सूरह अल-क़द्र سورة القدر
मक्की 5 आयतें
नाम का मतलब
ताकत/इज़्ज़त वाली रात (जिस रात में कुरआन नाज़िल हुआ)
पृष्ठभूमि
सूरह अल-क़द्र में लैलतुल-क़द्र की फ़ज़ीलत का ज़िक्र है, जो हज़ार महीनों से बेहतर बताई गई है।
फ़ज़ीलत / सार
यह छोटी सी सूरह लैलतुल-क़द्र की अज़ीम फ़ज़ीलत बयान करती है, जिसमें इबादत करना हज़ार महीनों (करीब 83 साल) की इबादत से बेहतर है।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
आयत 1
بِّسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ إِنَّآ أَنزَلْنَـٰهُ فِى لَيْلَةِ ٱلْقَدْرِ
إِنَّآ
बेशक हम
أَنزَلْنَـٰهُ
नाज़िल किया हमने उसे
فِى
in
لَيْلَةِ
(the) Night
ٱلْقَدْرِ
लैलतुल क़दर में
हमने इसे क़द्र की रात में अवतरित किया
तफ़्सीर:
हमने क़ुरआन को एकबारगी दुनिया के आकाश (निचले आकाश) पर रमज़ान के महीने में क़द्र की रात में अवतरित किया, इसी तरह उसे नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर उतारने की शुरूआत भी इसी रात में की।
आयत 2
وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا لَيْلَةُ ٱلْقَدْرِ
وَمَآ
और क्या चीज़
أَدْرَىٰكَ
बताए आपको
مَا
क्या है
لَيْلَةُ
(the) Night
ٱلْقَدْرِ
लैलतुल क़दर
और तुम्हें क्या मालूम कि क़द्र की रात क्या है?
तफ़्सीर:
और (ऐ रसूल) क्या आप जानते हैं कि इस रात में क्या भलाई और बरकत है?!
आयत 3
لَيْلَةُ ٱلْقَدْرِ خَيْرٌۭ مِّنْ أَلْفِ شَهْرٍۢ
لَيْلَةُ
(The) Night
ٱلْقَدْرِ
लैलतुल क़दर
خَيْرٌۭ
बेहतर है
مِّنْ
than
أَلْفِ
a thousand
شَهْرٍۢ
हज़ार महीनों से
क़द्र की रात उत्तम है हज़ार महीनों से,
तफ़्सीर:
यह रात महान भलाई की रात है। क्योंकि यह रात उस व्यक्ति के लिए हज़ार महीने से बेहतर है, जो ईमान और नेकी प्राप्त करने के उद्देश्य से इसमें अल्लाह की इबादत करे।
आयत 4
تَنَزَّلُ ٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ وَٱلرُّوحُ فِيهَا بِإِذْنِ رَبِّهِم مِّن كُلِّ أَمْرٍۢ
تَنَزَّلُ
उतरते हैं
ٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ
फ़रिश्ते
وَٱلرُّوحُ
और रूह(जिब्रील)
فِيهَا
उसमें
بِإِذْنِ
by (the) permission
رَبِّهِم
अपने रब के इज़्न से
مِّن
for
كُلِّ
every
أَمْرٍۢ
हर काम के लिए
उसमें फ़रिश्तें और रूह हर महत्वपूर्ण मामलें में अपने रब की अनुमति से उतरते है
तफ़्सीर:
उस रात में फ़रिश्ते और जिबरील अलैहिस्सलाम अपने महिमावान् पालनहार की अनुमति से हर उस चीज़ के साथ उतरते हैं, जिसका आल्लाह उस वर्ष में फैसला किया होता है, चाहे उसका संबंध रोज़ी से हो, या मृत्यु, या जन्म या इनके अलावा किसी अन्य से हो, जिनका अल्लाह फैसला करता है।
आयत 5
سَلَـٰمٌ هِىَ حَتَّىٰ مَطْلَعِ ٱلْفَجْرِ
سَلَـٰمٌ
सलामती है
هِىَ
वो
حَتَّىٰ
यहाँ तक कि
مَطْلَعِ
तुलूअ हो जाए
ٱلْفَجْرِ
फ़जर
वह रात पूर्णतः शान्ति और सलामती है, उषाकाल के उदय होने तक
तफ़्सीर:
यह बरकत वाली रात उसके शुरू होने से लेकर फ़ज्र के उदय होने पर उसके अंत तक सर्वथा भलाई ही भलाई है।
आज की ज़िंदगी में सबक़
लैलतुल-क़द्र की फ़ज़ीलत के ज़िक्र के साथ सूरह मुकम्मल होती है। यह हमें सिखाता है कि लैलतुल-क़द्र में की गई इबादत हज़ार महीनों से बेहतर है, इसलिए इस रात को तलाश करके इबादत में गुज़ारना चाहिए।
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