नाम का मतलब
लोहा (लोहे की मज़बूती और उसके फायदों के ज़िक्र से)
पृष्ठभूमि
सूरह अल-हदीद में अल्लाह की तस्बीह करने वाली कायनात, इन्फाक (राह-ए-खुदा में खर्च) की ताकीद और दुनिया की हकीकत का ज़िक्र है।
फ़ज़ीलत / सार
इस सूरह में लोहे को नाज़िल की गई एक नेमत बताया गया है, जिसमें ताकत भी है और इंसान के फायदे भी, यह कायनात की तख्लीक की हिकमत को उजागर करती है।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
आयत 1
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ سَبَّحَ لِلَّهِ مَا فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ ۖ وَهُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلْحَكِيمُ
سَبَّحَ
तस्बीह की है
لِلَّهِ
अल्लाह के लिए
مَا
हर उस चीज़ ने जो
فِى
(is) in
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों में
وَٱلْأَرْضِ ۖ
और ज़मीन में है
وَهُوَ
और वो
ٱلْعَزِيزُ
बहुत ज़बरदस्त है
ٱلْحَكِيمُ
ख़ूब हिकमत वाला है
अल्लाह की तसबीह की हर उस चीज़ ने जो आकाशों और धरती में है। वही प्रभुत्वशाली, तत्वशाली है
तफ़्सीर:
आकाशों और धरती में अल्लाह की जो भी सृष्टि है, सब उसकी पाकी एवं पवित्रता का गान करती हैं। और वह सब पर प्रभुत्वशाली है जिसे कोई पराजित नहीं कर सकता, अपनी रचना और तक़दीर (नियति) में पूर्ण हिकमत वाला है।
आयत 2
لَهُۥ مُلْكُ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ ۖ يُحْىِۦ وَيُمِيتُ ۖ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍۢ قَدِيرٌ
لَهُۥ
उसी के लिए है
مُلْكُ
बादशाहत
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों
وَٱلْأَرْضِ ۖ
और ज़मीन की
يُحْىِۦ
वो ज़िन्दा करता है
وَيُمِيتُ ۖ
और वो मौत देता है
وَهُوَ
और वो
عَلَىٰ
ऊपर
كُلِّ
हर
شَىْءٍۢ
चीज़ के
قَدِيرٌ
ख़ूब क़ुदरत रखने वाला है
आकाशों और धरती की बादशाही उसी की है। वही जीवन प्रदान करता है और मृत्यु देता है, और उसे हर चीज़ की सामर्थ्य प्राप्त है
तफ़्सीर:
आकाशों और धरती का राज्य केवल उसी का है। वह जिसे जीवन देना चाहता है, उसे जीवन देता है और जिसे मारना चाहता है, उसे मारता है। और वह सब कुछ करने में सक्षम है, उसे कोई भी चीज़ अक्षम नहीं कर सकती।
आयत 3
هُوَ ٱلْأَوَّلُ وَٱلْـَٔاخِرُ وَٱلظَّـٰهِرُ وَٱلْبَاطِنُ ۖ وَهُوَ بِكُلِّ شَىْءٍ عَلِيمٌ
هُوَ
वो ही
ٱلْأَوَّلُ
अव्वल है
وَٱلْـَٔاخِرُ
और आख़िर है
وَٱلظَّـٰهِرُ
और ज़ाहिर है
وَٱلْبَاطِنُ ۖ
और बातिन है
وَهُوَ
और वो
بِكُلِّ
हर
شَىْءٍ
चीज़ को
عَلِيمٌ
ख़ूब जानने वाला है
वही आदि है और अन्त भी और वही व्यक्त है और अव्यक्त भी। और वह हर चीज़ को जानता है
तफ़्सीर:
वही प्रथम है, जिससे पहले कोई चीज़ नहीं। और वही अंतिम है, जिसके बाद कोई चीज़ नहीं। वही ज़ाहिर है, जिससे ऊपर कोई चीज़ नहीं। और वही बातिन है, जिससे निकटतर कोई चीज़ नहीं। और वह हर चीज़ को जानता है, कोई चीज़ उसके ज्ञान के दायरे से बाहर नहीं है।
आयत 4
هُوَ ٱلَّذِى خَلَقَ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ فِى سِتَّةِ أَيَّامٍۢ ثُمَّ ٱسْتَوَىٰ عَلَى ٱلْعَرْشِ ۚ يَعْلَمُ مَا يَلِجُ فِى ٱلْأَرْضِ وَمَا يَخْرُجُ مِنْهَا وَمَا يَنزِلُ مِنَ ٱلسَّمَآءِ وَمَا يَعْرُجُ فِيهَا ۖ وَهُوَ مَعَكُمْ أَيْنَ مَا كُنتُمْ ۚ وَٱللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرٌۭ
هُوَ
वो ही है
ٱلَّذِى
जिसने
خَلَقَ
पैदा किया
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों
وَٱلْأَرْضَ
और ज़मीन को
فِى
in
سِتَّةِ
छ:
أَيَّامٍۢ
दिनों मे
ثُمَّ
फिर
ٱسْتَوَىٰ
वो बुलन्द हुआ
عَلَى
over
ٱلْعَرْشِ ۚ
अर्श पर
يَعْلَمُ
वो जानता है
مَا
जो कुछ
يَلِجُ
दाख़िल होता है
فِى
in(to)
ٱلْأَرْضِ
ज़मीन में
وَمَا
और जो कुछ
يَخْرُجُ
निकलता है
مِنْهَا
उससे
وَمَا
और जो कुछ
يَنزِلُ
उतरता है
مِنَ
from
ٱلسَّمَآءِ
आसमान से
وَمَا
और जो कुछ
يَعْرُجُ
चढ़ता है
فِيهَا ۖ
उसमें
وَهُوَ
और वो
مَعَكُمْ
तुम्हारे साथ है
أَيْنَ
wherever
مَا
जहाँ कहीं
كُنتُمْ ۚ
हो तुम
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
بِمَا
उसे जो
تَعْمَلُونَ
तुम अमल करते हो
بَصِيرٌۭ
ख़ूब देखने वाला है
वही है जिसने आकाशों और धरती को छह दिनों में पैदा किया; फिर सिंहासन पर विराजमान हुआ। वह जानता है जो कुछ धरती में प्रवेश करता है और जो कुछ उससे निकलता है और जो कुछ आकाश से उतरता है और जो कुछ उसमें चढ़ता है। और तुम जहाँ कहीं भी हो, वह तुम्हारे साथ है। और अल्लाह देखता है जो कुछ तुम करते हो
तफ़्सीर:
वही है, जिसने आकाशों और धरती को छह दिनों में पैदा किया। रविवार से शुरू होकर शुक्रवार को समाप्त हुआ। हालाँकि वह उन्हें पलक झपकते ही पैदा करने में सक्षम है। फिर वह अर्श (सिंहासन) पर बुलंद हुआ, जैसा कि उसकी महिमा के योग्य है। वह जानता है जो कुछ धरती में बारिश और बीज आदि के रूप में प्रवेश करता है, और जो कुछ धरती से पौधों और खनिजों आदि के रूप में निकलता है, और जो कुछ आकाश से बारिश और वह़्य (प्रकाशना) आदि के रूप में उतरता है, और जो कुछ आकाश में फ़रिश्तों, बंदों के कर्मों और उनके प्राणों के रूप में चढ़ता है। और वह अपने ज्ञान के साथ तुम्हारे संग है (ऐ लोगो!) तुम जहाँ भी रहो, उससे तुम्हारी कोई चीज़ छिपी नहीं है। और जो कुछ तुम करते हो, अल्लाह उसे ख़ूब देखने वाला है, तुम्हारे कामों में से कुछ भी उससे छिपा नहीं है, और वह तुम्हें उसका प्रतिफल देगा।
आयत 5
لَّهُۥ مُلْكُ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ ۚ وَإِلَى ٱللَّهِ تُرْجَعُ ٱلْأُمُورُ
لَّهُۥ
उसी के लिए है
مُلْكُ
बादशाहत
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों
وَٱلْأَرْضِ ۚ
और ज़मीन की
وَإِلَى
and to
ٱللَّهِ
और अल्लाह ही की तरफ़
تُرْجَعُ
लौटाए जाते हैं
ٱلْأُمُورُ
सब काम
आकाशों और धरती की बादशाही उसी की है और अल्लाह ही की है ओर सारे मामले पलटते है
तफ़्सीर:
आकाशों और धरती का राज्य केवल उसी का है, और सारे मामले केवल उसी की ओर लौटाए जाते हैं। अतः वह क़ियामत के दिन प्राणियों का हिसाब लेगा और उन्हें उनके कर्मों का बदला देगा।
आयत 6
يُولِجُ ٱلَّيْلَ فِى ٱلنَّهَارِ وَيُولِجُ ٱلنَّهَارَ فِى ٱلَّيْلِ ۚ وَهُوَ عَلِيمٌۢ بِذَاتِ ٱلصُّدُورِ
يُولِجُ
वो दाख़िल करता है
ٱلَّيْلَ
रात को
فِى
into
ٱلنَّهَارِ
दिन में
وَيُولِجُ
और वो दाख़िल करता है
ٱلنَّهَارَ
दिन को
فِى
into
ٱلَّيْلِ ۚ
रात में
وَهُوَ
और वो
عَلِيمٌۢ
ख़ूब जानने वाला है
بِذَاتِ
of what is in the breasts
ٱلصُّدُورِ
सीनों वाले (भेद)
वह रात को दिन में प्रविष्ट कराता है और दिन को रात में प्रविष्ट कराता है। वह सीनों में छिपी बात तक को जानता है
तफ़्सीर:
वह रात को दिन में दाखिल करता है, तो अंधेरा छा जाता है और लोग नींद की आग़ोश में चले जाते हैं, तथा दिन को रात में दाख़िल करता है, तो प्रकाश आ जाता है और लोग अपने कामों में लग जाते हैं। और वह अपने बंदों के दिलों की सभी बातों को जानता है, उनमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है।
आयत 7
ءَامِنُوا۟ بِٱللَّهِ وَرَسُولِهِۦ وَأَنفِقُوا۟ مِمَّا جَعَلَكُم مُّسْتَخْلَفِينَ فِيهِ ۖ فَٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ مِنكُمْ وَأَنفَقُوا۟ لَهُمْ أَجْرٌۭ كَبِيرٌۭ
ءَامِنُوا۟
ईमान लाओ
بِٱللَّهِ
अल्लाह पर
وَرَسُولِهِۦ
और उसके रसूल पर
وَأَنفِقُوا۟
और ख़र्च करो
مِمَّا
उससे जो
جَعَلَكُم
उसने बनाया तुम्हें
مُّسْتَخْلَفِينَ
जानशीन
فِيهِ ۖ
उस(माल) में
فَٱلَّذِينَ
तो वो लोग जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
مِنكُمْ
तुम में से
وَأَنفَقُوا۟
और उन्होंने ख़र्च किया
لَهُمْ
उनके लिए
أَجْرٌۭ
अजर है
كَبِيرٌۭ
बहुत बड़ा
ईमान लाओ अल्लाह और उसके रसूल पर और उसमें से ख़र्च करो जिसका उसने तु्म्हें अधिकारी बनाया है। तो तुममें से जो लोग ईमान लाए और उन्होंने ख़र्च किया, उसने लिए बड़ा प्रतिदान है
तफ़्सीर:
अल्लाह पर ईमान लाओ और उसके रसूल पर ईमान लाओ, तथा उस माल में से खर्च करो, जिसका अल्लाह ने तुम्हें उत्तराधिकारी बनाया है, ताकि जो कुछ उसने तुम्हारे लिए निर्धारित किया है उसके अनुसार तुम उसका निपटान करो। फिर तुममें से जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और अल्लाह के रास्ते में अपना धन खर्च किए, उनके लिए उसके पास एक बड़ा प्रतिफल है और वह जन्नत है।
आयत 8
وَمَا لَكُمْ لَا تُؤْمِنُونَ بِٱللَّهِ ۙ وَٱلرَّسُولُ يَدْعُوكُمْ لِتُؤْمِنُوا۟ بِرَبِّكُمْ وَقَدْ أَخَذَ مِيثَـٰقَكُمْ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ
وَمَا
और क्या है
لَكُمْ
तुम्हें
لَا
(that) not
تُؤْمِنُونَ
नहीं तुम ईमान लाते
بِٱللَّهِ ۙ
अल्लाह पर
وَٱلرَّسُولُ
जब कि रसूल
يَدْعُوكُمْ
वो दावत देता है तुम्हें
لِتُؤْمِنُوا۟
कि तुम ईमान लाओ
بِرَبِّكُمْ
अपने रब पर
وَقَدْ
हालाँकि तहक़ीक़
أَخَذَ
उसने लिया है
مِيثَـٰقَكُمْ
पुख़्ता अहद तुमसे
إِن
अगर
كُنتُم
हो तुम
مُّؤْمِنِينَ
ईमान लाने वाले
तुम्हें क्या हो गया है कि तुम अल्लाह पर ईमान नहीं लाते; जबकि रसूल तुम्हें निमंत्रण दे रहा है कि तुम अपने रब पर ईमान लाओ और वह तुमसे दृढ़ वचन भी ले चुका है, यदि तुम मोमिन हो
तफ़्सीर:
और वह कौन-सी चीज़ है जो तुम्हें अल्लाह पर ईमान लाने से रोकती है?! जबकि रसूल तुम्हें अल्लाह की ओर इस आशा में बुला रहे हैं कि तुम अपने रब पर ईमान ले आओ। तथा अल्लाह तुमसे यह वचन ले चुका है कि तुम उसपर ईमान लाओगे, जब उसने तुम्हें तुम्हारे पिताओं की पीठ से बाहर निकाला, यदि तुम ईमान वाले हो।
आयत 9
هُوَ ٱلَّذِى يُنَزِّلُ عَلَىٰ عَبْدِهِۦٓ ءَايَـٰتٍۭ بَيِّنَـٰتٍۢ لِّيُخْرِجَكُم مِّنَ ٱلظُّلُمَـٰتِ إِلَى ٱلنُّورِ ۚ وَإِنَّ ٱللَّهَ بِكُمْ لَرَءُوفٌۭ رَّحِيمٌۭ
هُوَ
वो ही है
ٱلَّذِى
जो
يُنَزِّلُ
नाज़िल करता है
عَلَىٰ
upon
عَبْدِهِۦٓ
अपने बन्दे पर
ءَايَـٰتٍۭ
आयात
بَيِّنَـٰتٍۢ
वाज़ेह
لِّيُخْرِجَكُم
ताकि वो निकाले तुम्हें
مِّنَ
from
ٱلظُّلُمَـٰتِ
अंधेरों से
إِلَى
into
ٱلنُّورِ ۚ
तरफ़ रौशनी के
وَإِنَّ
और बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
بِكُمْ
तुम पर
لَرَءُوفٌۭ
अलबत्ता बहुत शफ़्क़त करने वाला है
رَّحِيمٌۭ
निहायत रहम करने वाला है
वही है जो अपने बन्दों पर स्पष्ट आयतें उतार रहा है, ताकि वह तुम्हें अंधकारों से प्रकाश की ओर ले आए। और वास्तविकता यह है कि अल्लाह तुमपर अत्यन्त करुणामय, दयावान है
तफ़्सीर:
वही है, जो अपने बंदे मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर स्पष्ट निशानियाँ उतारता है; ताकि तुम्हें कुफ़्र और अज्ञान के अँधेरे से निकाल कर ईमान और ज्ञान के उजाले की ओर ले आए। और निश्चय अल्लाह तुम्हारे लिए अत्यंत करुणामय एवं दयावान् है कि उसने अपने नबी को तुम्हारे पास मार्गदर्शक और शुभ समाचार सुनाने वाला बनाकर भेजा।
आयत 10
وَمَا لَكُمْ أَلَّا تُنفِقُوا۟ فِى سَبِيلِ ٱللَّهِ وَلِلَّهِ مِيرَٰثُ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ ۚ لَا يَسْتَوِى مِنكُم مَّنْ أَنفَقَ مِن قَبْلِ ٱلْفَتْحِ وَقَـٰتَلَ ۚ أُو۟لَـٰٓئِكَ أَعْظَمُ دَرَجَةًۭ مِّنَ ٱلَّذِينَ أَنفَقُوا۟ مِنۢ بَعْدُ وَقَـٰتَلُوا۟ ۚ وَكُلًّۭا وَعَدَ ٱللَّهُ ٱلْحُسْنَىٰ ۚ وَٱللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ خَبِيرٌۭ
وَمَا
और क्या है
لَكُمْ
तुम्हें
أَلَّا
कि नहीं
تُنفِقُوا۟
तुम ख़र्च करते
فِى
in
سَبِيلِ
(the) way
ٱللَّهِ
अल्लाह के रास्ते में
وَلِلَّهِ
और अल्लाह ही के लिए है
مِيرَٰثُ
मीरास
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों
وَٱلْأَرْضِ ۚ
और ज़मीन की
لَا
नहीं
يَسْتَوِى
बराबर हो सकता
مِنكُم
तुम में से
مَّنْ
वो जिसने
أَنفَقَ
ख़र्च किया
مِن
before
قَبْلِ
पहले
ٱلْفَتْحِ
फ़तह के
وَقَـٰتَلَ ۚ
और जंग की
أُو۟لَـٰٓئِكَ
यही लोग हैं
أَعْظَمُ
ज़्यादा बड़े
دَرَجَةًۭ
दर्जे में
مِّنَ
than
ٱلَّذِينَ
उनसे जिन्होंने
أَنفَقُوا۟
ख़र्च किया
مِنۢ
afterwards
بَعْدُ
उसके बाद
وَقَـٰتَلُوا۟ ۚ
और उन्होंने जंग की
وَكُلًّۭا
और हर एक से
وَعَدَ
वादा किया
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
ٱلْحُسْنَىٰ ۚ
भलाई का
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
بِمَا
उसकी जो
تَعْمَلُونَ
तुम अमल करते हो
خَبِيرٌۭ
ख़ूब ख़बर रखने वाला है
और तुम्हें क्यो हुआ है कि तुम अल्लाह के मार्ग में ख़र्च न करो, हालाँकि आकाशों और धरती की विरासत अल्लाह ही के लिए है? तुममें से जिन लोगों ने विजय से पूर्व ख़र्च किया और लड़े वे परस्पर एक-दूसरे के समान नहीं है। वे तो दरजे में उनसे बढ़कर है जिन्होंने बाद में ख़र्च किया और लड़े। यद्यपि अल्लाह ने प्रत्येक से अच्छा वादा किया है। अल्लाह उसकी ख़बर रखता है, जो कुछ तुम करते हो
तफ़्सीर:
और वह कौन-सी चीज़ है जो तुम्हें अल्लाह के रास्ते में खर्च करने से रोकती है?! जबकि आकाशों और धरती की विरासत अल्लाह ही के लिए है। (ऐ मोमिनो!) तुममें से जिसने मक्का की विजय से पहले, अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए, उसके मार्ग में अपना धन खर्च किया और इस्लाम के समर्थन के लिए काफ़िरों से लड़ाई की, वह उस व्यक्ति के समान (बराबर) नहीं है, जिसने मक्का की विजय के बाद खर्च किया और काफ़िरों से युद्ध किया। जिन लोगों ने मक्का की विजय से पहले खर्च किया और अल्लाह के मार्ग में युद्ध किया, वे अल्लाह के निकट उन लोगों से ऊँचे पद एवं उच्च स्थान वाले हैं, जिन्होंने उसकी विजय के बाद उसके मार्ग में अपना धन खर्च किया और काफ़िरों से युद्ध किया। जबकि अल्लाह ने दोनों पक्षों से जन्नत का वादा किया है। और तुम जो कुछ कर रहे हो, अल्लाह उसे जानता है। तुम्हारे कर्मों में से कुछ भी उससे छिपा नहीं है और वह तुम्हें उसका बदला देगा।
आज की ज़िंदगी में सबक़
कायनात की तस्बीह और इन्फाक की ताकीद का ज़िक्र है। यह हमें सिखाता है कि पूरी कायनात अल्लाह की तस्बीह कर रही है, इंसान को भी इसमें शामिल होना चाहिए।
आयत 11
مَّن ذَا ٱلَّذِى يُقْرِضُ ٱللَّهَ قَرْضًا حَسَنًۭا فَيُضَـٰعِفَهُۥ لَهُۥ وَلَهُۥٓ أَجْرٌۭ كَرِيمٌۭ
مَّن
Who (is)
ذَا
the one who
ٱلَّذِى
कौन है जो
يُقْرِضُ
क़र्ज़ देगा
ٱللَّهَ
अल्लाह को
قَرْضًا
क़र्ज़
حَسَنًۭا
अच्छा
فَيُضَـٰعِفَهُۥ
फिर वो दोगुना करेगा उसे
لَهُۥ
उसके लिए
وَلَهُۥٓ
और उसी के लिए है
أَجْرٌۭ
अजर
كَرِيمٌۭ
इज़्ज़त वाला
कौन है जो अल्लाह को ऋण दे, अच्छा ऋण कि वह उसे उसके लिए कई गुना कर दे। और उसके लिए सम्मानित प्रतिदान है
तफ़्सीर:
कौन है, जो दिल की ख़ुशी से अपना माल अल्लाह के लिए खर्च करे, तो अल्लाह उसे उसके ख़र्च किए हुए माल का बदला कई गुना बढ़ाकर दे और उसके लिए क़ियामत के दिन एक सम्मानजनक बदला अर्थात् जन्नत है?!
आयत 12
يَوْمَ تَرَى ٱلْمُؤْمِنِينَ وَٱلْمُؤْمِنَـٰتِ يَسْعَىٰ نُورُهُم بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَبِأَيْمَـٰنِهِم بُشْرَىٰكُمُ ٱلْيَوْمَ جَنَّـٰتٌۭ تَجْرِى مِن تَحْتِهَا ٱلْأَنْهَـٰرُ خَـٰلِدِينَ فِيهَا ۚ ذَٰلِكَ هُوَ ٱلْفَوْزُ ٱلْعَظِيمُ
يَوْمَ
जिस दिन
تَرَى
आप देखेंगे
ٱلْمُؤْمِنِينَ
मोमिन मर्दों
وَٱلْمُؤْمِنَـٰتِ
और मोमिन औरतों को
يَسْعَىٰ
दौड़ता होगा
نُورُهُم
नूर उनका
بَيْنَ
before them
أَيْدِيهِمْ
उनके आगे-आगे
وَبِأَيْمَـٰنِهِم
और उनके दाऐं जानिब
بُشْرَىٰكُمُ
ख़ुशख़बरी है तुम्हें
ٱلْيَوْمَ
आज के दिन
جَنَّـٰتٌۭ
ऐसे बाग़ात की
تَجْرِى
बहती हैं
مِن
from
تَحْتِهَا
जिनके नीचे से
ٱلْأَنْهَـٰرُ
नहरें
خَـٰلِدِينَ
हमेशा रहने वाले हैं
فِيهَا ۚ
उनमें
ذَٰلِكَ
यही है
هُوَ
वो
ٱلْفَوْزُ
कामयाबी
ٱلْعَظِيمُ
बहुत बड़ी
जिस दिन तुम मोमिन पुरुषों और मोमिन स्त्रियों को देखोगे कि उनका प्रकाश उनके आगे-आगे दौड़ रहा है और उनके दाएँ हाथ में है। (कहा जाएगा,) "आज शुभ सूचना है तुम्हारे लिए ऐसी जन्नतों की जिनके नीचे नहरें बह रही है, जिनमें सदैव रहना है। वही बड़ी सफलता है।"
तफ़्सीर:
जिस दिन आप मोमिन पुरुषों और मोमिन स्त्रियों को देखेंगे कि उनका प्रकाश उनके आगे-आगे और उनके दाहिनी ओर चल रहा होगा। और उस दिन उनसे कहा जाएगा : आज तुम्हारे लिए ऐसे बाग़ों की खुशख़बरी है, जिनके महलों और पेड़ों के नीचे से नहरें बहती हैं, जिनमें तुम हमेशा रहने वाले हो। यही बदला तो बहुत बड़ी सफलता है, जिसके बराबर कोई सफलता नहीं हो सकती।
आयत 13
يَوْمَ يَقُولُ ٱلْمُنَـٰفِقُونَ وَٱلْمُنَـٰفِقَـٰتُ لِلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ ٱنظُرُونَا نَقْتَبِسْ مِن نُّورِكُمْ قِيلَ ٱرْجِعُوا۟ وَرَآءَكُمْ فَٱلْتَمِسُوا۟ نُورًۭا فَضُرِبَ بَيْنَهُم بِسُورٍۢ لَّهُۥ بَابٌۢ بَاطِنُهُۥ فِيهِ ٱلرَّحْمَةُ وَظَـٰهِرُهُۥ مِن قِبَلِهِ ٱلْعَذَابُ
يَوْمَ
जिस दिन
يَقُولُ
कहेंगे
ٱلْمُنَـٰفِقُونَ
मुनाफ़िक़ मर्द
وَٱلْمُنَـٰفِقَـٰتُ
और मुनाफ़िक़ औरतें
لِلَّذِينَ
उन्हें जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
ٱنظُرُونَا
इन्तिज़ार करो हमारा
نَقْتَبِسْ
हम रौशनी हासिल करें
مِن
of
نُّورِكُمْ
तुम्हारे नूर से
قِيلَ
कह दिया जाएगा
ٱرْجِعُوا۟
लौट जाओ
وَرَآءَكُمْ
अपने पीछे
فَٱلْتَمِسُوا۟
फिर तलाश करो
نُورًۭا
नूर को
فَضُرِبَ
तो हाइल कर दी जाएगी
بَيْنَهُم
दर्मियान उनके
بِسُورٍۢ
एक दीवार
لَّهُۥ
उसका
بَابٌۢ
एक दरवाज़ा होगा
بَاطِنُهُۥ
उसकी अन्दरूनी जानिब
فِيهِ
जिसमें
ٱلرَّحْمَةُ
रहमत होगी
وَظَـٰهِرُهُۥ
और उसकी बैरूनी जानिब
مِن
facing towards [it]
قِبَلِهِ
उस तरफ़ से
ٱلْعَذَابُ
अज़ाब होगा
जिस दिन कपटाचारी पुरुष और कपटाचारी स्त्रियाँ मोमिनों से कहेंगी, "तनिक हमारी प्रतिक्षा करो। हम भी तुम्हारे प्रकाश मे से कुछ प्रकाश ले लें!" कहा जाएगा, "अपने पीछे लौट जाओ। फिर प्रकाश तलाश करो!" इतने में उनके बीच एक दीवार खड़ी कर दी जाएगी, जिसमें एक द्वार होगा। उसके भीतर का हाल यह होगा कि उसमें दयालुता होगी और उसके बाहर का यह कि उस ओर से यातना होगी
तफ़्सीर:
जिस दिन मुनाफ़िक़ पुरुष और मुनाफ़िक़ स्त्रियाँ, ईमान वालों से कहेंगे : हमारी प्रतीक्षा करो, ताकि हम तुम्हारे प्रकाश में से कुछ प्रकाश हासिल कर लें, जो 'सिरात' (पुल) पार करने में हमारे लिए सहायक हो। उस समय मुनाफ़िक़ों से उनका मज़ाक उड़ाते हुए कहा जाएगा : अपने पीछे लौट जाओ, फिर कोई प्रकाश तलाश करो, जिससे तुम रोशनी हासिल कर सको। फिर उनके बीच एक दीवार बना दी जाएगी, जिसमें एक द्वार होगा। उसका भीतरी भाग, जो ईमान वालों की ओर होगा, उसमें दया होगी और बाहरी भाग, जो मुनाफ़िक़ों की ओर होगा, उसमें यातना होगी।
आयत 14
يُنَادُونَهُمْ أَلَمْ نَكُن مَّعَكُمْ ۖ قَالُوا۟ بَلَىٰ وَلَـٰكِنَّكُمْ فَتَنتُمْ أَنفُسَكُمْ وَتَرَبَّصْتُمْ وَٱرْتَبْتُمْ وَغَرَّتْكُمُ ٱلْأَمَانِىُّ حَتَّىٰ جَآءَ أَمْرُ ٱللَّهِ وَغَرَّكُم بِٱللَّهِ ٱلْغَرُورُ
يُنَادُونَهُمْ
वो पुकारेंगे उन्हें
أَلَمْ
क्या ना
نَكُن
थे हम
مَّعَكُمْ ۖ
साथ तुम्हारे
قَالُوا۟
वो कहेंगे
بَلَىٰ
क्यों नहीं
وَلَـٰكِنَّكُمْ
और लेकिन तुम
فَتَنتُمْ
फ़ितने में डाला तुमने
أَنفُسَكُمْ
अपने आपको
وَتَرَبَّصْتُمْ
और इन्तिज़ार में रहे तुम
وَٱرْتَبْتُمْ
और शक किया तुमने
وَغَرَّتْكُمُ
और धोखे में डाला तुम्हें
ٱلْأَمَانِىُّ
तमन्नाओं ने
حَتَّىٰ
यहाँ तक कि
جَآءَ
आ गया
أَمْرُ
फ़ैसला
ٱللَّهِ
अल्लाह का
وَغَرَّكُم
और धोखे में डाला तुम्हें
بِٱللَّهِ
अल्लाह के बारे में
ٱلْغَرُورُ
उस बड़े धोखेबाज़ ने
वे उन्हें पुकारकर कहेंगे, "क्या हम तुम्हारे साथी नहीं थे?" वे कहेंगे, "क्यों नहीं? किन्तु तुमने तो अपने आपको फ़ितने (गुमराही) में डाला और प्रतीक्षा करते रहे और सन्देह में पड़े रहे और कामनाओं ने तुम्हें धोखे में डाले रखा है
तफ़्सीर:
मुनाफ़िक़ लोग, ईमान वालों को पुकारकर कहेंगे : "क्या हम तुम्हारे साथ ईमान और आज्ञाकारिता पर नहीं थे? मोमिन उनसे कहेंगे : क्यों नहीं, तुम हमारे साथ थे। लेकिन तुमने अपने आपको निफ़ाक़ के फ़ितने में डालकर अपना नाश कर लिया, और इस प्रतीक्षा में रहे कि ईमान वाले पराजित हो जाएँ, तो तुम अपने कुफ़्र का ऐलान करो, तथा तुमने अल्लाह के ईमान वालों की मदद करने के बारे में और मौत के बाद दोबारा उठाए जाने के बारे संदेह किया, तथा तुम झूठी महत्वाकांक्षाओं के धोखे में पड़े रहे, यहाँ तक कि इसी अवस्था में तुम्हारी मौत आ गई, और इस शैतान ने तुम्हें अल्लाह के बारे में धोखा दिया।
आयत 15
فَٱلْيَوْمَ لَا يُؤْخَذُ مِنكُمْ فِدْيَةٌۭ وَلَا مِنَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ ۚ مَأْوَىٰكُمُ ٱلنَّارُ ۖ هِىَ مَوْلَىٰكُمْ ۖ وَبِئْسَ ٱلْمَصِيرُ
فَٱلْيَوْمَ
तो आज
لَا
not
يُؤْخَذُ
ना लिया जाएगा
مِنكُمْ
तुमसे
فِدْيَةٌۭ
कोई फ़िदया
وَلَا
और ना
مِنَ
from
ٱلَّذِينَ
उनसे जिन्होंने
كَفَرُوا۟ ۚ
कुफ़्र किया
مَأْوَىٰكُمُ
ठिकाना तुम्हारा
ٱلنَّارُ ۖ
आग है
هِىَ
वो ही
مَوْلَىٰكُمْ ۖ
दोस्त है तुम्हारी
وَبِئْسَ
और कितनी बुरी है
ٱلْمَصِيرُ
लौटने की जगह
"अब आज न तुमसे कोई फ़िदया (मुक्ति-प्रतिदान) लिया जाएगा और न उन लोगों से जिन्होंने इनकार किया। तुम्हारा ठिकाना आग है, और वही तुम्हारी संरक्षिका है। और बहुत ही बुरी जगह है अन्त में पहुँचने की!"
तफ़्सीर:
सो आज (ऐ मुनाफ़िक़ो!) तुमसे अल्लाह की यातना से कोई छुड़ौती नहीं ली जाएगी, और न ही उन लोगों से कोई छुड़ौती ली जाएगी, जिन्होंने खुले तौर पर अल्लाह के साथ कुफ़्र किया। तुम्हारा तथा काफ़िरों का ठिकाना जहन्नम है। यह तुम्हारे लिए अधिक उपयुक्त है और तुम इसके अधिक योग्य हो, तथा यह बहुत बुरा ठिकाना है।
आयत 16
۞ أَلَمْ يَأْنِ لِلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ أَن تَخْشَعَ قُلُوبُهُمْ لِذِكْرِ ٱللَّهِ وَمَا نَزَلَ مِنَ ٱلْحَقِّ وَلَا يَكُونُوا۟ كَٱلَّذِينَ أُوتُوا۟ ٱلْكِتَـٰبَ مِن قَبْلُ فَطَالَ عَلَيْهِمُ ٱلْأَمَدُ فَقَسَتْ قُلُوبُهُمْ ۖ وَكَثِيرٌۭ مِّنْهُمْ فَـٰسِقُونَ
۞ أَلَمْ
क्या नहीं
يَأْنِ
वक़्त आया
لِلَّذِينَ
उनके लिए जो
ءَامَنُوٓا۟
ईमान लाए
أَن
कि
تَخْشَعَ
झुक जाऐं
قُلُوبُهُمْ
दिल उनके
لِذِكْرِ
ज़िक्र के लिए
ٱللَّهِ
अल्लाह के
وَمَا
और जो
نَزَلَ
नाज़िल हुआ
مِنَ
of
ٱلْحَقِّ
हक़ में से
وَلَا
और ना
يَكُونُوا۟
वो हो जाऐं
كَٱلَّذِينَ
उन लोगों की तरह जो
أُوتُوا۟
दिए गए
ٱلْكِتَـٰبَ
किताब
مِن
before
قَبْلُ
उससे क़ब्ल
فَطَالَ
तो तवील हो गई
عَلَيْهِمُ
उन पर
ٱلْأَمَدُ
मुद्दत
فَقَسَتْ
तो सख़्त हो गए
قُلُوبُهُمْ ۖ
दिल उनके
وَكَثِيرٌۭ
और अक्सर
مِّنْهُمْ
उनमें से
فَـٰسِقُونَ
नाफ़रमान हैं
क्या उन लोगों के लिए, जो ईमान लाए, अभी वह समय नहीं आया कि उनके दिल अल्लाह की याद के लिए और जो सत्य अवतरित हुआ है उसके आगे झुक जाएँ? और वे उन लोगों की तरह न हो जाएँ, जिन्हें किताब दी गई थी, फिर उनपर दीर्ध समय बीत गया। अन्ततः उनके दिल कठोर हो गए और उनमें से अधिकांश अवज्ञाकारी रहे
तफ़्सीर:
क्या अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाने वालों के लिए वह समय नहीं आया है कि उनके दिल अल्लाह के ज़िक्र के लिए और उसके लिए जो क़ुरआन में वादा या धमकी उतरी है, नरम नरम हो जाएँ और संतुष्ट हो जाएँ। तथा दिलों की कठोरता में उन यहूदियों की तरह न हो जाएँ, जिन्हें तौरात दिया गया और न उन ईसाइयों की तरह, जो इंजील दिए गए। फिर उनके और उनके नबियों के आने के बीच का समय लंबा हो गया, तो इसके कारण उनके दिल कठोर हो गए और उनमें से बहुत-से लोग अल्लाह की आज्ञाकारिता से निकलकर उसकी अवज्ञा करने वाले हैं?!
आयत 17
ٱعْلَمُوٓا۟ أَنَّ ٱللَّهَ يُحْىِ ٱلْأَرْضَ بَعْدَ مَوْتِهَا ۚ قَدْ بَيَّنَّا لَكُمُ ٱلْـَٔايَـٰتِ لَعَلَّكُمْ تَعْقِلُونَ
ٱعْلَمُوٓا۟
जान लो
أَنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
يُحْىِ
वो ज़िन्दा करता है
ٱلْأَرْضَ
ज़मीन को
بَعْدَ
बाद
مَوْتِهَا ۚ
उसकी मौत के
قَدْ
तहक़ीक़
بَيَّنَّا
बयान कर दीं हमने
لَكُمُ
तुम्हारे लिए
ٱلْـَٔايَـٰتِ
आयात
لَعَلَّكُمْ
ताकि तुम
تَعْقِلُونَ
तुम अक़्ल से काम लो
जान लो, अल्लाह धरती को उसकी मृत्यु के पश्चात जीवन प्रदान करता है। हमने तुम्हारे लिए आयतें खोल-खोलकर बयान कर दी है, ताकि तुम बुद्धि से काम लो
तफ़्सीर:
जान लो कि अल्लाह धरती को उसके सूखने के बाद उसमें पौधे उगाकर पुनर्जीवित करता है।निःसंदेह हमने (ऐ लोगो!) तुम्हारे लिए अल्लाह की शक्ति और एकेश्वरवाद के प्रमाण और तर्क स्पष्ट कर दिए हैं, ताकि तुम उन्हें समझो और जान जाओ कि जिस (अल्लाह) ने धरती को उसकी मृत्यु के बाद पुनर्जीवित किया है, वह तुम्हारी मृत्यु के बाद तुम्हें पुनर्जीवित करने में सक्षम है, तथा तुम्हारे दिलों को उनकी कठोरता के बाद नरम करने में सक्षम है।
आयत 18
إِنَّ ٱلْمُصَّدِّقِينَ وَٱلْمُصَّدِّقَـٰتِ وَأَقْرَضُوا۟ ٱللَّهَ قَرْضًا حَسَنًۭا يُضَـٰعَفُ لَهُمْ وَلَهُمْ أَجْرٌۭ كَرِيمٌۭ
إِنَّ
बेशक
ٱلْمُصَّدِّقِينَ
सदक़ा करने वाले मर्द
وَٱلْمُصَّدِّقَـٰتِ
और सदक़ा करने वाली औरतें
وَأَقْرَضُوا۟
और जिन्होंने क़र्ज़ दिया
ٱللَّهَ
अल्लाह को
قَرْضًا
क़र्ज़
حَسَنًۭا
अच्छा
يُضَـٰعَفُ
दोगुना कर दिया जाएगा
لَهُمْ
उनके लिए
وَلَهُمْ
और उन्हीं के लिए है
أَجْرٌۭ
अजर
كَرِيمٌۭ
इज़्ज़त वाला
निश्चय ही जो सदका देनेवाले पुरुष और सदका देनेवाली स्त्रियाँ है और उन्होंने अल्लाह को अच्छा ऋण दिया, उसे उसके लिए कई गुना कर दिया जाएगा। और उनके लिए सम्मानित प्रतिदान है
तफ़्सीर:
निःसंदेह अपना कुछ धन दान करने वाले पुरुष और अपना कुछ धन दान करने वाली स्त्रियाँ, जो उसे बिना उपकार जताए और कष्ट पहुँचाए, अपने दिल की खुशी के साथ खर्च करते हैं, उनके लिए उनके कर्मों का प्रतिफल दस गुना से सात सौ गुना तक, बल्कि उससे भी अधिक गुना तक बढ़ा दिया जाएगा। और इसके अतिरिक्त उनके लिए अल्लाह के पास एक सम्मानित प्रतिफल अर्थात् जन्नत है।
आयत 19
وَٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ بِٱللَّهِ وَرُسُلِهِۦٓ أُو۟لَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلصِّدِّيقُونَ ۖ وَٱلشُّهَدَآءُ عِندَ رَبِّهِمْ لَهُمْ أَجْرُهُمْ وَنُورُهُمْ ۖ وَٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ وَكَذَّبُوا۟ بِـَٔايَـٰتِنَآ أُو۟لَـٰٓئِكَ أَصْحَـٰبُ ٱلْجَحِيمِ
وَٱلَّذِينَ
और वो जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
بِٱللَّهِ
अल्लाह पर
وَرُسُلِهِۦٓ
और उसके रसूलों पर
أُو۟لَـٰٓئِكَ
यही लोग हैं
هُمُ
वो
ٱلصِّدِّيقُونَ ۖ
जो सच्चे हैं
وَٱلشُّهَدَآءُ
और गवाही देने वाले हैं
عِندَ
(are) with
رَبِّهِمْ
अपने रब के पास
لَهُمْ
उन्हीं के लिए है
أَجْرُهُمْ
अजर उनका
وَنُورُهُمْ ۖ
और नूर उनका
وَٱلَّذِينَ
और वो जिन्होंने
كَفَرُوا۟
कुफ़्र किया
وَكَذَّبُوا۟
और उन्होंने झुठलाया
بِـَٔايَـٰتِنَآ
हमारी आयात को
أُو۟لَـٰٓئِكَ
यही लोग हैं
أَصْحَـٰبُ
साथी
ٱلْجَحِيمِ
जहन्नम के
जो लोग अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाए, वही अपने रब के यहाण सिद्दीक और शहीद है। उनके लिए उनका प्रतिदान और उनका प्रकाश है। किन्तु जिन लोगों ने इनकार किया और हमारी आयतों को झुठलाया, वही भड़कती आगवाले हैं
तफ़्सीर:
जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और बिना किसी भेदभाव के उसके (सभी) रसूलों पर ईमान लाए, वही अपने रब के निकट 'सिद्दीक़' और 'शहीद' हैं। उनके लिए उनका सम्मानित प्रतिफल है जो उन्हीं के लिए तैयार किया गया है, तथा उनके लिए उनका वह प्रकाश है, जो क़ियामत के दिन उनके आगे और उनके दाहिनी ओर चल रहा होगा। और जिन लोगों ने अल्लाह और उसके रसूलों का इनकार किया और हमारे रसूल पर उतारी गई हमारी आयतों को झुठलाया, वही लोग जहन्नम वाले हैं, जो क़ियामत के दिन उसमें दाख़िल होंगे और हमेशा उसी में रहेंगे, उससे कभी बाहर नहीं निकलेंगे।
आयत 20
ٱعْلَمُوٓا۟ أَنَّمَا ٱلْحَيَوٰةُ ٱلدُّنْيَا لَعِبٌۭ وَلَهْوٌۭ وَزِينَةٌۭ وَتَفَاخُرٌۢ بَيْنَكُمْ وَتَكَاثُرٌۭ فِى ٱلْأَمْوَٰلِ وَٱلْأَوْلَـٰدِ ۖ كَمَثَلِ غَيْثٍ أَعْجَبَ ٱلْكُفَّارَ نَبَاتُهُۥ ثُمَّ يَهِيجُ فَتَرَىٰهُ مُصْفَرًّۭا ثُمَّ يَكُونُ حُطَـٰمًۭا ۖ وَفِى ٱلْـَٔاخِرَةِ عَذَابٌۭ شَدِيدٌۭ وَمَغْفِرَةٌۭ مِّنَ ٱللَّهِ وَرِضْوَٰنٌۭ ۚ وَمَا ٱلْحَيَوٰةُ ٱلدُّنْيَآ إِلَّا مَتَـٰعُ ٱلْغُرُورِ
ٱعْلَمُوٓا۟
जान लो
أَنَّمَا
बेशक
ٱلْحَيَوٰةُ
ज़िन्दगी
ٱلدُّنْيَا
दुनिया की
لَعِبٌۭ
खेल
وَلَهْوٌۭ
और तमाशा
وَزِينَةٌۭ
और ज़ीनत
وَتَفَاخُرٌۢ
और बाहम फ़ख़्र करना है
بَيْنَكُمْ
आपस में
وَتَكَاثُرٌۭ
और एक दूसरे पर कसरत हासिल करना है
فِى
of
ٱلْأَمْوَٰلِ
मालों में
وَٱلْأَوْلَـٰدِ ۖ
और औलाद में
كَمَثَلِ
मानिन्द मिसाल
غَيْثٍ
बारिश के है
أَعْجَبَ
ख़ुश कर दिया
ٱلْكُفَّارَ
किसानों को
نَبَاتُهُۥ
उसकी नबातात ने
ثُمَّ
फिर
يَهِيجُ
वो ख़ुश्क हो जाती है
فَتَرَىٰهُ
फिर आप देखते हैं उसे
مُصْفَرًّۭا
कि ज़र्द हो गई
ثُمَّ
फिर
يَكُونُ
वो हो जाती है
حُطَـٰمًۭا ۖ
चूरा-चूरा
وَفِى
And in
ٱلْـَٔاخِرَةِ
और आख़िरत में
عَذَابٌۭ
अज़ाब है
شَدِيدٌۭ
सख़्त
وَمَغْفِرَةٌۭ
और बख़्शिश
مِّنَ
from
ٱللَّهِ
अल्लाह की तरफ़ से
وَرِضْوَٰنٌۭ ۚ
और रज़ामन्दी
وَمَا
और नहीं
ٱلْحَيَوٰةُ
ज़िन्दगी
ٱلدُّنْيَآ
दुनिया की
إِلَّا
मगर
مَتَـٰعُ
सामान
ٱلْغُرُورِ
धोखे का
जान लो, सांसारिक जीवन तो बस एक खेल और तमाशा है और एक साज-सज्जा, और तुम्हारा आपस में एक-दूसरे पर बड़ाई जताना, और धन और सन्तान में परस्पर एक-दूसरे से बढ़ा हुआ प्रदर्शित करना। वर्षा का मिसाल की तरह जिसकी वनस्पति ने किसान का दिल मोह लिया। फिर वह पक जाती है; फिर तुम उसे देखते हो कि वह पीली हो गई। फिर वह चूर्ण-विचूर्ण होकर रह जाती है, जबकि आख़िरत में कठोर यातना भी है और अल्लाह की क्षमा और प्रसन्नता भी। सांसारिक जीवन तो केवल धोखे की सुख-सामग्री है
तफ़्सीर:
जान लो कि इस दुनिया का जीवन मात्र एक खेल है जिसके साथ शरीर खेलते हैं, और एक मनोरंजन है जिसके साथ दिल मनोरंजन करते हैं, एक अलंकरण (सजावट) है जिसके साथ तुम खुद को सुशोभित करते हो, उसमें जो धन और सामाग्री तथा सत्ता है उनके द्वारा तुम्हारा आपस में एक-दूसरे पर बड़ाई जताना है, तथा धन की बहुतायत और बच्चों की बहुतायत के बारे में शेखी बघारना है। इसका उदाहरण उस वर्षा की तरह है, जिससे पैदा होने वाली फसल किसान को खूब अच्छी लगती है, फिर कुछ ही समय में यह हरी-भरी फसल सूख जाती है, फिर (ऐ देखने वाले!) तुम उसे हरी होने के बाद पीली देखते हो, फिर अल्लाह उसे चूर्ण-विचूर्ण कर देता है। और आख़िरत में काफ़िरों और मुनाफ़िक़ों के लिए कड़ी यातना है और अल्लाह की ओर से उसके मोमिन बंदों के गुनाहों की माफ़ी और उसकी प्रसन्नता है। और इस संसार का जीवन एक नश्वर सामान के अलावा और कुछ नहीं है जिसमें कोई स्थिरता नहीं है। इसलिए जो कोई इसके नश्वर सामान को आख़िरत की नेमतों पर तरजीह देता है, तो वह घाटा उठाने वाला और धोखा ग्रस्त है।
आज की ज़िंदगी में सबक़
कयामत के दिन मुनाफिकों की मायूसी और दुनिया की हकीकत का ज़िक्र है। यह सबक हमें सिखाता है कि दुनिया एक खेल-तमाशा है, असली मकसद आखिरत की तैयारी होनी चाहिए।
आयत 21
سَابِقُوٓا۟ إِلَىٰ مَغْفِرَةٍۢ مِّن رَّبِّكُمْ وَجَنَّةٍ عَرْضُهَا كَعَرْضِ ٱلسَّمَآءِ وَٱلْأَرْضِ أُعِدَّتْ لِلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ بِٱللَّهِ وَرُسُلِهِۦ ۚ ذَٰلِكَ فَضْلُ ٱللَّهِ يُؤْتِيهِ مَن يَشَآءُ ۚ وَٱللَّهُ ذُو ٱلْفَضْلِ ٱلْعَظِيمِ
سَابِقُوٓا۟
दौड़ो
إِلَىٰ
to
مَغْفِرَةٍۢ
तरफ़ बख़्शिश के
مِّن
from
رَّبِّكُمْ
अपने रब की
وَجَنَّةٍ
और जन्नत के
عَرْضُهَا
चौड़ाई जिसकी
كَعَرْضِ
जैसे चौड़ाई
ٱلسَّمَآءِ
आसमान
وَٱلْأَرْضِ
और ज़मीन की
أُعِدَّتْ
वो तैयार की गई
لِلَّذِينَ
उनके लिए जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
بِٱللَّهِ
अल्लाह पर
وَرُسُلِهِۦ ۚ
और उसके रसूलों पर
ذَٰلِكَ
ये
فَضْلُ
फ़ज़ल है
ٱللَّهِ
अल्लाह का
يُؤْتِيهِ
वो अता करता है उसे
مَن
जिसे
يَشَآءُ ۚ
वो चाहता है
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
ذُو
(is) the Possessor of Bounty
ٱلْفَضْلِ
फ़ज़ल वाल है
ٱلْعَظِيمِ
बहुत बड़े
अपने रब की क्षमा और उस जन्नत की ओर अग्रसर होने में एक-दूसरे से बाज़ी ले जाओ, जिसका विस्तार आकाश और धरती के विस्तार जैसा है, जो उन लोगों के लिए तैयार की गई है जो अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाए हों। यह अल्लाह का उदार अनुग्रह है, जिसे चाहता है प्रदान करता है। अल्लाह बड़े उदार अनुग्रह का मालिक है
तफ़्सीर:
(ऐ लोगो!) उन नेक कार्यों की ओर एक-दूसरे से आगे बढ़ो, जिनसे तुम अपने पापों की क्षमा प्राप्त कर सको; जैसे तौबा और नेकी के अन्य कार्य, और ताकि उनके द्वारा ऐसी जन्नत प्राप्त कर सको, जिसकी चौड़ाई आसमान और ज़मीन की चौड़ाई के समान है। इस जन्नत को अल्लाह ने उन लोगों के लिए तैयार किया है, जो उसपर और उसके रसूलों पर ईमान लाए। यह प्रतिफल अल्लाह का अनुग्रह है, वह उसे अपने बंदों में से जिसे चाहता है, प्रदान करता है। और अल्लाह अपने ईमान वाले बंदों पर महान अनुग्रह वाला है।
आयत 22
مَآ أَصَابَ مِن مُّصِيبَةٍۢ فِى ٱلْأَرْضِ وَلَا فِىٓ أَنفُسِكُمْ إِلَّا فِى كِتَـٰبٍۢ مِّن قَبْلِ أَن نَّبْرَأَهَآ ۚ إِنَّ ذَٰلِكَ عَلَى ٱللَّهِ يَسِيرٌۭ
مَآ
नहीं
أَصَابَ
पहुँचती
مِن
any
مُّصِيبَةٍۢ
कोई मुसीबत
فِى
in
ٱلْأَرْضِ
ज़मीन में
وَلَا
और ना
فِىٓ
in
أَنفُسِكُمْ
तुम्हारे नफ़्सों में
إِلَّا
मगर
فِى
in
كِتَـٰبٍۢ
एक किताब में है
مِّن
before
قَبْلِ
इससे पहले
أَن
कि
نَّبْرَأَهَآ ۚ
हम पैदा करें उसे
إِنَّ
बेशक
ذَٰلِكَ
ये
عَلَى
for
ٱللَّهِ
अल्लाह पर
يَسِيرٌۭ
बहुत आसान है
जो मुसीबतें भी धरती में आती है और तुम्हारे अपने ऊपर, वह अनिवार्यतः एक किताब में अंकित है, इससे पहले कि हम उसे अस्तित्व में लाएँ - निश्चय ही यह अल्लाह के लिए आसान है -
तफ़्सीर:
लोगों पर जो भी मुसीबत धरती में आती हैं, जैसे सूखा और अन्य चीजें, तथा उनपर जो भी विपत्ति खुद अपने ऊपर आती है, वह हमारे सृष्टि की रचना करने से पहले ही से 'लौह़े महफ़ूज़' (सुरक्षित पट्टिका) में लिखी हुई है। निश्चय यह अल्लाह के लिए बहुत आसान है।
आयत 23
لِّكَيْلَا تَأْسَوْا۟ عَلَىٰ مَا فَاتَكُمْ وَلَا تَفْرَحُوا۟ بِمَآ ءَاتَىٰكُمْ ۗ وَٱللَّهُ لَا يُحِبُّ كُلَّ مُخْتَالٍۢ فَخُورٍ
لِّكَيْلَا
ताकि ना
تَأْسَوْا۟
तुम अफ़सोस करो
عَلَىٰ
over
مَا
उस पर जो
فَاتَكُمْ
खो जाए तुमसे
وَلَا
और ना
تَفْرَحُوا۟
तुम इतराओ
بِمَآ
उस पर जो
ءَاتَىٰكُمْ ۗ
उसने दिया तुम्हें
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
لَا
नहीं
يُحِبُّ
वो पसंद करता
كُلَّ
हर
مُخْتَالٍۢ
ख़ुदपसंद
فَخُورٍ
फ़ख़्र करने वाले को
(यह बात तुम्हें इसलिए बता दी गई) ताकि तुम उस चीज़ का अफ़सोस न करो जो तुम पर जाती रहे और न उसपर फूल जाओ जो उसने तुम्हें प्रदान की हो। अल्लाह किसी इतरानेवाले, बड़ाई जतानेवाले को पसन्द नहीं करता
तफ़्सीर:
और यह इसलिए ताकि (ऐ लोगो!) तुम उस चीज़ पर शोक न करो, जो तुमसे छूट जाए, तथा उन नेमतों पर फूल न जाओ, जो अल्लाह ने तुम्हें प्रदान की हैं। निश्चय अल्लाह किसी अहंकार करने वाले, अल्लाह की दी हुई नेमतों पर लोगों के सामने गर्व करने वाले से प्रेम नहीं करता।
आयत 24
ٱلَّذِينَ يَبْخَلُونَ وَيَأْمُرُونَ ٱلنَّاسَ بِٱلْبُخْلِ ۗ وَمَن يَتَوَلَّ فَإِنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلْغَنِىُّ ٱلْحَمِيدُ
ٱلَّذِينَ
वो लोग जो
يَبْخَلُونَ
बुख़्ल करते हैं
وَيَأْمُرُونَ
और वो हुक्म देते हैं
ٱلنَّاسَ
लोगों को
بِٱلْبُخْلِ ۗ
बुख़्ल का
وَمَن
और जो कोई
يَتَوَلَّ
मुँह फेरता है
فَإِنَّ
तो बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
هُوَ
वो ही है
ٱلْغَنِىُّ
बहुत बेनियाज़
ٱلْحَمِيدُ
ख़ूब तारीफ़ वाला
जो स्वयं कंजूसी करते है और लोगों को भी कंजूसी करने पर उकसाते है, और जो कोई मुँह मोड़े तो अल्लाह तो निस्पृह प्रशंसनीय है
तफ़्सीर:
जो लोग उस चीज़ को खर्च करने में कंजूसी करते हैं, जिसका खर्च करना उनपर अनिवार्य है, और दूसरे लोगों को (भी) कंजूसी करने के लिए कहते हैं, वे लोग घाटा उठाने वाले हैं। और जो अल्लाह की आज्ञाकारिता से मुँह फेरता है, वह अल्लाह को नुक़सान नहीं पहुँचाएगा, बल्कि खुद को नुक़सान पहुँचाएगा। निश्चय अल्लाह ही बड़ा बेपरवाह है, इसलिए उसे अपने बंदों की आज्ञाकारिता की ज़रूरत नहीं है, वह हर हाल में बहुत प्रशंसनीय है।
आयत 25
لَقَدْ أَرْسَلْنَا رُسُلَنَا بِٱلْبَيِّنَـٰتِ وَأَنزَلْنَا مَعَهُمُ ٱلْكِتَـٰبَ وَٱلْمِيزَانَ لِيَقُومَ ٱلنَّاسُ بِٱلْقِسْطِ ۖ وَأَنزَلْنَا ٱلْحَدِيدَ فِيهِ بَأْسٌۭ شَدِيدٌۭ وَمَنَـٰفِعُ لِلنَّاسِ وَلِيَعْلَمَ ٱللَّهُ مَن يَنصُرُهُۥ وَرُسُلَهُۥ بِٱلْغَيْبِ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ قَوِىٌّ عَزِيزٌۭ
لَقَدْ
अलबत्ता तहक़ीक़
أَرْسَلْنَا
भेजा हमने
رُسُلَنَا
अपने रसूलों को
بِٱلْبَيِّنَـٰتِ
साथ वाज़ेह निशानियों के
وَأَنزَلْنَا
और नाज़िल की हमने
مَعَهُمُ
साथ उनके
ٱلْكِتَـٰبَ
किताब
وَٱلْمِيزَانَ
और मीज़ान
لِيَقُومَ
ताकि क़ायम हों
ٱلنَّاسُ
लोग
بِٱلْقِسْطِ ۖ
इन्साफ़ पर
وَأَنزَلْنَا
और उतारा हमने
ٱلْحَدِيدَ
लोहा
فِيهِ
जिसमें
بَأْسٌۭ
ज़ोर है
شَدِيدٌۭ
सख़्त
وَمَنَـٰفِعُ
और कई फ़ायदे हैं
لِلنَّاسِ
लोगों के लिए
وَلِيَعْلَمَ
और ताकि जान ले
ٱللَّهُ
अल्लाह
مَن
कौन
يَنصُرُهُۥ
मदद करता है उसकी
وَرُسُلَهُۥ
और उसके रसूलों की
بِٱلْغَيْبِ ۚ
ग़ायबाना
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
قَوِىٌّ
बहुत क़ुव्वत वाला है
عَزِيزٌۭ
बहुत ज़बरदस्त है
निश्चय ही हमने अपने रसूलों को स्पष्ट प्रमाणों के साथ भेजा और उनके लिए किताब और तुला उतारी, ताकि लोग इनसाफ़ पर क़ायम हों। और लोहा भी उतारा, जिसमें बड़ी दहशत है और लोगों के लिए कितने ही लाभ है., और (किताब एवं तुला इसलिए भी उतारी) ताकि अल्लाह जान ले कि कौन परोक्ष में रहते हुए उसकी और उसके रसूलों की सहायता करता है। निश्चय ही अल्लाह शक्तिशाली, प्रभुत्वशाली है
तफ़्सीर:
निश्चय हमने अपने रसूलों को स्पष्ट प्रमाणों और खुले तर्कों के साथ भेजा और उनके साथ किताबें उतारीं, तथा उनके साथ तराज़ू उतारा; ताकि लोग न्याय पर क़ायम रहें। और हमने लोहा उतारा, जिसमें बड़ी शक्ति है, चुनाँचे उसी से हथियार बनाए जाते हैं। तथा उसमें लोगों के लिए उनके उद्योगों और व्यवसायों में अनेक लाभ हैं। और ताकि अल्लाह इस तरह जान ले कि बंदों के सामने स्पष्ट हो जाए कि उसके बंदों में से कौन उसकी और उसके रसूलों की बिना देखे मदद करता है। निश्चय अल्लाह शक्तिशाली, प्रभुत्वशाली है, उसे कोई चीज़ पराजित नहीं कर सकती, और वह कोई भी चीज़ करने में असमर्थ नहीं है।
आयत 26
وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا نُوحًۭا وَإِبْرَٰهِيمَ وَجَعَلْنَا فِى ذُرِّيَّتِهِمَا ٱلنُّبُوَّةَ وَٱلْكِتَـٰبَ ۖ فَمِنْهُم مُّهْتَدٍۢ ۖ وَكَثِيرٌۭ مِّنْهُمْ فَـٰسِقُونَ
وَلَقَدْ
और अलबत्ता तहक़ीक़
أَرْسَلْنَا
भेजा हमने
نُوحًۭا
नूह
وَإِبْرَٰهِيمَ
और इब्राहीम को
وَجَعَلْنَا
और रखी हमने
فِى
in
ذُرِّيَّتِهِمَا
उन दोनों की औलाद में
ٱلنُّبُوَّةَ
नुबूव्वत
وَٱلْكِتَـٰبَ ۖ
और किताब
فَمِنْهُم
तो कुछ उनमें से
مُّهْتَدٍۢ ۖ
हिदायत याफ़्ता हैं
وَكَثِيرٌۭ
और अक्सर
مِّنْهُمْ
उनमें से
فَـٰسِقُونَ
फ़ासिक़ हैं
हमने नूह और इबराहीम को भेजा और उन दोनों की सन्तान में पैग़म्बरी और क़िताब रख दी। फिर उनमें से किसी ने तो संमार्ग अपनाया; किन्तु उनमें से अधिकतर अवज्ञाकारी थे
तफ़्सीर:
और निश्चय ही हमने नूह अलैहिस्सलाम और इबराहीम अलैहिस्सलाम को रसूल बनाकर भेजा और उन दोनों की संतान में पैग़ंबरी और उतरने वाली किताबें रखीं। फिर उन दोनों की संतान में से कुछ सीधे मार्ग पर चलने वाले हैं और उनमें से बहुत-से लोग अल्लाह की आज्ञाकारिता से निकल जाने वाले हैं।
आयत 27
ثُمَّ قَفَّيْنَا عَلَىٰٓ ءَاثَـٰرِهِم بِرُسُلِنَا وَقَفَّيْنَا بِعِيسَى ٱبْنِ مَرْيَمَ وَءَاتَيْنَـٰهُ ٱلْإِنجِيلَ وَجَعَلْنَا فِى قُلُوبِ ٱلَّذِينَ ٱتَّبَعُوهُ رَأْفَةًۭ وَرَحْمَةًۭ وَرَهْبَانِيَّةً ٱبْتَدَعُوهَا مَا كَتَبْنَـٰهَا عَلَيْهِمْ إِلَّا ٱبْتِغَآءَ رِضْوَٰنِ ٱللَّهِ فَمَا رَعَوْهَا حَقَّ رِعَايَتِهَا ۖ فَـَٔاتَيْنَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ مِنْهُمْ أَجْرَهُمْ ۖ وَكَثِيرٌۭ مِّنْهُمْ فَـٰسِقُونَ
ثُمَّ
फिर
قَفَّيْنَا
पै दर पै भेजे हमने
عَلَىٰٓ
on
ءَاثَـٰرِهِم
उनके आसार पर
بِرُسُلِنَا
अपने रसूल
وَقَفَّيْنَا
और पीछे भेजा हमने
بِعِيسَى
with Isa
ٱبْنِ
son
مَرْيَمَ
ईसा इब्ने मरियम को
وَءَاتَيْنَـٰهُ
और अता किया हमने उसे
ٱلْإِنجِيلَ
इन्जील
وَجَعَلْنَا
और डाल दी हमने
فِى
in
قُلُوبِ
दिलों में
ٱلَّذِينَ
उन लोगों के जिन्होंने
ٱتَّبَعُوهُ
पैरवी की उसकी
رَأْفَةًۭ
शफ़्क़त
وَرَحْمَةًۭ
और रहमत को
وَرَهْبَانِيَّةً
और रहबानियत/तर्क दुनिया
ٱبْتَدَعُوهَا
उन्होंने ईजाद कर लिया उसे
مَا
not
كَتَبْنَـٰهَا
नहीं फ़र्ज़ किया था हमने उसे
عَلَيْهِمْ
उन पर
إِلَّا
मगर
ٱبْتِغَآءَ
हासिल करने को
رِضْوَٰنِ
रज़ा
ٱللَّهِ
अल्लाह की
فَمَا
तो नहीं
رَعَوْهَا
उन्होंने ख़्याल रखा उसका
حَقَّ
जैसे हक़ था
رِعَايَتِهَا ۖ
उसका ख़्याल रखने का
فَـَٔاتَيْنَا
तो दिया हमने
ٱلَّذِينَ
उन लोगों को जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
مِنْهُمْ
उनमें से
أَجْرَهُمْ ۖ
अजर उनका
وَكَثِيرٌۭ
और अक्सर
مِّنْهُمْ
उनमें से
فَـٰسِقُونَ
फ़ासिक़ हैं
फिर उनके पीछ उन्हीं के पद-चिन्हों पर हमने अपने दूसरे रसूलों को भेजा और हमने उनके पीछे मरयम के बेटे ईसा को भेजा और उसे इंजील प्रदान की। और जिन लोगों ने उसका अनुसरण किया, उनके दिलों में हमने करुणा और दया रख दी। रहा संन्यास, तो उसे उन्होंने स्वयं घड़ा था। हमने उसे उनके लिए अनिवार्य नहीं किया था, यदि अनिवार्य किया था तो केवल अल्लाह की प्रसन्नता की चाहत। फिर वे उसका निर्वाह न कर सकें, जैसा कि उनका निर्वाह करना चाहिए था। अतः उन लोगों को, जो उनमें से वास्तव में ईमान लाए थे, उनका बदला हमने (उन्हें) प्रदान किया। किन्तु उनमें से अधिकतर अवज्ञाकारी ही है
तफ़्सीर:
फिर हमने उनके बाद अपने रसूल भेजे। हमने उन्हें एक के बाद एक उनके समुदायों की ओर भेजे। और उनके बाद मरयम के पुत्र ईसा को भेजा और उन्हें इंजील प्रदान की। तथा उनपर ईमान लाने वाले और उनका अनुसरण करने वाले लोगों के दिलों में करुणा एवं दयालुता रख दी। अतः वे आपस में एक-दूसरे के प्रति स्नेह और सहानुभूति रखने वाले थे। उन्होंने अपने धर्म में अतिशयोक्ति का आविष्कार किया। इसलिए उन्होंने अल्लाह की हलाल की हुई कुछ चीज़ों, जैसे विवाह और सुख-आनंद की चीज़ों को छोड़ दिया। हालाँकि हमने उन्हें ऐसा करने के लिए नहीं कहा। बल्कि उन्होंने धर्म में नवाचार पैदा करते हुए, खुद को उसके लिए प्रतिबद्ध कर लिया। हमने तो केवल अल्लाह की प्रसन्नता का पालन करने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। तो हमने उनमें से ईमान लाने वालों को उनका बदला दे दिया। और उनमें से बहुत-से लोग अल्लाह के रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के लाए हुए धर्म को झुठलाकर अल्लाह की आज्ञाकारिता से बाहर हैं।
आयत 28
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ ٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ وَءَامِنُوا۟ بِرَسُولِهِۦ يُؤْتِكُمْ كِفْلَيْنِ مِن رَّحْمَتِهِۦ وَيَجْعَل لَّكُمْ نُورًۭا تَمْشُونَ بِهِۦ وَيَغْفِرْ لَكُمْ ۚ وَٱللَّهُ غَفُورٌۭ رَّحِيمٌۭ
يَـٰٓأَيُّهَا
O you who believe
ٱلَّذِينَ
ऐ लोगों जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए हो
ٱتَّقُوا۟
डरो
ٱللَّهَ
अल्लाह से
وَءَامِنُوا۟
और ईमान लाओ
بِرَسُولِهِۦ
उसके रसूल पर
يُؤْتِكُمْ
वो देगा तुम्हें
كِفْلَيْنِ
दो हिस्से
مِن
of
رَّحْمَتِهِۦ
अपनी रहमत में से
وَيَجْعَل
और वो बना देगा
لَّكُمْ
तुम्हारे लिए
نُورًۭا
एक नूर
تَمْشُونَ
तुम चलोगे
بِهِۦ
साथ उसके
وَيَغْفِرْ
और वो बख़्श देगा
لَكُمْ ۚ
तुम्हें
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
غَفُورٌۭ
बहुत बख़्शने वाला है
رَّحِيمٌۭ
निहायत रहम करने वाला है
ऐ लोगों, जो ईमान लाए हो! अल्लाह का डर रखो और उसके रसूल पर ईमान लाओ। वह तुम्हें अपनी दयालुता का दोहरा हिस्सा प्रदान करेगा और तुम्हारे लिए एक प्रकाश कर देगा, जिसमें तुम चलोगे और तुम्हें क्षमा कर देगा। अल्लाह बड़ा क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है
तफ़्सीर:
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने वालो और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर, उससे डरते रहो और उसके रसूल पर ईमान लाओ, अल्लाह तुम्हें मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर ईमान लाने तथा पिछले रसूलों पर ईमान लाने के लिए अज्र-व-सवाब का दोहरा हिस्सा देगा, और तुम्हें एक प्रकाश प्रदान करेगा, जिससे तुम अपने सांसारिक जीवन में मार्गदर्शित होगे और क़ियामत के दिन उसकी रोशनी में सिरात (पुल) पार करोगे। और वह तुम्हारे पापों को क्षमा कर देगा, चुनाँचे वह उन्हें ढँक देगा और उनपर तुम्हारी पकड़ नहीं करेगा। और अल्लाह अपने बंदों को बहुत क्षमा करने वाला, उनपर अत्यंत दया करने वाला है।
आयत 29
لِّئَلَّا يَعْلَمَ أَهْلُ ٱلْكِتَـٰبِ أَلَّا يَقْدِرُونَ عَلَىٰ شَىْءٍۢ مِّن فَضْلِ ٱللَّهِ ۙ وَأَنَّ ٱلْفَضْلَ بِيَدِ ٱللَّهِ يُؤْتِيهِ مَن يَشَآءُ ۚ وَٱللَّهُ ذُو ٱلْفَضْلِ ٱلْعَظِيمِ
لِّئَلَّا
ताकि
يَعْلَمَ
जान लें
أَهْلُ
(the) People
ٱلْكِتَـٰبِ
एहले किताब
أَلَّا
ये कि नहीं
يَقْدِرُونَ
वो क़ुदरत रखते
عَلَىٰ
over
شَىْءٍۢ
किसी चीज़ पर
مِّن
from
فَضْلِ
फ़ज़ल में से
ٱللَّهِ ۙ
अल्लाह के
وَأَنَّ
और बेशक
ٱلْفَضْلَ
फ़ज़ल
بِيَدِ
(is) in Allah's Hand
ٱللَّهِ
अल्लाह के हाथ में है
يُؤْتِيهِ
वो देता है उसे
مَن
जिसे
يَشَآءُ ۚ
वो चाहता है
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
ذُو
(is) the Possessor of Bounty
ٱلْفَضْلِ
फ़ज़ल वाला है
ٱلْعَظِيمِ
बहुत बड़े
ताकि किताबवाले यह न समझें कि अल्लाह के अनुग्रह में से वे किसी चीज़ पर अधिकार न प्राप्त कर सकेंगे और यह कि अनुग्रह अल्लाह के हाथ में है, जिसे चाहता है प्रदान करता है। अल्लाह बड़े अनुग्रह का मालिक है
तफ़्सीर:
हमने (ऐ मोमिनो!) तुम्हारे लिए जो दोहरा सवाब तैयार किया है, उस महान अनुग्रह को तुम्हारे लिए इसलिए स्पष्ट कर दिया है; ताकि पूर्व किताब वाले यहूदी और ईसाई जान लें कि वे अल्लाह के अनुग्रह में से किसी भी चीज़ पर अधिकार नहीं रखते कि उसे जिसे चाहें, दे दें और जिसे चाहें, वंचित कर दें। और ताकि वे यह भी जान लें कि अनुग्रह अल्लाह महिमावान के हाथ में है, वह उसे अपने बंदों में से जिसे चाहता है, देता है। और अल्लाह महान अनुग्रह वाला है, जिसे वह अपने बंदों में से उसे प्रदान करता है, जिसे चाहता है।
आज की ज़िंदगी में सबक़
लोहे की नेमत और हद से ज़्यादा तर्क-दुनिया (रहबानियत) की मुमानअत के साथ सूरह का इख्तिताम होता है। यह हमें सिखाता है कि दीन में हद से ज़्यादा सख्ती अपनाना अल्लाह को पसंद नहीं, संतुलित ज़िंदगी बेहतर है।
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