नाम का मतलब
रात (कसम खाई गई रात के ज़िक्र से)
पृष्ठभूमि
सूरह अल-लैल में देने वाले और कंजूसी करने वाले इंसान के दो मुख्तलिफ रास्तों का ज़िक्र है।
फ़ज़ीलत / सार
यह सूरह सखावत (दिल खोलकर देना) और कंजूसी के अंजाम को बहुत साफ मिसाल से समझाती है, जो माली मामलों में एक बड़ी नसीहत है।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
आयत 1
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ وَٱلَّيْلِ إِذَا يَغْشَىٰ
وَٱلَّيْلِ
क़सम है रात की
إِذَا
जब
يَغْشَىٰ
वो छा जाए
साक्षी है रात जबकि वह छा जाए,
तफ़्सीर:
अल्लाह ने रात की क़सम खाई है, जब वह आसमान और ज़मीन के बीच को अपने अंधेरे के साथ ढाँप ले।
आयत 2
وَٱلنَّهَارِ إِذَا تَجَلَّىٰ
وَٱلنَّهَارِ
और दिन की
إِذَا
जब
تَجَلَّىٰ
वो रौशन हो
और दिन जबकि वह प्रकाशमान हो,
तफ़्सीर:
और दिन की क़सम खाई है, जब वह प्रकट होकर प्रकाशमान हो जाए।
आयत 3
وَمَا خَلَقَ ٱلذَّكَرَ وَٱلْأُنثَىٰٓ
وَمَا
और उसकी
خَلَقَ
जिसने पैदा किया
ٱلذَّكَرَ
नर
وَٱلْأُنثَىٰٓ
और मादा को
और नर और मादा का पैदा करना,
तफ़्सीर:
तथा उसने अपने नर और मादा को पैदा करने की क़सम खाई है।
आयत 4
إِنَّ سَعْيَكُمْ لَشَتَّىٰ
إِنَّ
बेशक
سَعْيَكُمْ
कोशिश तुम्हारी
لَشَتَّىٰ
अलबत्ता मुख़्तलिफ़ तरह की है
कि तुम्हारा प्रयास भिन्न-भिन्न है
तफ़्सीर:
(ऐ लोगो) निश्चय तुम्हारे काम अलग-अलग प्रकार के हैं। कुछ अच्छे कर्म हैं, जो जन्नत में प्रवेश करने का कारण हैं, और कुछ बुरे कर्म हैं, जो नरक में प्रवेश करने का कारण हैं।
आयत 5
فَأَمَّا مَنْ أَعْطَىٰ وَٱتَّقَىٰ
فَأَمَّا
तो रहा वो
مَنْ
जिसने
أَعْطَىٰ
दिया
وَٱتَّقَىٰ
और उसने तक़्वा किया
तो जिस किसी ने दिया और डर रखा,
तफ़्सीर:
फिर जिसने उस चीज़ को दिया, जिसे देने के लिए वह बाध्य है; जैसे ज़कात, गुज़ारा-भत्ता और कफ़्फ़ारा आदि, और उससे बचा, जिससे अल्लाह ने मना किया है।
आयत 6
وَصَدَّقَ بِٱلْحُسْنَىٰ
وَصَدَّقَ
और तस्दीक़ की
بِٱلْحُسْنَىٰ
भलाई की
और अच्छी चीज़ की पुष्टि की,
तफ़्सीर:
और अल्लाह ने बदले का जो वादा किया है, उसे सच्चा माना।
आयत 7
فَسَنُيَسِّرُهُۥ لِلْيُسْرَىٰ
فَسَنُيَسِّرُهُۥ
पस अनक़रीब हम आसानी देंगे उसे
لِلْيُسْرَىٰ
आसान(रास्ते)की
हम उस सहज ढंग से उस चीज का पात्र बना देंगे, जो सहज और मृदुल (सुख-साध्य) है
तफ़्सीर:
हम उसके लिए नेक काम करना और अल्लाह के मार्ग में ख़र्च करना आसान बना देंगे।
आयत 8
وَأَمَّا مَنۢ بَخِلَ وَٱسْتَغْنَىٰ
وَأَمَّا
और रहा वो
مَنۢ
जिसने
بَخِلَ
बुख़्ल किया
وَٱسْتَغْنَىٰ
और उसने बेपरवाई बरती
रहा वह व्यक्ति जिसने कंजूसी की और बेपरवाही बरती,
तफ़्सीर:
रहा वह व्यक्ति जिसने अपने माल में कंजूसी की और उसे उस चीज़ में खर्च नहीं किया, जिसमें उसका ख़र्च करना उसके लिए अनिवार्य था, तथा अपने माल के साथ अल्लाह से बेपरवाह हो गया। इसलिए अल्लाह से उसके अनुग्रह में से कुछ नहीं मांगा।
आयत 9
وَكَذَّبَ بِٱلْحُسْنَىٰ
وَكَذَّبَ
और उसने झुठलाया
بِٱلْحُسْنَىٰ
नेकी को
और अच्छी चीज़ को झुठला दिया,
तफ़्सीर:
और अल्लाह ने उससे प्रतिकार का और अपने रास्ते में धन खर्च करने पर सवाब का जो वादा किया है, उसे झुठलाया।
आयत 10
فَسَنُيَسِّرُهُۥ لِلْعُسْرَىٰ
فَسَنُيَسِّرُهُۥ
पस अनक़रीब हम आसानी देंगे उसे
لِلْعُسْرَىٰ
मुश्किल(रास्ते) की
हम उसे सहज ढंग से उस चीज़ का पात्र बना देंगे, जो कठिन चीज़ (कष्ट-साध्य) है
तफ़्सीर:
हम उसके लिए बुराई करना आसान बना देंगे और अच्छा काम करना मुश्किल कर देंगे।
आज की ज़िंदगी में सबक़
देने और कंजूसी करने वाले के दो रास्तों का ज़िक्र है। यह हमें सिखाता है कि सखावत (दिल खोलकर देना) और तक़वा आसान राह की तरफ ले जाते हैं।
आयत 11
وَمَا يُغْنِى عَنْهُ مَالُهُۥٓ إِذَا تَرَدَّىٰٓ
وَمَا
और नहीं
يُغْنِى
काम आएगा
عَنْهُ
उसे
مَالُهُۥٓ
माल उसका
إِذَا
जब
تَرَدَّىٰٓ
वो (जहन्नम में) गिरेगा
और उसका माल उसके कुछ काम न आएगा, जब वह (सिर के बल) खड्ड में गिरेगा
तफ़्सीर:
जब वह विनष्ट होकर जहन्नम में प्रवेश करेगा, तो उसका वह धन जिसे खर्च करने में उसने कंजूसी की थी, उसके कुछ काम नहीं आएगा।
आयत 12
إِنَّ عَلَيْنَا لَلْهُدَىٰ
إِنَّ
बेशक
عَلَيْنَا
हमारे ही ज़िम्मे है
لَلْهُدَىٰ
यक़ीनन हिदायत देना
निस्संदेह हमारे ज़िम्मे है मार्ग दिखाना
तफ़्सीर:
निःसंदेह असत्य से सत्य का मार्ग स्पष्ट करना हमारे ही ज़िम्मे है।
आयत 13
وَإِنَّ لَنَا لَلْـَٔاخِرَةَ وَٱلْأُولَىٰ
وَإِنَّ
और बेशक
لَنَا
हमारे ही इख़्तियार में है
لَلْـَٔاخِرَةَ
यक़ीनन आख़िरत
وَٱلْأُولَىٰ
और पहली (दुनिया)
और वास्तव में हमारे अधिकार में है आख़िरत और दुनिया भी
तफ़्सीर:
निःसंदेह हमारे ही अधिकार में आख़िरत का जीवन और हमारे ही अधिकार में सांसारिक जीवन है। हम जो कुछ भी चाहते हैं, उनमें करते हैं और यह अधिकार हमारे अलावा किसी और को नहीं है।
आयत 14
فَأَنذَرْتُكُمْ نَارًۭا تَلَظَّىٰ
فَأَنذَرْتُكُمْ
तो डरा दिया मैंने तुम्हें
نَارًۭا
एक आग से
تَلَظَّىٰ
जो भड़कती है
अतः मैंने तुम्हें दहकती आग से सावधान कर दिया
तफ़्सीर:
तो (ऐ लोगो) यदि तुम अल्लाह की अवज्ञा करते हो, तो मैंने तुम्हें भड़कती हुई आग से सावधान कर दिया है।
आयत 15
لَا يَصْلَىٰهَآ إِلَّا ٱلْأَشْقَى
لَا
Not
يَصْلَىٰهَآ
ना जलेगा उसमें
إِلَّا
मगर
ٱلْأَشْقَى
निहायत बदबख़्त
इसमें बस वही पड़ेगा जो बड़ा ही अभागा होगा,
तफ़्सीर:
इस आग की गर्मी को केवल वही व्यक्ति झेलेगा, जो सबसे बड़ा अभागा है और वह काफ़िर है।
आयत 16
ٱلَّذِى كَذَّبَ وَتَوَلَّىٰ
ٱلَّذِى
वो जिसने
كَذَّبَ
झुठलाया
وَتَوَلَّىٰ
और उसने मुँह मोड़ लिया
जिसने झुठलाया और मुँह फेरा
तफ़्सीर:
जिसने रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के लाए हुए संदेश को झुठला दिया और अल्लाह के आदेश का पालन करने से मुँह फेरा।
आयत 17
وَسَيُجَنَّبُهَا ٱلْأَتْقَى
وَسَيُجَنَّبُهَا
और अनक़रीब बचा लिया जाऐगा उससे
ٱلْأَتْقَى
निहायत परहेज़गार
और उससे बच जाएगा वह अत्यन्त परहेज़गार व्यक्ति,
तफ़्सीर:
और उससे सबसे बड़े परहेज़गार व्यक्ति अर्थात् अबू बक्र सिद्दीक़ रज़ियल्लाहु अन्हु को बचा लिया जाएगा।
आयत 18
ٱلَّذِى يُؤْتِى مَالَهُۥ يَتَزَكَّىٰ
ٱلَّذِى
वो जो
يُؤْتِى
देता है
مَالَهُۥ
माल अपना
يَتَزَكَّىٰ
कि वो पाक हो
जो अपना माल देकर अपने आपको निखारता है
तफ़्सीर:
जो गुनाहों से पवित्र होने के लिए अपना धन नेकी के रास्तों में ख़र्च करता है।
आयत 19
وَمَا لِأَحَدٍ عِندَهُۥ مِن نِّعْمَةٍۢ تُجْزَىٰٓ
وَمَا
और नहीं
لِأَحَدٍ
किसी एक के लिए
عِندَهُۥ
उसके पास
مِن
any
نِّعْمَةٍۢ
कोई नेअमत(एहसान)
تُجْزَىٰٓ
बदला दिया जाएगा (जिसका)
और हाल यह है कि किसी का उसपर उपकार नहीं कि उसका बदला दिया जा रहा हो,
तफ़्सीर:
वह अपना माल इसलिए नहीं खर्च करता कि उसपर किसी का उपकार है, जिसे वह चुकाना चाहता है।
आयत 20
إِلَّا ٱبْتِغَآءَ وَجْهِ رَبِّهِ ٱلْأَعْلَىٰ
إِلَّا
सिवाए
ٱبْتِغَآءَ
चाहने के लिए
وَجْهِ
चेहरा
رَبِّهِ
अपने रब का
ٱلْأَعْلَىٰ
जो सबसे बुलन्द है
बल्कि इससे अभीष्ट केवल उसके अपने उच्च रब के मुख (प्रसन्नता) की चाह है
तफ़्सीर:
वह जो माल ख़र्च करता है, उससे वह केवल अपने रब का चेहरा चाहता है, जो अपनी मखलूक़ पर सर्वोच्च है।
आज की ज़िंदगी में सबक़
कंजूसी और झुठलाने वाले के अंजाम का ज़िक्र है। यह सबक हमें सिखाता है कि कंजूसी और झूठी बेनियाज़ी का रवैया इंसान को मुश्किल राह पर डाल देता है।
आयत 21
وَلَسَوْفَ يَرْضَىٰ
وَلَسَوْفَ
और यक़ीनन अनक़रीब
يَرْضَىٰ
वो राज़ी हो जाएगा
और वह शीघ्र ही राज़ी हो जाएगा
तफ़्सीर:
और निश्चय वह उस उदार बदले से संतुष्ट हो जाएगा, जो अल्लाह उसे प्रदान करेगा।
आज की ज़िंदगी में सबक़
सबसे बड़े परहेज़गार के ज़िक्र (जो सिर्फ अल्लाह की रज़ा के लिए देता है) के साथ सूरह का इख्तिताम होता है। यह हमें सिखाता है कि जो सिर्फ अल्लाह की रज़ा के लिए, बिना एहसान जताए देता है, वही असली मुत्तकी है, और आखिरकार वह राज़ी हो जाएगा।
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