सूरह अत-तीन سورة التين
मक्की 8 आयतें
नाम का मतलब
अंजीर (कसम खाए गए फल अंजीर के ज़िक्र से)
पृष्ठभूमि
सूरह अत-तीन में इंसान की बेहतरीन शक्ल में पैदाइश और उसके बाद पस्ती (नीचे गिरने) का ज़िक्र है, सिवाय नेक अमल करने वालों के।
फ़ज़ीलत / सार
इस सूरह में इंसान को अशरफुल-मखलूकात (सबसे बेहतरीन तख्लीक) बताया गया है, जो उसे अपनी अज़मत और ज़िम्मेदारी का एहसास दिलाता है।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
आयत 1
بِّسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ وَٱلتِّينِ وَٱلزَّيْتُونِ
وَٱلتِّينِ
क़सम है इनजीर की
وَٱلزَّيْتُونِ
और ज़ैतून की
साक्षी है तीन और ज़ैतून
तफ़्सीर:
अल्लाह ने अंजीर की एवं ज़ैतून की तथा फिलिस्तीन की भूमि में उनके पैदा होने की जगह की क़सम खाई है, जहाँ ईसा अलैहिस्सलाम भेजे गए थे।
आयत 2
وَطُورِ سِينِينَ
وَطُورِ
And (the) Mount
سِينِينَ
और तूरे सीना की
और तूर सीनीन,
तफ़्सीर:
और सीना (सीनाई) पर्वत की क़सम खाई है, जिसके पास अल्लाह ने अपने नबी मूसा अलैहिस्सलाम से बात की थी।
आयत 3
وَهَـٰذَا ٱلْبَلَدِ ٱلْأَمِينِ
وَهَـٰذَا
और इस
ٱلْبَلَدِ
शहर की
ٱلْأَمِينِ
अमन वाले की
और यह शान्तिपूर्ण भूमि (मक्का)
तफ़्सीर:
तथा उसने बलद-ए-हराम (पवित्र नग) मक्का की क़सम खाई है, जिसमें जो कोई भी प्रवेश करेगा वह सुरक्षित रहेगा, जिसमें मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम नबी बनाकर भेजे गए थे।
आयत 4
لَقَدْ خَلَقْنَا ٱلْإِنسَـٰنَ فِىٓ أَحْسَنِ تَقْوِيمٍۢ
لَقَدْ
अलबत्ता तहक़ीक़
خَلَقْنَا
पैदा किया हमने
ٱلْإِنسَـٰنَ
इन्सान को
فِىٓ
in
أَحْسَنِ
(the) best
تَقْوِيمٍۢ
बेहतरीन साख़्त में
निस्संदेह हमने मनुष्य को सर्वोत्तम संरचना के साथ पैदा किया
तफ़्सीर:
हमने इनसान को सबसे अनुकूल संरचना और सबसे अच्छे रूप में पैदा किया है।
आयत 5
ثُمَّ رَدَدْنَـٰهُ أَسْفَلَ سَـٰفِلِينَ
ثُمَّ
फिर
رَدَدْنَـٰهُ
लौटा दिया हमने उसे
أَسْفَلَ
सबसे ज़्यादा निचला
سَـٰفِلِينَ
निचलों से
फिर हमने उसे निकृष्टतम दशा की ओर लौटा दिया, जबकि वह स्वयं गिरनेवाला बना
तफ़्सीर:
पिर हमने उसे दुनिया में बुढ़ापे और सठियाव की ओर लौटा दिया, इसलिए वह अपने शरीर से लाभ नहीं उठा सकता, जैसे कि अगर वह अपना स्वभाव बिगाड़ ले और जहन्नम में चला जाए, तो वह अपने शरीर से लाभ नहीं उठा सकेगा।
आयत 6
إِلَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ فَلَهُمْ أَجْرٌ غَيْرُ مَمْنُونٍۢ
إِلَّا
सिवाए
ٱلَّذِينَ
उनके जो
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
وَعَمِلُوا۟
और उन्होंने असम किए
ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ
नेक
فَلَهُمْ
तो उनके लिए
أَجْرٌ
अजर है
غَيْرُ
ना
مَمْنُونٍۢ
ख़त्म होने वाला
सिवाय उन लोगों के जो ईमान लाए और जिन्होंने अच्छे कर्म किए, तो उनके लिए कभी न समाप्त होनेवाला बदला है
तफ़्सीर:
परंतु जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और अच्छे कार्य किए, वे यद्यपि बूढ़े हो जाएँ, उनके लिए हमेशा रहने वाला बदला है, जो कभी खत्म नहीं होगा और वह जन्नत है। क्योंकि उन्होंने अपने स्वभाव को शुद्ध किया।
आयत 7
فَمَا يُكَذِّبُكَ بَعْدُ بِٱلدِّينِ
فَمَا
तो क्या(आमादा करता है)
يُكَذِّبُكَ
झुठलाने पर तुझे
بَعْدُ
बाद उसके
بِٱلدِّينِ
बदले (के दिन) को
अब इसके बाद क्या है, जो बदले के विषय में तुम्हें झुठलाए?
तफ़्सीर:
तो (ऐ इनसान!) तुझे कौन-सी चीज़ बदले के दिन को झुठलाने पर उकसाती है, जबकि तूने उसकी शक्ति एवं क्षमता की बहुत-सी निशानियाँ देखी हैं?
आयत 8
أَلَيْسَ ٱللَّهُ بِأَحْكَمِ ٱلْحَـٰكِمِينَ
أَلَيْسَ
क्या नहीं है
ٱللَّهُ
अल्लाह
بِأَحْكَمِ
बड़ा हाकिम
ٱلْحَـٰكِمِينَ
सब हाकिमों से
क्या अल्लाह सब हाकिमों से बड़ा हाकिम नहीं हैं?
तफ़्सीर:
क्या अल्लाह - क़ियामत के दिन को बदले का दिन बनाकर - सब हाकिमों से बड़ा और सबसे अधिक न्याय करनेवाला हाकिम नहीं है?! क्या यह उचित है कि अल्लाह अपने बंदों को उनके बीच फ़ैसला किए बिना व्यर्थ छोड़ दे, और अच्छा कार्य करने वाले को उसके अच्छे कार्य और बुरा कार्य करने वाले को उसकी बुराई का बदला न दे?!
आज की ज़िंदगी में सबक़
इंसान की बेहतरीन तख्लीक और नेक अमल न करने पर पस्ती की तरफ लौटने के ज़िक्र के साथ सूरह मुकम्मल होती है। यह हमें सिखाता है कि इंसान को सबसे बेहतरीन शक्ल में बनाया गया, मगर नेक अमल न करने पर वह पस्ती की तरफ लौट सकता है, इसलिए नेक अमल में लगे रहना चाहिए।
मेरा एक्शन प्लान

⚠️ कुछ गलत लगा?

अगर आपको इस पेज पर कोई ग़लती (तर्जुमा, तथ्य, या कुछ और) दिखी हो, तो हमें बताएं — हम जांच करके ठीक करेंगे।

0%