नाम का मतलब
बहस-मुबाहिसा करने वाली औरत (एक सहाबिया के अपने मामले पर नबी ﷺ से गुफ्तगू करने से)
पृष्ठभूमि
सूरह अल-मुजादिला एक सहाबिया के वाकिये पर नाज़िल हुई, जिन्होंने अपने शौहर के जाहिली तलाक (ज़िहार) के मामले पर नबी ﷺ से बात की। इसमें मजलिस के आदाब और मुनाफिकों की सरगोशियों का भी ज़िक्र है।
फ़ज़ीलत / सार
इस सूरह की शुरुआत खुद अल्लाह के यह फरमाने से होती है कि उसने उस औरत की बात सुनी, जो अल्लाह के हर बंदे की फरियाद सुनने का बड़ा सुबूत है।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
आयत 1
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ قَدْ سَمِعَ ٱللَّهُ قَوْلَ ٱلَّتِى تُجَـٰدِلُكَ فِى زَوْجِهَا وَتَشْتَكِىٓ إِلَى ٱللَّهِ وَٱللَّهُ يَسْمَعُ تَحَاوُرَكُمَآ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ سَمِيعٌۢ بَصِيرٌ
قَدْ
तहक़ीक़
سَمِعَ
सुन ली
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
قَوْلَ
बात
ٱلَّتِى
उस औरत की जो
تُجَـٰدِلُكَ
झगड़ रही थी आपसे
فِى
concerning
زَوْجِهَا
अपने शौहर के बारे में
وَتَشْتَكِىٓ
और वो शिकायत कर रही थी
إِلَى
to
ٱللَّهِ
अल्लाह से
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
يَسْمَعُ
वो सुन रहा था
تَحَاوُرَكُمَآ ۚ
गुफ़्तगू तुम दोनों की
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
سَمِيعٌۢ
ख़ूब सुनने वाला है
بَصِيرٌ
ख़ूब देखने वाला है
अल्लाह ने उस स्त्री की बात सुन ली जो अपने पति के विषय में तुमसे झगड़ रही है और अल्लाह से शिकायत किए जाती है। अल्लाह तुम दोनों की बातचीत सुन रहा है। निश्चय ही अल्लाह सब कुछ सुननेवाला, देखनेवाला है
तफ़्सीर:
अल्लाह ने उस महिला (अर्थात् ख़ौला बिंत सा'लबा) की बात सुन ली, जो (ऐ रसूल!) आपसे अपने पति (अर्थात् औस बिन सामित) के बारे में, जब उसने उससे 'ज़िहार' कर लिया था, बहस कर रही थी और उसके पति ने उसके साथ जो कुछ किया था, उसकी अल्लाह से शिकायत कर रही थी। और अल्लाह तुम दोनों की बात-चीत सुन रहा था। उसमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है। निःसंदेह अल्लाह अपने बंदों की बातों को सुनने वाला, उनके कर्मों को देखने वाला है। उससे कोई भी चीज़ छिपी नहीं रहती।
आयत 2
ٱلَّذِينَ يُظَـٰهِرُونَ مِنكُم مِّن نِّسَآئِهِم مَّا هُنَّ أُمَّهَـٰتِهِمْ ۖ إِنْ أُمَّهَـٰتُهُمْ إِلَّا ٱلَّـٰٓـِٔى وَلَدْنَهُمْ ۚ وَإِنَّهُمْ لَيَقُولُونَ مُنكَرًۭا مِّنَ ٱلْقَوْلِ وَزُورًۭا ۚ وَإِنَّ ٱللَّهَ لَعَفُوٌّ غَفُورٌۭ
ٱلَّذِينَ
वो लोग जो
يُظَـٰهِرُونَ
ज़िहार करते हैं
مِنكُم
तुम में से
مِّن
[from]
نِّسَآئِهِم
अपनी बीवियों से
مَّا
नहीं हैं
هُنَّ
वो
أُمَّهَـٰتِهِمْ ۖ
माँऐं उनकी
إِنْ
नहीं
أُمَّهَـٰتُهُمْ
माँऐं उनकी
إِلَّا
मगर
ٱلَّـٰٓـِٔى
वो जिन्होंने
وَلَدْنَهُمْ ۚ
जन्म दिया उन्हें
وَإِنَّهُمْ
और बेशक वो
لَيَقُولُونَ
अलबत्ता वो कहते हैं
مُنكَرًۭا
नामाक़ूल/नापसंदीदा
مِّنَ
[of]
ٱلْقَوْلِ
बात
وَزُورًۭا ۚ
और झूठ
وَإِنَّ
और बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
لَعَفُوٌّ
अलबत्ता बहुत माफ़ करने वाला है
غَفُورٌۭ
बहुत बख़्शने वाला है
तुममें से जो लोग अपनी स्त्रियों से ज़िहार करते हैं, उनकी माएँ वे नहीं है, उनकी माएँ तो वही है जिन्होंने उनको जन्म दिया है। यह अवश्य है कि वे लोग एक अनुचित बात और झूठ कहते है। और निश्चय ही अल्लाह टाल जानेवाला अत्यन्त क्षमाशील है
तफ़्सीर:
जो लोग अपनी पत्नियों से 'ज़िहार' करते हैं; इस प्रकार कि उनमें से कोई अपनी पत्नी से कहता है : ''तुम मुझपर मेरी माँ की पीठ की तरह हो", वे अपनी इस बात में झूठे हैं। क्योंकि उनकी पत्नियाँ उनकी माँएँ नहीं हैं। बल्कि उनकी माँएँ केवल वे स्त्रियाँ हैं, जिन्होंने उन्हें जन्म दिया। वे इस तरह की बात कहकर निश्चित रूप से एक घृणित बात और झूठ कहते हैं। और अल्लाह बहुत माफ़ करने वाला, अत्यंत क्षमाशील है। इसलिए उसने उन्हें पाप से मुक्त करने हेतु उनके लिए 'कफ़्फ़ारा' (प्रायश्चित) का नियम बनाया है।
आयत 3
وَٱلَّذِينَ يُظَـٰهِرُونَ مِن نِّسَآئِهِمْ ثُمَّ يَعُودُونَ لِمَا قَالُوا۟ فَتَحْرِيرُ رَقَبَةٍۢ مِّن قَبْلِ أَن يَتَمَآسَّا ۚ ذَٰلِكُمْ تُوعَظُونَ بِهِۦ ۚ وَٱللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ خَبِيرٌۭ
وَٱلَّذِينَ
और वो लोग जो
يُظَـٰهِرُونَ
ज़िहार करते हैं
مِن
[from]
نِّسَآئِهِمْ
अपनी बीवियों से
ثُمَّ
फिर
يَعُودُونَ
वो रुजूअ कर लेते हैं
لِمَا
उससे जो
قَالُوا۟
उन्होंने कहा
فَتَحْرِيرُ
पस आज़ाद करना है
رَقَبَةٍۢ
एक गर्दन का
مِّن
before
قَبْلِ
इससे क़ब्ल
أَن
कि
يَتَمَآسَّا ۚ
वो दोनों एक दूसरे को छुऐं
ذَٰلِكُمْ
ये है
تُوعَظُونَ
तुम नसीहत किए जाते हो
بِهِۦ ۚ
जिसकी
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
بِمَا
उससे जो
تَعْمَلُونَ
तुम अमल करते हो
خَبِيرٌۭ
ख़ूब बाख़बर है
जो लोग अपनी स्त्रियों से ज़िहार करते हैं; फिर जो बात उन्होंने कही थी उससे रुजू करते है, तो इससे पहले कि दोनों एक-दूसरे को हाथ लगाएँ एक गर्दन आज़ाद करनी होगी। यह वह बात है जिसकी तुम्हें नसीहत की जाती है, और तुम जो कुछ करते हो अल्लाह उसकी ख़बर रखता है
तफ़्सीर:
जो लोग यह घृणित बात कहते हैं, फिर उन स्त्रियों के साथ संभोग करना चाहते हैं, जिनसे उन्होंने ज़िहार किया था, तो उनके लिए अनिवार्य है कि उनके साथ संभोग करने से पहले 'कफ़्फ़ारा' के तौर पर एक दास मुक्त करें। यह उक्त आदेश तुम्हें 'ज़िहार' से बाज़ रखने के लिए दिया जा रहा है। और अल्लाह तुम्हारे कार्यों से पूरी तरह अवगत है। उससे तुम्हारे कार्यों में से कुछ भी छिपा नहीं है।
आयत 4
فَمَن لَّمْ يَجِدْ فَصِيَامُ شَهْرَيْنِ مُتَتَابِعَيْنِ مِن قَبْلِ أَن يَتَمَآسَّا ۖ فَمَن لَّمْ يَسْتَطِعْ فَإِطْعَامُ سِتِّينَ مِسْكِينًۭا ۚ ذَٰلِكَ لِتُؤْمِنُوا۟ بِٱللَّهِ وَرَسُولِهِۦ ۚ وَتِلْكَ حُدُودُ ٱللَّهِ ۗ وَلِلْكَـٰفِرِينَ عَذَابٌ أَلِيمٌ
فَمَن
तो जो कोई
لَّمْ
ना
يَجِدْ
पाए (ग़ुलाम)
فَصِيَامُ
तो रोज़े रखना है
شَهْرَيْنِ
दो माह के
مُتَتَابِعَيْنِ
मुसलसल
مِن
before
قَبْلِ
इससे क़ब्ल
أَن
कि
يَتَمَآسَّا ۖ
वो दोनों एक दूसरे को छुऐं
فَمَن
तो जो कोई
لَّمْ
ना
يَسْتَطِعْ
इस्तिताअत रखता हो
فَإِطْعَامُ
तो खाना खिलाना है
سِتِّينَ
साठ
مِسْكِينًۭا ۚ
मिसकीनों का
ذَٰلِكَ
ये (इस लिए है)
لِتُؤْمِنُوا۟
ताकि तुम ईमान लाओ
بِٱللَّهِ
अल्लाह पर
وَرَسُولِهِۦ ۚ
और उसके रसूल पर
وَتِلْكَ
और ये
حُدُودُ
हुदूद हैं
ٱللَّهِ ۗ
अल्लाह की
وَلِلْكَـٰفِرِينَ
और काफ़िरों के लिए
عَذَابٌ
अज़ाब है
أَلِيمٌ
दर्दनाक
किन्तु जिस किसी को ग़ुलाम प्राप्त न हो तो वह निरन्तर दो माह रोज़े रखे, इससे पहले कि वे दोनों एक-दूसरे को हाथ लगाएँ और जिस किसी को इसकी भी सामर्थ्य न हो तो साठ मुहताजों को भोजन कराना होगा। यह इसलिए कि तुम अल्लाह और उसके रसूल पर ईमानवाले सिद्ध हो सको। ये अल्लाह की निर्धारित की हुई सीमाएँ है। और इनकार करनेवाले के लिए दुखद यातना है
तफ़्सीर:
फिर तुममें से जो व्यक्ति मुक्त करने के लिए दास न पाए, तो उसे अपनी 'ज़िहार' की हुई पत्नी के साथ संभोग करने से पहले लगातार दो महीने तक रोज़े रखने हैं। फिर जो व्यक्ति लगातार दो महीनों तक रोज़ा रखने में असमर्थ है, उसे साठ ग़रीबों को खाना खिलाना है। यह आदेश जिसका हमने फैसला किया है, इसलिए है ताकि तुम यह विश्वास करो कि अल्लाह ने इसका आदेश दिया है, अतः तुम उसके आदेश का पालन करो और उसके रसूल का अनुसरण करो। ये नियम जो हमने तुम्हारे लिए बनाए हैं, अल्लाह की सीमाएँ हैं, जो उसने अपने बंदों के लिए निर्धारित की हैं। अतः उनका उल्लंघन न करो। और अल्लाह के नियमों तथा उसकी निर्धारित की हुई सीमाओं को नकारने वालों के लिए दर्दनाक यातना है।
आयत 5
إِنَّ ٱلَّذِينَ يُحَآدُّونَ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥ كُبِتُوا۟ كَمَا كُبِتَ ٱلَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۚ وَقَدْ أَنزَلْنَآ ءَايَـٰتٍۭ بَيِّنَـٰتٍۢ ۚ وَلِلْكَـٰفِرِينَ عَذَابٌۭ مُّهِينٌۭ
إِنَّ
बेशक
ٱلَّذِينَ
वो लोग जो
يُحَآدُّونَ
मुख़ालिफ़त करते हैं
ٱللَّهَ
अल्लाह की
وَرَسُولَهُۥ
और उसके रसूल की
كُبِتُوا۟
वो ज़लील किए जाऐंगे
كَمَا
जैसा कि
كُبِتَ
ज़लील किए गए थे
ٱلَّذِينَ
वो लोग जो
مِن
before them
قَبْلِهِمْ ۚ
उनसे पहले थे
وَقَدْ
और तहक़ीक़
أَنزَلْنَآ
नाज़िल कीं हमने
ءَايَـٰتٍۭ
आयात
بَيِّنَـٰتٍۢ ۚ
वाज़ेह
وَلِلْكَـٰفِرِينَ
और काफ़िरों के लिए है
عَذَابٌۭ
अज़ाब
مُّهِينٌۭ
रुस्वा करने वाला
जो लोग अल्लाह और उसके रसूल का विरोध करते हैं, वे अपमानित और तिरस्कृत होकर रहेंगे, जैसे उनसे पहले के लोग अपमानित और तिरस्कृत हो चुके है। हमने स्पष्ट आयतें अवतरित कर दी है और इनकार करनेवालों के लिए अपमानजनक यातना है
तफ़्सीर:
निश्चय जो लोग अल्लाह और उसके रसूल का विरोध करते हैं, वे उसी तरह अपमानित और तिरस्कृत किए जाएँगे, जैसा कि पिछले समुदायों में से उसका विरोध करने वालों को अपमानित और तिरस्कृत किया गया। हमने स्पष्ट निशानियाँ उतार दी हैं। और अल्लाह का तथा उसके रसूलों और उसकी निशानियों का इनकार करने वालों के लिए अपमानजनक यातना है।
आयत 6
يَوْمَ يَبْعَثُهُمُ ٱللَّهُ جَمِيعًۭا فَيُنَبِّئُهُم بِمَا عَمِلُوٓا۟ ۚ أَحْصَىٰهُ ٱللَّهُ وَنَسُوهُ ۚ وَٱللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍۢ شَهِيدٌ
يَوْمَ
जिस दिन
يَبْعَثُهُمُ
उठाएगा उन्हें
ٱللَّهُ
अल्लाह
جَمِيعًۭا
सब के सब को
فَيُنَبِّئُهُم
फिर वो बताएगा उन्हें
بِمَا
वो जो
عَمِلُوٓا۟ ۚ
उन्होंने अमल किए
أَحْصَىٰهُ
गिन रखा है उसे
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
وَنَسُوهُ ۚ
जब कि वो भूल चुके हैं उसे
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
عَلَىٰ
ऊपर
كُلِّ
हर
شَىْءٍۢ
चीज़ के
شَهِيدٌ
गवाह है
जिस दिन अल्लाह उन सबको उठा खड़ा करेगा और जो कुछ उन्होंने किया होगा, उससे उन्हें अवगत करा देगा। अल्लाह ने उसकी गणना कर रखी है, और वे उसे भूले हुए है, और अल्लाह हर चीज़ का साक्षी है
तफ़्सीर:
जिस दिन अल्लाह उन सभी लोगों को मरणोपरांत पुनर्जीवित करेगा, उनमें से किसी को नहीं छोड़ेगा। फिर उन्हें उनके दुनिया में किए हुए बुरे कर्मों से सूचित करेगा। अल्लाह ने उनके कर्मों को संरक्षित कर रखा है। इसलिए उनके कामों में से कुछ भी उससे नहीं छूटा है। जबकि वे खुद उसे भूल गए। चुनाँचे वे उसे अपने उन कर्मपत्रों में लिखा हुआ पाएँगे, जो हर छोटे-बड़े कर्म को सुरक्षित रखते हैं। और अल्लाह हर चीज़ से अवगत है, उनके कर्मों में से कुछ भी उससे छिपा नहीं है।
आयत 7
أَلَمْ تَرَ أَنَّ ٱللَّهَ يَعْلَمُ مَا فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَمَا فِى ٱلْأَرْضِ ۖ مَا يَكُونُ مِن نَّجْوَىٰ ثَلَـٰثَةٍ إِلَّا هُوَ رَابِعُهُمْ وَلَا خَمْسَةٍ إِلَّا هُوَ سَادِسُهُمْ وَلَآ أَدْنَىٰ مِن ذَٰلِكَ وَلَآ أَكْثَرَ إِلَّا هُوَ مَعَهُمْ أَيْنَ مَا كَانُوا۟ ۖ ثُمَّ يُنَبِّئُهُم بِمَا عَمِلُوا۟ يَوْمَ ٱلْقِيَـٰمَةِ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ بِكُلِّ شَىْءٍ عَلِيمٌ
أَلَمْ
क्या नहीं
تَرَ
आपने देखा
أَنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
يَعْلَمُ
वो जानता है
مَا
जो कुछ
فِى
(is) in
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों में है
وَمَا
और जो कुछ
فِى
(is) in
ٱلْأَرْضِ ۖ
ज़मीन में है
مَا
नहीं
يَكُونُ
होती
مِن
any
نَّجْوَىٰ
कोई सरगोशी
ثَلَـٰثَةٍ
तीन (लोगों) की
إِلَّا
मगर
هُوَ
वो
رَابِعُهُمْ
चौथा है उनका
وَلَا
और ना
خَمْسَةٍ
पाँच (लोगों) की
إِلَّا
मगर
هُوَ
वो
سَادِسُهُمْ
छठा है उनका
وَلَآ
और ना
أَدْنَىٰ
कम
مِن
than
ذَٰلِكَ
इससे
وَلَآ
और ना
أَكْثَرَ
ज़्यादा
إِلَّا
मगर
هُوَ
वो
مَعَهُمْ
साथ है उनके
أَيْنَ
wherever
مَا
जहाँ-कहीं
كَانُوا۟ ۖ
वो हों
ثُمَّ
फिर
يُنَبِّئُهُم
वो बताएगा उन्हें
بِمَا
जो
عَمِلُوا۟
उन्होंने अमल किए
يَوْمَ
दिन
ٱلْقِيَـٰمَةِ ۚ
क़यामत के
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
بِكُلِّ
हर
شَىْءٍ
चीज़ को
عَلِيمٌ
ख़ूब जानने वाला है
क्या तुमने इसको नहीं देखा कि अल्लाह जानता है जो कुछ आकाशों में है और जो कुछ धरती में है। कभी ऐसा नहीं होता कि तीन आदमियों की गुप्त वार्ता हो और उनके बीच चौथा वह (अल्लाह) न हो। और न पाँच आदमियों की होती है जिसमें छठा वह न होता हो। और न इससे कम की कोई होती है और न इससे अधिक की भी, किन्तु वह उनके साथ होता है, जहाँ कहीं भी वे हो; फिर जो कुछ भी उन्होंने किया होगा क़ियामत के दिन उससे वह उन्हें अवगत करा देगा। निश्चय ही अल्लाह को हर चीज़ का ज्ञान है
तफ़्सीर:
ऐ रसूल! क्या आपने नहीं देखा कि अल्लाह आकाशों तथा धरती की सभी चीज़ों को जानता है। उन दोनों में उपस्थित चीज़ों में से कोई चीज़ उससे छिपी हुई नहीं है। किसी तीन लोगों की गुप्त रूप से कोई बात-चीत नहीं होती, परंतु वह महामहिम (अल्लाह) अपने ज्ञान के साथ उनका चौथा होता है। तथा किसी पाँच लोगों की गुप्त रूप से कोई बात-चीत नहीं होती, परंतु वह महामहिम (अल्लाह) अपने ज्ञान के साथ उनका छठा होता है। तथा इस संख्या से कम या इससे अधिक लोगों की गुप्त रूप से कोई बात-चीत नहीं होती, परंतु वह अपने ज्ञान के साथ उनके साथ होता है, चाहे वे जहाँ कहीं भी रहें। उनकी बातों में से कुछ भी उससे छिपा नहीं है। फिर अल्लाह उन्हें क़ियामत के दिन उनके कर्मों के बारे में बताएगा। निश्चय अल्लाह हर वस्तु को जानने वाला है। उससे कोई वस्तु छिपी नहीं है। निश्चय अल्लाह हर वस्तु को जानने वाला है।
आयत 8
أَلَمْ تَرَ إِلَى ٱلَّذِينَ نُهُوا۟ عَنِ ٱلنَّجْوَىٰ ثُمَّ يَعُودُونَ لِمَا نُهُوا۟ عَنْهُ وَيَتَنَـٰجَوْنَ بِٱلْإِثْمِ وَٱلْعُدْوَٰنِ وَمَعْصِيَتِ ٱلرَّسُولِ وَإِذَا جَآءُوكَ حَيَّوْكَ بِمَا لَمْ يُحَيِّكَ بِهِ ٱللَّهُ وَيَقُولُونَ فِىٓ أَنفُسِهِمْ لَوْلَا يُعَذِّبُنَا ٱللَّهُ بِمَا نَقُولُ ۚ حَسْبُهُمْ جَهَنَّمُ يَصْلَوْنَهَا ۖ فَبِئْسَ ٱلْمَصِيرُ
أَلَمْ
क्या नहीं
تَرَ
आपने देखा
إِلَى
तरफ़
ٱلَّذِينَ
उन लोगों के जो
نُهُوا۟
रोके गए
عَنِ
from
ٱلنَّجْوَىٰ
सरगोशी से
ثُمَّ
फिर
يَعُودُونَ
वो लौटते हैं
لِمَا
तरफ़ उसके जो
نُهُوا۟
वो रोके गए थे
عَنْهُ
जिससे
وَيَتَنَـٰجَوْنَ
और वो बाहम सरगोशियाँ करते हैं
بِٱلْإِثْمِ
गुनाह की
وَٱلْعُدْوَٰنِ
और ज़्यादाती की
وَمَعْصِيَتِ
and disobedience
ٱلرَّسُولِ
और रसूल की नाफ़रमानी की
وَإِذَا
और जब
جَآءُوكَ
वो आते हैं आपके पास
حَيَّوْكَ
वो सलाम करते हैं आपको
بِمَا
साथ उसके जो
لَمْ
नहीं
يُحَيِّكَ
सलाम कहा आपको
بِهِ
साथ उसके
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
وَيَقُولُونَ
और वो कहते हैं
فِىٓ
among
أَنفُسِهِمْ
अपने नफ़्सों में
لَوْلَا
क्यों नहीं
يُعَذِّبُنَا
अज़ाब देता हमें
ٱللَّهُ
अल्लाह
بِمَا
बवजह उसके जो
نَقُولُ ۚ
हम कहते हैं
حَسْبُهُمْ
काफ़ी है उन्हें
جَهَنَّمُ
जहन्नम
يَصْلَوْنَهَا ۖ
वो जलेंगे उसमें
فَبِئْسَ
पस कितनी बुरी है
ٱلْمَصِيرُ
लौटने जगह
क्या तुमने नहीं देखा जिन्हें कानाफूसी से रोका गया था, फिर वे वही करते रहे जिससे उन्हें रोका गया था। वे आपस में गुनाह और ज़्यादती और रसूल की अवज्ञा की कानाफूसी करते है। और जब तुम्हारे पास आते है तो तुम्हारे प्रति अभिवादन के ऐसे शब्द प्रयोग में लाते है जो शब्द अल्लाह ने तुम्हारे लिए अभिवादन के लिए नहीं कहे। और अपने जी में कहते है, "जो कुछ हम कहते है उसपर अल्लाह हमें यातना क्यों नहीं देता?" उनके लिए जहन्नम ही काफ़ी है जिसमें वे प्रविष्ट होंगे। वह तो बहुत बुरी जगह है, अन्त नें पहुँचने की!
तफ़्सीर:
क्या (ऐ रसूल!) आपने उन यहूदियों को नहीं देखा, जो अगर किसी मोमिन को देखते, तो कानाफूसी करने लगते थे। अतः अल्लाह ने उन्हें कानाफूसी से मना कर दिया। लेकिन वे फिर वही काम करते हैं, जिससे अल्लाह ने उन्हें मना किया था और वे आपस में ऐसी कानाफूसियाँ करते हैं, जिनमें गुनाह होता है, जैसे मुसलमानों की ग़ीबत करना, तथा जिनमें मुसलमानों पर अत्याचार होता है, और जिनमें रसूल की अवज्ञा होती है। और जब वे (ऐ रसूल!) आपके पास आते हैं, तो ऐसे शब्दों से आपको सलाम करते हैं, जिनसे अल्लाह ने आपको सलाम नहीं किया है। चुनाँचे वे कहते हैं : "अस्सामु अलैका" इससे उनका मतलब यह होता है कि आपको मौत आए। तथा वे नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को झुठलाने के लिए कहते हैं : हम जो कुछ कहते हैं, उसपर अल्लाह हमें यातना क्यों नहीं देता। क्योंकि अगर वह अपने नबी होने के दावे में सच्चा होता, तो हम जो कुछ उसके बारे में कहते हैं, उसके कारण अल्लाह हमें अवश्य दंडित करता! उन्होंने जो कुछ कहा है उसपर सज़ा के तौर पर उन्हें जहन्नम ही काफी है। वे उसकी गर्मी को झेलेंगे। अतः उनका ठिकाना बहुत बुरा ठिकाना है।
आयत 9
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ إِذَا تَنَـٰجَيْتُمْ فَلَا تَتَنَـٰجَوْا۟ بِٱلْإِثْمِ وَٱلْعُدْوَٰنِ وَمَعْصِيَتِ ٱلرَّسُولِ وَتَنَـٰجَوْا۟ بِٱلْبِرِّ وَٱلتَّقْوَىٰ ۖ وَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ ٱلَّذِىٓ إِلَيْهِ تُحْشَرُونَ
يَـٰٓأَيُّهَا
O you who believe
ٱلَّذِينَ
ऐ लोगों जो
ءَامَنُوٓا۟
ईमान लाए हो
إِذَا
जब
تَنَـٰجَيْتُمْ
तुम बाहम सरगोशी करो
فَلَا
पस ना
تَتَنَـٰجَوْا۟
तुम सरगोशी करो
بِٱلْإِثْمِ
गुनाह की
وَٱلْعُدْوَٰنِ
और ज़्यादती की
وَمَعْصِيَتِ
and disobedience
ٱلرَّسُولِ
और रसूल की नाफ़रमानी की
وَتَنَـٰجَوْا۟
बल्कि सरगोशी करो
بِٱلْبِرِّ
नेकी की
وَٱلتَّقْوَىٰ ۖ
और तक़्वा की
وَٱتَّقُوا۟
और डरो
ٱللَّهَ
अल्लाह से
ٱلَّذِىٓ
वो जो
إِلَيْهِ
तरफ़ उसके
تُحْشَرُونَ
तुम इकट्ठे किए जाओगे
ऐ ईमान लानेवालो! जब तुम आपस में गुप्त॥ वार्ता करो तो गुनाह और ज़्यादती और रसूल की अवज्ञा की गुप्त वार्ता न करो, बल्कि नेकी और परहेज़गारी के विषय में आपस में एकान्त वार्ता करो। और अल्लाह का डर रखो, जिसके पास तुम इकट्ठे होगे
तफ़्सीर:
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने वालो और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! ऐसी कानाफूसी न करो, जिसमें गुनाह, या अत्याचार या रसूल की अवज्ञा हो, ताकि तुम यहूदियों की तरह न हो जाओ। बल्कि ऐसी कानाफूसी करो, जो अल्लाह के आज्ञापालन और उसकी अवज्ञा से रुकने पर आधारित हो। तथा अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर, डरते रहो। क्योंकि अकेला वही है, जिसके पास तुम क़ियामत के दिन हिसाब और बदले के लिए एकत्रित किए जाओगे।
आयत 10
إِنَّمَا ٱلنَّجْوَىٰ مِنَ ٱلشَّيْطَـٰنِ لِيَحْزُنَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَلَيْسَ بِضَآرِّهِمْ شَيْـًٔا إِلَّا بِإِذْنِ ٱللَّهِ ۚ وَعَلَى ٱللَّهِ فَلْيَتَوَكَّلِ ٱلْمُؤْمِنُونَ
إِنَّمَا
बेशक
ٱلنَّجْوَىٰ
सरगोशी
مِنَ
(are) from
ٱلشَّيْطَـٰنِ
शैतान की तरफ़ से है
لِيَحْزُنَ
ताकि वो ग़मगीन करे
ٱلَّذِينَ
उनको जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
وَلَيْسَ
हालाँकि नहीं वो
بِضَآرِّهِمْ
नुक़्सान देने वाले उन्हें
شَيْـًٔا
कुछ भी
إِلَّا
मगर
بِإِذْنِ
by Allah's permission
ٱللَّهِ ۚ
अल्लाह के इज़्न स
وَعَلَى
And upon
ٱللَّهِ
और अल्लाह ही पर
فَلْيَتَوَكَّلِ
पस चाहिए की तवक्कुल करें
ٱلْمُؤْمِنُونَ
मोमिन
वह कानाफूसी तो केवल शैतान की ओर से है, ताकि वह उन्हें ग़म में डाले जो ईमान लाए है। हालाँकि अल्लाह की अवज्ञा के बिना उसे कुछ भी हानि पहुँचाने की सामर्थ्य प्राप्त नहीं। और ईमानवालों को तो अल्लाह ही पर भरोसा रखना चाहिए
तफ़्सीर:
निश्चित रूप से - गुनाह, अत्याचार और रसूल की अवज्ञा पर आधारित - कानाफूसी शैतान की ओर से अपने दोस्तों के लिए उसे शोभित करके प्रस्तुत करने और फुसफुसाने के कारण है। ताकि वह ईमान वालों को इस बात से शोकाकुल कर दे कि उनके विरुद्ध चाल चली जा रही है। हालाँकि शैतान और उसका यह सुशोभीकरण, अल्लाह की मर्ज़ी और इच्छा के बिना ईमान वालों को कुछ भी नुक़सान नहीं पहुँचा सकता। और ईमान वालों को अपने सभी मामलों में अल्लाह ही पर भरोसा करना चाहिए।
आज की ज़िंदगी में सबक़
एक सहाबिया की फरियाद सुने जाने और मजलिस के आदाब का ज़िक्र है। यह हमें सिखाता है कि अल्लाह अपने हर बंदे की फरियाद सुनता है, चाहे वह कितनी भी छोटी या निजी क्यों न हो।
आयत 11
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ إِذَا قِيلَ لَكُمْ تَفَسَّحُوا۟ فِى ٱلْمَجَـٰلِسِ فَٱفْسَحُوا۟ يَفْسَحِ ٱللَّهُ لَكُمْ ۖ وَإِذَا قِيلَ ٱنشُزُوا۟ فَٱنشُزُوا۟ يَرْفَعِ ٱللَّهُ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ مِنكُمْ وَٱلَّذِينَ أُوتُوا۟ ٱلْعِلْمَ دَرَجَـٰتٍۢ ۚ وَٱللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ خَبِيرٌۭ
يَـٰٓأَيُّهَا
O you who believe
ٱلَّذِينَ
ऐ लोगो जो
ءَامَنُوٓا۟
ईमान लाए हो
إِذَا
जब
قِيلَ
कहा जाए
لَكُمْ
तुमसे
تَفَسَّحُوا۟
कुशादगी करो
فِى
in
ٱلْمَجَـٰلِسِ
मजलिसों में
فَٱفْسَحُوا۟
तो कुशादगी किया करो
يَفْسَحِ
कुशादगी कर देगा
ٱللَّهُ
अल्लाह
لَكُمْ ۖ
तुम्हारे लिए
وَإِذَا
और जब
قِيلَ
कहा जाए
ٱنشُزُوا۟
उठ जाओ
فَٱنشُزُوا۟
तो उठ जाया करो
يَرْفَعِ
बुलन्द करता है
ٱللَّهُ
अल्लाह
ٱلَّذِينَ
उन लोगों को जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
مِنكُمْ
तुम में से
وَٱلَّذِينَ
और वो जो
أُوتُوا۟
दिए गए
ٱلْعِلْمَ
इल्म
دَرَجَـٰتٍۢ ۚ
दरजात में
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
بِمَا
उससे जो
تَعْمَلُونَ
तुम अमल करते हो
خَبِيرٌۭ
ख़ूब बाख़बर है
ऐ ईमान लानेवालो! जब तुमसे कहा जाए कि मजलिसों में जगह कुशादा कर दे, तो कुशादगी पैदा कर दो। अल्लाह तुम्हारे लिए कुशादगी पैदा करेगा। और जब कहा जाए कि उठ जाओ, तो उठ जाया करो। तुममें से जो लोग ईमान लाए है और उन्हें ज्ञान प्रदान किया गया है, अल्लाह उनके दरजों को उच्चता प्रदान करेगा। जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसकी पूरी ख़बर रखता है
तफ़्सीर:
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने वालो और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! जब तुमसे कहा जाए कि मजलिसों (बैठकों) में जगह कुशादा कर दो, तो उनमें जगह बना दिया करो। अल्लाह तुम्हारे सांसारिक जीवन तथा आख़िरत में तुम्हारे लिए विस्तार पैदा करेगा। और जब तुमसे कहा जाए : कुछ मजलिसों से उठ जाओ, ताकि वहाँ प्रतिष्ठित लोग बैठ सकें, तो वहाँ से उठ जाया करो। अल्लाह तुममें से उन लोगों के दर्जों (पदों) को बहुत ऊँचा करेगा, जो ईमान लाए और जो ज्ञान दिए गए। और अल्लाह तुम्हारे कार्यों से पूरी तरह अवगत है। उससे तुम्हारे कार्यों में से कुछ भी छिपा नहीं है। और वह तुम्हें उनका बदला देगा।
आयत 12
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ إِذَا نَـٰجَيْتُمُ ٱلرَّسُولَ فَقَدِّمُوا۟ بَيْنَ يَدَىْ نَجْوَىٰكُمْ صَدَقَةًۭ ۚ ذَٰلِكَ خَيْرٌۭ لَّكُمْ وَأَطْهَرُ ۚ فَإِن لَّمْ تَجِدُوا۟ فَإِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٌۭ رَّحِيمٌ
يَـٰٓأَيُّهَا
O you who believe
ٱلَّذِينَ
ऐ लोगों जो
ءَامَنُوٓا۟
ईमान लाए हो
إِذَا
जब
نَـٰجَيْتُمُ
सरगोशी करो तुम
ٱلرَّسُولَ
रसूल से
فَقَدِّمُوا۟
तो पेश करो
بَيْنَ
before
يَدَىْ
पहले
نَجْوَىٰكُمْ
उपने सरगोशी के
صَدَقَةًۭ ۚ
सदक़ा
ذَٰلِكَ
ये
خَيْرٌۭ
बेहतर है
لَّكُمْ
तुम्हारे लिए
وَأَطْهَرُ ۚ
और ज़्यादा पाकीज़ा
فَإِن
फिर अगर
لَّمْ
ना
تَجِدُوا۟
तुम पाओ
فَإِنَّ
तो बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
غَفُورٌۭ
बहुत बख़्शने वाला है
رَّحِيمٌ
निहायत रहम करने वाला है
ऐ ईमान लानेवालो! जब तुम रसूल से अकेले में बात करो तो अपनी गुप्त वार्ता से पहले सदक़ा दो। यह तुम्हारे लिए अच्छा और अधिक पवित्र है। फिर यदि तुम अपने को इसमें असमर्थ पाओ, तो निश्चय ही अल्लाह बड़ा क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है
तफ़्सीर:
जब सहाबा नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से बहुत ज़्यादा कानाफूसी करने लगे, तो अल्लाह ने फरमाया : ऐ ईमान वालो! जब तुम रसूल से गुप्त रूप से बात करना चाहो, तो गुप्त रूप से बात करने से पहले सदक़ा पेश करो। यह सदक़ा पेश करना तुम्हारे लिए उत्तम और अधिक पवित्र है। क्योंकि उसमें अल्लाह का आज्ञापालन है, जो दिलों को शुद्ध (पवित्र) करता है। अगर तुम्हें सदक़ा करने के लिए कुछ न मिले, तो उनसे गुप्त रूप से बात करने में तुमपर कोई गुनाह नहीं है। क्योंकि अल्लाह अपने बंदों के गुनाहों को माफ़ करने वाला और उनपर दया करने वाला है। यही कारण है कि उसने उन्हें केवल उसी चीज़ का बाध्य किया है,जो वे कर सकते हैं।
आयत 13
ءَأَشْفَقْتُمْ أَن تُقَدِّمُوا۟ بَيْنَ يَدَىْ نَجْوَىٰكُمْ صَدَقَـٰتٍۢ ۚ فَإِذْ لَمْ تَفْعَلُوا۟ وَتَابَ ٱللَّهُ عَلَيْكُمْ فَأَقِيمُوا۟ ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتُوا۟ ٱلزَّكَوٰةَ وَأَطِيعُوا۟ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥ ۚ وَٱللَّهُ خَبِيرٌۢ بِمَا تَعْمَلُونَ
ءَأَشْفَقْتُمْ
क्या डर गए तुम
أَن
कि
تُقَدِّمُوا۟
तुम पेश करो
بَيْنَ
before
يَدَىْ
पहले
نَجْوَىٰكُمْ
अपनी सरगोशी से
صَدَقَـٰتٍۢ ۚ
सदाक़त
فَإِذْ
फिर जब
لَمْ
ना
تَفْعَلُوا۟
तुमने किया
وَتَابَ
और महरबान हुआ
ٱللَّهُ
अल्लाह
عَلَيْكُمْ
तुम पर
فَأَقِيمُوا۟
तो क़ायम करो
ٱلصَّلَوٰةَ
नमाज़
وَءَاتُوا۟
और अदा करो
ٱلزَّكَوٰةَ
ज़कात
وَأَطِيعُوا۟
और इताअत करो
ٱللَّهَ
अल्लाह
وَرَسُولَهُۥ ۚ
और उसके रसूल की
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
خَبِيرٌۢ
ख़ूब बाख़बर है
بِمَا
उससे जो
تَعْمَلُونَ
तुम अमल करते हो
क्या तुम इससे डर गए कि अपनी गुप्त वार्ता से पहले सदक़े दो? जो जब तुमने यह न किया और अल्लाह ने तुम्हें क्षमा कर दिया. तो नमाज़ क़ायम करो, ज़कात देते रहो और अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करो। और तुम जो कुछ भी करते हो अल्लाह उसकी पूरी ख़बर रखता है
तफ़्सीर:
क्या तुम रसूल से सरगोशी करने से पहले सदक़ा देने के कारण गरीबी से डर गए? सो, यदि तुमने अल्लाह के इस आदेश का पालन नहीं किया, और अल्लाह ने तुम्हें क्षमा कर दिया कि इसे छोड़ने की छूट प्रदान कर दी, तो अब तुम उत्तम तरीक़े से नमाज़ क़ायम करो, अपने धन की ज़कात दो, तथा अल्लाह एवं उसके रसूल का अनुसरण करो। अल्लाह तुम्हारे कार्यों से पूरी तरह अवगत है। उससे तुम्हारा कोई काम छिपा नहीं है। और वह तुम्हें तुम्हारे कर्मों का बदला देगा।
आयत 14
۞ أَلَمْ تَرَ إِلَى ٱلَّذِينَ تَوَلَّوْا۟ قَوْمًا غَضِبَ ٱللَّهُ عَلَيْهِم مَّا هُم مِّنكُمْ وَلَا مِنْهُمْ وَيَحْلِفُونَ عَلَى ٱلْكَذِبِ وَهُمْ يَعْلَمُونَ
۞ أَلَمْ
क्या नहीं
تَرَ
आप ने देखा
إِلَى
तरफ़
ٱلَّذِينَ
उन लोगों के जिन्होंने
تَوَلَّوْا۟
दोस्त बनाया
قَوْمًا
एक क़ौम को
غَضِبَ
ग़ज़बनाक हुआ
ٱللَّهُ
अल्लाह
عَلَيْهِم
उन पर
مَّا
नहीं
هُم
वो
مِّنكُمْ
तुम में से
وَلَا
और ना
مِنْهُمْ
उनमें से
وَيَحْلِفُونَ
और वो क़समें खाते हैं
عَلَى
to
ٱلْكَذِبِ
झूठ पर
وَهُمْ
हालाँकि वो
يَعْلَمُونَ
वो जानते हैं
क्या तुमने उन लोगों को नहीं देखा जिन्होंने ऐसे लोगों को मित्र बनाया जिनपर अल्लाह का प्रकोप हुआ है? वे न तुममें से है और न उनमें से। और वे जानते-बूझते झूठी बात पर क़सम खाते है
तफ़्सीर:
क्या (ऐ रसूल) आपने उन मुनाफ़िक़ो (पाखंडियों) को नहीं देखा, जिन्होंने उन यहूदियों को मित्र बना लिया, जिनपर उनके कुफ़्र और पापों के कारण अल्लाह क्रोधित हुआ? ये मुनाफ़िक़ न तो मोमिनों में से हैं और न यहूदियों में से। बल्कि वे दुविधा में पड़े हुए हैं, न इधर के हैं, न उधर के। तथा वे क़समें खाते हैं कि वे मुसलमान हैं, और उन्होंने मुसलमानों की सूचनाएँ यहूदियों को नहीं पहुँचाई हैं। जबकि वे अपनी क़सम में झूठे हैं।
आयत 15
أَعَدَّ ٱللَّهُ لَهُمْ عَذَابًۭا شَدِيدًا ۖ إِنَّهُمْ سَآءَ مَا كَانُوا۟ يَعْمَلُونَ
أَعَدَّ
तैयार कर रखा है
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
لَهُمْ
उनके लिए
عَذَابًۭا
अज़ाब
شَدِيدًا ۖ
सख़्त
إِنَّهُمْ
बेशक वो
سَآءَ
कितना बुरा है
مَا
जो
كَانُوا۟
हैं वो
يَعْمَلُونَ
वो अमल करते
अल्लाह ने उनके लिए कठोर यातना तैयार कर रखी है। निश्चय ही बुरा है जो वे कर रहे है
तफ़्सीर:
अल्लाह ने उनके लिए आख़िरत में बड़ी कठोर यातना तैयार कर रखी है। क्योंकि वह उन्हें जहन्नम के पाताल में दाखिल करेगा। निश्चय वे दुनिया में कुफ़्र के बहुत ही बुरे काम करते रहे हैं।
आयत 16
ٱتَّخَذُوٓا۟ أَيْمَـٰنَهُمْ جُنَّةًۭ فَصَدُّوا۟ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ فَلَهُمْ عَذَابٌۭ مُّهِينٌۭ
ٱتَّخَذُوٓا۟
उन्होंने बना लिया
أَيْمَـٰنَهُمْ
अपनी क़समों को
جُنَّةًۭ
ढाल
فَصَدُّوا۟
फिर उन्होंने रोका
عَن
from
سَبِيلِ
(the) way of Allah
ٱللَّهِ
अल्लाह के रास्ते से
فَلَهُمْ
पस उनके लिए
عَذَابٌۭ
अज़ाब है
مُّهِينٌۭ
रुस्वा करने वाला
उन्होंने अपनी क़समों को ढाल बना रखा है। अतः वे अल्लाह के मार्ग से (लोगों को) रोकते है। तो उनके लिए रुसवा करनेवाली यातना है
तफ़्सीर:
उन्होंने अपनी क़समों को, जो वे खाया करते थे, कुफ़्र के कारण क़त्ल होने से बचने के लिए ढाल बना ली, क्योंकि उन्होंने क़समों के माध्यम से अपनी जान और माल की रक्षा के लिए मुसलमान होने का दिखावा किया। इस तरह उन्होंने लोगों को सत्य से फेर दिया। क्योंकि वे मुसलमानों को कमज़ोर और हतोत्साहित करते थे। अतः उनके लिए अपमानजनक यातना है, जो उन्हें अपमानित और तिरस्कृत करेगी।
आयत 17
لَّن تُغْنِىَ عَنْهُمْ أَمْوَٰلُهُمْ وَلَآ أَوْلَـٰدُهُم مِّنَ ٱللَّهِ شَيْـًٔا ۚ أُو۟لَـٰٓئِكَ أَصْحَـٰبُ ٱلنَّارِ ۖ هُمْ فِيهَا خَـٰلِدُونَ
لَّن
हरगिज़ ना
تُغْنِىَ
काम आऐंगे
عَنْهُمْ
उन्हें
أَمْوَٰلُهُمْ
माल उनके
وَلَآ
और ना
أَوْلَـٰدُهُم
औलाद उनकी
مِّنَ
against
ٱللَّهِ
अल्लाह से
شَيْـًٔا ۚ
कुछ भी
أُو۟لَـٰٓئِكَ
यही लोग हैं
أَصْحَـٰبُ
साथी
ٱلنَّارِ ۖ
आग के
هُمْ
वो
فِيهَا
उसमें
خَـٰلِدُونَ
हमेशा रहने वाले हैं
अल्लाह से बचाने के लिए न उनके माल उनके कुछ काम आएँगे और न उनकी सन्तान। वे आगवाले हैं। उसी में वे सदैव रहेंगे
तफ़्सीर:
उनके धन और उनकी संतान अल्लाह के समक्ष उनके कुछ काम न आएँगे। ये लोग जहन्नम के वासी हैं, जो उसमें प्रवेश करेंगे और उसी में हमेशा के लिए रहेंगे, उनकी यातना कभी बंद नहीं होगी।
आयत 18
يَوْمَ يَبْعَثُهُمُ ٱللَّهُ جَمِيعًۭا فَيَحْلِفُونَ لَهُۥ كَمَا يَحْلِفُونَ لَكُمْ ۖ وَيَحْسَبُونَ أَنَّهُمْ عَلَىٰ شَىْءٍ ۚ أَلَآ إِنَّهُمْ هُمُ ٱلْكَـٰذِبُونَ
يَوْمَ
जिस दिन
يَبْعَثُهُمُ
उठाएगा उन्हें
ٱللَّهُ
अल्लाह
جَمِيعًۭا
सब के सब को
فَيَحْلِفُونَ
फिर वो क़समें खाऐंगे
لَهُۥ
उसके सामने
كَمَا
जैसा कि
يَحْلِفُونَ
वो क़समें खाते हैं
لَكُمْ ۖ
तुम्हारे सामने
وَيَحْسَبُونَ
और वो समझते हैं
أَنَّهُمْ
बेशक वो
عَلَىٰ
ऊपर
شَىْءٍ ۚ
एक चीज़ के हैं
أَلَآ
ख़बरदार
إِنَّهُمْ
बेशक वो
هُمُ
वो ही
ٱلْكَـٰذِبُونَ
झूठे हैं
जिस दिन अल्लाह उन सबको उठाएगा तो वे उसके सामने भी इसी तरह क़समें खाएँगे, जिस तरह तुम्हारे सामने क़समें खाते है और समझते हैं कि वे किसी बुनियाद पर है। सावधान रहो, निश्चय ही वही झूठे है!
तफ़्सीर:
जिस दिन अल्लाह उन सबको बदले के लिए पुनर्जीवित करके उठाएगा, उनमें से किसी को भी नहीं छोड़ेगा, तो वे अल्लाह के सामने क़समें खाएँगे कि वे कुफ़्र और निफ़ाक़ पर नहीं थे। बल्कि, वे अल्लाह को प्रसन्न करने वाले काम करने वाले मोमिन थे। वे आख़िरत में अल्लाह के सामने क़समें खाएँगे, जैसे कि वे दुनिया में (ऐ मोमिनो) तुम्हारे सामने कसमें खाकर कहते थे कि वे मुसलमान हैं। वे समझेंगे कि इन क़समों की वजह से जो वे अल्लाह के सामने खा रहे हैं, किसी ऐसे आधार पर हैं, जो उन्हें कोई लाभ पहुँचाएगा, या उनसे कोई नुकसान दूर कर देगा। सुन लो, वे वही हैं जो वास्तव में दुनिया में भी अपनी क़समों में तथा आखिरत में भी अपनी क़समों में झूठे हैं।
आयत 19
ٱسْتَحْوَذَ عَلَيْهِمُ ٱلشَّيْطَـٰنُ فَأَنسَىٰهُمْ ذِكْرَ ٱللَّهِ ۚ أُو۟لَـٰٓئِكَ حِزْبُ ٱلشَّيْطَـٰنِ ۚ أَلَآ إِنَّ حِزْبَ ٱلشَّيْطَـٰنِ هُمُ ٱلْخَـٰسِرُونَ
ٱسْتَحْوَذَ
ग़लबा पा लिया
عَلَيْهِمُ
उन पर
ٱلشَّيْطَـٰنُ
शैतान ने
فَأَنسَىٰهُمْ
तो उसने भुला दिया उन्हें
ذِكْرَ
ज़िक्र
ٱللَّهِ ۚ
अल्लाह का
أُو۟لَـٰٓئِكَ
यही लोग हैं
حِزْبُ
गिरोह
ٱلشَّيْطَـٰنِ ۚ
शैतान का
أَلَآ
ख़बरदार
إِنَّ
बेशक
حِزْبَ
गिरोह
ٱلشَّيْطَـٰنِ
शैतान का
هُمُ
वो ही हैं
ٱلْخَـٰسِرُونَ
जो ख़सारा पाने वाले हैं
उनपर शैतान ने पूरी तरह अपना प्रभाव जमा लिया है। अतः उसने अल्लाह की याद को उनसे भुला दिया। वे शैतान की पार्टीवाले हैं। सावधान रहो शैतान की पार्टीवाले ही घाटे में रहनेवाले हैं!
तफ़्सीर:
शैतान उनपर हावी हो गया है और उन्हें अपने वसवसे के ज़रिए अल्लाह की याद भुला दी है। इसलिए उन्होंने अल्लाह को खुश करने वाले कार्य नहीं किए। बल्कि ऐसे कार्य किए जो उसे नाराज़ करने वाले हैं। इन विशेषताओं वाले लोग ही इबलीस के सैनिक और उसके अनुयायी हैं। सुन लो, निश्चय इबलीस के सैनिक और उसके अनुयायी ही दुनिया और आख़िरत में क्षति उठाने वाले हैं। क्योंकि उन्होंने मार्गदर्शन को गुमराही के बदले में और जन्नत को जहन्नम के बदले में बेच दिया है।
आयत 20
إِنَّ ٱلَّذِينَ يُحَآدُّونَ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥٓ أُو۟لَـٰٓئِكَ فِى ٱلْأَذَلِّينَ
إِنَّ
बेशक
ٱلَّذِينَ
वो लोग जो
يُحَآدُّونَ
मुख़ालिफ़त करते हैं
ٱللَّهَ
अल्लाह की
وَرَسُولَهُۥٓ
और उसके रसूल की
أُو۟لَـٰٓئِكَ
यही लोग हैं
فِى
(will be) among
ٱلْأَذَلِّينَ
ज़लील तरीन (मख़्लूक़) में
निश्चय ही जो लोग अल्लाह और उसके रसूल का विरोध करते है वे अत्यन्त अपमानित लोगों में से है
तफ़्सीर:
निःसंदेह जो लोग अल्लाह और उसके रसूल का विरोध करते हैं, वही लोग उन काफ़िर समुदायों में शामिल हैं, जिन्हें अल्लाह ने दुनिया एवं आख़िरत में अपमानित और तिरस्कृत किया है।
आज की ज़िंदगी में सबक़
मुनाफिकों की सरगोशियों की मज़म्मत का ज़िक्र है। यह सबक हमें सिखाता है कि लोगों के बीच सरगोशी (चुपके से बात) करना शक और बदगुमानी पैदा करता है, इससे बचना चाहिए।
आयत 21
كَتَبَ ٱللَّهُ لَأَغْلِبَنَّ أَنَا۠ وَرُسُلِىٓ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ قَوِىٌّ عَزِيزٌۭ
كَتَبَ
लिख दिया
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
لَأَغْلِبَنَّ
अलबत्ता मैं ज़रूर ग़ालिब रहूँगा
أَنَا۠
मैं
وَرُسُلِىٓ ۚ
और मेरे रसूल
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
قَوِىٌّ
बहुत क़ुव्वत वाला है
عَزِيزٌۭ
बहुत ज़बरदस्त है
अल्लाह ने लिए दिया है, "मैं और मेरे रसूल ही विजयी होकर रहेंगे।" निस्संदेह अल्लाह शक्तिमान, प्रभुत्वशाली है
तफ़्सीर:
अल्लाह ने अपने पूर्व ज्ञान के आधार पर निर्णय कर दिया है कि निश्चित रूप से मैं और मेरे रसूल ही तर्क और शक्ति के साथ अपने दुश्मनों पर विजयी रहेंगे। निश्चय अल्लाह अपने रसूलों की सहायता करने पर सर्वशक्तिमान, प्रभुत्ववशाली है, जो उनके दुश्मनों से बदला लेता है।
आयत 22
لَّا تَجِدُ قَوْمًۭا يُؤْمِنُونَ بِٱللَّهِ وَٱلْيَوْمِ ٱلْـَٔاخِرِ يُوَآدُّونَ مَنْ حَآدَّ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥ وَلَوْ كَانُوٓا۟ ءَابَآءَهُمْ أَوْ أَبْنَآءَهُمْ أَوْ إِخْوَٰنَهُمْ أَوْ عَشِيرَتَهُمْ ۚ أُو۟لَـٰٓئِكَ كَتَبَ فِى قُلُوبِهِمُ ٱلْإِيمَـٰنَ وَأَيَّدَهُم بِرُوحٍۢ مِّنْهُ ۖ وَيُدْخِلُهُمْ جَنَّـٰتٍۢ تَجْرِى مِن تَحْتِهَا ٱلْأَنْهَـٰرُ خَـٰلِدِينَ فِيهَا ۚ رَضِىَ ٱللَّهُ عَنْهُمْ وَرَضُوا۟ عَنْهُ ۚ أُو۟لَـٰٓئِكَ حِزْبُ ٱللَّهِ ۚ أَلَآ إِنَّ حِزْبَ ٱللَّهِ هُمُ ٱلْمُفْلِحُونَ
لَّا
You will not find
تَجِدُ
ना आप पाऐंगे
قَوْمًۭا
उन लोगों को
يُؤْمِنُونَ
जो ईमान रखते हों
بِٱللَّهِ
अल्लाह पर
وَٱلْيَوْمِ
and the Day
ٱلْـَٔاخِرِ
और आख़िरी दिन पर
يُوَآدُّونَ
कि वो दोस्ती रखते हों
مَنْ
उनसे जिन्होंने
حَآدَّ
मुख़ालिफ़त की
ٱللَّهَ
अल्लाह की
وَرَسُولَهُۥ
और उसके रसूल की
وَلَوْ
और अगरचे
كَانُوٓا۟
हों वो
ءَابَآءَهُمْ
बाप उनके
أَوْ
या
أَبْنَآءَهُمْ
बेटे उनके
أَوْ
या
إِخْوَٰنَهُمْ
भाई उनके
أَوْ
या
عَشِيرَتَهُمْ ۚ
क़बीला उनका
أُو۟لَـٰٓئِكَ
यही लोग हैं
كَتَبَ
उसने लिख दिया
فِى
within
قُلُوبِهِمُ
उनके दिलों में
ٱلْإِيمَـٰنَ
ईमान
وَأَيَّدَهُم
और उसने ताइद की उनकी
بِرُوحٍۢ
साथ रूह के
مِّنْهُ ۖ
अपनी तरफ़ से
وَيُدْخِلُهُمْ
और वो दाख़िल करेगा उन्हें
جَنَّـٰتٍۢ
बाग़ात मे
تَجْرِى
बहती हैं
مِن
from
تَحْتِهَا
उनके नीचे से
ٱلْأَنْهَـٰرُ
नहरें
خَـٰلِدِينَ
हमेशा रहने वाले हैं
فِيهَا ۚ
उनमें
رَضِىَ
राज़ी हो गया
ٱللَّهُ
अल्लाह
عَنْهُمْ
उनसे
وَرَضُوا۟
और वो राज़ी हो गए
عَنْهُ ۚ
उससे
أُو۟لَـٰٓئِكَ
यही लोग हैं
حِزْبُ
गिरोह
ٱللَّهِ ۚ
अल्लाह का
أَلَآ
ख़बरदार
إِنَّ
बेशक
حِزْبَ
गिरोह
ٱللَّهِ
अल्लाह का
هُمُ
वो ही हैं
ٱلْمُفْلِحُونَ
जो फ़लाह पाने वाले हैं
तुम उन लोगों को ऐसा कभी नहीं पाओगे जो अल्लाह और अन्तिम दि पर ईमान रखते है कि वे उन लोगों से प्रेम करते हो जिन्होंने अल्लाह और उसके रसूल का विरोध किया, यद्यपि वे उनके अपने बाप हों या उनके अपने बेटे हो या उनके अपने भाई या उनके अपने परिवारवाले ही हो। वही लोग हैं जिनके दिलों में अल्लाह ने ईमान को अंकित कर दिया है और अपनी ओर से एक आत्मा के द्वारा उन्हें शक्ति दी है। और उन्हें वह ऐसे बाग़ों में दाख़िल करेगा जिनके नीचे नहरें बह रही होंगी; जहाँ वे सदैव रहेंगे। अल्लाह उनसे राज़ी हुआ और वे भी उससे राज़ी हुए। वे अल्लाह की पार्टी के लोग है। सावधान रहो, निश्चय ही अल्लाह की पार्टीवाले ही सफल है
तफ़्सीर:
आप (ऐ नबी) उन लोगों को जो अल्लाह एवं क़ियामत के दिन पर ईमान रखते हैं, ऐसा नहीं पाएँगे कि वे उन लोगों से प्रेम करते और मित्रता रखते हों, जो अल्लाह और उसके रसूल से दुश्मनी रखते हैं, यद्यपि ये अल्लाह और उसके रसूल के दुश्मन उनके पिता, या उनके पुत्र, या उनके भाई, या उनके क़बीले वाले ही क्यों न हों, जिनसे वे संबंधित होते हैं। क्योंकि ईमान अल्लाह और उसके रसूल के दुश्मनों से मित्रता रखने से रोकता है, और क्योंकि ईमान का बंधन सभी बंधनों से सर्वोपरि है। अतः, टकराव के समय ईमान के बंधन को प्राथमिकता दी जाएगी। जो लोग अल्लाह और उसके रसूल से दुश्मनी रखने वालों से मित्रता नहीं रखते - भले ही वे इनके रिश्तेदार हों - , यही वे लोग हैं, जिनके दिलों में अल्लाह ने ईमान को जमा दिया है, इसलिए वह परिवर्तित नहीं होता। तथा उन्हें अपने प्रमाण और प्रकाश के साथ मज़बूत कर दिया है। और उन्हें क़ियामत के दिन सदैव रहने वाली जन्नतों में दाखिल करेगा, जिनके महलों और पेड़ों के नीचे से नहरे बहती होंगी। वे हमेशा के लिए वहीं रहेंगे। उनकी नेमतें उनसे बाधित नहीं होंगी और न ही वे (स्वयं) उससे नाश होंगे। अल्लाह उनसे इस तरह प्रसन्न हो गया कि उसके बाद कभी भी नाराज़ नहीं होगा। तथा वे भी अल्लाह से प्रसन्न हो गए, क्योंकि उसने उन्हें ऐसी नेमतें प्रदान कीं, जो कभी ख़त्म नहीं होंगी, जिनमें अल्लाह महिमावान् को देखना भी शामिल है। उक्त विशेषताओं से विशिष्ट लोग ही अल्लाह की सेना हैं, जो अल्लाह के आदेशों का पालन करते हैं और उसके निषेधों से दूर रहते हैं। सुन लो, निश्चय अल्लाह के सैनिक ही दुनिया और आख़िरत में अपनी अपेक्षित चीज़ों को पाने में, तथा अपनी घृणित व भयावह चीज़ों से बचने में सफल होने वाले हैं।
आज की ज़िंदगी में सबक़
अल्लाह-रसूल की मोहब्बत और कुफ्फार से दिली दोस्ती न रखने की ताकीद के साथ सूरह का इख्तिताम होता है। यह हमें सिखाता है कि सच्चा ईमान वाला अपने अकीदे को दुनियावी रिश्तों पर तरजीह देता है।
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