नाम का मतलब
फट जाना (कयामत के दिन ज़मीन के फट जाने के ज़िक्र से)
पृष्ठभूमि
सूरह अल-इन्शिक़ाक़ में कयामत के दिन ज़मीन-आसमान की हालत और इंसान के अपने रब से मिलने के यकीन का ज़िक्र है।
फ़ज़ीलत / सार
इस सूरह में इंसान को उसकी मेहनत के मुताबिक अपने रब से मिलने की याद दिलाई गई है, जो हमें अपनी हर कोशिश में ज़िम्मेदारी का एहसास दिलाता है।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
आयत 1
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ إِذَا ٱلسَّمَآءُ ٱنشَقَّتْ
إِذَا
जब
ٱلسَّمَآءُ
आसमान
ٱنشَقَّتْ
फट जाऐगा
जबकि आकाश फट जाएगा,
तफ़्सीर:
जब आकाश फट जाएगा, ताकि उससे फ़रिश्ते उतर सकें।
आयत 2
وَأَذِنَتْ لِرَبِّهَا وَحُقَّتْ
وَأَذِنَتْ
और वो कान लगाए हुए है
لِرَبِّهَا
अपने रब के लिए
وَحُقَّتْ
और वो हक़ दिया गया है
और वह अपने रब की सुनेगा, और उसे यही चाहिए भी
तफ़्सीर:
और वह अपने पालनहार के आदेश को सुनकर पालन करेगा और ऐसा करने ही उसके योग्य है।
आयत 3
وَإِذَا ٱلْأَرْضُ مُدَّتْ
وَإِذَا
और जब
ٱلْأَرْضُ
ज़मीन
مُدَّتْ
फैला दी जाएगी
जब धरती फैला दी जाएगी
तफ़्सीर:
और जब अल्लाह धरती को फैला देगा, जिस तरह चमड़े को (खींचकर) फैलाया जाता है।
आयत 4
وَأَلْقَتْ مَا فِيهَا وَتَخَلَّتْ
وَأَلْقَتْ
और वो डाल देगी
مَا
जो कुछ
فِيهَا
उसमें है
وَتَخَلَّتْ
और वो ख़ाली हो जाएगी
और जो कुछ उसके भीतर है उसे बाहर डालकर खाली हो जाएगी
तफ़्सीर:
और उसके अंदर जो खज़ाने और मुर्दे हैं, उन्हें निकाल बाहर फेंक देगी और उनसे खाली हो जाएगी।
आयत 5
وَأَذِنَتْ لِرَبِّهَا وَحُقَّتْ
وَأَذِنَتْ
और वो कान लगाए हुए है
لِرَبِّهَا
अपने रब के लिए
وَحُقَّتْ
और वो हक़ दी गई है
और वह अपने रब की सुनेगी, और उसे यही चाहिए भी
तफ़्सीर:
और वह अपने पालनहार के आदेश को सुनकर पालन करेगी और ऐसा करने ही उसके योग्य है।
आयत 6
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلْإِنسَـٰنُ إِنَّكَ كَادِحٌ إِلَىٰ رَبِّكَ كَدْحًۭا فَمُلَـٰقِيهِ
يَـٰٓأَيُّهَا
ऐ
ٱلْإِنسَـٰنُ
इन्सान
إِنَّكَ
बेशक तू
كَادِحٌ
मेहनत करने वाला है
إِلَىٰ
to
رَبِّكَ
तरफ़ अपने रब के
كَدْحًۭا
सख़्त मेहनत
فَمُلَـٰقِيهِ
फिर मिलने वाला है उससे
ऐ मनुष्य! तू मशक़्क़त करता हुआ अपने रब ही की ओर खिंचा चला जा रहा है और अन्ततः उससे मिलने वाला है
तफ़्सीर:
ऐ इनसान! निश्चय तू अच्छा या बुरा जो भी काम कर रहा है, क़ियामत के दिन उससे मिलने वाला है, ताकि अल्लाह तुझे उसका बदला दे।
आयत 7
فَأَمَّا مَنْ أُوتِىَ كِتَـٰبَهُۥ بِيَمِينِهِۦ
فَأَمَّا
तो रहा
مَنْ
वो जो
أُوتِىَ
दिया गया
كِتَـٰبَهُۥ
किताब अपनी
بِيَمِينِهِۦ
अपने दाऐं हाथ में
फिर जिस किसी को उसका कर्म-पत्र उसके दाहिने हाथ में दिया गया,
तफ़्सीर:
फिर जिस व्यक्ति को उसका आमाल नामा उसके दाहिने हाथ में दिया गया।
आयत 8
فَسَوْفَ يُحَاسَبُ حِسَابًۭا يَسِيرًۭا
فَسَوْفَ
तो अनक़रीब
يُحَاسَبُ
वो हिसाब लिया जाएग
حِسَابًۭا
हिसाब
يَسِيرًۭا
निहायत आसान
तो उससे आसान, सरसरी हिसाब लिया जाएगा
तफ़्सीर:
तो अल्लाह उसका आसान हिसाब लेगा; उसके सामने उसके कार्यों को पेश किया जाएगा, लेकिन उसपर पकड़ नहीं की जाएगी।
आयत 9
وَيَنقَلِبُ إِلَىٰٓ أَهْلِهِۦ مَسْرُورًۭا
وَيَنقَلِبُ
और वो लौटेगा
إِلَىٰٓ
to
أَهْلِهِۦ
तरफ़ अपने घर वालों के
مَسْرُورًۭا
मसरूर/ ख़ुश
और वह अपने लोगों की ओर ख़ुश-ख़ुश पलटेगा
तफ़्सीर:
और वह ख़ुश-ख़ुश अपने परिवार के पास लौटेगा।
आयत 10
وَأَمَّا مَنْ أُوتِىَ كِتَـٰبَهُۥ وَرَآءَ ظَهْرِهِۦ
وَأَمَّا
और रहा
مَنْ
वो जो
أُوتِىَ
दिया गया
كِتَـٰبَهُۥ
किताब अपनी
وَرَآءَ
पीछे से
ظَهْرِهِۦ
अपनी पुश्त के
और रह वह व्यक्ति जिसका कर्म-पत्र (उसके बाएँ हाथ में) उसकी पीठ के पीछे से दिया गया,
तफ़्सीर:
लेकिन जिस व्यक्ति को उसका आमाल नामा उसके बाएँ हाथ में उसकी पीठ के पीछे से दिया गया।
आज की ज़िंदगी में सबक़
ज़मीन-आसमान की हालत और आमालनामा दाएं-बाएं मिलने का ज़िक्र है। यह हमें सिखाता है कि कयामत के दिन आमालनामा दाएं हाथ में मिलना आसान हिसाब की खुशखबरी है, इसके लिए नेक अमल करते रहना चाहिए।
आयत 11
فَسَوْفَ يَدْعُوا۟ ثُبُورًۭا
فَسَوْفَ
तो अनक़रीब
يَدْعُوا۟
वो पुकारेगा
ثُبُورًۭا
हलाकत को
तो वह विनाश (मृत्यु) को पुकारेगा,
तफ़्सीर:
तो वह अपने विनाश को पुकारेगा।
आयत 12
وَيَصْلَىٰ سَعِيرًا
وَيَصْلَىٰ
और वो जलेगा
سَعِيرًا
भड़कती आग में
और दहकती आग में जा पड़ेगा
तफ़्सीर:
वह जहन्नम की आग में दाखिल होकर उसकी गरमी को झेलेगा।
आयत 13
إِنَّهُۥ كَانَ فِىٓ أَهْلِهِۦ مَسْرُورًا
إِنَّهُۥ
बेशक वो
كَانَ
था वो
فِىٓ
among
أَهْلِهِۦ
अपने घर वालों में
مَسْرُورًا
मसरूर /ख़ुश
वह अपने लोगों में मग्न था,
तफ़्सीर:
निःसंदेह वह दुनिया में, अपने परिवार में, अपने कुफ़्र और पाप की स्थिति पर बड़ा खुश रहता था।
आयत 14
إِنَّهُۥ ظَنَّ أَن لَّن يَحُورَ
إِنَّهُۥ
बेशक वो
ظَنَّ
वो समझता था
أَن
कि
لَّن
हरगिज़ नहीं
يَحُورَ
वो लौटेगा
उसने यह समझ रखा था कि उसे कभी पलटना नहीं है
तफ़्सीर:
उसने सोचा था कि वह अपनी मृत्यु के बाद जीवन में वापस नहीं आएगा।
आयत 15
بَلَىٰٓ إِنَّ رَبَّهُۥ كَانَ بِهِۦ بَصِيرًۭا
بَلَىٰٓ
क्यों नहीं
إِنَّ
बेशक
رَبَّهُۥ
रब उसका
كَانَ
था
بِهِۦ
उसे
بَصِيرًۭا
ख़ूब देखने वाला
क्यों नहीं, निश्चय ही उसका रब तो उसे देख रहा था!
तफ़्सीर:
क्यों नहीं, निश्चय अल्लाह उसे जीवन में अवश्य वापस लाएगा, जैसा कि उसने उसे पहली बार पैदा किया था। निःसंदेह उसका पालनहार उसकी स्थिति से अवगत था। उससे उसका कुछ भी छिपा नहीं है, और वह उसे उसके काम बदला देगा।
आयत 16
فَلَآ أُقْسِمُ بِٱلشَّفَقِ
فَلَآ
पस नहीं
أُقْسِمُ
मैं क़सम खाता हूँ
بِٱلشَّفَقِ
शफ़क़ की
अतः कुछ नहीं, मैं क़सम खाता हूँ सांध्य-लालिमा की,
तफ़्सीर:
अल्लाह ने उस लाली की क़सम खाई है, जो सूर्यास्त के बाद क्षितिज पर होती है।
आयत 17
وَٱلَّيْلِ وَمَا وَسَقَ
وَٱلَّيْلِ
और रात की
وَمَا
और उसकी जिसे
وَسَقَ
वो समेट ले
और रात की और उसके समेट लेने की,
तफ़्सीर:
और रात की तथा उसमें एकत्रित की गई चीज़ की क़सम खाई है।
आयत 18
وَٱلْقَمَرِ إِذَا ٱتَّسَقَ
وَٱلْقَمَرِ
और चाँद की
إِذَا
जब
ٱتَّسَقَ
वो पूरा हो जाए
और चन्द्रमा की जबकि वह पूर्ण हो जाता है,
तफ़्सीर:
तथा चाँद की (क़सम खाई है), जब वह एकत्रित होकर पूरा हो जाए और चौदहवीं का चाँद बन जाए।
आयत 19
لَتَرْكَبُنَّ طَبَقًا عَن طَبَقٍۢ
لَتَرْكَبُنَّ
अलबत्ता तुम ज़रूर चढ़ते जाओगे
طَبَقًا
एक दर्जे को
عَن
from
طَبَقٍۢ
दूसरे दर्जे से
निश्चय ही तुम्हें मंजिल पर मंजिल चढ़ना है
तफ़्सीर:
(ऐ लोगो!) तुम निश्चित रूप से एक अवस्था से दूसरी अवस्था में स्थानांतरित होते रहोगे; एक नुत्फ़ा से जमा हुआ रक्त, फिर गोश्त का टुकड़ा, फिर जीवन, फिर मृत्यु और फिर मरणोपरांत पुनर्जीवन।
आयत 20
فَمَا لَهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ
فَمَا
पस क्या है
لَهُمْ
उन्हें
لَا
not
يُؤْمِنُونَ
नहीं वो ईमान लाते
फिर उन्हें क्या हो गया है कि ईमान नहीं लाते?
तफ़्सीर:
तो इन काफ़िरों को क्या हुआ है कि वे अल्लाह और आख़िरत के दिन पर ईमान नहीं लाते?!
आज की ज़िंदगी में सबक़
दर्जा-ब-दर्जा तरक्की और तनज़्ज़ुली का ज़िक्र है। यह सबक हमें सिखाता है कि इंसान की ज़िंदगी एक हाल में नहीं रहती, हर मरहले में सब्र और अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए।
आयत 21
وَإِذَا قُرِئَ عَلَيْهِمُ ٱلْقُرْءَانُ لَا يَسْجُدُونَ ۩
وَإِذَا
और जब
قُرِئَ
पढ़ा जाता है
عَلَيْهِمُ
उन पर
ٱلْقُرْءَانُ
क़ुरआन
لَا
not
يَسْجُدُونَ ۩
नहीं वो सजदा करते
और जब उन्हें कुरआन पढ़कर सुनाया जाता है तो सजदे में नहीं गिर पड़ते?
तफ़्सीर:
और जब उनके सामने क़ुरआन पढ़ा जाता है, तो वे अपने रब के आगे सजदा नहीं करते?!
आयत 22
بَلِ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ يُكَذِّبُونَ
بَلِ
बल्कि
ٱلَّذِينَ
वो लोग जिन्होंने
كَفَرُوا۟
कुफ़्र किया
يُكَذِّبُونَ
वो झुठलाते हैं
नहीं, बल्कि इनकार करनेवाले तो झुठलाते है,
तफ़्सीर:
बल्कि जिन्होंने कुफ़्र किया, वे उस (क़ुरआन) को झुठलाते हैं, जो उनके रसूल उनके पास लेकर आए।
आयत 23
وَٱللَّهُ أَعْلَمُ بِمَا يُوعُونَ
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
أَعْلَمُ
ख़ूब जानता है
بِمَا
उसे जो
يُوعُونَ
वो समेट रहे हैं
हालाँकि जो कुछ वे अपने अन्दर एकत्र कर रहे है, अल्लाह उसे भली-भाँति जानता है
तफ़्सीर:
और अल्लाह सबसे अधिक जानता है कि उनके सीनों में क्या है, उनके कार्यों में से कुछ भी उससे छिपा नहीं है।
आयत 24
فَبَشِّرْهُم بِعَذَابٍ أَلِيمٍ
فَبَشِّرْهُم
पस ख़ुशख़बरी दे दीजिए उन्हें
بِعَذَابٍ
अज़ाब की
أَلِيمٍ
दर्दनाक
अतः उन्हें दुखद यातना की मंगल सूचना दे दो
तफ़्सीर:
अतः (ऐ रसूल) आप उन्हें उस दर्दनाक यातना की सूचना दे दें, जो उनकी प्रतीक्षा कर रही है।
आयत 25
إِلَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ لَهُمْ أَجْرٌ غَيْرُ مَمْنُونٍۭ
إِلَّا
सिवाए
ٱلَّذِينَ
उन लोगों के जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
وَعَمِلُوا۟
और उन्होंने अमल किए
ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ
नेक
لَهُمْ
उनके लिए
أَجْرٌ
अजर है
غَيْرُ
ना
مَمْنُونٍۭ
ख़त्म होने वाला
अलबत्ता जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए उनके लिए कभी न समाप्त॥ होनेवाला प्रतिदान है
तफ़्सीर:
परंतु जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और अच्छे कार्य किए, उनके लिए कभी न समाप्त होने वाला बदला है और वह जन्नत है।
आज की ज़िंदगी में सबक़
सजदा न करने वालों की मज़म्मत के साथ सूरह का इख्तिताम होता है। यह हमें सिखाता है कि कुरआन सुनकर सजदा न करना और घमंड करना बड़ी गुमराही की निशानी है।
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