهُ ۚ
उससे
ذَٰلِكَ
यही है
ٱلْفَوْزُ
कामयाबी
ٱلْعَظِيمُ
बहुत बड़ी
अल्लाह कहेगा, "यह वह दिन है कि सच्चों को उनकी सच्चाई लाभ पहुँचाएगी। उनके लिए ऐसे बाग़ है, जिनके नीचे नहेर बह रही होंगी, उनमें वे सदैव रहेंगे। अल्लाह उनसे राज़ी हुआ और वे उससे राज़ी हुए। यही सबसे बड़ी सफलता है।"
तफ़्सीर:
अल्लाह ईसा अलैहिस्सलाम से कहेगा : यह एक ऐसा दिन है जब सच्चे इरादों, कर्मों और बातों वालों को उनकी सच्चाई लाभ देगी। उनके लिए ऐसे बाग़ हैं, जिनके महलों तथा पेड़ों के नीचे से नहरें प्रवाहित हैं, वे उनमें सदा सर्वदा के लिए रहेंगे, उन्हें कभी मृत्यु नहीं आएगी। अल्लाह उनसे प्रसन्न होगा, अतः वह उनसे कभी नाराज़ नहीं होगा तथा वे शाश्वत आनंद प्राप्त होने के कारण अल्लाह से प्रसन्न होंगे। यह प्रतिफल और (अल्लाह का) उनसे प्रसन्न होना ही महान सफलता है, जिसके बराबर कोई सफलता नहीं।
आयत 120
لِلَّهِ مُلْكُ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَمَا فِيهِنَّ ۚ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍۢ قَدِيرٌۢ
لِلَّهِ
अल्लाह ही के लिए है
مُلْكُ
बादशाहत
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों की
وَٱلْأَرْضِ
और ज़मीन की
وَمَا
और जो कुछ
فِيهِنَّ ۚ
उनमें है
وَهُوَ
और वो
عَلَىٰ
ऊपर
كُلِّ
हर
شَىْءٍۢ
चीज़ के
قَدِيرٌۢ
बहुत क़ुदरत रखने वाला है
आकाशों और धरती और जो कुछ उनके बीच है, सबपर अल्लाह ही की बादशाही है और उसे हर चीज़ की सामर्थ्य प्राप्त है
तफ़्सीर:
आकाशों तथा धरती का राज्य अकेले अल्लाह ही का है, वही उनका स्रष्टा और उनके मामलों का प्रबंध करने वाला है, तथा उनमें विद्यमान् सभी प्राणियों का राज्य उसी का है, तथा वह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है, उसे कोई चीज़ विवश नहीं कर सकती।
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