नाम का मतलब
फट जाना (कयामत के दिन आसमान के फट जाने के ज़िक्र से)
पृष्ठभूमि
सूरह अल-इन्फितार में कयामत के दिन आसमान के फटने और हर इंसान के अपने आमालनामे से रूबरू होने का ज़िक्र है।
फ़ज़ीलत / सार
इसमें यह मशहूर आयत है कि हर इंसान पर उसके आमाल लिखने वाले फरिश्ते मुकर्रर हैं, जो हमें अपने हर अमल में एहतियात बरतने की याद दिलाती है।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
आयत 1
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ إِذَا ٱلسَّمَآءُ ٱنفَطَرَتْ
إِذَا
जब
ٱلسَّمَآءُ
आसमान
ٱنفَطَرَتْ
फट जाएगा
जबकि आकाश फट जाएगा
तफ़्सीर:
जब आकाश फट जाएगा, ताकि उससे फ़रिश्ते उतर सकें।
आयत 2
وَإِذَا ٱلْكَوَاكِبُ ٱنتَثَرَتْ
وَإِذَا
और जब
ٱلْكَوَاكِبُ
सितारे
ٱنتَثَرَتْ
बिखर जाऐंगे
और जबकि तारे बिखर जाएँगे
तफ़्सीर:
और जब तारे झड़कर बिखर जाएँगे।
आयत 3
وَإِذَا ٱلْبِحَارُ فُجِّرَتْ
وَإِذَا
और जब
ٱلْبِحَارُ
समुन्दर
فُجِّرَتْ
फाड़ दिए जाऐंगे
और जबकि समुद्र बह पड़ेंगे
तफ़्सीर:
और जब समुद्रों को एक-दूसरे पर लिए खोल दिया जाएगा और वे मिश्रित हो जाएँगे।
आयत 4
وَإِذَا ٱلْقُبُورُ بُعْثِرَتْ
وَإِذَا
और जब
ٱلْقُبُورُ
क़ब्रें
بُعْثِرَتْ
खोल दी जाऐंगी
और जबकि क़बें उखेड़ दी जाएँगी
तफ़्सीर:
और जब क़ब्रों की मिट्टी को पलट दिया जाएगा, ताकि उनमें मौजूद मुर्दों को पुनर्जीवित किया जाए।
आयत 5
عَلِمَتْ نَفْسٌۭ مَّا قَدَّمَتْ وَأَخَّرَتْ
عَلِمَتْ
जान लेगा
نَفْسٌۭ
हर नफ़्स
مَّا
जो
قَدَّمَتْ
उसने आगे भेजा
وَأَخَّرَتْ
और जो उसने पीछे छोड़ा
तब हर व्यक्ति जान लेगा जिसे उसने प्राथमिकता दी और पीछे डाला
तफ़्सीर:
उस समय हर प्राणी जान लेगा, जो काम उसने किया है और जो काम उसने विलंबित कर दिया और उसे नहीं किया।
आयत 6
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلْإِنسَـٰنُ مَا غَرَّكَ بِرَبِّكَ ٱلْكَرِيمِ
يَـٰٓأَيُّهَا
ऐ
ٱلْإِنسَـٰنُ
इन्सान
مَا
किस चीज़ ने
غَرَّكَ
धोके में डाला तुझे
بِرَبِّكَ
तेरे रब के बारे में
ٱلْكَرِيمِ
जो बहुत इज़्ज़त वाला है
ऐ मनुष्य! किस चीज़ ने तुझे अपने उदार प्रभु के विषय में धोखे में डाल रखा हैं?
तफ़्सीर:
ऐ अपने रब का इनकार करने वाले इनसान! आख़िर किस बात ने तुझे अपने रब के आदेश का उल्लंघन करने पर उभारा, जब उसने तुझे मोहलत दी और अपने अनुग्रह से तुझे दंडित करने में जल्दी नहीं की?!
आयत 7
ٱلَّذِى خَلَقَكَ فَسَوَّىٰكَ فَعَدَلَكَ
ٱلَّذِى
वो जिसने
خَلَقَكَ
पैदा किया तुझे
فَسَوَّىٰكَ
फिर उसने दुरुस्त किया तुझे
فَعَدَلَكَ
फिर उसने बराबर किया तुझे
जिसने तेरा प्रारूप बनाया, फिर नख-शिख से तुझे दुरुस्त किया और तुझे संतुलन प्रदान किया
तफ़्सीर:
जो तुझे अनस्तित्व से अस्तित्व में लाया और उसने तुझे ठीक-ठाक अंगों वाला, संतुलित शरीर वाला बनाया।
आयत 8
فِىٓ أَىِّ صُورَةٍۢ مَّا شَآءَ رَكَّبَكَ
فِىٓ
In
أَىِّ
whatever
صُورَةٍۢ
जिस सूरत में
مَّا
जो
شَآءَ
उसने चाहा
رَكَّبَكَ
उसने जोड़ दिया तुझे
जिस रूप में चाहा उसने तुझे जोड़कर तैयार किया
तफ़्सीर:
उसने तुझे जिस रूप में बनाना चाहा, बना दिया। और उसने तुझपर यह उपकार किया कि तुझे गधे, बंदर, कुत्ते या किसी और चीज़ के रूप में नहीं बनाया।
आयत 9
كَلَّا بَلْ تُكَذِّبُونَ بِٱلدِّينِ
كَلَّا
हरगिज़ नहीं
بَلْ
बल्कि
تُكَذِّبُونَ
तुम झुठलाते हो
بِٱلدِّينِ
बदले (के दिन ) को
कुछ नहीं, बल्कि तुम बदला दिए जाने का झुठलाते हो
तफ़्सीर:
(ऐ धोखे में पड़े हुए लोगो) मामला ऐसा नहीं है, जैसा तुमने समझ रखा है। बल्कि सच्चाई यह है कि तुम बदले के दिन को झुठलाते हो, इसलिए उसके लिए तैयारी नहीं करते हो।
आयत 10
وَإِنَّ عَلَيْكُمْ لَحَـٰفِظِينَ
وَإِنَّ
और बेशक
عَلَيْكُمْ
तुम पर
لَحَـٰفِظِينَ
यक़ीनन निगरान हैं
जबकि तुमपर निगरानी करनेवाले नियुक्त हैं
तफ़्सीर:
निःसंदेह तुमपर ऐसे फ़रिश्ते नियुक्त हैं, जो तुम्हारे कर्मों का संरक्षण करते हैं।
आज की ज़िंदगी में सबक़
कयामत के दिन आसमान के फटने का ज़िक्र है। यह हमें सिखाता है कि कयामत के दिन कायनात का निज़ाम बदल जाएगा, इसकी तैयारी अभी से करनी चाहिए।
आयत 11
كِرَامًۭا كَـٰتِبِينَ
كِرَامًۭا
जो मुअज़्ज़िज़
كَـٰتِبِينَ
लिखने वालो हैं
प्रतिष्ठित लिपिक
तफ़्सीर:
जो अल्लाह के यहाँ सम्माननीय हैं, लिखने वाले हैं, तुम्हारे कर्मों को लिखते हैं।
आयत 12
يَعْلَمُونَ مَا تَفْعَلُونَ
يَعْلَمُونَ
वो जानते हैं
مَا
जो कुछ
تَفْعَلُونَ
तुम करते हो
वे जान रहे होते है जो कुछ भी तुम लोग करते हो
तफ़्सीर:
तुम जो कार्य भी करते हो, वे उसे जानते हैं। इसलिए वे उसे लिख लेते हैं।
आयत 13
إِنَّ ٱلْأَبْرَارَ لَفِى نَعِيمٍۢ
إِنَّ
बेशक
ٱلْأَبْرَارَ
नेक लोग
لَفِى
(will be) surely in
نَعِيمٍۢ
यक़ीनन नेअमतों में होंगे
निस्संदेह वफ़ादार लोग नेमतों में होंगे
तफ़्सीर:
निःसंदेह बहुत अधिक भलाई और नेकी करने वाले लोग क़ियामत के दिन स्थायी आनंद में होंगे।
आयत 14
وَإِنَّ ٱلْفُجَّارَ لَفِى جَحِيمٍۢ
وَإِنَّ
और बेशक
ٱلْفُجَّارَ
बदकार लोग
لَفِى
(will be) surely in
جَحِيمٍۢ
यक़ीनन जहन्नम में होंगे
और निश्चय ही दुराचारी भड़कती हुई आग में
तफ़्सीर:
और दुराचारी लोग ऐसी आग में होंगे, जो उनपर भड़क रही होगी।
आयत 15
يَصْلَوْنَهَا يَوْمَ ٱلدِّينِ
يَصْلَوْنَهَا
वो जलेंगे उसमें
يَوْمَ
दिन
ٱلدِّينِ
बदले के
जिसमें वे बदले के दिन प्रवेश करेंगे
तफ़्सीर:
वे उसमें बदले के दिन प्रवेश करेंगे और उसकी गरमी को झेलेंगे।
आयत 16
وَمَا هُمْ عَنْهَا بِغَآئِبِينَ
وَمَا
और नहीं
هُمْ
वो
عَنْهَا
उससे
بِغَآئِبِينَ
कभी ग़ायब होने वाले
और उससे वे ओझल नहीं होंगे
तफ़्सीर:
और वे उससे कभी ग़ायब होने वाले नहीं हैं, बल्कि उसमें हमेशा रहेंगे।
आयत 17
وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا يَوْمُ ٱلدِّينِ
وَمَآ
और क्या चीज़
أَدْرَىٰكَ
बताए आपको
مَا
क्या है
يَوْمُ
दिन
ٱلدِّينِ
बदले का
और तुम्हें क्या मालूम कि बदले का दिन क्या है?
तफ़्सीर:
और (ऐ रसूल) आपको किस चीज़ ने मालूम करवाया कि बदले का दिन क्या है?!
आयत 18
ثُمَّ مَآ أَدْرَىٰكَ مَا يَوْمُ ٱلدِّينِ
ثُمَّ
फिर
مَآ
क्या चीज़
أَدْرَىٰكَ
बताए आपको
مَا
क्या है
يَوْمُ
दिन
ٱلدِّينِ
बदले का
फिर तुम्हें क्या मालूम कि बदले का दिन क्या है?
तफ़्सीर:
फिर आपको किस चीज़ ने मालूम करवाया कि बदले का दिन क्या है?!
आयत 19
يَوْمَ لَا تَمْلِكُ نَفْسٌۭ لِّنَفْسٍۢ شَيْـًۭٔا ۖ وَٱلْأَمْرُ يَوْمَئِذٍۢ لِّلَّهِ
يَوْمَ
जिस दिन
لَا
not
تَمْلِكُ
ना मालिक होगा
نَفْسٌۭ
कोई नफ़्स
لِّنَفْسٍۢ
किसी नफ़्स के लिए
شَيْـًۭٔا ۖ
कुछ भी
وَٱلْأَمْرُ
और हुक्म
يَوْمَئِذٍۢ
उस दिन
لِّلَّهِ
अल्लाह ही का होगा
जिस दिन कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति के लिए किसी चीज़ का अधिकारी न होगा, मामला उस दिन अल्लाह ही के हाथ में होगा
तफ़्सीर:
जिस दिन कोई किसी को लाभ नहीं पहुँचा सकेगा और उस दिन सारा मामला केवल अल्लाह के हाथ में होगा। वह जो चाहेगा, करेगा। किसी के हाथ में कुछ नहीं होगा।
आज की ज़िंदगी में सबक़
आमाल लिखने वाले फरिश्तों और नेक-बद के अंजाम के साथ सूरह का इख्तिताम होता है। यह सबक हमें सिखाता है कि हमारे हर अमल पर फरिश्ते मुकर्रर हैं, इसलिए तनहाई में भी अल्लाह से डरना चाहिए।
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