नाम का मतलब
भेजी जाने वाली हवाएं (कसम खाई गई हवाओं के ज़िक्र से)
पृष्ठभूमि
सूरह अल-मुर्सलात में कयामत के दिन की सच्चाई बार-बार दोहराए गए एक जुमले के साथ बयान हुई है: उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ी तबाही है।
फ़ज़ीलत / सार
इस सूरह का बार-बार दोहराया जाने वाला जुमला कयामत के इनकार करने वालों के लिए एक सख्त तंबीह और नसीहत है।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
आयत 1
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ وَٱلْمُرْسَلَـٰتِ عُرْفًۭا
وَٱلْمُرْسَلَـٰتِ
क़सम है उन हवाओं की जो छोड़ी जाती हैं
عُرْفًۭا
मुतवातिर
साक्षी है वे (हवाएँ) जिनकी चोटी छोड़ दी जाती है
तफ़्सीर:
अल्लाह ने घोड़े की अयाल की तरह लगातार चलने वाली हवाओं की क़सम खाई है।
आयत 2
فَٱلْعَـٰصِفَـٰتِ عَصْفًۭا
فَٱلْعَـٰصِفَـٰتِ
फिर उनकी जो तेज़ चलती हैं
عَصْفًۭا
तेज़ चलना
फिर ख़ूब तेज़ हो जाती है,
तफ़्सीर:
तथा अल्लाह ने बहुत तेज़ चलने वाली हवाओं की क़सम खाई है।
आयत 3
وَٱلنَّـٰشِرَٰتِ نَشْرًۭا
وَٱلنَّـٰشِرَٰتِ
और उनकी जो फैलाने वाली हैं
نَشْرًۭا
फैलाना
और (बादलों को) उठाकर फैलाती है,
तफ़्सीर:
और अल्लाह ने उन हवाओं की क़सम खाई है, जो बादलों को फैलाती हैं।
आयत 4
فَٱلْفَـٰرِقَـٰتِ فَرْقًۭا
فَٱلْفَـٰرِقَـٰتِ
फिर जो जुदा करने वाली हैं
فَرْقًۭا
जुदा करना
फिर मामला करती है अलग-अलग,
तफ़्सीर:
और अल्लाह ने उन फ़रिश्तों की क़सम खाई है, जो सत्य और असत्य के बीच अंतर करने वाली चीज़ के साथ उतरते हैं।
आयत 5
فَٱلْمُلْقِيَـٰتِ ذِكْرًا
فَٱلْمُلْقِيَـٰتِ
फिर जो डालने वाली हैं
ذِكْرًا
ज़िक्र को
फिर पेश करती है याददिहानी
तफ़्सीर:
और अल्लाह ने उन फ़रिश्तों की क़सम खाई है, जो वह़्य (प्रकाशना) के साथ उतरते हैं।
आयत 6
عُذْرًا أَوْ نُذْرًا
عُذْرًا
उज़्र के तौर पर
أَوْ
या
نُذْرًا
डरावे के तौर पर
इल्ज़ाम उतारने या चेतावनी देने के लिए,
तफ़्सीर:
जो वह़्य (प्रकाशना) लेकर उतरते हैं, अल्लाह की ओर से लोगों के उज़्र (बहाने) को समाप्त करने के लिए और लोगों को अल्लाह की यातना से सावधान करने के लिए।
आयत 7
إِنَّمَا تُوعَدُونَ لَوَٰقِعٌۭ
إِنَّمَا
बेशक जो
تُوعَدُونَ
तुम वादा किए जाते हो
لَوَٰقِعٌۭ
अलबत्ता वाक़ेअ होने वाला है
निस्संदेह जिसका वादा तुमसे किया जा रहा है वह निश्चित ही घटित होकर रहेगा
तफ़्सीर:
निःसंदेह मरणोपरांत पुनः जीवित होकर उठने, हिसाब और प्रतिफल का जो तुमसे वादा किया जाता है, निश्चय वह अनिवार्य रूप से घटित होने वाला है।
आयत 8
فَإِذَا ٱلنُّجُومُ طُمِسَتْ
فَإِذَا
फिर जब
ٱلنُّجُومُ
सितारे
طُمِسَتْ
मिटा दिए जाऐंगे
अतः जब तारे विलुप्त (प्रकाशहीन) हो जाएँगे,
तफ़्सीर:
जब तारों के प्रकाश को मिटा दिया जाएगा और उनकी रोशनी चली जाएगी।
आयत 9
وَإِذَا ٱلسَّمَآءُ فُرِجَتْ
وَإِذَا
और जब
ٱلسَّمَآءُ
आसमान
فُرِجَتْ
खोला जाएगा
और जब आकाश फट जाएगा
तफ़्सीर:
और जब आकाश को फाड़ (खोल) दिया जाएगा, ताकि उससे फ़रिश्ते उतर सकें।
आयत 10
وَإِذَا ٱلْجِبَالُ نُسِفَتْ
وَإِذَا
और जब
ٱلْجِبَالُ
पहाड़
نُسِفَتْ
उड़ा दिए जाऐंगे
और पहाड़ चूर्ण-विचूर्ण होकर बिखर जाएँगे;
तफ़्सीर:
और जब पहाड़ों को उनके स्थानों से उखाड़ दिया जाएगा और उन्हें चूर्ण-विचूर्ण कर दिया जाएगा यहाँ तक कि वे धूल बन जाएँगे।
आज की ज़िंदगी में सबक़
कसमों के साथ कयामत की सच्चाई का ऐलान है। यह हमें सिखाता है कि जो बात बार-बार दोहराई जाए, उसकी अहमियत उतनी ही ज़्यादा समझनी चाहिए, कयामत की सच्चाई भी ऐसी ही है।
आयत 11
وَإِذَا ٱلرُّسُلُ أُقِّتَتْ
وَإِذَا
और जब
ٱلرُّسُلُ
रसूल
أُقِّتَتْ
मुक़र्रर वक़्त पर लाए जाऐंगे
और जब रसूलों का हाल यह होगा कि उन का समय नियत कर दिया गया होगा -
तफ़्सीर:
और जब रसूलों को एक निर्धारित समय पर एकत्र किया जाएगा।
आयत 12
لِأَىِّ يَوْمٍ أُجِّلَتْ
لِأَىِّ
For what
يَوْمٍ
किस दिन के लिए
أُجِّلَتْ
मुअख़्खर किए गए
किस दिन के लिए वे टाले गए है?
तफ़्सीर:
एक महान दिन के लिए वे अपने समुदायों पर गवाही देने के लिए विलंबित किए गए हैं।
आयत 13
لِيَوْمِ ٱلْفَصْلِ
لِيَوْمِ
दिन के लिए
ٱلْفَصْلِ
फ़ैसले के
फ़ैसले के दिन के लिए
तफ़्सीर:
बंदों के बीच निर्णय के दिन के लिए। उस दिन स्पष्ट हो जाएगा कि कौन सत्यवादी है और कौन असत्यवादी तथा कौन सौभाग्यशाली है और कौन दुर्भाग्यशाली।
आयत 14
وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا يَوْمُ ٱلْفَصْلِ
وَمَآ
और क्या चीज़
أَدْرَىٰكَ
बताए आपको
مَا
क्या है
يَوْمُ
दिन
ٱلْفَصْلِ
फ़ैसले का
और तुम्हें क्या मालूम कि वह फ़ैसले का दिन क्या है? -
तफ़्सीर:
और (ऐ रसूल) आपको किस चीज़ ने अवगत कराया कि निर्णय का दिन क्या है?!
आयत 15
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ
وَيْلٌۭ
हलाकत है
يَوْمَئِذٍۢ
उस दिन
لِّلْمُكَذِّبِينَ
झुठलाने वालों के लिए
तबाही है उस दिन झूठलाने-वालों की!
तफ़्सीर:
उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश, यातना और क्षति है, जो रसूलों के अल्लाह की ओर से लाए हुए संदेश को झुठलाते हैं।
आयत 16
أَلَمْ نُهْلِكِ ٱلْأَوَّلِينَ
أَلَمْ
क्या नहीं
نُهْلِكِ
हमने हलाक किया
ٱلْأَوَّلِينَ
पहलों को
क्या ऐसा नहीं हुआ कि हमने पहलों को विनष्ट किया?
तफ़्सीर:
क्या हमने पिछले समुदायों को विनष्ट नहीं किया, जब उन्होंने अल्लाह का इनकार किया और उसके रसूलों को झुठलाया?
आयत 17
ثُمَّ نُتْبِعُهُمُ ٱلْـَٔاخِرِينَ
ثُمَّ
फिर
نُتْبِعُهُمُ
हम पीछे लाते हैं उनके
ٱلْـَٔاخِرِينَ
बाद वालों को
फिर उन्हीं के पीछे बादवालों को भी लगाते रहे?
तफ़्सीर:
फिर हम उनके पीछे बाद के झुठलाने वालों को लगा देंगे, चुनाँचे जिस तरह हमने उन्हें नष्ट किया था, उसी तरह इन्हें भी नष्ट कर देंगे।
आयत 18
كَذَٰلِكَ نَفْعَلُ بِٱلْمُجْرِمِينَ
كَذَٰلِكَ
इसी तरह
نَفْعَلُ
हम करते हैं
بِٱلْمُجْرِمِينَ
साथ मुजरिमों के
अपराधियों के साथ हम ऐसा ही करते है
तफ़्सीर:
उन समुदायों को विनष्ट करने की तरह, हम मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के लाए हुए संदेश को झुठलाने वाले अपराधियों को भी विनष्ट कर देंगे।
आयत 19
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ
وَيْلٌۭ
हलाकत है
يَوْمَئِذٍۢ
उस दिन
لِّلْمُكَذِّبِينَ
झुठलाने वालों के लिए
तबाही है उस दिन झुठलानेवालो की!
तफ़्सीर:
उस दिन, उन लोगों के लिए विनाश, यातना और क्षति है, जो अपराधियों के लिए अल्लाह की सज़ा की धमकी को झुठलाते हैं।
आयत 20
أَلَمْ نَخْلُقكُّم مِّن مَّآءٍۢ مَّهِينٍۢ
أَلَمْ
क्या नहीं
نَخْلُقكُّم
हमने पैदा किया तुम्हें
مِّن
from
مَّآءٍۢ
पानी से
مَّهِينٍۢ
हक़ीर
क्या ऐस नहीं है कि हमने तुम्हे तुच्छ जल से पैदा किया,
तफ़्सीर:
क्या हमने तुम्हें (ऐ लोगो) थोड़े-से तुच्छ पानी अर्थात् वीर्य की बूँद से पैदा नहीं किया है?!
आज की ज़िंदगी में सबक़
कयामत के दिन के मंज़र और पिछली कौमों के अंजाम का ज़िक्र है। यह सबक हमें सिखाता है कि पिछली कौमों की तबाही से सबक लेना चाहिए, इनकार करने वालों का अंजाम एक जैसा रहा है।
आयत 21
فَجَعَلْنَـٰهُ فِى قَرَارٍۢ مَّكِينٍ
فَجَعَلْنَـٰهُ
फिर रखा हमने उसे
فِى
in
قَرَارٍۢ
ठिकाने में
مَّكِينٍ
मज़बूत
फिर हमने उसे एक सुरक्षित टिकने की जगह रखा,
तफ़्सीर:
फिर हमने उस तुच्छ पानी को एक संरक्षित स्थान पर रख दिया, जो कि महिला का गर्भाशय है।
आयत 22
إِلَىٰ قَدَرٍۢ مَّعْلُومٍۢ
إِلَىٰ
For
قَدَرٍۢ
एक वक़्त तक
مَّعْلُومٍۢ
मालूम
एक ज्ञात और निश्चित अवधि तक?
तफ़्सीर:
एक ज्ञात अवधि तक, जो गर्भावस्था की अवधि है।
आयत 23
فَقَدَرْنَا فَنِعْمَ ٱلْقَـٰدِرُونَ
فَقَدَرْنَا
फिर अंदाज़ा किया हमने
فَنِعْمَ
पस कितने अच्छे हैं
ٱلْقَـٰدِرُونَ
अंदाज़ा करने वाले
फिर हमने अन्दाजा ठहराया, तो हम क्या ही अच्छा अन्दाज़ा ठहरानेवाले है
तफ़्सीर:
फिर हमने नवजात शिशु का विवरण, भाग्य और रंग-रूप आदि नियत किया। तो हम यह सब कैसे अच्छे नियत करने वाले हैं।
आयत 24
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ
وَيْلٌۭ
हलाकत है
يَوْمَئِذٍۢ
उस दिन
لِّلْمُكَذِّبِينَ
झुठलाने वालों के लिए
तबाही है उस दिन झूठलानेवालों की!
तफ़्सीर:
उस दिन, अल्लाह की शक्ति को नकारने वालों के लिए, बड़ा विनाश, यातना और क्षति है।
आयत 25
أَلَمْ نَجْعَلِ ٱلْأَرْضَ كِفَاتًا
أَلَمْ
क्या नहीं
نَجْعَلِ
हमने बनाया
ٱلْأَرْضَ
ज़मीन को
كِفَاتًا
समेटने वाली
क्या ऐसा नहीं है कि हमने धरती को समेट रखनेवाली बनाया,
तफ़्सीर:
क्या हमने धरती को सभी लोगों को समेटने वाली नहीं बनाया?
आयत 26
أَحْيَآءًۭ وَأَمْوَٰتًۭا
أَحْيَآءًۭ
ज़िन्दों
وَأَمْوَٰتًۭا
और मुर्दों को
ज़िन्दों को भी और मुर्दों को भी,
तफ़्सीर:
वह उनके जीवित लोगों को इस तरह समेटती है कि वे उसपर रहते-बसते और उसे आबाद करते हैं, और उनके मृतकों को इस तरह कि वे उसमें दफन किए जाते हैं।
आयत 27
وَجَعَلْنَا فِيهَا رَوَٰسِىَ شَـٰمِخَـٰتٍۢ وَأَسْقَيْنَـٰكُم مَّآءًۭ فُرَاتًۭا
وَجَعَلْنَا
और बनाए हमने
فِيهَا
उसमें
رَوَٰسِىَ
पहाड़
شَـٰمِخَـٰتٍۢ
बुलन्द व बाला
وَأَسْقَيْنَـٰكُم
और पिलाया हमने तुम्हें
مَّآءًۭ
पानी
فُرَاتًۭا
मीठा
और उसमें ऊँचे-ऊँचे पहाड़ जमाए और तुम्हें मीठा पानी पिलाया?
तफ़्सीर:
तथा हमने उसमें मज़बूत, ऊँचे पहाड़ बनाए, जो उसे हिलने-डुलने से बचाते हैं और हमने तुम्हें (ऐ लोगो) मीठा पानी पिलाया। तो जिसने इन सब को पैदा किया, वह तुम्हें मरने के बाद दोबारा जीवित कर उठाने में विवश नहीं है।
आयत 28
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ
وَيْلٌۭ
हलाकत है
يَوْمَئِذٍۢ
उस दिन
لِّلْمُكَذِّبِينَ
झुठलाने वालों के लिए
तबाही है उस दिन झुठलानेवालों की!
तफ़्सीर:
उस दिन, अल्लाह की ओर से मिली हुई नेमतों को झुठलाने वालों के लिए, बड़ा विनाश, यातना और क्षति है।
आयत 29
ٱنطَلِقُوٓا۟ إِلَىٰ مَا كُنتُم بِهِۦ تُكَذِّبُونَ
ٱنطَلِقُوٓا۟
चलो
إِلَىٰ
तरफ़
مَا
उसके जो
كُنتُم
थे तुम
بِهِۦ
उसे
تُكَذِّبُونَ
तुम झुठलाते
चलो उस चीज़ की ओर जिसे तुम झुठलाते रहे हो!
तफ़्सीर:
अपने रसूलों के लाए हुए संदेश को झुठलाने वालों से कहा जाएगा : (ऐ झुठलाने वालो!) उस यातना की ओर चलो, जिसे तुम झुठलाया करते थे।
आयत 30
ٱنطَلِقُوٓا۟ إِلَىٰ ظِلٍّۢ ذِى ثَلَـٰثِ شُعَبٍۢ
ٱنطَلِقُوٓا۟
चलो
إِلَىٰ
to
ظِلٍّۢ
तरफ़ एक साय के
ذِى
having
ثَلَـٰثِ
three
شُعَبٍۢ
तीन शाख़ों वाले
चलो तीन शाखाओंवाली छाया की ओर,
तफ़्सीर:
जहन्नम की आग के धुएँ की छाया की ओर चलो, जो तीन शाखाओं वाली है।
आज की ज़िंदगी में सबक़
इंसान की तख्लीक की मिसाल और दोज़ख़ के साये का ज़िक्र है। यह हमें सिखाता है कि जो अल्लाह इंसान को पानी की मामूली बूंद से बना सकता है, उसकी कुदरत पर शक नहीं करना चाहिए।
आयत 31
لَّا ظَلِيلٍۢ وَلَا يُغْنِى مِنَ ٱللَّهَبِ
لَّا
No
ظَلِيلٍۢ
ना साया देने वाला होगा
وَلَا
और ना
يُغْنِى
वो बचाएगा
مِنَ
against
ٱللَّهَبِ
शोले से
जिसमें न छाँव है और न वह अग्नि-ज्वाला से बचा सकती है
तफ़्सीर:
उसमें न छाया की ठंडक होगी और न वह तुमसे आग की लपट और उसकी गर्मी को रोक सकेगी।
आयत 32
إِنَّهَا تَرْمِى بِشَرَرٍۢ كَٱلْقَصْرِ
إِنَّهَا
बेशक वो
تَرْمِى
वो फेंकेगी
بِشَرَرٍۢ
चिंगारियाँ
كَٱلْقَصْرِ
महल जैसी
निस्संदेह वे (ज्वालाएँ) महल जैसी (ऊँची) चिंगारियाँ फेंकती है
तफ़्सीर:
वह आग चिंगारियाँ फेंकेगी। हर चिंगारी भवन की तरह विशाल होगी।
आयत 33
كَأَنَّهُۥ جِمَـٰلَتٌۭ صُفْرٌۭ
كَأَنَّهُۥ
गोया कि वो
جِمَـٰلَتٌۭ
ऊँट हैं
صُفْرٌۭ
ज़र्द रंग के
मानो वे पीले ऊँट हैं!
तफ़्सीर:
मानो वे चिंगारियाँ, जिन्हें वह आग फेंकेगी, अपने कालेपन और विशालता में काले ऊँटों की तरह होंगी।
आयत 34
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ
وَيْلٌۭ
हलाकत है
يَوْمَئِذٍۢ
उस दिन
لِّلْمُكَذِّبِينَ
झुठलाने वालों के लिए
तबाही है उस झुठलानेवालों की!
तफ़्सीर:
उस दिन अल्लाह की यातना को झुठलाने वालोंं के लिए बड़ी तबाही, यातना और क्षति है।
आयत 35
هَـٰذَا يَوْمُ لَا يَنطِقُونَ
هَـٰذَا
ये
يَوْمُ
दिन है
لَا
not
يَنطِقُونَ
ना वो बोल सकेंगे
यह वह दिन है कि वे कुछ बोल नहीं रहे है,
तफ़्सीर:
यह ऐसा दिन है, जिसमें वे कुछ नहीं बोलेंगे।
आयत 36
وَلَا يُؤْذَنُ لَهُمْ فَيَعْتَذِرُونَ
وَلَا
और ना
يُؤْذَنُ
इजाज़त दी जाएगी
لَهُمْ
उन्हें
فَيَعْتَذِرُونَ
कि वो मआज़रत करें
तो कोई उज़ पेश करें, (बात यह है कि) उन्हें बोलने की अनुमति नहीं दी जा रही है
तफ़्सीर:
और उन्हें अपने पालनहार के सामने अपने कुफ़्र और पापों के लिए कोई उज़्र (कारण) पेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी कि वे उसके पास कोई उज़्र पेश करें।
आयत 37
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ
وَيْلٌۭ
हलाकत है
يَوْمَئِذٍۢ
उस दिन
لِّلْمُكَذِّبِينَ
झुठलाने वालों के लिए
तबाही है उस दिन झुठलानेवालों की
तफ़्सीर:
उस दिन, उन लोगों के लिए विनाश, यातना और क्षति है, जो इस दिन की खबरों को झुठलाने वाले हैं।
आयत 38
هَـٰذَا يَوْمُ ٱلْفَصْلِ ۖ جَمَعْنَـٰكُمْ وَٱلْأَوَّلِينَ
هَـٰذَا
ये
يَوْمُ
दिन है
ٱلْفَصْلِ ۖ
फ़ैसले का
جَمَعْنَـٰكُمْ
जमा कर दिया हमने तुम्हें
وَٱلْأَوَّلِينَ
और पहलों को
"यह फ़ैसले का दिन है, हमने तुम्हें भी और पहलों को भी इकट्ठा कर दिया
तफ़्सीर:
यह प्राणियों के बीच निर्णय का दिन है। हमने तुम्हें और पिछले समुदायों को एक ही स्थान पर एकत्र कर दिया है।
आयत 39
فَإِن كَانَ لَكُمْ كَيْدٌۭ فَكِيدُونِ
فَإِن
फिर अगर
كَانَ
है
لَكُمْ
तुम्हारे लिए
كَيْدٌۭ
कोई चाल
فَكِيدُونِ
पस चाल चलो मुझ से
"अब यदि तुम्हारे पास कोई चाल है तो मेरे विरुद्ध चलो।"
तफ़्सीर:
अगर तुम्हारे पास कोई चाल है, जिसे चलकर तुम अल्लाह की यातना से मुक्ति पा सकते हो, तो मेरे विरुद्ध चल लो।
आयत 40
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ
وَيْلٌۭ
हलाकत है
يَوْمَئِذٍۢ
उस दिन
لِّلْمُكَذِّبِينَ
झुठलाने वालों के लिए
तबाही है उस दिन झुठलानेवालो की!
तफ़्सीर:
उस दिन, निर्णय के दिन को झुठलाने वालों के लिए विनाश, यातना और क्षति है।
आज की ज़िंदगी में सबक़
दोज़ख़ी आग के तीन शाखा वाले साये का ज़िक्र है। यह सबक हमें सिखाता है कि दुनिया में गुनाह करने से पहले उसके संगीन अंजाम पर गौर करना चाहिए।
आयत 41
إِنَّ ٱلْمُتَّقِينَ فِى ظِلَـٰلٍۢ وَعُيُونٍۢ
إِنَّ
बेशक
ٱلْمُتَّقِينَ
मुत्तक़ी लोग
فِى
(will be) in
ظِلَـٰلٍۢ
सायों में होंगे
وَعُيُونٍۢ
और चश्मों में होंगे
निस्संदेह डर रखनेवाले छाँवों और स्रोतों में है,
तफ़्सीर:
निश्चय वे लोग, जो अपने पालनहार से, उसके आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर, डरते हैं, जन्नत के हरे-भरे पेड़ों की छाँवों और मीठे पानी के बहते हुए स्रोतों में होंगे।
आयत 42
وَفَوَٰكِهَ مِمَّا يَشْتَهُونَ
وَفَوَٰكِهَ
और फल
مِمَّا
उसमें से जो
يَشْتَهُونَ
वो ख़्वाहिश करेंगे
और उन फलों के बीच जो वे चाहे
तफ़्सीर:
तथा ऐसे फलों में होंगे, जिन्हें वे खाना पसंद करेगे।
आयत 43
كُلُوا۟ وَٱشْرَبُوا۟ هَنِيٓـًٔۢا بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
كُلُوا۟
खाओ
وَٱشْرَبُوا۟
और पियो
هَنِيٓـًٔۢا
मज़े से
بِمَا
बवजह उसके जो
كُنتُمْ
थे तुम
تَعْمَلُونَ
तुम अमल करते
"खाओ-पियो मज़े से, उस कर्मों के बदले में जो तुम करते रहे हो।"
तफ़्सीर:
और उनसे कहा जाएगा : अच्छी चीजें खाओ और ऐसा सुखद पेय पियो, जिसमें कोई अप्रिय तत्व नहीं है। यह उन अच्छे कर्मों का प्रतिफल है, जो तुम दुनिया में किया करते थे।
आयत 44
إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ
إِنَّا
बेशक हम
كَذَٰلِكَ
इसी तरह
نَجْزِى
हम बदला देते हैं
ٱلْمُحْسِنِينَ
नेकोकारों को
निश्चय ही उत्तमकारों को हम ऐसा ही बदला देते है
तफ़्सीर:
हमने जो बदला तुम्हें दिया है, इसी तरह बदला हम उन लोगों को देते हैं, जो अच्छे कार्य करने वाले हैं।
आयत 45
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ
وَيْلٌۭ
हलाकत है
يَوْمَئِذٍۢ
उस दिन
لِّلْمُكَذِّبِينَ
झुठलाने वालों के लिए
तबाही है उस दिन झुठलानेवालों की!
तफ़्सीर:
उस दिन, उन लोगों के लिए विनाश, यातना और नुक़सान है, जो उस चीज़ को झुठलाने वाले हैं, जो अल्लाह ने डरने वालों (परहेज़गारो) के लिया तैयार किया है।
आयत 46
كُلُوا۟ وَتَمَتَّعُوا۟ قَلِيلًا إِنَّكُم مُّجْرِمُونَ
كُلُوا۟
खाओ
وَتَمَتَّعُوا۟
और फ़ायदा उठा लो
قَلِيلًا
थोड़ा सा
إِنَّكُم
बेशक तुम
مُّجْرِمُونَ
मुजरिम हो
"खा लो और मज़े कर लो थोड़ा-सा, वास्तव में तुम अपराधी हो!"
तफ़्सीर:
झुठलाने वालों से कहा जाएगा : इस दुनिया में थोड़े समय के लिए खा लो और जीवन के सुखों का आनंद ले लो। निश्चय तुम अल्लाह के साथ कुफ़्र करने और उसके रसूलों को झुठलाने के कारण अपराधी हो।
आयत 47
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ
وَيْلٌۭ
हलाकत है
يَوْمَئِذٍۢ
उस दिन
لِّلْمُكَذِّبِينَ
झुठलाने वालों के लिए
तबाही है उस दिन झुठलानेवालों की!
तफ़्सीर:
उस दिन, उन लोगों के लिए विनाश, यातना और क्षति है, जो क़ियामत के दिन अपने बदले का इनकार करने वाले हैं।
आयत 48
وَإِذَا قِيلَ لَهُمُ ٱرْكَعُوا۟ لَا يَرْكَعُونَ
وَإِذَا
और जब
قِيلَ
कहा जाता है
لَهُمُ
उनसे
ٱرْكَعُوا۟
रुकूअ करो
لَا
not
يَرْكَعُونَ
नहीं वो रुकूअ करते
जब उनसे कहा जाता है कि "झुको! तो नहीं झुकते।"
तफ़्सीर:
और जब इन झुठलाने वालों से कहा जाता है : अल्लाह के लिए नमाज़ पढ़ो, तो वे उसके लिए नमाज़ नहीं पढ़ते।
आयत 49
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ
وَيْلٌۭ
हलाकत है
يَوْمَئِذٍۢ
उस रोज़
لِّلْمُكَذِّبِينَ
झुठलाने वालों के लिए
तबाही है उस दिन झुठलानेवालों की!
तफ़्सीर:
उस दिन विनाश, यातना और क्षति है उन झुठलाने वालों के लिए, जो रसूलों के अल्लाह के पास से लाए हुए संदेश को झुठलाते हैं।
आयत 50
فَبِأَىِّ حَدِيثٍۭ بَعْدَهُۥ يُؤْمِنُونَ
فَبِأَىِّ
तो साथ किस
حَدِيثٍۭ
बात के
بَعْدَهُۥ
बाद इसके
يُؤْمِنُونَ
वो ईमान लाऐंगे
अब आख़िर इसके पश्चात किस वाणी पर वे ईमान लाएँगे?
तफ़्सीर:
यदि वे अपने पालनहार की ओर से अवतरित इस क़ुरआन पर ईमान नहीं लाते, तो फिर उसके अलावा वे कौन सी बात पर ईमान लाएँगे?!
आज की ज़िंदगी में सबक़
मुत्तकीन (तक़वे वालों) की जन्नत की नेमतों के साथ सूरह का इख्तिताम होता है। यह हमें सिखाता है कि तक़वा (खुदा-तरसी) अपनाने वालों को जन्नत की शानदार नेमतें मिलेंगी, यह हमें नेकी की तरगीब देता है।
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