सूरह अल-बुरूज سورة البروج
मक्की 22 आयतें
नाम का मतलब
बुर्ज (आसमान के बड़े सितारों/तारामंडलों के ज़िक्र से)
पृष्ठभूमि
सूरह अल-बुरूज में खंदक वाले वाकिये (असहाबे-उखदूद) का ज़िक्र है, जिसमें ईमान वालों को आग की खाई में जलाया गया था, फिर भी उन्होंने अपना ईमान नहीं छोड़ा।
फ़ज़ीलत / सार
यह सूरह ईमान की हिफाज़त में सबसे बड़ी कुर्बानी देने वालों की मिसाल पेश करती है, जिन्होंने मौत को गले लगाया मगर ईमान नहीं छोड़ा।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
आयत 1
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ وَٱلسَّمَآءِ ذَاتِ ٱلْبُرُوجِ
وَٱلسَّمَآءِ
क़सम है आसमान
ذَاتِ
containing
ٱلْبُرُوجِ
बुर्जों वाले की
साक्षी है बुर्जोंवाला आकाश,
तफ़्सीर:
अल्लाह ने आसमान की क़सम खाई है, जिसमें सूर्य एवं चाँद की मंज़िलें (कक्षाएँ) हैं।
आयत 2
وَٱلْيَوْمِ ٱلْمَوْعُودِ
وَٱلْيَوْمِ
और दिन
ٱلْمَوْعُودِ
वादा किए गए की
और वह दिन जिसका वादा किया गया है,
तफ़्सीर:
और क़ियामत के दिन की क़सम खाई है, जिसमें उसने सभी प्राणियों को इकट्ठा करने का वादा किया है।
आयत 3
وَشَاهِدٍۢ وَمَشْهُودٍۢ
وَشَاهِدٍۢ
और हाज़िर होने वाले
وَمَشْهُودٍۢ
और हाज़िर किए हुए की
और देखनेवाला, और जो देखा गया
तफ़्सीर:
और अल्लाह ने हर गवाही देने वाले की क़सम खाई, जैसे कि नबी अपनी उम्मत पर गवाही देगा, और उसकी क़सम खाई है, जिसके बारे में गवाही दी जाएगी, जैसे कि उम्मत, जिसपर उसका नबी गवाही देगा।
आयत 4
قُتِلَ أَصْحَـٰبُ ٱلْأُخْدُودِ
قُتِلَ
मारे गए
أَصْحَـٰبُ
(the) companions
ٱلْأُخْدُودِ
ख़नदक़ों वाले
विनष्ट हों खाईवाले,
तफ़्सीर:
उन लोगों को शापित किया गया, जिन्होंने ज़मीन में बहुत बड़ी खाई खोदी थी।
आयत 5
ٱلنَّارِ ذَاتِ ٱلْوَقُودِ
ٱلنَّارِ
जो आग थी
ذَاتِ
full
ٱلْوَقُودِ
ईन्धन वाली
ईधन भरी आगवाले,
तफ़्सीर:
और उन्होंने उसमें आग जलाई और ईमान वालों को उसमें ज़िंदा डाल दिया।
आयत 6
إِذْ هُمْ عَلَيْهَا قُعُودٌۭ
إِذْ
जब
هُمْ
वो
عَلَيْهَا
उस पर
قُعُودٌۭ
बैठे हुए थे
जबकि वे वहाँ बैठे होंगे
तफ़्सीर:
जबकि वे उस आग से भरी हुई खाई के किनारों पर बैठे हुए थे।
आयत 7
وَهُمْ عَلَىٰ مَا يَفْعَلُونَ بِٱلْمُؤْمِنِينَ شُهُودٌۭ
وَهُمْ
और वो
عَلَىٰ
ऊपर
مَا
उसके जो
يَفْعَلُونَ
वो कर रहे थे
بِٱلْمُؤْمِنِينَ
साथ मोमिनों के
شُهُودٌۭ
गवाह थे
और वे जो कुछ ईमानवालों के साथ करते रहे, उसे देखेंगे
तफ़्सीर:
और वे मोमिनों को जो यातना दे रहे थे, उसके गवाह थे; क्योंकि वे वहाँ उपस्थित थे।
आयत 8
وَمَا نَقَمُوا۟ مِنْهُمْ إِلَّآ أَن يُؤْمِنُوا۟ بِٱللَّهِ ٱلْعَزِيزِ ٱلْحَمِيدِ
وَمَا
और नहीं
نَقَمُوا۟
उन्होंने इन्तिक़ाम लिया
مِنْهُمْ
उनसे
إِلَّآ
मगर
أَن
ये कि
يُؤْمِنُوا۟
वो ईमान लाए
بِٱللَّهِ
अल्लाह पर
ٱلْعَزِيزِ
जो बहुत ज़बरदस्त है
ٱلْحَمِيدِ
ख़ूब तारीफ़ वाला है
उन्होंने उन (ईमानवालों) से केवल इस कारण बदला लिया और शत्रुता की कि वे उस अल्लाह पर ईमान रखते थे जो अत्यन्त प्रभुत्वशाली, प्रशंसनीय है,
तफ़्सीर:
और इन काफ़िरों को ईमान वालों की केवल यह बात अप्रिय लगी कि वे उस अल्लाह पर ईमान रखते थे, जो प्रभुत्वशाली है, जिसपर किसी का ज़ोर नहीं चलता, तथा हर चीज़ में प्रशंसनीय हैं।
आयत 9
ٱلَّذِى لَهُۥ مُلْكُ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ ۚ وَٱللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍۢ شَهِيدٌ
ٱلَّذِى
वो जो
لَهُۥ
उसके लिए है
مُلْكُ
बादशाहत
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों
وَٱلْأَرْضِ ۚ
और ज़मीन की
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
عَلَىٰ
ऊपर
كُلِّ
हर
شَىْءٍۢ
चीज़ के
شَهِيدٌ
गवाह है
जिसके लिए आकाशों और धरती की बादशाही है। और अल्लाह हर चीज़ का साक्षी है
तफ़्सीर:
वह कि जिसके लिए अकेले आसमानों और धरती का राज्य है और वह हर चीज़ से अवगत है। उसके बंदों की कोई बात उससे छिपी नहीं है।
आयत 10
إِنَّ ٱلَّذِينَ فَتَنُوا۟ ٱلْمُؤْمِنِينَ وَٱلْمُؤْمِنَـٰتِ ثُمَّ لَمْ يَتُوبُوا۟ فَلَهُمْ عَذَابُ جَهَنَّمَ وَلَهُمْ عَذَابُ ٱلْحَرِيقِ
إِنَّ
बेशक
ٱلَّذِينَ
वो लोग जिन्होंने
فَتَنُوا۟
आज़माइश में डाला
ٱلْمُؤْمِنِينَ
मोमिन मर्दों को
وَٱلْمُؤْمِنَـٰتِ
और मोमिन औरतों को
ثُمَّ
फिर
لَمْ
ना
يَتُوبُوا۟
उन्होंने तौबा की
فَلَهُمْ
तो उनके लिए
عَذَابُ
अज़ाब है
جَهَنَّمَ
जहन्नम का
وَلَهُمْ
और उनके लिए
عَذَابُ
अज़ाब है
ٱلْحَرِيقِ
जलने का
जिन लोगों ने ईमानवाले पुरुषों और ईमानवाली स्त्रियों को सताया और आज़माईश में डाला, फिर तौबा न की, निश्चय ही उनके लिए जहन्नम की यातना है और उनके लिए जलने की यातना है
तफ़्सीर:
निश्चय जिन लोगों ने ईमान वाले पुरुषों और ईमान वाली औरतों को आग की यातना दी, ताकि उन्हें एक अल्लाह पर ईमान लाने से फेर दें, फिर उन्होंने अपने गुनाहों से तौबा नहीं की, तो उनके लिए क़ियामत के दिन जहन्नम की यातना है, तथा उनके लिए ऐसी आग की यातना है, जो उन्हें जला डालेगी; यह उसका बदला है जो उन्होंने ईमान वालों को आग से जलाया था।
आज की ज़िंदगी में सबक़
खंदक वाले वाकिये (असहाबे-उखदूद) का ज़िक्र है। यह हमें सिखाता है कि ईमान की हिफाज़त में सबसे बड़ी कुर्बानी देने से भी पीछे नहीं हटना चाहिए, जैसा उन ईमान वालों ने किया।
आयत 11
إِنَّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ لَهُمْ جَنَّـٰتٌۭ تَجْرِى مِن تَحْتِهَا ٱلْأَنْهَـٰرُ ۚ ذَٰلِكَ ٱلْفَوْزُ ٱلْكَبِيرُ
إِنَّ
बेशक
ٱلَّذِينَ
वो जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
وَعَمِلُوا۟
और उन्होंने अमल किए
ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ
नेक
لَهُمْ
उनके लिए
جَنَّـٰتٌۭ
बाग़ात हैं
تَجْرِى
बहती हैं
مِن
from
تَحْتِهَا
उनके नीचे से
ٱلْأَنْهَـٰرُ ۚ
नहरें
ذَٰلِكَ
ये
ٱلْفَوْزُ
कामयाबी है
ٱلْكَبِيرُ
बहुत बड़ी
निश्चय ही जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए उनके लिए बाग़ है, जिनके नीचे नहरें बह रही होगी। वही है बड़ी सफलता
तफ़्सीर:
निश्चय जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और अच्छे कार्य किए, उनके लिए ऐसे बाग़ हैं, जिनके महलों एवं पेड़ों के नीचे से नहरें बहती हैं। यह बदला, जो उनके लिए तैयार किया गया है, यही बहुत बड़ी सफलता है, जिसके बराबर कोई अन्य सफलता नहीं हो सकती।
आयत 12
إِنَّ بَطْشَ رَبِّكَ لَشَدِيدٌ
إِنَّ
बेशक
بَطْشَ
पकड़
رَبِّكَ
आपके रब की
لَشَدِيدٌ
अलबत्ता बहुत शदीद है
वास्तव में तुम्हारे रब की पकड़ बड़ी ही सख़्त है
तफ़्सीर:
निश्चय (ऐ रसूल) आपके पालनहार का ज़ालिम को पकड़ना बहुत मज़बूत है (यद्यपि वह उसे थोड़ी मोहलत दे दे)।
आयत 13
إِنَّهُۥ هُوَ يُبْدِئُ وَيُعِيدُ
إِنَّهُۥ
बेशक वो
هُوَ
वो ही
يُبْدِئُ
पहली बार पैदा करता है
وَيُعِيدُ
और वो ही लौटाएगा
वही आरम्भ करता है और वही पुनरावृत्ति करता है,
तफ़्सीर:
वही सृजन और यातना की शुरुआत करता है, और वही इन्हें दोबारा करेगा।
आयत 14
وَهُوَ ٱلْغَفُورُ ٱلْوَدُودُ
وَهُوَ
और वो ही है
ٱلْغَفُورُ
बहुत बख़्शने वाला
ٱلْوَدُودُ
बहुत मुहब्बत करने वाला है
वह बड़ा क्षमाशील, बहुत प्रेम करनेवाला है,
तफ़्सीर:
और वही है जो अपने तौबा करने वाले बंदों के पापों को क्षमा करने वाला है, और वह अपने परहेज़गार दोस्तों से प्रेम करता है।
आयत 15
ذُو ٱلْعَرْشِ ٱلْمَجِيدُ
ذُو
Owner (of)
ٱلْعَرْشِ
अर्श वाला
ٱلْمَجِيدُ
बड़ी शान वाला
सिंहासन का स्वामी है, बडा गौरवशाली,
तफ़्सीर:
वह महिमाशाली अर्श (सिंहासन) का स्वामी है।
आयत 16
فَعَّالٌۭ لِّمَا يُرِيدُ
فَعَّالٌۭ
कर गुज़रने वाला है
لِّمَا
उसे जो
يُرِيدُ
वो चाहता है
जो चाहे उसे कर डालनेवाला
तफ़्सीर:
वह जो चाहे कर गुज़रने वाला है। जिसके गुनाहों को चाहे माफ़ कर दे और जिसे चाहे सज़ा दे। उसे कोई मजबूर करने वाला नहीं है।
आयत 17
هَلْ أَتَىٰكَ حَدِيثُ ٱلْجُنُودِ
هَلْ
क्या
أَتَىٰكَ
आई आपके पास
حَدِيثُ
ख़बर
ٱلْجُنُودِ
लश्करों की
क्या तुम्हें उन सेनाओं की भी ख़बर पहुँची हैं,
तफ़्सीर:
(ऐ रसूल) क्या तुम्हें उन सेनाओं की खबर पहुँची है, जो सत्य से लड़ने और उससे रोकने के लिए एकत्रित हुई थीं?!
आयत 18
فِرْعَوْنَ وَثَمُودَ
فِرْعَوْنَ
फ़िरऔन
وَثَمُودَ
और समूद के
फ़िरऔन और समूद की?
तफ़्सीर:
फ़िरऔन, तथा सालेह अलैहिस्सलाम के समुदाय समूद की?
आयत 19
بَلِ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ فِى تَكْذِيبٍۢ
بَلِ
बल्कि
ٱلَّذِينَ
वो जिन्होंने
كَفَرُوا۟
कुफ़्र किया
فِى
(are) in
تَكْذِيبٍۢ
झुठलाने में लगे हुए हैं
नहीं, बल्कि जिन लोगों ने इनकार किया है, वे झुठलाने में लगे हुए है;
तफ़्सीर:
उनके ईमान न लाने का कारण यह नहीं है कि उनके पास झुठलाने वाले समुदायों और उनके विनाश की खबरें नहीं आई हैं, बल्कि बात यह है कि वे अपनी इच्छाओं के पीछे चलते हुए उस चीज़ को झुठलाते हैं, जो रसूल उनके पास लेकर आए।
आयत 20
وَٱللَّهُ مِن وَرَآئِهِم مُّحِيطٌۢ
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
مِن
from
وَرَآئِهِم
उनके पीछे से (उन्हें)
مُّحِيطٌۢ
घेरने वाला है
हालाँकि अल्लाह उन्हें घेरे हुए है, उनके आगे-पीछे से
तफ़्सीर:
अल्लाह उनके कर्मों से अवगत है, उन्हें गिन रखा है, उनमें से कोई चीज़ भी उससे नहीं छूटती है, और वह उन्हें उनका बदला देगा।
आज की ज़िंदगी में सबक़
जन्नत की खुशखबरी और अल्लाह की कुदरत की गवाही का ज़िक्र है। यह सबक हमें सिखाता है कि दुनिया में ज़ुल्म सहने वालों को आखिरत में बड़ा इनाम मिलेगा, इसलिए मायूस नहीं होना चाहिए।
आयत 21
بَلْ هُوَ قُرْءَانٌۭ مَّجِيدٌۭ
بَلْ
बल्कि
هُوَ
वो
قُرْءَانٌۭ
क़ुरआन है
مَّجِيدٌۭ
बड़ी शान वाला
नहीं, बल्कि वह तो गौरव क़ुरआन है,
तफ़्सीर:
क़ुरआन कोई काव्य या तुकबंदी नहीं है, जैसा कि झुठलाने वालों का दावा है, बल्कि वह गौरव वाला क़ुरआन हा।
आयत 22
فِى لَوْحٍۢ مَّحْفُوظٍۭ
فِى
In
لَوْحٍۢ
a Tablet
مَّحْفُوظٍۭ
लौहे महफ़ूज़ में
सुरक्षित पट्टिका में अंकित है
तफ़्सीर:
वह ऐसी तख्ती में अंकित है, जो परिवर्तन, विरूपण, कमी और वृद्धि से संरक्षित है।
आज की ज़िंदगी में सबक़
कुरआन के महफूज़ लौह में होने के ज़िक्र के साथ सूरह का इख्तिताम होता है। यह हमें सिखाता है कि कुरआन की हिफाज़त खुद अल्लाह के ज़िम्मे है, इस पर पूरा भरोसा रखना चाहिए।
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