नाम का मतलब
सूरज (कसम खाए गए सूरज के ज़िक्र से)
पृष्ठभूमि
सूरह अश-शम्स में इंसान की नफ्स की पाकीज़गी और समूद कौम की तबाही का ज़िक्र है।
फ़ज़ीलत / सार
इस सूरह में यह बुनियादी उसूल बताया गया है कि जो अपने नफ्स को पाक करे वह कामयाब है और जो उसे गंदा करे वह नाकाम, यह हर इंसान के लिए एक साफ मेयार है।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
आयत 1
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ وَٱلشَّمْسِ وَضُحَىٰهَا
وَٱلشَّمْسِ
क़सम है सूरज की
وَضُحَىٰهَا
और उसकी धूप की
साक्षी है सूर्य और उसकी प्रभा,
तफ़्सीर:
अल्लाह ने सूरज की क़सम खाई है और उसके पूरब से निकलने के बाद ऊपर चढ़ने के समय की क़सम खाई है।
आयत 2
وَٱلْقَمَرِ إِذَا تَلَىٰهَا
وَٱلْقَمَرِ
और चाँद की
إِذَا
जब
تَلَىٰهَا
वो उसके पीछे आऐ
और चन्द्रमा जबकि वह उनके पीछे आए,
तफ़्सीर:
और चाँद की क़सम खाई है, जब वह सूरज डूबने के बाद उसके पीछे आए।
आयत 3
وَٱلنَّهَارِ إِذَا جَلَّىٰهَا
وَٱلنَّهَارِ
और दिन की
إِذَا
जब
جَلَّىٰهَا
वो ज़ाहिर करे उसे
और दिन, जबकि वह उसे प्रकट कर दे,
तफ़्सीर:
और दिन की क़सम खाई है, जब वह अपने प्रकाश से धरती के ऊपर मौजूद सारी चीज़ों को प्रकट (ज़ाहिर) कर दे।
आयत 4
وَٱلَّيْلِ إِذَا يَغْشَىٰهَا
وَٱلَّيْلِ
और रात की
إِذَا
जब
يَغْشَىٰهَا
वो ढाँप ले उसे
और रात, जबकि वह उसको ढाँक ले
तफ़्सीर:
और रात की क़सम खाई है, जब वह धरती के चेहरे को ढक ले और अंधेरी हो जाए।
आयत 5
وَٱلسَّمَآءِ وَمَا بَنَىٰهَا
وَٱلسَّمَآءِ
और आसमान की
وَمَا
और उसकी
بَنَىٰهَا
जिसने बनाया उसे
और आकाश और जैसा कुछ उसे उठाया,
तफ़्सीर:
और आकाश की क़सम खाई है तथा उसके मज़बूत निर्माण की क़सम खाई है।
आयत 6
وَٱلْأَرْضِ وَمَا طَحَىٰهَا
وَٱلْأَرْضِ
और ज़मीन की
وَمَا
और उसकी
طَحَىٰهَا
जिसने बिछाया उसे
और धरती और जैसा कुछ उसे बिछाया
तफ़्सीर:
और धरती की क़सम खाई है तथा उसके बिछाने व हमवार करने की क़सम खाई, ताकि लोग उसके ऊपर रह सकें।
आयत 7
وَنَفْسٍۢ وَمَا سَوَّىٰهَا
وَنَفْسٍۢ
और नफ़्स की
وَمَا
और उसकी
سَوَّىٰهَا
जिसने दुरुस्त किया उसे
और आत्मा और जैसा कुछ उसे सँवारा
तफ़्सीर:
और हर आत्मा की क़सम खाई है तथा अल्लाह के उसे ठीक-ठाक बनाने की क़सम खाई है।
आयत 8
فَأَلْهَمَهَا فُجُورَهَا وَتَقْوَىٰهَا
فَأَلْهَمَهَا
पस उसने इलहाम की उसे
فُجُورَهَا
बदी उसकी
وَتَقْوَىٰهَا
और तक़्वा उसका
फिर उसके दिल में डाली उसकी बुराई और उसकी परहेज़गारी
तफ़्सीर:
फिर उसे किसी शिक्षा के बिना ही यह समझा दिया कि क्या बुरा है ताकि उससे बचे और क्या अच्छा है ताकि उसे करे।
आयत 9
قَدْ أَفْلَحَ مَن زَكَّىٰهَا
قَدْ
यक़ीनन
أَفْلَحَ
वो फ़लाह पा गया
مَن
जिसने
زَكَّىٰهَا
पाक किया उसे
सफल हो गया जिसने उसे विकसित किया
तफ़्सीर:
वह व्यक्ति अपने उद्देश्य में सफल हो गया, जिसने स्वयं को गुणों से सुसज्जित कर लिया और अपने आपको दोषों (बुराइयों) से रहित कर लिया।
आयत 10
وَقَدْ خَابَ مَن دَسَّىٰهَا
وَقَدْ
और यक़ीनन
خَابَ
वो नाकाम हुआ
مَن
जिसने
دَسَّىٰهَا
दबा दिया उसे
और असफल हुआ जिसने उसे दबा दिया
तफ़्सीर:
और वह व्यक्ति क्षति में पड़ गया, जिसने अपने आपको अवज्ञाओं और पापों में छिपाकर दबा दिया।
आज की ज़िंदगी में सबक़
नफ्स की पाकीज़गी और गंदगी के फर्क का ज़िक्र है। यह हमें सिखाता है कि जो अपने नफ्स को बुराइयों से पाक रखे वह कामयाब है, यह हर इंसान के लिए एक साफ मेयार है।
आयत 11
كَذَّبَتْ ثَمُودُ بِطَغْوَىٰهَآ
كَذَّبَتْ
झुठलाया
ثَمُودُ
समूद ने
بِطَغْوَىٰهَآ
बवजह अपनी सरकशी के
समूद ने अपनी सरकशी से झुठलाया,
तफ़्सीर:
समूद की जाति ने अपने नबी सालेह अलैहिस्सलाम को झुठलाया, क्योंकि वह अवज्ञा और पाप करने में सीमा पार कर चुकी थी।
आयत 12
إِذِ ٱنۢبَعَثَ أَشْقَىٰهَا
إِذِ
जब
ٱنۢبَعَثَ
उठा
أَشْقَىٰهَا
सबसे बड़ा बदबख़्त उसका
जब उनमें का सबसे बड़ा दुर्भाग्यशाली उठ खड़ा हुआ,
तफ़्सीर:
जब उसका सबसे दुष्ट और अभागा व्यक्ति, अपने समुदाय के कहने पर उठ खड़ा हुआ।
आयत 13
فَقَالَ لَهُمْ رَسُولُ ٱللَّهِ نَاقَةَ ٱللَّهِ وَسُقْيَـٰهَا
فَقَالَ
तो कहा
لَهُمْ
उन्हें
رَسُولُ
(the) Messenger
ٱللَّهِ
अल्लाह के रसूल ने
نَاقَةَ
ऊँटनी है
ٱللَّهِ
अल्लाह की
وَسُقْيَـٰهَا
और पानी पिलाना है उसे
तो अल्लाह के रसूल ने उनसे कहा, "सावधान, अल्लाह की ऊँटनी और उसके पिलाने (की बारी) से।"
तफ़्सीर:
तो अल्लाह के रसूल सालेह अलैहिस्सलाम ने उनसे कहा : अल्लाह की ऊँटनी को छोड़ दो और उसे उसकी बारी के दिन में पानी पीने दो। उसको कोई कष्ट न पहुँचाओ।
आयत 14
فَكَذَّبُوهُ فَعَقَرُوهَا فَدَمْدَمَ عَلَيْهِمْ رَبُّهُم بِذَنۢبِهِمْ فَسَوَّىٰهَا
فَكَذَّبُوهُ
तो उन्होंने झुठला दिया उसे
فَعَقَرُوهَا
फिर कूँचें काट दीं उसकी
فَدَمْدَمَ
तो हलाकत डाली
عَلَيْهِمْ
उन पर
رَبُّهُم
उनके रब ने
بِذَنۢبِهِمْ
बवजह उनके गुनाहों के
فَسَوَّىٰهَا
फिर उसने बराबर कर दिया उसे
किन्तु उन्होंने उसे झुठलाया और उस ऊँटनी की कूचें काट डाली। अन्ततः उनके रब ने उनके गुनाह के कारण उनपर तबाही डाल दी और उन्हें बराबर कर दिया
तफ़्सीर:
चुनाँचे उन्होंने ऊँटनी के मामले में अपने रसूल को झुठला दिया और उनके सबसे दुष्ट आदमी ने ऊँटनी को मार डाला, जिसपर उन सब की सहमति थी। इस तरह वे सभी इस गुनाह में भागीदार थे। तो अल्लाह ने उनपर अपना अज़ाब भेज दिया और उन्हें उनके गुनाहों के कारण एक तेज़ आवाज़ के ज़रिए विनष्ट कर दिया और उस सज़ा में उन सब को बराबर रखा, जिसके साथ उन्हें नष्ट किया।
आयत 15
وَلَا يَخَافُ عُقْبَـٰهَا
وَلَا
और नहीं
يَخَافُ
वो डरता
عُقْبَـٰهَا
उसके अंजाम से
और उसे उसके परिणाम का कोई भय नहीं
तफ़्सीर:
अल्लाह ने उन्हें उस यातना से पीड़ित किया, जिसने उन्हें नष्ट कर दिया, जबकि उस महिमावान को उसके परिणामों से कोई डर नहीं।
आज की ज़िंदगी में सबक़
समूद कौम की तबाही के ज़िक्र के साथ सूरह का इख्तिताम होता है। यह सबक हमें सिखाता है कि अल्लाह की दी निशानी (ऊंटनी) की बेहुरमती करना समूद कौम की तबाही का सबब बनी, अमानत की हिफाज़त ज़रूरी है।
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