सूरह अत-तहरीम سورة التحريम
मदनी 12 आयतें
नाम का मतलब
हराम करना (नबी ﷺ के एक निजी मामले में खुद पर एक हलाल चीज़ को हराम कर लेने के ज़िक्र से)
पृष्ठभूमि
सूरह अत-तहरीम नबी ﷺ के घरेलू मामले पर नाज़िल हुई, जिसमें आपकी बीवियों के आपसी रवैये और अज़वाज-ए-मुतहरात (नबी ﷺ की पाक बीवियों) के लिए नसीहत का ज़िक्र है।
फ़ज़ीलत / सार
इसमें फिरऔन की बीवी आसिया और मरियम अलैहिस्सलाम को नेक औरतों की मिसाल के तौर पर पेश किया गया है, जो हर दौर की औरतों के लिए बड़ी नसीहत है।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
आयत 1
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلنَّبِىُّ لِمَ تُحَرِّمُ مَآ أَحَلَّ ٱللَّهُ لَكَ ۖ تَبْتَغِى مَرْضَاتَ أَزْوَٰجِكَ ۚ وَٱللَّهُ غَفُورٌۭ رَّحِيمٌۭ
يَـٰٓأَيُّهَا
ٱلنَّبِىُّ
नबी
لِمَ
क्यों
تُحَرِّمُ
आप हराम करते हैं
مَآ
उसको जो
أَحَلَّ
हलाल किया
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
لَكَ ۖ
आपके लिए
تَبْتَغِى
आप चाहते हैं
مَرْضَاتَ
रज़ामन्दी
أَزْوَٰجِكَ ۚ
अपनी बीवियों की
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
غَفُورٌۭ
बहुत बख़्शने वाला है
رَّحِيمٌۭ
निहायत रहम करने वाला है
ऐ नबी! जिस चीज़ को अल्लाह ने तुम्हारे लिए वैध ठहराया है उसे तुम अपनी पत्नियों की प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए क्यो अवैध करते हो? अल्लाह बड़ा क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है
तफ़्सीर:
ऐ रसूल! आप अपनी दासी मारिया से सहवास को क्यों हराम ठहराते हैं, जिसे अल्लाह ने आपके लिए हलाल किया है, आप इससे अपनी पत्नियों को खुश करना चाहते हैं, क्योंकि वे आपके मारिया के पास जाने को अप्रिय समझती हैं?! अल्लाह आपको माफ़ करने वाला, आप पर दया करने वाला है।
आयत 2
قَدْ فَرَضَ ٱللَّهُ لَكُمْ تَحِلَّةَ أَيْمَـٰنِكُمْ ۚ وَٱللَّهُ مَوْلَىٰكُمْ ۖ وَهُوَ ٱلْعَلِيمُ ٱلْحَكِيمُ
قَدْ
तहक़ीक़
فَرَضَ
मुक़र्रर कर दिया है
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
لَكُمْ
तुम्हारे लिए
تَحِلَّةَ
खोलना (कफ़्फ़ारा)
أَيْمَـٰنِكُمْ ۚ
तुम्हारी क़समों का
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
مَوْلَىٰكُمْ ۖ
मौला है तुम्हारा
وَهُوَ
और वो ही है
ٱلْعَلِيمُ
ख़ूब इल्म वाला
ٱلْحَكِيمُ
ख़ूब हिकमत वाला
अल्लाह ने तुम लोगों के लिए तुम्हारी अपनी क़समों की पाबंदी से निकलने का उपाय निश्चित कर दिया है। अल्लाह तुम्हारा संरक्षक है और वही सर्वज्ञ, अत्यन्त तत्वदर्शी है
तफ़्सीर:
अल्लाह ने तुम्हारे लिए कफ़्फ़ारा के द्वारा अपनी क़समों को हलाल करना धर्म संगत बना दिया है, यदि तुम कोई चीज़ उनसे बेहतर पाओ या उस क़सम को तोड़ दो। अल्लाह तुम्हारा सहायक है। तथा वह तुम्हारी स्थितियों एवं हितों के बारे में सबसे अच्छा जानता है, अपनी शरीयत और तक़दीर (निर्णय) में हिकमत वाला है।
आयत 3
وَإِذْ أَسَرَّ ٱلنَّبِىُّ إِلَىٰ بَعْضِ أَزْوَٰجِهِۦ حَدِيثًۭا فَلَمَّا نَبَّأَتْ بِهِۦ وَأَظْهَرَهُ ٱللَّهُ عَلَيْهِ عَرَّفَ بَعْضَهُۥ وَأَعْرَضَ عَنۢ بَعْضٍۢ ۖ فَلَمَّا نَبَّأَهَا بِهِۦ قَالَتْ مَنْ أَنۢبَأَكَ هَـٰذَا ۖ قَالَ نَبَّأَنِىَ ٱلْعَلِيمُ ٱلْخَبِيرُ
وَإِذْ
और जब
أَسَرَّ
छुपा कर की
ٱلنَّبِىُّ
नबी ने
إِلَىٰ
to
بَعْضِ
तरफ़ बाज़
أَزْوَٰجِهِۦ
अपनी बीवियों के
حَدِيثًۭا
एक बात
فَلَمَّا
तो जब
نَبَّأَتْ
उसने ख़बर दे दी
بِهِۦ
उसकी
وَأَظْهَرَهُ
और ज़ाहिर कर दिया उसे
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
عَلَيْهِ
उस पर
عَرَّفَ
उसने बता दिया
بَعْضَهُۥ
बाज़ हिस्सा उसका
وَأَعْرَضَ
और उसने ऐराज़ किया
عَنۢ
[of]
بَعْضٍۢ ۖ
बाज़ से
فَلَمَّا
तो जब
نَبَّأَهَا
उसने ख़बर दी उसे
بِهِۦ
उस (बात) की
قَالَتْ
वो कहने लगी
مَنْ
किस ने
أَنۢبَأَكَ
ख़बर दी आपको
هَـٰذَا ۖ
इसकी
قَالَ
कहा
نَبَّأَنِىَ
ख़बर दी मुझे
ٱلْعَلِيمُ
ख़ूब इल्म वाले ने
ٱلْخَبِيرُ
बहुत बाख़बर ने
जब नबी ने अपनी पत्ऩियों में से किसी से एक गोपनीय बात कही, फिर जब उसने उसकी ख़बर कर दी और अल्लाह ने उसे उसपर ज़ाहिर कर दिया, तो उसने उसे किसी हद तक बता दिया और किसी हद तक टाल गया। फिर जब उसने उसकी उसे ख़बर की तो वह बोली, "आपको इसकी ख़बर किसने दी?" उसने कहा, "मुझे उसने ख़बर दी जो सब कुछ जाननेवाला, ख़बर रखनेवाला है।"
तफ़्सीर:
तथा उस समय को याद करें, जब नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपनी पत्नी हफ़सा रज़ियल्लाहु अन्हा को विशेष रूप से एक बात बताई, जिसमें यह बात शामिल थी कि आप अपनी दासी मारिया के निकट नहीं जाएँगे। फिर जब हफ़सा रज़ियल्लाहु अन्हा ने आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा को यह बात बता दी और अल्लाह ने अपने नबी को उनके रहस्य के प्रकट हो जाने के बारे में बता दिया, तो आपने हफ़सा रज़ियल्लाहु अन्हा को डाँटा और उनसे उनकी बताई हुई कुछ बातों का उल्लेख किया और कुछ से खामोशी बरती। तो ह़फ़सा रज़ियल्लाहु अन्हा ने आपसे पूछा : आप को यह बात किसने बताई? तो आपने फरमाया : मुझे उसने बताया है, जो हर चीज़ को जानने वाला और हर गुप्त चीज़ की ख़बर रखने वाला है।
आयत 4
إِن تَتُوبَآ إِلَى ٱللَّهِ فَقَدْ صَغَتْ قُلُوبُكُمَا ۖ وَإِن تَظَـٰهَرَا عَلَيْهِ فَإِنَّ ٱللَّهَ هُوَ مَوْلَىٰهُ وَجِبْرِيلُ وَصَـٰلِحُ ٱلْمُؤْمِنِينَ ۖ وَٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ بَعْدَ ذَٰلِكَ ظَهِيرٌ
إِن
अगर
تَتُوبَآ
तुम दोनों तौबा करो
إِلَى
to
ٱللَّهِ
तरफ़ अल्लाह के
فَقَدْ
पस तहक़ीक़
صَغَتْ
झुक पड़े हैं
قُلُوبُكُمَا ۖ
दिल तुम दोनों के
وَإِن
और अगर
تَظَـٰهَرَا
तुम एक दूसरे की मदद करोगी
عَلَيْهِ
उसके ख़िलाफ़
فَإِنَّ
पस बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
هُوَ
वो
مَوْلَىٰهُ
मौला है उसका
وَجِبْرِيلُ
और जिबराईल
وَصَـٰلِحُ
और नेक
ٱلْمُؤْمِنِينَ ۖ
मोमिनीन
وَٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ
और फ़रिश्ते
بَعْدَ
बाद
ذَٰلِكَ
उसके
ظَهِيرٌ
मददगार हैं
यदि तुम दोनों अल्लाह की ओर रुजू हो तो तुम्हारे दिल तो झुक ही चुके हैं, किन्तु यदि तुम उसके विरुद्ध एक-दूसरे की सहायता करोगी तो अल्लाह उसकी संरक्षक है, और जिबरील और नेक ईमानवाले भी, और इसके बाद फ़रिश्ते भी उसके सहायक है
तफ़्सीर:
तुम दोनों को तौबा करना चाहिए। क्योंकि तुम दोनों के दिल उस चीज़ को पसंद करने की तरफ़ झुक गए हैं, जो अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को नापसंद है यानी अपनी दासी से दूर रहना और उसे अपने ऊपर हराम कर लेना। और अगर तुम दोनों आपके ख़िलाफ भड़काने पर अटल रहोगी, तो खुद अल्लाह आपका संरक्षक और सहायक है। और इसी तरह जिबरील और नेक ईमान वाले आपके संरक्षक और सहायक हैं। तथा अल्लाह की मदद के बाद फ़रिश्ते आपके सहायक तथा आपको कष्ट देने वालों के विरुद्ध आपके मददगार हैं।
आयत 5
عَسَىٰ رَبُّهُۥٓ إِن طَلَّقَكُنَّ أَن يُبْدِلَهُۥٓ أَزْوَٰجًا خَيْرًۭا مِّنكُنَّ مُسْلِمَـٰتٍۢ مُّؤْمِنَـٰتٍۢ قَـٰنِتَـٰتٍۢ تَـٰٓئِبَـٰتٍ عَـٰبِدَٰتٍۢ سَـٰٓئِحَـٰتٍۢ ثَيِّبَـٰتٍۢ وَأَبْكَارًۭا
عَسَىٰ
उम्मीद है
رَبُّهُۥٓ
रब उसका
إِن
अगर
طَلَّقَكُنَّ
वो तलाक़ दे दे तुम्हें
أَن
कि
يُبْدِلَهُۥٓ
वो बदल कर दे दे उसे
أَزْوَٰجًا
बीवियाँ
خَيْرًۭا
बेहतर
مِّنكُنَّ
तुम से
مُسْلِمَـٰتٍۢ
मुसलमान
مُّؤْمِنَـٰتٍۢ
मोमिन
قَـٰنِتَـٰتٍۢ
इताअत गुज़ार
تَـٰٓئِبَـٰتٍ
तौबा गुज़ार
عَـٰبِدَٰتٍۢ
इबादत गुज़ार
سَـٰٓئِحَـٰتٍۢ
रोज़ा दार
ثَيِّبَـٰتٍۢ
शौहर दीदा
وَأَبْكَارًۭا
और कुवारियाँ
इसकी बहुत सम्भावना है कि यदि वह तुम्हें तलाक़ दे दे तो उसका रब तुम्हारे बदले में तुमसे अच्छी पत्ऩियाँ उसे प्रदान करे - मुस्लिम, ईमानवाली, आज्ञाकारिणी, तौबा करनेवाली, इबादत करनेवाली, (अल्लाह के मार्ग में) सफ़र करनेवाली, विवाहिता और कुँवारियाँ भी
तफ़्सीर:
यदि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम तुम्हें तलाक़ दे दें, तो बहुत संभावित है कि उनका पालनहार उन्हें तुमसे बेहतर पत्नियाँ प्रदान कर दे, जो उसके आदेश को मानने वाली हों, उसपर तथा उसके रसूल पर ईमान रखने वाली हों, अल्लाह का आज्ञापालन करने वाली हों, अपने गुनाहों से तौबा करने वाली हों, अपने पालनहार की इबादत करने वाली हों, रोज़ा रखने वाली हों, जिनमें से कुछ पहले से शादीशुदा तथा कुछ कुँवारियाँ हों। लेकिन नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उन्हें तलाक नहीं दी।
आयत 6
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ قُوٓا۟ أَنفُسَكُمْ وَأَهْلِيكُمْ نَارًۭا وَقُودُهَا ٱلنَّاسُ وَٱلْحِجَارَةُ عَلَيْهَا مَلَـٰٓئِكَةٌ غِلَاظٌۭ شِدَادٌۭ لَّا يَعْصُونَ ٱللَّهَ مَآ أَمَرَهُمْ وَيَفْعَلُونَ مَا يُؤْمَرُونَ
يَـٰٓأَيُّهَا
O
ٱلَّذِينَ
ऐ लोगो जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए हो
قُوٓا۟
बचाओ
أَنفُسَكُمْ
अपने आपको
وَأَهْلِيكُمْ
और अपने घर वालों को
نَارًۭا
ऐसी आग से
وَقُودُهَا
ईंधन होगा उसका
ٱلنَّاسُ
लोग
وَٱلْحِجَارَةُ
और पत्थर
عَلَيْهَا
उस पर
مَلَـٰٓئِكَةٌ
फ़रिश्ते हैं
غِلَاظٌۭ
सख़्त
شِدَادٌۭ
ज़बरदस्त
لَّا
not
يَعْصُونَ
नहीं वो नाफ़रमानी करते
ٱللَّهَ
अल्लाह की
مَآ
उसमें जिसका
أَمَرَهُمْ
उसने हुक्म दिया उन्हें
وَيَفْعَلُونَ
और वो करते हैं
مَا
जिसका
يُؤْمَرُونَ
वो हुक्म दिए जाते हैं
ऐ ईमान लानेवालो! अपने आपको और अपने घरवालों को उस आग से बचाओ जिसका ईधन मनुष्य और पत्थर होंगे, जिसपर कठोर स्वभाव के ऐसे बलशाली फ़रिश्ते नियुक्त होंगे जो अल्लाह की अवज्ञा उसमें नहीं करेंगे जो आदेश भी वह उन्हें देगा, और वे वही करेंगे जिसका उन्हें आदेश दिया जाएगा
तफ़्सीर:
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने वालो और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! अपने लिए और अपने घर वालों के लिए उस भयानक आग से बचाव एवं सुरक्षा अपनाओ, जिसे मनुष्यों के द्वारा और पत्थर के ज़रिए जलाया जाएगा। इस आग पर ऐसे फ़रिश्ते नियुक्त हैं, जो उसमें प्रवेश करने वालों पर कठोर हैं और बलशाली हैं। यदि अल्लाह उन्हें कोई आदेश देता है, तो वे उसके आदेश की अवहेलना नहीं करते हैं तथा वे बिना सुस्ती और देरी के वही करते हैं जो वह उन्हें आदेश देता है।
आयत 7
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ لَا تَعْتَذِرُوا۟ ٱلْيَوْمَ ۖ إِنَّمَا تُجْزَوْنَ مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
يَـٰٓأَيُّهَا
O
ٱلَّذِينَ
ऐ लोगो जिन्होंने
كَفَرُوا۟
कुफ़्र किया
لَا
(Do) not
تَعْتَذِرُوا۟
ना तुम मअज़रत करो
ٱلْيَوْمَ ۖ
आज के दिन
إِنَّمَا
बेशक
تُجْزَوْنَ
तुम बदला दिए जा रहे हो
مَا
उसका जो
كُنتُمْ
थे तुम
تَعْمَلُونَ
तुम अमल करते
ऐ इनकार करनेवालो! आज उज़्र पेश न करो। तुम्हें बदले में वही तो दिया जा रहा है जो कुछ तुम करते रहे हो
तफ़्सीर:
क़ियामत के दिन काफ़िरों से कहा जाएगा : ऐ अल्लाह के साथ कुफ़्र करने वालो, आज तुम अपने कुफ़्र और पापों के लिए बहाने मत बनाओ। क्योंकि तुम्हारे बहाने को स्वीकार नहीं किया जाएगा। बल्कि, आज के दिन तुम्हें केवल अल्लाह के साथ कुफ़्र करने एवं उसके रसूलों को झुठलाने का बदला दिया जाएगा, जो तुम दुनिया में किया करते थे।
आयत 8
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ تُوبُوٓا۟ إِلَى ٱللَّهِ تَوْبَةًۭ نَّصُوحًا عَسَىٰ رَبُّكُمْ أَن يُكَفِّرَ عَنكُمْ سَيِّـَٔاتِكُمْ وَيُدْخِلَكُمْ جَنَّـٰتٍۢ تَجْرِى مِن تَحْتِهَا ٱلْأَنْهَـٰرُ يَوْمَ لَا يُخْزِى ٱللَّهُ ٱلنَّبِىَّ وَٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ مَعَهُۥ ۖ نُورُهُمْ يَسْعَىٰ بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَبِأَيْمَـٰنِهِمْ يَقُولُونَ رَبَّنَآ أَتْمِمْ لَنَا نُورَنَا وَٱغْفِرْ لَنَآ ۖ إِنَّكَ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍۢ قَدِيرٌۭ
يَـٰٓأَيُّهَا
O
ٱلَّذِينَ
ऐ लोगो जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए हो
تُوبُوٓا۟
तौबा करो
إِلَى
to
ٱللَّهِ
तरफ़ अल्लाह के
تَوْبَةًۭ
तौबा
نَّصُوحًا
ख़ालिस
عَسَىٰ
उम्मीद है
رَبُّكُمْ
रब तुम्हारा
أَن
कि
يُكَفِّرَ
वो दूर कर देगा
عَنكُمْ
तुम से
سَيِّـَٔاتِكُمْ
बुराइयाँ तुम्हारी
وَيُدْخِلَكُمْ
और वो दाख़िल कर देगा तुम्हें
جَنَّـٰتٍۢ
बाग़ात में
تَجْرِى
बहती हैं
مِن
from
تَحْتِهَا
उनके नीचे से
ٱلْأَنْهَـٰرُ
नहरें
يَوْمَ
जिस दिन
لَا
not
يُخْزِى
ना रुस्वा करेगा
ٱللَّهُ
अल्लाह
ٱلنَّبِىَّ
नबी को
وَٱلَّذِينَ
और उन्हें जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
مَعَهُۥ ۖ
साथ उसके
نُورُهُمْ
नूर उनका
يَسْعَىٰ
दौड़ता होगा
بَيْنَ
before
أَيْدِيهِمْ
उनके आगे
وَبِأَيْمَـٰنِهِمْ
और उनके दाऐं
يَقُولُونَ
वो कहेंगे
رَبَّنَآ
ऐ हमारे रब
أَتْمِمْ
तमाम कर दे
لَنَا
हमारे लिए
نُورَنَا
नूर हमारा
وَٱغْفِرْ
और बख़्श दे
لَنَآ ۖ
हमें
إِنَّكَ
बेशक तू
عَلَىٰ
ऊपर
كُلِّ
हर
شَىْءٍۢ
चीज़ के
قَدِيرٌۭ
ख़ूब क़ुदरत रखने वाला है
ऐ ईमान लानेवाले! अल्लाह के आगे तौबा करो, विशुद्ध तौबा। बहुत सम्भव है कि तुम्हारा रब तुम्हारी बुराइयाँ तुमसे दूर कर दे और तुम्हें ऐसे बाग़ों में दाख़िल करे जिनके नीचे नहरे बह रही होंगी, जिस दिन अल्लाह नबी को और उनको जो ईमान लाकर उसके साथ हुए, रुसवा न करेगा। उनका प्रकाश उनके आगे-आगे दौड़ रहा होगा और उनके दाहिने हाथ मे होगा। वे कह रहे होंगे, "ऐ हमारे रब! हमारे लिए हमारे प्रकाश को पूर्ण कर दे और हमें क्षमा कर। निश्चय ही तू हर चीज़ की सामर्थ्य रखता है।"
तफ़्सीर:
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने वालो और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! तुम अल्लाह के सामने अपने गुनाहों से सच्ची तौबा करो। आशा है कि तुम्हारा पालनहार तुम्हारे गुनाहों को मिटा दे और तुम्हें क़ियामत के दिन ऐसी जन्नतों में दाख़िल करे, जिनके महलों के नीचे से नहरें बहती हैं। जिस दिन अल्लाह नबी को तथा उनके साथ ईमान लाने वालों को जहन्नम में दाखिल करके अपमानित नहीं करेगा। उनका प्रकाश सिरात पर उनके आगे तथा उनके दाएँ चल रहा होगा। वे कहेंगे : ऐ हमारे पालनहार, हमारे लिए हमारे प्रकाश को पूर्ण कर दे, ताकि हम जन्नत में दाखिल हो सकें। और मुनाफ़िकों के जैसे न हो जाएँ, जिनका प्रकाश सिरात पर बुझ जाएगा। तथा हमारे गुनाह माफ़ कर दे। निःसंदेह तू हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है। इसलिए हमारे प्रकाश को पूरा करने और हमारे पापों को नजरअंदाज करने से विवश नहीं है।
आयत 9
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلنَّبِىُّ جَـٰهِدِ ٱلْكُفَّارَ وَٱلْمُنَـٰفِقِينَ وَٱغْلُظْ عَلَيْهِمْ ۚ وَمَأْوَىٰهُمْ جَهَنَّمُ ۖ وَبِئْسَ ٱلْمَصِيرُ
يَـٰٓأَيُّهَا
ٱلنَّبِىُّ
नबी
جَـٰهِدِ
जिहाद कीजिए
ٱلْكُفَّارَ
काफ़िरों से
وَٱلْمُنَـٰفِقِينَ
और मुनाफ़िक़ों से
وَٱغْلُظْ
और सख़्ती कीजिए
عَلَيْهِمْ ۚ
उन पर
وَمَأْوَىٰهُمْ
और ठिकाना उनका
جَهَنَّمُ ۖ
जहन्नम है
وَبِئْسَ
और कितनी बुरी है
ٱلْمَصِيرُ
लौटने की जगह
ऐ नबी! इनकार करनेवालों और कपटाचारियों से जिहाद करो और उनके साथ सख़्ती से पेश आओ। उनका ठिकाना जहन्नम है और वह अन्ततः पहुँचने की बहुत बुरी जगह है
तफ़्सीर:
ऐ रसूल, काफ़िरों से तलवार के द्वारा तथा मुनाफ़िकों से ज़बान के द्वारा और हदें (शरई दंड) क़ायम करके जिहाद करें। और उनपर सख़्ती करें, ताकि वे आपका भय महसूस करें। और उनका ठिकाना, जहाँ वे क़ियामत के दिन शरण लेंगे, जहन्नम है, और उनका वह ठिकाना बहुत बुरा ठिकाना है, जहाँ वे लौटकर जाएँगे।
आयत 10
ضَرَبَ ٱللَّهُ مَثَلًۭا لِّلَّذِينَ كَفَرُوا۟ ٱمْرَأَتَ نُوحٍۢ وَٱمْرَأَتَ لُوطٍۢ ۖ كَانَتَا تَحْتَ عَبْدَيْنِ مِنْ عِبَادِنَا صَـٰلِحَيْنِ فَخَانَتَاهُمَا فَلَمْ يُغْنِيَا عَنْهُمَا مِنَ ٱللَّهِ شَيْـًۭٔا وَقِيلَ ٱدْخُلَا ٱلنَّارَ مَعَ ٱلدَّٰخِلِينَ
ضَرَبَ
बयान की
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
مَثَلًۭا
एक मिसाल
لِّلَّذِينَ
उनके लिए जिन्होंने
كَفَرُوا۟
कुफ़्र किया
ٱمْرَأَتَ
(the) wife
نُوحٍۢ
नूह की बीवी की
وَٱمْرَأَتَ
(and the) wife
لُوطٍۢ ۖ
और लूत की बीवी की
كَانَتَا
वो दोनों थीं
تَحْتَ
नीचे
عَبْدَيْنِ
दो बन्दों के
مِنْ
of
عِبَادِنَا
हमारे बन्दों में से
صَـٰلِحَيْنِ
जो दोनों नेक थे
فَخَانَتَاهُمَا
तो उन दोनों ने ख़ियानत की
فَلَمْ
तो ना
يُغْنِيَا
वो दोनों काम आ सके
عَنْهُمَا
उन दोनों के
مِنَ
from
ٱللَّهِ
अल्लाह से
شَيْـًۭٔا
कुछ भी
وَقِيلَ
और कह दिया गया
ٱدْخُلَا
दोनों दाख़िल हो जाओ
ٱلنَّارَ
आग में
مَعَ
with
ٱلدَّٰخِلِينَ
साथ दाख़िल होने वालों के
अल्लाह ने इनकार करनेवालों के लिए नूह की स्त्री और लूत की स्त्री की मिसाल पेश की है। वे हमारे बन्दों में से दो नेक बन्दों के अधीन थीं। किन्तु उन दोनों स्त्रियों ने उनसे विश्वासघात किया तो अल्लाह के मुक़ाबले में उनके कुछ काम न आ सके और कह दिया गया, "प्रवेश करनेवालों के साथ दोनों आग में प्रविष्ट हो जाओ।"
तफ़्सीर:
अल्लाह ने उन लोगों के लिए, जिन्होंने अल्लाह और उसके रसूलों का इनकार किया (यह स्पष्ट करने के लिए कि ईमान वालों के साथ उनका संबंध किसी भी तरह से फायदेमंद नहीं है) अल्लाह के दो नबियों : नूह और लूत अलैहिमस्सलाम की पत्नियों का उदाहरण दिया है। वे दोनों दो नेक बंदों की पत्नियाँ थीं। किन्तु दोनों ने अपने पतियों के साथ विश्वासघात किया। क्योंकि वे दोनों अल्लाह के मार्ग से रोकती तथा अपनी जाति के काफ़िरों का समर्थन करती थीं। इसलिए उन दोनों का इन दोनों नेक बंदों की पत्नियाँ होने का कोई लाभ न हुआ। और उनसे कहा गया : जहन्नम में प्रवेश करने वाले काफ़िरों और अवज्ञाकारियों के साथ तुम दोनों (भी) उसमें प्रवेश कर जाओ।
आज की ज़िंदगी में सबक़
नबी ﷺ के घरेलू मामले और आसिया-मरियम अलैहिस्सलाम की मिसाल का ज़िक्र है। यह हमें सिखाता है कि नेक औरतें अपने माहौल की बुराई से भी अपना ईमान महफूज़ रख सकती हैं, जैसे फिरऔन के घर में आसिया।
आयत 11
وَضَرَبَ ٱللَّهُ مَثَلًۭا لِّلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ ٱمْرَأَتَ فِرْعَوْنَ إِذْ قَالَتْ رَبِّ ٱبْنِ لِى عِندَكَ بَيْتًۭا فِى ٱلْجَنَّةِ وَنَجِّنِى مِن فِرْعَوْنَ وَعَمَلِهِۦ وَنَجِّنِى مِنَ ٱلْقَوْمِ ٱلظَّـٰلِمِينَ
وَضَرَبَ
और बयान की
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
مَثَلًۭا
एक मिसाल
لِّلَّذِينَ
उनके लिए जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
ٱمْرَأَتَ
(the) wife
فِرْعَوْنَ
फ़िरऔन की बीवी की
إِذْ
जब
قَالَتْ
उसने कहा
رَبِّ
ऐ मेरे रब
ٱبْنِ
बना
لِى
मेरे लिए
عِندَكَ
अपने पास
بَيْتًۭا
एक घर
فِى
in
ٱلْجَنَّةِ
जन्नत में
وَنَجِّنِى
और निजात दे मुझे
مِن
from
فِرْعَوْنَ
फ़िरऔन से
وَعَمَلِهِۦ
और उसके अमल से
وَنَجِّنِى
और निजात दे मुझे
مِنَ
from
ٱلْقَوْمِ
उन लोगों से
ٱلظَّـٰلِمِينَ
जो ज़ालिम हैं
और ईमान लानेवालों के लिए अल्लाह ने फ़िरऔन की स्त्री की मिसाल पेश की है, जबकि उसने कहा, "ऐ मेरे रब! तू मेरे लिए अपने पास जन्नत में एक घर बना और मुझे फ़िरऔन और उसके कर्म से छुटकारा दे, और छुटकारा दे मुझे ज़ालिम लोगों से।"
तफ़्सीर:
और अल्लाह ने उन लोगों के लिए, जो अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाए, यह बतलाने के लिए कि काफ़िरों के साथ उनका संबंध उन्हें कुछ नुक़सान नहीं पहुँचाएगा और उन्हें प्रभावित नहीं करेगा जब तक कि वे सत्य पर सुदृढ़ हैं, फ़िरऔन की पत्नी की स्थिति का उदाहरण प्रस्तुत किया है, जब उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! मेरे लिए अपने निकट जन्नत में एक घर बना और मुझे फ़िरऔन के अत्याचार और उसके बुरे कामों से बचा ले तथा मुझे उन लोगों से बचा ले, जो उसकी सरकशी एवं अत्याचार में उसका पालन करके अपने ऊपर अत्याचार करने वाले हैं।
आयत 12
وَمَرْيَمَ ٱبْنَتَ عِمْرَٰنَ ٱلَّتِىٓ أَحْصَنَتْ فَرْجَهَا فَنَفَخْنَا فِيهِ مِن رُّوحِنَا وَصَدَّقَتْ بِكَلِمَـٰتِ رَبِّهَا وَكُتُبِهِۦ وَكَانَتْ مِنَ ٱلْقَـٰنِتِينَ
وَمَرْيَمَ
और मरियम
ٱبْنَتَ
बेटी
عِمْرَٰنَ
इमरान की
ٱلَّتِىٓ
वो जिसने
أَحْصَنَتْ
महफ़ूज़ रखा
فَرْجَهَا
अपनी शर्मगाह को
فَنَفَخْنَا
तो फ़ूँक दिया हमने
فِيهِ
उसमें
مِن
of
رُّوحِنَا
अपनी रूह से
وَصَدَّقَتْ
और उसने तस्दीक़ की
بِكَلِمَـٰتِ
कलमात की
رَبِّهَا
अपने रब के
وَكُتُبِهِۦ
और उसकी किताबों की
وَكَانَتْ
और थी वो
مِنَ
of
ٱلْقَـٰنِتِينَ
फ़रमाबरदारों में से
और इमरान की बेटी मरयम की मिसाल पेश ही है जिसने अपने सतीत्व की रक्षा की थी, फिर हमने उस स्त्री के भीतर अपनी रूह फूँक दी और उसने अपने रब के बोलों और उसकी किताबों की पुष्टि की और वह भक्ति-प्रवृत्त आज्ञाकारियों में से थी
तफ़्सीर:
तथा अल्लाह ने उन लोगों के लिए, जो अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाए, मरयम बिन्त इमरान का उदाहरण पेश किया है, जिसने खुद को व्यभिचार से सुरक्षित रखा, तो अल्लाह ने जिबरील को उसके अंदर फूँक मारने का आदेश दिया। चुनाँचे उसने अल्लाह की शक्ति के साथ बिना बाप के ईसा बिन मरयम अलैहिस्सलाम का गर्भ धारण कर लिया। तथा उसने अल्लाह के नियमों की और उसके रसूलों पर अवतरित उसकी किताबों की पुष्टि की। और वह अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसकी मना की हुई बातों से बचकर उसका आज्ञापालन करने वालों में से थी।
आज की ज़िंदगी में सबक़
खुद को और घरवालों को दोज़ख़ की आग से बचाने की ताकीद के साथ सूरह का इख्तिताम होता है। यह सबक हमें सिखाता है कि घर के मुखिया की ज़िम्मेदारी है कि वह अपने और अपने घरवालों की दीनी तरबियत का ख्याल रखे।
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