नाम का मतलब
नुकसान ज़ाहिर होने का दिन (कयामत के दिन का एक नाम, जब सबका असली नफा-नुकसान ज़ाहिर होगा)
पृष्ठभूमि
सूरह अत-तग़ाबुन में तौहीद, कयामत के यकीन और माल-औलाद की आज़माइश का ज़िक्र है।
फ़ज़ीलत / सार
इस सूरह में कयामत को यौम-उत-तग़ाबुन (नफा-नुकसान ज़ाहिर होने का दिन) कहा गया है, जो हमें अपने असली फायदे-नुकसान पर गौर करने की तरगीब देता है।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
आयत 1
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ يُسَبِّحُ لِلَّهِ مَا فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَمَا فِى ٱلْأَرْضِ ۖ لَهُ ٱلْمُلْكُ وَلَهُ ٱلْحَمْدُ ۖ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍۢ قَدِيرٌ
يُسَبِّحُ
तस्बीह करती है
لِلَّهِ
अल्लाह के लिए
مَا
हर वो चीज़ जो
فِى
(is) in
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों में है
وَمَا
और जो
فِى
(is) in
ٱلْأَرْضِ ۖ
ज़मीन में है
لَهُ
उसी के लिए है
ٱلْمُلْكُ
बादशाहत
وَلَهُ
और उसी के लिए है
ٱلْحَمْدُ ۖ
सब तारीफ़
وَهُوَ
और वो
عَلَىٰ
ऊपर
كُلِّ
हर
شَىْءٍۢ
चीज़ के
قَدِيرٌ
ख़ूब क़ुदरत रखन वाला है
अल्लाह की तसबीह कर रही है हर वह चीज़ जो आकाशों में है और जो धरती में है। उसी की बादशाही है और उसी के लिए प्रशंसा है और उसे हर चीज़ की सामर्थ्य प्राप्त है
तफ़्सीर:
आकाशों और धरती में मौजूद सभी प्राणी अल्लाह के हर प्रकार की कमी और अपूर्णता के गुणों से पवित्र होने का वर्णन करते हैं, जो उसकी महिमा के योग्य नहीं हैं। केवल उसी की बादशाहत है, इसलिए उसके सिवा कोई दूसरा बादशाह नहीं है, और उसी के लिए अच्छी प्रशंसा है, तथा वह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है, कोई चीज़ उसे विवश नहीं कर सकती।
आयत 2
هُوَ ٱلَّذِى خَلَقَكُمْ فَمِنكُمْ كَافِرٌۭ وَمِنكُم مُّؤْمِنٌۭ ۚ وَٱللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرٌ
هُوَ
वो ही है
ٱلَّذِى
जिसने
خَلَقَكُمْ
पैदा किया तुम्हें
فَمِنكُمْ
तो तुम में से
كَافِرٌۭ
कोई काफ़िर है
وَمِنكُم
और तुम में से
مُّؤْمِنٌۭ ۚ
कोई मोमिन है
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
بِمَا
उसे जो
تَعْمَلُونَ
तुम अमल करते हो
بَصِيرٌ
ख़ूब देखने वाला है
वही है जिसने तुम्हें पैदा किया, फिर तुममें से कोई तो इनकार करनेवाला है और तुममें से कोई ईमानवाला है, और तुम जो कुछ भी करते हो अल्लाह उसे देख रहा होता है
तफ़्सीर:
वही है, जिसने (ऐ लोगो!) तुम्हें पैदा किया। फिर तुममें से कोई उसके साथ कुफ़्र करने वाला है और उसका ठिकाना जहन्नम है, तथा तुममें से कोई उसपर ईमान रखने वाला है और उसका ठिकाना जन्नत है। और तुम जो कुछ भी करते हो, अल्लाह उसे खूब जानने वाला है, उससे तुम्हारा कोई काम छिपा नहीं है और वह तुम्हें उसका बदला देगा।
आयत 3
خَلَقَ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ بِٱلْحَقِّ وَصَوَّرَكُمْ فَأَحْسَنَ صُوَرَكُمْ ۖ وَإِلَيْهِ ٱلْمَصِيرُ
خَلَقَ
उसने पैदा किया
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों
وَٱلْأَرْضَ
और ज़मीन को
بِٱلْحَقِّ
साथ हक़ के
وَصَوَّرَكُمْ
और उसने सूरत बनाई तुम्हारी
فَأَحْسَنَ
तो उसने अच्छी बनाईं
صُوَرَكُمْ ۖ
सूरतें तुम्हारी
وَإِلَيْهِ
और तरफ़ उसी के
ٱلْمَصِيرُ
लौटना है
उसने आकाशों और धरती को हक़ के साथ पैदा किया और तुम्हारा रूप बनाया, तो बहुत ही अच्छे बनाए तुम्हारे रूप और उसी की ओर अन्ततः जाना है
तफ़्सीर:
उसने आकाशों और धरती को सत्य के साथ पैदा किया, उन्हें व्यर्थ नहीं बनाया। तथा उसने (ऐ लोगो!) तुम्हारे रूप बनाए, तो अपने उपकार और अनुग्रह से तुम्हारे रूप अच्छे बनाए। हालाँकि, यदि वह चाहता, तो उन्हें बदसूरत बना देता। और क़ियामत के दिन केवल उसी की ओर लौटकर जाना है। फिर वह तुम्हें तुम्हारे कर्मों का बदला देगा। यदि अच्छा काम है, तो अच्छा बदला और यदि बुरा है, तो बुरा।
आयत 4
يَعْلَمُ مَا فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَيَعْلَمُ مَا تُسِرُّونَ وَمَا تُعْلِنُونَ ۚ وَٱللَّهُ عَلِيمٌۢ بِذَاتِ ٱلصُّدُورِ
يَعْلَمُ
वो जानता है
مَا
जो कुछ
فِى
(is) in
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों में है
وَٱلْأَرْضِ
और ज़मीन में
وَيَعْلَمُ
और वो जानता है
مَا
जो कुछ
تُسِرُّونَ
तुम छुपाते हो
وَمَا
और जो कुछ
تُعْلِنُونَ ۚ
तुम ज़ाहिर करते हो
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
عَلِيمٌۢ
ख़ूब जानने वाला है
بِذَاتِ
of what
ٱلصُّدُورِ
सीनों वाले (भेद)
वह जानता है जो कुछ आकाशों और धरती में है और उसे भी जानता है जो कुछ तुम छिपाते हो और जो कुछ तुम प्रकट करते हो। अल्लाह तो सीनों में छिपी बात तक को जानता है
तफ़्सीर:
वह जानता है जो कुछ आकाशों में है और वह जानता है जो कुछ धरती में है, तथा वह जानता है जो काम तुम छिपाकर करते और वह जानता है जो काम तुम खुल्लम-खुल्ला करते हो। और अल्लाह दिलों के अंदर छिपी भलाई या बुराई को भी जानता है, उससे कुछ भी छिपा नहीं है।
आयत 5
أَلَمْ يَأْتِكُمْ نَبَؤُا۟ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ مِن قَبْلُ فَذَاقُوا۟ وَبَالَ أَمْرِهِمْ وَلَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌۭ
أَلَمْ
क्या नहीं
يَأْتِكُمْ
आई तुम्हारे पास
نَبَؤُا۟
ख़बर
ٱلَّذِينَ
उनकी जिन्होंने
كَفَرُوا۟
कुफ़्र किया
مِن
from
قَبْلُ
इससे पहले
فَذَاقُوا۟
फिर उन्होंने चखा
وَبَالَ
वबाल
أَمْرِهِمْ
अपने काम का
وَلَهُمْ
और उनके लिए है
عَذَابٌ
अज़ाब
أَلِيمٌۭ
दर्दनाक
क्या तुम्हें उन लोगों की ख़बर नहीं पहुँची जिन्होंने इससे पहले इनकार किया था, फिर उन्होंने अपने कर्म के वबाल का मज़ा चखा और उनके लिए एक दुखद यातना भी है
तफ़्सीर:
क्या तुम्हारे पास (ऐ मुश्रिको) पिछली झुठलाने वाली जातियों, जैसे नूह अलैहिस्सलाम की जाति तथा आद और समूद इत्यादि की खबर नहीं पहुँची है, जिन्होंने इस दुनिया में अपने कुफ़्र की सज़ा का स्वाद चखा और आख़िरत में उनके लिए एक दर्दनाक यातना है?! क्यों नहीं, तुम्हारे पास उनकी खबर आ चुकी है। अतः उनके परिणाम से नसीहत प्राप्त करो और अल्लाह के सामने तौबा कर लो, इससे पहले कि तुम्हारे साथ भी वही कुछ हो, जो उनके साथ हुआ था।
आयत 6
ذَٰلِكَ بِأَنَّهُۥ كَانَت تَّأْتِيهِمْ رُسُلُهُم بِٱلْبَيِّنَـٰتِ فَقَالُوٓا۟ أَبَشَرٌۭ يَهْدُونَنَا فَكَفَرُوا۟ وَتَوَلَّوا۟ ۚ وَّٱسْتَغْنَى ٱللَّهُ ۚ وَٱللَّهُ غَنِىٌّ حَمِيدٌۭ
ذَٰلِكَ
ये
بِأَنَّهُۥ
बवजह उसके कि वो
كَانَت
थे
تَّأْتِيهِمْ
आते उनके पास
رُسُلُهُم
रसूल उनके
بِٱلْبَيِّنَـٰتِ
साथ वाज़ेह आयात के
فَقَالُوٓا۟
तो वो कहते
أَبَشَرٌۭ
क्या इन्सान
يَهْدُونَنَا
रहनुमाई करेंगे हमारी
فَكَفَرُوا۟
तो उन्होंने कुफ़्र किया
وَتَوَلَّوا۟ ۚ
और वो मुँह मोड़ गए
وَّٱسْتَغْنَى
और परवाह ना की
ٱللَّهُ ۚ
अल्लाह ने
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
غَنِىٌّ
बहुत बेनियाज़ है
حَمِيدٌۭ
ख़ूब तारीफ़ वाला है
यह इस कारण कि उनके पास उनके रसूल स्पष्ट प्रमाण लेकर आते रहे, किन्तु उन्होंने कहा, "क्या मनुष्य हमें मार्ग दिखाएँगे?" इस प्रकार उन्होंने इनकार किया और मुँह फेर लिया, तब अल्लाह भी उनसे बेपरवाह हो गया। अल्लाह तो है ही निस्पृह, अपने आप में स्वयं प्रशंसित
तफ़्सीर:
यह यातना उन्हें इस कारण पहुँची कि उनके रसूल उनके पास अल्लाह की ओर से स्पष्ट प्रमाणों और प्रत्यक्ष तर्कों के साथ आते थे, तो उन्होंने रसूल के मानव जाति से होने का खंडन करते हुए कहा : क्या मनुष्य हमें सत्य का मार्गदर्शन करेंगे?!इस तरह उन्होंने इनकार किया और उनपर ईमान लाने से उपेक्षा किया। लेकिन उन्होंने अल्लाह को कोई नुकसान नहीं पहुँचाया। और अल्लाह ने उनके ईमान और आज्ञाकारिता की परवाह न की, क्योंकि उनकी आज्ञाकारिता उसे किसी चीज़ में बढ़ाती नहीं है। और अल्लाह बेनियाज़ है, अपने बंदों का ज़रूरतमंद नहीं है, अपनी बातों और कार्यों में प्रशंसनीय है।
आयत 7
زَعَمَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوٓا۟ أَن لَّن يُبْعَثُوا۟ ۚ قُلْ بَلَىٰ وَرَبِّى لَتُبْعَثُنَّ ثُمَّ لَتُنَبَّؤُنَّ بِمَا عَمِلْتُمْ ۚ وَذَٰلِكَ عَلَى ٱللَّهِ يَسِيرٌۭ
زَعَمَ
दावा किया
ٱلَّذِينَ
उन लोगों ने जिन्होंने
كَفَرُوٓا۟
कुफ़्र किया
أَن
कि
لَّن
हरगिज़ नहीं
يُبْعَثُوا۟ ۚ
वो उठाए जाऐंगे
قُلْ
कह दीजिए
بَلَىٰ
क्यों नहीं
وَرَبِّى
क़सम है मेरे रब की
لَتُبْعَثُنَّ
अलबत्ता तुम ज़रूर उठाए जाओगे
ثُمَّ
फिर
لَتُنَبَّؤُنَّ
अलबत्ता तुम ज़रूर ख़बर दिए जाओगे
بِمَا
उसकी जो
عَمِلْتُمْ ۚ
अमल किए तुमने
وَذَٰلِكَ
और ये
عَلَى
for
ٱللَّهِ
अल्लाह पर
يَسِيرٌۭ
बहुत आसान है
जिन लोगों ने इनकार किया उन्होंने दावा किया वे मरने के पश्चात कदापि न उठाए जाएँगे। कह दो, "क्यों नहीं, मेरे रब की क़सम! तुम अवश्य उठाए जाओगे, फिर जो कुछ तुमने किया है उससे तुम्हें अवगत करा दिया जाएगा। और अल्लाह के लिए यह अत्यन्त सरल है।"
तफ़्सीर:
अल्लाह का इनकार करने वालों ने समझ रखा है कि अल्लाह उनकी मृत्यु के बाद उन्हें जीवित करके नहीं उठाएगा। (ऐ रसूल) आप इन पुनर्जीवन का इनकार करने वालों से कह दें : क्यों नहीं, मेरे पालनहार की क़सम, निश्चय तुम क़ियामत के दिन ज़रूर उठाए जाओगे। फिर निश्चय तुम दुनिया में किए हुए कर्मो से अवगत कराए जाओगे। और यह पुनर्जीवित करके उठाना अल्लाह के लिए आसान है। क्योंकि उसने तुम्हें पहली बार पैदा किया है, अतः वह मौत के बाद तुम्हें हिसाब और बदले के लिए पुनः जीवित करके उठाने की भी शक्ति रखता है।
आयत 8
فَـَٔامِنُوا۟ بِٱللَّهِ وَرَسُولِهِۦ وَٱلنُّورِ ٱلَّذِىٓ أَنزَلْنَا ۚ وَٱللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ خَبِيرٌۭ
فَـَٔامِنُوا۟
पस ईमान लाओ
بِٱللَّهِ
अल्लाह पर
وَرَسُولِهِۦ
और उसके रसूल पर
وَٱلنُّورِ
और उस नूर पर
ٱلَّذِىٓ
वो जो
أَنزَلْنَا ۚ
नाज़िल किया हमने
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
بِمَا
उसकी जो
تَعْمَلُونَ
तुम अमल करते हो
خَبِيرٌۭ
ख़ूब ख़बर रखने वाला है
अतः ईमान लाओ, अल्लाह पर और उसके रसूल पर और उस प्रकाश पर जिसे हमने अवतरित किया है। तुम जो कुछ भी करते हो अल्लाह उसकी पूरी ख़बर रखता है
तफ़्सीर:
तो तुम (ऐ लोगो) अल्लाह पर ईमान ले आओ और उसके रसूल पर ईमान ले आओ, और उस क़ुरआन पर ईमान ले आओ जिसे हमने अपने रसूल पर उतारा है। और अल्लाह तुम्हारे कार्यों से अवगत है। उससे तुम्हारा कोई काम छिपा नहीं है। और वह तुम्हें तुम्हारे कर्मों का बदला देगा।
आयत 9
يَوْمَ يَجْمَعُكُمْ لِيَوْمِ ٱلْجَمْعِ ۖ ذَٰلِكَ يَوْمُ ٱلتَّغَابُنِ ۗ وَمَن يُؤْمِنۢ بِٱللَّهِ وَيَعْمَلْ صَـٰلِحًۭا يُكَفِّرْ عَنْهُ سَيِّـَٔاتِهِۦ وَيُدْخِلْهُ جَنَّـٰتٍۢ تَجْرِى مِن تَحْتِهَا ٱلْأَنْهَـٰرُ خَـٰلِدِينَ فِيهَآ أَبَدًۭا ۚ ذَٰلِكَ ٱلْفَوْزُ ٱلْعَظِيمُ
يَوْمَ
जिस दिन
يَجْمَعُكُمْ
वो जमा करेगा तुम्हें
لِيَوْمِ
for (the) Day
ٱلْجَمْعِ ۖ
जमा होने के दिन के लिए
ذَٰلِكَ
ये
يَوْمُ
दिन होगा
ٱلتَّغَابُنِ ۗ
हार जीत का
وَمَن
और जो कोई
يُؤْمِنۢ
ईमान लाएगा
بِٱللَّهِ
अल्लाह पर
وَيَعْمَلْ
और वो अमल करेगा
صَـٰلِحًۭا
नेक
يُكَفِّرْ
वो दूर कर देगा
عَنْهُ
उससे
سَيِّـَٔاتِهِۦ
बुराइयाँ उसकी
وَيُدْخِلْهُ
और वो दाख़िल करेगा उसे
جَنَّـٰتٍۢ
बाग़ात में
تَجْرِى
बहती हैं
مِن
from
تَحْتِهَا
उनके नीचे से
ٱلْأَنْهَـٰرُ
नहरें
خَـٰلِدِينَ
हमेशा रहने वाले हैं
فِيهَآ
उनमें
أَبَدًۭا ۚ
हमेशा-हमेशा
ذَٰلِكَ
यही
ٱلْفَوْزُ
कामयाबी है
ٱلْعَظِيمُ
बहुत बड़ी
इकट्ठा होने के दिन वह तुम्हें इकट्ठा करेगा, वह परस्पर लाभ-हानि का दिन होगा। जो भी अल्लाह पर ईमान लाए और अच्छा कर्म करे उसकी बुराईयाँ अल्लाह उससे दूर कर देगा और उसे ऐसे बाग़ों में दाख़िल करेगा जिनके नीचे नहरें बह रही होंगी, उनमें वे सदैव रहेंगे। यही बड़ी सफलता है
तफ़्सीर:
और (ऐ रसूल!) उस दिन को याद करें, जिस दिन अल्लाह तुम्हें क़ियामत के दिन एकत्रित करेगा, ताकि तुम्हें तुम्हारे कर्मों का बदला दे। जिस दिन काफ़िरों की हानि और उनका घाटा सामने आ जाएगा। क्योंकि ईमान वाले जन्नत के अंदर जहन्नमियों के घरों के वारिस बनेंगे, और जहन्नमी जहन्नम के अंदर जन्नतियों के ठिकानों के वारिस होंगे। और जो अल्लाह पर ईमान लाएगा और अच्छे कार्य करेगा, अल्लाह उसकी बुराइयों को मिटा देगा और ऐसी जन्नतों में दाख़िल करेगा, जिनके महलों और पेड़ों के नीचे से नहरें बह रही होंगी। वे वहाँ हमेशा रहेंगे। न वे कभी वहाँ से निकलेंगे और न कभी उनसे उसकी नेमतें बाधित होंगी। यह जो उन्होंने प्राप्त किया, वही महान सफलता है, जिसकी बराबरी कोई अन्य सफलता नहीं कर सकती।
आयत 10
وَٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ وَكَذَّبُوا۟ بِـَٔايَـٰتِنَآ أُو۟لَـٰٓئِكَ أَصْحَـٰبُ ٱلنَّارِ خَـٰلِدِينَ فِيهَا ۖ وَبِئْسَ ٱلْمَصِيرُ
وَٱلَّذِينَ
और वो जिन्होंने
كَفَرُوا۟
कुफ़्र किया
وَكَذَّبُوا۟
और झुठलाया
بِـَٔايَـٰتِنَآ
हमारी आयात को
أُو۟لَـٰٓئِكَ
यही लोग हैं
أَصْحَـٰبُ
साथी
ٱلنَّارِ
आग के
خَـٰلِدِينَ
हमेशा रहने वाले हैं
فِيهَا ۖ
उसमें
وَبِئْسَ
और कितनी बुरी है
ٱلْمَصِيرُ
लौटने की जगह
रहे वे लोग जिन्होंने इनकार किया और हमारी आयतों को झुठलाया, वही आगवाले है जिसमें वे सदैव रहेंगे। अन्ततः लौटकर पहुँचने की वह बहुत ही बुरी जगह है
तफ़्सीर:
और जिन लोगों ने अल्लाह का इनकार किया और हमारी उन आयतों को झुठलाया, जिन्हें हमने अपने रसूल पर उतारा है, वही लोग जहन्नमी हैं, जो उसमें हमेशा रहने वाले हैं। और उनका ठिकाना बहुत बुरा ठिकाना है।
आज की ज़िंदगी में सबक़
तौहीद और कयामत के यकीन का ज़िक्र है। यह हमें सिखाता है कि हर चीज़ अल्लाह की तस्बीह करती है, इंसान को भी अपनी ज़िम्मेदारी समझनी चाहिए।
आयत 11
مَآ أَصَابَ مِن مُّصِيبَةٍ إِلَّا بِإِذْنِ ٱللَّهِ ۗ وَمَن يُؤْمِنۢ بِٱللَّهِ يَهْدِ قَلْبَهُۥ ۚ وَٱللَّهُ بِكُلِّ شَىْءٍ عَلِيمٌۭ
مَآ
नहीं
أَصَابَ
पहुँचती
مِن
any
مُّصِيبَةٍ
कोई मुसीबत
إِلَّا
मगर
بِإِذْنِ
by (the) permission
ٱللَّهِ ۗ
अल्लाह के इज़्न से
وَمَن
और जो कोई
يُؤْمِنۢ
ईमान लाता है
بِٱللَّهِ
अल्लाह पर
يَهْدِ
वो हिदायत देता है
قَلْبَهُۥ ۚ
उसके दिल को
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
بِكُلِّ
हर
شَىْءٍ
चीज़ क
عَلِيمٌۭ
ख़ूब जानने वाला है
अल्लाह की अनुज्ञा के बिना कोई भी मुसीबत नहीं आती। जो अल्लाह पर ईमान ले आए अल्लाह उसके दिल को मार्ग दिखाता है, और अल्लाह हर चीज को भली-भाँति जानता है
तफ़्सीर:
किसी को उसकी जान, या उसके धन, या उसकी संतान में जो भी विपत्ति पहुँचती है, वह अल्लाह के निर्णय और उसकी नियति के अनुसार होती है। और जो अल्लाह, उसके निर्णय और उसकी नियति पर ईमान लाएगा, अल्लाह उसके दिल को अपने आदेश के आगे समर्पण करने तथा अपने निर्णय से संतुष्ट होने की तौफ़ीक़ प्रदान करेगा। और अल्लाह हर वस्तु को भली-भाँति जानता है। उससे कुछ भी छिपा नहीं है।
आयत 12
وَأَطِيعُوا۟ ٱللَّهَ وَأَطِيعُوا۟ ٱلرَّسُولَ ۚ فَإِن تَوَلَّيْتُمْ فَإِنَّمَا عَلَىٰ رَسُولِنَا ٱلْبَلَـٰغُ ٱلْمُبِينُ
وَأَطِيعُوا۟
और इताअत करो
ٱللَّهَ
अल्लाह की
وَأَطِيعُوا۟
और इताअत करो
ٱلرَّسُولَ ۚ
रसूल की
فَإِن
फिर अगर
تَوَلَّيْتُمْ
मुँह मोड़ते हो तुम
فَإِنَّمَا
तो बेशक
عَلَىٰ
upon
رَسُولِنَا
ऊपर हमारे रसूल के
ٱلْبَلَـٰغُ
पहुँचा देना है
ٱلْمُبِينُ
खुल्लम-खुल्ला
अल्लाह की आज्ञा का पालन करो और रसूल की आज्ञा का पालन करो, किन्तु यदि तुम मुँह मोड़ते हो तो हमारे रसूल पर बस स्पष्ट रूप से (संदेश) पहुँचा देने की ज़िम्मेदारी है
तफ़्सीर:
तथा अल्लाह का आज्ञापालन करो और रसूल का आज्ञापालन करो। फिर यदि तुम उसके रसूल के लाए हुए संदेश से मुँह फेर लो, तो इस विमुखता का पाप तुम पर होगा। और हमारे रसूल का दायित्व केवल उस संदेश को पहुँचा देना है, जिसे पहुँचाने का हमने उन्हें आदेश दिया गया है। और उन्होंने वह संदेश तुम्हें पहुँचा भी दिया है, जिसे पहुँचाने का उन्हें आदेश दिया गया था।
आयत 13
ٱللَّهُ لَآ إِلَـٰهَ إِلَّا هُوَ ۚ وَعَلَى ٱللَّهِ فَلْيَتَوَكَّلِ ٱلْمُؤْمِنُونَ
ٱللَّهُ
अल्लाह
لَآ
नहीं
إِلَـٰهَ
कोई इलाह(बरहक़ )
إِلَّا
मगर
هُوَ ۚ
वो ही
وَعَلَى
And upon
ٱللَّهِ
और अल्लाह ही पर
فَلْيَتَوَكَّلِ
पस चाहिए कि तवक्कुल करें
ٱلْمُؤْمِنُونَ
मोमिन
अल्लाह वह है जिसके सिवा कोई पूज्य-प्रभु नहीं। अतः अल्लाह ही पर ईमानवालों को भरोसा करना चाहिए
तफ़्सीर:
अल्लाह ही सत्य पूज्य है। उसके सिवा कोई सत्य पूज्य (सच्चा माबूद) नहीं। और केवल अल्लाह ही पर, ईमान वालों को अपने सभी मामलों में भरोसा करना चाहिए।
आयत 14
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ إِنَّ مِنْ أَزْوَٰجِكُمْ وَأَوْلَـٰدِكُمْ عَدُوًّۭا لَّكُمْ فَٱحْذَرُوهُمْ ۚ وَإِن تَعْفُوا۟ وَتَصْفَحُوا۟ وَتَغْفِرُوا۟ فَإِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٌۭ رَّحِيمٌ
يَـٰٓأَيُّهَا
O
ٱلَّذِينَ
ऐ लोगो जो
ءَامَنُوٓا۟
ईमान लाए हो
إِنَّ
बेशक
مِنْ
from
أَزْوَٰجِكُمْ
तुम्हारी बीवियों में से
وَأَوْلَـٰدِكُمْ
और तुम्हारी औलाद में से
عَدُوًّۭا
दुश्मन हैं
لَّكُمْ
तुम्हारे
فَٱحْذَرُوهُمْ ۚ
पस मोहतात रहो उनसे
وَإِن
और अगर
تَعْفُوا۟
तुम माफ़ कर दो
وَتَصْفَحُوا۟
और तुम दरगुज़र करो
وَتَغْفِرُوا۟
और तुम बख़्श दो
فَإِنَّ
तो बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
غَفُورٌۭ
बहुत बख़्शने वाला है
رَّحِيمٌ
निहायत रहम करने वाला है
ऐ ईमान लानेवालो, तुम्हारी पत्नियों और तुम्हारी सन्तान में से कुछ ऐसे भी है जो तुम्हारे शत्रु है। अतः उनसे होशियार रहो। और यदि तुम माफ़ कर दो और टाल जाओ और क्षमा कर दो निश्चय ही अल्लाह बड़ा क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है
तफ़्सीर:
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने वालो और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! निश्चय तुम्हारी पत्नियों और तुम्हारी संतान में से कुछ तुम्हारे दुश्मन हैं; क्योंकि वे तुम्हें अल्लाह के ज़िक्र और उसके मार्ग में जिहाद से गाफ़िल कर देते हैं और तुम्हें हतोत्साहित करते हैं। अतः सावधान रहो कि कहीं वे तुम्हें प्रभावित न कर दें। और यदि तुम उनकी गलतियों को माफ़ कर दो, उन्हें नज़रअंदाज़ कर दो और उनपर पर्दा डाल दो, तो अल्लाह तुम्हारे पापों को क्षमा कर देगा और तुम पर दया करेगा। और जैसा काम होता है, वैसा ही फल मिलता है।
आयत 15
إِنَّمَآ أَمْوَٰلُكُمْ وَأَوْلَـٰدُكُمْ فِتْنَةٌۭ ۚ وَٱللَّهُ عِندَهُۥٓ أَجْرٌ عَظِيمٌۭ
إِنَّمَآ
बेशक
أَمْوَٰلُكُمْ
माल तुम्हारे
وَأَوْلَـٰدُكُمْ
और औलाद तुम्हारी
فِتْنَةٌۭ ۚ
आज़माइश हैं
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
عِندَهُۥٓ
उसी के पास
أَجْرٌ
अजर है
عَظِيمٌۭ
बहुत बड़ा
तुम्हारे माल और तुम्हारी सन्तान तो केवल एक आज़माइश है, और अल्लाह ही है जिसके पास बड़ा प्रतिदान है
तफ़्सीर:
निश्चय तुम्हारे धन तथा तुम्हारी संतान तुम्हारे लिए परीक्षा और आज़माइश हैं। क्योंकि वे तुम्हें हराम कमाई करने और अल्लाह के आज्ञापालन को छोड़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। और अल्लाह के पास उसके लिए एक महान प्रतिफल है, जो संतान की आज्ञाकारिता पर तथा धन में व्यस्तता पर अल्लाह की आज्ञाकारिता को प्राथमिकता दे।और वह बड़ा प्रतिफल जन्नत है।
आयत 16
فَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ مَا ٱسْتَطَعْتُمْ وَٱسْمَعُوا۟ وَأَطِيعُوا۟ وَأَنفِقُوا۟ خَيْرًۭا لِّأَنفُسِكُمْ ۗ وَمَن يُوقَ شُحَّ نَفْسِهِۦ فَأُو۟لَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلْمُفْلِحُونَ
فَٱتَّقُوا۟
पस डरो
ٱللَّهَ
अल्लाह से
مَا
जितनी
ٱسْتَطَعْتُمْ
इस्तिताअत रखते हो तुम
وَٱسْمَعُوا۟
और सुनो
وَأَطِيعُوا۟
और इताअत करो
وَأَنفِقُوا۟
और ख़र्च करो
خَيْرًۭا
बेहतर है
لِّأَنفُسِكُمْ ۗ
तुम्हारे नफ़्सों के लिए
وَمَن
और जो कोई
يُوقَ
बचा लिया गया
شُحَّ
बख़ीली से
نَفْسِهِۦ
अपने नफ़्स की
فَأُو۟لَـٰٓئِكَ
तो यही लोग हैं
هُمُ
वो
ٱلْمُفْلِحُونَ
जो फ़लाह पाने वाले हैं
अतः जहाँ तक तुम्हारे बस में हो अल्लाह का डर रखो और सुनो और आज्ञापालन करो और ख़र्च करो अपनी भलाई के लिए। और जो अपने मन के लोभ एवं कृपणता से सुरक्षित रहा तो ऐसे ही लोग सफल है
तफ़्सीर:
अतः अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसकी मना की हुई बातों से बचकर, डरते रहो, जितना तुम उसका आज्ञापालन करने में सक्षम हो। तथा अल्लाह एवं उसके रसूल की बात सुनो और उनका पालन करो और अल्लाह के दिए हुए धन को भलाई के रास्तों में खर्च करो। और जिसे अल्लाह उसके दिल की लालच (कंजूसी) से सुरक्षित रखे, दरअसल वही लोग अपनी मनोकांक्षा की पूर्ति में सफल होने वाले और उस चीज़ से मुक्ति पाने वाले हैं, जिससे वे डरते हैं।
आयत 17
إِن تُقْرِضُوا۟ ٱللَّهَ قَرْضًا حَسَنًۭا يُضَـٰعِفْهُ لَكُمْ وَيَغْفِرْ لَكُمْ ۚ وَٱللَّهُ شَكُورٌ حَلِيمٌ
إِن
अगर
تُقْرِضُوا۟
तुम क़र्ज़ दोगे
ٱللَّهَ
अल्लाह को
قَرْضًا
क़र्ज़
حَسَنًۭا
अच्छा
يُضَـٰعِفْهُ
वो कई गुना कर देगा उसे
لَكُمْ
तुम्हारे लिए
وَيَغْفِرْ
और वो बख़्श देगा
لَكُمْ ۚ
तुम्हें
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
شَكُورٌ
बहुत क़द्रदान है
حَلِيمٌ
निहायत बुर्दबार है
यदि तुम अल्लाह को अच्छा ऋण दो तो वह उसे तुम्हारे लिए कई गुना बढ़ा देगा और तुम्हें क्षमा कर देगा। अल्लाह बड़ा गुणग्राहक और सहनशील है,
तफ़्सीर:
अगर तुम अल्लाह को अच्छा ऋण दोगे, इस प्रकार कि उसके रास्ते में अपना धन खर्च करोगे, तो वह एक नेकी को दस से सात सौ गुना, बल्कि बहुत अधिक गुना करके तुम्हारे प्रतिफल को बढ़ा देगा और तुम्हारे पापों को क्षमा कर देगा। अल्लाह बहुत गुणग्राही है, वह थोड़े से काम के लिए बहुत अधिक प्रतिफल देता है। अत्यंत सहनशील है, सज़ा देने में जल्दी नहीं करता।
आयत 18
عَـٰلِمُ ٱلْغَيْبِ وَٱلشَّهَـٰدَةِ ٱلْعَزِيزُ ٱلْحَكِيمُ
عَـٰلِمُ
जानने वाला है
ٱلْغَيْبِ
ग़ैब
وَٱلشَّهَـٰدَةِ
और हाज़िर को
ٱلْعَزِيزُ
बहुत ज़बरदस्त है
ٱلْحَكِيمُ
ख़ूब हिकमत वाला है
परोक्ष और प्रत्यक्ष को जानता है, प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है
तफ़्सीर:
अलाह महिमावान गायब (अनुपस्थित) और हाज़िर (मौजूद) सभी चीज़ों को जानता है। उनमें से कोई चीज़ भी उससे छिपी नहीं है। वह प्रभुत्वशाली है, जिसे कोई पराजित नहीं कर सकता। वह अपनी रचना, विधान और तक़दीर (निर्णय) में हिकमत वाला है।
आज की ज़िंदगी में सबक़
माल-औलाद की आज़माइश और अल्लाह की राह में खर्च की ताकीद के साथ सूरह का इख्तिताम होता है। यह सबक हमें सिखाता है कि माल-औलाद एक आज़माइश है, इसमें उलझकर अल्लाह की याद से गफलत नहीं करनी चाहिए।
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