وَقَالَ صلى الله عليه وسلم: ((مَنْ قَالَ لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ وَحْدَهُ لاَ شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ، وَلَهُ الْحَمْدُ، وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ عَشْرَ مِرَارٍ، كَانَ كَمَنْ أَعْتَقَ أَرْبَعَةَ أَنْفُسٍ مِنْ وَلَدِ إِسْمَاعِيلَ)).
उच्चारण:
ला इलाहा इल्लल्लाहु वह्दहू ला शरीक लह, लहुल मुल्कु व लहुल हम्द, व हुवा अला कुल्लि शैइन क़दीर।
हिंदी अर्थ:
आपने यह भी फ़रमाया: जो 10 बार "अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं, बादशाहत और तारीफ़ उसी की है, और वह हर चीज़ पर कादिर है" कहे, वह इस्माईल अलैहिस्सलाम की औलाद में से चार गुलाम आज़ाद करने जैसा सवाब पाता है, और उस दिन शाम तक शैतान से महफूज़ रहता है।
ला इलाहा इल्लल्लाह (10 बार, 4 गुलाम आज़ाद करने जितना सवाब)