सूरह अल-जुमुआ سورة الجمعة
मदनी 11 आयतें
नाम का मतलब
जुमा (जुमे के दिन और उसकी नमाज़ के अहकाम से)
पृष्ठभूमि
सूरह अल-जुमुआ में जुमे के दिन की नमाज़ के अहकाम और उसकी अहमियत का ज़िक्र है, साथ ही यहूदियों की उस कमी का भी ज़िक्र है जो उन्होंने तौरात पर अमल न करके दिखाई।
फ़ज़ीलत / सार
इस सूरह में जुमे की नमाज़ के लिए कारोबार छोड़कर मस्जिद की तरफ जल्दी करने का हुक्म है, जो जुमे की अहमियत को उजागर करता है।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
आयत 1
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ يُسَبِّحُ لِلَّهِ مَا فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَمَا فِى ٱلْأَرْضِ ٱلْمَلِكِ ٱلْقُدُّوسِ ٱلْعَزِيزِ ٱلْحَكِيمِ
يُسَبِّحُ
तस्बीह करती है
لِلَّهِ
अल्लाह के लिए
مَا
हर वो चीज़ जो
فِى
(is) in
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों में है
وَمَا
और जो
فِى
(is) in
ٱلْأَرْضِ
ज़मीन में है
ٱلْمَلِكِ
जो बादशाह है
ٱلْقُدُّوسِ
निहायत पाकीज़ा है
ٱلْعَزِيزِ
बहुत ज़बरदस्त है
ٱلْحَكِيمِ
ख़ूब हिकमत वाला है
अल्लाह की तसबीह कर रही है हर वह चीज़ जो आकाशों में है और जो धरती में है, जो सम्राट है, अत्यन्त पवित्र, प्रभुत्वशाली तत्वदर्शी
तफ़्सीर:
आकाशों और धरती में मौजूद सभी प्राणी अल्लाह के उन सभी कमियों से पवित्र होने का वर्णन करते हैं, जो उसकी महिमा के योग्य नहीं हैं। वह राजा है, जो अपने राज्य में एकता है, हर कमी से मुक्त व पवित्र है, सब पर प्रभुत्वशाली है, जिसपर किसी का ज़ोर नहीं चलता, तथा अपनी रचना, शरीयत और तक़दीर (निर्णय) में हिकमत वाला है।
आयत 2
هُوَ ٱلَّذِى بَعَثَ فِى ٱلْأُمِّيِّـۧنَ رَسُولًۭا مِّنْهُمْ يَتْلُوا۟ عَلَيْهِمْ ءَايَـٰتِهِۦ وَيُزَكِّيهِمْ وَيُعَلِّمُهُمُ ٱلْكِتَـٰبَ وَٱلْحِكْمَةَ وَإِن كَانُوا۟ مِن قَبْلُ لَفِى ضَلَـٰلٍۢ مُّبِينٍۢ
هُوَ
वो ही है
ٱلَّذِى
जिसने
بَعَثَ
भेजा
فِى
among
ٱلْأُمِّيِّـۧنَ
अनपढ़ लोगों में
رَسُولًۭا
एक रसूल
مِّنْهُمْ
उन्हीं में से
يَتْلُوا۟
जो तिलावत करता है
عَلَيْهِمْ
उन पर
ءَايَـٰتِهِۦ
उसकी आयात
وَيُزَكِّيهِمْ
और वो तज़किया करता है उनका
وَيُعَلِّمُهُمُ
और वो सिखाता है उन्हें
ٱلْكِتَـٰبَ
किताब
وَٱلْحِكْمَةَ
और हिकमत
وَإِن
और बेशक
كَانُوا۟
थे वो
مِن
from
قَبْلُ
इससे पहले
لَفِى
surely in
ضَلَـٰلٍۢ
अलबत्ता गुमराही में
مُّبِينٍۢ
खुली
वही है जिसने उम्मियों में उन्हीं में से एक रसूल उठाया जो उन्हें उसकी आयतें पढ़कर सुनाता है, उन्हें निखारता है और उन्हें किताब और हिकमत (तत्वदर्शिता) की शिक्षा देता है, यद्यपि इससे पहले तो वे खुली हुई गुमराही में पड़े हुए थे, -
तफ़्सीर:
वही है, जिसने उन अरबों के बीच, जो पढ़ना-लिखना नहीं जानते थे, उन्हीं की जाति में से एक रसूल भेजा, जो उन्हें अपने ऊपर अल्लाह की उतारी हुई आयतों को पढ़कर सुनाता है, उन्हें कुफ़्र और बुरी नैतिकताओं से शुद्ध करता है, उन्हें क़ुरआन सिखाता और सुन्नत की शिक्षा देता है। हालाँकि, वे उसके उनकी ओर रसूल बनाकर भेजे जाने से पहले स्पष्ट रूप से सत्य से भटके हुए थे, जहाँ वे मूर्तियों की पूजा करते, खून बहाते और रिश्ते-नाते काटते थे।
आयत 3
وَءَاخَرِينَ مِنْهُمْ لَمَّا يَلْحَقُوا۟ بِهِمْ ۚ وَهُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلْحَكِيمُ
وَءَاخَرِينَ
और दूसरों (के लिए भी )
مِنْهُمْ
उनमें से
لَمَّا
जो अभी तक नहीं
يَلْحَقُوا۟
वो मिले
بِهِمْ ۚ
उनसे
وَهُوَ
और वो
ٱلْعَزِيزُ
बहुत ज़बरदस्त है
ٱلْحَكِيمُ
ख़ूब हिकमत वाला है
और उन दूसरे लोगों को भी (किताब और हिकमत की शिक्षा दे) जो अभी उनसे मिले नहीं है, वे उन्हीं में से होंगे। और वही प्रभुत्वशाली, तत्वशाली है
तफ़्सीर:
और उसने इस रसूल को अरब के कुछ दूसरे लोगों और उनके अलावा अन्य लोगों की ओर भी भेजा, जो अभी तक नहीं आए हैं, और वे आएँगे। और वह प्रभुत्वशाली है, जिसे कोई पराजित नहीं कर सकता, वह अपनी रचना, शरीयत और तक़दीर (निर्णय) में हिकमत वाला है।
आयत 4
ذَٰلِكَ فَضْلُ ٱللَّهِ يُؤْتِيهِ مَن يَشَآءُ ۚ وَٱللَّهُ ذُو ٱلْفَضْلِ ٱلْعَظِيمِ
ذَٰلِكَ
ये
فَضْلُ
फ़ज़ल है
ٱللَّهِ
अल्लाह का
يُؤْتِيهِ
वो देता है उसको
مَن
जिसे
يَشَآءُ ۚ
वो चाहता है
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
ذُو
(is the) Possessor
ٱلْفَضْلِ
फ़ज़ल वाला है
ٱلْعَظِيمِ
बहुत बड़े
यह अल्लाह का उदार अनुग्रह है, जिसको चाहता है उसे प्रदान करता है। अल्लाह बड़े अनुग्रह का मालिक है
तफ़्सीर:
यह उपर्युक्त (रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को अरबों और अन्य लोगों की ओर भेजना) अल्लाह का अनुग्रह है, वह जिसे चाहे यह अनुग्रह प्रदान करे। और अल्लाह महान उपकार वाला है। और उसके महान उपकार का एक उदाहरण इस उम्मत के रसूल को सभी लोगों की ओर भेजना है।
आयत 5
مَثَلُ ٱلَّذِينَ حُمِّلُوا۟ ٱلتَّوْرَىٰةَ ثُمَّ لَمْ يَحْمِلُوهَا كَمَثَلِ ٱلْحِمَارِ يَحْمِلُ أَسْفَارًۢا ۚ بِئْسَ مَثَلُ ٱلْقَوْمِ ٱلَّذِينَ كَذَّبُوا۟ بِـَٔايَـٰتِ ٱللَّهِ ۚ وَٱللَّهُ لَا يَهْدِى ٱلْقَوْمَ ٱلظَّـٰلِمِينَ
مَثَلُ
मिसाल
ٱلَّذِينَ
उनकी जो
حُمِّلُوا۟
उठवाए गए
ٱلتَّوْرَىٰةَ
तौरात
ثُمَّ
फिर
لَمْ
नहीं
يَحْمِلُوهَا
उन्होंने उठाया उसे
كَمَثَلِ
मानिन्द मिसाल
ٱلْحِمَارِ
गधे की
يَحْمِلُ
जो उठाता है
أَسْفَارًۢا ۚ
किताबें
بِئْسَ
कितनी बुरी है
مَثَلُ
मिसाल
ٱلْقَوْمِ
उन लोगों की
ٱلَّذِينَ
जिन्होंने
كَذَّبُوا۟
झुठलाया
بِـَٔايَـٰتِ
(the) Signs
ٱللَّهِ ۚ
अल्लाह की आयात को
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
لَا
(does) not
يَهْدِى
नहीं वो हिदायत देता
ٱلْقَوْمَ
उन लोगों को
ٱلظَّـٰلِمِينَ
जो ज़ालिम हैं
जिन लोगों पर तारात का बोझ डाला गया, किन्तु उन्होंने उसे न उठाया, उनकी मिसाल उस गधे की-सी है जो किताबे लादे हुए हो। बहुत ही बुरी मिसाल है उन लोगों की जिन्होंने अल्लाह की आयतों को झुठला दिया। अल्लाह ज़ालिमों को सीधा मार्ग नहीं दिखाया करता
तफ़्सीर:
उन यहूदियों का उदाहरण, जिन्हें तौरात की शिक्षाओं पर अमल करने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी, परंतु वे उसे छोड़ बैठे, जिसकी उन्हें ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी, उस गधे के समान है, जो बड़ी-बड़ी किताबें लादे हुए हो, वह नहीं जानता कि उसकी पीठ पर क्या लदा हुआ है : क्या वह किताबें हैं या कुछ और? बहुत बुरा उदाहरण है उन लोगों का, जिन्होंने अल्लाह की आयतों को झुठलाया। और अल्लाह अत्याचारी लोगों को सत्य तक पहुँचने का सामर्थ्य नहीं देता।
आयत 6
قُلْ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ هَادُوٓا۟ إِن زَعَمْتُمْ أَنَّكُمْ أَوْلِيَآءُ لِلَّهِ مِن دُونِ ٱلنَّاسِ فَتَمَنَّوُا۟ ٱلْمَوْتَ إِن كُنتُمْ صَـٰدِقِينَ
قُلْ
कह दीजिए
يَـٰٓأَيُّهَا
O
ٱلَّذِينَ
ऐ लोगो जो
هَادُوٓا۟
यहूदी बन गए हो
إِن
अगर
زَعَمْتُمْ
तुम ज़अम / गुमान करते हो
أَنَّكُمْ
बेशक तुम
أَوْلِيَآءُ
दोस्त हो
لِلَّهِ
अल्लाह के
مِن
from
دُونِ
सिवाए
ٱلنَّاسِ
लोगों के
فَتَمَنَّوُا۟
पस तुम तमन्ना करो
ٱلْمَوْتَ
मौत की
إِن
अगर
كُنتُمْ
हो तुम
صَـٰدِقِينَ
सच्चे
कह दो, "ऐ लोगों, जो यहूदी हुए हो! यदि तुम्हें यह गुमान है कि सारे मनुष्यों को छोड़कर तुम ही अल्लाह के प्रेमपात्र हो तो मृत्यु की कामना करो, यदि तुम सच्चे हो।"
तफ़्सीर:
(ऐ रसूल) आप कह दीजिए : ऐ वे लोगो, जो यहूदी धर्म के विकृत होने के बाद भी उसपर बने हुए हो, अगर तुम्हारा यह दावा है कि तुम अल्लाह के दोस्त हो, उसने दूसरे लोगों को छोड़कर तुम्हें दोस्ती के लिए विशिष्ट कर लिया है, तो फिर मृत्यु की कामना करो। ताकि अल्लाह तुम्हें वह सम्मान जल्दी प्रदान कर दे, जो उसने (तुम्हारे दावे के अनुसार) तुम्हारे लिए खास कर रखा है, यदि तुम अपने इस दावे में सच्चे हो कि तुम ही अल्लाह के दोस्त हो, कोई और नहीं।
आयत 7
وَلَا يَتَمَنَّوْنَهُۥٓ أَبَدًۢا بِمَا قَدَّمَتْ أَيْدِيهِمْ ۚ وَٱللَّهُ عَلِيمٌۢ بِٱلظَّـٰلِمِينَ
وَلَا
और नहीं
يَتَمَنَّوْنَهُۥٓ
वो तमन्ना करेंगे उसकी
أَبَدًۢا
कभी भी
بِمَا
बवजह उसके जो
قَدَّمَتْ
आगे भेजा
أَيْدِيهِمْ ۚ
उनके हाथों ने
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
عَلِيمٌۢ
ख़ूब जानने वाला है
بِٱلظَّـٰلِمِينَ
ज़ालिमों को
किन्तु वे कभी भी उसकी कामना करेंगे, उस (कर्म) के कारण जो उनके हाथों ने आगे भेजा है। अल्लाह ज़ालिमों को भली-भाँति जानता है
तफ़्सीर:
वे कभी भी मृत्यु की कामना नहीं करेंगे। बल्कि वे अपने कुफ़्र, पाप, अत्याचार तथा तौरात में विरूपण और परिवर्तन करने के कारण इस दुनिया में अनंत काल की कामना करते हैं। और अल्लाह अत्याचारियों को भली-भाँति जानता है। उनका कोई कार्य उससे छिपा नहीं है और वह उन्हें उनके कर्मों का बदला देगा।
आयत 8
قُلْ إِنَّ ٱلْمَوْتَ ٱلَّذِى تَفِرُّونَ مِنْهُ فَإِنَّهُۥ مُلَـٰقِيكُمْ ۖ ثُمَّ تُرَدُّونَ إِلَىٰ عَـٰلِمِ ٱلْغَيْبِ وَٱلشَّهَـٰدَةِ فَيُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
قُلْ
कह दीजिए
إِنَّ
बेशक
ٱلْمَوْتَ
मौत
ٱلَّذِى
वो जो
تَفِرُّونَ
तुम भागते हो
مِنْهُ
उससे
فَإِنَّهُۥ
तो बेशक वो
مُلَـٰقِيكُمْ ۖ
मिलने वाली है तुमसे
ثُمَّ
फिर
تُرَدُّونَ
तुम लौटाए जाओगे
إِلَىٰ
to
عَـٰلِمِ
तरफ़ जानने वाले
ٱلْغَيْبِ
ग़ैब के
وَٱلشَّهَـٰدَةِ
और हाज़िर के
فَيُنَبِّئُكُم
फिर वो बता देगा तुम्हें
بِمَا
वो जो
كُنتُمْ
थे तुम
تَعْمَلُونَ
तुम अमल करते
कह दो, "मृत्यु जिससे तुम भागते हो, वह तो तुम्हें मिलकर रहेगी, फिर तुम उसकी ओर लौटाए जाओगे जो छिपे और खुले का जाननेवाला है। और वह तुम्हें उससे अवगत करा देगा जो कुछ तुम करते रहे होगे।" -
तफ़्सीर:
और (ऐ रसूल) इन यहूदियों से कह दें : निश्चय वह मौत जिससे तुम भागते हो, अनिवार्य रूप से किसी न किसी समय तुम्हें आने वाली है। फिर तुम क़ियामत के दिन अल्लाह की ओर लौटाए जाओगे, जो हर उस चीज़ को जानता है, जो अनुपस्थित है और जो मौजूद है। उन दोनों में से कुछ भी उससे छिपा नहीं है। चुनाँचे वह तुम्हें बताएगा कि तुम दुनिया में क्या किया करते थे और तुम्हें उसका बदला देगा।
आयत 9
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ إِذَا نُودِىَ لِلصَّلَوٰةِ مِن يَوْمِ ٱلْجُمُعَةِ فَٱسْعَوْا۟ إِلَىٰ ذِكْرِ ٱللَّهِ وَذَرُوا۟ ٱلْبَيْعَ ۚ ذَٰلِكُمْ خَيْرٌۭ لَّكُمْ إِن كُنتُمْ تَعْلَمُونَ
يَـٰٓأَيُّهَا
O
ٱلَّذِينَ
ऐ लोगो जो
ءَامَنُوٓا۟
ईमान लाए हो
إِذَا
जब
نُودِىَ
पुकारा जाए
لِلصَّلَوٰةِ
नमाज़ के लिए
مِن
on
يَوْمِ
दिन
ٱلْجُمُعَةِ
जुमा के
فَٱسْعَوْا۟
तो दौड़ो
إِلَىٰ
to
ذِكْرِ
(the) remembrance
ٱللَّهِ
तरफ़ अल्लाह के ज़िक्र के
وَذَرُوا۟
और छोड़ दो
ٱلْبَيْعَ ۚ
ख़रीद व फ़रोख़्त
ذَٰلِكُمْ
ये
خَيْرٌۭ
बेहतर है
لَّكُمْ
तुम्हारे लिए
إِن
अगर
كُنتُمْ
हो तुम
تَعْلَمُونَ
तुम इल्म रखते
ऐ ईमान लानेवालो, जब जुमा के दिन नमाज़ के लिए पुकारा जाए तो अल्लाह की याद की ओर दौड़ पड़ो और क्रय-विक्रय छोड़ दो। यह तुम्हारे लिए अच्छा है, यदि तुम जानो
तफ़्सीर:
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! जब मुअज़्ज़िन जुमा के दिन खतीब के मिंबर पर चढ़ने के बाद, नमाज़ के लिए अज़ान दे, तो ख़ुतबा सुनने और नमाज़ पढ़ने के लिए मस्जिदों की ओर दौड़ चलो और क्रय-विक्रय छोड़ दो; ताकि यह तुम्हें आज्ञाकारिता से विचलित न कर दे। यह जुमे की अज़ान के बाद नमाज़ के लिए जल्दी जाना और क्रय-विक्रय छोड़ देना (ऐ मोमिनो) तुम्हारे लिए बेहतर है, अगर तुम इस बात से अवगत हो। अतः अल्लाह ने तुम्हें जो आदेश दिया है, उसका पालन करो।
आयत 10
فَإِذَا قُضِيَتِ ٱلصَّلَوٰةُ فَٱنتَشِرُوا۟ فِى ٱلْأَرْضِ وَٱبْتَغُوا۟ مِن فَضْلِ ٱللَّهِ وَٱذْكُرُوا۟ ٱللَّهَ كَثِيرًۭا لَّعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ
فَإِذَا
फिर जब
قُضِيَتِ
पूरी हो जाए
ٱلصَّلَوٰةُ
नमाज़
فَٱنتَشِرُوا۟
तो फैल जाओ
فِى
in
ٱلْأَرْضِ
ज़मीन में
وَٱبْتَغُوا۟
और तलाश करो
مِن
from
فَضْلِ
(the) Bounty
ٱللَّهِ
अल्लाह के फ़ज़ल में से
وَٱذْكُرُوا۟
और ज़िक्र करो
ٱللَّهَ
अल्लाह का
كَثِيرًۭا
कसरत से
لَّعَلَّكُمْ
ताकि तुम
تُفْلِحُونَ
तुम फ़लाह पा जाओ
फिर जब नमाज़ पूरी हो जाए तो धरती में फैल जाओ और अल्लाह का उदार अनुग्रह (रोजी) तलाश करो, और अल्लाह को बहुत ज़्यादा याद करते रहो, ताकि तुम सफल हो। -
तफ़्सीर:
फिर जब तुम जुमे की नमाज़ पूरी कर लो, तो हलाल रोज़ी की तलाश में और अपनी ज़रूरतों की पूर्ति के लिए धरती में फैल जाओ, और हलाल कमाई तथा वैध मुनाफ़ा के माध्यम से अल्लाह का अनुग्रह तलाश करो, और आजीविका के लिए अपनी खोज के दौरान अल्लाह को बहुत याद करते रहो, और आजीविका के लिए तुम्हारी खोज तुम्हें अल्लाह के ज़िक्र से गाफ़िल न करे, ताकि तुम्हें वह चीज़ प्राप्त हो सके, जिसे तुम पसंद करते हो और उस चीज़ से बच सको, जिससे तुम डरते हो।
आज की ज़िंदगी में सबक़
जुमे की नमाज़ के हुक्म और कारोबार छोड़कर मस्जिद जाने का ज़िक्र है। यह हमें सिखाता है कि जुमे की नमाज़ को दुनियावी कारोबार पर तरजीह देनी चाहिए।
आयत 11
وَإِذَا رَأَوْا۟ تِجَـٰرَةً أَوْ لَهْوًا ٱنفَضُّوٓا۟ إِلَيْهَا وَتَرَكُوكَ قَآئِمًۭا ۚ قُلْ مَا عِندَ ٱللَّهِ خَيْرٌۭ مِّنَ ٱللَّهْوِ وَمِنَ ٱلتِّجَـٰرَةِ ۚ وَٱللَّهُ خَيْرُ ٱلرَّٰزِقِينَ
وَإِذَا
और जब
رَأَوْا۟
उन्होंने देखा
تِجَـٰرَةً
तिजारत को
أَوْ
या
لَهْوًا
खेल तमाशे को
ٱنفَضُّوٓا۟
वो दौड़ पड़े
إِلَيْهَا
तरफ़ उसके
وَتَرَكُوكَ
और उन्होंने छोड़ दिया आपको
قَآئِمًۭا ۚ
खड़े हुए
قُلْ
कह दीजिए
مَا
जो
عِندَ
(is) with
ٱللَّهِ
अल्लाह के पास है
خَيْرٌۭ
बेहतर है
مِّنَ
than
ٱللَّهْوِ
खेल तमाशे से
وَمِنَ
and from
ٱلتِّجَـٰرَةِ ۚ
और तिजारत से
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
خَيْرُ
बेहतर है
ٱلرَّٰزِقِينَ
सब रिज़्क़ देने वालों से
किन्तु जब वे व्यवहार और खेल-तमाशा देखते है तो उसकी ओर टूट पड़ते है और तुम्हें खड़ा छोड़ देते है। कह दो, "जो कुछ अल्लाह के पास है वह तमाशे और व्यापार से कहीं अच्छा है। और अल्लाह सबसे अच्छा आजीविका प्रदान करनेवाला है।"
तफ़्सीर:
और जब कुछ मुसलमानों ने व्यापार या खेल-तमाशा देखा, तो वे उसकी ओर निकल गए और उन्होंने (ऐ रसूल) आपको मिंबर पर खड़ा छोड़ दिया। (ऐ रसूल) आप कह दें : अल्लाह के पास अच्छे कर्म का जो बदला है, वह उस व्यापार एवं खेल-कूद से उत्तम है, जिसकी ओर तुम निकलकर गए थे। और अल्लाह सबसे उत्तम रोज़ी देने वाला है।
आज की ज़िंदगी में सबक़
तिजारत या तमाशे में मशगूल होकर नमाज़ छोड़ने की मज़म्मत के साथ सूरह का इख्तिताम होता है। यह सबक हमें सिखाता है कि अल्लाह के यहां जो कुछ है वह दुनियावी तिजारत से बेहतर है, इसे तरजीह देनी चाहिए।
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