इस्लाम से पहले अरब प्रायद्वीप चारों तरफ रेगिस्तान से घिरा एक विशाल भूभाग था, जो एशिया, अफ्रीका और यूरोप के बीच व्यापार का पुल बना। यहां की जातियां तीन तरह की मानी जाती हैं — पुरातन विलुप्त क़बीले, यमन मूल के क़हतानी अरब और नबी इस्माईल अलैहिस्सलाम की नस्ल से चले मुस्तारबा अरब। इन्हीं मुस्तारबा अरबों की नस्ल से आगे चलकर क़ुरैश क़बीला और नबी सल्ल० का ख़ानदान निकला।
पूरी कहानी:
अरब प्रायद्वीप लाल सागर, फ़ारस की खाड़ी, अरब सागर और सीरिया के बीच फैला एक विशाल, बड़े पैमाने पर रेगिस्तानी भूभाग था, जिसका क्षेत्रफल लगभग दस से तेरह लाख वर्ग मील अनुमानित किया जाता है। इसे चारों ओर से घेरे मरुस्थल ने इसे बाहरी आक्रमणों से काफ़ी हद तक सुरक्षित रखा, जबकि इसकी अवस्थिति इसे एशिया, अफ्रीका और यूरोप के बीच व्यापार, संस्कृति व धर्म के आदान-प्रदान की एक अहम कड़ी बना देती थी। इतिहासकार यहां बसी जातियों को तीन वर्गों में बांटते हैं। पहला वर्ग अरब बाइदा यानी वे पुरानी जातियां (जैसे आद और समूद) जो पूरी तरह विलुप्त हो चुकीं और जिनके बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं। दूसरा वर्ग अरब आरिबा यानी क़हतानी अरब, जिनका मूल स्थान यमन था और जिनमें हिमयर तथा क़हलान जैसे बड़े क़बीले शामिल थे; समय के साथ व्यापारिक पतन और आंतरिक संघर्षों के चलते इनकी कई शाखाएं (जैसे औस व ख़ज़रज, जो आगे चलकर मदीना में बसे) यमन छोड़कर अरब के भिन्न इलाक़ों में फैल गईं। तीसरा वर्ग अरब मुस्तारबा यानी अदनानी अरब, जो नबी इब्राहीम अलैहिस्सलाम के पुत्र इस्माईल अलैहिस्सलाम की नस्ल से चले। इब्राहीम अलैहिस्सलाम अपनी पत्नी हाजरा और शिशु इस्माईल को मक्का की निर्जन घाटी में छोड़ गए थे, जहां अल्लाह की मेहरबानी से ज़मज़म का पानी फूट पड़ा और यमन से आया क़बीला जुरहुम वहां बस गया। इस्माईल अलैहिस्सलाम जुरहुम में पले-बढ़े, वहीं विवाह किया और उनकी नस्ल आगे बढ़ी — अदनान, फिर माद, फिर नज़ार तक, जिनके चार बेटों में से मुज़र की नस्ल से इलयास और आगे चलकर मुदरका, ख़ुज़ैमा, किनाना और अंततः फ़िह्र बिन मालिक हुए, जिनसे क़ुरैश क़बीला बना। क़ुरैश आगे कई शाखाओं में बंटा, जिनमें क़ुसई बिन किलाब की संतान अब्द मुनाफ़ के बेटे हाशिम की नस्ल से अल्लाह ने नबी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को चुना।