नाम का मतलब
छा जाने वाली आफत (कयामत, जो हर तरफ छा जाएगी)
पृष्ठभूमि
सूरह अल-ग़ाशिया में कयामत के दिन जन्नती-दोज़खी लोगों के हाल और कायनात की निशानियों (ऊंट, आसमान, पहाड़, ज़मीन) पर गौर करने की दावत है।
फ़ज़ीलत / सार
इस सूरह में ऊंट जैसी आम मखलूक पर भी गौर करने की दावत दी गई है, जो हमें अपने रोज़मर्रा माहौल में भी अल्लाह की निशानियां तलाश करने की तालीम देती है।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
आयत 1
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ هَلْ أَتَىٰكَ حَدِيثُ ٱلْغَـٰشِيَةِ
هَلْ
क्या
أَتَىٰكَ
आई है आपके पास
حَدِيثُ
ख़बर
ٱلْغَـٰشِيَةِ
ढाँप लेने वाली की
क्या तुम्हें उस छा जानेवाली की ख़बर पहुँची है?
तफ़्सीर:
क्या (ऐ रसूल) आपके पास उस क़ियामत की ख़बर पहुँची, जिसकी भयावहता लोगों को घेर लेगी?!
आयत 2
وُجُوهٌۭ يَوْمَئِذٍ خَـٰشِعَةٌ
وُجُوهٌۭ
कुछ चेहरे
يَوْمَئِذٍ
उस दिन
خَـٰشِعَةٌ
ज़लील होंगे
उस दिन कितने ही चेहरे गिरे हुए होंगे,
तफ़्सीर:
क़ियामत के दिन लोग या तो दुर्भाग्यशाली होंगे और या तो सौभाग्यशाली। चुनाँचे दुर्भाग्यशाली लोगों के चेहरे अपमानित और झुके हुए होंगे।
आयत 3
عَامِلَةٌۭ نَّاصِبَةٌۭ
عَامِلَةٌۭ
अमल करने वाले
نَّاصِبَةٌۭ
थक जाने वाले
कठिन परिश्रम में पड़े, थके-हारे
तफ़्सीर:
वे जिन ज़ंजीरों में बाँधकर खींचे जाएँगे और जिन बेड़ियों में जकड़े हुए होंगे, उनके कारण थके-हारे होंगे।
आयत 4
تَصْلَىٰ نَارًا حَامِيَةًۭ
تَصْلَىٰ
वो जलेंगे
نَارًا
आग में
حَامِيَةًۭ
भड़कती हुई
दहकती आग में प्रवेश करेंगे
तफ़्सीर:
वे चेहरे एक गर्म आग में प्रवेश कर उसकी तपिश झेलेंगे।
आयत 5
تُسْقَىٰ مِنْ عَيْنٍ ءَانِيَةٍۢ
تُسْقَىٰ
वो पिलाए जाऐंगे
مِنْ
from
عَيْنٍ
एक चश्मे से
ءَانِيَةٍۢ
खौलते हुए पानी के
खौलते हुए स्रोत से पिएँगे,
तफ़्सीर:
उन्हें ऐसे चशमे का पानी पिलाया जाएगा, जिसका पानी सख़्त गर्म होगा।
आयत 6
لَّيْسَ لَهُمْ طَعَامٌ إِلَّا مِن ضَرِيعٍۢ
لَّيْسَ
नहीं है
لَهُمْ
उनके लिए
طَعَامٌ
कोई खाना
إِلَّا
सिवाए
مِن
from
ضَرِيعٍۢ
काँटों के
उनके लिए कोई खाना न होगा सिवाय एक प्रकार के ज़री के,
तफ़्सीर:
उनके लिए शिबरिक़ नामक पौधे के सबसे बुरे और बदबूदार खाने को छोड़कर भोजन करने के लिए कोई खाना नहीं होगा, जो सूखने के बाद ज़हरीला बन जाता है।
आयत 7
لَّا يُسْمِنُ وَلَا يُغْنِى مِن جُوعٍۢ
لَّا
Not
يُسْمِنُ
ना वो मोटा करेगा
وَلَا
और ना
يُغْنِى
वो काम आएगा
مِن
from
جُوعٍۢ
भूख से
जो न पुष्ट करे और न भूख मिटाए
तफ़्सीर:
वह न उसके खाने वाले को मोटा करेगा और न उसकी भूख मिटाएगा।
आयत 8
وُجُوهٌۭ يَوْمَئِذٍۢ نَّاعِمَةٌۭ
وُجُوهٌۭ
कुछ चेहरे
يَوْمَئِذٍۢ
उस दिन
نَّاعِمَةٌۭ
तरो ताज़ा होंगे
उस दिन कितने ही चेहरे प्रफुल्लित और सौम्य होंगे,
तफ़्सीर:
उस दिन सौभाग्यशाली लोगों के चेहरे, नेमतों के कारण, प्रफुल्लित और हर्षित होंगे।
आयत 9
لِّسَعْيِهَا رَاضِيَةٌۭ
لِّسَعْيِهَا
अपनी कोशिशों पर
رَاضِيَةٌۭ
राज़ी होंगे
अपने प्रयास पर प्रसन्न,
तफ़्सीर:
वे दुनिया में अपने किए हुए नेक कार्य पर प्रसन्न होंगे। क्योंकि उन्हें अपने काम का सवाब कई गुना बढ़ाकर सहेजा हुआ मिलेगा।
आयत 10
فِى جَنَّةٍ عَالِيَةٍۢ
فِى
In
جَنَّةٍ
a garden
عَالِيَةٍۢ
बुलन्द जन्नत में होंगे
उच्च जन्नत में,
तफ़्सीर:
ऊँचे स्थान एवं उच्च स्थिति वाली जन्नत में होंगे।
आज की ज़िंदगी में सबक़
दोज़खियों के हाल का ज़िक्र है। यह हमें सिखाता है कि दोज़ख़ के अज़ाब से डरना और उससे बचने की कोशिश करनी चाहिए।
आयत 11
لَّا تَسْمَعُ فِيهَا لَـٰغِيَةًۭ
لَّا
Not
تَسْمَعُ
नहीं वो सुनेंगे
فِيهَا
उसमें
لَـٰغِيَةًۭ
कोई लग़्व बात
जिसमें कोई व्यर्थ बात न सुनेंगे
तफ़्सीर:
जन्नत में कोई निषिद्ध बात सुनना तो दूर, कोई व्यर्थ और फालतू बात भी नहीं सुनेंगे।
आयत 12
فِيهَا عَيْنٌۭ جَارِيَةٌۭ
فِيهَا
उसमें
عَيْنٌۭ
एक चश्मा होगा
جَارِيَةٌۭ
जारी / रवाँ
उसमें स्रोत प्रवाहित होगा,
तफ़्सीर:
इस जन्नत में बहने वाले चश्मे हैं, जिन्हें वे जैसे चाहेंगे बहा और फेर ले जाएँगे।
आयत 13
فِيهَا سُرُرٌۭ مَّرْفُوعَةٌۭ
فِيهَا
उसमें
سُرُرٌۭ
मसनदें होंगी
مَّرْفُوعَةٌۭ
बुलन्द
उसमें ऊँची-ऊँची मसनदें होगी,
तफ़्सीर:
उसमें ऊँचे-ऊँचे तख्त हैं।
आयत 14
وَأَكْوَابٌۭ مَّوْضُوعَةٌۭ
وَأَكْوَابٌۭ
और प्याले
مَّوْضُوعَةٌۭ
रखे हुए
प्याले ढंग से रखे होंगे,
तफ़्सीर:
और पीने के लिए तैयार रखे हुए प्याले हैं।
आयत 15
وَنَمَارِقُ مَصْفُوفَةٌۭ
وَنَمَارِقُ
और तकिये
مَصْفُوفَةٌۭ
सफ़ दर सफ़
क्रम से गाव तकिए लगे होंगे,
तफ़्सीर:
और उसमें क्रम से रखे हुए तकिए हैं।
आयत 16
وَزَرَابِىُّ مَبْثُوثَةٌ
وَزَرَابِىُّ
और नफ़ीस क़ालीन
مَبْثُوثَةٌ
फैलाए हुए
और हर ओर क़ालीने बिछी होंगी
तफ़्सीर:
और उसमें जगह-जगह बिछे हुए बहुत-से क़ालीन हैं।
आयत 17
أَفَلَا يَنظُرُونَ إِلَى ٱلْإِبِلِ كَيْفَ خُلِقَتْ
أَفَلَا
क्या फिर नहीं
يَنظُرُونَ
वो देखते
إِلَى
towards
ٱلْإِبِلِ
तरफ़ ऊँटों के
كَيْفَ
कैसे
خُلِقَتْ
वो पैदा किए गए
फिर क्या वे ऊँट की ओर नहीं देखते कि कैसा बनाया गया?
तफ़्सीर:
क्या वे ऊँट को ध्यान से नहीं देखते कि अल्लाह ने उसे कैसे पैदा बनाया और उसे आदम की संतान के लिए अधीन कर दिया?!
आयत 18
وَإِلَى ٱلسَّمَآءِ كَيْفَ رُفِعَتْ
وَإِلَى
And towards
ٱلسَّمَآءِ
और तरफ़ आसमान के
كَيْفَ
कैसे
رُفِعَتْ
वो बुलन्द किया गया
और आकाश की ओर कि कैसा ऊँचा किया गया?
तफ़्सीर:
और आसमान को नहीं देखते कि उसे कैसे ऊँचा किया यहाँ तक कि वह उनके ऊपर एक सुरक्षित छत बन गया, जो उनपर गिरता नहीं है?!
आयत 19
وَإِلَى ٱلْجِبَالِ كَيْفَ نُصِبَتْ
وَإِلَى
And towards
ٱلْجِبَالِ
और तरफ़ पहाड़ों के
كَيْفَ
कैसे
نُصِبَتْ
वो नसब किए गए
और पहाड़ो की ओर कि कैसे खड़े किए गए?
तफ़्सीर:
और पहाड़ों को नहीं देखते कि कैसे अल्लाह ने उन्हें गाड़ रखा है और उनके द्वारा धरती को मज़बूत बना रखा है, ताकि लोगों के साथ हिल-डुल न सके।
आयत 20
وَإِلَى ٱلْأَرْضِ كَيْفَ سُطِحَتْ
وَإِلَى
And towards
ٱلْأَرْضِ
और तरफ़ ज़मीन के
كَيْفَ
कैसे
سُطِحَتْ
वो बिछाई गई
और धरती की ओर कि कैसी बिछाई गई?
तफ़्सीर:
और धरती को नहीं देखते कि अल्लाह ने उसे कैसे बिछाया और उसे लोगों के उसपर बसने के लिए तैयार किया?!
आज की ज़िंदगी में सबक़
जन्नतियों की नेमतों और कायनात की निशानियों (ऊंट, आसमान, पहाड़, ज़मीन) पर गौर करने का ज़िक्र है। यह सबक हमें सिखाता है कि रोज़मर्रा नज़र आने वाली चीज़ों पर गौर करने से भी अल्लाह की कुदरत का यकीन मज़बूत होता है।
आयत 21
فَذَكِّرْ إِنَّمَآ أَنتَ مُذَكِّرٌۭ
فَذَكِّرْ
पस नसीहत कीजिए
إِنَّمَآ
बेशक
أَنتَ
आप तो
مُذَكِّرٌۭ
नसीहत करने वाले हैं
अच्छा तो नसीहत करो! तुम तो बस एक नसीहत करनेवाले हो
तफ़्सीर:
(ऐ रसूल) आप इन लोगों को नसीहत करें और इन्हें अल्लाह के अज़ाब से डराएँ, क्योंकि आप केवल नसीहत करने वाले हैं। आपको केवल उन्हें नसीहत करने के लिए कहा जाता है। जहाँ तक उन्हें ईमान की तौफ़ीक़ देने की बात है, तो वह केवल अल्लाह के हाथ में है।
आयत 22
لَّسْتَ عَلَيْهِم بِمُصَيْطِرٍ
لَّسْتَ
नहीं आप
عَلَيْهِم
उन पर
بِمُصَيْطِرٍ
दारोग़ा / ज़िम्मेदार
तुम उनपर कोई दरोग़ा नही हो
तफ़्सीर:
आप उनपर नियुक्त नहीं हैं कि उन्हें ईमान लाने पर मजबूर करें।
आयत 23
إِلَّا مَن تَوَلَّىٰ وَكَفَرَ
إِلَّا
मगर
مَن
वो जिसने
تَوَلَّىٰ
मुँह मोड़ा
وَكَفَرَ
और उसने इन्कार किया
किन्तु जिस किसी ने मुँह फेरा और इनकार किया,
तफ़्सीर:
परंतु उनमें से जिसने ईमान से मुँह मोड़ लिया और अल्लाह तथा उसके रसूल का इनकार किया।
आयत 24
فَيُعَذِّبُهُ ٱللَّهُ ٱلْعَذَابَ ٱلْأَكْبَرَ
فَيُعَذِّبُهُ
तो अज़ाब देगा उसे
ٱللَّهُ
अल्लाह
ٱلْعَذَابَ
अज़ाब
ٱلْأَكْبَرَ
सब से बड़ा
तो अल्लाह उसे बड़ी यातना देगा
तफ़्सीर:
तो क़ियामत के दिन अल्लाह उसे सबसे बड़ी यातना देगा कि उसे जहन्नम में दाखिल करेगा, जहाँ वह हमेशा रहेगा।
आयत 25
إِنَّ إِلَيْنَآ إِيَابَهُمْ
إِنَّ
बेशक
إِلَيْنَآ
हमारी ही तरफ़
إِيَابَهُمْ
लौटना है उनका
निस्संदेह हमारी ओर ही है उनका लौटना,
तफ़्सीर:
निश्चय वे अपनी मृत्यु के बाद अकेले हमारी ही ओर वापस आएँगे।
आयत 26
ثُمَّ إِنَّ عَلَيْنَا حِسَابَهُم
ثُمَّ
फिर
إِنَّ
बेशक
عَلَيْنَا
हमारे ही ज़िम्मे
حِسَابَهُم
हिसाब है उनका
फिर हमारे ही ज़िम्मे है उनका हिसाब लेना
तफ़्सीर:
फिर अकेले हमारे ही ज़िम्मे उनके कार्यों पर उनका हिसाब लेना है। आपको या आपके सिवा किसी और को इसका अधिकार नहीं है।
आज की ज़िंदगी में सबक़
नबी ﷺ की ज़िम्मेदारी सिर्फ नसीहत करना होने के ज़िक्र के साथ सूरह का इख्तिताम होता है। यह हमें सिखाता है कि हमारा काम सही बात पहुंचाना है, किसी को ज़बरदस्ती मनवाना हमारे बस में नहीं, हिसाब अल्लाह के हाथ में है।
मेरा एक्शन प्लान
अपना एक्शन प्लान लिखने और सेव करने के लिए लॉगिन करें।