सूरह अस-सफ़ سورة الصف
मदनी 14 आयतें
नाम का मतलब
सफ (जंग में सफ बांधकर लड़ने वालों के ज़िक्र से)
पृष्ठभूमि
सूरह अस-सफ में जिहाद और अल्लाह की राह में सफ बांधकर डटे रहने की ताकीद है, साथ ही ईसा अलैहिस्सलाम की नबी ﷺ के आने की बशारत का ज़िक्र भी है।
फ़ज़ीलत / सार
इस सूरह में ईसा अलैहिस्सलाम का अपनी कौम को आखिरी नबी ﷺ की खुशखबरी देना दर्ज है, जो नबी ﷺ की रिसालत के सुबूतों में से एक है।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
आयत 1
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ سَبَّحَ لِلَّهِ مَا فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَمَا فِى ٱلْأَرْضِ ۖ وَهُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلْحَكِيمُ
سَبَّحَ
तस्बीह की है
لِلَّهِ
अल्लाह के लिए
مَا
उस चीज़ ने जो
فِى
(is) in
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों में है
وَمَا
और जो
فِى
(is) in
ٱلْأَرْضِ ۖ
ज़मीन में है
وَهُوَ
और वो
ٱلْعَزِيزُ
बहुत ज़बरदस्त है
ٱلْحَكِيمُ
ख़ूब हिकमत वाला है
अल्लाह की तसबीह की हर उस चीज़ ने जो आकाशों और धरती में है। वही प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है
तफ़्सीर:
आकाशों और धरती में जो कुछ है, सबने अल्लाह के हर उस चीज़ से पाक एवं पवित्र होने का गान किया, जो उसकी महिमा के योग्य नहीं है। और वह प्रभुत्वशाली है, जिसे कोई परास्त नहीं कर सकता, वह अपनी रचना, तक़दीर एवं शरीयत में हिकमत वाला है।
आयत 2
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ لِمَ تَقُولُونَ مَا لَا تَفْعَلُونَ
يَـٰٓأَيُّهَا
O
ٱلَّذِينَ
ऐ लोगो जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए हो
لِمَ
क्यों
تَقُولُونَ
तुम कहते हो
مَا
वो जो
لَا
not
تَفْعَلُونَ
नहीं तुम करते
ऐ ईमान लानेवालो! तुम वह बात क्यों कहते हो जो करते नहीं?
तफ़्सीर:
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने वालो! तुम क्यों कहते हो : हमने ऐसा किया है, जबकि वास्तव में तुमने उसे नहीं किया है?! जैसे तुममें से कोई कहे कि मैं अपनी तलवार से लड़ा और मारा। जबकि वह अपनी तलवार से न लड़ा है और न मारा है।
आयत 3
كَبُرَ مَقْتًا عِندَ ٱللَّهِ أَن تَقُولُوا۟ مَا لَا تَفْعَلُونَ
كَبُرَ
बड़ी है
مَقْتًا
नाराज़गी
عِندَ
with
ٱللَّهِ
अल्लाह के नज़दीक
أَن
कि
تَقُولُوا۟
तुम कहो
مَا
वो जो
لَا
not
تَفْعَلُونَ
नहीं तुम करते
अल्लाह के यहाँ यह अत्यन्त अप्रिय बात है कि तुम वह बात कहो, जो करो नहीं
तफ़्सीर:
यह अल्लाह के निकट बहुत घृणित और अप्रिय बात है कि तुम वह कहो जो तुम करते नहीं। इसलिए मोमिन के लिए उचित यही है कि वह अल्लाह के साथ सच्चा हो। उसकी करनी उसकी कथनी की पुष्टि करे।
आयत 4
إِنَّ ٱللَّهَ يُحِبُّ ٱلَّذِينَ يُقَـٰتِلُونَ فِى سَبِيلِهِۦ صَفًّۭا كَأَنَّهُم بُنْيَـٰنٌۭ مَّرْصُوصٌۭ
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
يُحِبُّ
वो मुहब्बत रखता है
ٱلَّذِينَ
उन लोगों से जो
يُقَـٰتِلُونَ
जंग करते हैं
فِى
in
سَبِيلِهِۦ
उसके रास्ते में
صَفًّۭا
सफ़ बना कर
كَأَنَّهُم
गोया कि वो
بُنْيَـٰنٌۭ
दीवार हैं
مَّرْصُوصٌۭ
सीसा पिलाई हुई
अल्लाह तो उन लोगों से प्रेम रखता है जो उसके मार्ग में पंक्तिबद्ध होकर लड़ते है मानो वे सीसा पिलाई हुए दीवार है
तफ़्सीर:
निःसंदेह अल्लाह उन मोमिन बंदों से प्रेम करता है, जो उसके मार्ग में उसकी प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए इस तरह पंक्तिबद्ध होकर युद्ध करते हैं, गोया वे एक सीसा पिलाई हुई इमारत हैं।
आयत 5
وَإِذْ قَالَ مُوسَىٰ لِقَوْمِهِۦ يَـٰقَوْمِ لِمَ تُؤْذُونَنِى وَقَد تَّعْلَمُونَ أَنِّى رَسُولُ ٱللَّهِ إِلَيْكُمْ ۖ فَلَمَّا زَاغُوٓا۟ أَزَاغَ ٱللَّهُ قُلُوبَهُمْ ۚ وَٱللَّهُ لَا يَهْدِى ٱلْقَوْمَ ٱلْفَـٰسِقِينَ
وَإِذْ
और जब
قَالَ
कहा
مُوسَىٰ
मूसा ने
لِقَوْمِهِۦ
अपनी क़ौम से
يَـٰقَوْمِ
ऐ मेरी क़ौम
لِمَ
क्यों
تُؤْذُونَنِى
तुम अज़ियत देते हो मुझे
وَقَد
हालाँकि तहक़ीक़
تَّعْلَمُونَ
तुम जानते हो
أَنِّى
बेशक मैं
رَسُولُ
रसूल हूँ
ٱللَّهِ
अल्लाह का
إِلَيْكُمْ ۖ
तुम्हारी तरफ़
فَلَمَّا
फिर जब
زَاغُوٓا۟
वो टेढ़े हुए
أَزَاغَ
टेढ़ा कर दिया
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
قُلُوبَهُمْ ۚ
उनके दिलों को
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
لَا
(does) not
يَهْدِى
नहीं वो हिदायत देता
ٱلْقَوْمَ
उन लोगों को
ٱلْفَـٰسِقِينَ
जो फ़ासिक़ हैं
और याद करो जब मूसा ने अपनी क़ौम के लोगों से कहा, "ऐ मेरी क़ौम के लोगों! तुम मुझे क्यो दुख देते हो, हालाँकि तुम जानते हो कि मैं तुम्हारी ओर भेजा हुआ अल्लाह का रसूल हूँ?" फिर जब उन्होंने टेढ़ अपनाई तो अल्लाह ने भी उनके दिल टेढ़ कर दिए। अल्लाह अवज्ञाकारियों को सीधा मार्ग नहीं दिखाता
तफ़्सीर:
और (ऐ रसूल) उस समय को याद करें, जब मूसा अलैहिस्लाम ने अपनी जाति के लोगों से कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! तुम मेरे आदेश का उल्लंघन करके मुझे कष्ट क्यों देते हो, जबकि तुम जानते हो कि मैं तुम्हारी ओर अल्लाह का रसूल हूँ?! फिर जब वे उस सत्य से विचलित हो गए और हट गए, जो मूसा अलैहिस्सलाम उनके पास लेकर आए थे, तो अल्लाह ने उनके दिलों को सत्य और सत्यनिष्ठा (धर्मपरायणता) से हटा दिया। और अल्लाह उन लोगों को सत्य की तौफ़ीक़ नहीं देता, जो उसकी अवज्ञा करने वाले हों।
आयत 6
وَإِذْ قَالَ عِيسَى ٱبْنُ مَرْيَمَ يَـٰبَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ إِنِّى رَسُولُ ٱللَّهِ إِلَيْكُم مُّصَدِّقًۭا لِّمَا بَيْنَ يَدَىَّ مِنَ ٱلتَّوْرَىٰةِ وَمُبَشِّرًۢا بِرَسُولٍۢ يَأْتِى مِنۢ بَعْدِى ٱسْمُهُۥٓ أَحْمَدُ ۖ فَلَمَّا جَآءَهُم بِٱلْبَيِّنَـٰتِ قَالُوا۟ هَـٰذَا سِحْرٌۭ مُّبِينٌۭ
وَإِذْ
और जब
قَالَ
कहा
عِيسَى
ईसा
ٱبْنُ
son
مَرْيَمَ
इब्ने मरियम ने
يَـٰبَنِىٓ
O Children
إِسْرَٰٓءِيلَ
ऐ बनी इस्राईल
إِنِّى
बेशक मैं
رَسُولُ
रसूल हूँ
ٱللَّهِ
अल्लाह का
إِلَيْكُم
तुम्हारी तरफ़
مُّصَدِّقًۭا
तस्दीक़ करने वाला हूँ
لِّمَا
उसकी जो
بَيْنَ
(was) between
يَدَىَّ
मुझसे पहले है
مِنَ
of
ٱلتَّوْرَىٰةِ
तौरात में से
وَمُبَشِّرًۢا
और ख़ुशख़बरी देने वाला हूँ
بِرَسُولٍۢ
एक रसूल की
يَأْتِى
जो आएगा
مِنۢ
from
بَعْدِى
मेरे बाद
ٱسْمُهُۥٓ
नाम उसका
أَحْمَدُ ۖ
अहमद(होगा)
فَلَمَّا
फिर जब
جَآءَهُم
वो आया उनके पास
بِٱلْبَيِّنَـٰتِ
साथ वाज़ेह दलाइल के
قَالُوا۟
उन्होंने कहा
هَـٰذَا
ये
سِحْرٌۭ
जादू है
مُّبِينٌۭ
खुल्लम-खुल्ला
और याद करो जबकि मरयम के बेटे ईसा ने कहा, "ऐ इसराईल की संतान! मैं तुम्हारी ओर भेजा हुआ अल्लाह का रसूल हूँ। मैं तौरात की (उस भविष्यवाणी की) पुष्टि करता हूँ जो मुझसे पहले से विद्यमान है और एक रसूल की शुभ सूचना देता हूँ जो मेरे बाद आएगा, उसका नाम अहमद होगा।" किन्तु वह जब उनके पास स्पट्जो प्रमाणों के साथ आया तो उन्होंने कहा, "यह तो जादू है।"
तफ़्सीर:
और (ऐ रसूल) उस समय को याद करें, जब ईसा बिन मर्यम अलैहिस्सलाम ने कहा : ऐ बनी इसराईल, मैं अल्लाह का रसूल हूँ, जिसने मुझे तुम्हारे पास भेजा है, अपने से पहले अवतरित किताब तौरात की पुष्टि करने वाला हूँ। अतः, मैं कोई नया रसूल नहीं हूँ, तथा एक रसूल की शुभ सूचना देने वाला हूँ, जो मेरे बाद आएगा, जिसका नाम अहमद होगा। फिर जब ईसा अलैहिस्सलाम उनके पास अपनी सच्चाई को दर्शाने वाले प्रमाण लेकर आए, तो उन्होंने कहा : यह खुला हुआ जादू है। अतः हम इसका पालन नहीं करेंगे।
आयत 7
وَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّنِ ٱفْتَرَىٰ عَلَى ٱللَّهِ ٱلْكَذِبَ وَهُوَ يُدْعَىٰٓ إِلَى ٱلْإِسْلَـٰمِ ۚ وَٱللَّهُ لَا يَهْدِى ٱلْقَوْمَ ٱلظَّـٰلِمِينَ
وَمَنْ
और कौन
أَظْلَمُ
ज़्यादा ज़ालिम है
مِمَّنِ
उससे जो
ٱفْتَرَىٰ
गढ़ ले
عَلَى
upon
ٱللَّهِ
अल्लाह पर
ٱلْكَذِبَ
झूठ
وَهُوَ
हालाँकि वो
يُدْعَىٰٓ
वो बुलाया जाता हो
إِلَى
to
ٱلْإِسْلَـٰمِ ۚ
तरफ़ इस्लाम के
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
لَا
(does) not
يَهْدِى
नहीं वो हिदायत देता
ٱلْقَوْمَ
उन लोगों को
ٱلظَّـٰلِمِينَ
जो ज़ालिम हैं
अब उस व्यक्ति से बढ़कर ज़ालिम कौन होगा, जो अल्लाह पर थोपकर झूठ घड़े जबकि इस्लाम (अल्लाह के आगे समर्पण करने) का ओर बुलाया जा रहा हो? अल्लाह ज़ालिम लोगों को सीधा मार्ग नहीं दिखाया करता
तफ़्सीर:
और उससे अधिक अत्याचारी कोई नहीं है, जो अल्लाह के विरुद्ध झूठ गढ़े और उसके समकक्ष ठहराकर उसे छोड़कर उनकी पूजा करे, जबकि उसे अल्लाह के लिए विशुद्ध एकेश्वरवाद के धर्म इस्लाम की ओर बुलाया जा रहा है। और अल्लाह उन लोगों को हिदायत और सत्य का रास्ता नहीं दिखाता, जो शिर्क और गुनाहों के द्वारा अपने आप पर अत्याचार करने वाले हैं।
आयत 8
يُرِيدُونَ لِيُطْفِـُٔوا۟ نُورَ ٱللَّهِ بِأَفْوَٰهِهِمْ وَٱللَّهُ مُتِمُّ نُورِهِۦ وَلَوْ كَرِهَ ٱلْكَـٰفِرُونَ
يُرِيدُونَ
वो चाहते हैं
لِيُطْفِـُٔوا۟
कि वो बुझा दें
نُورَ
नूर
ٱللَّهِ
अल्लाह का
بِأَفْوَٰهِهِمْ
अपने मूँहों से
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
مُتِمُّ
पूरा करने वाला है
نُورِهِۦ
अपने नूर को
وَلَوْ
और अगरचे
كَرِهَ
नापसंद करें
ٱلْكَـٰفِرُونَ
काफ़िर
वे चाहते है कि अल्लाह के प्रकाश को अपने मुँह की फूँक से बुझा दे, किन्तु अल्लाह अपने प्रकाश को पूर्ण करके ही रहेगा, यद्यपि इनकार करनेवालों को अप्रिय ही लगे
तफ़्सीर:
ये झुठलाने वाले अपने द्वारा जारी होने वाली भ्रष्ट बातों तथा सत्य को विकृत करने के माध्यम से अल्लाह के प्रकाश को बुझाना चाहते हैं, और अल्लाह उनके नापसंद करने के बावजूद अपने धर्म को धरती के चारों कोनों में फैलाकर तथा अपने शब्द को ऊँचा करके अपने प्रकाश को पूरा करने वाला है।
आयत 9
هُوَ ٱلَّذِىٓ أَرْسَلَ رَسُولَهُۥ بِٱلْهُدَىٰ وَدِينِ ٱلْحَقِّ لِيُظْهِرَهُۥ عَلَى ٱلدِّينِ كُلِّهِۦ وَلَوْ كَرِهَ ٱلْمُشْرِكُونَ
هُوَ
वो ही है
ٱلَّذِىٓ
जिसने
أَرْسَلَ
भेजा
رَسُولَهُۥ
अपने रसूल को
بِٱلْهُدَىٰ
साथ हिदायत के
وَدِينِ
और दीने
ٱلْحَقِّ
हक़ के
لِيُظْهِرَهُۥ
ताकि वो ग़ालिब कर दे उसे
عَلَى
over
ٱلدِّينِ
ऊपर दीनों के
كُلِّهِۦ
सब के सब
وَلَوْ
और अगरचे
كَرِهَ
नापसंद करें
ٱلْمُشْرِكُونَ
मुशरिक
वही है जिसने अपने रसूल को मार्गदर्शन और सत्यधर्म के साथ भेजा, ताकि उसे पूरे के पूरे धर्म पर प्रभुत्व प्रदान कर दे, यद्यपि बहुदेवादियों को अप्रिय ही लगे
तफ़्सीर:
अल्लाह वही है, जिसने अपने रसूल मुहम्मद सल्ल्लाहु अलैहि व सल्लम को इस्लाम धर्म के साथ भेजा, जो भलाई के लिए मार्गदर्शन का धर्म तथा लाभकारी ज्ञान और अच्छे कर्मों का धर्म है। ताकि उसे, मुश्रिकों के न चाहने के बावजूद, सभी धर्मों पर हावी (सर्वोच्च) कर दे, जो यह नहीं चाहते कि धरती में उसका बोल बाला हो।
आयत 10
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ هَلْ أَدُلُّكُمْ عَلَىٰ تِجَـٰرَةٍۢ تُنجِيكُم مِّنْ عَذَابٍ أَلِيمٍۢ
يَـٰٓأَيُّهَا
O
ٱلَّذِينَ
ऐ लोगो जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए हो
هَلْ
क्या
أَدُلُّكُمْ
मैं रहनुमाई करूँ तुम्हारी
عَلَىٰ
to
تِجَـٰرَةٍۢ
एक तिजारत पर
تُنجِيكُم
जो निजात दे तुम्हें
مِّنْ
from
عَذَابٍ
a punishment
أَلِيمٍۢ
दर्दनाक अज़ाब से
ऐ ईमान लानेवालो! क्या मैं तुम्हें एक ऐसा व्यापार बताऊँ जो तुम्हें दुखद यातना से बचा ले?
तफ़्सीर:
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने वालो और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! क्या मैं तुम्हें एक लाभदायक व्यापार के लिए मार्गदर्शन करूँ, जो तुम्हें दर्दनाक यातना से बचा ले?
आज की ज़िंदगी में सबक़
कहने और करने में फर्क की मज़म्मत और ईसा अलैहिस्सलाम की बशारत का ज़िक्र है। यह हमें सिखाता है कि जो बात हम कहते हैं, उस पर अमल करना ज़रूरी है, वरना यह अल्लाह को नापसंद है।
आयत 11
تُؤْمِنُونَ بِٱللَّهِ وَرَسُولِهِۦ وَتُجَـٰهِدُونَ فِى سَبِيلِ ٱللَّهِ بِأَمْوَٰلِكُمْ وَأَنفُسِكُمْ ۚ ذَٰلِكُمْ خَيْرٌۭ لَّكُمْ إِن كُنتُمْ تَعْلَمُونَ
تُؤْمِنُونَ
तुम ईमान लाओ
بِٱللَّهِ
अल्लाह पर
وَرَسُولِهِۦ
और उसके रसूल पर
وَتُجَـٰهِدُونَ
और तुम जिहाद करो
فِى
in
سَبِيلِ
(the) way
ٱللَّهِ
अल्लाह के रास्ते में
بِأَمْوَٰلِكُمْ
साथ अपने मालों के
وَأَنفُسِكُمْ ۚ
और अपनी जानों के
ذَٰلِكُمْ
ये
خَيْرٌۭ
बेहतर है
لَّكُمْ
तुम्हारे लिए
إِن
अगर
كُنتُمْ
हो तुम
تَعْلَمُونَ
तुम इल्म रखते
तुम्हें ईमान लाना है अल्लाह और उसके रसूल पर, और जिहाद करना है अल्लाह के मार्ग में अपने मालों और अपनी जानों से। यही तुम्हारे लिए उत्तम है, यदि तुम जानो
तफ़्सीर:
यह लाभदायक व्यापार यह है कि तुम अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान ले आओ, और उसकी प्रसन्नता तलाश करते हुए, अपने धन को खर्च करके और अपनी जान न्योछावर करके, उसके मार्ग में जिहाद करो। यह उपर्युक्त कार्य तुम्हारे लिए बेहतर है। यदि तुम जानते हो, तो इसके लिए जल्दी करो।
आयत 12
يَغْفِرْ لَكُمْ ذُنُوبَكُمْ وَيُدْخِلْكُمْ جَنَّـٰتٍۢ تَجْرِى مِن تَحْتِهَا ٱلْأَنْهَـٰرُ وَمَسَـٰكِنَ طَيِّبَةًۭ فِى جَنَّـٰتِ عَدْنٍۢ ۚ ذَٰلِكَ ٱلْفَوْزُ ٱلْعَظِيمُ
يَغْفِرْ
वो बख़्श देगा
لَكُمْ
तुम्हारे लिए
ذُنُوبَكُمْ
तुम्हारे गुनाहों को
وَيُدْخِلْكُمْ
और वो दाख़िल करेगा तुम्हें
جَنَّـٰتٍۢ
बाग़ात में
تَجْرِى
बहती हैं
مِن
from
تَحْتِهَا
जिनके नीचे से
ٱلْأَنْهَـٰرُ
नहरें
وَمَسَـٰكِنَ
और घर
طَيِّبَةًۭ
पाकीज़ा
فِى
in
جَنَّـٰتِ
Gardens
عَدْنٍۢ ۚ
हमेशगी के बाग़ात में
ذَٰلِكَ
यही है
ٱلْفَوْزُ
कामयाबी
ٱلْعَظِيمُ
बहुत बड़ी
वह तुम्हारे गुनाहों को क्षमा कर देगा और तुम्हें ऐसे बागों में दाखिल करेगा जिनके नीचे नहरें बह रही होगी और उन अच्छे घरों में भी जो सदाबहार बाग़ों में होंगे। यही बड़ी सफलता है
तफ़्सीर:
इस व्यापार का लाभ यह है कि अल्लाह तुम्हारे गुनाहों को क्षमा कर देगा और तुम्हें ऐसी जन्नतों में दाखिल करेगा, जिनके महलों और पेड़ों के नीचे से नहरें जारी होंगी, और तुम्हें स्थायी जन्नतों के अंदर अच्छे आवासों में दाखिल करेगा, जहाँ से कोई प्रस्थान नहीं होगा। यह उपर्युक्त बदला ही वह महान सफलता है जिसके बराबर कोई अन्य सफलता नहीं हो सकती।
आयत 13
وَأُخْرَىٰ تُحِبُّونَهَا ۖ نَصْرٌۭ مِّنَ ٱللَّهِ وَفَتْحٌۭ قَرِيبٌۭ ۗ وَبَشِّرِ ٱلْمُؤْمِنِينَ
وَأُخْرَىٰ
और एक दूसरी चीज़
تُحِبُّونَهَا ۖ
तुम मुहब्बत रखते हो उससे
نَصْرٌۭ
मदद
مِّنَ
from
ٱللَّهِ
अल्लाह की तरफ़ से
وَفَتْحٌۭ
और फ़त्ह
قَرِيبٌۭ ۗ
क़रीबी
وَبَشِّرِ
और ख़ुशख़बरी दे दीजिए
ٱلْمُؤْمِنِينَ
मोमिनों को
और दूसरी चीज़ भी जो तुम्हें प्रिय है (प्रदान करेगा), "अल्लाह की ओर से सहायता और निकट प्राप्त होनेवाली विजय," ईमानवालों को शुभसूचना दे दो!
तफ़्सीर:
इस व्यापार से लाभ की एक और विशेषता है, जो तुम्हें प्रिय है और वह इसी दुनिया में प्राप्त होने वाली है। वह यह है कि अल्लाह तुम्हारे दुश्मन के विरुद्ध तुम्हारी मदद करेगा और तुम्हें एक निकट विजय प्रदान करेगा, जो मक्का वग़ैरह की विजय है। और (ऐ रसूल) मोमिनों को इस दुनिया में विजय और आखिरत में जन्नत की प्राप्ति की हर्षदायक सूचना दे दें।
आयत 14
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ كُونُوٓا۟ أَنصَارَ ٱللَّهِ كَمَا قَالَ عِيسَى ٱبْنُ مَرْيَمَ لِلْحَوَارِيِّـۧنَ مَنْ أَنصَارِىٓ إِلَى ٱللَّهِ ۖ قَالَ ٱلْحَوَارِيُّونَ نَحْنُ أَنصَارُ ٱللَّهِ ۖ فَـَٔامَنَت طَّآئِفَةٌۭ مِّنۢ بَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ وَكَفَرَت طَّآئِفَةٌۭ ۖ فَأَيَّدْنَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ عَلَىٰ عَدُوِّهِمْ فَأَصْبَحُوا۟ ظَـٰهِرِينَ
يَـٰٓأَيُّهَا
O you
ٱلَّذِينَ
ऐ लोगो जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए हो
كُونُوٓا۟
हो जाओ
أَنصَارَ
मददगार
ٱللَّهِ
अल्लाह के
كَمَا
जैसे
قَالَ
कहा था
عِيسَى
ईसा
ٱبْنُ
son
مَرْيَمَ
इब्ने मरियम ने
لِلْحَوَارِيِّـۧنَ
हवारियों से
مَنْ
कौन है
أَنصَارِىٓ
मददगार मेरा
إِلَى
for
ٱللَّهِ ۖ
तरफ़ अल्लाह के
قَالَ
कहा
ٱلْحَوَارِيُّونَ
हवारियों ने
نَحْنُ
हम हैं
أَنصَارُ
मददगार
ٱللَّهِ ۖ
अल्लाह के
فَـَٔامَنَت
तो ईमान लाया
طَّآئِفَةٌۭ
एक गिरोह
مِّنۢ
of
بَنِىٓ
Children
إِسْرَٰٓءِيلَ
बनी इस्राईल में से
وَكَفَرَت
और कुफ़्र किया
طَّآئِفَةٌۭ ۖ
एक गिरोह ने
فَأَيَّدْنَا
तो क़ुव्वत दी हमने
ٱلَّذِينَ
उनको जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
عَلَىٰ
against
عَدُوِّهِمْ
ऊपर उनके दुश्मनों के
فَأَصْبَحُوا۟
तो हो गए वो
ظَـٰهِرِينَ
ग़ालिब
ऐ ईमान लानेवालों! अल्लाह के सहायक बनो, जैसा कि मरयम के बेटे ईसा ने हवारियों (साथियों) से कहा था, "कौन है अल्लाह की ओर (बुलाने में) मेरे सहायक?" हवारियों ने कहा, "हम है अल्लाह के सहायक।" फिर इसराईल की संतान में से एक गिरोह ईमान ले आया और एक गिरोह न इनकार किया। अतः हमने उन लोगों को, जो ईमान लाए थे, उनके अपने शत्रुओं के मुकाबले में शक्ति प्रदान की, तो वे छाकर रहे
तफ़्सीर:
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने वालो और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! तुम अपने रसूल के लाए हुए धर्म की मदद करके अल्लाह के मददगार बन जाओ, वैसे ही जैसे ह़वारियों ने मदद की थी, जब ईसा अलैहिस्सलाम ने उनसे कहा था : अल्लाह की ओर मेरे सहायक कौन हैं? तो उन्होंने अविलंब उत्तर दिया : हम अल्लाह के सहायक हैं! चुनाँचे बनी इसराईल का एक समूह ईसा अलैहिस्सलाम पर ईमान ले आया और दूसरे समूह ने उन्हें मानने से इनकार कर दिया। अतः हमने ईसा अलैहिस्सलाम को मानने वालों का उन लोगों के विरुद्ध समर्थन किया, जिन्होंने उनका इनकार किया था। तो वे उनपर विजयी रहे।
आज की ज़िंदगी में सबक़
सबसे फायदेमंद तिजारत (अल्लाह की राह में जिहाद) और हवारियों की मिसाल के साथ सूरह का इख्तिताम होता है। यह सबक हमें सिखाता है कि हवारियों की तरह अल्लाह के दीन के मददगार बनना असली कामयाबी की तिजारत है।
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