नमाज़ के बाद आयतुल कुर्सी पढ़ना
नमाज़ की दुआएं
﴿اللَّهُ لاَ إِلَهَ إِلاَّ هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ لاَ تَأْخُذُهُ سِنَةٌ وَلاَ نَوْمٌ لَّهُ مَا فِي السَّمَوَاتِ وَمَا فِي الأَرْضِ مَن ذَا الَّذِي يَشْفَعُ عِنْدَهُ إِلاَّ بِإِذْنِهِ يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ وَلاَ يُحِيطُونَ بِشَيْءٍ مِّنْ عِلْمِهِ إِلاَّ بِمَا شَاءَ وَسِعَ كُرْسِيُّهُ السَّمَوَاتِ وَالأَرْضَ وَلاَ يَؤُودُهُ حِفْظُهُمَا وَهُوَ الْعَلِيُّ الْعَظِيمُ﴾ عَقِبَ كلِّ صَلاَةٍ.
उच्चारण:
अल्लाहु ला इलाहा इल्ला हुवल हय्युल क़य्यूम, ला तअखुज़ुहू सिनतुव् वला नौम, लहू मा फिस्समावाति वमा फिल अर्ज़, मन ज़ल्लज़ी यश्फ़अु इन्दहू इल्ला बिइज़्निही, यअलमु मा बैन ऐदीहिम व मा खल्फहुम, वला युहीतूना बिशैइम् मिन इल्मिही इल्ला बिमा शा, वसिआ कुर्सिय्युहुस्समावाति वल अर्ज़, वला यऊदुहू हिफ्ज़ुहुमा, व हुवल अलिय्युल अज़ीम।
हिंदी अर्थ:
हर नमाज़ के बाद आयतुल कुर्सी पढ़ना भी सुन्नत है। अल्लाह के सिवा कोई सच्चा माबूद नहीं, वह हमेशा ज़िंदा रहने वाला और सारी कायनात को संभालने वाला है। न उसे ऊँघ आती है, न नींद। आसमानों और ज़मीन में जो कुछ है, सब उसी का है। उसकी इजाज़त के बिना कोई उसके पास सिफारिश नहीं कर सकता। उसकी कुर्सी आसमानों और ज़मीन को घेरे हुए है, और इनकी हिफाज़त उसे थकाती नहीं। वह बहुत बुलंद और बहुत बड़ा है।
नमाज़ के बाद आयतुल कुर्सी पढ़ना

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