((عَنِ ابْنِ عُمَرَ رضي الله عنه قَاَلَ: كَانَ يُعَدُّ لِرَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فِي الْمَجْلِسِ الوَاحِدِ مِائَةُ مَرَّةٍ مِنْ قَبْلِ أَنْ يَقُومَ: ((رَبِّ اغْفِرْ لِي، وَتُبْ عَلَيَّ، إِنَّكَ أَنْتَ التَّوَّابُ الغَفُورُ)).
उच्चारण:
रब्बिग़्फ़िर ली, व तुब अ़लय्य, इन्नका अंतत्तव्वाबुल ग़फ़ूर।
हिंदी अर्थ:
ऐ मेरे रब! मुझे बख्श दे, और मेरी तौबा कबूल कर, बेशक तू ही बहुत तौबा कबूल करने वाला, बहुत बख्शने वाला है। (नबी ﷺ एक मजलिस में उठने से पहले यह 100 बार पढ़ते थे)
महफ़िल में बैठे-बैठे 100 बार पढ़ने की दुआ