सूरह अल-बलद سورة البلد
मक्की 20 आयतें
नाम का मतलब
शहर (मक्का शहर, जिसकी कसम खाई गई है)
पृष्ठभूमि
सूरह अल-बलद में इंसान की मशक्कत भरी ज़िंदगी और नेकी की दो बड़ी राहों (गर्दन आज़ाद करना, भूखे को खिलाना) का ज़िक्र है।
फ़ज़ीलत / सार
इस सूरह में नेकी की दो घाटियों (अकबा) का ज़िक्र है, जिन्हें पार करना असली कामयाबी है — यह हमें समाजी भलाई की अहमियत सिखाती है।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
आयत 1
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ لَآ أُقْسِمُ بِهَـٰذَا ٱلْبَلَدِ
لَآ
Nay
أُقْسِمُ
नहीं मैं क़सम खाता हूँ
بِهَـٰذَا
by this
ٱلْبَلَدِ
इस शहर की
सुनो! मैं क़सम खाता हूँ इस नगर (मक्का) की -
तफ़्सीर:
अल्लाह ने पवित्र नगर की क़सम खाई है, जो मक्का मुकर्रमा है।
आयत 2
وَأَنتَ حِلٌّۢ بِهَـٰذَا ٱلْبَلَدِ
وَأَنتَ
और आप
حِلٌّۢ
मुक़ीम हैं
بِهَـٰذَا
in this
ٱلْبَلَدِ
इस शहर में
हाल यह है कि तुम इसी नगर में रह रहे हो -
तफ़्सीर:
और (ऐ रसूल) आपके लिए इस नगर में, जो क़त्ल किए जाने का हक़दार उसे क़त्ल करना और जो बंदी बनाए जाने का हक़दार है, उसे बंदी बनाना, वैध है।
आयत 3
وَوَالِدٍۢ وَمَا وَلَدَ
وَوَالِدٍۢ
क़सम है वालिद की
وَمَا
और जिसे
وَلَدَ
उसने जन्म दिया
और बाप और उसकी सन्तान की,
तफ़्सीर:
अल्लाह ने मानव जाति के पिता की क़सम खाई है एवं उससे पैदा होने वाली संतान की क़सम खाई है।
आयत 4
لَقَدْ خَلَقْنَا ٱلْإِنسَـٰنَ فِى كَبَدٍ
لَقَدْ
अलबत्ता तहक़ीक़
خَلَقْنَا
पैदा किया हमने
ٱلْإِنسَـٰنَ
इन्सान को
فِى
(to be) in
كَبَدٍ
मशक़्क़त में
निस्संदेह हमने मनुष्य को पूर्ण मशक़्क़त (अनुकूलता और सन्तुलन) के साथ पैदा किया
तफ़्सीर:
हमने मानव जाति की रचना कष्ट और कठिनाई की स्थिति में की है; क्योंकि वह इस दुनिया में कठिनाइयाँ झेलता रहता है।
आयत 5
أَيَحْسَبُ أَن لَّن يَقْدِرَ عَلَيْهِ أَحَدٌۭ
أَيَحْسَبُ
क्या वो समझता है
أَن
कि
لَّن
हरगिज़ नहीं
يَقْدِرَ
क़ादिर होगा
عَلَيْهِ
उस पर
أَحَدٌۭ
कोई एक
क्या वह समझता है कि उसपर किसी का बस न चलेगा?
तफ़्सीर:
क्या इनसान यह समझता है कि यदि वह पाप करता है, तो कोई भी उसकी पकड़ करने में सक्षम नहीं होगा और न ही उससे बदला लेगा, भले ही वह उसका पालनहार ही हो जिसने उसे बनाया है?!
आयत 6
يَقُولُ أَهْلَكْتُ مَالًۭا لُّبَدًا
يَقُولُ
वो कहता है
أَهْلَكْتُ
हलाक कर दिया मैं ने
مَالًۭا
माल
لُّبَدًا
ढेरों
कहता है कि "मैंने ढेरो माल उड़ा दिया।"
तफ़्सीर:
वह कहता है कि मैंने बहुत ढेर सारा धन खर्च कर दिया।
आयत 7
أَيَحْسَبُ أَن لَّمْ يَرَهُۥٓ أَحَدٌ
أَيَحْسَبُ
क्या वो समझता है
أَن
कि
لَّمْ
नहीं
يَرَهُۥٓ
देखा उसे
أَحَدٌ
किसी एक ने
क्या वह समझता है कि किसी ने उसे देखा नहीं?
तफ़्सीर:
क्या यह अपने खर्च करने पर गर्व करने वाला यह समझता है कि अल्लाह उसे नहीं देखता है?! और यह कि वह उससे उसके माल का हिसाब नहीं लेगा कि उसे कहाँ से कमाया और उसे किस पर ख़र्च किया?!
आयत 8
أَلَمْ نَجْعَل لَّهُۥ عَيْنَيْنِ
أَلَمْ
क्या नहीं
نَجْعَل
हमने बनाईं
لَّهُۥ
उसके लिए
عَيْنَيْنِ
दो आँखें
क्या हमने उसे नहीं दी दो आँखें,
तफ़्सीर:
क्या हमने उसके लिए दो आँखें नहीं बनाईं, जिनसे वह देखता है?!
आयत 9
وَلِسَانًۭا وَشَفَتَيْنِ
وَلِسَانًۭا
और एक ज़बान
وَشَفَتَيْنِ
और दो होंट
और एक ज़बान और दो होंठ?
तफ़्सीर:
तथा बात करने के लिए एक ज़बान और दो होंठ नहीं बनाए?!
आयत 10
وَهَدَيْنَـٰهُ ٱلنَّجْدَيْنِ
وَهَدَيْنَـٰهُ
और दिखाए हमने उसे
ٱلنَّجْدَيْنِ
दो रास्ते
और क्या ऐसा नहीं है कि हमने दिखाई उसे दो ऊँचाइयाँ?
तफ़्सीर:
और हमने उसे अच्छाई के मार्ग और झूठ के रास्ते से अवगत कराया?!
आज की ज़िंदगी में सबक़
इंसान की मशक्कत भरी ज़िंदगी और नेकी-बदी की दो राहों का ज़िक्र है। यह हमें सिखाता है कि ज़िंदगी मशक्कत से भरी है, इसलिए सही राह चुनना और अच्छे अमल करना ज़रूरी है।
आयत 11
فَلَا ٱقْتَحَمَ ٱلْعَقَبَةَ
فَلَا
पस ना
ٱقْتَحَمَ
वो दाख़िल हुआ
ٱلْعَقَبَةَ
घाटी में
किन्तु वह तो हुमककर घाटी में से गुजंरा ही नहीं और (न उसने मुक्ति का मार्ग पाया)
तफ़्सीर:
उसे चाहि था कि उस घाटी को पार करता, जो उसे जन्नत से अलग करती है। चुनाँचे वह उसे तय करता और उसे पार कर जाता।
आयत 12
وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا ٱلْعَقَبَةُ
وَمَآ
और क्या चीज़
أَدْرَىٰكَ
बताए आपको
مَا
कि क्या है
ٱلْعَقَبَةُ
वो घाटी
और तुम्हें क्या मालूम कि वह घाटी क्या है!
तफ़्सीर:
और (ऐ रसूल) आपको क्या मालूम कि वह घाटी क्या है, जो उसे जन्नत में प्रवेश करने के लिए पार करना है?!
आयत 13
فَكُّ رَقَبَةٍ
فَكُّ
आज़ाद करना
رَقَبَةٍ
एक गर्दन का
किसी गरदन का छुड़ाना
तफ़्सीर:
यह एक पुरुष या महिला की गर्दन छुड़ाना है।
आयत 14
أَوْ إِطْعَـٰمٌۭ فِى يَوْمٍۢ ذِى مَسْغَبَةٍۢ
أَوْ
या
إِطْعَـٰمٌۭ
खाना खिलाना
فِى
in
يَوْمٍۢ
एक दिन में
ذِى
of
مَسْغَبَةٍۢ
भूख वाले
या भूख के दिन खाना खिलाना
तफ़्सीर:
या अकाल के दिन खाना खिलाना, जब भोजन मिलना दुर्लभ हो।
आयत 15
يَتِيمًۭا ذَا مَقْرَبَةٍ
يَتِيمًۭا
किसी यतीम
ذَا
of
مَقْرَبَةٍ
क़राबत वाले को
किसी निकटवर्ती अनाथ को,
तफ़्सीर:
ऐसे बच्चे को, जिसने अपने पिता को खो दिया हो, जिसके साथ उसकी रिश्तेदारी हो।
आयत 16
أَوْ مِسْكِينًۭا ذَا مَتْرَبَةٍۢ
أَوْ
या
مِسْكِينًۭا
किसी मिसकीन
ذَا
in
مَتْرَبَةٍۢ
ख़ाक नशीन को
या धूल-धूसरित मुहताज को;
तफ़्सीर:
या ऐसे ग़रीब को, जिसके पास अपना कुछ नहीं है।
आयत 17
ثُمَّ كَانَ مِنَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَتَوَاصَوْا۟ بِٱلصَّبْرِ وَتَوَاصَوْا۟ بِٱلْمَرْحَمَةِ
ثُمَّ
फिर
كَانَ
हो वो
مِنَ
of
ٱلَّذِينَ
उनमें से जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
وَتَوَاصَوْا۟
और उन्होंने एक दूसरे को तलक़ीन की
بِٱلصَّبْرِ
सब्र की
وَتَوَاصَوْا۟
और एक दूसरे को तलक़ीन की
بِٱلْمَرْحَمَةِ
रहम करने की
फिर यह कि वह उन लोगों में से हो जो ईमान लाए और जिन्होंने एक-दूसरे को धैर्य की ताकीद की , और एक-दूसरे को दया की ताकीद की
तफ़्सीर:
फिर वह उन लोगों में से हो, जो अल्लाह पर ईमान लाए और एक-दूसरे को नेक कामों पर डटे रहने, गुनाहों से दूर रहने और मुसीबत के समय धैर्य रखने की सलाह दी, तथा एक-दूसरे को अल्लाह के बंदों पर दया करने की सलाह दी।
आयत 18
أُو۟لَـٰٓئِكَ أَصْحَـٰبُ ٱلْمَيْمَنَةِ
أُو۟لَـٰٓئِكَ
यही लोग हैं
أَصْحَـٰبُ
(are the) companions
ٱلْمَيْمَنَةِ
दाऐं हाथ वाले
वही लोग है सौभाग्यशाली
तफ़्सीर:
इन विशेषताओं से सुसज्जित लोग ही दाहिने हाथ वाले हैं।
आयत 19
وَٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ بِـَٔايَـٰتِنَا هُمْ أَصْحَـٰبُ ٱلْمَشْـَٔمَةِ
وَٱلَّذِينَ
और वो जिन्होंने
كَفَرُوا۟
कुफ़्र किया
بِـَٔايَـٰتِنَا
हमारी आयात के साथ
هُمْ
वो हैं
أَصْحَـٰبُ
(are the) companions
ٱلْمَشْـَٔمَةِ
बाऐं हाथ वाले
रहे वे लोग जिन्होंने हमारी आयातों का इनकार किया, वे दुर्भाग्यशाली लोग है
तफ़्सीर:
और जिन लोगों ने हमारे रसूल पर उतारी गई हमारी आयतों का इनकार किया, वही लोग बाएँ हाथ वाले हैं।
आयत 20
عَلَيْهِمْ نَارٌۭ مُّؤْصَدَةٌۢ
عَلَيْهِمْ
उन पर
نَارٌۭ
आग होगी
مُّؤْصَدَةٌۢ
बन्द की हुई
उनपर आग होगी, जिसे बन्द कर दिया गया होगा
तफ़्सीर:
क़ियामत के दिन उनपर बंद की हुई आग होगी, जिसमें उन्हें यातना दी जाएगी।
आज की ज़िंदगी में सबक़
नेकी की घाटी (गर्दन आज़ाद करना, भूखे को खिलाना) के ज़िक्र के साथ सूरह का इख्तिताम होता है। यह सबक हमें सिखाता है कि गुलाम आज़ाद करना और भूखे-यतीम-मिस्कीन को खिलाना असली नेकी की घाटी पार करने के ज़रिए हैं।
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