नाम का मतलब
तलाक (तलाक के अहकाम के तफ्सीली बयान से)
पृष्ठभूमि
सूरह अत-तलाक़ में तलाक और इद्दत के अहकाम तफ्सील से बयान किए गए हैं, साथ ही अल्लाह पर तवक्कुल रखने वालों को रिज़्क की ज़मानत का वादा भी है।
फ़ज़ीलत / सार
इसी सूरह में यह मशहूर वादा है कि जो अल्लाह से डरता है, अल्लाह उसके लिए मुश्किल से निकलने का रास्ता बना देता है और उसे ऐसी जगह से रोज़ी देता है जहां से उसे गुमान भी न हो।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
आयत 1
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلنَّبِىُّ إِذَا طَلَّقْتُمُ ٱلنِّسَآءَ فَطَلِّقُوهُنَّ لِعِدَّتِهِنَّ وَأَحْصُوا۟ ٱلْعِدَّةَ ۖ وَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ رَبَّكُمْ ۖ لَا تُخْرِجُوهُنَّ مِنۢ بُيُوتِهِنَّ وَلَا يَخْرُجْنَ إِلَّآ أَن يَأْتِينَ بِفَـٰحِشَةٍۢ مُّبَيِّنَةٍۢ ۚ وَتِلْكَ حُدُودُ ٱللَّهِ ۚ وَمَن يَتَعَدَّ حُدُودَ ٱللَّهِ فَقَدْ ظَلَمَ نَفْسَهُۥ ۚ لَا تَدْرِى لَعَلَّ ٱللَّهَ يُحْدِثُ بَعْدَ ذَٰلِكَ أَمْرًۭا
يَـٰٓأَيُّهَا
ऐ
ٱلنَّبِىُّ
नबी
إِذَا
जब
طَلَّقْتُمُ
तलाक़ दो तुम
ٱلنِّسَآءَ
औरतों को
فَطَلِّقُوهُنَّ
तो तलाक़ दो उन्हें
لِعِدَّتِهِنَّ
उनकी इद्दत के लिए
وَأَحْصُوا۟
और शुमार करो
ٱلْعِدَّةَ ۖ
इद्दत को
وَٱتَّقُوا۟
और डरो
ٱللَّهَ
अल्लाह से
رَبَّكُمْ ۖ
जो रब है तुम्हारा
لَا
(Do) not
تُخْرِجُوهُنَّ
ना तुम निकालो उन्हें
مِنۢ
from
بُيُوتِهِنَّ
उनके घरों से
وَلَا
और ना
يَخْرُجْنَ
वो निकलें
إِلَّآ
मगर
أَن
ये कि
يَأْتِينَ
वो आऐं
بِفَـٰحِشَةٍۢ
बेहयाई को
مُّبَيِّنَةٍۢ ۚ
खुली
وَتِلْكَ
और ये
حُدُودُ
हुदूद हैं
ٱللَّهِ ۚ
अल्लाह की
وَمَن
और जो कोई
يَتَعَدَّ
तजावुज़ करेगा
حُدُودَ
हुदूद से
ٱللَّهِ
अल्लाह की
فَقَدْ
तो तहक़ीक़
ظَلَمَ
उसने ज़ुल्म किया
نَفْسَهُۥ ۚ
अपनी जान पर
لَا
Not
تَدْرِى
नहीं तुम जानते
لَعَلَّ
शायद कि
ٱللَّهَ
अल्लाह
يُحْدِثُ
वो पैदा कर दे
بَعْدَ
बाद
ذَٰلِكَ
उसके
أَمْرًۭا
कोई सूरत
ऐ नबी! जब तुम लोग स्त्रियों को तलाक़ दो तो उन्हें तलाक़ उनकी इद्दत के हिसाब से दो। और इद्दत की गणना करो और अल्लाह का डर रखो, जो तुम्हारा रब है। उन्हें उनके घरों से न निकालो और न वे स्वयं निकलें, सिवाय इसके कि वे कोई स्पष्ट। अशोभनीय कर्म कर बैठें। ये अल्लाह की नियत की हुई सीमाएँ है - और जो अल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन करे तो उसने स्वयं अपने आप पर ज़ुल्म किया - तुम नहीं जानते, कदाचित इस (तलाक़) के पश्चात अल्लाह कोई सूरत पैदा कर दे
तफ़्सीर:
ऐ नबी! जब आप या आपकी उम्मत का कोई व्यक्ति अपनी पत्नी को तलाक़ देना चाहे, तो उसे उसकी इद्दत के आरंभ में तलाक़ दे; इस प्रकार कि वह तलाक़ ऐसी पवित्रता की अवधि में हो जिसके दौरान उसने उसके साथ संभोग नहीं किया है। और इद्दत की गणना करते रहो, ताकि यदि तुम अपनी पत्नियों को लौटाना चाहो, तो उसके अंदर उन्हें लौटा सको। और अपने पालनहार अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसकी मना की हुई बातों से बचकर, डरते रहो। इद्दत पूरी होने से पहले, अपनी तलाक़ दी हुई स्त्रियों को उन घरों से न निकालो, जिनमें वे रह रही हों, और न वे स्वंय निकलें। सिवाय इसके कि वे स्पष्ट अश्लीलता जैसे व्यभिचार में पड़ जाएँ। ये अहकाम (नियम) अल्लाह की सीमाएँ हैं, जो उसने अपने बंदों के लिए निर्धारित की हैं। और जो अल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन करे, तो निश्चय उसने अपने आप पर अत्याचार किया। क्योंकि उसने अपने पालनहार की अवज्ञा करके खुद को विनाश में डाल दिया। और (ऐ तलाक़ देने वाले!) तुम नहीं जानते कि शायद अल्लाह उस तलाक़ के बाद कुछ ऐसा कर दे जिसकी तुम आशा नहीं करते हो, फिर तुम अपनी पत्नी को लौटा लो।
आयत 2
فَإِذَا بَلَغْنَ أَجَلَهُنَّ فَأَمْسِكُوهُنَّ بِمَعْرُوفٍ أَوْ فَارِقُوهُنَّ بِمَعْرُوفٍۢ وَأَشْهِدُوا۟ ذَوَىْ عَدْلٍۢ مِّنكُمْ وَأَقِيمُوا۟ ٱلشَّهَـٰدَةَ لِلَّهِ ۚ ذَٰلِكُمْ يُوعَظُ بِهِۦ مَن كَانَ يُؤْمِنُ بِٱللَّهِ وَٱلْيَوْمِ ٱلْـَٔاخِرِ ۚ وَمَن يَتَّقِ ٱللَّهَ يَجْعَل لَّهُۥ مَخْرَجًۭا
فَإِذَا
फिर जब
بَلَغْنَ
वो पहुँचें
أَجَلَهُنَّ
अपना मुद्दत को
فَأَمْسِكُوهُنَّ
तो रोक लो उन्हें
بِمَعْرُوفٍ
भले तरीक़े से
أَوْ
या
فَارِقُوهُنَّ
जुदा कर दो उन्हें
بِمَعْرُوفٍۢ
भले तरीक़े से
وَأَشْهِدُوا۟
और गवाह बना लो
ذَوَىْ
two men
عَدْلٍۢ
दो अदल वालों को
مِّنكُمْ
तुम में से
وَأَقِيمُوا۟
और क़ायम करो
ٱلشَّهَـٰدَةَ
गवाही
لِلَّهِ ۚ
अल्लाह के लिए
ذَٰلِكُمْ
ये (है हुक्म)
يُوعَظُ
नसीहत की जाती है
بِهِۦ
जिसकी
مَن
उसे जो
كَانَ
हो वो
يُؤْمِنُ
वो ईमान रखता
بِٱللَّهِ
अल्लाह पर
وَٱلْيَوْمِ
and the Day
ٱلْـَٔاخِرِ ۚ
और आख़िरी दिन पर
وَمَن
और जो कोई
يَتَّقِ
डरेगा
ٱللَّهَ
अल्लाह से
يَجْعَل
वो पैदा कर देगा
لَّهُۥ
उसके लिए
مَخْرَجًۭا
निकलने का रास्ता
फिर जब वे अपनी नियत इद्दत को पहुँचे तो या तो उन्हें भली रीति से रोक लो या भली रीति से अलग कर दो। और अपने में से दो न्यायप्रिय आदमियों को गवाह बना दो और अल्लाह के लिए गवाही को दुरुस्त रखो। इसकी नसीहत उस व्यक्ति को की जाती है जो अल्लाह और अन्तिम दिन पर ईमान रखेगा उसके लिए वह (परेशानी से) निकलने का राह पैदा कर देगा
तफ़्सीर:
फिर जब उनकी इद्दत समाप्त होने लगे, तो उन्हें इच्छा और अच्छे सहवास के साथ लौटा लो, या उन्हें लौटाने से बाज़ रहो यहाँ तक कि उनकी इद्दत गुज़र जाए, फिर वे अपने मामले के मालिक हो जाएँगीं। तथा उनके जो अधिकार हैं, उन्हें दे दो। और जब तुम उन्हें लौटाना या अलग करना चाहो, तो विवाद को समाप्त करने के लिए अपने में से दो न्यायवान् व्यक्तियों को गवाह बना लो। और (ऐ गवाहो) तुम अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए ठीक-ठीक गवाही दो। इन अहकाम के द्वारा उस व्यक्ति को नसीहत की जाती है, जो अल्लाह और क़ियामत के दिन पर ईमान रखता है, क्योंकि वही याद दिलाने और उपदेश से लाभान्वित होता है। और जो कोई भी अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर, डरता है, उसके लिए अल्लाह हर तंगी और परेशानी से निकलने का रास्ता बना देगा।
आयत 3
وَيَرْزُقْهُ مِنْ حَيْثُ لَا يَحْتَسِبُ ۚ وَمَن يَتَوَكَّلْ عَلَى ٱللَّهِ فَهُوَ حَسْبُهُۥٓ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ بَـٰلِغُ أَمْرِهِۦ ۚ قَدْ جَعَلَ ٱللَّهُ لِكُلِّ شَىْءٍۢ قَدْرًۭا
وَيَرْزُقْهُ
और वो रिज़्क़ देगा उसे
مِنْ
from
حَيْثُ
जहाँ से
لَا
not
يَحْتَسِبُ ۚ
ना वो गुमान करता हो
وَمَن
और जो कोई
يَتَوَكَّلْ
तवक्कुल करेगा
عَلَى
upon
ٱللَّهِ
अल्लाह पर
فَهُوَ
तो वो
حَسْبُهُۥٓ ۚ
काफ़ी है उसे
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
بَـٰلِغُ
पूरा करने वाला है
أَمْرِهِۦ ۚ
अपने काम को
قَدْ
तहक़ीक़
جَعَلَ
बना दिया
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
لِكُلِّ
वास्ते हर
شَىْءٍۢ
चीज़ के
قَدْرًۭا
एक अंदाज़ा
और उसे वहाँ से रोज़ी देगा जिसका उसे गुमान भी न होगा। जो अल्लाह पर भरोसा करे तो वह उसके लिए काफ़ी है। निश्चय ही अल्लाह अपना काम पूरा करके रहता है। अल्लाह ने हर चीज़ का एक अन्दाजा नियत कर रखा है
तफ़्सीर:
और उसे वहाँ से रोज़ी देगा, जहाँ से वह सोच भी नहीं सकता और वह उसके दिमाग में भी नहीं आया होगा। और जो अपने कामों में अल्लाह पर भरोसा करता है, अल्लाह उसके लिए काफ़ी है। निश्चय अल्लाह अपने आदेश को लागू करने वाला है। वह किसी चीज़ से विवश नहीं है और कोई चीज़ उससे नहीं छूटती। अल्लाह ने हर चीज़ का एक नियत समय निर्धारित कर रखा है, जहाँ तक उसे पहुँचना है। चुनाँचे कठिनाई का एक नियत समय निर्धारित है तथा समृद्धि का एक नियत समय निर्धारित है। अतः दोनों में से कोई भी इनसान पर हमेशा नहीं रहती।
आयत 4
وَٱلَّـٰٓـِٔى يَئِسْنَ مِنَ ٱلْمَحِيضِ مِن نِّسَآئِكُمْ إِنِ ٱرْتَبْتُمْ فَعِدَّتُهُنَّ ثَلَـٰثَةُ أَشْهُرٍۢ وَٱلَّـٰٓـِٔى لَمْ يَحِضْنَ ۚ وَأُو۟لَـٰتُ ٱلْأَحْمَالِ أَجَلُهُنَّ أَن يَضَعْنَ حَمْلَهُنَّ ۚ وَمَن يَتَّقِ ٱللَّهَ يَجْعَل لَّهُۥ مِنْ أَمْرِهِۦ يُسْرًۭا
وَٱلَّـٰٓـِٔى
और वो औरतें
يَئِسْنَ
जो मायूस हो चुकी हों
مِنَ
of
ٱلْمَحِيضِ
हैज़ से
مِن
among
نِّسَآئِكُمْ
तुम्हारी औरतों में से
إِنِ
अगर
ٱرْتَبْتُمْ
शक हो तुम्हें
فَعِدَّتُهُنَّ
तो इद्दत उनकी
ثَلَـٰثَةُ
तीन
أَشْهُرٍۢ
माह है
وَٱلَّـٰٓـِٔى
और उन औरतों (की भी) जो
لَمْ
नहीं
يَحِضْنَ ۚ
वो हाएज़ा हुईं
وَأُو۟لَـٰتُ
And those who (are)
ٱلْأَحْمَالِ
और हमल वालियाँ
أَجَلُهُنَّ
इद्दत उनकी (ये है)
أَن
कि
يَضَعْنَ
वो वज़ह कर दें
حَمْلَهُنَّ ۚ
हमल अपना
وَمَن
और जो कोई
يَتَّقِ
डरेगा
ٱللَّهَ
अल्लाह से
يَجْعَل
वो कर देगा
لَّهُۥ
उसके लिए
مِنْ
of
أَمْرِهِۦ
उसके काम में
يُسْرًۭا
आसानी
और तुम्हारी स्त्रियों में से जो मासिक धर्म से निराश हो चुकी हों, यदि तुम्हें संदेह हो तो उनकी इद्दत तीन मास है और इसी प्रकार उनकी भी जो अभी रजस्वला नहीं हुई। और जो गर्भवती स्त्रियाँ हो उनकी इद्दत उनके शिशु-प्रसव तक है। जो कोई अल्लाह का डर रखेगा उसके मामले में वह आसानी पैदा कर देगा
तफ़्सीर:
और वे तलाकशुदा स्त्रियाँ जो अपने बुढ़ापे के कारण मासिक धर्म से निराश हो चुकी हैं, यदि तुम्हें संदेह है कि वे अपनी इद्दत की गणना कैसे करेंगी, तो उनकी इद्दत तीन मास है। तथा जो स्त्रियाँ अपनी अल्पायु के कारण मासिक धर्म की उम्र तक नहीं पहुँची हैं, तो उनकी इद्दत भी तीन मास है। और गर्भवती महिलाओं की तलाक़ या पति की मृत्यु की वजह से इद्दत उस समय समाप्त होगी : जब वे अपना गर्भ जन देंगी। और जो अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसकी मना की हुई चीज़ों से बचकर, डरेगा; अल्लाह उसके लिए उसके मामलों को आसान बना देगा और उसकी हर कठिनाई को सरल कर देगा।
आयत 5
ذَٰلِكَ أَمْرُ ٱللَّهِ أَنزَلَهُۥٓ إِلَيْكُمْ ۚ وَمَن يَتَّقِ ٱللَّهَ يُكَفِّرْ عَنْهُ سَيِّـَٔاتِهِۦ وَيُعْظِمْ لَهُۥٓ أَجْرًا
ذَٰلِكَ
ये
أَمْرُ
हुक्म है
ٱللَّهِ
अल्लाह का
أَنزَلَهُۥٓ
उसने नाज़िल किया है उसे
إِلَيْكُمْ ۚ
तरफ़ तुम्हारे
وَمَن
और जो कोई
يَتَّقِ
डरेगा
ٱللَّهَ
अल्लाह से
يُكَفِّرْ
वो दूर कर देगा
عَنْهُ
उससे
سَيِّـَٔاتِهِۦ
बुराइयाँ उसकी
وَيُعْظِمْ
और वो बड़ा कर देगा
لَهُۥٓ
उसके लिए
أَجْرًا
अजर को
यह अल्लाह का आदेश है जो उसने तुम्हारी ओर उतारा है। और जो कोई अल्लाह का डर रखेगा उससे वह उसकी बुराईयाँ दूर कर देगा और उसके प्रतिदान को बड़ा कर देगा
तफ़्सीर:
यह तलाक़, लौटाने और इद्दत के अहकाम जिनका उल्लेख किया गया है, अल्लाह के आदेश हैं, जो उसने (ऐ मोमिनो) तुम्हारी ओर उतारे हैं, ताकि तुम उनपर अमल करो। और जो अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसकी मना की हुई बातों से बचकर डरेगा, अल्लाह उसके द्वारा किए गए पापों को मिटा देगा और आख़िरत में उसे बड़ा प्रतिफल प्रदान करेगा और वह जन्नत में प्रवेश और उस नेमत की प्राप्ति है, जो कभी ख़त्म न होगी।
आयत 6
أَسْكِنُوهُنَّ مِنْ حَيْثُ سَكَنتُم مِّن وُجْدِكُمْ وَلَا تُضَآرُّوهُنَّ لِتُضَيِّقُوا۟ عَلَيْهِنَّ ۚ وَإِن كُنَّ أُو۟لَـٰتِ حَمْلٍۢ فَأَنفِقُوا۟ عَلَيْهِنَّ حَتَّىٰ يَضَعْنَ حَمْلَهُنَّ ۚ فَإِنْ أَرْضَعْنَ لَكُمْ فَـَٔاتُوهُنَّ أُجُورَهُنَّ ۖ وَأْتَمِرُوا۟ بَيْنَكُم بِمَعْرُوفٍۢ ۖ وَإِن تَعَاسَرْتُمْ فَسَتُرْضِعُ لَهُۥٓ أُخْرَىٰ
أَسْكِنُوهُنَّ
रिहाइश दो उन औरतों को
مِنْ
from
حَيْثُ
जहाँ
سَكَنتُم
रहते हो तुम
مِّن
(out) of
وُجْدِكُمْ
अपनी वुसअत के मुताबिक़
وَلَا
और ना
تُضَآرُّوهُنَّ
तुम ज़रर पहुँचाओ उन्हें
لِتُضَيِّقُوا۟
ताकि तुम तंगी करो
عَلَيْهِنَّ ۚ
उन पर
وَإِن
और अगर
كُنَّ
हों वो
أُو۟لَـٰتِ
those (who are)
حَمْلٍۢ
हमल वालियाँ
فَأَنفِقُوا۟
तो ख़र्च करो
عَلَيْهِنَّ
उन पर
حَتَّىٰ
यहाँ तक कि
يَضَعْنَ
वो वज़ह कर दें
حَمْلَهُنَّ ۚ
हमल अपना
فَإِنْ
फिर अगर
أَرْضَعْنَ
वो दूध पिलाऐं
لَكُمْ
तुम्हारे लिए
فَـَٔاتُوهُنَّ
तो दे दो उन्हें
أُجُورَهُنَّ ۖ
उजरतें उनकी
وَأْتَمِرُوا۟
और मशवरा करो
بَيْنَكُم
आपस में
بِمَعْرُوفٍۢ ۖ
भले तरीक़े से
وَإِن
और अगर
تَعَاسَرْتُمْ
तुम ने बाहम दुशवारी पैदा की
فَسَتُرْضِعُ
तो दूध पिला देगी
لَهُۥٓ
उसे
أُخْرَىٰ
कोई दूसरी
अपनी हैसियत के अनुसार यहाँ तुम स्वयं रहते हो उन्हें भी उसी जगह रखो। और उन्हें तंग करने के लिए उन्हें हानि न पहुँचाओ। और यदि वे गर्भवती हो तो उनपर ख़र्च करते रहो जब तक कि उनका शिशु-प्रसव न हो जाए। फिर यदि वे तुम्हारे लिए (शिशु को) दूध पिलाएँ तो तुम उन्हें उनका पारिश्रामिक दो और आपस में भली रीति से परस्पर बातचीत के द्वार कोई बात तय कर लो। और यदि तुम दोनों में कोई कठिनाई हो तो फिर कोई दूसरी स्त्री उसके लिए दूध पिला देगी
तफ़्सीर:
तुम उन्हें (ऐ पतियो) अपनी क्षमता के अनुसार वहाँ आवास दो, जहाँ तुम रहते हो। अल्लाह तुम पर इससे अधिक बोझ नहीं डालता। तथा उन्हें तंग करने के लिए उनके खर्च और आवास में या किसी और चीज में उन्हें नुकसान न पहुँचाओ। और यदि तलाकशुदा स्त्रियाँ गर्भवती हैं, तो उनपर खर्च करो, यहाँ तक कि वे अपने गर्भ को जन दें। फिर यदि वे तुम्हारे बच्चों को दूध पिलाएँ, तो उन्हें दूध पिलाने का पारिश्रमिक दो। और पारिश्रमिक के मामले में रीति के अनुसार ठीक से विचार विमर्श कर लिया करो। फिर यदि पति उतना पारिश्रमिक देने में कंजूसी करे, जो पत्नी माँग रही है या पत्नी लालच में पड़ जाए और अपने अपेक्षित पारिश्रमिक से कम पर राज़ी न हो; तो बच्चे का बाप कोई अन्य दूध पिलाने वाली रखकर अपने बच्चे को दूध पिलवाए।
आयत 7
لِيُنفِقْ ذُو سَعَةٍۢ مِّن سَعَتِهِۦ ۖ وَمَن قُدِرَ عَلَيْهِ رِزْقُهُۥ فَلْيُنفِقْ مِمَّآ ءَاتَىٰهُ ٱللَّهُ ۚ لَا يُكَلِّفُ ٱللَّهُ نَفْسًا إِلَّا مَآ ءَاتَىٰهَا ۚ سَيَجْعَلُ ٱللَّهُ بَعْدَ عُسْرٍۢ يُسْرًۭا
لِيُنفِقْ
ताकि ख़र्च करे
ذُو
owner
سَعَةٍۢ
वुसअत वाला
مِّن
from
سَعَتِهِۦ ۖ
अपनी वुसअत में से
وَمَن
और जो कोई
قُدِرَ
तंग किया गया
عَلَيْهِ
उस पर
رِزْقُهُۥ
रिज़्क़ उसका
فَلْيُنفِقْ
पस चाहिए कि वो ख़र्च करे
مِمَّآ
उसमें से जो
ءَاتَىٰهُ
दिया है उसे
ٱللَّهُ ۚ
अल्लाह ने
لَا
Does not
يُكَلِّفُ
नहीं तक्लीफ़ देता
ٱللَّهُ
अल्लाह
نَفْسًا
किसी नफ़्स को
إِلَّا
मगर
مَآ
जितना
ءَاتَىٰهَا ۚ
उसने दिया उसे
سَيَجْعَلُ
अनक़रीब कर देगा
ٱللَّهُ
अल्लाह
بَعْدَ
बाद
عُسْرٍۢ
तंगी के
يُسْرًۭا
आसानी
चाहिए कि समाई (सामर्थ्य) वाला अपनी समाई के अनुसार ख़र्च करे और जिसे उसकी रोज़ी नपी-तुली मिली हो तो उसे चाहिए कि अल्लाह ने उसे जो कुछ भी दिया है उसी में से वह ख़र्च करे। जितना कुछ दिया है उससे बढ़कर अल्लाह किसी व्यक्ति पर ज़िम्मेदारी का बोझ नहीं डालता। जल्द ही अल्लाह कठिनाई के बाद आसानी पैदा कर देगा
तफ़्सीर:
जिसे अल्लाह ने धन संपन्न बनाया है, उसे चाहिए अपनी संपन्नता के अनुसार अपनी तलाक़शुदा स्त्री और अपने बच्चे पर खर्च करे, और जिसकी रोज़ी तंग कर दी गई है, तो अल्लाह ने उसे जो कुछ भी दिया है, उसी में से खर्च करे। अल्लाह किसी प्राणी पर उतना ही भार डालता है, जितना उसे प्रदान किया है। उसपर उससे अधिक या उसकी शक्ति से बढ़कर भार नहीं डालता है। शीघ्र ही अल्लाह उसकी तंगहाली और कठिनाई के बाद संपन्नता और समृद्धि प्रदान करेगा।
आयत 8
وَكَأَيِّن مِّن قَرْيَةٍ عَتَتْ عَنْ أَمْرِ رَبِّهَا وَرُسُلِهِۦ فَحَاسَبْنَـٰهَا حِسَابًۭا شَدِيدًۭا وَعَذَّبْنَـٰهَا عَذَابًۭا نُّكْرًۭا
وَكَأَيِّن
और कितनी ही
مِّن
of
قَرْيَةٍ
बस्तियाँ हैं
عَتَتْ
उन्होंने सरकशी की
عَنْ
against
أَمْرِ
हुक्म से
رَبِّهَا
अपने रब के
وَرُسُلِهِۦ
और उसके रसूलों से
فَحَاسَبْنَـٰهَا
तो हिसाब लिया हमने उनसे
حِسَابًۭا
हिसाब
شَدِيدًۭا
शदीद/ सख़्त
وَعَذَّبْنَـٰهَا
और अज़ाब दिया हमने उन्हें
عَذَابًۭا
अज़ाब
نُّكْرًۭا
अंजाना / हौलनाक
कितनी ही बस्तियाँ हैं जिन्होंने रब और उसके रसूलों के आदेश के मुक़ाबले में सरकशी की, तो हमने उनकी सख़्त पकड़ की और उन्हें बुरी यातना दी
तफ़्सीर:
कितनी ही बस्तियाँ ऐसी हैं कि जब उन्होंने अपने पालनहार के आदेश की तथा उसके रसूलों अलैहिमुस्सलाम के आदेश की अवहेलना की, तो हमने उनके बुरे कर्मों का बड़ा सख्त हिसाब लिया और उन्हें दुनिया एवं आख़िरत में भयानक सज़ा दी।
आयत 9
فَذَاقَتْ وَبَالَ أَمْرِهَا وَكَانَ عَـٰقِبَةُ أَمْرِهَا خُسْرًا
فَذَاقَتْ
तो उन्होंने चखा
وَبَالَ
वबाल
أَمْرِهَا
अपने काम का
وَكَانَ
और था
عَـٰقِبَةُ
अंजाम
أَمْرِهَا
उनके काम का
خُسْرًا
ख़सारा
अतः उन्होंने अपने किए के वबाल का मज़ा चख लिया और उनकी कार्य-नीति का परिणाम घाटा ही रहा
तफ़्सीर:
तो उन्होंने अपने बुरे कर्मों का परिणाम चख लिया। और उनका परिणाम, इस दुनिया में घाटा और आख़िरत में भी घाटा ही रहा।
आयत 10
أَعَدَّ ٱللَّهُ لَهُمْ عَذَابًۭا شَدِيدًۭا ۖ فَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ يَـٰٓأُو۟لِى ٱلْأَلْبَـٰبِ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ ۚ قَدْ أَنزَلَ ٱللَّهُ إِلَيْكُمْ ذِكْرًۭا
أَعَدَّ
तैयार कर रखा है
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
لَهُمْ
उनके लिए
عَذَابًۭا
अज़ाब
شَدِيدًۭا ۖ
शदीद
فَٱتَّقُوا۟
पस डरो
ٱللَّهَ
अल्लाह से
يَـٰٓأُو۟لِى
O men
ٱلْأَلْبَـٰبِ
ऐ अक़्ल वालो
ٱلَّذِينَ
वो जो
ءَامَنُوا۟ ۚ
ईमान लाए हो
قَدْ
तहक़ीक़
أَنزَلَ
नाज़िल किया
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
إِلَيْكُمْ
तरफ़ तुम्हारे
ذِكْرًۭا
ज़िक्र
अल्लाह ने उनके लिए कठोर यातना तैयार कर रखी है। अतः ऐ बुद्धि और समझवालो जो ईमान लाए हो! अल्लाह का डर रखो। अल्लाह ने तुम्हारी ओर एक याददिहानी उतार दी है
तफ़्सीर:
अल्लाह ने उनके लिए कठोर यातना तैयार कर रखी है। अतः (ऐ समझ बूझ वालो, जो अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाए हो) अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसकी मना की हुई बातों से बचकर डरो, ताकि उनके साथ जो हुआ वह तुम्हारे साथ न हो। निश्चय अल्लाह ने तुम्हारी ओर महान उपदेश उतारा है, जो तुम्हें उसकी अवज्ञा के बुरे परिणामों और उसकी आज्ञाकारिता के अच्छे परिणामों की याद दिलाता है।
आज की ज़िंदगी में सबक़
तलाक और इद्दत के अहकाम का ज़िक्र है। यह हमें सिखाता है कि तलाक जैसे नाज़ुक मामलों को भी शरीयत के मुताबिक और सोच-समझकर निभाना चाहिए।
आयत 11
رَّسُولًۭا يَتْلُوا۟ عَلَيْكُمْ ءَايَـٰتِ ٱللَّهِ مُبَيِّنَـٰتٍۢ لِّيُخْرِجَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ مِنَ ٱلظُّلُمَـٰتِ إِلَى ٱلنُّورِ ۚ وَمَن يُؤْمِنۢ بِٱللَّهِ وَيَعْمَلْ صَـٰلِحًۭا يُدْخِلْهُ جَنَّـٰتٍۢ تَجْرِى مِن تَحْتِهَا ٱلْأَنْهَـٰرُ خَـٰلِدِينَ فِيهَآ أَبَدًۭا ۖ قَدْ أَحْسَنَ ٱللَّهُ لَهُۥ رِزْقًا
رَّسُولًۭا
एक रसूल
يَتْلُوا۟
जो तिलावत करता है
عَلَيْكُمْ
तुम पर
ءَايَـٰتِ
आयात
ٱللَّهِ
अल्लाह की
مُبَيِّنَـٰتٍۢ
वाज़ेह
لِّيُخْرِجَ
ताकि वो निकाले
ٱلَّذِينَ
उन लोगों को जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
وَعَمِلُوا۟
और उन्होंने अमल किए
ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ
नेक
مِنَ
from
ٱلظُّلُمَـٰتِ
अंधेरों से
إِلَى
towards
ٱلنُّورِ ۚ
तरफ़ नूर के
وَمَن
और जो कोई
يُؤْمِنۢ
ईमान लाए
بِٱللَّهِ
अल्लाह पर
وَيَعْمَلْ
और वो अमल करे
صَـٰلِحًۭا
नेक
يُدْخِلْهُ
वो दाख़िल करेगा उसे
جَنَّـٰتٍۢ
बाग़ात में
تَجْرِى
बहती हैं
مِن
from
تَحْتِهَا
उनके नीचे से
ٱلْأَنْهَـٰرُ
नहरें
خَـٰلِدِينَ
हमेशा रहने वाले हैं
فِيهَآ
उनमें
أَبَدًۭا ۖ
हमेशा-हमेशा
قَدْ
तहक़ीक़
أَحْسَنَ
अच्छा दिया
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
لَهُۥ
उसे
رِزْقًا
रिज़्क़
(अर्थात) एक रसूल जो तुम्हें अल्लाह की स्पष्ट आयतें पढ़कर सुनाता है, ताकि वह उन लोगों को, जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए, अँधेरों से निकालकर प्रकाश की ओर ले आए। जो कोई अल्लाह पर ईमान लाए और अच्छा कर्म करे, उसे वह ऐसे बाग़़ों में दाख़िल करेगा जिनके नीचे नहरें बह रही होगी - ऐसे लोग उनमें सदैव रहेंगे - अल्लाह ने उनके लिए उत्तम रोज़ी रखी है
तफ़्सीर:
यह उपदेश अल्लाह का एक रसूल है, जो तुम्हारे सामने अल्लाह की आयतें पढ़कर सुनाता है, जो (तुम्हारे लिए सत्य को) स्पष्ट करने वाली हैं जिनमें कोई संदेह नहीं है। आशा है कि वह उन लोगों को, जो अल्लाह पर ईमान लाए, उसके रसूल को सच्चा माना और अच्छे कार्य किए, गुमराही के अंधेरों से निकाल कर मार्गदर्शन की रोशनी में लाए। और जो अल्लाह पर ईमान लाए और अच्छे कार्य करे, अल्लाह उसे ऐसी जन्नतों में दाख़िल करेगा, जिनके महलों और पेड़ों के नीचे से नहरें बहती हैं। वे उनमें हमेशा के लिए रहेंगे।निश्चय अल्लाह ने उसके लिए उत्तम आजीविका तैयार कर रखी है। क्योंकि वह उसे ऐसी जन्नत में दाखिल करेगा, जिसका आनंद कभी बाधित नहीं होगा।
आयत 12
ٱللَّهُ ٱلَّذِى خَلَقَ سَبْعَ سَمَـٰوَٰتٍۢ وَمِنَ ٱلْأَرْضِ مِثْلَهُنَّ يَتَنَزَّلُ ٱلْأَمْرُ بَيْنَهُنَّ لِتَعْلَمُوٓا۟ أَنَّ ٱللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍۢ قَدِيرٌۭ وَأَنَّ ٱللَّهَ قَدْ أَحَاطَ بِكُلِّ شَىْءٍ عِلْمًۢا
ٱللَّهُ
अल्लाह
ٱلَّذِى
वो जिसने
خَلَقَ
पैदा किया
سَبْعَ
सात
سَمَـٰوَٰتٍۢ
आसमानों को
وَمِنَ
and of
ٱلْأَرْضِ
और ज़मीन में से
مِثْلَهُنَّ
मानिन्द उन्हीं के
يَتَنَزَّلُ
उतरता है
ٱلْأَمْرُ
हुक्म
بَيْنَهُنَّ
दर्मियान उनके
لِتَعْلَمُوٓا۟
ताकि तुम जान लो
أَنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
عَلَىٰ
ऊपर
كُلِّ
हर
شَىْءٍۢ
चीज़ के
قَدِيرٌۭ
ख़ूब क़ुदरत रखने वाला है
وَأَنَّ
और बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
قَدْ
तहक़ीक़
أَحَاطَ
उसने घेर रखा है
بِكُلِّ
हर
شَىْءٍ
चीज़ को
عِلْمًۢا
इल्म के ऐतबार से
अल्लाह ही है जिसने सात आकाश बनाए और उन्ही के सदृश धरती से भी। उनके बीच (उसका) आदेश उतरता रहता है ताकि तुम जान लो कि अल्लाह को हर चीज़ का सामर्थ्य प्राप्त है और यह कि अल्लाह हर चीज़ को अपनी ज्ञान-परिधि में लिए हुए है
तफ़्सीर:
अल्लाह वही है, जिसने सात आकाश बनाए और सात आकाशों की रचना की तरह सात धरतियाँ बनाईं। अल्लाह का सांसारिक एवं शरई आदेश उनके बीच उतरता है, ताकि तुम जान लो कि अल्लाह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है। उसे कोई चीज़ विवश नहीं कर सकती। तथा यह कि उस महिमावान् अल्लाह ने हर वस्तु को अपने ज्ञान के साथ घेर लिया है। अतः आकाशों में या पृथ्वी पर उससे कुछ भी छिपा नहीं है।
आज की ज़िंदगी में सबक़
अल्लाह पर भरोसा रखने वालों को रिज़्क और आसानी के वादे के साथ सूरह का इख्तिताम होता है। यह सबक हमें सिखाता है कि जो अल्लाह से डरता है, अल्लाह उसके लिए मुश्किल से निकलने का रास्ता बना देता है।
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