नाम का मतलब
रात को चमकने वाला तारा (कसम खाए गए चमकीले तारे के ज़िक्र से)
पृष्ठभूमि
सूरह अत-तारिक़ में इंसान की तख्लीक (उछलते पानी से) और कुरआन की फैसलाकुन बात होने का ज़िक्र है।
फ़ज़ीलत / सार
इस सूरह में हर इंसान पर एक निगरान (हाफिज़) फरिश्ते के मुकर्रर होने का ज़िक्र है, जो हमें हर वक्त की निगरानी का एहसास दिलाता है।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
आयत 1
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ وَٱلسَّمَآءِ وَٱلطَّارِقِ
وَٱلسَّمَآءِ
क़सम है आसमान की
وَٱلطَّارِقِ
और रात को आने वाले की
साक्षी है आकाश, और रात में प्रकट होनेवाला -
तफ़्सीर:
अल्लाह ने आसमान की तथा उस तारे की क़सम खाई है, जो रात में निकलता है।
आयत 2
وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا ٱلطَّارِقُ
وَمَآ
और क्या चीज़
أَدْرَىٰكَ
बताए आपको
مَا
क्या है
ٱلطَّارِقُ
रात को आने वाला
और तुम क्या जानो कि रात में प्रकट होनेवाला क्या है?
तफ़्सीर:
और (ऐ रसूल) आप इस महान सितारे के बारे में क्या जानें?!
आयत 3
ٱلنَّجْمُ ٱلثَّاقِبُ
ٱلنَّجْمُ
सितारा है
ٱلثَّاقِبُ
चमकता हुआ
दमकता हुआ तारा! -
तफ़्सीर:
यह वह सितारा है, जो अपनी चमकती हुई रोशनी से आकाश को आलोकित कर देता है।
आयत 4
إِن كُلُّ نَفْسٍۢ لَّمَّا عَلَيْهَا حَافِظٌۭ
إِن
नहीं
كُلُّ
(is) every
نَفْسٍۢ
कोई नफ़्स
لَّمَّا
मगर
عَلَيْهَا
है उस पर
حَافِظٌۭ
एक हिफ़ाज़त करने वाला
कि हर एक व्यक्ति पर एक निगरानी करनेवाला नियुक्त है
तफ़्सीर:
प्रत्येक प्राणी पर अल्लाह ने एक फ़रिश्ता नियुक्त कर रखा है, जो क़ियामत के दिन हिसाब के लिए उसके कार्यों को संरक्षित करता है।
आयत 5
فَلْيَنظُرِ ٱلْإِنسَـٰنُ مِمَّ خُلِقَ
فَلْيَنظُرِ
पस चाहिए कि देखे
ٱلْإِنسَـٰنُ
इन्सान
مِمَّ
किस चीज़ से
خُلِقَ
वो पैदा किया गया
अतः मनुष्य को चाहिए कि देखे कि वह किस चीज़ से पैदा किया गया है
तफ़्सीर:
मनुष्य को चिंतन करना चाहिए कि अल्लाह ने उसे किस चीज़ से पैदा किया है, ताकि उसके लिए अल्लाह की शक्ति और मनुष्य की विवशता स्पष्ट हो जाए।
आयत 6
خُلِقَ مِن مَّآءٍۢ دَافِقٍۢ
خُلِقَ
वो पैदा किया गया
مِن
from
مَّآءٍۢ
पानी से
دَافِقٍۢ
उछलने वाले
एक उछलते पानी से पैदा किया गया है,
तफ़्सीर:
अल्लाह ने उसे एक उछलने वाले पानी से पैदा किया है, जो गर्भाशय में डाला जाता है।
आयत 7
يَخْرُجُ مِنۢ بَيْنِ ٱلصُّلْبِ وَٱلتَّرَآئِبِ
يَخْرُجُ
जो निकलता है
مِنۢ
from
بَيْنِ
दर्मियान से
ٱلصُّلْبِ
पीठ
وَٱلتَّرَآئِبِ
और सीने की हड्डियों के
जो पीठ और पसलियों के मध्य से निकलता है
तफ़्सीर:
यह पानी आदमी की रीढ़ की हड्डी और और सीने की हड्डियों के बीच से निकलता है।
आयत 8
إِنَّهُۥ عَلَىٰ رَجْعِهِۦ لَقَادِرٌۭ
إِنَّهُۥ
बेशक वो
عَلَىٰ
to
رَجْعِهِۦ
उसके लौटाने पर
لَقَادِرٌۭ
यक़ीनन क़ादिर है
निश्चय ही वह उसके लौटा देने की सामर्थ्य रखता है
तफ़्सीर:
निश्चित रूप से वह महिमावान् (अल्लाह) - जब उसे उस तुच्छ पानी से पैदा कर दिया - उसकी मौत के बाद उसे, हिसाब और बदले के लिए, फिर से जीवित करके उठाने में सक्षम है।
आयत 9
يَوْمَ تُبْلَى ٱلسَّرَآئِرُ
يَوْمَ
जिस दिन
تُبْلَى
जाँच पड़ताल की जाएगी
ٱلسَّرَآئِرُ
तमाम राज़ों की
जिस दिन छिपी चीज़ें परखी जाएँगी,
तफ़्सीर:
जिस दिन छिपी हुई बातें परखी जाएँगी। चुनाँचे दिलों के अंदर छिपे हुए इरादों और आस्थाओं, आदि को प्रत्यक्ष कर दिया जाएगा। इस तरह उनमें से अच्छा और भ्रष्ट अलग-अलग हो जाएगा।
आयत 10
فَمَا لَهُۥ مِن قُوَّةٍۢ وَلَا نَاصِرٍۢ
فَمَا
तो नहीं होगी
لَهُۥ
उसके लिए
مِن
any
قُوَّةٍۢ
कोई क़ुव्वत
وَلَا
और ना
نَاصِرٍۢ
कोई मददगार
तो उस समय उसके पास न तो अपनी कोई शक्ति होगी और न कोई सहायक
तफ़्सीर:
उस दिन मनुष्य के पास कोई न तो कोई शक्ति होगी, जिसके द्वारा वह अल्लाह की यातना से बच सके, और न ही कोई सहायक होगा, जो उसकी मदद कर सके।
आज की ज़िंदगी में सबक़
कसम, इंसान की तख्लीक और आमाल की निगरानी का ज़िक्र है। यह हमें सिखाता है कि हर इंसान पर एक निगरान फरिश्ता मुकर्रर है, इसलिए तनहाई में भी अपने अमल का ख्याल रखना चाहिए।
आयत 11
وَٱلسَّمَآءِ ذَاتِ ٱلرَّجْعِ
وَٱلسَّمَآءِ
क़सम है आसमान की
ذَاتِ
which
ٱلرَّجْعِ
जो पलटने वाला है
साक्षी है आवर्तन (उलट-फेर) वाला आकाश,
तफ़्सीर:
अल्लाह ने बारिश वाले आसमान की क़सम खाई है। क्योंकि यह (बारिश) आसमान ही की ओर से बार-बार बरसती है।
आयत 12
وَٱلْأَرْضِ ذَاتِ ٱلصَّدْعِ
وَٱلْأَرْضِ
और ज़मीन की
ذَاتِ
which
ٱلصَّدْعِ
जो फटने वाली है
और फट जानेवाली धरती
तफ़्सीर:
और धरती की क़सम खाई है, जो फटती है और उससे पौधे, फल और पेड़ निकलते हैं।
आयत 13
إِنَّهُۥ لَقَوْلٌۭ فَصْلٌۭ
إِنَّهُۥ
बेशक वो
لَقَوْلٌۭ
यक़ीनन एक बात है
فَصْلٌۭ
फ़ैसला कुन
वह दो-टूक बात है,
तफ़्सीर:
निश्चय मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर उतरने वाला यह क़ुरआन, एक ऐसा कथन है, जो सत्य और असत्य के बीच, तथा सच और झूठ के बीच अलगाव (अंतर) करता है।
आयत 14
وَمَا هُوَ بِٱلْهَزْلِ
وَمَا
और नहीं है
هُوَ
वो
بِٱلْهَزْلِ
कोई हँसी-मज़ाक़
वह कोई हँसी-मज़ाक नही है
तफ़्सीर:
यह खेल और झूठ नहीं है, बल्कि यह गंभीर और सच है।
आयत 15
إِنَّهُمْ يَكِيدُونَ كَيْدًۭا
إِنَّهُمْ
बेशक वो
يَكِيدُونَ
वो चाल चल रहे हैं
كَيْدًۭا
एक चाल
वे एक चाल चल रहे है,
तफ़्सीर:
निश्चित रूप से जो लोग उस चीज़ को झुठलाने वाले हैं, जो उनके रसूल उनके पास लेकर आए हैं, वे उनके मिशन को रोकने के लिए बहुत चालें चलते हैं।
आयत 16
وَأَكِيدُ كَيْدًۭا
وَأَكِيدُ
और मैं तदबीर कर रहा हूँ
كَيْدًۭا
एक तदबीर
और मैं भी एक चाल चल रहा हूँ
तफ़्सीर:
और मैं भी धर्म को शक्ति प्रदान करने और असत्य का सफ़ाया करने के लिए गुप्त उपाय करता हूँ।
आयत 17
فَمَهِّلِ ٱلْكَـٰفِرِينَ أَمْهِلْهُمْ رُوَيْدًۢا
فَمَهِّلِ
पस मोहलत दे दीजिए
ٱلْكَـٰفِرِينَ
काफ़िरों को
أَمْهِلْهُمْ
मोहलत देना उन्हें
رُوَيْدًۢا
थोड़ी सी (मोहलत)
अत मुहलत दे दो उन इनकार करनेवालों को; मुहलत दे दो उन्हें थोड़ी-सी
तफ़्सीर:
अतः (ऐ रसूल!) आप इन काफ़िरों को मोहलत दे दें, उन्हें थोड़ी देर के लिए छोड़ दें, और उन्हें यातना देने और विनष्ट करने के लिए जल्दी न करें।
आज की ज़िंदगी में सबक़
कुरआन की फैसलाकुन बात और कुफ्फार की चाल के ज़िक्र के साथ सूरह का इख्तिताम होता है। यह सबक हमें सिखाता है कि कुफ्फार चाहे कितनी भी चाल चलें, अल्लाह की तदबीर के आगे वह कमज़ोर हैं, इसलिए सब्र से काम लेना चाहिए।
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