كَانَ الرَّجُلُ إِذَا أَسْلَمَ عَلَّمَهُ النَّبيُّ صلى الله عليه وسلم الصَّلاَةَ ثُمَّ أَمَرَهُ أَنْ يَدْعُوَ بِهَؤُلاَءِ الْكَلِمَاتِ: ((اللَّهُمَّ اغْفِرِ لِي، وَارْحَمْنِي، وَاهْدِنِي، وَعَافِنِي وَارْزُقْنِي)).
उच्चारण:
अल्लाहुम्मग़्फ़िर ली, वर्हम्नी, वह्दिनी, व आफ़िनी, वर्ज़ुक़्नी।
हिंदी अर्थ:
तारिक़ अल-अश्जई رضی اللہ عنہ ने बताया: जब कोई शख्स इस्लाम कबूल करता, तो नबी ﷺ पहले उसे नमाज़ सिखाते, फिर उसे इन कलिमात से दुआ करने का हुक्म देते: "ऐ अल्लाह! मुझे बख्श दे, मुझ पर रहम कर, मुझे हिदायत दे, मुझे सेहत दे, और मुझे रिज़्क़ दे।"
नए मुस्लिम को नमाज़ के बाद दुआ की तालीम (हदीस)