सूरह अल-इंसान سورة الإنسان
मदनी 31 आयतें
नाम का मतलब
इंसान (इंसान की तख्लीक और उसके इम्तिहान के ज़िक्र से)
पृष्ठभूमि
सूरह अल-इंसान (जिसे अद-दहर भी कहा जाता है) में इंसान की तख्लीक, उसकी आज़माइश और नेक बंदों के लिए जन्नत की नेमतों का ज़िक्र है।
फ़ज़ीलत / सार
इस सूरह में नेक बंदों की सिफात, जैसे भूखे-यतीम-कैदी को खाना खिलाना, बयान हुई हैं, जो सच्ची नेकी की एक जामे मिसाल है।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
आयत 1
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ هَلْ أَتَىٰ عَلَى ٱلْإِنسَـٰنِ حِينٌۭ مِّنَ ٱلدَّهْرِ لَمْ يَكُن شَيْـًۭٔا مَّذْكُورًا
هَلْ
क्या
أَتَىٰ
आया है
عَلَى
upon
ٱلْإِنسَـٰنِ
इन्सान पर
حِينٌۭ
एक वक़्त
مِّنَ
of
ٱلدَّهْرِ
ज़माने में से
لَمْ
कि ना
يَكُن
था वो
شَيْـًۭٔا
कोई चीज़
مَّذْكُورًا
क़ाबिले ज़िक्र
क्या मनुष्य पर काल-खंड का ऐसा समय भी बीता है कि वह कोई ऐसी चीज़ न था जिसका उल्लेख किया जाता?
तफ़्सीर:
निश्चय मनुष्य पर एक लंबा समय बीता है, जिसके दौरान वह अस्तित्वहीन था, उसका कोई उल्लेख नहीं था
आयत 2
إِنَّا خَلَقْنَا ٱلْإِنسَـٰنَ مِن نُّطْفَةٍ أَمْشَاجٍۢ نَّبْتَلِيهِ فَجَعَلْنَـٰهُ سَمِيعًۢا بَصِيرًا
إِنَّا
बेशक हम
خَلَقْنَا
पैदा किया हमने
ٱلْإِنسَـٰنَ
इन्सान को
مِن
from
نُّطْفَةٍ
एक नुत्फ़े से
أَمْشَاجٍۢ
मिले-जुले /मख़लूत
نَّبْتَلِيهِ
कि हम आज़माऐं उसे
فَجَعَلْنَـٰهُ
तो बनाया हमने उसे
سَمِيعًۢا
ख़ूब सुनने वाला
بَصِيرًا
ख़ूब देखने वाला
हमने मनुष्य को एक मिश्रित वीर्य से पैदा किया, उसे उलटते-पलटते रहे, फिर हमने उसे सुनने और देखनेवाला बना दिया
तफ़्सीर:
हमने इनसान को एक पुरुष और एक महिला के पानी से मिश्रित वीर्य से पैदा किया, हम उसे शरई अहकाम का बाध्य करके उसका परीक्षण करते हैं। इसलिए हमने उसे सुनने वाला, देखने वाला बनाया, ताकि हमने उसे शरई अहकाम की जो ज़िम्मेदारी सौंपी है, उसे वह अंजाम दे सके।
आयत 3
إِنَّا هَدَيْنَـٰهُ ٱلسَّبِيلَ إِمَّا شَاكِرًۭا وَإِمَّا كَفُورًا
إِنَّا
बेशक हम
هَدَيْنَـٰهُ
हिदायत दी हमने उसे
ٱلسَّبِيلَ
रास्ते की
إِمَّا
ख़्वाह
شَاكِرًۭا
शुक्रगुज़ार हो
وَإِمَّا
और ख़्वाह
كَفُورًا
नाशुक्रा हो
हमने उसे मार्ग दिखाया, अब चाहे वह कृतज्ञ बने या अकृतज्ञ
तफ़्सीर:
हमने अपने रसूलों की ज़बानी उसके लिए हिदायत का रास्ता बयान कर दिया, जिससे उसके लिए गुमराही का मार्ग स्पष्ट हो गया। अब वह इसके बाद या तो सीधे रास्ते को पकड़ ले और अल्लाह का शुक्रगुज़ार मोमिन बंदा बन जाए, और या तो उससे भटक जाए और अल्लाह की आयतों का इनकार करने वाला काफ़िर बंदा बन जाए।
आयत 4
إِنَّآ أَعْتَدْنَا لِلْكَـٰفِرِينَ سَلَـٰسِلَا۟ وَأَغْلَـٰلًۭا وَسَعِيرًا
إِنَّآ
बेशक हम
أَعْتَدْنَا
तैयार कर रखा है हमने
لِلْكَـٰفِرِينَ
काफ़िरों के लिए
سَلَـٰسِلَا۟
ज़नजीरों को
وَأَغْلَـٰلًۭا
और तौक़ को
وَسَعِيرًا
और भड़कती आग को
हमने इनकार करनेवालों के लिए ज़जीरें और तौक़ और भड़कती हुई आग तैयार कर रखी है
तफ़्सीर:
हमने अल्लाह और उसके रसूलों का इनकार करने वालों के लिए ज़ंजीरें तैयार की हैं, जिनके साथ वे आग में घसीटे जाएँगे, और तौक़ तैयार की हैं, जो उन्हें पहनाए जाएँगे और भड़कती हुई आग तैयार की है।
आयत 5
إِنَّ ٱلْأَبْرَارَ يَشْرَبُونَ مِن كَأْسٍۢ كَانَ مِزَاجُهَا كَافُورًا
إِنَّ
बेशक
ٱلْأَبْرَارَ
नेक लोग
يَشْرَبُونَ
वो पीयेंगे
مِن
from
كَأْسٍۢ
एक साग़र से
كَانَ
होगी
مِزَاجُهَا
आमेज़िश उसकी
كَافُورًا
काफ़ूर से
निश्चय ही वफ़ादार लोग ऐसे जाम से पिएँगे जिसमें काफ़ूर का मिश्रण होगा,
तफ़्सीर:
अल्लाह की आज्ञा का पालन करने वाले मोमिन, क़ियामत के दिन शराब के भरे हुए एक ऐसे जाम से पिएँगे, जिसके साथ उसकी अच्छी महक के लिए कपूर मिश्रित होगा।
आयत 6
عَيْنًۭا يَشْرَبُ بِهَا عِبَادُ ٱللَّهِ يُفَجِّرُونَهَا تَفْجِيرًۭا
عَيْنًۭا
एक चश्मा है
يَشْرَبُ
पीयेंगे
بِهَا
उससे
عِبَادُ
बन्दे
ٱللَّهِ
अल्लाह के
يُفَجِّرُونَهَا
वो फाड़ ले जाऐंगे उसको
تَفْجِيرًۭا
फाड़ ले जाना
उस स्रोत का क्या कहना! जिस पर बैठकर अल्लाह के बन्दे पिएँगे, इस तरह कि उसे बहा-बहाकर (जहाँ चाहेंगे) ले जाएँगे
तफ़्सीर:
आज्ञाकारियों के लिए तैयार किया गया यह पेय एक ऐसे स्रोत से है, जो पीने में आसान है और प्रचुर मात्रा में है, जो कभी ख़त्म नहीं होगा। उससे अल्लाह के बंदे पीएँगे और उसे जहाँ चाहेंगे, बहा ले जाएँगे।
आयत 7
يُوفُونَ بِٱلنَّذْرِ وَيَخَافُونَ يَوْمًۭا كَانَ شَرُّهُۥ مُسْتَطِيرًۭا
يُوفُونَ
वो पूरी करते हैं
بِٱلنَّذْرِ
नज़र / मन्नत
وَيَخَافُونَ
और वो डरते हैं
يَوْمًۭا
एक दिन से
كَانَ
होगा
شَرُّهُۥ
शर जिसका
مُسْتَطِيرًۭا
फैल जाने वाला
वे नज़र (मन्नत) पूरी करते है और उस दिन से डरते है जिसकी आपदा व्यापक होगी,
तफ़्सीर:
इसे पीने वाले बंदों की विशेषताएँ यह हैं कि वे जिन नेकी के कामों को अपने ऊपर अनिवार्य कर लेते हैं, उन्हें पूरा करते हैं और उस दिन से डरते हैं, जिसकी बुराई बहुत अधिक फैली हुई होगी और वह क़ियामत का दिन है।
आयत 8
وَيُطْعِمُونَ ٱلطَّعَامَ عَلَىٰ حُبِّهِۦ مِسْكِينًۭا وَيَتِيمًۭا وَأَسِيرًا
وَيُطْعِمُونَ
और वो खिलाते हैं
ٱلطَّعَامَ
खाना
عَلَىٰ
in spite of
حُبِّهِۦ
उसकी मुहब्बत में
مِسْكِينًۭا
मिसकीन
وَيَتِيمًۭا
और यतीम
وَأَسِيرًا
और क़ैदी को
और वे मुहताज, अनाथ और क़ैदी को खाना उसकी चाहत रखते हुए खिलाते है,
तफ़्सीर:
और वे अपनी आवश्यकता और इच्छा के कारण, खाने को पसंद करने के बावजूद, उसे ग़रीबों, अनाथों और बंदियों जैसे ज़रूरतमंदों को खिला देते हैं।
आयत 9
إِنَّمَا نُطْعِمُكُمْ لِوَجْهِ ٱللَّهِ لَا نُرِيدُ مِنكُمْ جَزَآءًۭ وَلَا شُكُورًا
إِنَّمَا
बेशक
نُطْعِمُكُمْ
हम खिलाते हैं तुम्हें
لِوَجْهِ
चेहरे के लिए
ٱللَّهِ
अल्लाह के
لَا
Not
نُرِيدُ
नहीं हम चाहते
مِنكُمْ
तुम से
جَزَآءًۭ
कोई बदला
وَلَا
और ना
شُكُورًا
कोई शुक्रिया
"हम तो केवल अल्लाह की प्रसन्नता के लिए तुम्हें खिलाते है, तुमसे न कोई बदला चाहते है और न कृतज्ञता ज्ञापन
तफ़्सीर:
वे अपने दिल में यह बात रखते हैं कि वे उन्हें केवल अल्लाह की प्रसन्नता की प्राप्ति के लिए खाना खिलाते हैं। वे उन्हें खिलाने के लिए उनसे कोई बदला या प्रशंसा नहीं चाहते हैं।
आयत 10
إِنَّا نَخَافُ مِن رَّبِّنَا يَوْمًا عَبُوسًۭا قَمْطَرِيرًۭا
إِنَّا
बेशक हम
نَخَافُ
हम डरते हैं
مِن
from
رَّبِّنَا
अपने रब से
يَوْمًا
दिन से
عَبُوسًۭا
बहुत तेवरी चढ़ाने वाला
قَمْطَرِيرًۭا
निहायत सख़्त
"हमें तो अपने रब की ओर से एक ऐसे दिन का भय है जो त्योरी पर बल डाले हुए अत्यन्त क्रूर होगा।"
तफ़्सीर:
हम अपने पालनहार से उस दिन से डरते हैं, जिसकी गंभीरता और भयावहता के कारण अभागा लोगों के माथे पर बल पड़े हुए होंगे।
आज की ज़िंदगी में सबक़
इंसान की तख्लीक और उसकी आज़माइश का ज़िक्र है। यह हमें सिखाता है कि अल्लाह ने इंसान को अच्छे-बुरे दोनों रास्तों की पहचान दी है, चुनाव इंसान के हाथ में है।
आयत 11
فَوَقَىٰهُمُ ٱللَّهُ شَرَّ ذَٰلِكَ ٱلْيَوْمِ وَلَقَّىٰهُمْ نَضْرَةًۭ وَسُرُورًۭا
فَوَقَىٰهُمُ
पस बचा लेगा उन्हें
ٱللَّهُ
अल्लाह
شَرَّ
शर से
ذَٰلِكَ
उस
ٱلْيَوْمِ
दिन के
وَلَقَّىٰهُمْ
और वो अता करेगा उन्हें
نَضْرَةًۭ
ताज़गी
وَسُرُورًۭا
और ख़ुशी
अतः अल्लाह ने उस दिन की बुराई से बचा लिया और उन्हें ताज़गी और ख़ुशी प्रदान की,
तफ़्सीर:
तो अल्लाह ने उन्हें अपने अनुग्रह से उस महान दिन की आपदा से बचा लिया, और उन्हें, उनके सम्मान के लिए, उनके चेहरों पर चमक और प्रकाश, तथा उनके दिलों में ख़ुशी प्रदान किया।
आयत 12
وَجَزَىٰهُم بِمَا صَبَرُوا۟ جَنَّةًۭ وَحَرِيرًۭا
وَجَزَىٰهُم
और वो बदला देगा उन्हें
بِمَا
बवजह उसके जो
صَبَرُوا۟
उन्होंने सब्र किया
جَنَّةًۭ
जन्नत
وَحَرِيرًۭا
और रेशम
और जो उन्होंने धैर्य से काम लिया, उसके बदले में उन्हें जन्नत और रेशमी वस्त्र प्रदान किया
तफ़्सीर:
और अल्लाह ने उन्हें (उनके नेक कार्यों पर जमे रहने, अल्लाह के निर्णयों पर सब्र करने और गुनाहों से दूर रहने के कारण) जन्नत प्रदान की, जिसकी नेमतों का वे आनंद लेंगे, और रेशमी वस्त्र प्रदान किया जो वे पहनेंगे।
आयत 13
مُّتَّكِـِٔينَ فِيهَا عَلَى ٱلْأَرَآئِكِ ۖ لَا يَرَوْنَ فِيهَا شَمْسًۭا وَلَا زَمْهَرِيرًۭا
مُّتَّكِـِٔينَ
तकिया लगाए हुए होंगे
فِيهَا
उसमें
عَلَى
on
ٱلْأَرَآئِكِ ۖ
मसनदों पर
لَا
Not
يَرَوْنَ
ना वो देखेंगे
فِيهَا
उसमें
شَمْسًۭا
सख़्त धूप
وَلَا
और ना
زَمْهَرِيرًۭا
सख़्त ठंडक
उसमें वे तख़्तों पर टेक लगाए होंगे, वे उसमें न तो सख़्त धूप देखेंगे औ न सख़्त ठंड़
तफ़्सीर:
वे उसके अंदर अलंकृत तख्तों पर टेक लगाए बैठे होंगे। वे न उसमें सूरज देखेंगे, जिसकी किरणें उन्हें कष्ट देंगी और न ही भयंकर ठंड। बल्कि वे एक स्थायी छाया में होंगे, जिसमें न तो गर्मी होगी और न ही ठंड।
आयत 14
وَدَانِيَةً عَلَيْهِمْ ظِلَـٰلُهَا وَذُلِّلَتْ قُطُوفُهَا تَذْلِيلًۭا
وَدَانِيَةً
और झुके हुए होंगे
عَلَيْهِمْ
उन पर
ظِلَـٰلُهَا
साय उसके
وَذُلِّلَتْ
और ताबेअ कर दिए जाऐंगे
قُطُوفُهَا
फल उसके
تَذْلِيلًۭا
ताबेअ किया जाना
और उस (बाग़) के साए उनपर झुके होंगे और उसके फलों के गुच्छे बिलकुल उनके वश में होंगे
तफ़्सीर:
उसके साए उनके क़रीब होंगे और उसके फल खाने वाले के वश में कर दिए जाएँगे। चुनाँचे वह बड़ी आसानी से उन्हें ले सकेगा, वह लेटे, बैठे और खड़े जिस तरह चाहेगा, उन्हें तोड़ सकेगा।
आयत 15
وَيُطَافُ عَلَيْهِم بِـَٔانِيَةٍۢ مِّن فِضَّةٍۢ وَأَكْوَابٍۢ كَانَتْ قَوَارِيرَا۠
وَيُطَافُ
और फिराए जाऐंगे
عَلَيْهِم
उन पर
بِـَٔانِيَةٍۢ
बर्तन
مِّن
of
فِضَّةٍۢ
चाँदी के
وَأَكْوَابٍۢ
और प्याले
كَانَتْ
होंगे
قَوَارِيرَا۠
शीशे के
और उनके पास चाँदी के बरतन ग़र्दिश में होंगे और प्याले
तफ़्सीर:
और जब वे पीने की इच्छा करेंगे, तो सेवक चाँदी के बरतन और उसके पारदर्शी प्याले लिए हुए उनके पास घूम रहे होंगे।
आयत 16
قَوَارِيرَا۟ مِن فِضَّةٍۢ قَدَّرُوهَا تَقْدِيرًۭا
قَوَارِيرَا۟
शीशे
مِن
of
فِضَّةٍۢ
चाँदी के
قَدَّرُوهَا
उन्होंने अंदाज़ा कर रखा होगा उनका
تَقْدِيرًۭا
ख़ूब अंदाज़ा रखना
जो बिल्कुल शीशे हो रहे होंगे, शीशे भी चाँदी के जो ठीक अन्दाज़े करके रखे गए होंगे
तफ़्सीर:
वे शीशे की तरह चमक रहे होंगे, परंतु वे चाँदी के होंगे। उनका पीने वालों की इच्छा के अनुसार अनुमान लगाया गया होगा, न उससे अधिक और न ही कम।
आयत 17
وَيُسْقَوْنَ فِيهَا كَأْسًۭا كَانَ مِزَاجُهَا زَنجَبِيلًا
وَيُسْقَوْنَ
और वो पिलाए जाऐंगे
فِيهَا
उसमें एक
كَأْسًۭا
एक जाम
كَانَ
होगी
مِزَاجُهَا
आमेज़िश उसमें
زَنجَبِيلًا
सोंठ की
और वहाँ वे एक और जाम़ पिएँगे जिसमें सोंठ का मिश्रण होगा
तफ़्सीर:
और ये सम्मानित लोग सोंठ मिली हुई शराब के जाम पिलाए जाएँगे।
आयत 18
عَيْنًۭا فِيهَا تُسَمَّىٰ سَلْسَبِيلًۭا
عَيْنًۭا
एक चश्मा होगा
فِيهَا
उसमें
تُسَمَّىٰ
नाम रखा गया जिसका
سَلْسَبِيلًۭا
सलसबील
क्या कहना उस स्रोत का जो उसमें होगा, जिसका नाम सल-सबील है
तफ़्सीर:
वे जन्नत में एक स्रोत से पिलाए जाएँगे, जिसे 'सलसबील' कहा जाता है।
आयत 19
۞ وَيَطُوفُ عَلَيْهِمْ وِلْدَٰنٌۭ مُّخَلَّدُونَ إِذَا رَأَيْتَهُمْ حَسِبْتَهُمْ لُؤْلُؤًۭا مَّنثُورًۭا
۞ وَيَطُوفُ
और गर्दिश करेंगे
عَلَيْهِمْ
उन पर
وِلْدَٰنٌۭ
लड़के
مُّخَلَّدُونَ
हमेशा रहने वाले
إِذَا
जब
رَأَيْتَهُمْ
तुम देखोगे उन्हें
حَسِبْتَهُمْ
समझोगे तुम उन्हें
لُؤْلُؤًۭا
मोती हैं
مَّنثُورًۭا
बिखरे हुए
उनकी सेवा में ऐसे किशोर दौड़ते रहे होंगे जो सदैव किशोर ही रहेंगे। जब तुम उन्हें देखोगे तो समझोगे कि बिखरे हुए मोती है
तफ़्सीर:
और जन्नत में उनके आस-पास ऐसे बालक चक्कर लगा रहे होंगे, जो सदा जवान रहेंगे। उनके चेहरे ऐसे तरो-ताज़ा होंगे, उनका रंग इतना सुंदर होगा और वे इतनी बड़ी संख्या में इधर-उधर फैले होंगे कि जब तुम उन्हें देखोगे, तो बिखरे हुए मोती समझोगे।
आयत 20
وَإِذَا رَأَيْتَ ثَمَّ رَأَيْتَ نَعِيمًۭا وَمُلْكًۭا كَبِيرًا
وَإِذَا
और जब
رَأَيْتَ
देखोगे तुम
ثَمَّ
वहाँ
رَأَيْتَ
तुम देखोगे
نَعِيمًۭا
आसाइशें
وَمُلْكًۭا
और बादशाहत
كَبِيرًا
बहुत बड़ी
जब तुम वहाँ देखोगे तो तुम्हें बड़ी नेमत और विशाल राज्य दिखाई देगा
तफ़्सीर:
और जब तुम देखोगे कि जन्नत में क्या है, तो तुम अवर्णनीय आनंद देखोगे, तथा तुम एक महान राज्य को देखोगे, जिसकी तुलना किसी भी राज्य से नहीं की जा सकती।
आज की ज़िंदगी में सबक़
नेक बंदों की जन्नत की नेमतों का ज़िक्र है। यह सबक हमें सिखाता है कि दुनिया में सब्र और नेकी करने वालों को आखिरत में शानदार नेमतें मिलेंगी।
आयत 21
عَـٰلِيَهُمْ ثِيَابُ سُندُسٍ خُضْرٌۭ وَإِسْتَبْرَقٌۭ ۖ وَحُلُّوٓا۟ أَسَاوِرَ مِن فِضَّةٍۢ وَسَقَىٰهُمْ رَبُّهُمْ شَرَابًۭا طَهُورًا
عَـٰلِيَهُمْ
उन पर
ثِيَابُ
कपड़े होंगे
سُندُسٍ
बारीक रेशम के
خُضْرٌۭ
सब्ज़
وَإِسْتَبْرَقٌۭ ۖ
और मोटे रेशम के
وَحُلُّوٓا۟
और वो पहनाए जाऐंगे
أَسَاوِرَ
कंगन
مِن
of
فِضَّةٍۢ
चाँदी के
وَسَقَىٰهُمْ
और पिलाएगा उन्हें
رَبُّهُمْ
रब उनका
شَرَابًۭا
शराब
طَهُورًا
पाकीज़ा
उनके ऊपर हरे बारीक हरे बारीक रेशमी वस्त्र और गाढ़े रेशमी कपड़े होंगे, और उन्हें चाँदी के कंगन पहनाए जाएँगे और उनका रब उन्हें पवित्र पेय पिलाएगा
तफ़्सीर:
उनके शरीर पर पतले रेशम और दबीज़ रेशम से बने शानदार हरे कपड़े होंगे, और वहाँ उन्हें चाँदी के कंगन पहनाए जाएँगे और अल्लाह उन्हें ऐसी शराब पिलाएगा, जो हर अप्रिय चीज़ से पाक होगी।
आयत 22
إِنَّ هَـٰذَا كَانَ لَكُمْ جَزَآءًۭ وَكَانَ سَعْيُكُم مَّشْكُورًا
إِنَّ
बेशक
هَـٰذَا
ये
كَانَ
है
لَكُمْ
तुम्हारे लिए
جَزَآءًۭ
बदला
وَكَانَ
और है
سَعْيُكُم
कोशिश तुम्हारी
مَّشْكُورًا
क़ाबिले क़दर
"यह है तुम्हारा बदला और तुम्हारा प्रयास क़द्र करने के योग्य है।"
तफ़्सीर:
उनसे उनके सम्मान स्वरूप कहा जाएगा : निश्चय यह नेमत जो तुम्हें दी गई है, तुम्हारे अच्छे कर्मों का प्रतिफल है और तुम्हारे कर्म अल्लाह के यहाँ स्वीकार्य हैं।
आयत 23
إِنَّا نَحْنُ نَزَّلْنَا عَلَيْكَ ٱلْقُرْءَانَ تَنزِيلًۭا
إِنَّا
बेशक हम
نَحْنُ
हमने ही
نَزَّلْنَا
नाज़िल किया हमने
عَلَيْكَ
आप पर
ٱلْقُرْءَانَ
क़ुरआन
تَنزِيلًۭا
आहिस्ता-आहिस्ता नाज़िल करना
निश्चय ही हमने अत्यन्त व्यवस्थित ढंग से तुमपर क़ुरआन अवतरित किया है;
तफ़्सीर:
निश्चय हमने आपपर (ऐ रसूल) यह क़ुरआन थोड़ा-थोड़ा करके उतारा है और उसे आप पर एक ही बार में नहीं उतारा है।
आयत 24
فَٱصْبِرْ لِحُكْمِ رَبِّكَ وَلَا تُطِعْ مِنْهُمْ ءَاثِمًا أَوْ كَفُورًۭا
فَٱصْبِرْ
पस सब्र कीजिए
لِحُكْمِ
हुक्म के लिए
رَبِّكَ
अपने रब के
وَلَا
और ना
تُطِعْ
आप इताअत कीजिए
مِنْهُمْ
उनमें से
ءَاثِمًا
किसी गुनाहगार की
أَوْ
या
كَفُورًۭا
बहुत नाशुक्रे की
अतः अपने रब के हुक्म और फ़ैसले के लिए धैर्य से काम लो और उनमें से किसी पापी या कृतघ्न का आज्ञापालन न करना
तफ़्सीर:
अतः अल्लाह जो कुछ निर्णय करता या धार्मिक आदेश देता है, आप उसके लिए धैर्य रखें, तथा किसी पापी का उस पाप में पालन न करें जिसके लिए वह कहता है, और न किसी काफ़िर का उस कुफ़्र में अनुसरण करें जिसके लिए वह आह्वान करता है।
आयत 25
وَٱذْكُرِ ٱسْمَ رَبِّكَ بُكْرَةًۭ وَأَصِيلًۭا
وَٱذْكُرِ
और याद कीजिए
ٱسْمَ
नाम
رَبِّكَ
अपने रब का
بُكْرَةًۭ
सुबह
وَأَصِيلًۭا
और शाम
और प्रातःकाल और संध्या समय अपने रब के नाम का स्मरण करो
तफ़्सीर:
और अपने रब को दिन की शुरुआत में फ़ज्र की नमाज़ के ज़रिए और उसके अंतिम भाग में ज़ुहर और अस्र की नमाज़ के ज़रिए याद करते रहें।
आयत 26
وَمِنَ ٱلَّيْلِ فَٱسْجُدْ لَهُۥ وَسَبِّحْهُ لَيْلًۭا طَوِيلًا
وَمِنَ
And of
ٱلَّيْلِ
और रात के कुछ हिस्से में
فَٱسْجُدْ
पस सजदा कीजिए
لَهُۥ
उसके लिए
وَسَبِّحْهُ
और तस्बीह कीजिए उसकी
لَيْلًۭا
रात में
طَوِيلًا
लम्बी
और रात के कुछ हिस्से में भी उसे सजदा करो, लम्बी-लम्बी रात तक उसकी तसबीह करते रहो
तफ़्सीर:
और उसे रात की दो नमाज़ों : मग़रिब एवं इशा की नमाज़ों के ज़रिए याद करें, तथा इनके बाद भी उसके लिए जागकर नमाज़ पढ़ें।
आयत 27
إِنَّ هَـٰٓؤُلَآءِ يُحِبُّونَ ٱلْعَاجِلَةَ وَيَذَرُونَ وَرَآءَهُمْ يَوْمًۭا ثَقِيلًۭا
إِنَّ
बेशक
هَـٰٓؤُلَآءِ
ये लोग
يُحِبُّونَ
मुहब्बत रखते हैं
ٱلْعَاجِلَةَ
जल्द मिलने वाली (दुनिया) से
وَيَذَرُونَ
और वो छोड़ देते हैं
وَرَآءَهُمْ
पीछे अपने
يَوْمًۭا
एक दिन
ثَقِيلًۭا
बहुत भारी
निस्संदेह ये लोग शीघ्र प्राप्त होनेवाली चीज़ (संसार) से प्रेम रखते है और एक भारी दिन को अपने परे छोड़ रह है
तफ़्सीर:
ये मुश्रिक लोग सांसारिक जीवन से प्यार करते हैं और उसके लिए उत्सुक होते हैं, और क़ियामत के दिन को अपने पीछे छोड़ देते हैं, जो एक भारी दिन है, क्योंकि उसमें कठिनाइयों और क्लेशों का सामना होगा।
आयत 28
نَّحْنُ خَلَقْنَـٰهُمْ وَشَدَدْنَآ أَسْرَهُمْ ۖ وَإِذَا شِئْنَا بَدَّلْنَآ أَمْثَـٰلَهُمْ تَبْدِيلًا
نَّحْنُ
हम ही ने
خَلَقْنَـٰهُمْ
पैदा किया हमने उन्हें
وَشَدَدْنَآ
और मज़बूत किए हमने
أَسْرَهُمْ ۖ
जोड़ उनके
وَإِذَا
और जब
شِئْنَا
चाहें हम
بَدَّلْنَآ
बदल दें हम
أَمْثَـٰلَهُمْ
उन जैसों को
تَبْدِيلًا
बदल देना
हमने उन्हें पैदा किया और उनके जोड़-बन्द मज़बूत किेए और हम जब चाहे उन जैसों को पूर्णतः बदल दें
तफ़्सीर:
हम ही ने उन्हें पैदा किया और उनके जोड़ों और अंगों आदि को मज़बूत करके उनकी रचना को मज़बूत किया। तथा जब हम उन्हें नष्ट करना और उन्हें बदलकर उन्हीं जैसों को लाना चाहेंगे, तो हम उन्हें नष्ट कर देंगे और उन्हें बदल देंगे।
आयत 29
إِنَّ هَـٰذِهِۦ تَذْكِرَةٌۭ ۖ فَمَن شَآءَ ٱتَّخَذَ إِلَىٰ رَبِّهِۦ سَبِيلًۭا
إِنَّ
बेशक
هَـٰذِهِۦ
ये
تَذْكِرَةٌۭ ۖ
एक याद देहानी है
فَمَن
तो जो कोई
شَآءَ
चाहे
ٱتَّخَذَ
वो बना ले
إِلَىٰ
to
رَبِّهِۦ
तरफ़ अपने रब के
سَبِيلًۭا
रास्ता
निश्चय ही यह एक अनुस्मृति है, अब जो चाहे अपने रब की ओर मार्ग ग्रहण कर ले
तफ़्सीर:
निश्चय यह सूरत एक उपदेश और याददेहानी है। अतः जो अल्लाह की प्रसन्नता तक पहुँचाने वाला मार्ग ग्रहण करना चाहे, उसे ग्रहण कर ले।
आयत 30
وَمَا تَشَآءُونَ إِلَّآ أَن يَشَآءَ ٱللَّهُ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ كَانَ عَلِيمًا حَكِيمًۭا
وَمَا
और नहीं
تَشَآءُونَ
तुम चाहते
إِلَّآ
मगर
أَن
ये कि
يَشَآءَ
चाहे
ٱللَّهُ ۚ
अल्लाह
إِنَّ
बेशक
ٱللَّهَ
अल्लाह
كَانَ
है वो
عَلِيمًا
बहुत इल्म वाला
حَكِيمًۭا
ख़ूब हिकमत वाला
और तुम नहीं चाह सकते सिवाय इसके कि अल्लाह चाहे। निस्संदेह अल्लाह सर्वज्ञ, तत्वदर्शी है
तफ़्सीर:
और तुम अल्लाह की प्रसन्नता का मार्ग ग्रहण करने की इच्छा नहीं कर सकते, सिवाय इसके कि अल्लाह तुमसे ऐसा चाहे। क्योंकि सारा मामला अल्लाह के हाथ में है। अल्लाह जानता है कि उसके बंदों के लिए क्या अच्छा है, और उनके लिए क्या अच्छा नहीं है। वह अपनी रचना, तक़दीर (नियति) और शरीयत में हिकमत वाला है।
आज की ज़िंदगी में सबक़
नेक बंदों की सिफात (भूखे-यतीम-कैदी को खाना खिलाना, इखलास) का ज़िक्र है। यह हमें सिखाता है कि ज़रूरतमंद को खाना खिलाना सिर्फ हमदर्दी नहीं, बल्कि जन्नत का ज़रिया भी है, बशर्ते इखलास (सिर्फ अल्लाह के लिए) के साथ किया जाए।
आयत 31
يُدْخِلُ مَن يَشَآءُ فِى رَحْمَتِهِۦ ۚ وَٱلظَّـٰلِمِينَ أَعَدَّ لَهُمْ عَذَابًا أَلِيمًۢا
يُدْخِلُ
वो दाख़िल करता है
مَن
जिसे
يَشَآءُ
वो चाहता है
فِى
into
رَحْمَتِهِۦ ۚ
अपनी रहमत में
وَٱلظَّـٰلِمِينَ
और ज़ालिम लोग
أَعَدَّ
उसने तैयार कर रखा है
لَهُمْ
उनके लिए
عَذَابًا
अज़ाब
أَلِيمًۢا
दर्दनाक
वह जिसे चाहता है अपनी दयालुता में दाख़िल करता है। रहे ज़ालिम, तो उनके लिए उसने दुखद यातना तैयार कर रखी है
तफ़्सीर:
वह अपने बंदों में से जिसे चाहता है, अपनी रहमत में दाखिल करता है। अतः वह उन्हें ईमान और सत्कर्म का सामर्थ्य प्रदान करता है। तथा उसने अपने आपपर कुफ़्र और पापों के द्वारा अत्याचार करने वालों के लिए दर्दनाक यातना तैयार कर रखी है, और वह जहन्नम की यातना है।
आज की ज़िंदगी में सबक़
अल्लाह की मशिय्यत (मर्ज़ी) पर भरोसे के ज़िक्र के साथ सूरह का इख्तिताम होता है। यह सबक हमें सिखाता है कि हर काम में अपनी कोशिश के साथ अल्लाह की मर्ज़ी और मदद पर भरोसा रखना ज़रूरी है।
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