सूरह अल-मुनाफ़िक़ून سورة المنافقون
मदनी 11 आयतें
नाम का मतलब
मुनाफिक लोग (दिखावटी ईमान वालों के रवैये के ज़िक्र से)
पृष्ठभूमि
सूरह अल-मुनाफिकून में मुनाफिकों (दिखावटी मुसलमानों) की पहचान, उनकी झूठी कसमें और उनके दिलों की बीमारी का ज़िक्र है।
फ़ज़ीलत / सार
यह सूरह मुनाफिकों के रवैये को इतनी वाज़ेह मिसालों से बयान करती है कि हर दौर के मुसलमान इससे अपने ईमान की जांच कर सकते हैं।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
आयत 1
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ إِذَا جَآءَكَ ٱلْمُنَـٰفِقُونَ قَالُوا۟ نَشْهَدُ إِنَّكَ لَرَسُولُ ٱللَّهِ ۗ وَٱللَّهُ يَعْلَمُ إِنَّكَ لَرَسُولُهُۥ وَٱللَّهُ يَشْهَدُ إِنَّ ٱلْمُنَـٰفِقِينَ لَكَـٰذِبُونَ
إِذَا
जब
جَآءَكَ
आते हैं आपके पास
ٱلْمُنَـٰفِقُونَ
मुनाफ़िक़
قَالُوا۟
वो कहते हैं
نَشْهَدُ
हम गवाही देते हैं
إِنَّكَ
कि बेशक आप
لَرَسُولُ
यक़ीनन रसूल हैं
ٱللَّهِ ۗ
अल्लाह के
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
يَعْلَمُ
वो जानता है
إِنَّكَ
बेशक आप
لَرَسُولُهُۥ
यक़ीनन रसूल हैं उसके
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
يَشْهَدُ
गवाही देता है
إِنَّ
बेशक
ٱلْمُنَـٰفِقِينَ
मुनाफ़िक़
لَكَـٰذِبُونَ
अलबत्ता झूठे हैं
जब मुनाफ़िक (कपटाचारी) तुम्हारे पास आते है तो कहते है, "हम गवाही देते है कि निश्चय ही आप अल्लाह के रसूल है।" अल्लाह जानता है कि निस्संदेह तुम उसके रसूल हो, किेन्तु अल्लाह गवाही देता है कि ये मुनाफ़िक बिलकुल झूठे है
तफ़्सीर:
जब मुनाफ़िक़ लोग, जो इस्लाम का प्रदर्शन करते हैं और दिल में कुफ़्र छिपाए होते हैं, (ऐ रसूल!) आपकी सभा में आते हैं, तो कहते हैं : हम गवाही देते हैं कि निःसंदेह आप सचमुच अल्लाह के रसूल हैं। और अल्लाह जानता है कि निःसंदेह आप सचमुच उसके रसूल हैं। तथा अल्लाह गवाही देता है कि मुनाफ़िक़ लोग अपने इस दावे में निश्चित रूप से झूठे हैं कि वे अपने दिलों की गहराइयों से गवाही देते हैं कि आप उसके रसूल हैं।
आयत 2
ٱتَّخَذُوٓا۟ أَيْمَـٰنَهُمْ جُنَّةًۭ فَصَدُّوا۟ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ ۚ إِنَّهُمْ سَآءَ مَا كَانُوا۟ يَعْمَلُونَ
ٱتَّخَذُوٓا۟
उन्होंने बना लिया
أَيْمَـٰنَهُمْ
अपनी क़समों क
جُنَّةًۭ
ढाल
فَصَدُّوا۟
तो उन्होंने रोका
عَن
from
سَبِيلِ
(the) Way
ٱللَّهِ ۚ
अल्लाह के रास्ते से
إِنَّهُمْ
बेशक वो
سَآءَ
कितना बुरा है
مَا
जो
كَانُوا۟
हैं वो
يَعْمَلُونَ
वो अमल करते
उन्होंने अपनी क़समों को ढाल बना रखा है, इस प्रकार वे अल्लाह के मार्ग से रोकते है। निश्चय ही बुरा है जो वे कर रहे है
तफ़्सीर:
उन्होंने अपनी क़समों को, जो वे अपने ईमान के दावे पर खाते हैं, क़त्ल तथा क़ैद से बचने के लिए ढाल बना लिया है तथा संदेहवाद और झूठी अफवाह फैलाकर लोगों को ईमान से रोका है। निःसंदेह बहुत बुरा है, जो वे पाखंड और झूठी क़समें खाना आदि बुरे काम कर रहे थे।
आयत 3
ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ ءَامَنُوا۟ ثُمَّ كَفَرُوا۟ فَطُبِعَ عَلَىٰ قُلُوبِهِمْ فَهُمْ لَا يَفْقَهُونَ
ذَٰلِكَ
ये
بِأَنَّهُمْ
बवजह उसके कि वो
ءَامَنُوا۟
वो ईमान लाए
ثُمَّ
फिर
كَفَرُوا۟
उन्होंने कुफ़्र किया
فَطُبِعَ
तो मोहर लगा दी गई
عَلَىٰ
[upon]
قُلُوبِهِمْ
ऊपर उनके दिलों के
فَهُمْ
पस वो
لَا
(do) not
يَفْقَهُونَ
नहीं वो समझते
यह इस कारण कि वे ईमान लाए, फिर इनकार किया, अतः उनके दिलों पर मुहर लगा दी गई, अब वे कुछ नहीं समझते
तफ़्सीर:
ऐसा इसलिए है क्योंकि वे दिखाने के लिए ईमान लाए थे और ईमान उनके दिलों तक नहीं पहुँचा था, फिर उन्होंने गुप्त रूप से अल्लाह के साथ कुफ़्र किया। इसलिए उनके कुफ़्र के कारण अल्लाह ने उनके दिलों पर मुहर लगा दी। अतः अब उनके अंदर ईमान प्रवेश नहीं कर सकता। तो उस मुहर के कारण उन्हें समझ नहीं आता कि उनकी भलाई और मार्गदर्शन किस में है।
आयत 4
۞ وَإِذَا رَأَيْتَهُمْ تُعْجِبُكَ أَجْسَامُهُمْ ۖ وَإِن يَقُولُوا۟ تَسْمَعْ لِقَوْلِهِمْ ۖ كَأَنَّهُمْ خُشُبٌۭ مُّسَنَّدَةٌۭ ۖ يَحْسَبُونَ كُلَّ صَيْحَةٍ عَلَيْهِمْ ۚ هُمُ ٱلْعَدُوُّ فَٱحْذَرْهُمْ ۚ قَـٰتَلَهُمُ ٱللَّهُ ۖ أَنَّىٰ يُؤْفَكُونَ
۞ وَإِذَا
और जब
رَأَيْتَهُمْ
देखें आप उन्हें
تُعْجِبُكَ
अच्छे लगें आपको
أَجْسَامُهُمْ ۖ
जिस्म उनके
وَإِن
और अगर
يَقُولُوا۟
वो बात करें
تَسْمَعْ
आप सुनते रह जाऐं
لِقَوْلِهِمْ ۖ
उनकी बात को
كَأَنَّهُمْ
गोया कि वो
خُشُبٌۭ
लकड़ियाँ हैं
مُّسَنَّدَةٌۭ ۖ
टेक लगाई हुईं
يَحْسَبُونَ
वो गुमान करते हैं
كُلَّ
हर
صَيْحَةٍ
बुलन्द आवाज़ को
عَلَيْهِمْ ۚ
अपने ऊपर
هُمُ
वो ही
ٱلْعَدُوُّ
दुश्मन हैं
فَٱحْذَرْهُمْ ۚ
पस आप मोहतात रहिए उनसे
قَـٰتَلَهُمُ
ग़ारत करे उन्हें
ٱللَّهُ ۖ
अल्लाह
أَنَّىٰ
कहाँ से
يُؤْفَكُونَ
वो फेरे जाते हैं
तुम उन्हें देखते हो तो उनके शरीर (बाह्य रूप) तुम्हें अच्छे लगते है, औरयदि वे बात करें तो उनकी बात तुम सुनते रह जाओ। किन्तु यह ऐसा ही है मानो वे लकड़ी के कुंदे है, जिन्हें (दीवार के सहारे) खड़ा कर दिया गया हो। हर ज़ोर की आवाज़ को वे अपने ही विरुद्ध समझते है। वही वास्तविक शत्रु हैं, अतः उनसे बचकर रहो। अल्लाह की मार उनपर। वे कहाँ उल्टे फिरे जा रहे है!
तफ़्सीर:
और जब तुम (ऐ देखने वाले) उन्हें देखो, तो उनके परम सुख व आनंद और ताजगी के कारण उनकी आकृति और आकार तुम्हें बहुत अच्छा लगेगा, और अगर वे बात करें, तो तुम उनकी बात को उसकी वाक्पटुता के कारण कान लगाकर सुनोगे। वे आपकी सभा में (ऐ रसूल) ऐसे बैठे होते हैं, मानो कि वे दीवार के सहारे लगाई हुई लकड़ियाँ हैं। न कुछ समझते हैं और न याद रखते हैं, बल्कि उनकी कायरता का हाल यह है कि वे हर आवाज़ को अपने ही विरुद्ध समझते हैं। वही वास्तविक दुश्मन हैं। अतः, (ऐ रसूल) उनसे सावधान रहें कि कहीं वे आपके किसी रहस्य को उजागर न कर दें या आपके विरुद्ध कोई चाल न चलें। उन पर अल्लाह की लानत है। वे ईमान से कैसे फेरे जा रहे हैं, जबकि उसके प्रमाण स्पष्ट और उसके तर्क साफ़ नज़र आते हैं।
आयत 5
وَإِذَا قِيلَ لَهُمْ تَعَالَوْا۟ يَسْتَغْفِرْ لَكُمْ رَسُولُ ٱللَّهِ لَوَّوْا۟ رُءُوسَهُمْ وَرَأَيْتَهُمْ يَصُدُّونَ وَهُم مُّسْتَكْبِرُونَ
وَإِذَا
और जब
قِيلَ
कहा जाता है
لَهُمْ
उनसे
تَعَالَوْا۟
आओ
يَسْتَغْفِرْ
बख़्शिश की दुआ करें
لَكُمْ
तुम्हारे लिए
رَسُولُ
(the) Messenger
ٱللَّهِ
अल्लाह के रसूल
لَوَّوْا۟
वो मोड़ते है
رُءُوسَهُمْ
अपने सरों को
وَرَأَيْتَهُمْ
और देखते हैं आप उन्हें
يَصُدُّونَ
वो रुकते हैं
وَهُم
इस हाल में कि वो
مُّسْتَكْبِرُونَ
तकब्बुर करने वाले हैं
और जब उनसे कहा जाता है, "आओ, अल्लाह का रसूल तुम्हारे लिए क्षमा की प्रार्थना करे।" तो वे अपने सिर मटकाते है और तुम देखते हो कि घमंड के साथ खिंचे रहते है
तफ़्सीर:
और जब इन मुनाफ़िकों से कहा जाए : जो कुछ तुमसे हुआ उसके लिए माफ़ी मांगते हुए अल्लाह के रसूल के पास आओ, वह अल्लाह से तुम्हारे पापों के लिए क्षमा याचना करेंगे, तो वे मज़ाक उड़ाते हुए अपने सिर घुमा लेते हैं, और आप उन्हें देखेंगे कि सत्य को स्वीकार करने और उसका पालन करने से घमंड करते हुए, उससे मुँह मोड़ लेते हैं, जिसका उन्हें आदेश दिया गया था।
आयत 6
سَوَآءٌ عَلَيْهِمْ أَسْتَغْفَرْتَ لَهُمْ أَمْ لَمْ تَسْتَغْفِرْ لَهُمْ لَن يَغْفِرَ ٱللَّهُ لَهُمْ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يَهْدِى ٱلْقَوْمَ ٱلْفَـٰسِقِينَ
سَوَآءٌ
यक्साँ है
عَلَيْهِمْ
उन पर
أَسْتَغْفَرْتَ
ख़्वाह बख़्शिश माँगें आप
لَهُمْ
उनके लिए
أَمْ
या
لَمْ
ना
تَسْتَغْفِرْ
आप बख़्शिश माँगें
لَهُمْ
उनके लिए
لَن
हरगिज़ नहीं
يَغْفِرَ
बख़्शेगा
ٱللَّهُ
अल्लाह
لَهُمْ ۚ
उन्हें
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
لَا
(does) not
يَهْدِى
नहीं वो हिदायत देता
ٱلْقَوْمَ
उन लोगों को
ٱلْفَـٰسِقِينَ
जो फ़ासिक़ हैं
उनके लिए बराबर है चाहे तुम उनके किए क्षमा की प्रार्थना करो या उनके लिए क्षमा की प्रार्थना न करो। अल्लाह उन्हें कदापि क्षमा न करेगा। निश्चय ही अल्लाह अवज्ञाकारियों को सीधा मार्ग नहीं दिखाया करता
तफ़्सीर:
(ऐ रसूल) आपका उनके गुनाहों के लिए क्षमा याचना करना और उनके लिए क्षमा याचना न करना दोनों बराबर है। अल्लाह उनके गुनाहों को हरगिज़ माफ़ नहीं करेगा। अल्लाह उन लोगों को सामर्थ्य प्रदान नहीं करता, जो उसकी आज्ञाकारिता से निकल जाने वाले और उसकी अवज्ञा पर अड़े रहने वाले हैं।
आयत 7
هُمُ ٱلَّذِينَ يَقُولُونَ لَا تُنفِقُوا۟ عَلَىٰ مَنْ عِندَ رَسُولِ ٱللَّهِ حَتَّىٰ يَنفَضُّوا۟ ۗ وَلِلَّهِ خَزَآئِنُ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَلَـٰكِنَّ ٱلْمُنَـٰفِقِينَ لَا يَفْقَهُونَ
هُمُ
वो ही हैं
ٱلَّذِينَ
जो
يَقُولُونَ
कहते हैं
لَا
(Do) not
تُنفِقُوا۟
ना तुम ख़र्च करो
عَلَىٰ
ऊपर
مَنْ
उनके जो
عِندَ
पास हैं
رَسُولِ
(the) Messenger
ٱللَّهِ
रसूल अल्लाह के
حَتَّىٰ
यहाँ तक कि
يَنفَضُّوا۟ ۗ
वो मुन्तशिर हो जाऐं
وَلِلَّهِ
और अल्लाह ही के लिए हैं
خَزَآئِنُ
ख़ज़ाने
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों
وَٱلْأَرْضِ
और ज़मीन के
وَلَـٰكِنَّ
और लेकिन
ٱلْمُنَـٰفِقِينَ
मुनाफ़िक़
لَا
(do) not
يَفْقَهُونَ
नहीं वो समझते
वे वहीं लोग है जो कहते है, "उन लोगों पर ख़र्च न करो जो अल्लाह के रसूल के पास रहनेवाले है, ताकि वे तितर-बितर हो जाएँ।" हालाँकि आकाशों और धरती के ख़जाने अल्लाह ही के है, किन्तु वे मुनाफ़िक़ समझते नहीं
तफ़्सीर:
वही लोग हैं, जो कहते हैं : अपना धन उन गरीबों और मदीने के आस-पास के देहातियों पर खर्च न करो, जो अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास हैं, यहाँ तक कि वे उनसे अलग हो जाएँ। हालाँकि आकाशों के खज़ाने और पृथ्वी के खज़ाने केवल अल्लाह ही के हैं। वह अपने बंदों में से जिसे चाहता है, उसे प्रदान करता है। लेकिन मुनाफ़िक़ों को पता नहीं है कि रोज़ी के खज़ाने अल्लाह महिमावान ही के हाथ में हैं।
आयत 8
يَقُولُونَ لَئِن رَّجَعْنَآ إِلَى ٱلْمَدِينَةِ لَيُخْرِجَنَّ ٱلْأَعَزُّ مِنْهَا ٱلْأَذَلَّ ۚ وَلِلَّهِ ٱلْعِزَّةُ وَلِرَسُولِهِۦ وَلِلْمُؤْمِنِينَ وَلَـٰكِنَّ ٱلْمُنَـٰفِقِينَ لَا يَعْلَمُونَ
يَقُولُونَ
वो कहते हैं
لَئِن
अलबत्ता अगर
رَّجَعْنَآ
वापस लौटे हम
إِلَى
to
ٱلْمَدِينَةِ
तरफ़ मदीने के
لَيُخْرِجَنَّ
अलबत्ता ज़रूर निकाल देगा
ٱلْأَعَزُّ
ज़्यादा इज़्ज़त वाला
مِنْهَا
उससे
ٱلْأَذَلَّ ۚ
ज़्यादा ज़िल्लत वाले को
وَلِلَّهِ
और अल्लाह ही के लिए है
ٱلْعِزَّةُ
इज़्ज़त
وَلِرَسُولِهِۦ
और उसके रसूल के लिए
وَلِلْمُؤْمِنِينَ
और मोमिनों के लिए
وَلَـٰكِنَّ
और लेकिन
ٱلْمُنَـٰفِقِينَ
मुनाफ़िक़
لَا
(do) not
يَعْلَمُونَ
नहीं वो जानते
वे कहते है, "यदि हम मदीना लौटकर गए तो जो अधिक शक्तिवाला है, वह हीनतर (व्यक्तियों) को वहाँ से निकाल बाहर करेगा।" हालाँकि शक्ति अल्लाह और उसके रसूल और मोमिनों के लिए है, किन्तु वे मुनाफ़िक़ जानते नहीं
तफ़्सीर:
उनका सरदार अब्दुल्लाह बिन उबैय कहता है : अगर हम मदीना लौटकर गए तो सबसे सम्माननीय लोग (अर्थात मैं और मेरे लोग) वहाँ से सबसे तुच्छ लोगों; यानी मुहम्मद और उनके साथियों को निकाल बाहर करेंगे। हालाँकि सम्मान केवल अल्लाह के लिए, उसके रसूल के लिए और मोमिनों के लिए है, अब्दुल्लाह बिन उबैय और उसके साथियों के लिए नहीं है। लेकिन मुनाफ़िक़ लोग यह नहीं जानते कि सम्मान अल्लाह, उसके रसूल और मोमिनों के लिए है।
आयत 9
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ لَا تُلْهِكُمْ أَمْوَٰلُكُمْ وَلَآ أَوْلَـٰدُكُمْ عَن ذِكْرِ ٱللَّهِ ۚ وَمَن يَفْعَلْ ذَٰلِكَ فَأُو۟لَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلْخَـٰسِرُونَ
يَـٰٓأَيُّهَا
O
ٱلَّذِينَ
ऐ लोगो जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए हो
لَا
(Let) not
تُلْهِكُمْ
ना ग़ाफ़िल करे तुम्हें
أَمْوَٰلُكُمْ
माल तुम्हारे
وَلَآ
और ना
أَوْلَـٰدُكُمْ
औलाद तुम्हारी
عَن
from
ذِكْرِ
(the) remembrance
ٱللَّهِ ۚ
अल्लाह के ज़िक्र से
وَمَن
और जो कोई
يَفْعَلْ
करेगा
ذَٰلِكَ
ऐसा
فَأُو۟لَـٰٓئِكَ
तो यही लोग हैं
هُمُ
वो
ٱلْخَـٰسِرُونَ
जो ख़सारा पाने वाले हैं
ऐ ईमान लानेवालो! तुम्हारे माल तुम्हें अल्लाह की याद से ग़ाफ़िल न कर दें और न तुम्हारी सन्तान ही। जो कोई ऐसा करे तो ऐसे ही लोग घाटे में रहनेवाले है
तफ़्सीर:
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने वालो और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! तुम्हारे धन और तुम्हारी संतानें तुम्हें नमाज़ या इस्लाम के अन्य कर्तव्यों से गाफ़िल न करें। और जिसे उसके धन और उसकी संतान ने नमाज़ और उसके अलावा अल्लाह के अनिवार्य किए हुए अन्य कर्तव्यों से गाफ़िल कर दिया, तो वही लोग वास्तव में घाटा उठाने वाले हैं, जिन्होंने क़ियामत के दिन अपने आपको और अपने परिजनों को घाटे में डाल दिया।
आयत 10
وَأَنفِقُوا۟ مِن مَّا رَزَقْنَـٰكُم مِّن قَبْلِ أَن يَأْتِىَ أَحَدَكُمُ ٱلْمَوْتُ فَيَقُولَ رَبِّ لَوْلَآ أَخَّرْتَنِىٓ إِلَىٰٓ أَجَلٍۢ قَرِيبٍۢ فَأَصَّدَّقَ وَأَكُن مِّنَ ٱلصَّـٰلِحِينَ
وَأَنفِقُوا۟
और ख़र्च करो
مِن
from
مَّا
उसमें से जो
رَزَقْنَـٰكُم
रिज़्क़ दिया हमन तुम्हें
مِّن
from
قَبْلِ
उससे पहले
أَن
कि
يَأْتِىَ
आ जाए
أَحَدَكُمُ
तुम में से किसी एक को
ٱلْمَوْتُ
मौत
فَيَقُولَ
तो वो कहे
رَبِّ
ऐ मेरे रब
لَوْلَآ
क्यों ना
أَخَّرْتَنِىٓ
मोहलत दी तू ने मुझे
إِلَىٰٓ
for
أَجَلٍۢ
एक वक़्त तक
قَرِيبٍۢ
क़रीब के
فَأَصَّدَّقَ
तो मैं सदक़ा करता
وَأَكُن
और मैं हो जाता
مِّنَ
among
ٱلصَّـٰلِحِينَ
नेक लोगों में से
हमने तुम्हें जो कुछ दिया है उसमें से ख़र्च करो इससे पहले कि तुममें से किसी की मृत्यु आ जाए और उस समय वह करने लगे, "ऐ मेरे रब! तूने मुझे कुछ थोड़े समय तक और मुहलत क्यों न दी कि मैं सदक़ा (दान) करता (मुझे मुहलत दे कि मैं सदक़ा करूँ) और अच्छे लोगों में सम्मिलित हो जाऊँ।"
तफ़्सीर:
और अल्लाह की राह में उन धनों में से खर्च करो, जो अल्लाह ने तुम्हें दिए हैं, इससे पहले कि तुममें से किसी की मौत आ जाए, फिर वह अपने पालनहार से कहे : ऐ मेरे पालनहार! तूने मुझे थोड़ी-सी मोहलत क्यों न दी कि मैं अल्लाह की राह में अपना धन दान करता और अल्लाह के उन नेक बंदों में से हो जाता, जिनके कर्म नेक होते हैं।
आज की ज़िंदगी में सबक़
मुनाफिकों की झूठी कसमों और दिखावटी ईमान का ज़िक्र है। यह हमें सिखाता है कि ज़बानी दावा और दिल की सच्चाई में फर्क होना बड़ा खतरा है, हमें अपने अंदर झांकना चाहिए।
आयत 11
وَلَن يُؤَخِّرَ ٱللَّهُ نَفْسًا إِذَا جَآءَ أَجَلُهَا ۚ وَٱللَّهُ خَبِيرٌۢ بِمَا تَعْمَلُونَ
وَلَن
और हरगिज़ ना
يُؤَخِّرَ
मोहलत देगा
ٱللَّهُ
अल्लाह
نَفْسًا
किसी नफ़्स को
إِذَا
जब
جَآءَ
आ जाऐगी
أَجَلُهَا ۚ
मौत उसकी
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
خَبِيرٌۢ
ख़ूब ख़बर रखने वाला है
بِمَا
उसकी जो
تَعْمَلُونَ
तुम अमल करते हो
किन्तु अल्लाह, किसी व्यक्ति को जब तक उसका नियत समय आ जाता है, कदापि मुहलत नहीं देता। और जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसकी पूरी ख़बर रखता है
तफ़्सीर:
और अल्लाह किसी प्राणी को उस समय हरगिज़ मोहलत नहीं देगा, जब उसकी मृत्यु का समय आ गया और उसका जीवन बीत चुका। और अल्लाह उससे अवगत है, जो कुछ तुम करते हो। उससे तुम्हारा कोई भी काम ओझल नहीं रहता और वह तुम्हें तुम्हारे हर काम का बदला देगा। अगर भला काम है, तो भला बदला और अगर बुरा है, तो बुरा।
आज की ज़िंदगी में सबक़
माल-औलाद की मोहब्बत में अल्लाह की याद से गफलत न करने की ताकीद के साथ सूरह का इख्तिताम होता है। यह सबक हमें सिखाता है कि मौत आने से पहले सदका और नेक अमल में जल्दी करनी चाहिए, बाद में पछतावा फायदा नहीं देता।
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