गवाही वाली दुआ
सुबह-शाम की दुआएं
((اللَّهُمَّ إِنِّي أَصْبَحْتُ أُشْهِدُكَ، وَأُشْهِدُ حَمَلَةَ عَرْشِكَ، وَمَلاَئِكَتِكَ، وَجَمِيعَ خَلْقِكَ، أَنَّكَ أَنْتَ اللَّهُ لَا إِلَهَ إِلاَّ أَنْتَ وَحْدَكَ لاَ شَرِيكَ لَكَ، وَأَنَّ مُحَمَّداً عَبْدُكَ وَرَسُولُكَ)) (أربعَ مَرَّاتٍ).[ وإذا أمسى قال: اللَّهم إني أمسيت...]
उच्चारण:
अल्लाहुम्मा इन्नी अस्बहतु उश्हिदुक, व उश्हिदु हमलता अर्शिक, व मलाइकतक, व जमीअ ख़ल्किक, अन्नका अंतल्लाहु ला इलाहा इल्ला अंत वह्दका ला शरीक लक, व अन्ना मुहम्मदन अब्दुका व रसूलुक।
हिंदी अर्थ:
ऐ अल्लाह! मैंने सुबह की इस हाल में कि मैं तुझे गवाह बनाता हूं, और तेरे अर्श उठाने वालों को, तेरे फरिश्तों को और तेरी सारी मखलूक को गवाह बनाता हूं कि तू ही अल्लाह है, तेरे सिवा कोई माबूद नहीं, तू अकेला है, तेरा कोई शरीक नहीं, और यह कि मुहम्मद ﷺ तेरे बंदे और रसूल हैं। (4 बार सुबह-शाम पढ़ें, शाम को "अम्सैतु" कहें)
गवाही की दुआ (4 बार)

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