नाम का मतलब
लपेटा जाना (कयामत के दिन सूरज के लपेटे जाने के ज़िक्र से)
पृष्ठभूमि
सूरह अत-तक्वीर में कयामत के दिन कायनात में आने वाली बड़ी तब्दीलियों (सूरज का लपेटना, सितारों का बिखरना) का ज़िक्र है।
फ़ज़ीलत / सार
यह सूरह कयामत के मंज़र को इतने असरदार अंदाज़ में बयान करती है कि दिल में आखिरत का खौफ और तैयारी की फिक्र पैदा होती है।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
आयत 1
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ إِذَا ٱلشَّمْسُ كُوِّرَتْ
إِذَا
जब
ٱلشَّمْسُ
सूरज
كُوِّرَتْ
लपेट दिया जाएगा
जब सूर्य लपेट दिया जाएगा,
तफ़्सीर:
जब सूर्य की आकृति को समेट दिया जाएगा और उसकी रौशनी समाप्त हो जाएगी।
आयत 2
وَإِذَا ٱلنُّجُومُ ٱنكَدَرَتْ
وَإِذَا
और जब
ٱلنُّجُومُ
सितारे
ٱنكَدَرَتْ
बेनूर हो जाऐंगे
सारे तारे मैले हो जाएँगे,
तफ़्सीर:
और जब तारे झड़ जाएँगे और उनकी रोशनी मिटा दी जाएगी।
आयत 3
وَإِذَا ٱلْجِبَالُ سُيِّرَتْ
وَإِذَا
और जब
ٱلْجِبَالُ
पहाड़
سُيِّرَتْ
चला दिए जाऐंगे
जब पहाड़ चलाए जाएँगे,
तफ़्सीर:
और जब पर्वतों को उनके स्थानों से हटा दिया जाएगा।
आयत 4
وَإِذَا ٱلْعِشَارُ عُطِّلَتْ
وَإِذَا
और जब
ٱلْعِشَارُ
दस माह की हामिला ऊँटनियाँ
عُطِّلَتْ
बेकार छोड़ दी जाऐंगी
जब दस मास की गाभिन ऊँटनियाँ आज़ाद छोड़ दी जाएँगी,
तफ़्सीर:
और जब उन गाभिन ऊँटनियों की उपेक्षा की जाएगी, जिनके बारे में लोग आपस में प्रतिस्पर्धा करते हैं, क्योंकि उनके मालिक उन्हें छोड़ देंगे।
आयत 5
وَإِذَا ٱلْوُحُوشُ حُشِرَتْ
وَإِذَا
और जब
ٱلْوُحُوشُ
वहशी जानवर
حُشِرَتْ
इकट्ठे कर दिए जाऐंगे
जब जंगली जानवर एकत्र किए जाएँगे,
तफ़्सीर:
और जब जंगली जानवरों को मनुष्यों के साथ एक ही मैदान में एकत्रित किया जाएगा।
आयत 6
وَإِذَا ٱلْبِحَارُ سُجِّرَتْ
وَإِذَا
और जब
ٱلْبِحَارُ
समुन्दर
سُجِّرَتْ
भड़का दिए जाऐंगे
जब समुद्र भड़का दिया जाएँगे,
तफ़्सीर:
और जब सागर भड़काए जाएँगे, यहाँ तक कि वे आग बन जाएँगे।
आयत 7
وَإِذَا ٱلنُّفُوسُ زُوِّجَتْ
وَإِذَا
और जब
ٱلنُّفُوسُ
जानें
زُوِّجَتْ
जोड़ दी जाऐंगी
जब लोग क़िस्म-क़िस्म कर दिए जाएँगे,
तफ़्सीर:
और जब प्राणों को उनके साथ मिला दिया जाएगा, जो उनके समान होंगे। चुनाँचे पापी को पापी के साथ और सदाचारी को सदाचारी के साथ मिला दिया जाएगा।
आयत 8
وَإِذَا ٱلْمَوْءُۥدَةُ سُئِلَتْ
وَإِذَا
और जब
ٱلْمَوْءُۥدَةُ
ज़िन्दा गाड़ी हुई लड़की
سُئِلَتْ
पूछी जाएगी
और जब जीवित गाड़ी गई लड़की से पूछा जाएगा,
तफ़्सीर:
और जब जीवित रहते हुए दफ़न कर दी गई बच्ची से अल्लाह पूछेगा।
आयत 9
بِأَىِّ ذَنۢبٍۢ قُتِلَتْ
بِأَىِّ
बवजह किस
ذَنۢبٍۢ
गुनाह के
قُتِلَتْ
वो मारी गई
कि उसकी हत्या किस गुनाह के कारण की गई,
तफ़्सीर:
तुझे मारने वाले ने किस अपराध के लिए मारा था?!
आयत 10
وَإِذَا ٱلصُّحُفُ نُشِرَتْ
وَإِذَا
और जब
ٱلصُّحُفُ
आमाल नामे
نُشِرَتْ
फैला दिए जाऐंगे
और जब कर्म-पत्र फैला दिए जाएँगे,
तफ़्सीर:
और जब बंदों के कर्मपत्र खोल दिए जाएँगे, ताकि हर व्यक्ति अपना कर्मपत्र पढ़ ले।
आज की ज़िंदगी में सबक़
कयामत के दिन कायनात की तब्दीलियों (सूरज लपेटा जाना, सितारे बिखरना) का ज़िक्र है। यह हमें सिखाता है कि कयामत के दिन पूरी कायनात का निज़ाम बदल जाएगा, यह हमें आखिरत की तैयारी की याद दिलाता है।
आयत 11
وَإِذَا ٱلسَّمَآءُ كُشِطَتْ
وَإِذَا
और जब
ٱلسَّمَآءُ
आसमान
كُشِطَتْ
खाल उतार दी जाएगी (उसकी )
और जब आकाश की खाल उतार दी जाएगी,
तफ़्सीर:
और जब आकाश की खाल उतार दी जाएगी, जैसे बकरी की खाल उतारी जाती है।
आयत 12
وَإِذَا ٱلْجَحِيمُ سُعِّرَتْ
وَإِذَا
और जब
ٱلْجَحِيمُ
जहन्नम
سُعِّرَتْ
भड़का दी जाएगी
जब जहन्नम को दहकाया जाएगा,
तफ़्सीर:
और जब जहन्नम को दहकाया जाएगा।
आयत 13
وَإِذَا ٱلْجَنَّةُ أُزْلِفَتْ
وَإِذَا
और जब
ٱلْجَنَّةُ
जन्नत
أُزْلِفَتْ
क़रीब ले आई जाएगी
और जब जन्नत निकट कर दी जाएगी,
तफ़्सीर:
और जब जन्नत को अल्लाह से डरने वालों के निकट लाया जाएगा।
आयत 14
عَلِمَتْ نَفْسٌۭ مَّآ أَحْضَرَتْ
عَلِمَتْ
जान लेगा
نَفْسٌۭ
हर नफ़्स
مَّآ
जो
أَحْضَرَتْ
उसने हाज़िर किया
तो कोई भी क्यक्ति जान लेगा कि उसने क्या उपस्थित किया है
तफ़्सीर:
जब यह सब घटित होगा, तो हर व्यक्ति जान लेगा कि उस दिन के लिए उसने क्या किया है।
आयत 15
فَلَآ أُقْسِمُ بِٱلْخُنَّسِ
فَلَآ
पस नहीं
أُقْسِمُ
मैं क़सम खाता हूँ
بِٱلْخُنَّسِ
पीछे हटने वाले
अतः नहीं! मैं क़सम खाता हूँ पीछे हटनेवालों की,
तफ़्सीर:
अल्लाह ने उन सितारों की क़सम खाई है, जो रात में प्रकट होने से पहले छिपे रहते हैं।
आयत 16
ٱلْجَوَارِ ٱلْكُنَّسِ
ٱلْجَوَارِ
चलने वाले
ٱلْكُنَّسِ
छुप जाने वाले (सितारों की )
चलनेवालों, छिपने-दुबकने-वालों की
तफ़्सीर:
अपनी कक्षाओं में चलने वाले, जो सुबह के उदय होते ही ग़ायब हो जाते हैं, वैसे ही जैसे मृग अपने घरों में प्रवेश करते हैं।
आयत 17
وَٱلَّيْلِ إِذَا عَسْعَسَ
وَٱلَّيْلِ
और रात की
إِذَا
जब
عَسْعَسَ
वो रुख़्सत होती है
साक्षी है रात्रि जब वह प्रस्थान करे,
तफ़्सीर:
रात की शुरुआत की क़सम खाई, जब वह आने लगे, और उसके अंतिम भाग की क़सम खाई, जब वह जाने लगे।
आयत 18
وَٱلصُّبْحِ إِذَا تَنَفَّسَ
وَٱلصُّبْحِ
और सुबह की
إِذَا
जब
تَنَفَّسَ
वो साँस लेती है
और साक्षी है प्रातः जब वह साँस ले
तफ़्सीर:
और सुबह की क़सम खाई, जब उसकी रौशनी फैलने लगे।
आयत 19
إِنَّهُۥ لَقَوْلُ رَسُولٍۢ كَرِيمٍۢ
إِنَّهُۥ
बेशक वो (क़ुरआन)
لَقَوْلُ
यक़ीनन क़ौल है
رَسُولٍۢ
एक पयामबर
كَرِيمٍۢ
मुअज़्ज़िज़ का
निश्चय ही वह एक आदरणीय संदेशवाहक की लाई हुई वाणी है,
तफ़्सीर:
निश्चय मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर उतरने वाला क़ुरआन अल्लाह की वाणी है, जिसे एक विश्वसनीय फ़रिश्ते जिबरील अलैहिस्सलाम ने पहुँचाया है, जिन्हें अल्लाह ने इसकी ज़िम्मेवारी सौंपी थी।
आयत 20
ذِى قُوَّةٍ عِندَ ذِى ٱلْعَرْشِ مَكِينٍۢ
ذِى
Possessor of
قُوَّةٍ
जो क़ुव्वत वाला है
عِندَ
नज़दीक
ذِى
(the) Owner of
ٱلْعَرْشِ
अर्श वाले के
مَكِينٍۢ
बुलन्द मरतबा है
जो शक्तिवाला है, सिंहासनवाले के यहाँ जिसकी पैठ है
तफ़्सीर:
जो शक्तिशाली है, अर्श के मालिक के पास महान पद वाला है।
आज की ज़िंदगी में सबक़
आमालनामे खोले जाने और ज़िंदा गाड़ी गई बच्चियों से सवाल किए जाने का ज़िक्र है। यह सबक हमें सिखाता है कि बेटियों को ज़िंदा दफनाने जैसी जाहिली रस्में सख्त गुनाह थीं, इस्लाम ने हर जान की हुरमत सिखाई।
आयत 21
مُّطَاعٍۢ ثَمَّ أَمِينٍۢ
مُّطَاعٍۢ
इताअत किया जाता है
ثَمَّ
वहाँ
أَمِينٍۢ
अमानतदार है
उसका आदेश माना जाता है, वहाँ वह विश्वासपात्र है
तफ़्सीर:
आकाश वाले उनकी बात मानते हैं, और वह जो वह़्य (प्रकाशना) पहुँचाते हैं, उसपर विश्वसनीय हैं।
आयत 22
وَمَا صَاحِبُكُم بِمَجْنُونٍۢ
وَمَا
और नहीं
صَاحِبُكُم
साथी तुम्हारा
بِمَجْنُونٍۢ
कोई मजनून
तुम्हारा साथी कोई दीवाना नहीं,
तफ़्सीर:
मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम, जो तुम्हारे साथ रहते हैं और जिनके विवेक, अमानतदारी और सच्चाई से तुम ख़ूब परिचित हो, कोई दीवाने नहीं हैं, जैसा कि तुम्हारा झूठा दावा है।
आयत 23
وَلَقَدْ رَءَاهُ بِٱلْأُفُقِ ٱلْمُبِينِ
وَلَقَدْ
और अलबत्ता तहक़ीक़
رَءَاهُ
उसने देखा उसे
بِٱلْأُفُقِ
आसमान के किनारे पर
ٱلْمُبِينِ
खुले
उसने तो (पराकाष्ठान के) प्रत्यक्ष क्षितिज पर होकर उस (फ़रिश्ते) को देखा है
तफ़्सीर:
और तुम्हारे साथी ने जिबरील को आकाश के स्पष्ट क्षितिज पर उनकी असली शक्ल में देखा है।
आयत 24
وَمَا هُوَ عَلَى ٱلْغَيْبِ بِضَنِينٍۢ
وَمَا
और नहीं
هُوَ
वो
عَلَى
on
ٱلْغَيْبِ
ग़ैब पर
بِضَنِينٍۢ
हरगिज़ बख़ील
और वह परोक्ष के मामले में कृपण नहीं है,
तफ़्सीर:
और तुम्हारे साथी तुम्हारे लिए कृपण नहीं हैं कि वह तुम्हें वह बात पहुँचाने में कंजूसी करें, जिसका उन्हें तुमको पहुँचाने का आदेश दिया गया है। तथा वह काहिनों की तरह पारिश्रमिक भी नहीं लेते हैं।
आयत 25
وَمَا هُوَ بِقَوْلِ شَيْطَـٰنٍۢ رَّجِيمٍۢ
وَمَا
और नहीं है
هُوَ
वो
بِقَوْلِ
क़ौल
شَيْطَـٰنٍۢ
शैतान
رَّجِيمٍۢ
मरदूद का
और वह (क़ुरआन) किसी धुतकारे हुए शैतान की लाई हुई वाणी नहीं है
तफ़्सीर:
और यह क़ुरआन अल्लाह की दया से निष्कासित एक शैतान की वाणी नहीं है।
आयत 26
فَأَيْنَ تَذْهَبُونَ
فَأَيْنَ
फिर किधर
تَذْهَبُونَ
तुम जा रहे हो
फिर तुम किधर जा रहे हो?
तफ़्सीर:
फिर इन तर्कों के बाद, इसके अल्लाह की ओर से होने का इनकार करने के लिए कौन-सा रास्ता चल रहे हो?!
आयत 27
إِنْ هُوَ إِلَّا ذِكْرٌۭ لِّلْعَـٰلَمِينَ
إِنْ
नहीं है
هُوَ
वो
إِلَّا
मगर
ذِكْرٌۭ
एक नसीहत
لِّلْعَـٰلَمِينَ
तमाम जहान वालों के लिए
वह तो सारे संसार के लिए बस एक अनुस्मृति है,
तफ़्सीर:
क़ुरआन इसके अलावा कुछ नहीं कि जिन्न और मानव जाति के लिए अनुस्मारक और उपदेश है।
आयत 28
لِمَن شَآءَ مِنكُمْ أَن يَسْتَقِيمَ
لِمَن
उसके लिए जो
شَآءَ
चाहे
مِنكُمْ
तुम में से
أَن
ये कि
يَسْتَقِيمَ
वो सीधा चले
उसके लिए तो तुममे से सीधे मार्ग पर चलना चाहे
तफ़्सीर:
उसके लिए, जो तुममें से सत्य के मार्ग पर चलना चाहे।
आयत 29
وَمَا تَشَآءُونَ إِلَّآ أَن يَشَآءَ ٱللَّهُ رَبُّ ٱلْعَـٰلَمِينَ
وَمَا
और नहीं
تَشَآءُونَ
तुम चाहते
إِلَّآ
मगर
أَن
ये कि
يَشَآءَ
चाहे
ٱللَّهُ
अल्लाह
رَبُّ
जो रब है
ٱلْعَـٰلَمِينَ
तमाम जहानों का
और तुम नहीं चाह सकते सिवाय इसके कि सारे जहान का रब अल्लाह चाहे
तफ़्सीर:
तथा तुम सत्य मार्ग पर दृढ़ता या कुछ और नहीं चाह सकते, सिवाय इसके कि सभी प्राणियों का पालनहार अल्लाह उसे चाहे।
आज की ज़िंदगी में सबक़
कुरआन की सच्चाई और जिब्रील अलैहिस्सलाम की गवाही के साथ सूरह का इख्तिताम होता है। यह हमें सिखाता है कि कुरआन सच्चे फरिश्ते के ज़रिए पहुंचा हुआ पैगाम है, इस पर पूरा यकीन रखना चाहिए।
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